Wednesday, May 20, 2026
Home Blog

गैस-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सपा का विरोध, जनता की समस्याओं को लेकर उठी आवाज

भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।

80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या: सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स की सभी याचिकाएं खारिज कीं

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक रुख: जनसुरक्षा बनाम पशु अधिकार बहस में नया अध्याय


भारत में बढ़ते डॉग बाइट मामलों, रेबीज संक्रमण और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर वर्षों से चल रही बहस को 19 मई 2026 को निर्णायक मोड़ मिला, जब भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों द्वारा दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया।
यह फैसला केवल आवारा कुत्तों के पुनर्वास या नसबंदी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत नागरिकों के भयमुक्त और सुरक्षित जीवन के अधिकार तथा पशु संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने वाला ऐतिहासिक निर्णय बन गया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों, खेल परिसरों और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों की अनियंत्रित मौजूदगी को सामान्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए राज्य सरकारों और नगर निकायों को कड़ी जिम्मेदारी निभाने के निर्देश दिए।


डॉग बाइट मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की गंभीर टिप्पणी
सर्वोच्च अदालत के समक्ष रखे गए आंकड़ों ने स्थिति की भयावहता को उजागर किया। राजस्थान के श्रीगंगानगर में मात्र 30 दिनों में 1084 डॉग बाइट के मामले दर्ज हुए, जबकि तमिलनाडु में चार महीनों के भीतर दो लाख से अधिक डॉग बाइट केस सामने आए।
अदालत ने टिप्पणी की कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थिति का संकेत है। न्यायालय ने कहा कि जब छोटे बच्चों के चेहरे नोचे जा रहे हों, बुजुर्गों पर झुंड बनाकर हमले हो रहे हों और लोग रेबीज के भय में जी रहे हों, तब अदालत जमीनी वास्तविकताओं से आंखें नहीं मूंद सकती।
फैसले का पहला भाग: एबीसी नियमों और राज्यों की विफलता पर चिंता
फैसले के पहले भाग में सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों, एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स 2023 तथा भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की समीक्षा की।
अदालत ने पाया कि अधिकांश राज्यों में नसबंदी, टीकाकरण, पुनर्वास और शेल्टर प्रबंधन की स्थिति बेहद कमजोर है। कई राज्यों में एंटी-रेबीज वैक्सीन की भारी कमी, प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों का अभाव तथा नगर निकायों के बीच समन्वय की कमी सामने आई।
न्यायालय ने कहा कि यदि एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों का समय पर और प्रभावी पालन किया गया होता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं बनती।
दूसरा भाग: पशु अधिकार बनाम नागरिक सुरक्षा
डॉग लवर्स और पशु अधिकार संगठनों ने अदालत में तर्क दिया कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी स्थान पर वापस छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19, अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 51A(जी) का हवाला देते हुए पशुओं के प्रति करुणा को नागरिकों का मौलिक कर्तव्य बताया।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं किया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पशु संरक्षण महत्वपूर्ण है, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा उससे कम महत्वपूर्ण नहीं हो सकती।
