Thursday, May 14, 2026
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4 फरवरी को 199 शिक्षक तय करेंगे 6 पदों का भविष्य

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पीजी कालेज महराजगंज बनेगा सुआक्टा चुनावी अखाड़ा

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से संबद्ध अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों के संगठन सिद्धार्थ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (सुआक्टा) के चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। संगठन के कुल 6 पदों के लिए 4 फरवरी को मतदान कराया जाएगा, जिसमें चार जनपदों के 199 शिक्षक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
यह चुनाव पीजी कॉलेज महराजगंज में संपन्न होगा। चुनाव की पूरी जिम्मेदारी सुआक्टा द्वारा पीजी कॉलेज प्रशासन को सौंपी गई है। मुख्य चुनाव अधिकारी के रूप में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.अजय कुमार मिश्रा की देख-रेख में चुनाव संपन्न कराया जाएगा।
मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि सुआक्टा के अंतर्गत सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से संबद्ध बस्ती,खलीलाबाद, सिद्धार्थनगर और महराजगंज जनपदों के सभी अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षक इस चुनाव में भाग लेंगे। कुल 199 शिक्षक मतदाता पंजीकृत हैं।
उन्होंने बताया कि संगठन के जिन पदों के लिए चुनाव कराया जाना है, उनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष महामंत्री, संयुक्त मंत्री,
सह मंत्री शामिल हैं।
नामांकन प्रक्रिया के तहत 30 और 31 जनवरी को पर्चा दाखिल किया जा रहा है। पहले दिन हुए नामांकन में चार पदों के लिए उम्मीदवारों ने पर्चा दाखिल किया।
अध्यक्ष पद हेतु डॉ. विनय कुमार सिंह,महिला उपाध्यक्ष पद हेतु डॉ. किरण देवी,महामंत्री पद हेतु प्रो.राजेंद्र बौद्ध और संयुक्त मंत्री पद हेतु डॉ. अरविंद त्रिपाठी ने नामांकन किया है।
चुनाव अधिकारी ने बताया कि 31 जनवरी को शाम 5 बजे नामांकन पत्रों की जांच एवं सूची का प्रकाशन किया जाएगा। इसके बाद 01 फरवरी को शाम 4 बजे तक नामांकन वापसी की प्रक्रिया चलेगी, जबकि अंतिम सूची का प्रकाशन 01 फरवरी को शाम 5 बजे किया जाएगा।
04 फरवरी को चुनावी कार्यक्रम के अनुसार प्रातः10:30 से 12:30 बजे तक अधिवेशन,1:00 बजे से 3:00 बजे तक मतदान,4:00 बजे से मतगणना,तत्पश्चात निर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ ग्रहण कराया जाएगा।
निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए प्रो.धर्मेंद्र सोनकर, डॉ. राणा प्रताप तिवारी, डॉ. नंदिता मिश्रा और डॉ. प्राची कुशवाहा को सहायक चुनाव अधिकारी नामित किया गया है।

