यूट्यूबर ध्रुव राठी के वीडियो पर फिर उठा विवाद, धार्मिक भावनाओं और हर्जाने को लेकर अदालत में मांग

साकेत कोर्ट में मानहानि का मुकदमा, भगवान राम और माता सीता पर कथित टिप्पणी से विवाद; 5 नवंबर को अगली सुनवाई

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मशहूर यूट्यूबर ध्रुव राठी एक बार फिर कानूनी विवाद को लेकर चर्चा में हैं। उनके एक वीडियो में भगवान श्रीराम और माता सीता को लेकर कथित आपत्तिजनक दावे किए जाने के मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया गया है। याचिका सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) अमिता सचदेवा की ओर से दाखिल की गई है। मामले में अदालत से न्यायिक घोषणा, भविष्य में इस तरह की कथित आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार पर रोक और हर्जाना दिलाने की मांग की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को निर्धारित है।
याचिकाकर्ता अमिता सचदेवा के अनुसार, संबंधित वीडियो को लेकर पहले भी प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई हुई थी। उन्होंने केंद्र सरकार की ग्रिवांस अपीलेट कमेटी (GAC) के फैसले का हवाला देते हुए दावा किया कि कमेटी ने वीडियो की सामग्री को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना था। इसके बाद संबंधित वीडियो को भारत में यूट्यूब पर प्रतिबंधित कर दिया गया था। हालांकि, इस मामले में अदालत का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।
याचिका की सुनवाई के दौरान धार्मिक आस्था, व्यक्तिगत धार्मिक पहचान और देवी-देवताओं से संबंधित कथित मानहानि के मामलों में न्यायालय का रुख करने के अधिकार पर कानूनी दलीलें रखी गईं। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान उसके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है और धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में कानूनी उपचार के अधिकार पर विचार किया जाना चाहिए।
भगवान श्रीराम से जुड़े मामले में मुकदमा दायर करने के अधिकार पर भी सुनवाई के दौरान चर्चा हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि यदि किसी देवता के संबंध में कथित मानहानिकारक सामग्री सामने आती है, तो न्यायिक हस्तक्षेप की मांग के लिए किसी व्यक्ति को अदालत के समक्ष पक्ष रखना होगा। इसी संदर्भ में देवताओं के कानूनी व्यक्तित्व से संबंधित न्यायिक सिद्धांतों का उल्लेख किया गया।
याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया है कि मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट की जाए और भविष्य में इस तरह की सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए उचित आदेश पारित किया जाए। साथ ही, कथित नुकसान के लिए हर्जाना दिलाने की मांग भी की गई है।
इस प्रकरण में अब सबकी निगाहें 5 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत में रखी गई दलीलों, याचिका में किए गए दावों और संबंधित वीडियो को लेकर उठे विवाद पर आगे की न्यायिक कार्यवाही से मामले की दिशा स्पष्ट होगी। फिलहाल, आरोपों और कानूनी मांगों पर अंतिम निर्णय अदालत को करना है।

Editor CP pandey

Recent Posts

चीन सीमा के करीब कनेक्टिविटी को बड़ा बूस्ट! PM मोदी करेंगे लद्दाख की अहम परियोजनाओं का उद्घाटन

लद्दाख में भारत की रणनीतिक ताकत को मिलेगी नई रफ्तार! ₹3,350 करोड़ की परियोजनाओं से…

4 minutes ago

देवरिया कलेक्ट्रेट बार चुनाव में बृजबांके तिवारी का दबदबा, शिवानंद त्रिपाठी बने मंत्री; ललित नारायण पांडेय ने भी दर्ज की शानदार जीत

फोटो विज्ञप्ति अनूप तिवारी की रिपोर्ट देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिला कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के…

12 minutes ago

सड़क पर प्रदर्शन, सियासत में आरोप-प्रत्यारोप, लेकिन अनशन से दूरी क्यों? चुनावी पारदर्शिता और ए

अनशन से सरकारें झुका चुके हैं गांधी से सोनम वांगचुक तक, फिर विपक्ष क्यों नहीं…

34 minutes ago

त्योहार से पहले रेलकर्मियों की चमकी किस्मत, 78 दिन के बोनस को कैबिनेट की मंजूरी

दिवाली से पहले रेलवे कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! 11.40 लाख रेलकर्मियों को 78 दिन का बोनस,…

50 minutes ago

स्वच्छता में लापरवाही पर स्थायी लोक अदालत सख्त, सीएमओ समेत कई अधिकारियों को नोटिस

कसारा गांव में दोबारा मेडिकल कैंप लगाने, व्यापक सफाई और जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश…

54 minutes ago