न्यायालय ने कहा कि अनुच्छेद 21 केवल जीवित रहने का अधिकार नहीं देता, बल्कि भयमुक्त और सम्मानजनक जीवन का अधिकार भी प्रदान करता है। यदि कोई बच्चा स्कूल जाते समय डर में जी रहा है या बुजुर्ग सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, तो राज्य का संवैधानिक दायित्व है कि वह नागरिकों की रक्षा करे।
तीसरा भाग: सार्वजनिक स्थानों से कुत्तों को हटाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, खेल परिसरों, रेलवे स्टेशनों, बस डिपो, एयरपोर्ट और अन्य भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक क्षेत्रों से पकड़े गए आवारा कुत्तों को दोबारा उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाएगा।
अदालत ने राज्यों और नगर निकायों को निर्देश दिए कि पर्याप्त संख्या में आधुनिक शेल्टर होम्स स्थापित किए जाएं, जहां भोजन, चिकित्सा, नसबंदी और टीकाकरण की समुचित व्यवस्था हो।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि रेबीज संक्रमित या अत्यधिक आक्रामक व्यवहार वाले कुत्तों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें आवश्यक परिस्थितियों में इच्छामृत्यु भी शामिल हो सकती है।
सर्वोच्च अदालत की यह टिप्पणी विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही कि —
“लोगों की जान सबसे पहले है।”
राज्यों को चेतावनी और सख्त निर्देश
अदालत ने राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नए एनिमल बर्थ कंट्रोल केंद्र स्थापित करने तथा पर्याप्त मात्रा में एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
साथ ही न्यायालय ने कहा कि केवल कुत्तों को पकड़कर स्थानांतरित कर देना समाधान नहीं है। वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी, टीकाकरण, पुनर्वास और जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम चलाना आवश्यक है।
सुप्रीम Court ने नवंबर 2025 के आदेश का सही पालन न होने पर नाराजगी जताई और भविष्य में लापरवाही होने पर अवमानना कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
मेनका गांधी की प्रतिक्रिया और व्यावहारिक चुनौतियां
पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि देशभर में पर्याप्त शेल्टर होम्स और पुनर्वास केंद्र बनाने के लिए लगभग तीन लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी, जो वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में बेहद कठिन दिखाई देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि रेबीज संक्रमित या अत्यधिक बीमार कुत्तों को इच्छामृत्यु देने का प्रावधान पहले से कानून में मौजूद है, लेकिन उसकी प्रक्रिया अत्यंत जटिल और कठोर नियमों से नियंत्रित है।
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती
भारत में करोड़ों की संख्या में मौजूद आवारा कुत्तों के लिए पर्याप्त शेल्टर, पशु चिकित्सालय, प्रशिक्षित स्टाफ और वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है।
नगर निकाय पहले से ही कचरा प्रबंधन, जल निकासी और शहरी अव्यवस्था जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में व्यापक स्तर पर डॉग शेल्टर प्रणाली खड़ी करना केवल न्यायिक आदेश से संभव नहीं होगा। इसके लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वित नीति, भारी बजटीय निवेश और दीर्घकालिक शहरी नियोजन की आवश्यकता होगी।
अंतरराष्ट्रीय मॉडल और भारत की स्थिति
यूरोप के कई देशों में अनिवार्य पंजीकरण, व्यापक शेल्टर प्रणाली और पालतू पशुओं पर कठोर नियम लागू हैं। कुछ देशों में आक्रामक और संक्रमित कुत्तों के इच्छामृत्यु की स्पष्ट नीति भी है।
भारत की स्थिति इन मॉडलों के बीच फंसी हुई दिखाई देती है, जहां पशु अधिकार, धार्मिक-सांस्कृतिक संवेदनाएं, शहरी अव्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा एक-दूसरे से टकराती रहती हैं।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इसी जटिल संतुलन को स्थापित करने का प्रयास माना जा रहा है।

