देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। जनता की उम्मीदें और नेताओं के वादे—दोनों के बीच का फासला लगातार बढ़ता जा रहा है। देवरिया का सुरक्षित बस स्टेशन तीन साल पहले तोड़ दिया गया था। कहा गया था कि उसकी जगह एक आधुनिक मॉडल बस स्टेशन बनाया जाएगा। लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी न तो निर्माण शुरू हुआ, न ही योजना पर कोई स्पष्ट जानकारी आमजन तक पहुँच पाई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुराना बस स्टेशन तो “कभी भी गिर सकता है” कहकर गिरा दिया गया, लेकिन नया मॉडल स्टेशन कहाँ से आ रहा है और कहाँ तक पहुँचा, इसकी जानकारी न तो प्रशासन देना चाहता है और न ही नेता जी के करीबी।
इस बीच, जब भी भाजपा के प्रभारी मंत्री देवरिया दौरे पर आते हैं, तो छोटे-बड़े नेता गुलदस्ता लेकर स्वागत करने और उनके साथ तस्वीर खिंचवाने में सबसे आगे रहते हैं। इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा कर खुद को “नेता जी का करीबी” साबित करने की होड़ लगी रहती है।
जनता के सवाल
लेकिन जनता पूछ रही है—तीन साल से परिवहन मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे प्रभारी मंत्री ने देवरिया और आसपास के क्षेत्रों के लिए कौन-सा ठोस काम किया?
क्या विकास केवल सोशल मीडिया पोस्ट और फोटो तक ही सीमित रहेगा?
क्या हुआ तेरा वादा, वो कसम, वो इरादा?
जमीनी हकीकत
लोगों का कहना है कि विकास का शोर केवल पोस्टर, बैनर और सोशल मीडिया पर सुनाई देता है, जबकि धरातल पर हालात जस के तस हैं।
देवरिया सहित पूरे पूर्वांचल के यात्री और आमजन अब यह जानना चाहते हैं कि क्या कभी यह वादा पूरा होगा, या फिर यह मुद्दा भी चुनावी वादों और नेताओं की फोटो पॉलिटिक्स तक ही सीमित रह जाएगा।
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