राजनीति विज्ञान के ऐसे विषयों पर शोध करें जिससे देश को दिशा प्रदान की जा सके: प्रो. पूनम टंडन

देश की गति राजनीति से तय होती है: कुलपति

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित सप्त दिवसीय वैल्यू एडेड कोर्स का समापन सत्र कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के राजनीतिक विज्ञान विभाग के प्रो. रिपुसुदन सिंह तथा विशिष्ठ अतिथि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र के प्रो. शांतेश कुमार सिंह रहे।
सत्र के अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि आम चुनाव 2024 के नतीजों के बाद राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है। राजनीति विज्ञान सबसे महत्वपूर्ण विषय है। देश की गति राजनीति से तय होती है। राजनीति विज्ञान के क्षेत्र में शोध का समाज पर राजनीतिक व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। आप सब ऐसे विषयों पर शोध करें जिससे देश को एक दिशा प्रदान की जा सके।
कुलपति ने कहा कि राजनीति विज्ञान विभाग की एक स्वर्णिम परंपरा रही है। उसे आगे बढ़ाने के लिए सभी कार्य करें। उन्होंने सात दिवसी कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए विभाग की प्रशंसा की।
विकसित भारत चमत्कार से, एक मसीहा से नही बल्कि सभी के सहयोग से ही बन सकता है: प्रो. रिपुसुदन सिंह
मुख्य अतिथि प्रो. रिपुसुदन सिंह ने कहा की राजनीति से ही समस्याओं का समाधान है। राजनीति से ही युद्ध और शांति है। राजनिति से ही सृजन और विध्वंस है। भारत में राजनीति के समक्ष तमाम समस्याएं और चुनौतियां हैं। लेकिन इसका हल समालोचना से, समाधान से ही हो सकता है निंदा से नहीं।
आवश्यकता है राजनीति को हम भारतीय दृष्टिकोण से समझे ना कि पश्चिमी दृष्टिकोण से। भारतीय दृष्टिकोण ही परिवर्तनकारी राजनीति को आगे बढ़ा सकता है और भारत के समक्ष चुनौतियों का समाधान प्रदान कर सकता है। हम एक चमत्कार चाह रहे हैं। एक मसीहा चाह रहे हैं इन समस्याओं के समाधान से के लिए। लेकिन उन्नत भारत विकसित भारत जिसकी हम अमृतकाल में चर्चा कर रहे हैं वह सभी के सहयोग से ही बनेगा।
बड़े परिवर्तनशील दौर से गुजर रही है भारतीय राजनीति: प्रो शांतेश
विशिष्ठ अतिथि प्रो शांतेश कुमार सिंह ने कहा की इतिहास में देखें तो हमने उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद के साथ-साथ हम संवैधानिक और राजनीतिक मूल्यों को आगे लेकर बढ़े। जैसे हमने उपनिवेशवाद शिक्षा व्यवस्था तथा नौकरशाही को जारी रखा। इसी कारण भारतीय राजनीति के समक्ष वही समस्याएं जैसे भ्रष्टाचार, गरीबी वैसे ही खड़ी हैं जैसा 75 साल पहले 1947 में थी।
उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति बड़े परिवर्तनशील दौर से गुजर रही है। वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था में ईमानदारी है। उन्होंने कहा कि बड़े राजनीतिक सुधार जैसे वन नेशन वन इलेक्शन की देश को आवश्यकता है। 150 करोड़ का यह देश राजनीतिक रूप से स्थिर रहा है। यह हमारी राजनीति व्यवस्था, हमारी संस्थाओं की मजबूती है। इसी राजनीतिक व्यवस्था से, इसी संविधान से भारत अपने सभी मुद्दों का हल ढूंढ लेगा।
स्वागत उद्बोधन विभागाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार सिंह ने दिया। कार्यक्रम संचालन तथा धन्यवाद ज्ञापन सह संयोजक डॉ महेंद्र कुमार सिंह ने किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महाविद्यालयों के शिक्षकगण तथा विद्यार्थियों ने सहभागिता की।

rkpNavneet Mishra

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