19 मई 2026 का यह निर्णय भारतीय न्यायिक इतिहास में केवल “डॉग बाइट केस” नहीं बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या, सार्वजनिक सुरक्षा और पशु अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने वाले ऐतिहासिक फैसले के रूप में याद किया जाएगा।
यदि राज्यों ने अदालत के निर्देशों के अनुरूप आधुनिक शेल्टर होम्स, प्रभावी नसबंदी कार्यक्रम, व्यापक टीकाकरण और वैज्ञानिक पुनर्वास नीति विकसित की, तो भारत में पहली बार आवारा कुत्तों की समस्या को समन्वित सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति के रूप में देखा जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतिम शब्दों में स्पष्ट कर दिया कि अदालत न तो पशुओं के खिलाफ है और न ही पशु प्रेमियों की भावनाओं के विरोध में, लेकिन जब प्रश्न नागरिकों की जान, बच्चों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य का हो, तब राज्य की पहली जिम्मेदारी मनुष्यों के जीवन की रक्षा करना है।

✍️ लेखक : एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र

पंचायत चुनाव को लेकर गरमाई सियासत, प्रधान संगठन ने प्रशासनिक कार्रवाई पर उठाए सवाल

पंचायत चुनाव टलने की चर्चाओं के बीच प्रधान संगठन आक्रोशित, लखनऊ महासम्मेलन में जाने से पहले कई प्रधान नजरबंद

वर्तमान प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने की मांग तेज

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। पंचायत चुनाव टलने की संभावनाओं के बीच प्रदेश भर में प्रधान संगठन का विरोध तेज होता जा रहा है। वर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने की मांग को लेकर संगठन अब आंदोलन के मूड में दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में 20 मई को लखनऊ में आयोजित प्रस्तावित महासम्मेलन में शामिल होने जा रहे प्रधान संगठन के कई पदाधिकारियों को मंगलवार सुबह पुलिस प्रशासन ने उनके आवास पर ही हाउस अरेस्ट कर लिया।
प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष अनिल कुमार जोशी ने प्रशासन की इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रधान संगठन सरकार के विरोध में नहीं है, बल्कि पंचायत व्यवस्था की निरंतरता बनाए रखने और गांवों के विकास कार्य प्रभावित न होने देने की मांग कर रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 की तरह पुनः एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किए जाने की चर्चाओं से ग्राम प्रधानों में असमंजस और असंतोष का माहौल है। लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुने गए जनप्रतिनिधियों की अनदेखी उचित नहीं है।
जिलाध्यक्ष ने सरकार से मांग की कि अगले पंचायत चुनाव तक वर्तमान ग्राम प्रधानों के कार्यकाल का विस्तार किया जाए अथवा प्रशासक समिति गठन को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं, ताकि ग्रामीण विकास योजनाएं प्रभावित न हों और प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
प्रधान संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार द्वारा शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेश स्तर पर व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों की उपेक्षा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पुराने कलेक्ट्रेट में एसी आउटडोर चोरी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

रात्रि ड्यूटी न होने से हुई घटना, CRO कोर्ट परिसर में बढ़ी चिंता

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l पुराने कलेक्ट्रेट स्थित मुख्य राजस्व अधिकारी (CRO) कोर्ट परिसर से वोल्टास कंपनी के स्प्लिट एसी का आउटडोर यूनिट चोरी होने का मामला सामने आया है। इस घटना ने कलेक्ट्रेट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, गर्मी बढ़ने पर जब एसी की जरूरत पड़ी तो सर्विसिंग के लिए मिस्त्री बुलाया गया। मौके पर पहुंचने पर पता चला कि एसी का आउटडोर यूनिट पहले से ही गायब है। यह जानकारी मिलते ही कर्मचारियों में चिंता का माहौल बन गया।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुराने कलेक्ट्रेट परिसर में रात्रि के समय किसी प्रकार की ड्यूटी या निगरानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण चोरों ने इस घटना को अंजाम दिया। बिना किसी रोक-टोक के आउटडोर यूनिट को उखाड़कर ले जाना सुरक्षा में बड़ी चूक मानी जा रही है।
कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील सरकारी परिसर में इस तरह की चोरी होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि चोरी कब और किसने की। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
इस घटना के बाद कर्मचारियों और आम लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने, रात्रि ड्यूटी लगाने और निगरानी बढ़ाने की मांग उठने लगी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल तेज

