Friday, March 13, 2026
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मुख्यमंत्री पर टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन, पुतला दहन

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। नगर पंचायत परतावल के मुख्य बाजार चौराहे पर रविवार को मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। बजरंग शाखा के कार्यकर्ताओं ने एकत्र होकर प्रदर्शन किया और अब्दुल्ला सलीम का पुतला दहन कर आक्रोश जताया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के समर्थन में नारेबाजी करते हुए प्रशासन से मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।

बताया जा रहा है कि कथित विवादित टिप्पणी को लेकर क्षेत्र में नाराजगी फैल गई थी। इसी के विरोध में बजरंग शाखा के अध्यक्ष एवं पूर्व जिला पंचायत सदस्य काशीनाथ सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मुख्य बाजार चौराहे पर जुटे। प्रदर्शनकारियों ने पहले पुतले को बाजार चौराहे के चारों ओर घुमाते हुए विरोध दर्ज कराया और बाद में सड़क के बीच लाकर उसका दहन किया। इस दौरान योगी आदित्यनाथ जिंदाबाद और देश विरोधी ताकतों मुर्दाबाद जैसे नारों से क्षेत्र गूंजता रहा।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मुख्यमंत्री के संबंध में की गई कथित टिप्पणी बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित है, जिससे लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। उनका कहना था कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री लगातार प्रयास कर रहे हैं, जिसे जनता सराह रही है। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक मंच या माध्यम से इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है।

बजरंग शाखा के अध्यक्ष काशीनाथ सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश में सुशासन, सुरक्षा और विकास के प्रतीक बन चुके हैं। उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की अभद्र टिप्पणी समाज को स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि किसी के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया जाए। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर अब्दुल्ला सलीम के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान बाजार क्षेत्र में कुछ देर के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही और माहौल गरम रहा। कार्यक्रम में रमेश गुप्ता, श्रीराम गुप्ता, रविंद्र मद्धेशिया, संतोष मद्धेशिया, प्रभाव मद्धेशिया, जयप्रकाश, डॉ. बैजनाथ, सतीश जायसवाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष राजकुमार शर्मा, श्याम उपाध्याय सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

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NMMS परीक्षा में खुशी सोनकर का चयन, विद्यालय में खुशी का माहौल

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय आय एवं योग्यता परीक्षा (NMMS) में शिक्षा निकेतन लघु माध्यमिक विद्यालय, बरहज देवरिया की छात्रा खुशी सोनकर पुत्री कैलाश सोनकर के चयन से परिजनों और शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक सूर्यकांत जायसवाल ने छात्रा का उत्साहवर्धन करते हुए उसे पुरस्कृत किया। उन्होंने अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरित करते हुए कहा कि आगामी परीक्षाओं में अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं प्रतिभाग करें और मेहनत के साथ सफलता प्राप्त करें।
कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष जय नारायण त्रिपाठी, प्रिंस विद्यालय के प्रधानाध्यापक शिवानंद कुशवाहा, राजेश विश्वकर्मा, सहायक अध्यापक विनोद कुमार वर्मा, प्रदीप कुमार मौर्य, अमित विश्वकर्मा, मुदस्सर नजर सहित विद्यालय के सभी स्टाफ उपस्थित रहे।

टायर फटने से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से खाई में गिरा ट्रक, चालक-परिचालक सुरक्षित

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर रविवार सुबह एक ट्रक अनियंत्रित होकर लगभग 15 फीट नीचे खाई में गिर गया। यह हादसा रानीपुर थाना क्षेत्र में हुआ। मुजफ्फरनगर से गिट्टी लादकर बिहार जा रहे ट्रक के चालक और परिचालक इस दुर्घटना में सुरक्षित बच गए।

