दिसंबर 2025 की परीक्षा में सौ से अधिक विद्यार्थियों को सफलता, हिंदी विषय से सर्वाधिक चयन
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने दिसंबर 2025 में आयोजित यूजीसी नेट–जेआरएफ परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर अपनी अकादमिक सशक्तता सिद्ध की है। घोषित परिणामों के अनुसार विश्वविद्यालय के सौ से अधिक विद्यार्थियों ने नेट, जेआरएफ एवं पीएचडी पात्रता परीक्षा में सफलता अर्जित की है।
इनमें बीस से अधिक विद्यार्थियों का चयन जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) के लिए हुआ है, जिन्हें यूजीसी द्वारा शोध अवधि के दौरान फेलोशिप प्रदान की जाएगी। वहीं 60 से अधिक अभ्यर्थी सहायक आचार्य पात्रता (नेट) में सफल हुए हैं, जबकि शेष विद्यार्थियों ने पीएचडी पात्रता परीक्षा में स्थान बनाया है।
इस उपलब्धि में विशेष उल्लेखनीय सफलता भूगोल विभाग के शोधार्थी विशाल सिंह की रही, जिन्होंने यूजीसी–जेआरएफ की मेरिट सूची में देश में 11वां स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।
विषयवार परिणामों पर नजर डालें तो हिंदी विषय से सर्वाधिक बीस से अधिक विद्यार्थियों का चयन हुआ है, जिनमें चार विद्यार्थियों ने जेआरएफ प्राप्त की है। इसके अलावा राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, इतिहास, प्राचीन इतिहास, भूगोल, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, विधि, रक्षा अध्ययन सहित अन्य विषयों में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सफलता दर्ज की है। अद्यतन आंकड़ों के अनुसार चयनित विद्यार्थियों की संख्या में और वृद्धि की संभावना बनी हुई है।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अंग्रेजी विभाग में सफल अभ्यर्थियों में छात्राओं की संख्या सर्वाधिक रही है। समग्र रूप से सभी विषयों में छात्र और छात्राओं का प्रदर्शन लगभग समान स्तर पर रहा है, जो विश्वविद्यालय के समावेशी शैक्षणिक वातावरण को दर्शाता है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने सफल विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता विद्यार्थियों की निरंतर मेहनत, शिक्षकों के मार्गदर्शन और विश्वविद्यालय के सकारात्मक शैक्षणिक एवं शोध-अनुकूल वातावरण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यूजीसी नेट–जेआरएफ जैसी प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परीक्षा में यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की अकादमिक प्रतिबद्धता और शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने की नीति का प्रमाण है।
सफल विद्यार्थियों को संबंधित विभागाध्यक्षों, शिक्षकों एवं डीएसडब्ल्यू प्रो. अनुभूति दुबे ने भी बधाई दी और इसे विश्वविद्यालय की बढ़ती शैक्षणिक प्रतिष्ठा और अकादमिक विश्वसनीयता का प्रतीक बताया।