ब्लॉक सभागारों में आयोजित हुआ जागरूकता कैंप

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना के अंतर्गत हैंसर बाजार एवं सांथा ब्लॉक सभागार में जागरूकता एवं प्रशिक्षण कैंप आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सहायक आयुक्त उद्योग सतीश कुमार एवं सहायक प्रबंधक पंकज कुमार पाण्डेय ने योजना की विस्तृत जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि योजना के प्रथम चरण में पांच लाख रुपये तक की परियोजनाओं के लिए चार वर्षों तक शत-प्रतिशत ब्याज मुक्त एवं कोलेटरल गारंटी मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। पूर्वांचल क्षेत्र के आवेदकों को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत स्वयं का अंशदान बैंक में जमा करना होगा, जिसे परियोजना ऋण के साथ मुक्त किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि योजना के लिए आयु सीमा 21 से 40 वर्ष निर्धारित है तथा न्यूनतम शैक्षिक योग्यता कक्षा आठ उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके साथ ही कौशल प्रशिक्षण प्राप्त होना भी अनिवार्य है। कौशल प्रशिक्षण में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, ओडीओपी प्रशिक्षण योजना, एससी/एसटी/ओबीसी प्रशिक्षण योजना, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन, आईटीआई, पॉलीटेक्निक एवं खादी ग्रामोद्योग विभाग से प्रशिक्षित अभ्यर्थी पात्र होंगे।
कार्यक्रम में बताया गया कि आवेदन केवल ऑनलाइन विभागीय पोर्टल पर स्वीकार किए जा रहे हैं। मिशन निदेशक लखनऊ द्वारा जनपद को 1600 लाभार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सहायक आयुक्त उद्योग ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, जिसके माध्यम से बेरोजगार युवाओं एवं युवतियों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं से योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की।

सीएम फेलो जया राना ने योजना की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि गूगल प्ले स्टोर से सीएम युवा ऐप डाउनलोड कर योजना से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

कार्यक्रम में हैंसर बाजार ब्लॉक सभागार में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) जितेन्द्र कुमार सिंह, उद्योग विभाग के शैलेन्द्र कुमार राव, जगदम्बा प्रसाद, प्रधानगण एवं लाभार्थी उपस्थित रहे। वहीं सांथा ब्लॉक सभागार में सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) मुईनद्दीन सिद्धीकी, सहज जिला प्रबंधक अश्विनी कुमार मिश्रा, उद्योग विभाग के जितेन्द्र कुमार, संदीप कुमार सहित बड़ी संख्या में युवक-युवतियों ने प्रतिभाग किया।

ज्ञान भारतम् मिशन के तहत पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण को लेकर कार्यशाला आयोजित

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारत सरकार द्वारा संचालित ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत प्राचीन एवं विशाल पांडुलिपि विरासत, हस्तलिखित ग्रंथों और प्राचीन ज्ञान परंपराओं के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण के उद्देश्य से विकसित ज्ञान भारतम् पोर्टल/ऐप के संबंध में कलेक्ट्रेट सभागार में कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी ने की।
कार्यशाला में प्राचीन हस्तलिपियों के सर्वेक्षण तथा ऐप के माध्यम से डिजिटल स्कैन कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड करने के संबंध में नामित 164 कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान उपायुक्त श्रम रोजगार डॉ. प्रभात कुमार द्विवेदी एवं जिला विकास अधिकारी प्रेम प्रकाश त्रिपाठी ने मिशन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं।
प्रशिक्षण में बताया गया कि यदि किसी आम नागरिक के पास कोई प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपि संरक्षित है तो वह उसे पोर्टल पर अपलोड कराने के लिए मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में संपर्क कर सकता है। इसके अतिरिक्त प्ले स्टोर से ज्ञान भारतम् ऐप डाउनलोड कर स्वयं भी पांडुलिपि अपलोड की जा सकती है।
कार्यशाला में जनपद के समस्त ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी, तकनीकी सहायक तथा अधिशासी अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

बड़े मंगलवार पर विशाल भंडारे का आयोजन, भक्तिमय माहौल में हुआ प्रसाद वितरण

हनुमानगढ़ी मंदिर पर बड़े मंगलवार के अवसर पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, हजारों लोगों ने ग्रहण किया प्रसाद