घटना रविवार सुबह लगभग 7:30 बजे रानीपुर ग्रामसभा के समीप स्थित पॉइंट संख्या 279.1 पर हुई। बताया गया कि ट्रक का बायां टायर अचानक फट गया, जिससे चालक वाहन पर से नियंत्रण खो बैठा। तेज रफ्तार ट्रक रेलिंग तोड़ते हुए एक्सप्रेसवे से करीब 15 फीट नीचे गहरी खाई में पलट गया।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण, राहगीर, रानीपुर थाना पुलिस और यूपीडा की टीम मौके पर पहुंची। इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद ट्रक के केबिन में फंसे चालक और परिचालक को मामूली चोटें आईं और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

यूपीडा की टीम ने क्रेन की सहायता से दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को हटाने और यातायात सामान्य करने का कार्य शुरू कर दिया है। रानीपुर पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में टायर फटने के कारण ट्रक अनियंत्रित होने से यह हादसा हुआ। पुलिस और यूपीडा की टीम मामले की जांच कर रही है।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर एक सप्ताह के भीतर यह तीसरी घटना है। इससे पहले भुसुवा के पास आलू लदा ट्रक पलट गया था, जबकि एक अन्य घटना में थार की टक्कर से एक बाइक सवार की मौत हो गई थी।

जननीजन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयशी

जो भी कहूँ जितना भी कहूँ,
बेहतर से बेहतर शब्द चुनू,
महिला शक्ति की महिमा में,
श्रद्धारूपिणी की गरिमा में।

जन्म के समय वो महिला थी,
जिसने थाम लिया था हाथों में,
डाक्टर, नर्स, दाई माँ बनकर,
जन्म कराया मुझको दुनिया में।

दुलराया मुझे गोद में पाला पोषा,
सर रख कर सोने को कंधा दिया,
एक महिला सदा साथ खड़ी मिली,
प्यारी माँ थी जिसने जन्म दिया।

बचपन में एक नारी ने ध्यान रखा,
साथ खेलने के लिए मौजूद वो थी,
बड़ी और छोटी दोनों ही बहनें थीं,
शिक्षक, दोस्त व हमराज़ भी थीं।

एक नारी ने मुझे पढ़ाया लिखाया,
विद्या दान किया, मेरी शिक्षक थी,
जीवन में निराश और हताश हुआ,
मुझे संभाला मेरी महिला मित्र थी।

मेरी अर्धांगिनी, सहयोगी, साथी,
जो प्रेम से सदा साथ खड़ी मिली,
मेरी पत्नी आजीवन मेरे साथ रही,
मेरे परिवार की अडिग धुरी रही।

जीवन की कठिनाई में साथ दिया,
जिन्होंने मेरा व्यवहार नरम किया,
बेटी, बहू घर परिवार का गौरव हैं,
दोनो कुलों की बनी वह मर्यादा हैं।

आख़िरी साँस जिस गोदी में लूँगा,
आदित्य गोद में जो मुझे सुलायेगी,
वह भी धरती माँ अद्भुत नारी होगी,
जननीजन्मभूमिश्चस्वर्गादपि गरीयशी।

डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’

समानता और न्याय से ही संभव मानव सभ्यता का विकास

शून्य भेदभाव पर व्याख्यान

बिछुआ/मध्य प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)। शासकीय महाविद्यालय बिछुआ में प्राचार्य डॉ. आर. पी. यादव के संरक्षण तथा स्वामी विवेकानंद कैरिअर प्रकोष्ठ की नोडल अधिकारी डॉ. फरहत मंसूरी के नेतृत्व में एक दिवसीय व्याख्यान “मानव सभ्यता की आधारशिला-शून्य भेदभाव” विषय पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. सायमा सरदेशमुख ने विद्यार्थियों के समक्ष विषय पर विस्तृत विचार रखते हुए कहा कि मानव सभ्यता का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। समानता और न्याय ही वह आधारशिला है, जिस पर एक सशक्त और प्रगतिशील सभ्यता का निर्माण होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि सभी मिलकर ‘शून्य भेदभाव’ को मानवता का मूल मंत्र बनाएं।
कार्यक्रम में डॉ. अजीत डेहरिया, डॉ. मनिता कौर विरदी और डॉ. कीर्ति डेहरिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए। छात्राओं ने भी सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लेते हुए अपने अनुभव और विचार साझा किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. नमिता चौबे, डॉ. शिवानी सोनी और डॉ. आकाश आहके का विशेष सहयोग रहा। संचालन डॉ. फरहत मंसूरी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन डॉ. नसरीन अंजुम ख़ान ने किया।
इस अवसर पर डॉ. एन. एल. साहू, रामप्रकाश डेहरिया, प्रदीप भारती, शांत रेखा वाडीवा, सूर्यकांत शुक्ला सहित महाविद्यालय का समस्त स्टाफ और विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में छात्राओं से फीडबैक लिया गया, जिसमें सभी ने कार्यक्रम को अत्यंत लाभदायक और प्रेरणादायी बताया।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर जागरूकता शिविर में महिला सम्मान का संदेश

