अगर हमें यह साधारण सा एहसास
हो जाय कि गुज़रा हुआ वक्त दुबारा
फिर नहीं आता है तो हमारा आपका
सारा भावी जीवन सार्थक हो जाता है.
अहंकार भारी भरकम होना पड़ता है,
पर आत्मा को गुणवान होना पड़ता है,
उन लोगों से हमेशा दूर रहना चाहिये
जिनकी उपस्थिति से बहाने बनते हैं।
निर्णय करना हमेशा आसान होता है,
जब दृष्टिकोण पूर्ण स्पष्ट होता है,
हमें सत्य को सत्य साबित करने की
कहीं कभी भी ज़रूरत नहीं होती है।
दुनिया भले हमारा सब कुछ छीन ले,
पर अदम्य भावना नहीं छीन सकती,
हमारी ग़लतियाँ यह प्रमाण देती है
कि हम कर्म के लिए प्रयत्नशील हैं।
सबका मालिक एक है और वह एक
कौन है, कहाँ है, कोई नहीं जानता,
क्या कोई यह सत्य नकार सकता,
ऐसा भी तो कोई नही कह सकता।
पर यह मूलभूत प्रश्न नहीं, बल्कि
प्रश्न का उत्तर है और इसी खोज
में दुनिया व्यस्त है, पर असफल है,
कि सबका मालिक एक एक है ।
जो विचार मस्तिष्क में जैसे भी
स्वीकार किये जाते हैं वही हमारे
मस्तिष्क को नियंत्रित भी करते हैं,
आदित्य इसे सकारात्मकता कहते हैं।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
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