संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। भगवान श्री विष्णु के प्रिय माह कार्तिक के अंतिम दिन पूर्णिमा पर जिले के विभिन्न घाटो पर श्रद्धालुओ भारी भीड़ जुटी और स्नान के बाद दान कर पुण्य लाभ लिया।
वहीं प्रात: आठ बजे से ही चंद्र ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ होने के कारण मंदिरों के पट बंद कर दिए गए और साधु, संतों व पुजारियों ने जप अनुष्ठान किया ।
कार्तिक पूर्णिमा पर नदी में स्नान करने का विशेष महत्व बताया जाता है। इस दिन यदि कोई मनुष्य गंगा, यमुना, सरयू व गोमती जैसी पवित्र नदियों में स्नान करता है और भगवान का ध्यान करता है। तो उसे सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।
जिले दक्षिणी छोर बिरहड़ घाट से बहने वाली सरयू के तट पर देर रात्रि से ही श्रद्धालुओं का जुटान शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने हर हर गंगे-सरयू मैया की जय के उद्घोषों के साथ स्नान आरंभ किया। नदी के घाट पर बैठे पुरोहितों को यथाशक्ति दान-दक्षिणा दिया।
ज्ञातव्य है कि पूरे वर्ष में कुल 12 पूर्णिमा होती है। परंतु कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्त्व है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान-दान, लक्ष्मी-नारायण पूजन की जाती है। कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान कर देव दिवाली भी मनाई जाती हैl जिसे काफी शुभ माना जाता है।
घाटों पर स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने वहां लगी दुकानों से खाने-पीने के अलवा अपनी आवश्कता की चीजों को खरीदा।
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