लेख

नया भारत और फुले का सपना

"ज्योतिबा फुले का भारत बनाना अभी बाकी है" फुले केवल उन्नीसवीं सदी के समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि वे आज…

1 year ago

आज के दौर में भगवान महावीर के विचारों की प्रासंगिकता

एक नैतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की पुकार विशेष------(राष्ट्र की परम्परा) आज के भौतिकवादी और असहिष्णु समय में भगवान महावीर के…

1 year ago

मीडिया, स्त्री और सनसनी: क्या हम न्याय कर पा रहे हैं?

"धोखे की खबरें बिकती हैं, लेकिन विश्वास की कहानियाँ दबा दी जाती हैं — क्या हम संतुलन भूल गए हैं?"…

1 year ago

किसी को उजाड़ कर बसे तो क्या बसे: हैदराबाद के जंगलों की चीख

खजागुड़ा जैसे जंगलों को शहरीकरण के नाम पर नष्ट किया जा रहा है, जिससे न केवल पेड़, बल्कि वन्यजीव और…

1 year ago

कर पे कर और उसपे भी कर देनेवाला दब गया लेनेवाला बेफिकर

प्रतिक संघवी राजकोट गुजरात कोईभी देश की कर व्यवस्था यानी की टेक्स का ढांचा उसके देश की बहुत ही महत्व…

1 year ago

टैरिफ और वैश्विक व्यापार में परिवर्तन

टैरिफ, यानी व्यापार शुल्क, वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण आर्थिक उपकरण है। हाल के वर्षों में, विशेष…

1 year ago

श्रद्धांजलि: मनोज कुमार, एक युग-एक विचार-एक भावना

"है प्रीत जहाँ की रीत सदा मैं गीत वहाँ के गाता हूँभारत का रहने वाला हूँ भारत की बात सुनाता…

1 year ago

परिवार और समाज के अभिन्न अंग वरिष्ठ नागरिकों के हितों की रक्षा व क़ानून- सरकार का सम-सामयिक मार्गदर्शन व हस्तक्षेप की जरूरत

गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरित मानस में लिखा है चारि पदारथ करतल जाके।प्रिय पितु मातु प्राण सम जाके। अर्थात् जो…

1 year ago

जीवन का माली

जो रोकता, जो टोकता है,वही सत्य का दीप जला है।जो कटु वचन से राह दिखाए,सच मानो, सच्चा सखा है। जिस…

1 year ago

‘बिन तेरे बेचैन’

हरियाणवी सिनेमा में प्रेम, जुनून और मानसिक उथल-पुथल की अनोखी कहानी यह फिल्म हरियाणवी सिनेमा के बदलते परिदृश्य को दर्शाती…

1 year ago