देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया में Flipkart से जुड़े डिलीवरी कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी है। मजदूरी में लगातार कटौती और अन्य समस्याओं को लेकर कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
₹17 से घटकर ₹9 तक पहुंची प्रति पैकेट मजदूरी
हड़ताली कर्मचारियों का आरोप है कि पहले उन्हें प्रति पैकेट ₹17–₹16 का भुगतान मिलता था, जिसे धीरे-धीरे घटाकर ₹13 कर दिया गया और अब यह दर ₹10–₹9 प्रति पैकेट तक पहुंच गई है।
कर्मचारियों का कहना है कि इतनी कम मजदूरी में गुजारा करना मुश्किल हो गया है और इससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।
एक ऑर्डर में कई पैकेट, लेकिन पूरा भुगतान नहीं
डिलीवरी कर्मियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार एक ही ऑर्डर में कई पैकेट होने के बावजूद उन्हें पूरा भुगतान नहीं दिया जाता। इससे उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पा रहा है और काम का बोझ बढ़ता जा रहा है।
बीमा कटौती पर भी उठे सवाल
कर्मचारियों के अनुसार हर महीने ₹200–₹300 तक बीमा के नाम पर उनकी सैलरी से कटौती की जा रही है, लेकिन अब तक किसी को भी बीमा से संबंधित दस्तावेज या पॉलिसी की जानकारी नहीं दी गई है। इसको लेकर कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ गया है।
OBD सिस्टम बना नई परेशानी
डिलीवरी कर्मियों ने OBD (ओपन बॉक्स डिलीवरी) सिस्टम पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि ग्राहक पैकेट खोलकर सामान लेने से मना कर देता है, तो उस डिलीवरी का भुगतान उन्हें नहीं मिलता। ऐसी स्थिति में उन्हें पूरे दिन पैकेट लेकर घूमना पड़ता है, जिससे समय और मेहनत दोनों का नुकसान होता है।
मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रबंधन को अपनी समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने मांग की है कि:
• प्रति पैकेट भुगतान बढ़ाया जाए • बीमा कटौती की पारदर्शी जानकारी दी जाए • OBD सिस्टम में सुधार किया जाए
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
2029 चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी, संशोधन प्रस्ताव पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने के उद्देश्य से 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम अब एक नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार इस कानून को लागू करने के लिए संशोधन प्रस्ताव लेकर आई है, ताकि 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं को इसका सीधा लाभ मिल सके। इसी मुद्दे पर 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है, जहां इस पर व्यापक चर्चा होने वाली है। दरअसल, जब 2023 में यह कानून पारित हुआ था, तब यह तय किया गया था कि महिला आरक्षण को लागू करने से पहले देश में नई जनगणना कराई जाएगी और उसके आधार पर परिसीमन (सीटों का पुनर्निर्धारण) होगा। लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण 2021 की जनगणना टल गई और अब तक इसकी प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। यही वजह है कि यह कानून अब तक जमीन पर लागू नहीं हो पाया।
अब केंद्र सरकार का तर्क है कि यदि 2029 के चुनाव तक इंतजार किया गया और तब तक जनगणना व परिसीमन पूरा नहीं हुआ, तो महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिलने में और देरी हो जाएगी। इसलिए सरकार इस प्रक्रिया को तेज करना चाहती है और संशोधन के जरिए पहले ही आरक्षण लागू करने का रास्ता निकालने की कोशिश कर रही है। संशोधन प्रस्ताव के तहत सरकार की योजना है कि नई जनगणना के आधार पर परिसीमन आयोग का गठन किया जाए, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों का पुनर्निर्धारण करेगा। इसके बाद कुल सीटों में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। खास बात यह है कि ये सीटें स्थायी नहीं होंगी, बल्कि हर चुनाव में बदलती रहेंगी, जिसे रोटेशन प्रणाली कहा जाता है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। विपक्षी दल सरकार के इरादों पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि बिना जनगणना और परिसीमन के आधार तैयार किए महिला आरक्षण लागू करना जल्दबाजी होगी और इससे क्षेत्रीय असंतुलन पैदा हो सकता है। खासकर दक्षिण भारत के राज्यों ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। विपक्ष का मुख्य तर्क यह है कि यदि जनसंख्या को परिसीमन का आधार बनाया गया, तो उत्तर भारत के राज्यों—जहां जनसंख्या अधिक है—को ज्यादा सीटें मिलेंगी, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें घट सकती हैं। इन राज्यों का कहना है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, तो उन्हें इसका “दंड” क्यों मिले। इसके अलावा, कुछ दलों ने यह भी मांग उठाई है कि महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटा तय किया जाए।