सरकारी संवेदनहीनता की तस्वीर: शवदाह गृह बना मजाक

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महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सरकारी योजनाओं और जमीनी सच्चाई के बीच की खाई एक बार फिर सामने आई है। लक्ष्मीपुर ब्लाक के एकसड़वां ग्राम पंचायत स्थित डंडा नदी के किनारे जोगियाबारी घाट पर बना अंत्योष्ट स्थल सिर्फ कागजों में ही पूर्ण दिखाया गया है, जबकि वास्तविकता में आज भी ग्रामीणों को खुले आसमान के नीचे अपनों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।
सरकार की मंशा ग्रामीण क्षेत्रों में सुव्यवस्थित और सुविधायुक्त अंत्येष्टि स्थल उपलब्ध कराने की थी, ताकि शोक की घड़ी में परिजनों को मूलभूत सहूलियत मिल सके। लेकिन जोगियाबारी घाट की बदहाल तस्वीर यह साबित करती है कि यह योजना फाइलों से आगे नहीं बढ़ सकी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकारी अभिलेखों में करीब 10 वर्ष पूर्व इस अंत्येष्टि स्थल के निर्माण पर लगभग 10 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इस राशि में टीन शेड, शवदाह के लिए पक्का स्टैंड, शौचालय, पेयजल व्यवस्था, लकड़ी भंडारण कक्ष और केयर टेकर की सुविधा शामिल थी। लेकिन मौके पर स्थिति इसके ठीक उलटा है।
टीन शेड जर्जर हो चुके हैं, बैठने के लिए बने स्लैब टूटे पड़े हैं और शवदाह के लिए आज तक पक्का स्टैंड ही नहीं बन सका। जहां स्टैंड होना था, वहां मिट्टी धंस चुकी है। मजबूरी में परिजन खुले मैदान में चिता सजाते हैं
बरसात के दिनों में स्थिति और भयावह हो जाती है। खुले में शवदाह करना न केवल कठिन होता है, बल्कि शोकाकुल परिजनों को मानसिक व शारीरिक दोनों तरह की पीड़ा झेलनी पड़ती है।
अंत्येष्टि स्थल पर बने शौचालयों की हालत भी बेहद खराब है। सेप्टिक टैंक का ढक्कन गायब है, दरवाजे टूट चुके हैं और चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं। उपयोग के लायक न होने से शौचालय बंद पड़े हैं। शवदाह के लिए लकड़ी रखने के लिए बनाए गए गोदाम जर्जर हैं और उनमें आज तक दरवाजे नहीं लग सके।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पूरा बजट निकाल लिया गया, लेकिन काम अधूरा छोड़ दिया गया। वर्षों से यह घाट आस-पास के दर्जनों गांवों के लिए अंतिम संस्कार का प्रमुख केंद्र है, इसके बावजूद न मरम्मत कराई गई और न ही अधूरे कार्य पूरे हुए।
इस संबंध में जब बीडीओ लक्ष्मीपुर मृत्युजंय कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें समस्या की जानकारी मिली है। कमियों को दूर कराने के लिए कार्रवाई की जाएगी और जो भी खामियां हैं, उन्हें जल्द पूरा कराया जाएगा।अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदारों की यह कार्रवाई कागजों से निकलकर धरातल पर दिखेगी, या ग्रामीणों को यूं ही खुले आसमान के नीचे अपनों का अंतिम संस्कार करना पड़ेगा?

चार माह से गिट्टी में तब्दील पीडब्ल्यूडी मार्ग, 30 हजार लोगों की राह बनी जोखिम भरी

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महराजगंज(राष्ट्र की परंपरा) बृजमनगंज ब्लॉक अंतर्गत बेलौही–ललाइन पैसिया पीडब्ल्यूडी मार्ग पर विभागीय लापरवाही राहगीरों पर भारी पड़ रही है। करीब चार महीने पहले सड़क निर्माण के नाम पर लगभग दो किलोमीटर तक बड़ी-बड़ी गिट्टियां डालकर काम अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे यह मार्ग अब सड़क नहीं बल्कि दुर्घटनाओं का रास्ता बन चुका है।
सड़क पर बिखरी गिट्टियों के कारण बाइक व साइकिल सवार आए दिन फिसलकर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं। हालत यह है कि गिट्टियां फैलकर सड़क किनारे खेतों तक पहुंच गई हैं, जिससे किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार यह मार्ग बेलौही, रायपुर पंडित, अमहवा टोला, मदरसा और जरौली होते हुए गोरखपुर–सोनौली राष्ट्रीय राजमार्ग के ललाइन पैसिया से जुड़ता है। इस रास्ते से प्रतिदिन करीब 30 हजार लोग आवागमन करते हैं। ट्रैक्टर-ट्रॉली, ट्रक जैसे भारी वाहनों के गुजरने से सड़क किनारे गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे छोटे चार पहिया वाहनों का निकलना भी मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों में विभाग के प्रति भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र सड़क निर्माण पूरा नहीं किया गया तो किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण कार्य पूर्ण कराने की मांग की है।
इस संबंध में अधीशासी अभियंता एडिसन सिंह ने बताया कि समस्या संज्ञान में है और जल्द ही सड़क का निर्माण कार्य पूरा कराकर लोगों को राहत दी जाएगी।

