Sunday, July 26, 2026
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गैस-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सपा का विरोध, जनता की समस्याओं को लेकर उठी आवाज

भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।

80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

बीबीएयू में राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला, जिम्मेदार पत्रकारिता और फैक्ट-चेकिंग पर दिया गया जोर

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शनिवार को जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग तथा अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय स्तर की मीडिया कार्यशाला आयोजित हुई। कार्यशाला में जिम्मेदार पत्रकारिता, डिजिटल मीडिया, फैक्ट-चेकिंग और विकसित भारत के निर्माण में मीडिया की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की, जबकि मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार एवं डीडी न्यूज के एडिटर अशोक श्रीवास्तव रहे। मंच पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अध्यक्ष प्रो. एन.एल. गुप्ता, महासचिव प्रो. गीता भट्ट, जनसंचार एवं पत्रकारिता विभागाध्यक्ष प्रो. गोविंद जी. पाण्डेय तथा राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेन्द्र कपूर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना और कुलगीत के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ, पौधा और शॉल भेंटकर किया गया।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए आर्थिक विकास के साथ सामाजिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त नागरिकों का निर्माण भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है और सूचना साझा करने से पहले तथ्यों का सत्यापन करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि फर्जी खबरों और भ्रामक नैरेटिव से समाज को बचाया जा सके।
मुख्य अतिथि अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब नई पीढ़ी को दूरदृष्टि और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने युवाओं को ‘जेन-वी’ यानी विजन वाली पीढ़ी बनने का आह्वान किया। उन्होंने डिजिटल युग में तकनीक के साथ निरंतर अपडेट रहने और तथ्यपरक पत्रकारिता को अपनाने पर बल दिया।
प्रो. एन.एल. गुप्ता ने महासंघ की गतिविधियों, शिक्षा के भारतीयकरण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और मूल्यपरक शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी दी। वहीं प्रो. गीता भट्ट ने कहा कि मीडिया समाज में सकारात्मक बदलाव और जनजागरूकता का सशक्त माध्यम है तथा शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में मीडिया एवं शैक्षिक संगठनों के समन्वय की आवश्यकता है।
तकनीकी सत्र में अशोक श्रीवास्तव ने मीडिया नैरेटिव के प्रभाव और फैक्ट-चेकिंग के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। दूसरे सत्र में रील्स निर्माण, मोबाइल पत्रकारिता, वीडियो ऑप्टिमाइजेशन, डिजिटल युग में प्रिंट मीडिया की प्रासंगिकता तथा प्रभावशाली कंटेंट निर्माण जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। तीसरे सत्र में प्रतिभागियों को हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल प्रशिक्षण दिया गया, जबकि चौथे सत्र में महासंघ के मीडिया प्रकोष्ठ की कार्ययोजना से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. लोकनाथ ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रो. महेंद्र कुमार पाढी, प्रो. रचना गंगवार, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. लोकनाथ सिंह, डॉ. कुंवर सुरेन्द्र बहादुर, डॉ. बबिता पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और प्रतिभागी उपस्थित रहे।

भूगोल की पढ़ाई के खुले नए रास्ते, अब किसी भी संकाय के छात्र ले सकेंगे प्रवेश

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की विद्या परिषद ने भूगोल विषय की प्रवेश पात्रता और डिग्री संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए छात्रों के लिए नए अवसरों का रास्ता खोल दिया है। अब स्नातक स्तर पर कला, विज्ञान या वाणिज्य किसी भी संकाय से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण छात्र भूगोल विषय में प्रवेश ले सकेंगे। इसके साथ ही विभाग में बीए, बीएससी, एमए और एमएससी (भूगोल) पाठ्यक्रम संचालित करने को भी मंजूरी मिल गई है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में हुई विद्या परिषद की बैठक में भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. स्वर्णिमा सिंह द्वारा प्रस्तुत प्रस्तावों को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई।
नए निर्णय के अनुसार, स्नातक स्तर पर किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं उत्तीर्ण अभ्यर्थी, चाहे वे कला, विज्ञान या वाणिज्य संकाय से हों, भूगोल विषय में प्रवेश के पात्र होंगे। इससे विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को भूगोल विषय में अध्ययन का अवसर मिलेगा।
स्नातकोत्तर स्तर पर प्रवेश के लिए विज्ञान संकाय से स्नातक डिग्री अथवा कला संकाय से भूगोल विषय सहित बीए उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को पात्र माना जाएगा। विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे विषय की शैक्षणिक गुणवत्ता और विशेषज्ञता को मजबूती मिलेगी।
विद्या परिषद ने भूगोल विभाग में बीए (भूगोल) और बीएससी (भूगोल) के साथ एमए (भूगोल) एवं एमएससी (भूगोल) की डिग्रियां संचालित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इससे विद्यार्थियों को अपनी रुचि और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के अनुरूप कला तथा विज्ञान दोनों धाराओं में भूगोल की पढ़ाई का विकल्प मिलेगा।
बैठक में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों को अधिक शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि इन निर्णयों से भूगोल विषय में अध्ययन, शोध और रोजगार की संभावनाओं को नई गति मिलेगी।

भाजपा नेताओं ने कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही का किया भव्य स्वागत