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बराबरी दिलाना है। सरकार यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं की जाएंगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर कुल सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इससे सभी राज्यों को संतुलित प्रतिनिधित्व मिलेगा और महिलाओं को भी उनका अधिकार मिल सकेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे जनगणना, परिसीमन और क्षेत्रीय राजनीति का जटिल समीकरण भी जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि संसद का यह विशेष सत्र बेहद अहम माना जा रहा है। इसमें लिए गए फैसले आने वाले चुनावों और देश की राजनीतिक दिशा दोनों को प्रभावित कर सकते हैं। अब सबकी नजरें संसद में होने वाली बहस पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि महिलाओं को 33% आरक्षण कब और किस रूप में मिलेगा। अगर सहमति बनती है, तो यह भारतीय लोकतंत्र में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है।
होर्मुज़ संकट 2026: अमेरिकी नाकेबंदी, चीनी चुनौती और बदलता वैश्विक शक्ति संतुलन
पश्चिम एशिया में 15 अप्रैल 2026 को उत्पन्न घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति को एक बार फिर अस्थिरता के मोड़ पर ला खड़ा किया है। Strait of Hormuz पर अमेरिकी नाकेबंदी, चीनी टैंकरों की सक्रियता, ईरान-अमेरिका तनाव और इस्लामाबाद में विफल कूटनीतिक वार्ताओं ने मिलकर एक ऐसा विस्फोटक संकट खड़ा कर दिया है, जिसका प्रभाव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक है। यह स्थिति केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून, ऊर्जा सुरक्षा और महाशक्तियों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का प्रतीक बन चुकी है। इस बीच भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के बीच 14 अप्रैल को हुई 40 मिनट की बातचीत ने इस संकट में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है। ऊर्जा आयात पर निर्भर भारत के लिए यह स्थिति अत्यंत संवेदनशील है, लेकिन साथ ही वैश्विक मंच पर अपनी रणनीतिक भूमिका को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करती है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा है, जहां से प्रतिदिन लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन होता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और इसके दोनों ओर ईरान व ओमान स्थित हैं। इस क्षेत्र पर नियंत्रण का अर्थ है वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव, यही कारण है कि United States, China और ईरान यहां अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखते हैं।
अमेरिका ने अपनी नौसेना के माध्यम से ईरानी बंदरगाहों पर दबाव बनाने के लिए व्यापक नाकेबंदी लागू की, जिसमें हजारों सैनिक, युद्धपोत और एयरक्राफ्ट शामिल किए गए। इस कदम का उद्देश्य ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों के चलते कमजोर करना था। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में एकतरफा नाकेबंदी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और यूरोपीय देशों का सीमित समर्थन इस रणनीति को और जटिल बना रहा है। ट्रम्प की रणनीति आंशिक रूप से सफल रही है। कुछ जहाजों को लौटना पड़ा, जिससे ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा, लेकिन कई टैंकर नाकेबंदी पार करने में भी सफल रहे। इससे यह स्पष्ट है कि रणनीति में प्रभाव के साथ-साथ सीमाएं भी मौजूद हैं। चीनी टैंकर “रिच स्टैरी” की गतिविधियों ने इस संकट को और गहरा कर दिया। यह घटना दर्शाती है कि चीन अब खुले तौर पर अमेरिकी दबाव को चुनौती देने के लिए तैयार है और अपने ऊर्जा हितों की रक्षा हेतु जोखिम उठा रहा है। यह केवल एक जहाज की घटना नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत है। अमेरिका और चीन के बीच यह टकराव एक नए शीत युद्ध की आहट देता है। यह संघर्ष केवल सैन्य नहीं, बल्कि आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक भी है। चीन-ईरान संबंधों की मजबूती और अमेरिका की प्रतिबंध नीति आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकती है।
