गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा को भविष्य की तकनीकी जरूरतों से जोड़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय द्वारा एआई को शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास का केंद्र बनाते हुए व्यापक कार्ययोजना पर अमल शुरू कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य है कि एआई को केवल तकनीकी विषयों तक सीमित न रखते हुए सभी संकायों और पाठ्यक्रमों में समाहित किया जाए, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी एआई की बुनियादी समझ के साथ उसके व्यावहारिक उपयोग में भी दक्ष बन सके। कुलपति प्रो. पूनम टंडन के अनुसार पाठ्यक्रम संरचना में आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे छात्र भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में एम.एस. (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और बी.सी.ए. स्तर पर एआई पाठ्यक्रम पहले ही शुरू किए जा चुके हैं। ये पाठ्यक्रम राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) के सहयोग से संचालित हो रहे हैं और छात्रों को उद्योगोन्मुखी तकनीकी दक्षता प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने बी.टेक. (Artificial Intelligence) कार्यक्रम की भी शुरुआत की है, जो आधुनिक रोजगार बाजार की मांगों के अनुरूप तैयार किया गया है।
कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विद्यार्थी स्वयं (SWAYAM) प्लेटफॉर्म के माध्यम से एआई से जुड़े विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में भी पंजीकरण कर रहे हैं। इससे छात्रों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव और तकनीकी कौशल विकसित करने का अवसर मिल रहा है।
प्रधानमंत्री उषा योजना (PM-USHA) के तहत विश्वविद्यालय परिसर में एक अत्याधुनिक एआई लैब की स्थापना की जा रही है। यह लैब प्रशिक्षण, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की क्षमताओं को नई दिशा देगी और छात्रों को अत्याधुनिक तकनीक पर काम करने का मंच उपलब्ध कराएगी।
ये भी पढ़ें – ईरान की ओर बढ़ा अमेरिकी नौसेना का बेड़ा, ट्रंप के बयान से वैश्विक युद्ध की आशंका बढ़ी
इसी क्रम में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित “एआई मंथन-2026 : उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में चुनौतियाँ और अवसर” कार्यक्रम में गोरखपुर विश्वविद्यालय की टीम ने कुलपति प्रो. पूनम टंडन के नेतृत्व में प्रभावी भागीदारी की। इस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा में एआई की भूमिका, प्रशासनिक सुधार और शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग पर विस्तृत चर्चा हुई।
तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने एआई टूल्स, जेनरेटिव एआई, साइबर सुरक्षा, परीक्षा मूल्यांकन और छात्र सहायता सेवाओं में एआई के उपयोग जैसे विषयों पर विचार साझा किए। उद्योग विशेषज्ञों के साथ पैनल चर्चा में विश्वविद्यालयों में एआई आधारित सुविधाओं के विकास और अनुसंधान सहयोग पर विशेष जोर दिया गया।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान और भविष्य की शिक्षा का आधार है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि एआई को सभी पाठ्यक्रमों का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए, जिससे विद्यार्थी बदलते तकनीकी परिदृश्य में स्वयं को सक्षम और प्रतिस्पर्धी बना सकें।
पटना सिविल कोर्ट में हथियारबंद युवक गिरफ्तार, बिहार के 5 जिलों की सिविल कोर्ट को…
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में…
जयपुर/नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान हादसे के…
सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।UGC बिल के विरोध में मंगलवार को सलेमपुर नगर में सवर्ण समाज के…
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) देशभर में यूजीसी के नए नियमों को लेकर जबरदस्त बवाल…
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।जिले में अपराध नियंत्रण और कानून- व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की दिशा…