“मानव सेवा ही ईश्वरीय सेवा” के भाव के साथ 25 वर्षों से निभाई जा रही परंपरा

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। नगर स्थित प्राचीन हनुमानगढ़ी मंदिर पर बड़े मंगलवार के पावन अवसर पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। श्रद्धा और आस्था से ओतप्रोत इस आयोजन में सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही। भजन कीर्तन, पूजा- अर्चना और प्रसाद वितरण के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
आयोजन समिति के सदस्य दिग्विजय सिंह ने बताया कि विगत 25 वर्षों से ज्येष्ठ माह के तीसरे मंगलवार को बड़े मंगलवार के रूप में विशेष पूजा-अर्चना की परंपरा निभाई जा रही है। इस अवसर पर हनुमान जी की विधिवत पूजा के बाद ध्वज परिवर्तन का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इसके उपरांत हजारों श्रद्धालुओं को रूह अफजा, बुनिया तथा पूड़ी-सब्जी का प्रसाद वितरित किया जाता है। उन्होंने कहा कि मानव सेवा ही ईश्वरीय सेवा की भावना के साथ यह आयोजन किया जाता है।
समिति के डा. हेमंत श्रीवास्तव, विनोद कुमार गुप्ता, मनोज मद्धेशिया, अनिल वर्मा और सुरेश कश्यप ने संयुक्त रूप से बताया कि बड़े मंगलवार के अवसर पर मंदिर परिसर की विशेष साफ-सफाई और आकर्षक सजावट की गई। सुबह से ही भजन- कीर्तन का आयोजन चलता रहा तथा मंदिर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा का विशेष लेपन एवं पूजन किया गया।
भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सदस्यों और स्थानीय लोगों का विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से विश्व कुमार, विंध्यवासिनी सिंह, विजय सिंह, विनोद कुमार गुप्ता, डॉ. हेमंत श्रीवास्तव,अनिल वर्मा, सुरेश कश्यप, प्रमोद कुमार, मंदिर के महंत संदीप पांडेय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहें।

डीएम ने निर्माणाधीन वृद्धाश्रम का किया निरीक्षण, गुणवत्ता पूर्ण कार्य के दिए निर्देश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने खलीलाबाद विकासखंड अंतर्गत ग्राम चकदही में निर्माणाधीन वृद्धाश्रम का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन निर्माण की गुणवत्ता, कमरों के आकार, रसोईघर, शौचालय तथा स्टोर रूम आदि का जायजा लिया।
जिलाधिकारी श्री कुमार ने कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया कि निर्धारित समयावधि के भीतर वृद्धाश्रम भवन का गुणवत्ता पूर्ण निर्माण कार्य पूरा करते हुए रंगाई-पुताई एवं साफ-सफाई के बाद संबंधित विभाग को हैंडओवर किया जाए।
निरीक्षण के दौरान समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र कुमार, ओएसडी राकेश कुमार तथा कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

शैक्षणिक सुविधाओं में आर्थिक सहयोग से विद्यार्थियों के जीवन में आएगा बड़ा बदलाव: प्रो. पूनम टंडन