1953 का ईरान तख्तापलट इस संदर्भ में उल्लेखनीय है, जो यह दिखाता है कि ईरान पर बाहरी हस्तक्षेप का इतिहास पुराना है। आज का संकट उसी इतिहास की नई कड़ी है, फर्क सिर्फ इतना है कि अब इसमें चीन जैसे नए शक्तिशाली खिलाड़ी शामिल हो चुके हैं। इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता की विफलता ने यह स्पष्ट कर दिया कि कूटनीति फिलहाल सीमित प्रभावी है। विश्वास की कमी और कठोर शर्तों ने समाधान की संभावनाओं को कमजोर किया है, जिससे सैन्य और आर्थिक दबाव की रणनीतियां बढ़ रही हैं। इस संकट का सबसे बड़ा प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच चुकी हैं, जिससे महंगाई, परिवहन लागत और औद्योगिक उत्पादन पर असर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने भी वैश्विक विकास दर में गिरावट की आशंका जताई है।
आने वाले समय में यह संकट तीन दिशाओं में जा सकता है—सीधा सैन्य संघर्ष, कूटनीतिक समाधान या लंबा गतिरोध। वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि कोई भी पक्ष पूर्ण जीत की स्थिति में नहीं है। अमेरिका दबाव बना रहा है, लेकिन पूर्ण नियंत्रण नहीं; चीन चुनौती दे रहा है, लेकिन जोखिम में है; और ईरान प्रतिरोध कर रहा है, लेकिन आर्थिक नुकसान झेल रहा है। यह संकट 21वीं सदी की वैश्विक राजनीति की नई परिभाषा लिख रहा है, जहां शक्ति संतुलन, ऊर्जा नियंत्रण और रणनीतिक दबाव ही निर्णायक कारक बनते जा रहे हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह समय संतुलित कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर है।
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। लखनऊ के विकासनगर सेक्टर-14 में बुधवार दोपहर एक भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और करीब 200 झोपड़ियां इसकी चपेट में आ गईं।
सिलेंडर धमाकों से दहला इलाका
आग लगने के बाद झोपड़ियों में रखे गैस सिलेंडर और रेफ्रिजरेटर के कंप्रेसर एक के बाद एक फटने लगे। तेज धमाकों की आवाज से पूरा क्षेत्र दहल उठा और लोगों में भगदड़ मच गई।
स्थानीय लोगों ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई, लेकिन देखते ही देखते आग ने सब कुछ खाक कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। करीब 12 फायर ब्रिगेड गाड़ियों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास लगातार जारी रहा।
आग की लपटें और धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहा था, जिससे घटना की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
भारी नुकसान की आशंका
इस हादसे में झोपड़ियों में रखा घरेलू सामान पूरी तरह जलकर राख हो गया। फिलहाल किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन नुकसान काफी बड़ा बताया जा रहा है।
प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा)। बुधवार शाम एक बेहद दर्दनाक रेल हादसा सामने आया, जिसमें पांच लोगों की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। यह हादसा प्रयागराज मंडल के करछना-भीरपुर रेलखंड के बीच हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया।
ट्रैक पर शव दिखने से रुकी थी पहली ट्रेन
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गाड़ी संख्या 12312 (डाउन दिशा) के गार्ड और लोको पायलट ने शाम करीब 6:15 बजे किलोमीटर संख्या 801/24-22 पर डाउन मेन लाइन पर एक शव देखा। इस सूचना के बाद ट्रेन को तत्काल रोक दिया गया और संबंधित अधिकारियों को सूचित कर आवश्यक कार्रवाई शुरू की गई।
बताया जा रहा है कि ट्रैक पर शव होने की खबर सुनकर कुछ लोग मौके पर पहुंच गए। इसी दौरान गाड़ी संख्या 12801 पुरुषोत्तम एक्सप्रेस (अप दिशा) शाम करीब 6:47 बजे वहां से गुजर रही थी।
तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह हादसा इतनी तेजी से हुआ कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला।