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के कृषि एवं प्राकृतिक विज्ञान संस्थान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में महिलाओं के सम्मान, समानता एवं सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
मुख्य अतिथि प्रो. उमा श्रीवास्तव, अध्यक्ष गणित एवं सांख्यिकी विभाग ने अपने उद्बोधन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए इसकी उत्पत्ति और महत्व की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्राचीन भारत में महिलाओं की गौरवशाली परंपरा और उनके योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में महिलाओं को सदैव उच्च स्थान प्राप्त रहा है। साथ ही वर्तमान समय में महिलाओं के शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन और सामाजिक क्षेत्रों में बढ़ते योगदान की सराहना की।
मुख्य वक्ता प्रो. अनुभूति दुबे, अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं के सम्मान और समान अवसरों पर निर्भर करती है। उन्होंने उपस्थित छात्रों को महिला सम्मान और लैंगिक समानता की शपथ दिलाई तथा समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. राम रतन सिंह, निदेशक कृषि एवं प्राकृतिक विज्ञान संस्थान ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल एक दिवस तक सीमित न रहकर निरंतर प्रयासों के माध्यम से समाज में व्यवहारिक रूप से लागू होना चाहिए। उन्होंने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सत्यपाल सिंह ने विषय प्रवर्तन करते हुए महिला दिवस की प्रासंगिकता तथा समाज में महिलाओं की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नुपूर सिंह ने आभार ज्ञापन प्रस्तुत किया तथा डॉ. तलहा अंसारी ने कार्यक्रम का संचालन किया।
इस अवसर पर बलिंदर यादव, विनीत सिंह, राजेंद्र मौर्य सहित अनेक शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से महिला सम्मान, समानता और सशक्तिकरण का संदेश दिया गया तथा उपस्थित सभी लोगों ने महिलाओं के प्रति सम्मानपूर्ण व्यवहार बनाए रखने का संकल्प लिया।

कुत्ते के काटने पर एसडीएम ने डीएम से मांगी आठ दिन की छुट्टी, स्वीकृत

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में तैनात उप जिलाधिकारी बैरिया आलोक प्रताप सिंह द्वारा कुत्ते के काटने के बाद उपचार के लिए जिलाधिकारी से आठ दिन की छुट्टी मांगे जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में जिलाधिकारी को भेजे गए प्रार्थना पत्र में उन्होंने अपनी स्थिति का उल्लेख किया है।
आवेदन में एसडीएम आलोक प्रताप सिंह ने लिखा है कि पालतू कुत्ते ने उनके दोनों हाथों में काट लिया है, जिससे हाथों में गहरा जख्म हो गया है। स्थानीय डॉक्टर से इलाज कराया गया, लेकिन घाव से खून बहना अब तक बंद नहीं हो रहा है और दर्द भी बना हुआ है।
उन्होंने पत्र में बताया कि चोट के कारण हाथों से सामान्य कार्य करना भी मुश्किल हो गया है। चिकित्सकों ने बेहतर उपचार के लिए किसी अच्छे संस्थान या विशेषज्ञ डॉक्टर से इलाज कराने की सलाह दी है।
इसी कारण उन्होंने 6 मार्च 2026 से 13 मार्च 2026 तक उपचार के लिए अवकाश देने और मुख्यालय छोड़ने की अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया है। साथ ही पत्र में यह भी लिखा है कि हाथों में चोट होने के कारण वह हस्ताक्षर करने में असमर्थ हैं, इसलिए आवेदन पर अंगूठे का निशान लगा रहे हैं।
मिल रही सूचना के अनुसार जिलाधिकारी ने आठ दिन के अवकाश स्वीकृत कर लिया है।

