Tuesday, July 14, 2026
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गैस-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सपा का विरोध, जनता की समस्याओं को लेकर उठी आवाज

भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।

80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में उमड़ी भीड़, मंगलम हॉस्पिटल ने शुरू की अत्याधुनिक कैंसर सेवा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए शनिवार, का दिन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि लेकर आया। शहर के औरा-चौरी रोड स्थित मंगलम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में विशाल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इसी अवसर पर अस्पताल में अत्याधुनिक ऑन्कोलॉजी (कैंसर) विभाग का विधिवत शुभारंभ किया गया, जिससे अब देवरिया सहित आसपास के जिलों के कैंसर मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही आधुनिक उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद डॉ. शशांक मणि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार के लिए मरीजों को अब महानगरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। स्थानीय स्तर पर आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता मरीजों के समय, धन और मानसिक परेशानी—तीनों को कम करेगी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के इस प्रयास को जनहित में सराहनीय कदम बताया।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार नवस्थापित ऑन्कोलॉजी विभाग में आधुनिक तकनीक आधारित कैंसर उपचार की सुविधाएं विकसित की गई हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में मरीजों को बेहतर परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही अस्पताल में प्रत्येक माह के दूसरे रविवार को निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर आमजन को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिया जाएगा।
कार्यक्रम में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जी. मेहर कुमार, डॉ. आभा अग्रवाल, डॉ. मंगल सिंह, डॉ. जे.एन. पाण्डेय, मैनेजिंग डायरेक्टर एस.पी. अग्रवाल, बेला अग्रवाल, डॉ. उमाकांत पाण्डेय, डॉ. सी.पी. मल्ल, डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. एच.एस. राय सहित अनेक चिकित्सक, गणमान्य नागरिक एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
अस्पताल के सीईओ राजीव कुमार मिश्रा एवं मैनेजर सत्य प्रकाश यादव ने बताया कि अस्पताल में अनुभवी चिकित्सकों के साथ प्रशिक्षित नर्सिंग, फार्मेसी, पैथोलॉजी तथा अन्य तकनीकी स्टाफ की समर्पित टीम मरीजों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं देने के लिए निरंतर कार्यरत है। उन्होंने सभी अतिथियों, चिकित्सकों एवं शिविर में पहुंचे लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त किया। क्षेत्रवासियों ने अस्पताल में कैंसर उपचार की नई सुविधा शुरू होने का स्वागत करते हुए इसे पूर्वांचल की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

2050 का स्वास्थ्य संकट: कैंसर बनेगा सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती?

कैंसर अब केवल वृद्धावस्था की बीमारी नहीं, कई देशों में कम आयु के लोगों में भी कैंसर के मामलों में भयंकर वृद्धि देखी जा रही है

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएच ओ) और उसकी विशेषीकृत संस्था इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) द्वारा 8 जुलाई 2026 को जारी ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन कैंसर 2026 ने पूरी दुनियाँ के नीति-निर्माताओं,वैज्ञानिकों,चिकित्सकों और आम नागरिकों को गंभीर चेतावनी दी है। यह केवल एक स्वास्थ्य रिपोर्ट नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के सामने खड़े सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का दस्तावेज़ है।रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि यदि वर्तमान जीवनशैली प्रदूषण,तंबाकू और शराब का बढ़ता सेवन,अस्वास्थ्यकर खानपान, शारीरिक निष्क्रियता तथा समय पर जांच और उपचार की कमी जारी रही,तो वर्ष 2050 तक दुनियाँ कैंसर की ऐसी लहर का सामना करेगी जिसे विशेषज्ञ “कैंसर तसुनामी” (कैंसर सुनामी) कह रहे हैं। यह सुनामी केवल अस्पतालों को नहीं,बल्कि अर्थव्यवस्था,परिवार, सामाजिक संरचना और मानव विकास को भी गहराई से प्रभावित करेगी।रिपोर्ट के अनुसार आज दुनिया में हर पाँच में से एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में किसी न किसी प्रकार के कैंसर का सामना कर सकता है। पुरुषों में लगभग हर नौ में से एक तथा महिलाओं में लगभग हर बारह में से एक व्यक्ति की कैंसर से मृत्यु होने काजोखिम है।यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही तो वर्ष 2050 तक दुनियाँ में नए कैंसर मामलों की संख्या लगभग 3.5 करोड़ प्रतिवर्ष तक पहुँच सकती है, जो वर्तमान स्तर की तुलना में लगभग दोगुनी होगी।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यदि रिपोर्ट की आशंका सही निकली तो इसका अर्थ है कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य प्रणालियों पर अभूतपूर्व दबाव पड़ेगा,उपचार की लागत कई गुना बढ़ेगी और लाखों परिवार आर्थिक रूप से टूट सकते हैं।रिपोर्ट यह भी बताती है कि कैंसर केवल चिकित्सा विज्ञान की चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता का भी दर्पण है। उच्च आय वाले देशों में आधुनिक जांच, अत्याधुनिक उपचार, कैंसर स्क्रीनिंग और बीमा सुविधाओं के कारण रोगियों के बचने की संभावना अधिक हैजबकि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में देर से पहचान, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, महंगी दवाएँ, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी तक सीमित पहुँच तथा आर्थिक असमानताओं के कारण मृत्यु दर कहीं अधिक है। यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे केवल स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि स्वास्थ्य न्याय का भी प्रश्न मान रहे हैं। 

साथियों बात अगर हम भारत के संदर्भ में रिपोर्ट की चेतावनी को समझने की करें तो यह और भी महत्वपूर्ण है। डब्ल्यूएचओ- आईएआरसी के अनुमानों के अनुसार भारत में हर 10 में से लगभग 1 व्यक्ति को 75 वर्ष की आयु से पहले कैंसर होने का जोखिम है। इसके साथ ही लगभग हर 100 में से 7 व्यक्तियों की 75 वर्ष की आयु से पहले कैंसर से मृत्यु होने की आशंका व्यक्त की गई है। यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो अगले 25 वर्षों में भारत में हर वर्ष सामने आने वाले कैंसर मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो सकती है। यह स्थिति केवल स्वास्थ्य मंत्रालय ही नहीं बल्कि पूरे शासन तंत्र,उद्योग, शिक्षा, पर्यावरण कृषि और समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। 