शराब के नशे में तथाकथित पत्रकार ने बिजली कर्मियों से की अभद्रता

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धमकी भरा ऑडियो वायरल

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)
जैतीपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत रामपुर में बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ अभद्रता और धमकी देने का मामला सामने आया है। खुद को पत्रकार बताने वाले एक व्यक्ति द्वारा जेई और लाइनमैन को फोन पर धमकाने का ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे बिजली विभाग के कर्मचारियों में रोष व्याप्त है।
जानकारी के अनुसार शुक्रवार को रामपुर गांव की एक गली में मकान निर्माण कार्य चल रहा था। निर्माणाधीन मकान की दीवार के ऊपर से हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लाइनमैन सर्वेश कुमार द्वारा करीब 30 मिनट के लिए बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद की गई थी।
इसी अस्थायी कटौती से नाराज होकर खुद को पत्रकार बताने वाले धर्मेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कथित रूप से शराब के नशे में जेई अजीत कुमार और लाइनमैन सर्वेश कुमार को फोन किया। आरोप है कि फोन कॉल के दौरान उसने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और सरकारी कर्मचारियों को धमकाते हुए उनके कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया। बातचीत की रिकॉर्डिंग अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित व्यक्ति पूर्व में भी पत्रकारिता का हवाला देकर विभिन्न विभागों के कर्मचारियों पर दबाव बनाने की कोशिश करता रहा है। वायरल ऑडियो में उसका व्यवहार आक्रामक और धमकी भरा बताया जा रहा है।
घटना के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों में गहरी नाराजगी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार सुरक्षा कारणों से की गई अस्थायी बिजली कटौती पर इस तरह का व्यवहार निंदनीय है। मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है और पूरे प्रकरण में विधिक कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।

कांट क्षेत्र के भानपुर नगरिया में बेखौफ अवैध खनन

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प्रशासन की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)
थाना कांट क्षेत्र के भानपुर नगरिया गांव में अवैध खनन का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। आरोप है कि खनन माफिया प्रशासन और पुलिस की कथित मिलीभगत के चलते बेखौफ होकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। हालात यह हैं कि जिम्मेदार विभाग सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बने हुए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, बिना किसी वैध अनुमति के मिट्टी व बालू का खनन लगातार किया जा रहा है। भारी-भरकम ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिन-रात गांव की सड़कों से गुजर रही हैं, जिससे सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और आमजन की सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है। रात करीब 10 बजे से लेकर सुबह 8 बजे तक खनन कार्य जारी रहता है, जो प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस अवैध खनन की कई बार शिकायत संबंधित अधिकारियों व पुलिस से की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन देकर मामले को टाल दिया गया। किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई न होने से अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है।
अवैध खनन से पर्यावरण को भी भारी क्षति पहुंच रही है। उपजाऊ मिट्टी का नुकसान हो रहा है, जलस्तर गिरता जा रहा है और भविष्य में इसका दुष्परिणाम क्षेत्रवासियों को भुगतना पड़ सकता है। इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी लोगों में रोष पैदा कर रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। साथ ही जिलाधिकारी एवं उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक आंखें मूंदे बैठा रहता है या फिर अवैध खनन के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाता है।

ईसारपीठापट्टी के लोकप्रिय प्रधान शिव शंकर यादव का आकस्मिक निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

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बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

ईसारपीठापट्टी गांव के वर्तमान प्रधान एवं प्रधान संघ के अध्यक्ष शिव शंकर यादव के आकस्मिक निधन की दुःखद सूचना से पूरा क्षेत्र गहरे शोक में डूब गया है। बताया जा रहा है कि उनकी मृत्यु नोएडा में हृदयगति रुकने से हुई। उनके निधन की खबर मिलते ही गांव सहित आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों को इस असमय हुई क्षति पर विश्वास करना कठिन हो रहा है। शिव शंकर यादव लंबे समय से सक्रिय और लोकप्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। उन्होंने चार बार ग्राम प्रधान के रूप में गांव की कमान संभाली और इस बार भी जनता के विश्वास पर खरे उतरते हुए प्रधान निर्वाचित हुए थे। इसके साथ ही वे प्रधान संघ के अध्यक्ष तथा ब्लॉक स्तर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे थे। उनके नेतृत्व में गांव में अनेक विकास कार्य हुए, जिनकी चर्चा आज भी ग्रामीण गर्व से करते हैं।उनका व्यक्तित्व अत्यंत सरल, सहज और मिलनसार था। वे हर वर्ग के लोगों से आत्मीयता के साथ मिलते थे। चाहे गरीब परिवार की समस्या हो या गांव के किसी सार्वजनिक कार्य का मुद्दा, वे हमेशा आगे बढ़कर समाधान कराने का प्रयास करते थे। जनसेवा को उन्होंने सच मायनों में अपना धर्म बना लिया था। यही कारण था कि वे केवल एक प्रधान नहीं, बल्कि गांव के संरक्षक के रूप में देखे जाते थे।ग्रामीणों का कहना है कि श्री यादव ने अपने कार्यकाल में सड़क, नाली, पेयजल, आवास योजना और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया। वे गांव की हर छोटी-बड़ी समस्या को गंभीरता से लेते थे और संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर उसका समाधान कराने की पूरी कोशिश करते थे। उनके प्रयासों से कई जरूरतमंद परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सका।उनके व्यवहार में कभी भी अहंकार नहीं झलकता था। बड़े-बुजुर्गों का सम्मान और युवाओं को आगे बढ़ाने की सोच ने उन्हें सबका प्रिय बना दिया था। सामाजिक कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों और सामुदायिक बैठकों में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। वे लोगों को जोड़ने और गांव में आपसी भाईचारा बनाए रखने के लिए हमेशा प्रयासरत रहते थे।
अपने पीछे वे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके दो पुत्र—चन्द्रजीत और चन्द्रपाल—तथा पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के सदस्यों का दुख देखकर गांव के लोगों की आंखें भी नम हो जा रही हैं। हर कोई इस कठिन समय में परिवार को ढांढस बंधा रहा है।उनके असामयिक निधन से न केवल ईसारपीठापट्टी गांव ने एक कर्मठ प्रधान खोया है, बल्कि पूरे क्षेत्र ने एक संवेदनशील, समर्पित और सच्चा जनप्रतिनिधि खो दिया है। अंतिम दर्शन के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।ग्रामीणों की जुबान पर एक ही बात है—“ऐसा जनसेवक मिलना दुर्लभ है।” श्री शिव शंकर यादव की कमी लंबे समय तक महसूस की जाती रहेगी। उनकी जनसेवा, सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व की यादें हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।

