खेल खिलौनों से मिल रहीं भविष्य को आकार
बहराइच(राष्ट्र की परम्परा)l चितौरा ब्लाक के रसूलपुर सरैया में बचपन को कैसे गढ़ा जाता है यह देखना है तो रसूलपुर सरैयाँ आइए। जनपद मुख्यालय से महज 13 किलोमीटर की दूरी पर बना यहाँ का आंगनबाड़ी केंद्र किसी प्ले स्कूल से कम नहीं है। खास बात यह है कि यहां आने वाले ज्यादातर बच्चे गरीब व श्रमिक परिवारों से आते हैं जहां सेहत शिक्षा और स्वच्छता के मानक दूसरों की अपेक्षा कमतर होते हैं। लेकिन केंद्र की आंगनबाड़ी प्रतिमा के प्रयास से न सिर्फ यहां के नौनिहालों की सेहत दुरुस्त है बल्कि उनके शिक्षा व आचरण में भी बदलाव दिखाई देता है। यहां तोतली भाषा में गुड मॉर्निंग और गुड डे कहते हुए बचपन को देखा जा सकता है। ऐसे हुआ बदलाव आंगनबाड़ी प्रतिमा बताती हैं कि केंद्र पर वर्तमान में 45 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां आने वाले ज्यादातर बच्चों के परिवार जन पालतू जानवरों की देखभाल करते समय गाली गलौज शब्दों का इस्तेमाल करते थे । शुरुआत में यही शब्द बच्चों की जुबान पर भी होते थे। इसके सुधार के लिए केंद्र पर बच्चों को आपस में बातचीत का सलीका सिखाया गया कम वजन के बच्चों के खानपान में आवश्यक सुधार के साथ उन्हें खेल-खेल में पोषक तत्वों से भरपूर फल और सब्जियों की पहचान कराई गयी । कविता और दूसरी गतिविधियों के माध्यम से हाथों की स्वच्छता व बाजार की वस्तुओं को न खाने के लिए प्रेरित किया गया तो बदलाव का असर दिखने लगा। आज केंद्र पर आने वाले सभी बच्चे स्वस्थ हैं और गाली गलौज के बजाय बताते हैं कि वह आगे चलकर पुलिस डॉक्टर आदि बनेंगे । क्या कहते हैं ग्रामीण
रसूलपुर सरैयाँ निवासी महेश पेशे से मजदूरी करते हैं। महेश बताते हैं कि उनकी दो माह की बेटी निधि का वजन महज दो किलोग्राम था। आंगनबाड़ी प्रतिमा ने सबसे पहले माँ के खानपान में सुधार कराया उन्हें घर के बने भोजन में हरी साग सब्जी शामिल करने के साथ आंगनबाड़ी से मिलने वाले पोषाहार को प्रतिदिन सेवन करने के लिए कहा। उनके सुझाव से बेटी को टीकाकरण और छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराया गया । इसके साथ ही उसे माँ के सीने से लगाकर केएमसी (कंगारू मदर केयर) दी गयी। एक माह बाद उसके वजन में एक किलोग्राम की वृद्धि हुई। छह माह की आयु पूरी होने के बाद निधि को स्तनपान के साथ-साथ घर में बनी हुई मिश्रित दाल मसला हुआ आलू व आंगनबाड़ी में मिलने वाला पोषक तत्वों से भरपूर फोर्टिफाइड राशन से निर्मित भोजन खिलाया गया। निधि आज 8 माह की है और स्वस्थ है। आंगनबाड़ी पर मिलने वाली सुविधाएं अनुपूरक आहार,टीकाकरण,स्वास्थ्य जांच,स्वास्थ्य एवं पोषण शिक्षा
3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को विद्यालय पूर्व शिक्षा बच्चों और उनकी माताओं की व्यापक देखभाल सहायता के लिए जनपद में 3472 आंगनबाड़ी केन्द्रों संचालित किए जा रहे हैं । यहां 3 से 6 वर्ष के 233056 बच्चे और 39510 गर्भवती पंजीकृत हैं । शुरुआती देखभाल सुरक्षित वातावरण पोषण संबंधी सहायता व समग्र विकास गतिविधियों के संचालन से इस वित्तीय वर्ष में 21666 बच्चे कुपोषण के चक्र से बाहर आ चुके हैं ।
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