बभनान/बस्ती(राष्ट्र की परम्परा)
उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा सूर्य प्रताप शाही जनपद गोंडा का दौड़ा कर बभनान से गोरखपुर जाते समय आदर्श नगर पंचायत बभनान में भाजपा किसान मोर्चा क्षेत्रीय कोषाध्यक्ष व नवनियुक्त जिला कोषाध्यक्ष राधेश्याम कमलापुरी व भाजपा मंडल अध्यक्ष गौर राजेश कमलापुरी ने किया स्वागत और क्षेत्रीय जन समस्याओं पर चर्चा किया। इस मौके पर इंद्रदेव कमलापुरी, धनश्याम गुप्ता अंकित जायसवाल अमित कमलापुरी सहित भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

विज्ञान और कहानी के संगम से निखरी बच्चों की प्रतिभा, ‘एससीआई-टेल्स 2026’ का भव्य आयोजन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर द्वारा आयोजित ‘एससीआई-टेल्स 2026 (साइंस, क्रिएटिविटी एंड इनोवेशन थ्रू स्टोरीटेलिंग)’ का भव्य आयोजन शनिवार को संग्रहालय के यशोधरा सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विज्ञान को रोचक कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत कर बच्चों में वैज्ञानिक सोच, कल्पनाशीलता और संवाद कौशल विकसित करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता एवं स्टोरी टेलर एकांतदीप तथा संग्रहालय के उप निदेशक डॉ. यशवंत सिंह राठौड़ ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं दीप प्रज्वलित कर किया। तीन सत्रों में आयोजित कार्यक्रम में एकांतदीप ने विज्ञान से जुड़े विभिन्न तथ्यों को प्रेरक कहानियों के माध्यम से बच्चों तक पहुंचाया। वहीं विभिन्न विद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं ने भी अपनी प्रस्तुतियों से सभी का ध्यान आकर्षित किया।


‘विज्ञान हमारी जिंदगी में’ विषय पर आधारित इस आयोजन में जीडी गोयनका स्कूल, होली फ्लेम एकेडमी, डॉ. राम मनोहर लोहिया गर्ल्स इंटर कॉलेज, ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल, एनपीए सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गौतम बुद्ध एकेडमी, एमके मेमोरियल इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल सहित अन्य प्रतिष्ठित विद्यालयों के लगभग 200 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने पर्यावरण, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा जल संरक्षण जैसे विषयों पर तीन से पांच मिनट की प्रभावशाली कहानियां प्रस्तुत कीं।
आयोजित मनोवैज्ञानिक प्रतियोगिता के आधार पर सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे, जबकि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन उद्घोषिका रीता श्रीवास्तव ने किया। अंत में उप निदेशक डॉ. यशवंत सिंह राठौड़ ने सभी प्रतिभागियों, शिक्षकों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस्तीफे की खबर पर छात्रों का जश्न पुलिस ने लिया हिरासत में

इंदिरा बाल विहार में मिठाई बांटकर मना रहे थे खुशी, अचानक पहुंची पुलिस

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l शहर के इंदिरा बाल विहार इलाके में शनिवार को उस समय अचानक हलचल तेज हो गई, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर फैलते ही छात्र नेताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते मौके पर छात्रों की भीड़ जुट गई और माहौल उत्सव में बदल गया।
छात्र नेता सतीश प्रजापति अपने समर्थकों के साथ सड़क पर उतर आए और राहगीरों सहित आसपास मौजूद लोगों को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर करने लगे। ढोल-नगाड़ों के बिना ही यहां जश्न का माहौल बन गया था। लोग एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दे रहे थे और इसे छात्रों की जीत बता रहे थे।
सतीश प्रजापति ने मौके पर कहा कि यह दिन छात्रों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है। उन्होंने कहा, आज हमारे लिए होली और दिवाली दोनों है। हम लंबे समय से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। यह लोकतंत्र की जीत है और देश के करोड़ों छात्रों के संघर्ष का परिणाम है।उनके इस बयान के बाद वहां मौजूद समर्थकों ने भी खुशी जाहिर की और नारेबाजी की।
हालांकि, जश्न ज्यादा देर तक नहीं चल सका। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस की गाड़ियां इंदिरा बाल विहार में पहुंचीं और हालात को देखते हुए हस्तक्षेप किया। पुलिस ने जश्न मना रहे छात्र नेता सतीश प्रजापति को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद मौके पर मौजूद लोगों में हलचल मच गई और कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति सड़क पर इस तरह की गतिविधियों से यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, इसलिए एहतियातन कार्रवाई की गई। वहीं, छात्र नेताओं का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से जश्न मनाने के बावजूद पुलिस ने अनावश्यक हस्तक्षेप किया।
घटना के बाद क्षेत्र में कुछ देर तक तनाव जैसी स्थिति बनी रही, हालांकि पुलिस की मौजूदगी में हालात जल्द ही सामान्य हो गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अचानक हुई इस घटना से इलाके में काफी भीड़ इकट्ठा हो गई थी, जिससे आवागमन भी प्रभावित हुआ।
फिलहाल पुलिस द्वारा आगे की कार्रवाई की जा रही है और हिरासत में लिए गए छात्र नेता से पूछताछ की जा रही है।

