छुट्टा पशुओं के आतंक से प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग

छुट्टा पशुओं के आतंक से कुसहरा गांव के किसान त्रस्त, सैकड़ों एकड़ रबी फसल तबाह

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)जंगल कौड़िया विकासखंड के कुसहरा गांव सहित आसपास के करीब दो दर्जन गांवों में छुट्टा पशुओं की समस्या किसानों के लिए गंभीर संकट बन चुकी है। खुलेआम घूम रहे सैकड़ों की संख्या में छुट्टा पशु खेतों में घुसकर रबी की खड़ी फसलों को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। इससे किसानों की वर्षों की मेहनत और पूंजी कुछ ही घंटों में बर्बाद हो जा रही है।

ये भी पढ़ें – कड़ाके की ठंड के चलते योगी सरकार का बड़ा निर्णय, 12वीं तक के स्कूल 1 जनवरी तक बंद

क्षेत्र में गेहूं, जौ, सरसों, आलू, मटर, दलहन और तिलहन जैसी प्रमुख रबी फसलें बड़े पैमाने पर नष्ट हो चुकी हैं। राप्ती और रोहिन नदियों के बीच स्थित तलहटी इलाके में बसे गांवों में पशुओं का दबाव लगातार बढ़ रहा है। किसान बताते हैं कि पशु झुंड बनाकर खेतों में प्रवेश करते हैं और पूरी फसल को रौंद देते हैं। अब तक सैकड़ों एकड़ फसल के बर्बाद होने से किसानों की आर्थिक स्थिति डगमगा गई है।
स्थानीय किसान राम सिंह, विजय सिंह, शंभू गौड़, राकेश गुप्ता, संदलू कनौजिया और रामवृक्ष सदई निषाद का कहना है कि रबी की खेती के लिए उन्हें कर्ज लेना पड़ता है। बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन फसल कटाई से पहले ही छुट्टा पशु सारी उम्मीदें तोड़ देते हैं। इससे कर्ज चुकाना तो दूर, परिवार का भरण-पोषण भी मुश्किल होता जा रहा है।

ये भी पढ़ें – नया साल, पुरानी पीड़ा और नया हौसला: नूतन वर्ष मनाएंगे

रात के समय हालात और भयावह हो जाते हैं। ठंड और कोहरे के बावजूद किसान पूरी रात खेतों में अलाव जलाकर, टॉर्च और लाठियों के सहारे पहरा देते हैं। इसके बावजूद पशु खेतों में घुस ही जाते हैं। कई परिवारों में बच्चों और बुजुर्गों को भी निगरानी में लगाया जा रहा है, जिससे पढ़ाई और सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र बड़ा होने के कारण व्यक्तिगत या सामूहिक स्तर पर फसलों की सुरक्षा संभव नहीं रह गई है। एक खेत से पशु भगाने पर वे दूसरे खेत में घुस जाते हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बन जाएगी।

ये भी पढ़ें – “संविधान, समाज और आध्यात्मिक बाज़ार: भारत से विश्व तक एक वैचारिक पड़ताल”

किसानों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि छुट्टा पशुओ की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। गौशालाओं की संख्या और क्षमता बढ़ाई जाए, पशुओं को पकड़कर वहां भेजने की नियमित व्यवस्था हो तथा फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा दिया जाए।
समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जंगल कौड़िया क्षेत्र में किसानों की आजीविका पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।

Editor CP pandey

Recent Posts

यूपी: ईरान हमले के बाद दुबई एयरस्पेस बंद, लखनऊ से 17 उड़ानें निरस्त

ईरान हमले के बाद दुबई का एयरस्पेस सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया, जिसका…

7 hours ago

सर्वाइकल कैंसर से बचाव की दिशा में बड़ा कदम, देवरिया में एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l सर्वाइकल (गर्भाशय) कैंसर की रोकथाम की दिशा में प्रदेश में शनिवार…

9 hours ago

श्रीअन्न से पोषण और समृद्धि की ओर बढ़ता मऊ, मिलेट्स पुनरोद्धार कार्यक्रम 2026 को मिल रहा जनसमर्थन

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। प्रदेश में पोषण सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि और जलवायु अनुकूल…

10 hours ago

तरकुलवा में अवैध कच्ची शराब पर बड़ी कार्रवाई, 7 गिरफ्तार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में अवैध शराब के निर्माण और बिक्री के विरुद्ध चलाए…

10 hours ago

आयुष्मान भारत योजना में शत-प्रतिशत लक्ष्य का निर्देश, 15 मार्च तक कार्ड निर्माण पूरा करने की समयसीमा

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और योजनाओं की प्रभावशीलता सुनिश्चित…

10 hours ago

श्रीराम यज्ञ में उमड़ा जनसैलाब, लक्ष्मीपुर जरलहियां में गूंजे जयकारे

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। विधानसभा पनियरा क्षेत्र के ग्राम सभा लक्ष्मीपुर जरलहियां में आयोजित भव्य…

10 hours ago