देवरिया: बंद मकान में लाखों की चोरी, पिपरा मिश्र गांव में हड़कंप

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जनपद के मईल थाना क्षेत्र अंतर्गत पिपरा मिश्र गांव में एक बंद पड़े मकान में हुई बड़ी चोरी की घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है। अज्ञात चोरों ने सुनसान घर को निशाना बनाते हुए नकदी, सोने-चांदी के आभूषण और कीमती घरेलू सामान पर हाथ साफ कर दिया। चोरी की जानकारी तब सामने आई जब मकान मालिक मुंबई से अपने पैतृक गांव लौटे और घर का ताला टूटा पाया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिपरा मिश्र गांव निवासी अनिल चौरसिया, पुत्र स्वर्गीय रामधार चौरसिया, रोज़गार के सिलसिले में अपने परिवार के साथ मुंबई में रहते हैं। उनका पैतृक मकान लंबे समय से बंद पड़ा था। सोमवार की शाम लगभग छह बजे जब वे गांव पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि मुख्य द्वार का ताला टूटा हुआ है। अंदर प्रवेश करने पर घर की हालत देखकर वे सन्न रह गए।

कमरों में रखा सामान अस्त-व्यस्त पड़ा था। अलमारियां और बक्से खुले हुए थे, जिससे साफ जाहिर हो रहा था कि चोरों ने पूरे घर की तलाशी ली है। प्रारंभिक जांच और पीड़ित परिवार के अनुसार, चोर नकदी, सोने-चांदी के आभूषण, पानी की मोटर सहित अन्य कीमती घरेलू सामान चुरा ले गए हैं। चोरी गए सामान की अनुमानित कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है।

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। गांव में चर्चा का माहौल बन गया और लोगों में असुरक्षा की भावना देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि मकान काफी समय से बंद था, जिसका फायदा उठाकर चोरों ने वारदात को अंजाम दिया। स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि क्षेत्र में पहले भी चोरी की कुछ घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इस बार नुकसान काफी बड़ा है, जिससे ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।

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पीड़ित अनिल चौरसिया ने मामले को लेकर मईल थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने पुलिस से निष्पक्ष जांच करने और दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही, आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि किसी संदिग्ध गतिविधि या व्यक्ति के बारे में जानकारी मिल सके।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में रात्रि गश्त बढ़ाई जाएगी और चोरी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सतर्कता बरती जाएगी। पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले का खुलासा करने का प्रयास किया जा रहा है।

इस घटना ने एक बार फिर बंद मकानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग रोज़गार के लिए बाहर चले जाते हैं और उनके घर लंबे समय तक बंद रहते हैं, जिससे ऐसे मकान चोरों के आसान निशाने बन जाते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि आपसी समन्वय, पड़ोसियों की सतर्कता और समय-समय पर निगरानी से ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

यह चोरी की घटना केवल एक परिवार का नुकसान नहीं है, बल्कि पूरे गांव के लिए एक चेतावनी भी है। सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी है। यदि ग्रामीण स्तर पर सजगता बढ़े और पुलिस के साथ बेहतर समन्वय हो, तो ऐसी वारदातों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

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Karan Pandey

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