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हुआ सारनाथ, वैश्विक पहचान को मिली नई ऊंचाई

नवनीत मिश्र

उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक एवं बौद्ध आस्था के प्रमुख केंद्र सारनाथ को यूनेस्को (यूएनईएससीओ) की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के बाद देशभर में खुशी की लहर है। यह उपलब्धि न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। सारनाथ का भगवान बुद्ध के जीवन से गहरा संबंध है और इसे बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में गिना जाता है। मान्यता के बाद सारनाथ को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इससे यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय पर्यटन, रोजगार और अर्थव्यवस्था को भी नया बल मिलेगा। साथ ही, इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं संसाधनों का मार्ग भी प्रशस्त होगा। इतिहास के अनुसार, बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने अपना पहला उपदेश सारनाथ के मृगदाय (ऋषिपत्तन) में अपने पांच शिष्यों को दिया था। इसी घटना को धर्मचक्र प्रवर्तन कहा जाता है और यहीं से बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार की औपचारिक शुरुआत हुई। भगवान बुद्ध का ज्ञान, करुणा, अहिंसा और सद्भाव का संदेश आज भी पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सारनाथ में स्थित धामेक स्तूप, चौखंडी स्तूप, अशोक स्तंभ, मूलगंध कुटी विहार तथा पुरातात्विक संग्रहालय इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समृद्धि के प्रमुख प्रतीक हैं। विशेष रूप से अशोक स्तंभ का सिंहशीर्ष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है, जो इस स्थल के महत्व को और अधिक बढ़ाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से सारनाथ के संरक्षण, शोध और पर्यटन विकास की संभावनाएं और मजबूत होंगी। इससे विश्वभर के शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और बौद्ध अनुयायियों का आकर्षण भी बढ़ेगा। सारनाथ सदियों से शांति, सहिष्णुता और मानवता का संदेश देता रहा है। विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के साथ अब यह धरोहर वैश्विक सांस्कृतिक विरासत के रूप में और अधिक सशक्त पहचान के साथ विश्व मंच पर स्थापित होगी।

हरियाली का संदेश देने निकली पौधरोपण जागरूकता रैली, विद्यार्थियों ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। ब्लूमिंग बड्स स्कूल में पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शनिवार को पौधरोपण जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर से निकली रैली को सचिव एवं प्रबंधक पुष्पा चतुर्वेदी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली के माध्यम से विद्यार्थियों ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी सुरक्षा करने की अपील की।
रैली को रवाना करते हुए एमडी पुष्पा चतुर्वेदी ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि आज वृक्षों का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक छात्र-छात्रा अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल का संकल्प भी ले। यही सच्ची पर्यावरण सेवा होगी।
रैली में शामिल छात्र-छात्राएं हाथों में पौधे और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों वाले बैनर लेकर विद्यालय परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में निकले। इस दौरान सभी ने लोगों को हरियाली बढ़ाने, जल संरक्षण करने और स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधों सहित शताधिक आम का रोपण भी किया गया।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से मुख्य समन्वयक विजय कुमार राय, व्यवस्थापक राजेश कुमार पांडेय, नीलम दुबे, अजय कुमार दुबे, प्रधानाचार्य शैलेश त्रिपाठी, डीसी पाण्डेय, उप प्रधानाचार्य अनूप कुमार, नवनीत मिश्र, तरुण कुमार, सुजीत गौंड, विनय कुमार, अजय कुमार, मिथिलेश पांडेय, नेहा राय, प्रीति मिश्रा, मनोरमा सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं, कर्मचारी एवं सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की नई शुरुआत या राजनीतिक दबाव का परिणाम?

केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: देर आए, दुरुस्त आए या जवाबदेही की नई शुरुआत?

