लेख

“क्लासरूम से कॉर्पोरेट तक: उच्च शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी”

"डिग्री से दक्षता तक: शिक्षा प्रणाली को उद्योग से जोड़ने की चुनौती" "डिग्री नहीं, दक्षता चाहिए: नई अर्थव्यवस्था की नई…

1 year ago

पानी पेट और पहचान की लड़ाई ग्रामीण महिलाओं पर जलवायु की चोट

जलवायु संकट की चुप्पी में दबी औरतों की पुकार 2025 बीजिंग इंडिया रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन भारत की ग्रामीण…

1 year ago

गिलहरी और तोता: एक लघु संवाद

वट-वृक्ष की शीतल छाया में,बैठे थे दो प्राणी चुपचाप—एक चंचला चपल गिलहरी,दूजा हरा-पीला तोता आप। थाली में कुछ दाने गिरे…

1 year ago

रंगमंच पर जाति का खेल कितना जायज़?

कला का काम समाज को जागरूक करना है, उसकी विविधताओं को सम्मान देना है, और उस आईने की तरह बनना…

1 year ago

भीमराव अंबेडकर और आज विचारों का आईना या प्रतीकों का प्रदर्शन

डॉ० भीमराव अंबेडकर ने भारत को एक समतामूलक, न्यायप्रिय और जातिविहीन समाज का सपना दिखाया था। उन्होंने संविधान बनाया, शिक्षा…

1 year ago

अंबेडकर जयंती विशेष

लोकतांत्रिक भारत हमारा कर्तव्य हमारी जिम्मेवारी जनतंत्र की जान सजग नागरिक और सतत भागीदारी लोकतंत्र केवल अधिकारों का मंच नहीं,…

1 year ago

सरकारी स्कूलों को बन्द करने की बजाय उनका रुतबा बढ़ाये

भारत में सरकारी स्कूल सामाजिक समानता और शिक्षा के अधिकार के प्रतीक हैं, लेकिन बजट कटौती, ढांचागत कमी और शिक्षकों…

1 year ago

जयंती का शोर विचारों से ग़ैरहाज़िरी

मूर्ति की पूजा, विचारों की हत्या हाथ में माला, मन में पाखंड बाबा साहब के विचारों—जैसे सामाजिक न्याय, जातिवाद का…

1 year ago

ज्योतिबा फुले क्रांति की मशाल

ज्योतिराव फूले, जिन्होंने समाज को आँखें दीं। धूप थी अज्ञान की, अंधकार था घना,उग आया फूले-सा एक सूर्य अनमना।ज्योति बनी…

1 year ago

प्राइवेट सिस्टम का खेल: आम आदमी की जेब पर हमला

भारत में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी अधिकार आज निजी संस्थानों के लिए मुनाफे का जरिया बन चुके हैं। प्राइवेट…

1 year ago