सीट सामान्य भई जब से
दस-पंद्रह सोच भई है सयानी
भौजिक पांव गहे महतारी
तुंही अब लाज बचाओ भवानी
केहुक है रुपया परदेसिक
केहुक जेवर भैंस बिकानी
जीति जो जाब बोलेरो लयाइब
ऐस तिजोरी भई परधानी।
बाभन-ठाकुर ड्योढ़ी चमारेक
कूकुर जैसन पूंछि हलावैं
गांवन जे तरसैं गुड़ खातिर
राबड़ी काटन का मुंह बावैं
माथेप चंदन है जेकरे अब
दारुक दांव लिहा घतिआवैं
कोढ़ी कलन्दर एक बचै नहिं
पावैं तो जीभिस चाटि पटावैं।
नेउतत देवि व देउतन का बढ़ि
भोर भए घुड़दौड़ लगावैं
जोर सिफारिस औ’ नकुना
रगरैं चढ़ि वोटर का फुसलावैं
आंखि गड़ाए मोबाइल मां
पहुड़े मुल नींदि से रारि मचावैं
जौन कमी रहिगै पुरियावत
जोरत गांठत राति बितावैं।
एक मुक्तक
रोग गाइ कै हंसि खेलाइ कै
किहिन छल-कपट अस बेइमानी
कौनौ मेर जीति जौ पाइन
सुअर बार भा आंखिक पानी
भै मरदानी बात जनानी
लैट्रिन खाए पियैं नरदहा
बैठ बोलेरो मा घूमैं अब
केहकै नाना केहकै नानी।
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