32 मेधावी छात्राओं को छात्रवृत्ति देकर विश्वविद्यालय ने बढ़ाया हौसला

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित मेमोरियल छात्रवृत्ति वितरण समारोह में विधि एवं परास्नातक स्तर के विभिन्न विषयों के कुल 32 मेधावियों को कुलपति प्रो. पूनम टंडन द्वारा प्रमाणपत्र एवं धनराशि का चेक प्रदान किया गया। छात्रवृत्ति प्राप्त कर विद्यार्थियों के चेहरे खुशी से खिल उठे। उल्लेखनीय यह रहा कि सभी मेमोरियल छात्रवृत्तियां सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं को मिलीं, जो पूर्वांचल में महिला शिक्षा और सशक्तिकरण की बढ़ती भूमिका का प्रतीक माना जा रहा है।
समारोह में सत्र 2025-26 के सर्वोच्च अंक प्राप्त विद्यार्थियों को स्वामी शिवानन्द मेमोरियल छात्रवृत्ति के अंतर्गत 6000 रुपये प्रदान किए गए। वहीं पं. हरिहर प्रसाद दुबे मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से पं. हरिहर प्रसाद दुबे मेमोरियल छात्रवृत्ति, प्रो. प्रभाशंकर पाण्डेय छात्रवृत्ति, श्रीमती पुष्पा देवी मेमोरियल छात्रवृत्ति, श्रीमती शांति तिवारी मेमोरियल छात्रवृत्ति तथा श्रीमती सावित्री मेमोरियल छात्रवृत्ति के अंतर्गत मेधावियों को 10 हजार से 15 हजार रुपये तक की धनराशि एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
गणित विभाग के परास्नातक टॉपर्स के लिए संचालित प्रो. राम निवास मेमोरियल छात्रवृत्ति के तहत विगत दो सत्रों के टॉपर्स विद्यार्थियों को 25-25 हजार रुपये का चेक एवं प्रमाणपत्र दिया गया। कुल मिलाकर समारोह में मेधावियों को लगभग 3.50 लाख रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई।
मेधावी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में आर्थिक सहयोग समाज सेवा का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। समाज के सक्षम लोगों द्वारा विद्यार्थियों की शिक्षा में सहयोग किए जाने से अनेक प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं कर्मचारियों से भी स्वैच्छिक रूप से विद्यार्थियों को पुस्तकें, अध्ययन सामग्री अथवा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की अपील की।
उन्होंने कहा कि जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता करना केवल सामाजिक दायित्व ही नहीं, बल्कि आत्मिक संतोष का भी माध्यम है। छात्रवृत्तियां विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देती हैं।
कार्यक्रम में प्रभारी डीएसडब्ल्यू प्रो. वीना बत्रा कुशवाहा ने छात्रवृत्तियों की विस्तृत जानकारी देते हुए सभी का स्वागत किया तथा छात्रवृत्ति प्राप्त विद्यार्थियों एवं उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अखिल मिश्र एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मनीष पाण्डेय ने किया।
इस दौरान कुलसचिव डी. के. श्रीवास्तव, वित्त अधिकारी प्रो. जयमंगल राव समेत कई शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

धर्मपुर में जिला विद्यालय निरीक्षक का औचक निरीक्षण,अनियमितताओं पर कसा शिकंजा

मान्यता से अधिक कक्षाएं चलाने पर जिला विद्यालय निरीक्षक सख्त, कई स्कूलों व संस्थानों को जारी हुआ नोटिस

कई विद्यालयों में अवैध रूप से संचालित मिली हाईस्कूल व इंटर की कक्षाएं, तत्काल सुधार के निर्देश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के परतावल क्षेत्र स्थित धर्मपुर में जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा ने विभिन्न विद्यालयों एवं कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था की हकीकत परखी। निरीक्षण के दौरान कई संस्थानों में मान्यता से अधिक कक्षाएं संचालित होती मिलने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई और संबंधित प्रबंधनों को नोटिस जारी कर तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान आरके अकैडमी इंग्लिश मीडियम स्कूल में प्रधानाचार्य अनुपस्थित पाए गए। मौके पर मौजूद उदय शंकर मौर्य ने बताया कि विद्यालय को केवल जूनियर हाईस्कूल तक की मान्यता प्राप्त है, जबकि उससे ऊपर की कक्षाएं भी संचालित की जा रही थीं। इस पर डीआईओएस ने चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में दोबारा ऐसी अनियमितता मिलने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद आदर्श शिक्षा सेवा संस्थान का निरीक्षण किया गया, जहां सरस्वती शिशु ज्ञान मंदिर का बोर्ड भी लगा मिला।अभिलेखों की जांच में विद्यालय की मान्यता जूनियर हाईस्कूल तक ही पाई गई, लेकिन मौके पर हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट स्तर की कक्षाएं संचालित होती मिलीं। इस गंभीर अनियमितता पर तत्काल नोटिस जारी करते हुए सभी अनाधिकृत कक्षाएं बंद करने का निर्देश दिया गया।
धर्मपुर गांव स्थित होप कोचिंग क्लासेस के निरीक्षण में भी कई कमियां सामने आईं। संस्था को कोचिंग सेंटर के रूप में पंजीकृत होने के बावजूद वहां कोई स्पष्ट सूचना बोर्ड नहीं लगा था। निरीक्षण के समय कक्षा 9 से 12 तक के छात्र-छात्राएं मौजूद मिले। डीआईओएस ने नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि कोचिंग संस्थान विद्यालय समय से अलग संचालित किये जाएं तथा सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
इसी क्रम में आर.एस.के. इंस्टीट्यूशन में प्राथमिक स्तर की मान्यता के बावजूद कक्षा 9 एवं 10 के छात्र अध्ययन करते पाए गए। इस पर तत्काल प्रभाव से संबंधित कक्षाएं बंद कराते हुए संस्थान को नोटिस जारी किया गया।
जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा ने स्पष्ट कहा कि मान्यता से अधिक कक्षाओं का संचालन शिक्षा विभाग के नियमों का गंभीर उल्लंघन है। सभी संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि दोबारा ऐसी अनियमितताएं पाई गईं तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक एवं विधिक कार्रवाई की जायेगी।