सदर कोतवाली क्षेत्र में टेंपो चालक की अचानक मौत, वाहन में अचेत मिलने से मचा हड़कंप

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देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)देवरिया जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत रामनाथ देवरिया मोहल्ले में शुक्रवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब एक टेंपो चालक की सparampraहालात में मौत की खबर सामने आई। मृतक को उनके टेंपो के अंदर अचेत अवस्था में पाया गया, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
मृतक की पहचान रामनाथ देवरिया मोहल्ला निवासी 35 वर्षीय हरेन्द्र कुशवाहा पुत्र राम भजन के रूप में हुई है। हरेन्द्र पेशे से टेंपो चालक थे और इसी के माध्यम से अपने परिवार की आजीविका चलाते थे। शुक्रवार को वह रोज की तरह टेंपो लेकर घर से निकले थे, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटे।
काफी समय बीतने के बाद स्थानीय लोगों ने उन्हें टेंपो के अंदर अचेत अवस्था में देखा। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे, जहां हरेन्द्र को मृत पाया गया। इस घटना से परिवार में कोहराम मच गया।
परिजनों ने आशंका जताई है कि अत्यधिक ठंड के कारण हरेन्द्र की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिससे उनकी मौत हो गई। इस संबंध में परिजनों द्वारा सदर कोतवाली पुलिस को एक प्रार्थना पत्र भी सौंपा गया है।
सूचना मिलते ही सदर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
इस संबंध में कोतवाल विनोद कुमार सिंह ने बताया कि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अयोध्या में डिप्टी सीएम के सामने BJP नेताओं की हाथापाई

अयोध्या (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर बढ़ता असंतोष अब सार्वजनिक मंचों पर दिखाई देने लगा है। अयोध्या में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी में ही एक कार्यक्रम के दौरान जिला अध्यक्ष संजीव सिंह और बीजेपी नेता सच्चिदानंद पांडेय के बीच मंच पर ही हाथापाई हो गई। घटना के बाद सुरक्षा कर्मियों ने दोनों नेताओं को अलग कराया।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद बीजेपी में अंतर्कलह और अनुशासन को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। खुद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी इस घटना से नाराज नजर आए।

तेरहवीं कार्यक्रम में हुआ विवाद

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पूर्व विधायक खब्बू तिवारी की माता के निधन के बाद आयोजित तेरहवीं संस्कार में शामिल होने अयोध्या पहुंचे थे। इसी दौरान मंच पर बैठे नेताओं के बीच अचानक विवाद शुरू हो गया, जिसने देखते ही देखते हाथापाई का रूप ले लिया।

क्या था पूरा घटनाक्रम?