साथियों विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन का बढ़ता उपयोग,मोटापा,शारीरिक गतिविधियों में कमी,धूम्रपान और तंबाकू सेवन,शराब का बढ़ताचलन वायु प्रदूषण,जल और मिट्टी में रासायनिक प्रदूषण औद्योगिक रसायनों का संपर्क, संक्रमण, मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या तथा बढ़ती आयु ये सभी मिलकर कैंसर के खतरे को बढ़ा रहे हैं। साथ ही बेहतर जांच तकनीकों और अधिक स्क्रीनिंग के कारण भी अब पहले की तुलना में अधिक मामलों का पता चल रहा है।ग्लोबकान के नवीनतम अनुमानों के अनुसार भारत में स्तन कैंसर, मुख कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर तेजी से बढ़ रहे हैं। पुरुषों में तंबाकू से जुड़े कैंसर विशेष रूप से अधिक हैं, जबकि महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच जागरूकता तथा उपचार की उपलब्धता में भी सटीकता से  बड़ा अंतर दिखाई देता है। 

साथियों, रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लगभग 40 प्रतिशत कैंसर मामलों को रोका जा सकता है। इसका अर्थ है कि यदि समाज जीवनशैली में सुधार करे, तंबाकू और शराब के सेवन में कमी लाए, संतुलित भोजन अपनाए, नियमित व्यायाम करे, मोटापे पर नियंत्रण रखे, प्रदूषण कम किया जाए,हेपेटाइटिस-बी और एचपीवी जैसे टीकाकरण कार्यक्रम मजबूत हों तथा समय पर स्क्रीनिंग और जांच कराई जाए, तो लाखों लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। अर्थात कैंसर पूरी तरह भाग्य का खेल नहीं है; इसका बड़ा हिस्सा रोकथाम योग्य है।रिपोर्ट समयपूर्व मृत्यु को भी गंभीर चिंता का विषय बताती है। कैंसर अब केवल वृद्धावस्था की बीमारी नहीं रह गया है। कई देशों में कम आयु के लोगों में भी कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।इससेकार्यशील आयु वर्ग प्रभावित होता है, उत्पादकता घटती है, परिवारों की आय कम होती है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ता है।कैंसर के कारण होने वाली प्रत्यक्ष चिकित्सा लागत के साथ-साथ अप्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान जैसे रोजगार का नुकसान, देखभाल का खर्च और उत्पादक श्रम-घंटों की हानि वैश्विक अर्थव्यवस्था को खरबों डॉलर का नुकसान पहुँचा सकते हैं। 

साथियों, रिपोर्ट यह भी स्वीकार करती है कि वैज्ञानिक प्रगति तेज़ी से हुई है।आधुनिक इम्यूनोथेरेपी, लक्षित उपचार जीन आधारित चिकित्सा,कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निदान तथा प्रिसिजन मेडिसिन जैसी तकनीकों ने कैंसर उपचार में नई संभावनाएँ पैदा की हैं। लेकिन इन प्रगतियों का लाभ अभी भी दुनिया की बहुत बड़ी आबादी तक समान रूप से नहीं पहुँच पा रहा है।यही असमानता वैश्विक स्वास्थ्य नीति की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।रिपोर्ट भविष्य के लिए तीन प्रमुख रणनीतिक परिवर्तन सुझाती है,बेहतर क्षमताएँ, बेहतर सुरक्षा, और बेहतर मूल्य। इनका उद्देश्य स्वास्थ्य प्रणालियों को अधिक सक्षम बनाना, रोकथाम और प्रारंभिक पहचान को मजबूत करना, गुणवत्तापूर्ण उपचार सबके लिए सुलभ बनाना तथा सीमित संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके साथ सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, स्वास्थ्य संस्थानों और नागरिक समाज के लिए सात प्रमुख सिफारिशें भी दी गई हैं, जिनमें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, मजबूत कैंसर रजिस्ट्रियाँ, अनुसंधान, प्रशिक्षित मानव संसाधन, जन-जागरूकता, समान उपचार उपलब्धता और प्रभावित समुदायों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष बल दिया गया है। 

साथियों,भारत के लिए यह रिपोर्ट एक अवसर भी है। आयुष्मान भारत,स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र,राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम,डिजिटल स्वास्थ्य मिशन, एचपीवी टीकाकरण,तंबाकू नियंत्रण अभियान, स्क्रीनिंग कार्यक्रम और कैंसर उपचार सुविधाओं का विस्तार यदि तेज़ गति से लागू किया जाए, तो आने वाले वर्षों में लाखों लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। साथ ही स्कूल स्तर से स्वास्थ्य शिक्षा, स्वच्छ पर्यावरण,पौष्टिक भोजन,नियमित व्यायाम और नशामुक्त जीवनशैली को राष्ट्रीय जनआंदोलन बनाना समय की आवश्यकता है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि यह रिपोर्ट पूरी मानवता के लिए स्पष्ट संदेश देती है कि कैंसर का भविष्य पहले से तय नहीं है।यदि सरकारें,वैज्ञानिक, चिकित्सक उद्योग,नागरिक समाज और प्रत्येक नागरिक मिलकर रोकथाम, प्रारंभिक पहचान और समान उपचार की दिशा में कार्य करें, तो संभावित कैंसर सुनामी को काफी हद तक रोका जा सकता है।लेकिन यदि चेतावनियों को अनदेखा किया गया,तो 2050 तक कैंसर केवल एक बीमारी नहीं,बल्कि वैश्विक विकास, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक कल्याण के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन जाएगा।अस्वीकरण:यह लेखसार्वजनिक जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है।स्वास्थ्य संबंधी सलाह,जांच या उपचार के लिए योग्य चिकित्सक या कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें,जानकारी में त्रुटियाँ संभव हैँ।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

राप्ती ईको पार्क में वृक्षारोपण का महाअभियान 5,567 पौधे रोपे गए

एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत हरित गोरखपुर का संकल्प

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
नगर निगम गोरखपुर द्वारा रविवार को राप्ती ईको पार्क (एकला बांध) पर “एक पेड़ माँ के नाम” थीम के अंतर्गत विशाल वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। कार्यक्रम में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और नगर आयुक्त अजय जैन ने स्वयं पौधरोपण कर अभियान की शुरुआत की और हरित व स्वच्छ गोरखपुर बनाने का संकल्प दोहराया।
इस दौरान ईको पार्क परिसर में विभिन्न प्रजातियों के कुल 5,567 पौधे रोपे गए। अभियान में नगर निगम की टीम, सामाजिक संस्थाओं, पर्यावरणविदों, पार्षदों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। खास बात यह रही कि सफाई निरीक्षक, मुख्य सफाई निरीक्षक और सफाई मित्रों ने भी श्रमदान कर अभियान को सफल बनाया।
कार्यक्रम में अपर नगर आयुक्त गौरव रंजन श्रीवास्तव व प्रमोद कुमार, अधिशासी अभियंता, निर्माण विभाग के अधिकारी तथा जोनल अधिकारी अविनाश प्रताप सिंह, ओम प्रकाश यादव व अनुष्का सिंह समेत नगर निगम की पूरी टीम मौजूद रही।