नारी: सृजन, शक्ति और सभ्यता की आधारशिला

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष- नवनीत मिश्र

नारी शक्ति है, सम्मान है।
नारी गौरव है, अभिमान है।
नारी जननी है, संस्कृति के प्राण है।

भारतीय संस्कृति में नारी को सृष्टि की मूल शक्ति के रूप में देखा गया है। हमारे शास्त्रों में नारी को देवी स्वरूप माना गया है। “त्वं स्वाहा त्वं स्वधा त्वं हि वषट्कारः स्वरात्मिका” जैसे मंत्रों में नारी की दिव्य शक्ति का वर्णन मिलता है, जिसका अर्थ है कि नारी ही यज्ञ की आहुति है, श्रद्धा है और जीवन की ऊर्जा का मूल स्रोत है। यही कारण है कि भारतीय परंपरा में शक्ति की आराधना के रूप में दुर्गा, सरस्वती और लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

इतिहास के पन्नों में भी नारी की असाधारण भूमिका स्पष्ट दिखाई देती है। स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई, सरोजिनी नायडू और कस्तूरबा गांधी जैसी महिलाओं ने अपने साहस और नेतृत्व से देश को नई प्रेरणा दी। शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में सावित्रीबाई फुले ने महिला शिक्षा की नींव रखकर समाज में जागरूकता का दीप जलाया। समय के साथ महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अंतरिक्ष विज्ञान में कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स ने विश्व पटल पर भारत का नाम रोशन किया, तो खेल के क्षेत्र में पी.वी. सिंधु, मैरी कॉम और साक्षी मलिक जैसी खिलाड़ियों ने यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के सामने कोई बाधा टिक नहीं सकती। राजनीति, प्रशासन, साहित्य, शिक्षा और विज्ञान जैसे अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियाँ लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रही हैं।

इन्हीं उपलब्धियों और संघर्षों को सम्मान देने के उद्देश्य से हर वर्ष 8 मार्च को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 20वीं सदी के प्रारंभ में महिलाओं के अधिकारों, समान वेतन और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर हुए आंदोलनों से हुई। संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 1975 से इस दिवस को आधिकारिक रूप से मनाना शुरू किया, जिसके बाद से यह दिन महिलाओं के अधिकार, समानता और सशक्तिकरण का वैश्विक प्रतीक बन गया। आज समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समान अवसर मिलें। एक शिक्षित और सशक्त महिला केवल अपने जीवन को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को समृद्ध बनाती है। यही कारण है कि कहा जाता है “यदि आप एक पुरुष को शिक्षित करते हैं तो एक व्यक्ति शिक्षित होता है, लेकिन यदि एक महिला को शिक्षित करते हैं तो पूरा परिवार शिक्षित होता है।”

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि नारी केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण की महत्वपूर्ण भागीदार है। जब नारी का सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा, तभी एक संतुलित, प्रगतिशील और समृद्ध समाज का निर्माण संभव होगा।

अहंकार: व्यक्ति और समाज के पतन का कारण

मनुष्य के जीवन में अहंकार एक ऐसा सूक्ष्म विष है जो धीरे-धीरे उसकी विवेकशीलता, संवेदनशीलता और संतुलन को नष्ट कर देता है। इतिहास और वर्तमान दोनों इस सत्य के साक्षी हैं कि जब भी किसी व्यक्ति, समाज या सत्ता में अहंकार का प्रभाव बढ़ता है, उसी क्षण उसके पतन की प्रक्रिया भी प्रारंभ हो जाती है। भारतीय चिंतन परंपरा में इसलिए बार-बार कहा गया है कि अहंकार अंततः मनुष्य को ही निगल जाता है। यह वह आग है जो पहले दूसरों को जलाने का भ्रम पैदा करती है, पर अंत में स्वयं को ही भस्म कर देती है।