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मंच पर कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। तभी संजीव सिंह और सच्चिदानंद पांडेय के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई। वायरल वीडियो में दोनों नेताओं को एक-दूसरे की कॉलर पकड़ते और धक्का-मुक्की करते साफ देखा जा सकता है। इस दौरान डिप्टी सीएम असहज स्थिति में नजर आए। अन्य कार्यकर्ताओं और सुरक्षा कर्मियों ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया।

स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि दोनों नेताओं के बीच पहले से ही आपसी रंजिश चल रही थी, जो गुरुवार को खुलकर सामने आ गई। घटना के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने दोनों नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग उठाई है।

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महोबा में भी दिखी BJP नेताओं की तनातनी

बीजेपी में अंतर्कलह का यह पहला मामला नहीं है। शुक्रवार को महोबा में एक कार्यक्रम के दौरान जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत के बीच क्षेत्र में जलकल योजना के कार्य न होने को लेकर नाराजगी देखने को मिली। इस दौरान विधायक के समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

सोशल मीडिया पर वायरल, पार्टी की बढ़ी मुश्किलें

अयोध्या और महोबा—दोनों घटनाओं के वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी के भीतर व्यापक असंतोष की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अब तक पार्टी के किसी बड़े पदाधिकारी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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यूट्यूबर नीतू बिष्ट से छेड़छाड़, DND से ग्रेटर नोएडा तक पीछा

ग्रेटर नोएडा (राष्ट्र की परम्परा)। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर नीतू बिष्ट ने अपने साथ हुई छेड़छाड़ और सड़क पर बदसलूकी की घटना को लेकर एक वीडियो और पोस्ट साझा की है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। आरोप है कि कुछ कार सवार युवकों ने डीएनडी फ्लाईवे से लेकर ग्रेटर नोएडा तक नीतू बिष्ट और उनके पति का पीछा किया और बीच सड़क पर अभद्र व्यवहार किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना कुछ दिन पहले की है। नीतू बिष्ट कहीं जा रही थीं, तभी होंडा सिटी कार में सवार युवकों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। आरोप है कि युवकों ने अश्लील इशारे किए, गाली-गलौज की और उनकी गाड़ी को बार-बार टक्कर मारने की कोशिश की, जिससे नीतू और उनके पति काफी डर गए।

‘बेहद बदतमीजी से पेश आ रहे थे युवक’ – नीतू बिष्ट

नीतू बिष्ट द्वारा शेयर किए गए वायरल वीडियो में वह युवकों को गाड़ी रोकने के लिए कहते हुए साफ सुनाई देती हैं। वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि युवक जानबूझकर उनकी कार को टक्कर मारने की कोशिश कर रहे थे और लगातार बदसलूकी कर रहे थे। वीडियो में आगे पुलिस को मौके पर पहुंचते हुए भी देखा जा सकता है।

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पुलिस को कॉल करने पर तुरंत पहुंची टीम

नीतू के पति लखन ने भी एक वीडियो जारी कर पूरी घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि युवक डीएनडी से लेकर ग्रेटर नोएडा तक लगातार पीछा करते रहे और दो बार उनकी कार को टक्कर मारी। इसके बाद उन्होंने पुलिस को फोन किया, जिस पर नॉलेज पार्क थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गई।

छात्रों का करियर खराब न हो, इसलिए नहीं कराया केस

पुलिस ने आरोपियों को पकड़ लिया और उनके खिलाफ केस दर्ज कर जेल भेजने की तैयारी थी। हालांकि, नीतू बिष्ट और उनके पति की रिक्वेस्ट पर युवकों को छोड़ दिया गया। कपल का कहना था कि आरोपी युवक संभवतः छात्र थे और मामला आगे बढ़ने से उनका करियर खराब हो सकता था।
लखन ने नॉलेज पार्क थाना प्रभारी और पुलिस टीम का धन्यवाद करते हुए कहा कि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से स्थिति काबू में आ गई और फिलहाल किसी के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

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हाफ एनकाउंटर पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी पुलिस से जवाब तलब

प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में बढ़ती कथित ‘हाफ एनकाउंटर’ की घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि आरोपियों को दंड देने का अधिकार केवल न्यायालय के पास है, न कि पुलिस के पास। पुलिस द्वारा आरोपियों के पैरों में गोली मारकर बाद में इसे मुठभेड़ बताने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य के डीजीपी और गृह सचिव से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि क्या पुलिस अधिकारियों को आरोपियों को गोली मारने को लेकर कोई मौखिक या लिखित निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे कथित मुठभेड़ अब नियमित होते जा रहे हैं और इनका उद्देश्य वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करना या आरोपियों को सबक सिखाना प्रतीत होता है।

पुलिस को न्यायिक अधिकार नहीं – हाईकोर्ट

अदालत ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां शासन कानून के तहत चलता है। पुलिस द्वारा न्यायिक अधिकार क्षेत्र में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी चिंता जताई कि कई मामलों में मामूली अपराधों में भी गोली चलाकर घटनाओं को मुठभेड़ का रूप दे दिया जाता है।

पुलिसकर्मियों को चोट नहीं, फिर बल प्रयोग क्यों?