नगर निगम के अनुसार इस वृक्षारोपण का उद्देश्य राप्ती ईको पार्क को एक विकसित ‘ग्रीन जोन’ के रूप में स्थापित करना है। रोपे गए पौधों के संरक्षण और देखभाल के लिए विशेष व्यवस्था भी की गई है।

महापौर ने कहा कि यह अभियान केवल पौधरोपण नहीं, बल्कि पर्यावरण और मातृत्व के प्रति सम्मान का प्रतीक है। वहीं नगर आयुक्त ने सभी के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि जनभागीदारी के बल पर गोरखपुर को स्वच्छ व हरित शहर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शहर के सभी 80 वार्डों में भी वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है और नगर निगम अपने 65 हजार पौधरोपण के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

करमैनी-बेलौली तटबंध पर बाढ़ तैयारियों का एडीएम ने लिया जायजा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। मानसून के बीच संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सत्य प्रकाश ने मेंहदावल तहसील क्षेत्र में राप्ती नदी के दाहिने तट पर स्थित करमैनी-बेलौली तटबंध का स्थलीय निरीक्षण कर बाढ़ सुरक्षा कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को तटबंधों की सतत निगरानी रखने और हर परिस्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध रखने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान ड्रेनेज खंड-2 के अंतर्गत संचालित नई बाढ़ परियोजनाओं एवं बाढ़ पूर्व तैयारियों का अवलोकन किया गया। एडीएम ने नवगों, बढ़या ठाठर और बेलौली स्थित बाढ़ चौकियों के स्टोर का निरीक्षण किया। यहां खाली सीमेंट की बोरियां, नायलॉन क्रेट, ईंट रोड़ा, गिट्टी, मोरंग तथा अन्य आवश्यक सामग्रियों का पर्याप्त भंडारण मिला।
उन्होंने अधिशासी अभियंता अजय कुमार, सहायक अभियंता मनीष राय एवं जूनियर इंजीनियरों से तटबंध पर चल रहे कार्यों की जानकारी लेते हुए संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील स्थलों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। साथ ही किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षात्मक उपाय पहले से सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि बाढ़ की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी मेंहदावल अरुण कुमार सहित सिंचाई एवं राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

एक पेड़ माँ के नाम महाअभियान के तहत पुलिस लाइन्स में हुआ वृक्षारोपण

एसएसपी समेत पुलिस अधिकारियों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, हर नागरिक से एक पौधा लगाने की अपील

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l “एक पेड़ माँ के नाम” वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के तहत रविवार को पुलिस लाइन्स, गोरखपुर में भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर, पुलिस अधीक्षक नगर, पुलिस अधीक्षक यातायात सहित अन्य पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों ने परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनकी नियमित देखभाल करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प दिलाया। साथ ही जैव विविधता के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संतुलन और हरित वातावरण के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।
अधिकारियों ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान की भावनात्मक अपील को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी है, बल्कि मातृ सम्मान और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का भी प्रतीक है। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपनी माँ के नाम पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल कर उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित रखें।
कार्यक्रम में मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पौधारोपण कर हरित गोरखपुर के निर्माण का संकल्प लिया। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जागरूकता भी फैलाई गई, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को इस अभियान से जोड़ा जा सके।

जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य पर एमएमटीटीसी का शॉर्ट टर्म प्रोग्राम आज से

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) की ओर से 13 जुलाई 2026 से “जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा एवं जनस्वास्थ्य” विषय पर आधारित शॉर्ट टर्म प्रोग्राम का ऑनलाइन शुभारंभ होगा। उद्घाटन सत्र पूर्वाह्न 11:30 बजे आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन करेंगी, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे।
एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नई शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप शिक्षकों को सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के प्रति जागरूक, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य जैसे समकालीन विषयों पर प्रशिक्षण से शिक्षकों के ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण का विकास होगा तथा वे समाज और पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत लक्ष्य-2 (जीरो हंगर), लक्ष्य-3 (अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण) और लक्ष्य-13 (जलवायु कार्रवाई) पर केंद्रित है। कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देंगे।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से 75 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को वैश्विक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाते हुए उनके शिक्षण, शोध और विस्तार गतिविधियों में सतत विकास की अवधारणा को प्रभावी रूप से शामिल करना है।
शॉर्ट टर्म प्रोग्राम के कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. राकेश पाण्डेय (सहायक आचार्य, वनस्पति विज्ञान विभाग) हैं, जबकि कार्यक्रम के संयोजक प्रो. अनिल द्विवेदी हैं।

बीबीएयू में ‘वृक्षारोपण महायज्ञ 2026’ के तहत लगाए गए 8,500 पौधे, प्रदेश भाजपाध्यक्ष पंकज चौधरी ने किया शुभारंभ

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार, वन विभाग, मिशन लाइफस्टाइल फॉर इनोवेशन और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘वृक्षारोपण महायज्ञ 2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी रहे। इस अवसर पर सरोजिनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह, कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल और लखनऊ के मंडल वन अधिकारी शितांशु पाण्डेय भी मौजूद रहे।
केंद्रीय राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण प्रत्येक नागरिक की मूल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ और स्वच्छता जैसे अभियानों को जनभागीदारी का सशक्त माध्यम बताते हुए सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार का व्यापक वृक्षारोपण अभियान आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में जनआंदोलन बताया।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि बीबीएयू का ग्रीन कैंपस और समृद्ध जैव विविधता उसकी विशेष पहचान है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में पीएचडी में प्रवेश लेने वाले प्रत्येक शोधार्थी के लिए एक पौधा लगाना अनिवार्य किया गया है तथा शोध प्रबंध जमा करते समय उस पौधे के साथ जियो-टैग फोटो भी प्रस्तुत करनी होती है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर स्थित ‘समरस वन’ में अतिथियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और वन विभाग के अधिकारियों ने सामूहिक रूप से पौधारोपण किया। इस दौरान लगभग 8,500 पौधे लगाए गए, जिनमें आम, नीम, अमरूद, जामुन, मौसमी, सहजन सहित विभिन्न फलदार और छायादार प्रजातियां शामिल रहीं।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने पर्यावरण संरक्षण विषयक फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा अवध वन प्रभाग द्वारा प्रकाशित कॉफी टेबल बुक का लोकार्पण भी किया। उन्होंने स्कूली बच्चों और अभिभावकों को आम एवं सहजन के पौधों का वितरण किया तथा चित्रकला और फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम में बच्चों ने गणेश वंदना पर सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी।
वृक्षारोपण अभियान को सफल बनाने में एनसीसी कैडेट्स और वनस्पति उद्यान के प्रभारी डॉ. रवि शंकर वर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी, वन विभाग के अधिकारी, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

