मुम्बई(राष्ट्र की परम्परा)
आगामी 2024 में लोकसभा चुनाव संपन्न होने वाला है। इसी परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मुंबई नगर व उपनगरों में झोपड़ों की ऊंचाई बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। बताया जाता है कि पिछले चार दशक से मुंबई मनपा अधिनियम के तहत झोपड़पट्टी बाहुल्य इलाकों में झोपड़ों की ऊंचाई मात्र 14फीट कानूनी रूप से तय की गई है। चालीस साल बीत जाने के बावजूद मनपा द्वारा झोपड़ों की ऊंचाई बढ़ाने के लिए कोई प्रस्ताव अभी तक पारित नहीं किया है। जबकि लंबे समय से बैठी चाल कानून के तहत 14फीट ऊंचाई की जगह 20फीट की मंजूरी देने की मांग की जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्वी तथा पश्चिम उपनगर के अंतर्गत आने वाली अनेक झोपड़पट्टियां निचले भागों में बसी हुई हैं। जिसके कारण हर बरसात में निचले इलाकों में बसी झोपड़पट्टियों में जलजमाव हुआ करता है। अनेक जगहों पर तो बाढ़ की स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसे में बड़ी संख्या में झोपड़ वासियों को आसपास की इमारतों में शरण लेनी पड़ती है। जिससे गरीबों को बहुत ही आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। गौरतलब है कि 26जुलाई 2005की भारी बरसात में अनेक निचले इलाकों में बाढ़ आने से काफी लोगों की मौत हो गई थी। सूचना अधिकार कार्यकर्ता मनोहर जरियाल ने कहा कि यदि झोपड़ों की ऊंचाई 14फीट की जगह 20, फीट की मंजूरी मनपा प्रशासन की ओर से दी गई तो निचले इलाकों के झोपड़पट्टियों में जलजमाव की समस्या नहीं होगी और झोपड़ों में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी। जरियाल ने यह भी बताया कि यदि गरीब आदमी अपने झोपड़े को 14फीट से अधिक ऊंचा बनाता है तो मनपा उन्हें तोड़ने की धमकी देती है और तरह तरह के कानून बताती है, जबकि उपनगर के अनेक इलाकों विशेषकर साकीनाका, कुर्ला , गोवंडी, मानखुर्द के इलाकों में भूमाफियों द्वारा मनपा और कलेक्टर विभाग की मिली भगत से तीन तीन मंजिला मकान खड़ा कर देते हैं। फिर गरीबों के साथ ही अन्याय क्यों ? मनोहर जरियाल ने राज्य के मुख्यमंत्री, नगरविकास मंत्री मनपा आयुक्त और कलेक्टर विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि झोपड़ों की ऊंचाई 14फीट से 20फीट बढ़ाई जाय। जिससे की निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत मिल सके।