जनविरोधी नीतियों के खिलाफ भाकपा का वैचारिक संघर्ष तेज

भाकपा जिला काउंसिल की समीक्षा बैठक सम्पन्न, संगठन मजबूती और जनसंघर्ष पर हुआ मंथन


बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की जिला काउंसिल की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक रविवार को बरहज स्थित बाईपास रोड पर काशी नाथ अस्पताल के पास पार्टी के कैंप कार्यालय में सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता भाकपा के पूर्व जिला सचिव कामरेड चक्रपाणि तिवारी ने की, जबकि संचालन जिला सह-सचिव कामरेड कमलेश चौरसिया द्वारा किया गया।
बैठक में संगठन की वर्तमान स्थिति, सदस्यता अभियान, आगामी पंचायती चुनाव एवं विधानसभा चुनाव की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही भारत एवं अमेरिका की जनविरोधी नीतियों, बढ़ती आर्थिक असमानता और सामाजिक विभाजन जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

ये भी पढ़ें – आज कौन से कार्य करें?

चर्चा के दौरान खेत मजदूर यूनियन के राज्य सचिव कामरेड विनोद कुमार सिंह ने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को अपने ऐतिहासिक संघर्षों से प्रेरणा लेते हुए जनता के बीच सक्रिय रूप से जाना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार की विभाजनकारी नीतियों से जनता त्रस्त है और आज भी लाल झंडे से उन्हें उम्मीद है। जरूरत है कि भाकपा कार्यकर्ता जनता की पीड़ा को समझते हुए उनके संघर्षों में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हों।

ये भी पढ़ें – अंक ज्योतिष के प्रभावी उपाय जो बदल सकते हैं आपका भाग्य

भाकपा के जिला सचिव कामरेड अरविंद कुशवाहा ने कहा कि अब समय आ गया है कि पार्टी गांवों की ओर लौटे और अपने वास्तविक वर्ग से सीधा संवाद स्थापित करे। उन्होंने आरोप लगाया कि जातीय राजनीति करने वाली पार्टियों ने मजदूर, किसान और गरीब वर्ग को अपने राजनीतिक लाभ का साधन बना लिया है। भाकपा को यह स्पष्ट करना होगा कि पार्टी ने अतीत में भी जनता की लड़ाई लड़ी है, आज भी लड़ रही है और भविष्य में भी संघर्ष जारी रहेगा।

ये भी पढ़ें – खेल, विज्ञान और राजनीति: 19 जनवरी का वैश्विक प्रभाव

पूर्व जिला सचिव कामरेड आनंद प्रकाश चौरसिया ने कहा कि जनता भले ही सरकारी नीतियों से परेशान है, लेकिन कूटनीति और भ्रम के जाल में फंसी हुई है। लोग अपने शोषकों को पहचानने में असमर्थ हैं और अपने सच्चे हितैषियों को समझ नहीं पा रहे हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में कामरेड चक्रपाणि तिवारी ने कहा कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी धर्म या सत्ता की राजनीति के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि गरीबों, शोषितों और वंचितों के अधिकारों की लड़ाई को ही सच्चा धर्म मानते हैं। उनके अनुसार, बिना भेदभाव के अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना ही कम्युनिस्ट आंदोलन की पहचान है।

ये भी पढ़ें – खेल, विज्ञान और राजनीति: 19 जनवरी का वैश्विक प्रभाव

बैठक में प्रस्तुत सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इस अवसर पर कमला यादव, रविंद्र कुमार, राम ध्यान प्रधान, काशी यादव, संजय दूबे, पराग कुशवाहा, मनोज गौड़, हरिचरण कुशवाहा सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

Editor CP pandey

Recent Posts

टापू बने गांव, पानी बना पहरेदार, सोहगी बरवां में विकास की राह अब भी अधूरी

रोहुआ नाला पार करना रोज की मजबूरी, स्कूल तक पहुंचने में भी जल-भराव का रोड़ा,…

9 hours ago

आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों का मानदेय बढ़ा, अब मिलेंगे 12 हजार रुपये

सहायिकाओं को छह हजार प्रतिमाह, पांच लाख रुपये तक कैशलेश स्वास्थ्य बीमा की भी सौगात…

9 hours ago

प्रो. के. पी. सिंह ने दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार ग्रहण किया

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के नव नियुक्त कुलपति प्रो. कृष्ण पाल…

9 hours ago

सीएचसी बनकटी में वसूली की शिकायत, जांच की मांग

भाजपा मंडल अध्यक्ष ने स्टाफ नर्स पर लगाए आरोप, इलाज-टीकाकरण के नाम पर रुपये लेने…

9 hours ago

ध्रुव की अटूट भक्ति का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। हुसैनपुर स्थित ठाकुरबाड़ी मंदिर परिसर में चल रहे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा…

9 hours ago

भारतीय भाषाओं में ज्ञान-विज्ञान का विस्तार जरूरी, बीबीएयू में दो दिवसीय कार्यशाला का समापन

भारतीय भाषाओं को शिक्षा, शोध और ज्ञान-सृजन का सशक्त माध्यम बनाने पर जोर लखनऊ (राष्ट्र…

9 hours ago