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत सहित पूरी दुनियाँ की नजरें लगी हुई थी, सबके मन में एक ही बात थी क़ि क्या भारतीय केंद्रीय शिक्षा मंत्री इस्तीफा देंगे?इसका जवाब 25 जुलाई 2026 को दोपहर के बाद में मिल गया “देर कर दी मेहरबाँ आते-आते,मगर आए तो सही।” यह पंक्ति भारतीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था पर सबसे अधिक लागू होती दिखाई दी।देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, लाखों छात्रों के भविष्य पर उठे सवाल, जंतर -मंतर पर लंबे समय तक चले आंदोलन,संसद के मानसून सत्र में लगातार गतिरोध और देश-विदेश तक गूंजे विरोध के बाद केंद्रीय शिक्षामंत्री ने पीएम क़ो अपना इस्तीफा सौंप दिया।यह वर्तमान भारतीय प्रधानमंत्री के 12 वर्षों के कार्यकाल में जनदबाव के बाद किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की सबसे बड़ी राजनीतिक घटनाओं में से एक माना जा रहा है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह तथ्य सबको याद दिलाना चाहूंगा क़ि भारतीय लोकतंत्र में नैतिक जवाबदेही का सबसे चर्चित उदाहरण आज भी पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का माना जाता है। वे रेल मंत्री रहते हुए 23 नवंबर 1956 को तमिलनाडु के अरियालुर रेल हादसे के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे बैठे थे। उस दुर्घटना में 140 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी।यद्यपि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पहले इस्तीफा स्वीकार करने के पक्ष में नहीं थे,लेकिन अंततःशास्त्री का त्यागपत्र स्वीकार किया गया और यह भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक जवाबदेही का ऐतिहासिक उदाहरण बन गया।आज धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा संसद से सड़क तक बड़े आंदोलनों के बाद हुआ?, हालांकि परिस्थितियां और राजनीतिक संदर्भ अलग हैं।इस्तीफे के तुरंत बाद सरकार और सीजेपी प्रतिनिधियों के बीच संविधान क्लब में वार्ता हुई।उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई। सीजेपी द्वारा प्रमुख रूप से तीन मांगें उठाई गई थीं आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को आर्थिक सहायता, आंदोलन में शामिल छात्रों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो तथा पुलिस कार्रवाई पर जवाबदेही तय की जाए। इन मांगों को लेकर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत हुई 25 जुलाई 2026 को शाम 6 बजे ऑल इंडिया रेडियो पर बताया गया क़ि  इन मांगों पर सहमति की स्थिति बताई गई है,मांगे स्वीकार किए जाने के बाद प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की गई तथा छात्रों से शांतिपूर्वक अपने घर लौटने की अपील की गई। हालांकि कुछ मांगों की स्वीकृति और उनके क्रियान्वयन को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में भिन्न जानकारी भी सामने आई है।सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जिन्होंने आंदोलन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह सड़कों से निकली लोकतांत्रिक शक्ति, शांति, धैर्य और निरंतर प्रयास की जीत है तथा अब अगला चरण सटीकता से शिक्षा सुधार का होना चाहिए। 

साथियों, भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता को लेकर पिछले कुछ वर्षों में लगातार प्रश्न उठते रहे हैं। देश के विभिन्न राज्यों में पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया, जिसके कारण केवल परीक्षाएं ही नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की साख भी कठघरे में आ गई। पिछले 27 दिनों तक चले व्यापक जनआंदोलन, विपक्ष के लगातार दबाव, संसद में तीखी बहस और देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने अंततः केंद्र सरकार को बहुआयामी कार्रवाई के लिए बाध्य किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से पहले जिस प्रकार एक के बाद एक प्रशासनिक, कानूनी और राजनीतिक कदम उठाए गए, उन्होंने यह स्पष्ट संकेत दिया कि सरकार अब केवल दोषियों को पकड़ने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र को नई कानूनी संरचना के माध्यम से बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

साथियों, इस पूरी प्रक्रिया की पहली महत्वपूर्ण कड़ी बड़े पैमाने पर हुई गिरफ्तारियां रहीं।जांच एजेंसियों ने विभिन्न राज्यों में समन्वित अभियान चलाकर अब तक 14 प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें कथित मास्टरमाइंड बिचौलिए, तकनीकी विशेषज्ञ तथा परीक्षा संचालन से जुड़े कुछ कर्मचारी भी शामिल बताए गए। जांच में यह सामने आया कि पेपर लीक केवल स्थानीय स्तर का अपराध नहीं था,बल्कि इसके पीछे संगठित नेटवर्क कार्य कर रहे थे, जो आधुनिक तकनीक, सोशल मीडिया और आर्थिक लेनदेन के माध्यम से प्रश्नपत्रों की गोपनीयता भंग कर रहे थे। इन गिरफ्तारियों ने यह संदेश दिया कि सरकार अब केवल छोटे अपराधियों पर नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को समाप्त करने की रणनीति अपना रही है। दूसरा बड़ा कदम प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के रूप में सामने आया। सरकार ने विभिन्न विभागों और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े 27 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई केवल अनुशासनात्मक नहीं थी, बल्कि यह संकेत भी था कि भविष्य में किसी भी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत को केवल विभागीय त्रुटि मानकर नहीं छोड़ा जाएगा। भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों का एक साथ निलंबन यह दर्शाता है कि अब जवाबदेही केवल राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरी प्रशासनिक श्रृंखला उत्तरदायी होगी। 

साथियों, इसी बीच मंत्रिमंडल ने परीक्षा सुरक्षा को लेकर अत्यंत कठोर नया विधायी प्रस्ताव भी स्वीकृत किया। प्रस्तावित कानून का सबसे चर्चित प्रावधान यह है कि पेपर लीक जैसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक न्यायालय स्थापित किए जाएंगे और ऐसे मामलों का अंतिम निर्णय लगभग 13 महीनों के भीतर सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। भारत में सामान्यतः न्यायिक प्रक्रिया कई वर्षों तक चलती है, जिससे अपराधियों में दंड का भय कम हो जाता है। यदि यह समयबद्ध न्याय व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू होती है, तो यह देश की परीक्षा प्रणाली में सबसे बड़ा संरचनात्मक सुधार माना जाएगा।इस प्रस्तावित कानून का दूसरा अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष आर्थिक दंड है। पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों में शामिल संस्थाओं या व्यक्तियों पर 10 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। अब तक अधिकांश मामलों में कुछ लाख रुपये या सीमित आर्थिक दंड ही लगाया जाता था, जिससे अपराधियों के लिए जोखिम अपेक्षाकृत कम था। नई व्यवस्था का उद्देश्य अपराध की आर्थिक लाभप्रदता को समाप्त करना है, ताकि संगठित गिरोहों के लिए यह कारोबार पूरी तरह घाटे का सौदा बन जाए। अब विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुधार केवल दंडात्मक नीति नहीं, बल्कि शासन प्रणाली में संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत भी है। परीक्षा सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, प्रश्नपत्रों की एन्क्रिप्टेड ट्रांसमिशन, उत्तरदायित्व निर्धारण और समयबद्ध न्याय ये सभी तत्व मिलकर भारत को वैश्विक स्तर की परीक्षा सुरक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, जापान और सिंगापुर जैसे देशों में परीक्षा सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय तकनीकी और कानूनी व्यवस्था पहले से लागू है। भारत यदि अपने नए कानून को प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है, तो वह विश्व के सबसे बड़े परीक्षा तंत्र को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है। 

