सलेमपुर (राष्ट्र की परम्परा)। सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व मां दुर्गा की उपासना और हिंदू नववर्ष के शुभारंभ से जुड़ा होता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है और इसका समापन 27 मार्च को पूर्णाहुति के साथ होगा।
यह जानकारी देते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि इस बार नवरात्रि का पर्व पूरे नौ दिनों तक विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
आचार्य अजय शुक्ल के अनुसार नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना (घटस्थापना) का शुभ मुहूर्त सुबह 6:52 बजे से 7:53 बजे तक रहेगा। यदि किसी कारणवश इस समय घटस्थापना संभव न हो सके, तो भक्त अभिजीत मुहूर्त (दोपहर 12:05 से 12:53 बजे) के दौरान भी कलश स्थापना कर सकते हैं।
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नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा
नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है—
- पहला दिन: मां शैलपुत्री
- दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी
- तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा
- चौथा दिन: मां कुष्मांडा
- पांचवां दिन: मां स्कंदमाता
- छठवां दिन: मां कात्यायनी
- सातवां दिन: मां कालरात्रि
- आठवां दिन: मां महागौरी
- नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री
अंतिम दिन कन्या पूजन के साथ व्रत का पारण किया जाता है।
सात्विक आहार और श्रद्धा से करें पूजा
आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि नवरात्रि के दौरान भक्तों को तामसिक भोजन से दूर रहकर सात्विक आहार ग्रहण करना चाहिए। व्रत रखने वाले लोग फलाहार करते हैं और पूरे नौ दिन मां दुर्गा की श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।
उन्होंने कहा कि पवित्र मन और सच्ची श्रद्धा से मां दुर्गा की पूजा करने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
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