रेलवे प्रशासन ने जारी की चेतावनी
रेलवे प्रशासन ने घटना के बाद जरूरी विधिक और प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही आम जनता और यात्रियों से अपील की है कि ट्रेन रुकने की स्थिति में बिना कारण नीचे न उतरें और रेलवे ट्रैक पर जाने से बचें। अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है, अन्यथा ऐसे हादसे दोबारा हो सकते हैं।
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। तहसील क्षेत्र के ग्राम लक्ष्मीपुर में अधिवक्ता विजेंद्र सिंह की मौत के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया। बुधवार को जिलाधिकारी दिव्या मित्तल स्वयं गांव पहुंचीं और बंद कमरे में करीब एक घंटे तक अधिकारियों व कर्मचारियों से घटना की विस्तृत जानकारी ली।
इसके बाद वह मृतक अधिवक्ता के घर पहुंचीं, जहां परिजनों से मिलकर उन्हें ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का भरोसा दिया। जिलाधिकारी ने बताया कि मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए हैं, जिसकी शुरुआत गुरुवार से होगी। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी के पास कोई साक्ष्य है तो वह सीधे उनसे संपर्क कर सकता है।
डीएम ने एसडीएम को निर्देश दिया कि मृतक का वरासत संबंधी कार्य उसी दिन पूरा कराया जाए। ग्रामीणों की मांग पर क्षेत्र के चकरोडों पर हुए अतिक्रमण को चिन्हित कर उन्हें कब्जा मुक्त कराने के भी निर्देश दिए गए।
मुलाकात के दौरान लेखपाल और कानूनगो की लापरवाही की शिकायत भी सामने आई, जिस पर जिलाधिकारी ने संज्ञान लिया। इस दौरान एडीएम प्रशासन, एसडीएम, तहसीलदार सहित राजस्व कर्मी और पुलिस बल मौजूद रहे। वहीं शाम को जांच टीम ने बरहज नगर के अस्पतालों पर छापेमारी कर साक्ष्य एकत्र किए।
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। सीबीएसई बोर्ड की कक्षा 10वीं के घोषित परीक्षा परिणाम में ब्लूमिंग बड्स स्कूल, मुखलिसपुर रोड खलीलाबाद ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले में अपनी श्रेष्ठता साबित की है। विद्यालय की छात्रा माहविश नूर ने 98 प्रतिशत अंक हासिल कर न केवल स्कूल में प्रथम स्थान प्राप्त किया, बल्कि जिला स्तर पर भी शीर्ष स्थान हासिल कर गौरव बढ़ाया। आदित्य यादव 96.6 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। परिणाम घोषित होते ही विद्यालय परिसर में खुशी का माहौल छा गया। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को साबित किया। अन्य प्रमुख सफल विद्यार्थियों में अनाम खान (95.8%), आनंद मोहन (95.8%), अभिनय गुप्ता (95.4%), प्रत्याक्षा राय (95.4%), अंजलि यादव (95.2%), शिवांगी यादव (95.2%), अनुराग (94.8%) और अर्पित पटेल (94%) शामिल रहे, जिन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विद्यालय का नाम रोशन किया। प्रबंध निदेशिका पुष्पा चतुर्वेदी ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि सभी के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संस्कार और अनुशासन को विद्यालय की प्राथमिकता बताया। विद्यालय परिवार ने सभी सफल विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है और भविष्य में भी ऐसे ही परिणामों की उम्मीद जताई है।
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में मिशन शक्ति फेज-5 के द्वितीय चरण के अंतर्गत महिला सुरक्षा विषयक जनपदीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन कलेक्ट्रेट सभागार में किया गया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना एवं अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) जयप्रकाश भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सालयों के प्रतिनिधि, सरकारी एवं निजी स्वास्थ्यकर्मी, उद्योग विभाग एवं व्यापार मंडल के प्रतिनिधि, माध्यमिक शिक्षा विभाग से विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्य व शिक्षकगण तथा एचआरपीजी कॉलेज की छात्राओं ने सहभागिता की। सम्मेलन में छात्राओं, स्वास्थ्य विभाग के कार्मिकों एवं शिक्षा विभाग से जुड़े प्रतिभागियों ने महिला सशक्तिकरण से संबंधित विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। उपस्थित लोगों को जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा संबोधित किया गया। पुलिस अधीक्षक ने मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनों और व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने पॉश एक्ट-2013, पोक्सो एक्ट-2012 तथा सभी थानों में संचालित महिला हेल्प डेस्क के बारे में विस्तार से बताया। जिलाधिकारी ने अपने संबोधन में महिलाओं एवं बालिकाओं को विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया, ताकि वे सशक्त बनकर समाज में सक्रिय भूमिका निभा सकें। इस अवसर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र, स्वास्थ्य विभाग से डॉ. मुबारक अली, पंचायती राज विभाग से प्रदीप त्रिपाठी, जिला प्रोबेशन कार्यालय के कर्मचारी एवं पुलिस विभाग के महिला प्रकोष्ठ से उपनिरीक्षक इरशाद अहमद सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में किसान दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) चंद्रेश कुमार सिंह उपस्थित रहे। उप कृषि निदेशक ने कृषकों एवं अधिकारियों का स्वागत करते हुए बताया कि फार्मर रजिस्ट्री को विशेष अभियान के रूप में चलाया जा रहा है, जिसकी समय सीमा 30 अप्रैल निर्धारित है। उन्होंने सभी कृषकों से अपील की कि जिनका फार्मर रजिस्ट्री अभी तक पूर्ण नहीं हुआ है, वे इसे शीघ्र पूर्ण कराएं, क्योंकि भविष्य में कृषि से जुड़े सभी कार्यों के लिए यह अनिवार्य होगा। अब इसमें गांव की जमीन को जोड़ने का भी प्रावधान किया गया है। पूर्व बैठक में उठाए गए मुद्दों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि जनपद में कुल 63 गेहूं क्रय केंद्र संचालित हैं। नाथनगर क्षेत्र में पीसीएफ द्वारा 7 तथा खाद्य विभाग द्वारा 2 केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। कृषकों ने धान भुगतान, गेहूं खरीद में पारदर्शिता और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से जुड़ी समस्याएं उठाईं। जिलाधिकारी ने 10 कुंतल धान भुगतान लंबित रहने पर स्पष्टीकरण मांगा और निर्देश दिया कि गेहूं खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी ढंग से संचालित की जाए। किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई। फार्मर रजिस्ट्री में आ रही दिक्कतों पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि अनावश्यक रूप से किसानों को परेशान न किया जाए तथा 30 अप्रैल तक अभियान को पूर्ण किया जाए। साथ ही किसानों को भी अन्य लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। बैठक में विद्युत तारों के नीचे झुकने, गन्ना सर्वे, प्रेसमड वितरण और जंगली जानवरों से फसल नुकसान जैसी समस्याएं भी उठाई गईं। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई करने तथा अगली बैठक में आवश्यक पक्षों को उपस्थित कराने के निर्देश दिए। अंत में सभी अधिकारियों एवं कृषकों का आभार व्यक्त करते हुए बैठक समाप्त की गई। इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी प्रेम प्रकाश त्रिपाठी, उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं कृषक उपस्थित रहे।
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के केंद्रीय ग्रंथालय द्वारा 15 अप्रैल 2026 को महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ में निंबस (Knimbus) रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रति कुलपति प्रो. शान्तनु रस्तोगी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अनुभूति दुबे एवं निंबस प्रशिक्षक कनिष्का जिंदल की उपस्थिति रही। कार्यशाला का शुभारम्भ प्रति कुलपति प्रो. शान्तनु रस्तोगी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के आयोजक डॉ. विभाष कुमार मिश्रा ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए बताया कि केंद्रीय पुस्तकालय शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों को नवीनतम डिजिटल संसाधनों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि निंबस जैसे प्लेटफॉर्म से शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को नई गति मिलेगी। प्रो. शान्तनु रस्तोगी ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के रिमोट एक्सेस प्लेटफॉर्म से ई-जर्नल, ई-बुक्स और शोध डेटाबेस तक पहुँच सरल होगी। वहीं प्रो. अनुभूति दुबे ने कहा कि डिजिटल युग में ऐसी तकनीकी कार्यशालाएं समय की आवश्यकता हैं और इससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि होती है। प्रशिक्षक कनिष्का जिंदल ने प्रतिभागियों को निंबस सॉफ्टवेयर के माध्यम से ई-रिसोर्सेज तक दूरस्थ पहुँच, संचालन प्रक्रिया और उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह प्लेटफॉर्म परिसर से बाहर रहते हुए भी डिजिटल संसाधनों तक सुरक्षित पहुँच प्रदान करता है। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया तथा उत्कृष्ट प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। संचालन डॉ. सूर्यकान्त त्रिपाठी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनोज द्विवेदी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी एवं छात्र उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व टाटा संस चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन की मौजूदगी में हुआ लोकार्पण
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का भव्य उद्घाटन बुधवार को गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं टाटा संस लिमिटेड के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर मंच पर उपस्थित अतिथियों द्वारा संस्थान से जुड़ी विशेष प्रकाशन सामग्री/डॉक्यूमेंट का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, अधिकारी एवं छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान “विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश-2047” के विजन को ध्यान में रखते हुए तकनीकी शिक्षा, नवाचार और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। भव्य मंच, आकर्षक सजावट और सुव्यवस्थित आयोजन ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गोरखपुर समेत पूरे पूर्वांचल के युवाओं के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलेगा।
कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के सुकरौली क्षेत्र के ग्राम नाऊमुंडा निवासी छोटेलाल सिंह के पुत्र प्रतिभावान युवा जितेन्द्र सिंह ने एक बार फिर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्हें माय भारत बजट क्वेस्ट 2026 के प्रतिष्ठित फाइनल राउंड के लिए चयनित किया गया, जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्री मनसुख मांडविया के साथ वर्चुअल संवाद का अवसर प्राप्त हुआ। यह फाइनल राउंड गत दिवस इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ। देशभर के 12 लाख से अधिक प्रतिभागियों में से जितेन्द्र सिंह का चयन उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन, तीव्र विश्लेषण क्षमता और प्रभावशाली विचारों के आधार पर किया गया। वे वर्तमान में सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं तथा विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से समाज सेवा के कार्यों में निरंतर योगदान दे रहे हैं।
इसके साथ ही जितेन्द्र सिंह पर्यावरण संरक्षण को अपना प्रमुख मिशन मानते हैं। वे हर वर्ष कम से कम 3000 पौधे लगाकर लोगों को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। उनका यह प्रयास क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं को भी प्रेरित कर रहा है। उनका यह चयन न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि पूरे क्षेत्र और युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत भी है। फाइनल राउंड में उन्होंने राष्ट्रीय मंच पर युवाओं की आवाज बनकर देश के विकास, विशेषकर कृषि, रोजगार और शिक्षा जैसे अहम विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किये। इस उपलब्धि पर क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षकों एवं सामाजिक संगठनों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं तथा उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
बिछुआ/मप्र (राष्ट्र की परम्परा)। शासकीय महाविद्यालय बिछुआ में स्वामी विवेकानंद करिअर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में बुधवार को टैगोर हॉल में “सामर्थ विक्रमादित्य ज्ञान प्रतियोगिता” का भव्य आयोजन किया गया। यह प्रतियोगिता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर. पी. यादव के निर्देशन तथा वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. पूजा तिवारी के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। महाविद्यालय के विभिन्न संकायों से कुल 31 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के उपरांत उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन डॉ. शाहिदा बेगम मंसूरी द्वारा किया गया। आयोजन प्रभारी की भूमिका डॉ. फरहत मंसूरी ने निभाई, जिनके साथ डॉ. मनीष आमटे, डॉ. मनीता कौर विरदी एवं डॉ. दिनेश कुमार वर्मा का विशेष सहयोग रहा।
