गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने राजनीति विज्ञान विषय की दो महत्वपूर्ण पुस्तकों “लोकसंग्रह: द भारतीया मॉडल-ए टाइमलेस विजन फॉर ग्लोबल लीडरशिप” तथा “लोकसंग्रह: भारतीय मॉडल- वैश्विक नेतृत्व की एक शाश्वत दृष्टि” का विमोचन किया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीकांत पाण्डेय, समाजशास्त्र के डॉ. दीपेन्द्र मोहन, विभाग के वरिष्ठ शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
इन पुस्तकों का संपादन डॉ. महेंद्र कुमार सिंह ने किया है। दोनों पुस्तकें राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (आईसीएसएसआर) के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय ज्ञान परंपरा और वैश्विक नेतृत्व की अवधारणा” में प्रस्तुत शोधपत्रों पर आधारित हैं।
पुस्तकों में रेखांकित किया गया है कि भारतीय ज्ञान परंपरा नेतृत्व की एक समग्र एवं नैतिक अवधारणा प्रस्तुत करती है, जो कर्तव्य, नैतिकता, समरसता और लोककल्याण पर आधारित है। भारतीय दर्शन में ‘लोकसंग्रह’ की अवधारणा, जिसका उल्लेख भगवद्गीता में मिलता है, नेतृत्व को शक्ति प्रदर्शन के बजाय समाज और मानवता के प्रति नैतिक दायित्व के रूप में देखने की प्रेरणा देती है। विभिन्न विद्वानों के लेखों में ‘लोकसंग्रह’ को नैतिक, समावेशी और उत्तरदायी वैश्विक नेतृत्व का आधार बताया गया है।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस अकादमिक पहल की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल सिद्धांत आज के वैश्विक विमर्श को नई दिशा दे सकते हैं।
डॉ. महेंद्र कुमार सिंह ने कुलपति के मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. रजनीकांत पाण्डेय तथा वरिष्ठ शिक्षकों प्रो. विनीता पाठक, प्रो. गोपाल प्रसाद, प्रो. रुसिराम महानंदा और डॉ. अमित उपाध्याय सहित सभी विद्वानों और शोधार्थियों के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि ये पुस्तकें वैश्विक नेतृत्व के समकालीन विमर्श में भारतीय दृष्टिकोण को सशक्त रूप से प्रस्तुत करेंगी।
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