अहंकार का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव यह है कि यह व्यक्ति को वास्तविकता से दूर कर देता है। जब किसी को अपने पद, शक्ति, ज्ञान या संपत्ति पर अत्यधिक गर्व होने लगता है, तब वह दूसरों की भावनाओं और सलाहों को महत्व देना बंद कर देता है। धीरे-धीरे वह स्वयं को ही अंतिम सत्य मानने लगता है। यही वह अवस्था है जहाँ से निर्णयों में संतुलन समाप्त होने लगता है और व्यक्ति या संस्था गलत दिशा में बढ़ने लगती है। इतिहास के पन्नों में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं जहाँ बड़े-बड़े साम्राज्य और शक्तिशाली व्यक्तित्व केवल अपने अहंकार के कारण मिट्टी में मिल गए।

समकालीन सामाजिक और राजनीतिक जीवन में भी यह प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पद और अधिकार जनता की सेवा के लिए दिए जाते हैं, लेकिन कई बार सत्ता और शक्ति का अहंकार व्यक्ति को यह भूलने पर मजबूर कर देता है कि वह समाज का प्रतिनिधि है, स्वामी नहीं। जब नेतृत्व में संवाद और संवेदनशीलता की जगह अहंकार आ जाता है, तब जनता और प्रशासन के बीच दूरी बढ़ने लगती है। यह दूरी धीरे-धीरे असंतोष, अविश्वास और सामाजिक विघटन का कारण बनती है। इसलिए लोकतंत्र की सफलता के लिए विनम्रता और जवाबदेही उतनी ही आवश्यक है जितनी शक्ति और अधिकार।

अहंकार का प्रभाव केवल सत्ता या राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह व्यक्ति के निजी जीवन को भी गहराई से प्रभावित करता है। परिवार, मित्रता और सामाजिक संबंध आपसी सम्मान, विश्वास और संवाद पर आधारित होते हैं। जब किसी संबंध में अहंकार प्रवेश करता है, तो संवाद समाप्त होने लगता है और दूरी बढ़ने लगती है। यही कारण है कि कई बार छोटे-छोटे मतभेद भी बड़े विवाद का रूप ले लेते हैं। यदि मनुष्य विनम्रता और सहिष्णुता को अपनाए, तो अधिकांश समस्याएँ स्वतः समाप्त हो सकती हैं।

भारतीय संस्कृति और दर्शन ने सदैव विनम्रता को सर्वोच्च गुण माना है। संतों और महापुरुषों ने अपने जीवन और शिक्षाओं के माध्यम से यही संदेश दिया कि महानता का वास्तविक आधार नम्रता है। कहा भी गया है कि जिस वृक्ष पर फल अधिक होते हैं, वह उतना ही झुकता है। यह प्रतीक हमें सिखाता है कि जितनी अधिक उपलब्धि या ज्ञान प्राप्त हो, उतना ही अधिक विनम्र होना चाहिए। यही वह गुण है जो व्यक्ति को समाज में सम्मान और स्थायी प्रतिष्ठा दिलाता है।

आज के तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में यह और भी आवश्यक हो गया है कि व्यक्ति अपनी सफलता और शक्ति के साथ संयम और विनम्रता को भी अपनाए। आधुनिक जीवन की प्रतिस्पर्धा और उपलब्धियों की दौड़ कई बार मनुष्य को आत्मकेंद्रित बना देती है, लेकिन यह समझना आवश्यक है कि कोई भी उपलब्धि केवल व्यक्तिगत प्रयास का परिणाम नहीं होती। उसमें समाज, परिवार और अनेक अदृश्य सहयोगों की भूमिका होती है। जब मनुष्य इस सत्य को समझ लेता है, तब अहंकार स्वतः समाप्त होने लगता है और उसके स्थान पर कृतज्ञता और सेवा की भावना जन्म लेती है।