वृक्ष लगाना सेवा, उसका संरक्षण साधना: चारु चौधरी

संतकबीरनगर में 29.78 लाख पौधों का रोपण

संतकबीरनगर(राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी ने कहा कि “वृक्ष लगाना सेवा है और उसका संरक्षण साधना है।” उन्होंने विकासखंड बघौली के ग्राम बरईपार में हरिशंकरी (पीपल, पाकड़ और बरगद) का पौधा रोपित कर ‘एक पेड़ मां के नाम’ थीम पर आधारित वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 का शुभारंभ किया। अभियान के तहत जनपद में वन विभाग सहित विभिन्न विभागों के सहयोग से 29.78 लाख पौधों का रोपण किया गया।
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष नीतू सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव, मेंहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी, जिलाधिकारी आलोक कुमार तथा मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी उपस्थित रहे। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ने पाकड़, विधायक ने आम तथा जिलाधिकारी ने अमरूद का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
उपाध्यक्ष चारु चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भावी पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण देने का संकल्प भी है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और युवाओं से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का आह्वान किया।
भाजपा जिलाध्यक्ष नीतू सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पौधों का संरक्षण ही वृक्षारोपण अभियान की वास्तविक सफलता है।
मेंहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि वृक्ष पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ वातावरण देने के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण आवश्यक है।
जिलाधिकारी आलोक कुमार ने जनपदवासियों से वृक्षारोपण अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को पौधे लगाने के साथ-साथ दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और अन्य नागरिकों को आम एवं सहजन के पौधे उपहार स्वरूप वितरित किए गए। वहीं, जनपद की सभी तहसीलों, विकासखंडों, ग्राम पंचायतों, विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों तथा अन्य सरकारी संस्थानों में भी वृक्षारोपण किया गया।
इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी हरिकेश यादव, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार प्रभात द्विवेदी, उपजिलाधिकारी हृदय राम तिवारी, जिला पंचायत सदस्य हनुमान कनौजिया, जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र, खंड विकास अधिकारी अर्जित प्रकाश सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

भ्रष्टाचार सूचकांक में भारत 91वें स्थान पर, अब तेज सुधार की चुनौती

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भ्रष्टाचार पर निर्णायक प्रहार का तात्कालिक समय आया: ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल 2026 की रिपोर्ट-भारत की 100 में से 91वीं रैंकिंग जग हंसाई? -सुशासन की गंभीर नई चुनौती- समग्र व्यापक विश्लेषण

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भ्रष्टाचार केवल रिश्वत लेने या देने तक सीमित अपराध नहीं है,बल्कि यह लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था न्याय व्यवस्था और नागरिकों के विश्वास को भीतर से खोखला करने वाली ऐसी दीमक है जो धीरे- धीरे पूरे शासन तंत्र को कमजोर कर देती है। यदि कैंसर शरीर को अंदर से नष्ट करता है,तो भ्रष्टाचार राष्ट्र की संस्थाओं, नीतियों और नैतिक मूल्यों को उसी प्रकार क्षीण करता है।भारत का आम नागरिक जन्म प्रमाण पत्र से लेकर भूमि रिकॉर्ड, पुलिस, स्थानीय निकाय, कराधान, लाइसेंस, निर्माण अनुमति और अनेक सरकारी सेवाओं तक कहीं न कहीं भ्रष्टाचार की पीड़ा का अनुभव करता है।कई लोग इसे “चाय-पानी” कहकर सामान्य मान लेते हैं, जबकि यही छोटी-छोटी रिश्वतें आगे चलकर बड़े भ्रष्टाचार की जड़ बन जाती हैं।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र अधिवक्ता होने के नाते जनता के बीच यह जनजागरण करना चाहूंगा क़ि आज आवश्यकता केवल भ्रष्टाचार की शिकायत करने की नहीं,बल्कि उसे सामाजिक रूप से अस्वीकार्य बनाने की है।अब ऐसे समय में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक़ (सीपीआई) 2026 भारत सहित पूरी दुनियाँ के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। यह रिपोर्ट भारत के लिए बहुत चिंता का विषय है।रिपोर्ट के अनुसार भारत 39 अंकों के साथ 91वें स्थान पर है। विशेष बात यह है कि 0 अंक का अर्थ अत्यधिक भ्रष्ट व्यवस्था तथा 100 अंक का अर्थ अत्यंत स्वच्छ और पारदर्शी शासन व्यवस्था है, भारत में बहुत भ्रष्टाचार है लेकिन मैं इस रिपोर्ट को देखकर हैरान हूं कि भारत में  इतनी बड़ी लेवल पर भ्रष्टाचारी है,मैंने सोचा भी नहीं था यानें अब सारी जनता समझ रही है कि,यह स्थिति भारत की प्रतिष्ठा पर आघात व विकास में बहुत बड़ी बाधा है?यह रिपोर्ट केवल किसी देश की रैंकिंग नहीं बताती,बल्कि यह उस देश की प्रशासनिक विश्वसनीयता,निवेश वातावरण, शासन की गुणवत्ता और संस्थागत पारदर्शिता का वैश्विक संकेतक भी मानी जाती है।किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए यह केवल अंक या स्थान का प्रश्न नहीं,बल्कि उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा, निवेशकों के विश्वास और नागरिकों की उम्मीदों का भी विषय है। 

साथियों बात अगर हम भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक को समझने की करें तो, दुनियाँ के सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक सूचकांकों में से एक है।इसे हर वर्ष ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल प्रकाशित करती है। यह रिपोर्ट सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की धारणा को 0 से 100 के पैमाने पर मापती है। 0 अंक का अर्थ अत्यधिक भ्रष्ट व्यवस्था तथा 100 अंक का अर्थ अत्यंत स्वच्छ और पारदर्शी शासन व्यवस्था है। इस सूचकांक की विशेषता यह है कि यह किसी एक संस्था की राय पर आधारित नहीं होता, बल्कि विश्व बैंक, विश्व आर्थिक मंच (डब्लूईएफ), एशियाई विकास बैंक सहित लगभग 13 स्वतंत्र वैश्विक स्रोतों और विशेषज्ञों के आकलन को समाहित करता है। इसलिए इसकी विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार की जाती है। 