यह टिप्पणी मिर्जापुर के राजू उर्फ राजकुमार और दो अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की गई, जो अलग-अलग कथित मुठभेड़ों में घायल हुए थे। कोर्ट ने नोट किया कि इन घटनाओं में किसी भी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई, जिससे बल प्रयोग की आवश्यकता और उसकी अनुपातिकता पर सवाल खड़े होते हैं।

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एफआईआर हुई, लेकिन बयान दर्ज नहीं

एक मामले में अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या मुठभेड़ को लेकर एफआईआर दर्ज की गई और क्या घायल आरोपी का बयान मजिस्ट्रेट या डॉक्टर के सामने दर्ज किया गया। राज्य की ओर से बताया गया कि एफआईआर तो दर्ज हुई, लेकिन घायल का बयान न तो मजिस्ट्रेट और न ही चिकित्सा अधिकारी के समक्ष दर्ज किया गया। जांच पहले एक सब-इंस्पेक्टर को सौंपी गई थी, जिसे बाद में इंस्पेक्टर को स्थानांतरित किया गया।

सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों की अनदेखी

जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने कहा कि इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा मुठभेड़ों को लेकर तय दिशानिर्देशों का पालन होता नहीं दिख रहा है। कोर्ट ने इसे गंभीर विषय बताते हुए सख्त रुख अपनाया है।

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साध्वी प्रेम बाईसा की मौत: इंजेक्शन, पोस्ट और रहस्य

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जोधपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की मौत अब केवल एक दुखद घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह मामला दिन-ब-दिन एक गहरे रहस्य में बदलता जा रहा है। शांति, सत्य और न्याय का संदेश देने वाली साध्वी की अचानक हुई मौत के बाद अब हर तरफ सिर्फ एक सवाल है—आखिर साध्वी प्रेम बाईसा की मौत कैसे हुई?

शुक्रवार (30 जनवरी) को बालोतरा के परेऊ स्थित उनके पैतृक मठ में समाधि संस्कार किया गया। अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में शिष्य और अनुयायी मौजूद रहे। माहौल भावुक था, लेकिन परिजनों की आंखों में आंसुओं के साथ न्याय की उम्मीद भी साफ दिख रही थी। साध्वी के पिता ने कहा कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी, उन्हें चैन नहीं मिलेगा।

अचानक बिगड़ी तबीयत, इंजेक्शन बना शक की वजह

पुलिस के अनुसार, बुधवार को अजमेर में कथा कार्यक्रम से लौटने के बाद साध्वी जोधपुर के आरती नगर स्थित आश्रम पहुंचीं। कुछ समय बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। घबराए आश्रमवासियों ने कॉलोनी में रहने वाले कंपाउंडर देवी सिंह को बुलाया, जिसने उन्हें डेक्सोरेंज इंजेक्शन लगाया।

हालांकि इंजेक्शन के बाद हालत सुधरने के बजाय और ज्यादा बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

अस्पताल से सीधे आश्रम क्यों ले जाया गया शव?

मामले ने उस वक्त और गंभीर रूप ले लिया, जब निजी अस्पताल की सलाह के बावजूद शव को सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय सीधे आश्रम पहुंचा दिया गया। पुलिस को जानकारी मिलते ही शव को महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया और पोस्टमार्टम कराया गया।

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मौत के 4 घंटे बाद इंस्टाग्राम पोस्ट से मचा हड़कंप

सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया, जब साध्वी की मौत के करीब चार घंटे बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से ‘न्याय’ की मांग वाली पोस्ट सामने आई। सवाल उठ रहे हैं कि अगर यह पोस्ट साध्वी ने नहीं की, तो इसे किसने और क्यों किया?

आश्रम सील, FSL जांच जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आश्रम के कुछ हिस्सों को सील कर दिया है। एफएसएल टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। पोस्टमार्टम के दौरान लिए गए विसरा सैंपल की रिपोर्ट 2 से 3 दिन में आने की उम्मीद है, जिससे मौत की असली वजह सामने आ सकेगी।

कंपाउंडर हिरासत में, कई एंगल से जांच

इंजेक्शन लगाने वाले कंपाउंडर देवी सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। साथ ही सोशल मीडिया पर वायरल पुराने वीडियो और आश्रम से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
फिलहाल साध्वी प्रेम बाईसा की मौत से जुड़े कई सवाल अनसुलझे हैं। यह सामान्य मेडिकल मामला था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश—इसका जवाब अब जांच रिपोर्ट पर टिका है।

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जैसलमेर में ISI जासूस गिरफ्तार, सेना की जानकारी भेजता था युवक