साथियों, राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो इनघटनाक्रमों का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा रहा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी मंत्री का इस्तीफा केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं होता, बल्कि वह राजनीतिक जवाबदेही का प्रतीक माना जाता है। इस्तीफे से पहले सरकार द्वारा गिरफ्तारियां, निलंबन और नया कानून लाना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक तथा राजनीतिक दोनों स्तरों पर जवाबदेही स्थापित करने का प्रयास किया गया। इससे यह संदेश देने की कोशिश हुई कि सरकार केवल नेतृत्व परिवर्तन तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन का भी दावा कर रही है।आर्थिक दृष्टि से भी यह सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक पेपर लीक के कारण परीक्षाओं के पुनः आयोजन, सुरक्षा प्रबंधन, न्यायिक प्रक्रिया तथा प्रशासनिक खर्च पर करोड़ों रुपये व्यय होते हैं। इसके अतिरिक्त लाखों अभ्यर्थियों को मानसिक, आर्थिक और सामाजिक क्षति होती है। यदि नई व्यवस्था वास्तव में पेपर लीक की घटनाओं को रोकने में सफल होती है, तो इससे सरकारी संसाधनों की बचत होगी, युवाओं का समय सुरक्षित रहेगा तथा रोजगार प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।सामाजिक दृष्टिकोण से देखें तो यह केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास की पुनर्स्थापना का प्रयास है। प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले करोड़ों विद्यार्थी वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं। जब प्रश्नपत्र लीक होते हैं, तब केवल परीक्षा ही नहीं, बल्कि उनकी मेहनत, परिवार की उम्मीदें और व्यवस्था पर विश्वास भी प्रभावित होता है। इसलिए सरकार की हालिया कार्रवाइयों को केवल कानूनी कदम नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास बहाली की प्रक्रिया के रूप में भी सटीकता से देखा जा रहा है। 

साथियों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। विश्व के अनेक देशों में उच्च शिक्षा, सरकारी भर्ती और पेशेवर परीक्षाओं की विश्वसनीयता राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता से जुड़ी होती है। यदि भारत समयबद्ध न्याय, कठोर आर्थिक दंड, डिजिटल सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही के इस मॉडल को प्रभावी ढंग से लागू कर देता है, तो यह विकासशील देशों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सकता है। इससे भारत की संस्थागत विश्वसनीयता, निवेशकों का विश्वास और वैश्विक शिक्षा प्रणाली में उसकी साख भी मजबूत हो सकती है। 

साथियों, वर्ष 2026 का पूरा घटनाक्रम केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहा। पिछले कई वर्षों से विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों का विश्वास कमजोर किया था। नीट विवाद ने इस असंतोष को राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दे दिया। छात्रों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग तेज कर दी।जंतर-मंतर देशव्यापी असंतोष का केंद्र बना, जबकि संसद का मानसून सत्र भी इस मुद्दे की भेंट चढ़ गया। 20 जुलाई से शुरू हुआ सत्र 25 जुलाई तक बार-बार बाधित रहा।इस पूरे आंदोलन में उभरकर सामने आई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपने आंदोलन को केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रखा बल्कि परीक्षा सुधार,छात्रों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। आंदोलन धीरे-धीरे देश के अनेक राज्यों तक फैल गया और सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक इसकी सटीकता से चर्चा होने लगी। 

साथियों, धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपना इस्तीफा सार्वजनिक करते हुए लिखा कि उन्होंने चार दशकों से अधिक समय छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित किया है तथा उनका विश्वास रहा है कि सशक्त शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है। उन्होंने यह भी कहा कि वे छात्रों के भविष्य को सर्वोपरि रखते हैं और नहीं चाहते कि वर्तमान परिस्थितियों का दुरुपयोग राष्ट्रविरोधी तत्व करें। अब राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इस्तीफा केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि व्यापक राजनीतिक संदेश भी है। पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर “समय सबको झुका देता है, सिंहासन डोलने पर डैमेज कंट्रोल करना पड़ता है जैसी टिप्पणियां लगातार चर्चा में थीं। हालांकि सरकार की ओर से इसे छात्रों के हित में लिया गया निर्णय बताया गया, जबकि विपक्ष ने इसे जनता की जीत करार दिया। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि  25 जुलाई 2026 का दिन भारतीय लोकतंत्र, शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही के इतिहास में एक महत्वपूर्ण तिथि के रूप में याद किया जा सकता है। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक राजनीतिक घटना नहीं बल्कि यह संदेश भी है कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करना अब सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए। “देर आए, दुरुस्त आए” की कहावत तभी सार्थक होगी जब इसके बाद व्यापक परीक्षा सुधार, पारदर्शी प्रशासन और छात्रों के भविष्य की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। तभी यह अध्याय केवल एक इस्तीफे का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास की पुनर्स्थापना का अध्याय कहलाएगा।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