साथियों बात कर हम  वर्ष 2026 की रिपोर्ट की करें तो  इसमें वैश्विक तस्वीर चिंता पैदा करने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार दुनियाँ के दो-तिहाई से अधिक देशों का स्कोर 50 से कम है,अर्थात अधिकांश देशों में सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार गंभीर चुनौती बना हुआ है। यह स्पष्ट संकेत है कि भ्रष्टाचार केवल विकासशील देशों की समस्या नहीं, बल्कि विकसित देशों के लिए भी सतत चुनौती है।हालांकि कुछ देशों ने अपने मजबूत संस्थागत ढांचे, पारदर्शी प्रशासन और कठोर जवाबदेही व्यवस्था के कारण उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।इस वर्ष भी डेनमार्क 89 अंकों के साथ सबसे स्वच्छ देशों में शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। उसके बाद फिनलैंड, न्यूज़ीलैंड और नॉर्वे जैसे देश हैं। इन देशों की सफलता का आधार केवल कठोर कानून नहीं,बल्कि मजबूत संस्थाएं,पारदर्शी सरकारी प्रक्रियाएं,स्वतंत्र न्यायपालिका,प्रभावी मीडिया, नागरिक सहभागिता और राजनीतिक ईमानदारी है।दूसरी ओर दक्षिण सूडान, सोमालिया और वेनेजुएला सबसे अधिक भ्रष्ट देशों में शामिल हैं, जहां राजनीतिक अस्थिरता, कमजोर संस्थाएं और प्रशासनिक विफलता ने भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया है। 

साथियों, भारत की स्थिति इस रिपोर्ट में विशेष चर्चा का विषय बनी है। रिपोर्ट के अनुसार भारत 39 अंकों के साथ 91वें स्थान पर है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि भारत ने डिजिटल प्रशासन,प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) आधार आधारित सेवाओं,सरकारी खरीद में डिजिटलीकरण तथा कई प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से कुछ सकारात्मक प्रगति अवश्य की है,किंतु सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार, राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता की कमी, प्रवर्तन एजेंसियों की प्रभावशीलता और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दे अब भी गंभीर चुनौती बने हुए हैं।भारत आज विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। विदेशी निवेश आकर्षित करने, वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने,डिजिटल अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केवल आर्थिक सुधार पर्याप्त नहीं होंगे। निवेशक केवल बाजार का आकार नहीं देखते, बल्कि वे यह भी देखते हैं कि किसी देश में कानून का शासन कितना मजबूत है, अनुबंधों का पालन कितना प्रभावी है और भ्रष्टाचार का स्तर कितना कम है। इसलिए भ्रष्टाचार का प्रश्न सीधे आर्थिक विकास से जुड़ा हुआ है। 

साथियों, भारत में भ्रष्टाचार के अनेक रूप हैं। छोटे स्तर पर सरकारी कार्यालयों में सुविधा शुल्क, भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर, पुलिस या स्थानीय प्रशासन में रिश्वत,ठेकों में अनियमितताएं, सरकारी खरीद में पक्षपात, कर चोरी के लिए मिलीभगत, लाइसेंस और परमिट में अवैध भुगतान जैसी समस्याएं आज भी व्यापक रूप से चर्चा में रहती हैं।बड़े स्तर पर राजनीतिक वित्तपोषण, सार्वजनिक परियोजनाओं में लागत वृद्धि, प्रभाव का दुरुपयोग और सत्ता तथा व्यवसाय के बीच अपारदर्शी संबंध भी चिंता का विषय हैं।एक गंभीर सामाजिक समस्या यह भी है कि भ्रष्टाचार को अनेक लोग व्यवस्था का सामान्य हिस्सा मान चुके हैं। “काम जल्दी हो जाए” या “बिना परेशानी के काम निकल जाए” जैसी मानसिकता भ्रष्टाचार कोबढ़ावा देती है। जब रिश्वत देने वाला और लेने वाला दोनों इसे सामान्य व्यवहार मान लेते हैं, तब कानून भी सीमित प्रभाव छोड़ता है। इसलिए भ्रष्टाचार के विरुद्ध सबसे बड़ा संघर्ष केवल सरकारी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक भी है। 

साथियों, हाल के वर्षों में भारत ने कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। ई-गवर्नेंस, डिजिटल भुगतान, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी),जीईएम (गवर्नमेंट ई-मार्किटप्लेस), ऑनलाइन टेंडर प्रणाली,आधार आधारित सत्यापन, आयकर और जीएसटी का डिजिटलीकरण, ऑनलाइन सेवा वितरण और डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन ने भ्रष्टाचार की अनेक संभावनाओं को कम किया है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से करोड़ों लाभार्थियों तक बिना बिचौलियों के सरकारी सहायता पहुंचना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।फिर भी केवल तकनीक समाधान नहीं है। यदि संस्थागत जवाबदेही कमजोर रहे, शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई न हो, जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर प्रश्न उठें और दोषियों को शीघ्र दंड न मिले, तो तकनीकी सुधार भी सीमित प्रभाव ही छोड़ेंगे। इसलिए तकनीक के साथ मजबूत संस्थागत सुधार अनिवार्य हैं।

साथियों, राजनीतिक वित्तपोषण में पारदर्शिता आज सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक है। लोकतंत्र में चुनाव आवश्यक हैं, किंतु चुनावी वित्तपोषण यदि अपारदर्शी रहेगा तो नीति निर्माण पर निजी हितों का प्रभाव बढ़ सकता है। इसलिए राजनीतिक दलों की आय, चुनावी चंदे और व्यय की पारदर्शिता लोकतांत्रिक शासन की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।स्वतंत्र संस्थाओं की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। लोकपाल, लोकायुक्त, केंद्रीय सतर्कता आयोग,नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, सूचना आयोग, न्यायपालिका, सतर्कता तंत्र और स्वतंत्र मीडिया लोकतंत्र के प्रहरी हैं। यदि ये संस्थाएं निष्पक्ष, स्वतंत्र और संसाधन- संपन्न हों तो भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।सूचना का अधिकार (आऱटीआई) ने भारत में पारदर्शिता बढ़ाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है।अनेक घोटाले, अनियमितताएं और प्रशासनिक कमियां इसी कानून के माध्यम से सामने आईं। इसलिए पारदर्शिता और सूचना तक नागरिकों की पहुंच को और मजबूत करना समय की आवश्यकता है। भ्रष्टाचार के विरुद्ध नागरिकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। यदि कोई नागरिक रिश्वत देने के बजाय शिकायत दर्ज कराए, डिजिटल पोर्टल का उपयोग करे, सबूत सुरक्षित रखे और कानूनी प्रक्रिया का पालन करे, तो व्यवस्था पर सकारात्मक दबाव बनता है। हर शिकायत तत्काल परिणाम नहीं देती, लेकिन सामूहिक नागरिक भागीदारी व्यवस्था में परिवर्तन का आधार बनती है। 