जैसलमेर/राजस्थान (राष्ट्र की परम्परा)। राजस्थान पुलिस की इंटेलिजेंस विंग ने पाकिस्तान से सटे जैसलमेर जिले के पोकरण क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में एक स्थानीय युवक को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी पर भारतीय सेना से जुड़ी सामरिक और गोपनीय जानकारियां सीमा पार भेजने का गंभीर आरोप है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (इंटेलिजेंस) प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि राज्य में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि पोकरण के सांकड़ा थाना क्षेत्र के नेडान गांव निवासी झबराराम (28) की गतिविधियां संदिग्ध हैं। तकनीकी निगरानी में सामने आया कि वह सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था।

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पूछताछ और मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी को ISI द्वारा हनीट्रैप और पैसों का लालच देकर जासूसी के जाल में फंसाया गया था। आरोपी ने अपने सिम कार्ड का OTP पाक हैंडलर्स को देकर व्हाट्सएप एक्टिवेट करवाया, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में किया जा रहा था।

संदेह पुख्ता होने पर आरोपी को केंद्रीय पूछताछ केंद्र जयपुर लाया गया, जहां राजस्थान पुलिस, मिलिट्री इंटेलिजेंस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त पूछताछ की। जांच में आरोप सही पाए जाने पर शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923 के तहत केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को जयपुर कोर्ट में पेश किया जाएगा।

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महाराष्ट्र: अजित पवार के बाद सुनेत्रा पवार बनेंगी डिप्टी CM? जानें प्रोफाइल

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव

महाराष्ट्र (राष्ट्र की परम्परा)। महाराष्ट्र की राजनीति इस समय बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक दौर से गुजर रही है। हाल ही में बारामती में हुए दर्दनाक प्लेन क्रैश में वरिष्ठ एनसीपी नेता और राज्य के कद्दावर राजनेता अजित पवार का निधन हो गया। यह हादसा बारामती क्षेत्र में हुआ, जहां तकनीकी खराबी और खराब मौसम को दुर्घटना की संभावित वजह माना जा रहा है। हादसे के तुरंत बाद राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया, लेकिन अजित पवार को बचाया नहीं जा सका।

इस घटना ने न सिर्फ पवार परिवार बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति को गहरा झटका दिया है। राजनीतिक गलियारों में शोक के साथ-साथ सत्ता के शीर्ष स्तर पर बड़े बदलाव की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

सुनेत्रा पवार बनेंगी महाराष्ट्र की नई उपमुख्यमंत्री

पार्टी और गठबंधन सूत्रों के अनुसार, अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र की नई उपमुख्यमंत्री बनाए जाने का फैसला लिया गया है। इस फैसले के बाद जनता के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि सुनेत्रा पवार की शैक्षणिक योग्यता और प्रशासनिक तैयारी क्या है।

सुनेत्रा पवार की शिक्षा (Educational Qualification)

शिक्षा के लिहाज से सुनेत्रा पवार को एक पढ़ी-लिखी और समझदार नेता माना जाता है।

• उन्होंने अप्रैल 1983 में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी से B.Com की पढ़ाई पूरी की।

• इसके बाद एस.बी. आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज, औरंगाबाद से पोस्ट-ग्रेजुएशन किया।

कॉमर्स बैकग्राउंड के चलते उन्हें अर्थव्यवस्था, प्रबंधन और प्रशासनिक मामलों की गहरी समझ है।

पर्यावरण और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका

राजनीति के साथ-साथ सुनेत्रा पवार ने सामाजिक और पर्यावरणीय क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।
वह Environmental Forum of India की फाउंडर हैं, जो सस्टेनेबिलिटी, जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के लिए काम करता है। पर्यावरण संरक्षण को लेकर उनका फोकस लंबे समय से चर्चा में रहा है।

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राजनीति में एंट्री और वर्तमान पद

सुनेत्रा पवार का जन्म 18 अक्टूबर 1963 को महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में हुआ था। वह एनसीपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पद्मसिंह पाटिल की बेटी हैं।
उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामती सीट से सुप्रिया सुले के खिलाफ चुनाव लड़ा था, हालांकि उन्हें हार मिली। इसके बाद एनसीपी ने उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया। वर्तमान में वह संसद में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति पर बड़ा असर

अजित पवार के निधन और सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने की संभावना ने महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सुनेत्रा पवार इस बड़ी जिम्मेदारी को कैसे निभाती हैं।

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EU ने IRGC को आतंकी संगठन घोषित किया, ईरान की यूरोप को खुली धमकी