रेलवे यात्रियों को निशाना बनाने वाला शातिर चढ़ा जीआरपी के हत्थे


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। रेलवे यात्रियों की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) देवरिया को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। झपटमारी के एक मामले में कार्रवाई करते हुए जीआरपी ने एक युवक को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से झपटे गए मंगलसूत्र की बिक्री से प्राप्त 9,700 रुपये नकद बरामद किए हैं। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर उसके अन्य आपराधिक मामलों की भी जानकारी जुटा रही है।


पुलिस महानिदेशक रेलवे प्रकाश डी, पुलिस महानिरीक्षक रेलवे आर.के. भारद्वाज तथा पुलिस अधीक्षक रेलवे लक्ष्मी निवास मिश्र के निर्देशन में रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों और सर्कुलेटिंग एरिया में अपराध नियंत्रण एवं अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत पुलिस उपाधीक्षक रेलवे बलिया सविरत्न गौतम के पर्यवेक्षण में शनिवार को जीआरपी देवरिया की टीम ने रेलवे स्टेशन देवरिया सदर के प्लेटफॉर्म संख्या-1 से आरोपी को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान रोहित उर्फ टिमल (20 वर्ष) पुत्र गुड्डू डोम, निवासी कांशीराम आवास, पूर्वी चौराहा, थाना कोतवाली, जनपद देवरिया के रूप में हुई है। आरोपी के कब्जे से मु0अ0सं0 38/2026 से संबंधित झपटमारी के मामले में 9,700 रुपये नकद बरामद किए गए।
पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में यात्रियों को निशाना बनाकर चोरी और झपटमारी की घटनाओं को अंजाम देता था तथा प्राप्त धन का उपयोग अपने निजी खर्च और ऐशो-आराम के लिए करता था। पुलिस का मानना है कि आरोपी की गिरफ्तारी से रेलवे क्षेत्र में चोरी और झपटमारी जैसी घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
इस मामले में जीआरपी थाना देवरिया पर मु0अ0सं0 38/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज है। पुलिस आरोपी के अन्य संभावित आपराधिक इतिहास का भी सत्यापन कर रही है तथा आवश्यक विधिक कार्रवाई जारी है।
गिरफ्तारी एवं बरामदगी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक राजीव सिंह, मुख्य आरक्षी श्यामसुन्दर, मुख्य आरक्षी श्रीनाथ शर्मा, आरक्षी प्रमोद यादव, एसआई अबू फरहान गफ्फार (सीआईबी गोरखपुर), एसआई चन्द्रशेन सिंह (सीआईबी भटनी) तथा एएसआई अक्षय कुमार सिंह (आरपीएफ पोस्ट देवरिया) शामिल रहे।

पूर्व प्रधान हत्याकांड का खुलासा, चौकीदार समेत दो गिरफ्तार

बलिया (राष्ट्र की परम्परा )

सहतवार पुलिस ने उदहा गांव के पूर्व प्रधान राम व्यास वर्मा की हत्या के मामले का महज 12 घंटे के भीतर खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों में एक सहतवार थाने में नियुक्त चौकीदार भी शामिल है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त ईंट तथा खून से सने कपड़े भी बरामद किए हैं। थानाध्यक्ष प्रशांत चौधरी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शिवम और गोपाल के रूप में हुई है। दोनों उदहा गांव में अपने ननिहाल (नवासे) में रह रहे थे। शुक्रवार को पुलिस ने दोनों को त्रिकालपुर-अतरडरिया तिराहे से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गोपाल का पूर्व प्रधान राम व्यास वर्मा से जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इस विवाद को लेकर पहले भी दोनों पक्षों के बीच कई बार मारपीट हो चुकी थी। इसी रंजिश के चलते घटना की रात दोनों आरोपी पूर्व प्रधान के ट्यूबवेल स्थित झोपड़ी पर पहुंचे और ईंट से सिर कुचलकर उनकी हत्या कर दी। वारदात के बाद खून से सने कपड़े और हत्या में प्रयुक्त ईंट को छिपाकर फरार हो गए।
पुलिस ने संदेह के आधार पर दोनों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, जिसके बाद आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त ईंट और खून से सने कपड़े भी बरामद कर लिए गए।
गिरफ्तारी करने वाली टीम में थानाध्यक्ष प्रशांत चौधरी के अलावा स्वाट टीम प्रभारी विश्वनाथ यादव, उपनिरीक्षक अजय साह, उपनिरीक्षक दिनेश कुमार विश्वकर्मा, हरेंद्र पटेल, स्वाट टीम के अमरदेव, दिलीप पाठक, विकास सिंह, सूर्य प्रकाश यादव, मनोज कुमार, अरविंद कुमार, अवनीश यादव, शरीफ अंसारी तथा महिला कांस्टेबल सोनी शामिल रहीं। पुलिस ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए न्यायालय भेज दिया।

