कृष्ण की बाल लीलाओं से गोवर्धन पूजा तक भक्ति में डूबे श्रद्धालु


माखन चोरी, कालिय नाग मर्दन और गोवर्धन धारण का सुनाया प्रसंग, जयकारों से गूंजा कथा पंडाल

बलिया (राष्ट्र की परम्परा )

हुसैनपुर स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ में सोमवार को भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा वाचिका पूज्या सुश्री दिव्यांशी किशोरी जी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उनके जीवन प्रसंगों में छिपे आध्यात्मिक संदेशों को सरल भाषा में समझाया। कथा के दौरान भजन-कीर्तन और श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।कथा वाचिका ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप जितना मनमोहक है, उनकी प्रत्येक लीला उतनी ही गहरी सीख देने वाली है। गोकुल में बाल कृष्ण कभी ग्वाल-बालों के साथ गाय चराने जाते तो कभी गोपियों के घरों में पहुंचकर माखन चुराते थे। उनकी माखन चोरी की लीला का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान को सांसारिक वैभव नहीं, बल्कि भक्त का निष्कपट प्रेम प्रिय है। श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं यह संदेश देती हैं कि भगवान के प्रति प्रेम और समर्पण में किसी प्रकार का दिखावा नहीं होना चाहिए।इसके बाद पूतना वध, शकटासुर और तृणावर्त के प्रसंगों के साथ कालिय नाग मर्दन की कथा सुनाई गई। कथा वाचिका ने बताया कि कालिय नाग के विष से यमुना का जल दूषित हो गया था और ब्रजवासी भयभीत थे। भगवान श्रीकृष्ण ने कालिय नाग के फन पर नृत्य कर उसके अहंकार को समाप्त किया तथा यमुना को विष के प्रभाव से मुक्त कराया। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग बुराई, अहंकार और अत्याचार पर धर्म की विजय का प्रतीक है। कथा में गोवर्धन पूजा का प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। कथा वाचिका ने बताया कि ब्रजवासी इंद्रदेव की पूजा की तैयारी कर रहे थे, तब बाल कृष्ण ने उन्हें समझाया कि उनके जीवन में गोवर्धन पर्वत, गौवंश और प्रकृति का महत्वपूर्ण योगदान है। इसके बाद ब्रजवासियों ने इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन महाराज की पूजा की। इससे नाराज इंद्रदेव ने ब्रज में मूसलाधार वर्षा शुरू कर दी।ब्रजवासियों को वर्षा और संकट से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया। सभी ब्रजवासी, ग्वाल-बाल और गोधन पर्वत के नीचे सुरक्षित रहे। सात दिनों तक भगवान ने गोवर्धन धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की। अंततः इंद्रदेव का अहंकार टूट गया और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की महिमा स्वीकार की। कथा वाचिका ने कहा कि गोवर्धन प्रसंग हमें अहंकार छोड़कर प्रकृति, गौवंश और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देता है। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने गोवर्धन महाराज की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में पूर्व विधायक भगवान पाठक, ब्लॉक प्रमुख केशव चौधरी, ईश्वर सरकार, मृत्युंजय तिवारी, अखिलेश सिंह गुड्डू, दिग्विजय सिंह, जयप्रकाश सिंह सहित दर्जनों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के समापन पर आरती हुई और प्रसाद वितरित किया गया।

rkpnews@somnath

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