फोटोग्राफी के जरिए संस्कृति और विरासत को समझने का मंच बना बौद्ध संग्रहालय

बुद्ध पूर्णिमा पर बौद्ध संग्रहालय में फोटोग्राफी राष्ट्रीय कार्यशाला व ‘धरोहर संग्रह’ प्रदर्शनी का शुभारंभ

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर में “फोटोग्राफी: पुरातत्व, इतिहास, कला एवं संस्कृति की अभिव्यक्ति का माध्यम” विषयक चार दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला एवं “धरोहर संग्रह” एकल प्रदर्शनी का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महापौर डॉ0 मंगलेश कुमार श्रीवास्तव ने उद्घाटन करते हुए कहा कि संग्रहालय में आयोजित शैक्षिक व रचनात्मक गतिविधियां समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और संवर्धन को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं में विरासत को सहेजने की क्षमता है, जिसे सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है, और यह कार्य संग्रहालय अपने आयोजनों के माध्यम से कर रहा है।

कार्यशाला के प्रथम दिवस पर विषय विशेषज्ञ डॉ0 तुलिका साहू (असिस्टेंट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, रायबरेली) ने “संग्रहालय में फोटोग्राफी: फ्रेम से परे देखना” विषय पर व्याख्यान एवं प्रशिक्षण दिया। उन्होंने संग्रहालय में फोटोग्राफी के दौरान प्रकाश के कलात्मक उपयोग, कैमरा एंगल, तकनीक, फ्लैश रिफ्लेक्शन और नियमों के पालन पर विशेष जोर दिया। साथ ही कलाकृतियों की गुणवत्ता और वास्तविकता बनाए रखने के महत्व को भी रेखांकित किया। करीब 18 वर्षों के अनुभव के साथ डॉ0 तुलिका साहू फोटोग्राफी में पीएचडी प्राप्त करने वाली उत्तर प्रदेश की पहली महिला हैं और उनका नाम लिम्का बुक व इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है।
प्रदर्शनी के अंतर्गत इतिहास, भारतीय दर्शन और संस्कृति को अभिव्यक्त करने वाले विविध संग्रह प्रस्तुत किए गए हैं। देवरिया के संग्रहकर्ता हिमांशु कुमार सिंह ने बताया कि यह प्रदर्शनी युवाओं को अपनी मूल संस्कृति से जोड़ने का माध्यम बनेगी। वे पिछले 30 वर्षों से डाक टिकट एवं धरोहर संग्रह कर रहे हैं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित हो चुके हैं।

कार्यक्रम संयोजक डॉ0 यशवन्त सिंह राठौर (उप निदेशक) ने बताया कि प्रदर्शनी में तथागत बुद्ध, भगवान राम एवं रामायण, नारी सशक्तिकरण, विभिन्न देशों के ध्वज, रेडक्रॉस, आजादी के गुमनाम नायक और महात्मा गांधी के जीवन दर्शन से संबंधित डाक टिकट, प्रथम दिवस आवरण, पोस्टकार्ड आदि प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न देशों की कागजी मुद्रा, सिक्के, चांदी के स्मारकीय सिक्के, प्राचीन ताले, कैमरे, पात्र, कैलकुलेटर और माचिस जैसे दुर्लभ संग्रह भी आकर्षण का केंद्र हैं। सुश्री आकृति गुप्ता द्वारा संग्रहित गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित डाक सामग्री को भी प्रदर्शनी में स्थान दिया गया है। यह प्रदर्शनी 04 मई 2026 तक निःशुल्क अवलोकन के लिए खुली रहेगी।
कार्यशाला के द्वितीय दिवस पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज के वरिष्ठ शिक्षक सुरेन्द्र कुमार यादव द्वारा यशोधरा सभागार में पूर्वाह्न 10:30 बजे से अपराह्न 1:30 बजे तक व्याख्यान एवं प्रशिक्षण दिया जाएगा।

rkpNavneet Mishra

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