स्वरोजगार योजनाओं में तेजी लाने और निवेश बढ़ाने पर प्रशासन का फोकस

डीएम ने बैंकों और विभागों को समयबद्ध लक्ष्य पूरा करने के दिए निर्देश, जीबीसी 5.0 के लिए 2000 करोड़ के निवेश का लक्ष्य

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में स्वरोजगार योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, निवेश प्रस्तावों की प्रगति और औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में जिला उद्योग बंधु समिति, जिला निर्यात प्रोत्साहन समिति तथा उद्योग विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। बैठक में योजनाओं की प्रगति, बैंक स्तर पर लंबित मामलों और आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से जुड़े प्रस्तावों की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी भी बैठक में उपस्थित रहे।
बैठक में उपायुक्त उद्योग ने निवेश मित्र पोर्टल पर लंबित प्रकरणों की जानकारी दी। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को सभी लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) वित्त पोषण योजना तथा अन्य स्वरोजगार योजनाओं की प्रगति से समिति को अवगत कराया गया। एक जनपद एक व्यंजन वित्तपोषण सहायता योजना की भी जानकारी प्रस्तुत की गई।
मुख्य विकास अधिकारी ने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान की विस्तृत समीक्षा की। योजनाओं की लक्ष्य के अनुरूप प्रगति नहीं मिलने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए अग्रणी जिला प्रबंधक एसबीआई और उपायुक्त उद्योग को निर्देश दिए कि बैंकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर निर्धारित लक्ष्य समयबद्ध तरीके से पूरे कराए जाएं। उन्होंने बैंक शाखाओं में लंबित आवेदन पत्रों के शीघ्र निस्तारण और ऋण स्वीकृति एवं वितरण में तेजी लाने के भी निर्देश दिए, ताकि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जनपद की प्रगति बेहतर हो सके।
बैठक में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के तहत हुए एमओयू और प्रस्तावित जीबीसी 5.0 की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। उद्यमी मित्र विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि नवंबर के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित जीबीसी 5.0 के लिए जनपद को 2000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य मिला है। इस पर जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को अधिक से अधिक एमओयू कराने और निवेश प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए, ताकि जनपद निर्धारित लक्ष्य प्राप्त कर सके।
बैठक में उपायुक्त उद्योग विनोद कुमार वर्मा, लीड बैंक मैनेजर पवन कुमार सिन्हा, जिला उद्यान अधिकारी समुद्रगुप्त मल्ल, औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि, उद्यमी तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

माय भारत पोर्टल से जोड़ने के लिए डीएम ने सभी विभागों को दिए निर्देश, उत्कृष्ट स्वयंसेवकों को मिलेगा सम्मान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला युवा सलाहकार समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में मेरा युवा भारत (माय भारत) के तहत चल रहे सघन पंजीकरण अभियान की समीक्षा की गई तथा 1 जुलाई से 15 अगस्त तक अधिक से अधिक युवाओं का माय भारत पोर्टल पर पंजीकरण सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए।
बैठक में जिला युवा अधिकारी निशांत कुमार चौहान ने माय भारत की कार्यप्रणाली, उद्देश्यों और वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने सघन पंजीकरण अभियान के पोस्टर का अनावरण भी किया।
जिलाधिकारी ने माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग सहित सभी विभागों को विद्यालयों और महाविद्यालयों में अधिकाधिक युवाओं का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी विभाग और कार्यालय भी माय भारत पोर्टल पर अपना पंजीकरण सुनिश्चित करें तथा अभियान के सफल संचालन के लिए आपसी समन्वय मजबूत करें।
पंचायती राज विभाग को निर्देशित किया गया कि कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी), पंचायत सहायक, ग्राम पंचायत सचिव, डाटा एंट्री ऑपरेटर तथा अन्य पंचायत स्तरीय कार्मिकों के माध्यम से ग्राम स्तर तक युवाओं का पंजीकरण कराया जाए, ताकि अभियान का लाभ अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंच सके।
बैठक में बताया गया कि माय भारत पोर्टल युवाओं को क्विज, निबंध लेखन, स्वयंसेवी गतिविधियों, एक्सपीरिएंशियल लर्निंग प्रोग्राम (ईएलपी), युवा संसद, यूथ फेस्टिवल, यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम, विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग, वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम और प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना सहित विभिन्न अवसरों से जोड़ता है। साथ ही छात्रवृत्तियों और अन्य युवा-केंद्रित योजनाओं की जानकारी भी पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध होती है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 1 जुलाई से 15 अगस्त तक चलने वाले सघन पंजीकरण अभियान में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वयंसेवकों को स्वतंत्रता दिवस पर जिलाधिकारी सम्मानित करेंगे। इसके अलावा 26 जुलाई को प्रस्तावित वाइब्रेंट विकसित ग्राम कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।
बैठक में जिला युवा अधिकारी निशांत कुमार चौहान सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

45वें दीक्षांत समारोह से पहले गांवों में प्रतिभा का उत्सव, ‘मेरी मां’ विषय पर विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मकता