साथियों,विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में नैतिक शिक्षा, ईमानदारी, सार्वजनिक जीवन के मूल्यों और संवैधानिक कर्तव्यों पर अधिक बल दिया जाना चाहिए। भविष्य की पीढ़ी यदि ईमानदारी को सफलता का आधार मानेगी,तभी भ्रष्टाचार के विरुद्ध दीर्घकालिक परिवर्तन संभव होगा।कॉर्पोरेट क्षेत्र की भी जिम्मेदारी कम नहीं है। रिश्वत देकर अनुबंध प्राप्त करना, कर चोरी, फर्जी बिलिंग या अनुचित प्रभाव का उपयोग करना भी भ्रष्टाचार का हिस्सा है। इसलिए मजबूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस,स्वतंत्र ऑडिट, व्हिसलब्लोअर सुरक्षा और नैतिक व्यावसायिक आचरण आवश्यक हैं। 

साथियों, भ्रष्टाचार का सबसे अधिक नुकसान गरीब, मध्यम वर्ग और छोटे उद्यमियों को होता है। जिनके पास संसाधन कम होते हैं,वे रिश्वत देने में अधिक कठिनाई महसूस करते हैं। परिणामस्वरूप सामाजिक असमानता और बढ़ती है। इसलिए भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष वास्तव में सामाजिक न्याय का भी संघर्ष है।भारत यदि विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य प्राप्त करना चाहता है,तो उसेआर्थिक विकास के साथ सुशासन को भी समान प्राथमिकता देनी होगी। विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा केवल उत्पादन, तकनीक और निवेश से नहीं,बल्कि पारदर्शिता,कानून के शासन और संस्थागत विश्वसनीयता से भी तय होती है। 

साथियों, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 2026 रिपोर्ट भारत के लिए निराशा का नहीं,बल्कि आत्ममंथन और सुधार का अवसर है। 91वीं रैंक यह संदेश देती है कि अभी लंबी यात्रा शेष है। यदि हम डिजिटल प्रशासन काविस्तार करें,शिकायत निवारण को प्रभावी बनाएं,  स्वतंत्रसंस्थाओं को मजबूत करें,राजनीतिक वित्तपोषण में पूर्णपारदर्शिता लाएं, न्यायिक प्रक्रियाओं को तेज करें और नागरिकों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध सक्रिय भागीदार बनाएं, तो भारत की स्थिति आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बेहतर हो सकती है। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह सरकार, न्यायपालिका, प्रशासन, मीडिया, उद्योग, नागरिक समाज और प्रत्येक नागरिक की साझा जिम्मेदारी है। जब तक रिश्वत देने वाला यह नहीं कहेगा कि “मैं सुविधा शुल्क नहीं दूंगा”,तब तक रिश्वत लेने वाला भी समाप्त नहीं होगा। इसलिए समय की मांग है कि भ्रष्टाचार को सुविधा नहीं, अपराध माना जाए; मौन नहीं, शिकायत की जाए; समझौता नहीं, प्रतिरोध किया जाए। तभी भारत वैश्विक मंच पर केवल आर्थिक महाशक्ति ही नहीं, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता और नैतिक नेतृत्व का भी उदाहरण बन सकेगा। यही विकसित भारत की वास्तविक पहचान होगी।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

मुर्गी फार्म में तेंदुए की दस्तक से मचा हड़कंप, वन विभाग की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा

कटहरा गांव में पहुंची वन विभाग की टीम, निगरानी के बाद सुरक्षित जंगल की ओर लौट गया तेंदुआ

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सोहगीबरवां वन्य-जीव प्रभाग के पकड़ी रेंज अंतर्गत कटहरा सेक्शन के ग्राम कटहरा में रविवार को उस समय अफरा- तफरी का माहौल बन गया, जब एक मुर्गी फार्म के आस-पास तेंदुआ दिखाई देने की सूचना मिली। वन्य-जीव की मौजूदगी की खबर फैलते ही ग्रामीणों में भय का माहौल उत्पन्न हो गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को दी, जिसके बाद विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया और बिना समय गंवाए टीम मौके पर पहुंच गई।
वन क्षेत्राधिकारी के निर्देशन में पहुंची वन विभाग की टीम ने सबसे पहले पूरे क्षेत्र को अपने नियंत्रण में लिया और मुर्गी फार्म के आस-पास तथा समीपवर्ती इलाकों का बारीकी से निरीक्षण किया। सुरक्षा के मद्देनजर ग्रामीणों को मौके से दूर रहने, शोर-शराबा न करने और तेंदुए को घेरने का प्रयास नहीं करने की सलाह दी गई। वन कर्मियों ने अत्यंत सतर्कता के साथ क्षेत्र में निगरानी शुरू की और तेंदुए की गतिविधियों पर नजर बनाए रखी।
वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सूझ-बूझ तथा ग्रामीणों के सहयोग से स्थिति पूरी तरह सामान्य बनी रही। लगातार निगरानी और सुरक्षित तरीके से किए गए प्रयासों के बाद तेंदुआ बिना किसी नुकसान के वापस जंगल की ओर चला गया। इस दौरान न तो किसी ग्रामीण को कोई नुकसान पहुंचा और न ही वन्य-जीव को किसी प्रकार की क्षति हुई। वन विभाग की तत्परता से संभावित बड़ी घटना टल गई।
तेंदुए के दिखाई देने की सूचना के बाद आस-पास के ग्रामीणों में उत्सुकता और चिंता दोनों का माहौल रहा। कई लोग मौके की ओर जाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन वन विभाग की टीम ने लोगों को समझाकर सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। अधिकारियों ने बताया कि वन्य-जीवों के साथ किसी भी तरह की छेड़-छाड़ करना खतरनाक हो सकता है, इसलिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सोंहगीबरवां वन्य-जीव प्रभाग का क्षेत्र वन्य-जीवों का प्राकृतिक आवास है। कई बार भोजन और सुरक्षित रास्ते की तलाश में वन्य-जीव जंगल से सटे गांवों की ओर पहुंच जाते हैं। ऐसी परिस्थितियों में ग्रामीणों का सहयोग सबसे महत्वपूर्ण होता है। विभाग की टीमें लगातार संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी कर रही हैं, ताकि मानव और वन्य-जीव के बीच संघर्ष की घटनाओं को रोका जा सके। वन विभाग ने क्षेत्रवासियों से अपील की है कि यदि कहीं भी तेंदुआ या कोई अन्य वन्य-जीव दिखाई दे तो घबराएं नहीं और भीड़ एकत्र न करें। वन्य-जीव के नजदीक जाने, उसे पकड़ने या पत्थर आदि मारने का प्रयास बिल्कुल न करें। तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दें, जिससे प्रशिक्षित टीम मौके पर पहुंच कर आवश्यक कार्रवाई कर सके।
वन विभाग के कर्मचारियों ने कहा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना उसकी प्राथमिकता है। इसके लिए वन कर्मियों द्वारा नियमित गश्त, निगरानी और ग्रामीणों को जागरूक करने का कार्य लगातार किया जा रहा है। कटहरा गांव में हुई घटना में भी विभाग की सक्रियता और ग्रामीणों के सहयोग से स्थिति शांतिपूर्ण ढंग से नियंत्रित हो गई।

