मेरठ का नीला ड्रम हत्याकांड: पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल को फांसी, 126 सुनवाइयों के बाद अदालत का बड़ा फैसला
मेरठ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश के मेरठ में चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। दोनों को मुस्कान के पति और मर्चेंट नेवी के पूर्व कर्मी सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। सजा का ऐलान होते ही दोनों के भावुक होने की खबर सामने आई, जबकि सौरभ के परिजनों ने फैसले पर संतोष जताया। करीब 19 महीने पहले हुई इस वारदात ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हत्या के बाद सौरभ के शव के टुकड़ों को नीले प्लास्टिक ड्रम में रखकर सीमेंट से छिपाने का मामला सामने आया था। अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर इस सनसनीखेज हत्याकांड को सुर्खियों में ला दिया है।
मीडिया में प्रकाशित विवरणों के अनुसार, मामले में 126 सुनवाइयों के दौरान अभियोजन पक्ष ने 22 गवाहों के बयान पेश किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड सुनाया। हालांकि, मृत्युदंड के मामले में कानून के तहत उच्च न्यायालय की पुष्टि की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।
सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी ने वर्ष 2016 में प्रेम विवाह किया था। दोनों की एक बेटी थी। सौरभ मर्चेंट नेवी में काम करते थे और नौकरी के सिलसिले में विदेश में रहते थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुस्कान के साहिल शुक्ला से प्रेम संबंध थे और इसी रिश्ते को सौरभ की हत्या की साजिश की वजह बताया गया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सौरभ 24 फरवरी 2025 को लंदन से मेरठ स्थित अपने घर लौटे थे। अगले दिन मुस्कान का जन्मदिन मनाया गया और 28 फरवरी को बेटी पीहू का जन्मदिन भी मनाया गया। उस समय परिवार के भीतर चल रही परिस्थितियों का अंदाजा बाहर से लगाना मुश्किल था। इसके कुछ ही दिनों बाद सौरभ की हत्या का मामला सामने आया और यह घटना देशभर में चर्चा का विषय बन गई।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च 2025 को सौरभ की हत्या की गई। जांच में आरोप लगाया गया कि मुस्कान और साहिल ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद शव के टुकड़े कर उन्हें नीले प्लास्टिक ड्रम में रखा गया और सीमेंट व रेत से छिपाने की कोशिश की गई। शव को इस तरह छिपाए जाने के कारण यह मामला ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ के नाम से चर्चित हो गया।
घटना के बाद मुस्कान और साहिल के हिमाचल प्रदेश जाने की खबरें भी सामने आई थीं। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान घटनाक्रम, आरोपियों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की। सौरभ के लापता होने और घर से दुर्गंध आने के बाद मामला खुलने की जानकारी मीडिया रिपोर्टों में सामने आई। शव बरामद होने के बाद पुलिस ने हत्या से जुड़े तथ्यों की जांच आगे बढ़ाई।
मामले में दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने साक्ष्य जुटाए और आरोपपत्र दाखिल किया। रिपोर्टों के अनुसार, आरोपपत्र में हत्या, साक्ष्य मिटाने और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित आरोप शामिल थे। इसके बाद मेरठ की अदालत में मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने आरोपों के समर्थन में गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए, जबकि आरोपियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी मिला।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अप्रैल 2026 में आरोपियों के बयान दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। आपराधिक प्रक्रिया के तहत उनसे अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों के संबंध में सवाल किए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था। इसके बाद मामले में अंतिम बहस हुई और अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए कड़ी सजा की मांग की।
30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा पर सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख निर्धारित की गई। निर्धारित तारीख पर अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया। सजा के समय दोनों के भावुक होने की खबर सामने आई, वहीं अदालत में मौजूद सौरभ के परिजनों ने फैसले पर संतुष्टि जताई।
इस हत्याकांड ने इसलिए भी व्यापक चर्चा बटोरी, क्योंकि मामले में पति की हत्या, शव को टुकड़ों में काटकर ड्रम में छिपाने और वारदात के बाद आरोपियों के घूमने जाने जैसे आरोपों ने लोगों को स्तब्ध कर दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों और अदालत के फैसले ने इसे देश के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल कर दिया।
अदालत का मृत्युदंड का फैसला इस मुकदमे का अहम पड़ाव है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया में आगे की अपील और उच्च न्यायालय से मृत्युदंड की पुष्टि जैसे पहलू भी महत्वपूर्ण होंगे। सौरभ राजपूत के परिजनों के लिए यह फैसला लंबे इंतजार के बाद न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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