नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। भारत में सड़क सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ट्रैफिक नियमों को सख्त कर दिया है। संशोधित मोटर व्हीकल नियम 2026 के तहत अब अगर कोई ड्राइवर एक ही वर्ष में पांच या उससे अधिक बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है। यह नया नियम 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में लागू हो चुका है।
सरकार का मानना है कि बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवर सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनते हैं। ऐसे में इस सख्ती का मकसद ट्रैफिक अनुशासन बढ़ाना और हादसों की संख्या को कम करना है।
क्या कहता है नया नियम
नए नियम के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ एक वर्ष की अवधि में मोटर व्हीकल एक्ट के पांच या उससे अधिक उल्लंघन दर्ज हो जाते हैं, तो उसे ड्राइविंग लाइसेंस रखने के लिए अयोग्य माना जा सकता है। हालांकि, लाइसेंस सस्पेंड करने से पहले ड्राइवर को अपनी बात रखने का पूरा अधिकार दिया जाएगा।
नियमों के तहत RTO या DTO सीधे लाइसेंस सस्पेंड नहीं करेगा, बल्कि पहले संबंधित ड्राइवर को नोटिस भेजकर उसकी सुनवाई की जाएगी। सुनवाई के बाद ही लाइसेंस सस्पेंड करने का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस नियम में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पिछले वर्षों के ट्रैफिक उल्लंघनों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। केवल उसी कैलेंडर वर्ष में दर्ज मामलों की ही गिनती होगी।
किन ट्रैफिक उल्लंघनों पर होगी गिनती
सरकार की ओर से फिलहाल 24 ट्रैफिक अपराधों को नोटिफाइड किया गया है। इनमें से किसी भी पांच उल्लंघन यदि एक वर्ष के भीतर दर्ज हो जाते हैं, तो ड्राइवर पर लाइसेंस सस्पेंशन की कार्रवाई हो सकती है।
इनमें केवल गंभीर अपराध ही नहीं, बल्कि छोटे-छोटे नियम तोड़ने के मामले भी शामिल हैं। उदाहरण के तौर पर—
• हेलमेट न पहनना
• सीट बेल्ट न लगाना
• ट्रैफिक सिग्नल जंप करना
• ओवरस्पीडिंग
• गलत लेन में वाहन चलाना
इसका मतलब यह है कि बार-बार छोटे नियम तोड़ने पर भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है।
e-Challan से भी होगी कार्रवाई
पहले जहां फिजिकल चालान के आधार पर ऐसी कार्रवाई की जाती थी, वहीं अब e-challan के आधार पर भी ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड किया जा सकता है। डिजिटल रिकॉर्ड की वजह से अब ट्रैफिक उल्लंघनों को ट्रैक करना आसान हो गया है।
सरकार का कहना है कि ई-चालान सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ी है और इससे नियम तोड़ने वालों पर प्रभावी कार्रवाई संभव हो पाई है।
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लाइसेंस सस्पेंड करने का अधिकार किसके पास
नए नियमों के तहत ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने का अधिकार क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) या जिला परिवहन कार्यालय (DTO) के पास होगा। लाइसेंस कितने समय के लिए सस्पेंड किया जाएगा, यह निर्णय भी वही अधिकारी करेंगे।
लाइसेंस सस्पेंड होने की अवधि उल्लंघनों की गंभीरता और ड्राइवर के रिकॉर्ड के आधार पर तय की जाएगी।
सड़क सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में कदम
सरकार का मानना है कि ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन ही सड़क हादसों को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका है। बार-बार नियम तोड़ने वालों पर कठोर कार्रवाई से न केवल अनुशासन बढ़ेगा, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह नियम उन ड्राइवरों के लिए चेतावनी है जो बार-बार ट्रैफिक नियमों को हल्के में लेते हैं। इससे लोगों में नियमों के प्रति जिम्मेदारी बढ़ेगी।
ड्राइवरों के लिए जरूरी सलाह
ड्राइवरों को चाहिए कि वे ट्रैफिक नियमों का नियमित रूप से पालन करें और ई-चालान की स्थिति समय-समय पर चेक करते रहें। छोटे नियमों की अनदेखी भी अब भारी पड़ सकती है।
सरकार की यह पहल सड़क सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जिसका सीधा असर ट्रैफिक अनुशासन और दुर्घटनाओं की संख्या पर पड़ने की उम्मीद है।
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