तेहरान / ब्रसेल्स (राष्ट्र की परम्परा)। यूरोपीय यूनियन (EU) द्वारा ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को आतंकी संगठनों की सूची में शामिल किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव बढ़ गया है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने यूरोपीय देशों को सीधी चेतावनी दी है कि वह उनके सशस्त्र बलों को भी ‘आतंकवादी संगठन’ घोषित कर सकता है।

ईरानी शीर्ष अधिकारी का एक्स पर बयान

ईरानी के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने शुक्रवार (30 जनवरी 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा कि इस्लामी सलाहकार सभा के प्रस्ताव के तहत, IRGC के खिलाफ यूरोपीय यूनियन की कार्रवाई का समर्थन करने वाले देशों की सेनाओं को आतंकवादी संस्था माना जाएगा।

लारीजानी ने कहा कि इस फैसले के गंभीर परिणाम उन यूरोपीय देशों को भुगतने होंगे, जिन्होंने इस प्रस्ताव में भाग लिया या इसका समर्थन किया।

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EU का बड़ा फैसला, कल्लास का सख्त बयान

ईरान प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब एक दिन पहले ही EU के 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने सर्वसम्मति से IRGC को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने पर सहमति जताई थी।

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने इस कदम को निर्णायक बताते हुए कहा,
“जो शासन अपने ही हजारों लोगों की हत्या का जिम्मेदार है, उसे आतंकवादी माना जाना चाहिए।”

EU ने स्पष्ट किया कि यह लिस्टिंग भले ही मुख्य रूप से प्रतीकात्मक हो, लेकिन इससे IRGC को अल-कायदा, हमास और इस्लामिक स्टेट (ISIS) जैसे संगठनों की श्रेणी में रखा गया है।

क्यों उठाया गया यह कदम?

यूरोपीय यूनियन ने यह फैसला ईरान में आर्थिक संकट और सरकारी नीतियों के खिलाफ हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के बाद लिया है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 6,479 लोगों की मौत हो चुकी है।
EU का कहना है कि IRGC इन दमनात्मक कार्रवाइयों में सीधे तौर पर शामिल रहा है, इसलिए उसे आतंकी संगठन घोषित करना जरूरी था।

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ट्रंप के बयान पर बवाल: पत्नी की सुंदरता बताकर मंत्री की नियुक्ति का दावा

वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। गुरुवार (29 जनवरी 2026) को उन्होंने सार्वजनिक मंच से यह कहकर सनसनी मचा दी कि उन्होंने डग बर्गम को अमेरिका का इंटीरियर सेक्रेटरी इसलिए नियुक्त किया क्योंकि उन्हें उनकी पत्नी कैथरीन बर्गम “अच्छी और सुंदर” लगीं। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।

ओवल ऑफिस में दिया गया बयान

Independent की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह टिप्पणी ओवल ऑफिस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। यह कार्यक्रम नशे की लत से निपटने से जुड़े एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर के लिए आयोजित किया गया था। इस मौके पर डग बर्गम और उनकी पत्नी कैथरीन बर्गम भी मौजूद थीं। कार्यक्रम के अंत में ट्रंप की इस टिप्पणी को कई लोगों ने असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदाराना बताया।

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कैंपेन वीडियो से शुरू हुई कहानी

ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पहली बार डग और कैथरीन बर्गम को एक कैंपेन-स्टाइल वीडियो में देखा था। उस वीडियो में कैथरीन बर्गम घोड़े पर सवार नजर आ रही थीं। ट्रंप के मुताबिक, वीडियो देखते समय उन्होंने अपने सहयोगियों से पूछा कि वह महिला कौन हैं। बाद में उन्हें बताया गया कि वह नॉर्थ डकोटा के तत्कालीन गवर्नर डग बर्गम की पत्नी हैं।
ट्रंप ने यह भी कहा कि वीडियो देखने के बाद उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि वह ऐसे व्यक्ति को नौकरी देंगे, जिसकी पत्नी इतनी प्रभावशाली और आकर्षक हो।

महिलाओं को लेकर पुराने विवाद फिर चर्चा में

यह पहला मौका नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप महिलाओं को लेकर दिए गए बयानों की वजह से आलोचनाओं के घेरे में आए हों। इससे पहले भी वह कई बार महिलाओं की योग्यता के बजाय उनके रूप-रंग पर टिप्पणी करने को लेकर विवादों में रह चुके हैं। ताजा बयान ने एक बार फिर उनके पुराने विवादों को सुर्खियों में ला दिया है।

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