दक्षिण भारत में चुनावी भूचाल, तमिलनाडु से बंगाल तक बदले समीकरण

तमिलनाडु में बदलेगा सत्ता का समीकरण? विजय की एंट्री से द्रविड़ राजनीति में नई हलचल, कई राज्यों में रोमांचक रुझान


चेन्नई/कोलकाता/गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम (राष्ट्र की परम्परा चुनावी डेस्क)। देश के पांच राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में चल रही मतगणना ने राजनीतिक माहौल को बेहद गर्म कर दिया है। सबसे ज्यादा चर्चा तमिलनाडु की राजनीति को लेकर हो रही है, जहां दशकों से चली आ रही द्रविड़ दलों की पारंपरिक राजनीति इस बार नए मोड़ पर दिखाई दे रही है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके (तमिलगा वेत्त्री कजगम) ने शुरुआती रुझानों में प्रभाव दिखाकर चुनावी मुकाबले को रोचक बना दिया है।
तमिलनाडु में अब तक डीएमके और एआईएडीएमके के बीच ही सत्ता का संघर्ष देखने को मिलता रहा है। 1967 के बाद से राज्य में द्रविड़ पहचान वाली पार्टियों का ही दबदबा रहा है, लेकिन इस बार बीजेपी और विजय की सक्रियता ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं।
राज्य की कुल 234 विधानसभा सीटों में से शुरुआती रुझानों में एआईएडीएमके 5 सीटों पर, विजय की टीवीके 3 सीटों पर, जबकि डीएमके और सीपीआई एक-एक सीट पर आगे दिखाई दे रहे हैं। हालांकि यह शुरुआती रुझान हैं और अंतिम परिणाम आने तक तस्वीर बदल सकती है।
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार फिलहाल मजबूत स्थिति में मानी जा रही थी। डीएमके गठबंधन के पास वर्तमान में 159 सीटें हैं और पार्टी का ओबीसी वोट बैंक पर मजबूत प्रभाव है। दूसरी ओर, जयललिता के निधन के बाद एआईएडीएमके नेतृत्व संकट और संगठनात्मक कमजोरी से जूझती दिख रही है।
बीजेपी ने इस चुनाव में “द्रविड़ बनाम राष्ट्रीय पहचान” का नया नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की लगातार सभाओं के जरिए बीजेपी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी भले अभी सत्ता से दूर हो, लेकिन डीएमके के सामने खुद को मुख्य चुनौती के रूप में स्थापित करने में सफल होती दिख रही है।
वहीं अभिनेता विजय की राजनीति में एंट्री ने चुनाव को सबसे ज्यादा दिलचस्प बना दिया है। आम लोगों के मुद्दों, भ्रष्टाचार और सिस्टम परिवर्तन की बात कर विजय ने युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को आकर्षित किया है। तमिलनाडु की राजनीति में पहले भी एमजीआर और जयललिता जैसे फिल्मी चेहरों ने बड़ी सफलता हासिल की थी, ऐसे में विजय को लेकर भी लोगों की उत्सुकता बढ़ी हुई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय की पार्टी एआईएडीएमके के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। यदि विजय लगातार सक्रिय राजनीति में बने रहते हैं तो आने वाले वर्षों में वे तमिलनाडु की राजनीति में बड़ी ताकत बन सकते हैं।
इधर केरल में शुरुआती रुझानों में कांग्रेस नीत यूडीएफ गठबंधन बढ़त बनाता नजर आ रहा है। चुनाव आयोग के अनुसार कांग्रेस 21 सीटों पर, सीपीएम 11 सीटों पर और आईयूएमएल 5 सीटों पर आगे चल रही है। केरल की राजनीति में इस बार यूडीएफ, एलडीएफ और एनडीए के बीच त्रिकोणीय मुकाबले की चर्चा तेज हो गई है।
पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा नजर भवानीपुर सीट पर बनी हुई है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के बीच कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है। शुरुआती रुझानों में ममता बनर्जी बढ़त बनाए हुए हैं। वहीं नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी आगे चल रहे हैं। आसनसोल दक्षिण में भाजपा की अग्निमित्रा पॉल और सोनारपुर दक्षिण में रूपा गांगुली भी शुरुआती बढ़त में हैं।
असम में शुरुआती रुझानों में बीजेपी गठबंधन को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। भाजपा 13 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 2 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। राज्य में कुल 126 विधानसभा सीटों के लिए मतगणना जारी है।
पुडुचेरी में बीजेपी-एआईएनआरसी गठबंधन शुरुआती बढ़त में दिखाई दे रहा है। यहां कुल 89.87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था।
देशभर में जारी इन चुनावी रुझानों ने यह संकेत दे दिया है कि दक्षिण भारतीय राजनीति में बदलाव की आहट तेज हो चुकी है। खासतौर पर तमिलनाडु में विजय की एंट्री ने आने वाले समय में नई राजनीतिक धुरी बनने की संभावनाओं को मजबूत कर दिया है।

Editor CP pandey

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