अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी नौसेना का एक बड़ा बेड़ा ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर युद्ध की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है।
यह बयान ट्रंप ने मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को अमेरिका के आयोवा राज्य के क्लाइव शहर में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए दिया। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी सैन्य शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि एक “खूबसूरत आर्माडा” इस समय ईरान की ओर बढ़ रही है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह चाहते हैं कि ईरान किसी समझौते के लिए आगे आए।
अपने भाषण में ट्रंप ने दावा किया कि जून 2025 में अमेरिका ने ईरान के कई परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, जिससे उसकी परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। हालांकि, इन हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को कितना नुकसान हुआ, इस पर अब भी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में मतभेद बने हुए हैं।
गौरतलब है कि अपने पहले कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) को एकतरफा तौर पर रद्द कर दिया था और इसके बाद ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे। इन प्रतिबंधों से ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा था।
अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के जवाब में ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई की, तो उसे “भारी और पछतावे वाली प्रतिक्रिया” का सामना करना पड़ेगा।
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ईरान की राजधानी तेहरान में हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। वहां एक विशाल होर्डिंग लगाया गया है, जिसमें एक अमेरिकी विमानवाहक पोत को नष्ट अवस्था में दिखाया गया है। होर्डिंग पर फारसी और अंग्रेजी में लिखा है— “अगर तुम हवा बोओगे, तो तूफान काटोगे।”
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, USS अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत और उसके साथ कई मिसाइलों से लैस युद्धपोत हाल ही में मध्य पूर्व क्षेत्र में पहुंच चुके हैं। इससे इलाके में हजारों अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी और बढ़ गई है।
हालांकि ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह सैन्य तैनाती “सिर्फ एहतियात के तौर पर” की गई है और इसका इस्तेमाल जरूरी नहीं कि किया ही जाए।
इसी बीच ईरान के अंदर सरकार विरोधी प्रदर्शनों की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक इन प्रदर्शनों और सुरक्षा कार्रवाई में 6,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें महिलाएं, बच्चे और आम नागरिक शामिल हैं।
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