अंततः यह सत्य अटल है कि अहंकार जितना बढ़ता है, पतन उतना ही निकट आ जाता है। इसलिए यदि व्यक्ति अपने जीवन, संबंधों और समाज को संतुलित और समरस बनाए रखना चाहता है, तो उसे अहंकार से दूरी बनाकर विनम्रता, संवाद और सेवा के मार्ग को अपनाना होगा। यही वह मार्ग है जो व्यक्ति को वास्तविक सम्मान दिलाता है और समाज को स्थिरता तथा सामंजस्य प्रदान करता है।

अवैध शीशम की लकड़ी से लदा ट्रक पकड़ा, पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में अवैध लकड़ी के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत शनिवार रात पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता मिली। कोतवाली थाना क्षेत्र के बागापार चौराहा स्थित सड़कहिंयां पुल के पास पुलिस ने शीशम की अवैध लकड़ी से लदे एक ट्रक को पकड़ लिया। चालक लकड़ी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा सका, जिसके बाद ट्रक को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रक संख्या UP 53 FT 9979 सिद्धार्थनगर क्षेत्र से शीशम की लकड़ी लादकर कुशीनगर की ओर जा रहा था। शनिवार रात करीब आठ बजे जब ट्रक बागापार चौराहा स्थित सड़कहिंयां पुल के पास पहुंचा, तभी बागापार चौकी पर तैनात एसआई नितेश कुमार ने वाहन को रोककर उसकी जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने चालक से लकड़ी के परिवहन से संबंधित कागजात मांगे, लेकिन चालक कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। कागजात न मिलने पर पुलिस को मामला संदिग्ध लगा और ट्रक को कब्जे में लेकर बागापार चौकी पर खड़ा करा दिया गया।

पूछताछ में चालक ने अपना नाम नीरज निवासी कोंहड़गड्डी, खड्डा जनपद कुशीनगर बताया। प्रारंभिक जानकारी में यह भी सामने आया कि ट्रक में लदी लकड़ी का मालिक गोविंद चौहान बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि लकड़ी कहां से काटी गई और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था।

घटना की सूचना मिलते ही पकड़ी रेंज के वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। वन दरोगा गौरव त्रिपाठी के नेतृत्व में टीम ने ट्रक में लदी लकड़ी की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में लकड़ी शीशम की बताई जा रही है, हालांकि वन विभाग की टीम लकड़ी की मात्रा और उसके वैध या अवैध होने की पुष्टि करने में जुटी है।

इस दौरान मौके पर बागापार चौकी प्रभारी जटाशंकर सिंह, वन दरोगा हरिराम यादव, वन रक्षक अभिषेक बाजपेई सहित पुलिस और वन विभाग के अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। पुलिस ने ट्रक को आगे की कार्रवाई के लिए कोतवाली थाने भिजवा दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में लकड़ी अवैध पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीम पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।

कलश यात्रा के साथ मधुमास महोत्सव व श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ

भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। मधुमास के पावन अवसर पर क्षेत्र में भक्ति और आस्था का अनोखा माहौल देखने को मिला। शनिवार 7 मार्च को देवढी से भव्य कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु भक्तिभाव के साथ शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच श्रद्धालु सरयू तट (घाघरा) स्थित कालीचरण घाट पहुंचे, जहां विधि-विधान के साथ जल भरकर कलश में स्थापित किया गया। इसके बाद श्रद्धालु कलश लेकर पुनः देवढी के लिए रवाना हुए।
मधुमास महोत्सव के अंतर्गत चंद्रेश्वर महादेव धाम, देवढी (प्राथमिक विद्यालय ज्ञान छपरा से जाने वाले चक मार्ग) पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। यह कथा 8 मार्च से 14 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक होगी।
कथा का वाचन भागवत भास्कर कृष्ण चंद्र शास्त्री (वृंदावन) द्वारा किया जाएगा। पहली बार देवरिया की इस पावन धरती पर वे श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराएंगे।
इस आयोजन के मुख्य यजमान अक्षयबर मिश्रा हैं। आयोजन समिति में अध्यक्ष उग्रसेन सिंह, सचिव विवेकानंद मिश्रा, कोषाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह, व्यवस्थापक मिंटू सिंह, महामंत्री संजय सिंह, उपाध्यक्ष दिनेश सिंह के साथ भूपेंद्र सिंह, हरेराम सिंह सहित अनेक सदस्य और ग्रामवासी सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।
कलश यात्रा के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने इसे सनातन परंपरा और क्षेत्र की आस्था का प्रतीक बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से कथा में शामिल होकर पुण्य लाभ लेने की अपील की।

