गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग में पुस्तक विमोचन और “ऊर्दू नॉवेल: दिशा और दशा” के विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन हुआ। भारतीय भाषा केंद्र, जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली के पूर्व चेयर पर्सन प्रोफेसर शाहिद हुसैन ने इस आयोजन की अध्यक्षता की। उर्दू विभाग, आलिया यूनिवर्सिटी, कलकत्ता के सहायक आचार्य डॉ सईद अहमद बतौर मुख्य वक्ता शरीक हुए।
आयोजन में उपस्थित अतिथियों के द्वारा उर्दू विभाग के सहायक आचार्य डॉ महबूब हसन की बाल साहित्य पर आधारित पुस्तक "जंगल जंगल" का लोपार्पण हुआ। इस पुस्तक में बाल कहानियां और बाल कविताएं दोनों शामिल हैं। इस से पहले भी बाल साहित्य पर आधारित डॉ हसन की रचना "तितली रानी" हिंदी उर्दू दोनों भाषाओं में प्रकाशित हो चुकी है। हास्य व्यंग से संबंधित उन की रचना "टुंडे कबाब" उत्तर प्रदेश सरकार के अहम सम्मान से पुरस्कृत हो चुकी है। शोध और आलोचना पर आधारित डॉ महबूब हसन की तीन अन्य पुस्तकें प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रकाशित हो चुकी हैं।
विभाग के अध्यक्ष प्रो एम. रहमान ने पुष्प गुच्छ और अंगवस्त्र से मेहमानों का स्वागत किया।
प्रो शाहिद हुसैन ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि डा महबूब हसन उर्दू साहित्य की वर्तमान पृष्टभूमि पर अपनी लेखनीय से ख्याति प्राप्त कर रहे हैं। खुशी की बात है कि वो कई विधाओं में साहित्य रच रहे हैं। उन की ताज़ा पुस्तक "जंगल जंगल" नई पीढ़ी में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति रुचि पैदा करेगी। इस रचना से पर्यावरण और प्रकृति के प्रति महत्वपूर्ण संदेश मिलता है। चिड़िया आई, पेड़ लगाओ, जैसे शीर्षक सहजता से बच्चों को प्रभावित करते हैं।
डॉ सईद अहमद ने "ऊर्दू नॉवेल नॉवेल: दशा और दिशा" के विषय पर बेहद विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि उर्दू में उपन्यास लेखन की बेहद समृद्ध परंपरा रही है। डिप्टी नज़ीर अहमद, रतन नाथ सरशार, रुस्वा, प्रेमचंद, राजेंद्र सिंह बेदी, इस्मत चुग़ताई, कृष्ण चंद्र और जौकी उपन्याकारों ने अपनी कृतियों के माध्यम से समाज में नए नए विमर्श पैदा किए।
कार्यक्रम का संचालन डॉ महबूब हसन ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ साजिद हुसैन अंसारी ने दिया।
इस अवसर पर विभाग के शोधार्थी राम उग्रह, विशाल, शबाना, हुमा, नादिया मोइन और स्नातक और स्नातकोत्तर के छात्र छात्राओं की बड़ी संख्या उपस्थित रही। बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l इबादत और कुर्बानी का त्योहार ईदुल जुहा (बकरीद) नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों…
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