प्रतियोगिता के परिणाम में रामवती उइके एवं अंजली (बी.ए. द्वितीय वर्ष) ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। दीपिका साहू (बी.एससी. तृतीय वर्ष) द्वितीय स्थान पर रहीं। वहीं पायल मालवी, सोहनी धुर्वे (बी.एससी. द्वितीय वर्ष) तथा दीपाली ठाकुर (एम.एससी. चतुर्थ सेमेस्टर, वनस्पति विज्ञान) ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन, प्रतिस्पर्धात्मक भावना एवं आत्मविश्वास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी पहल सिद्ध हुई।
घाट पर रोशनी का वादा, गांवों पर मंडराता कटान का साया
देवरिया/भागलपुर (राष्ट्र की परम्परा)। सरयू नदी के किनारे स्थित कालीचरण घाट पर वर्षों से व्याप्त अंधेरे की समस्या अब जल्द समाप्त होने की उम्मीद जगी है। सलेमपुर के सांसद रामाशंकर विद्यार्थी ने घाट पर हाईमास्ट लाइट लगवाने की घोषणा कर क्षेत्रवासियों को बड़ी राहत देने का आश्वासन दिया है। यह पहल समाजसेवी जगत जायसवाल के प्रयासों का परिणाम है, जिन्होंने इस जनसमस्या को प्रमुखता से उठाया। यह मुद्दा धरमेर महलिया में आयोजित अंबेडकर जयंती कार्यक्रम के दौरान सामने आया, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि मौजूद थे। कार्यक्रम में बोलते हुए समाजसेवी जगत जायसवाल ने कालीचरण घाट की गंभीर स्थिति का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह घाट भले ही सलेमपुर संसदीय क्षेत्र में नहीं आता, लेकिन आसपास के कई गांवों के लोग अंतिम संस्कार, धार्मिक अनुष्ठान और स्नान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए इसी स्थान पर निर्भर हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि रात के समय घाट पर घना अंधेरा छाया रहता है, जिससे लोगों को मोबाइल की टॉर्च या अस्थायी रोशनी के सहारे अपने धार्मिक कार्य करने पड़ते हैं। यह स्थिति न केवल असुविधाजनक है, बल्कि कई बार दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकती है। लंबे समय से यह समस्या जनप्रतिनिधियों के सामने उठाई जाती रही, लेकिन समाधान नहीं हो सका था। सांसद रामाशंकर विद्यार्थी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि क्षेत्र उनके संसदीय दायरे में न होने के बावजूद, मानवता के आधार पर वे अपने सांसद निधि से कालीचरण घाट पर हाईमास्ट लाइट लगाने का कार्य कराएंगे। उनके इस आश्वासन से उपस्थित लोगों में संतोष और उम्मीद की भावना देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान एक और गंभीर मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। उदय प्रताप सिंह ने सरयू नदी के किनारे प्रतिबंधित क्षेत्रों में हो रहे अवैध खनन पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आसपास के गांवों—भागलपुर, जीरासो, छिछूपुर, इशारू और धरमेर महलिया—पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।
उन्होंने कहा कि अवैध खनन के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इससे नदी के किनारों पर कटान बढ़ता जा रहा है, जो ग्रामीणों की जमीन और आवास के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर भय और असुरक्षा का माहौल है। कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोगों ने भी दोनों मुद्दों पर अपनी सहमति जताई और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। लोगों का कहना था कि एक ओर जहां घाट पर रोशनी की व्यवस्था मानवता और सम्मान से जुड़ा विषय है, वहीं अवैध खनन रोकना पर्यावरण और जनजीवन की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। कालीचरण घाट पर हाईमास्ट लाइट की घोषणा जहां एक सकारात्मक पहल के रूप में देखी जा रही है, वहीं सरयू किनारे अवैध खनन का मुद्दा प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इन दोनों मुद्दों पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता से कार्रवाई करता है।