होमगार्ड जीतराम के सेवानिवृत्त होने पर विदाई समारोह आयोजित

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। थाना गढ़िया रंगीन में होमगार्ड स्वयंसेवक जीत राम के सेवानिवृत्त होने पर शनिवार को विदाई समारोह आयोजित किया गया। 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद उन्होंने अपनी सेवाओं से अवकाश ग्रहण किया।

समारोह में प्रभारी निरीक्षक हरकेश सिंह और कंपनी मेजर रामप्रकाश मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस दौरान थाना स्टाफ और होमगार्ड जवानों ने जीत राम को पुष्पहार पहनाकर तथा शॉल व अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

अधिकारियों ने उनके लंबे सेवाकाल और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पूरे कार्यकाल में ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया। कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने उनके स्वस्थ और सुखद भविष्य की कामना की। समारोह में थाना स्टाफ और होमगार्ड के जवान उपस्थित रहे।

तेज रफ्तार बाइक की टक्कर से सड़क पार कर रही महिला घायल

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के कस्बा गढ़िया रंगीन में शनिवार दोपहर सड़क पार कर रही एक महिला बाइक की टक्कर से घायल हो गई। हादसे में बाइक सवार युवक को भी चोट आई है।

मिली जानकारी के अनुसार टाटराबाद निवासी संदीप (25) पुत्र रामभरोसे बाइक से कहीं जा रहा था। इसी दौरान गढ़िया रंगीन निवासी शोभा देवी पत्नी धीरेन्द्र सड़क पार कर रही थीं। तभी तेज गति से आ रही बाइक उनसे टकरा गई, जिससे महिला सड़क पर गिर गई और उनके सिर में गंभीर चोट लग गई।

घटना में बाइक सवार संदीप भी घायल हो गया। सूचना मिलने पर डायल 112 और गढ़िया रंगीन थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घायल महिला को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गढ़िया रंगीन भिजवाया, लेकिन वहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजन उन्हें आगे इलाज के लिए जैतीपुर ले गए, जहां उनका उपचार जारी है।

महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए 11 मार्च को महिला आयोग की जनसुनवाई

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्या जनक नंदिनी की अध्यक्षता में 11 मार्च 2026 को पूर्वाह्न 11:00 बजे से तहसील खलीलाबाद के सभागार में महिला जनसुनवाई कार्यक्रम एवं समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र ने बताया कि इस कार्यक्रम में पीड़ित महिलाएं उपस्थित होकर अपनी समस्याएं रख सकती हैं और उनका समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।
इसके अलावा ग्राम पंचायत काली जगदीशपुर, विकास खंड नाथनगर में महिलाओं से संबंधित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता के लिए चौपाल का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें महिलाओं को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
कार्यक्रमों के सफल आयोजन के लिए उपजिलाधिकारी खलीलाबाद को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

मुस्कान और भावुक पलों के बीच विद्यार्थियों को दी गई विदाई

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। दृष्टि पब्लिक स्कूल बेलमा कटका में कक्षा 8 के विद्यार्थियों के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला उपाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र मिश्र उपस्थित रहे।
समारोह के दौरान कक्षा 8 के विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और अनुशासन, परिश्रम तथा संस्कार से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम में विद्यालय परिवार की ओर से मुख्य अतिथि का स्वागत किया गया। विद्यालय के प्रबंधक ठाकुर प्रसाद पांडेय ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई में मेहनत और लगन से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभिभावक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।