मंडलायुक्त ने किया पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण के लिए जनसहभागिता पर दिया जोर

संत कबीर नगर(राष्ट्र की परम्परा)। वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 अभियान के तहत मंडलायुक्त अखिलेश सिंह ने रविवार को विकास खंड सेमरियावां की ग्राम पंचायत डिघवा में पौधारोपण कर लोगों को अधिक से अधिक पेड़ लगाने का संदेश दिया। उन्होंने पौधारोपण के साथ पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
मंडलायुक्त ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन और पर्यावरण के लिए अमूल्य धरोहर हैं। स्वच्छ वातावरण, संतुलित पारिस्थितिकी और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अधिकाधिक वृक्षारोपण आवश्यक है। उन्होंने ग्राम पंचायत में पिछले वर्ष लगाए गए पौधों की प्रगति का भी निरीक्षण किया और उनके संरक्षण की व्यवस्था की जानकारी ली।
उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण महाअभियान को सफल बनाने के लिए जनसहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है। प्रत्येक व्यक्ति को पौधा लगाने के साथ उसकी देखभाल का भी संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने लोगों से अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और दूसरों को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने की अपील की।
इसी क्रम में, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर माधव प्रसाद त्रिपाठी राजकीय महिला महाविद्यालय, खलीलाबाद में संयुक्त निदेशक (उच्च शिक्षा) प्रो. अश्विनी कुमार मिश्र, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी गोरखपुर प्रो. उदयभान, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी बस्ती प्रो. जयप्रकाश सिंह तथा महाविद्यालय के प्राचार्य एवं जनपदीय नोडल अधिकारी प्रो. आशाराम की देखरेख में वृक्षारोपण महायज्ञ अभियान-2026 का सफल आयोजन किया गया।
इस अवसर पर प्रो. अश्विनी कुमार मिश्र ने कहा कि वृक्षों के कारण ही पृथ्वी पर जीवन संभव है। जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए अधिकाधिक वृक्षारोपण आवश्यक है और पृथ्वी को हरा-भरा बनाए रखना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। प्रो. उदयभान ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को लेकर गंभीर है तथा प्रत्येक नागरिक को इस अभियान में जिम्मेदारी के साथ भागीदारी निभानी चाहिए। वहीं प्रो. जयप्रकाश सिंह ने कहा कि ऐसे अभियान देश में वन क्षेत्र बढ़ाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए पर्यावरण संरक्षण हम सभी का दायित्व है।
कार्यक्रम में डॉ. प्रीति सिंह, डॉ. रोहित कुमार राय, डॉ. संतोष कुमार चंद, डॉ. आनंद कुमार पांडेय, डॉ. प्रेमचंद, श्रवण कुमार कुशवाहा, नीलम श्रीवास्तव, सुनीता सिंह, राम केवल, लक्ष्मी प्रसाद, अरुण कुमार गौड़ सहित महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित रहीं।

भारत-नेपाल सीमा पर अमेरिकी नागरिक गिरफ्तार, बिना वैध दस्तावेज नेपाल जाने की कोशिश नाकाम

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के बीच सोनौली बॉर्डर पर पुलिस और 22वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की संयुक्त टीम ने एक अमेरिकी नागरिक को बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के नेपाल जाने का प्रयास करते हुए गिरफ्तार किया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम-2025 के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है।

पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में भारत-नेपाल सीमा पर अवैध आवागमन, संदिग्ध गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थाना सोनौली पुलिस और एसएसबी की संयुक्त कार्रवाई में यह सफलता मिली।

पुलिस के अनुसार, 11 जुलाई 2026 की रात करीब 10 बजे एसएसबी के जवानों ने भारत से नेपाल की ओर जा रहे एक विदेशी नागरिक को संदिग्ध परिस्थितियों में रोककर जांच की। जांच के दौरान उसके पास नेपाल प्रवेश के लिए आवश्यक वैध यात्रा दस्तावेज नहीं पाए गए।

पूछताछ में उसकी पहचान जॉर्डन ब्राउन (36 वर्ष), पुत्र जेम्स ब्राउन, निवासी कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका के रूप में हुई। इसके बाद उसे थाना सोनौली पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस ने मु0अ0सं0 68/2026 के तहत धारा 21/23, आव्रजन एवं विदेशी अधिनियम-2025 में मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक के पास से एक मोबाइल फोन, नेपाली मुद्रा, धार्मिक पुस्तकें, एआई ट्रांसलेटर, एक चीनी पासपोर्ट, डायरी, घड़ी सहित अन्य व्यक्तिगत सामान बरामद हुआ है। सुरक्षा एजेंसियां बरामद वस्तुओं के साथ उसके भारत आगमन और नेपाल जाने के उद्देश्य की जांच कर रही हैं।

अधिकारियों ने बताया कि भारत-नेपाल की खुली सीमा को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी कर रही हैं। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में एसएसबी के उपनिरीक्षक (सामान्य) नारायण सिंह दानू, मुख्य आरक्षी (सामान्य) करवीर प्रताप गहलोत तथा आरक्षी (सामान्य) गुड्डू कुमार शामिल रहे।
नोट: पुलिस द्वारा बरामद सामान और मामले की जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