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह के तहत गोद लिए गए गांवों में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला में शुक्रवार को पिपराइच ब्लॉक के खडराईच स्थित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय में ‘मेरी मां’ विषयक विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने पोस्टर/चित्रकला, भाषण, कहानी कथन और निबंध प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
पोस्टर एवं चित्रकला प्रतियोगिता का विषय ‘मां और मेरा परिवार’ रखा गया था, जिसमें कक्षा छह की वैष्णवी ने प्रथम और कक्षा आठ के राज ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। ‘मां की दुआओं का असर’ विषय पर आयोजित कहानी कथन प्रतियोगिता में कक्षा छह की अंशिका प्रथम तथा आयशा खातून द्वितीय रहीं। वहीं ‘मेरी मां, मेरी प्रेरणा’ विषय पर हुई भाषण प्रतियोगिता में कक्षा सात की रूमा ने पहला और कक्षा छह की प्रिया ने दूसरा स्थान हासिल किया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. नुपुर सिंह, डॉ. तरहां अंसारी, बलेन्दर यादव, विनीत सिंह और राजेन्द्र मौर्य उपस्थित रहे। विद्यालय की प्रधानाचार्या मधुलिका मिश्रा के साथ किरण सिंह, सरिता चौधरी, मीना मिश्रा और नयनतारा पाण्डेय ने आयोजन में सहयोग किया।
गोद लिए गए गांवों में आयोजित सभी कार्यक्रम प्रो. सत्यपाल सिंह के निर्देशन में संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं बच्चों में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति क्षमता और संस्कारों का विकास करती हैं तथा जीवन भर याद रहने वाली प्रेरणादायक स्मृतियां बनाती हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिताओं से चयनित चार विजेता विद्यार्थियों को 45वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति के हाथों सम्मानित किया जाएगा।
कार्यक्रम के समापन पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने वीडियो संदेश के माध्यम से सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

कस्बा चौकी सिकंदरपुर में जीर्णोद्धारित कार्यालय एवं नई बैरक का लोकार्पण

सिकंदरपुर /बलिया (राष्ट्र की परम्परा)

कस्बा चौकी सिकंदरपुर परिसर में शुक्रवार को जीर्णोद्धारित कार्यालय तथा पुलिसकर्मियों के लिए निर्मित नई बैरक का लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। पुलिस अधीक्षक की अनुपस्थिति में अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) दिनेश कुमार शुक्ला ने फीता काटकर एवं शिलापट्ट का अनावरण कर नई सुविधाओं का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) दिनेश कुमार शुक्ला ने कहा कि पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य वातावरण और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। आधुनिक एवं सुव्यवस्थित कार्यालय तथा नई बैरक से पुलिसकर्मियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और आमजन को भी बेहतर पुलिस सेवा मिल सकेगी।
थाना प्रभारी निरीक्षक मूलचंद चौरसिया ने कहा कि चौकी परिसर के जीर्णोद्धार एवं नई बैरक के निर्माण से पुलिसकर्मियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। चौकी प्रभारी गिरजेश कुमार सिंह ने कार्यक्रम में आए अधिकारियों एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर नगर पंचायत सिकंदरपुर के सम्मानित नागरिक, पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। उपस्थित लोगों ने पुलिस विभाग द्वारा किए गए इस विकास कार्य की सराहना करते हुए इसे पुलिस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

घर के बाहर सो रही महिला की धारदार हथियार से हत्या, गांव में सनसनी

रात में हुए विवाद के बाद वारदात की आशंका,फोरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य, आरोपितों की तलाश में जुटी पुलिस

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।श्यामदेंउरवा थाना क्षेत्र के कुड़वां उर्फ मुरकटियां टोला लंगड़ी में शुक्रवार सुबह घर के बाहर सो रही एक महिला की निर्मम हत्या से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। वारदात की सूचना मिलते ही गांव में भारी भीड़ जुट गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, जबकि फोरेंसिक टीम ने घटना-स्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए हैं।
मृतका की पहचान रूक्मिणी 40 वर्ष पत्नी शिव नारायण निवासी कुड़वां उर्फ मुरकटियां टोला लंगड़ी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार गुरुवार रात गांव के कुछ लोगों से उनका विवाद हुआ था। इसके बाद परिवार के लोगों ने भोजन किया और रूक्मिणी रोज की तरह घर के बाहर सो गईं। शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे जब परिजनों की नजर उन पर पड़ी तो वह खून से लथपथ अवस्था में मृत मिलीं। उनके सिर पर किसी धारदार अथवा भारी वस्तु से किए गए गंभीर वार के निशान पाए गए, जिससे हत्या की आशंका और प्रबल हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही श्यामदेंउरवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटना -स्थल को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तथा सदर क्षेत्राधिकारी अंकुर गौतम भी मौके पर पहुंचे और घटना- स्थल का बारिकी से निरीक्षण कर पुलिस टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। फोरेंसिक विशेषज्ञों ने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित किए।
पुलिस प्रारंभिक जांच में गुरुवार रात हुए विवाद को भी अहम कड़ी मानकर जांच कर रही है। संदिग्ध लोगों से पूछ-ताछ की जा रही है और आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें सक्रिय कर दी गई हैं।
इस घटना के बाद गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
इस संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ ने बताया कि मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है और जल्द ही घटना का खुलासा कर दोषियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।