सुप्रीम कोर्ट की इंटरनेट और मेट्रो पर दोटूक टिप्पणी
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजधानी में सियासी घमासान तेज हो गया है। हिरासत, रिहाई, पुलिस पर गंभीर आरोप और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों ने इस विवाद को नया मोड़ दे दिया है। विपक्षी दलों ने सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं, जबकि CJP ने साफ कर दिया है कि उसका आंदोलन थमने वाला नहीं है। सोमवार, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी ने विपक्षी दलों और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च में शामिल होने की अपील की है। ऐसे में राजधानी में राजनीतिक टकराव और बढ़ने के आसार हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान आम नागरिकों की सुविधाओं को प्रभावित नहीं होने देने पर जोर दिया है। अदालत ने मेट्रो, ट्रेन और इंटरनेट सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित रखने की जरूरत बताई। सुनवाई के दौरान सेवाओं के संचालन को लेकर दिए गए निर्देशों का पालन नहीं होने पर अदालत ने टिप्पणी की कि अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की मांग प्रथम दृष्टया ठोस प्रतीत होती है। इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक सेवाओं के संचालन को लेकर बहस तेज कर दी है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका को करीब 24 घंटे हिरासत में रखने के बाद रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके साथियों को जबरन विमान से ले जाया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को गिरफ्तारी के बजाय अपहरण करार दिया। हालांकि, इन आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने आना जरूरी है।
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रदर्शन नहीं करने संबंधी कोई बॉन्ड या अंडरटेकिंग साइन नहीं की है। उन्होंने कहा कि वह दोबारा जनता के मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरेंगे। दीपके के मुताबिक, हिरासत के दौरान उन्हें अपनी दादी के निधन की सूचना मिली थी। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार से संपर्क करने और कानूनी सहायता लेने के लिए फोन उपलब्ध कराने में परेशानी हुई। बाद में उन्होंने पुलिस के उस पक्ष पर भी सवाल उठाए, जिसमें मानवीय आधार पर कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सौरव दास ने भी दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि हिरासत के दौरान उनके मोबाइल फोन जब्त किए गए, लेकिन उन्हें जब्ती का कोई मेमो नहीं दिया गया। उन्होंने फोन हैक या क्लोन किए जाने की आशंका जताते हुए कहा कि उन्हें डर है कि उपकरणों में किसी तरह की सामग्री डालकर बाद में उसे सबूत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। फिलहाल, फोन से छेड़छाड़ किए जाने के उनके दावे की पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है।
CJP नेताओं ने केंद्र सरकार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने का आरोप लगाते हुए आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे को देशव्यापी आंदोलन बनाया जाएगा। नेताओं ने अन्य विपक्षी दलों से भी एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इससे आम जनता और पेशेवर लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कर्नाटक के कलबुर्गी में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था में गड़बड़ियों को लेकर उठाए गए सवालों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक में कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे उठाए जाने के बाद विपक्षी एकजुटता बढ़ी है।
राहुल गांधी ने रविवार को वीडियो संदेश जारी कर देशभर के लोगों और विपक्षी दलों से 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक प्रस्तावित मार्च में शामिल होने की अपील की। उन्होंने इसे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बताया। इस मार्च में INDIA गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने भी दिल्ली में छात्रों और युवाओं के खिलाफ हुई कार्रवाई का विरोध करते हुए महाराष्ट्र में प्रदर्शन किए जाने की बात कही है।
इधर, दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर हिरासत का सिलसिला जारी रहने के दावे किए गए हैं। CJP ने रविवार को अपने पांच नेताओं को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी। दूसरी ओर, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी कर रहे ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और NSUI के कार्यकर्ताओं को भी अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिए जाने की खबर है। कनॉट प्लेस और राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के आसपास पुलिस कार्रवाई के दौरान धक्का-मुक्की की सूचना मिली। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कम से कम दो लोग घायल हुए। कुछ हिरासत में लिए गए लोगों ने खुद को पत्रकार भी बताया।
दिल्ली पुलिस ने शनिवार को CJP के प्रदर्शन के सिलसिले में 20 एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट और धक्का-मुक्की से संबंधित आरोप शामिल हैं। एक अलग मामले में हिंदू रक्षा दल से संबंध रखने वाले बताए गए चार लोगों को भी गिरफ्तार किया गया। उन पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ मारपीट और महिलाओं से बदसलूकी के आरोप हैं।
इन मामलों में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
विवाद की गूंज दिल्ली से बाहर भी सुनाई दे रही है। मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP के समर्थन में प्रदर्शन करने पहुंचीं सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया और अन्य लोगों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। दमानिया ने आरोप लगाया कि उन्हें सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने रोका और निजी वाहन से दूसरी जगह ले गए। वहीं, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने बंगला साहिब परिसर में प्रदर्शन से संबंधित घटना को लेकर अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। कमेटी का आरोप है कि गुरुद्वारा परिसर की शांति भंग करने की कोशिश की गई। यह मामला भी आरोपों और शिकायतों के आधार पर जांच का विषय है।
यूट्यूबर ध्रुव राठी ने भी सोशल मीडिया पर दावा किया कि उन्होंने रिहाई के लिए कोई बॉन्ड साइन नहीं किया और न ही किसी शर्त या अंडरटेकिंग पर हस्ताक्षर किए। दूसरी ओर, CJP के नेताओं ने कहा है कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदर्शन के अधिकार, कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की सुविधाओं के बीच संतुलन कैसे कायम होगा। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद अब सबकी नजर सोमवार को प्रस्तावित विपक्षी मार्च और प्रशासन की तैयारियों पर है। एक तरफ विपक्ष इसे लोकतंत्र और संविधान की लड़ाई बता रहा है, तो दूसरी तरफ पुलिस कार्रवाई और हिरासत से जुड़े आरोपों ने जवाबदेही की मांग तेज कर दी है। आने वाले घंटों में यह विवाद राजनीतिक और कानूनी, दोनों मोर्चों पर और अहम हो सकता है।
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