महराजगंज में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 32.38 लाख पौधों का रोपण, हरिशंकरी परंपरा से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश सरकार के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत रविवार को महराजगंज जनपद में वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। जिले भर में करीब 32 लाख 38 हजार पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संकल्प लिया गया। अभियान में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, वन विभाग, स्वयंसेवी संस्थाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

अभियान का मुख्य कार्यक्रम 22वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) परिसर में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बिरजू महाराज कथक संस्थान, लखनऊ की उपाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश तिवारी रहीं। विशिष्ट अतिथियों में जिला पंचायत अध्यक्ष रविकांत पटेल, सदर विधायक जय मंगल कन्नौजिया, मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह तथा प्रभागीय वनाधिकारी सुर्वे निरंजन राजेंद्र शामिल रहे। सभी अतिथियों ने पौधरोपण कर अभियान का शुभारंभ किया।

डॉ. मिथिलेश तिवारी ने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मां और धरती मां के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता व्यक्त करने का जनआंदोलन है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और मातृत्व का विशेष महत्व है तथा प्रत्येक नागरिक को पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए।

सदर विधायक जय मंगल कन्नौजिया ने कहा कि वृक्ष मानव जीवन, जल संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन के आधार हैं। उन्होंने लोगों से पौधे लगाने के साथ उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की।
मुख्य कार्यक्रम के अलावा जिले के सभी विकासखंडों, ग्राम पंचायतों, विद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों और वन क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया। ग्राम पंचायत दरहंटा में आयोजित विशेष कार्यक्रम में सदर विधायक जय मंगल कन्नौजिया, जनपद के नोडल अधिकारी अनुज कुमार झा और जिलाधिकारी गौरव सिंह सोंगरवाल ने हरिशंकरी परंपरा के तहत बरगद, पीपल और पाकड़ के पौधे लगाए। इस दौरान लगभग 350 लोगों ने सामूहिक रूप से पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

प्रभागीय वनाधिकारी सुर्वे निरंजन राजेंद्र ने बताया कि अभियान के तहत लगाए गए सभी पौधों की जियो टैगिंग कराई जा रही है, ताकि उनकी निगरानी और संरक्षण प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की सफलता पौधों की नियमित सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल पर निर्भर करती है।

कार्यक्रम में एसएसबी कमांडेंट सतीश सिंह ठाकुर, अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) डॉ. प्रशांत कुमार, जिला विकास अधिकारी बीएन कन्नौजिया, परियोजना निदेशक राम दरश चौधरी, विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य, विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

महरो में नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर के दूसरे दिन 200 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण, दवाओं का भी हुआ वितरण

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल द्वारा सेवा सप्ताह के अंतर्गत विकासखंड नवानगर के महरो गांव में आयोजित दो दिवसीय नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर के दूसरे दिन भी ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी। शिविर में करीब 200 लोगों का नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श के साथ दवाओं का भी निःशुल्क वितरण किया गया।

शिविर में स्वास्थ्य विभाग उत्तर प्रदेश एवं भारत सरकार की संयुक्त मोबाइल मेडिकल यूनिट (MVU) टीम ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। डॉ. रामजन्म सिंह (कंसल्टेंट मेडिकल ऑफिसर) के नेतृत्व में मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया, जबकि नेत्र परीक्षण में राज आई केयर की टीम ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

चिकित्सकों ने शिविर में पहुंचे लोगों को मौसमी बीमारियों से बचाव, संतुलित आहार, स्वच्छता तथा नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में जागरूक किया। साथ ही स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह भी दी।

शिविर का संयोजन बजरंग दल के जिला संयोजक प्रतीक राय ने किया। उन्होंने बताया कि सेवा सप्ताह के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना संगठन का प्रमुख उद्देश्य है।

कार्यक्रम के दौरान विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मरीजों के पंजीकरण, स्वास्थ्य जांच और दवा वितरण की व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाई। ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए ऐसे स्वास्थ्य शिविरों का नियमित आयोजन कराने की मांग की।

शिविर के सफल आयोजन पर आयोजकों ने सभी चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

विनय प्रजापति की सकुशल बरामदगी से राहत, अफवाहों पर रोक और पुलिस से तथ्य सार्वजनिक करने की मांग

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। लापता हुए विनय प्रजापति की सकुशल बरामदगी की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र में राहत का माहौल है। स्थानीय लोगों ने ईश्वर का आभार व्यक्त करते हुए उनके स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन तथा परिवार के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। इसके साथ ही मामले के दौरान फैली अफवाहों और बिना प्रमाण लगाए गए आरोपों को लेकर भी लोगों ने चिंता व्यक्त की है।

सामाजिक रूप से सक्रिय नागरिकों का कहना है कि किसी भी घटना की जांच पूरी होने से पहले केवल आशंका या अनुमान के आधार पर किसी व्यक्ति या परिवार पर आरोप लगाना उचित नहीं है। उनका मानना है कि ऐसे आरोप संबंधित परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा, सम्मान और मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। लोगों ने कहा कि जिस प्रकार विनय प्रजापति के परिजनों ने उनके लापता होने के दौरान कठिन समय का सामना किया, उसी तरह उन परिवारों को भी मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी जिन पर बिना किसी ठोस साक्ष्य के संदेह व्यक्त किया गया।

इस घटनाक्रम के बाद जिम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने मीडिया संस्थानों से अपील की कि वे अपुष्ट सूचनाओं और अटकलों के आधार पर समाचार प्रसारित करने से बचें। उनका कहना है कि सनसनीखेज खबरों की होड़ में तथ्यों की अनदेखी होने से समाज में भ्रम, अविश्वास और तनाव का वातावरण बनता है, जिसका नुकसान निर्दोष लोगों को उठाना पड़ता है।

स्थानीय नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले पर आधिकारिक प्रेस वार्ता आयोजित करने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यदि घटना से जुड़े तथ्य सार्वजनिक किए जाएं, तो सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैल रही अफवाहों पर रोक लगेगी तथा लोगों के बीच स्पष्टता आएगी।

लोगों का मानना है कि किसी भी संवेदनशील मामले में जांच पूरी होने तक संयम और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करना समाजहित में है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुलिस निष्पक्ष जांच के बाद पूरे प्रकरण की जानकारी सार्वजनिक करेगी और मीडिया भी तथ्यात्मक एवं संतुलित रिपोर्टिंग को प्राथमिकता देगा।

नोट: इस समाचार में स्थानीय नागरिकों द्वारा व्यक्त मांगों और प्रतिक्रियाओं का उल्लेख किया गया है। जांच से संबंधित अंतिम तथ्य पुलिस की आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही माने जाएंगे।