कटते जंगल रो रहे, काँपे सब जज़्बात।मानव अपने हाथ से, लिखता खुद की मात॥

धरती माँ की छाँव थे, हरियाले वनराज,
इनके दम से जीवित है, जीव-जगत समाज।
लोभ बढ़ा तो काटकर, भूल गया औकात—
कटते जंगल रो रहे, काँपे सब जज़्बात॥

पेड़ों की हर डाल पर, चिड़ियों का परिवार,
इनसे ही वर्षा बहे, महके घर-संसार।
कुल्हाड़ी के वार से, काँपे सब जज़्बात—
मानव अपने हाथ से, लिखता खुद की मात॥

छाया देकर वृक्ष ने, सहा धूप का वार,
फल-फूलों से भर दिया, जीवन का भंडार।
बदले में इंसान ने, दिए क्रूर आघात—
कटते जंगल रो रहे, सूखे नभ के गात॥

नदियाँ, पर्वत, खेत सब, वृक्षों से आबाद,
इनके बिन सूना लगे, धरती हो बर्बाद।
जिस थाली में खा रहा, उसको मारे लात—
मानव अपने हाथ से, लिखता खुद की मात॥

प्राणवायु देकर सदा, वृक्ष रहे निष्काम,
फिर भी मानव कर रहा, उनका काम तमाम।
जागो अब हे मनुज तुम, बदलो अब हालात—
कटते जंगल रो रहे, काँपे सब जज़्बात॥

डॉ. प्रियंका सौरभ

कांग्रेस ही कर सकती है देश का चौमुखी विकास – विजयशेखर मल्ल

कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्षों को जिलाध्यक्ष ने दिया संगठन को और मजबूत करने का निर्देश

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। आज तक देश में जो भी प्रगति हुआ है वह सिर्फ कांग्रेस ने ही किया है, पुनः कांग्रेस के नेतृत्व में ही देश का चौमुखी विकास हो सकता है।भाजपा ने देश की जनता को धोखा देने का काम किया है।उक्त बातें मंगलवार को कांग्रेस कार्यालय पर ब्लॉक अध्यक्षों की बैठक में संगठन की समीक्षा करते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष विजयशेखर मल्ल रोशन ने कहा उन्होंने कहा कि सभी ब्लॉक अध्यक्ष व मण्डल अध्यक्ष अपने अपने क्षेत्र के बूथ अध्यक्ष से मिलकर उस क्षेत्र की समस्याओं से अवगत होकर उसके निस्तारण कराने का काम करें। एसआईआर के बाद भी जिन मतदाता का नाम सूची में नही है तो उसका नाम दर्ज कराने के लिए काम करें। जिला उपाध्यक्ष डॉ धर्मेन्द्र पांडेय ने कहा कि कांग्रेस का एक एक कार्यकर्ता अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है, संगठन पुनः नई ऊर्जा के साथ आगामी चुनाव में उतरेगा। जिला उपाध्यक्ष भरत मणि त्रिपाठी ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता पार्टी के जनहितकारी नीतियों को जन जन तक पहुंचाने का काम करें। बैठक जिला उपाध्यक्ष सुनील तिवारी, सलेमपुर ब्लॉक अध्यक्ष मनीष कुमार रजक,बरहज मुजफ्फर हुसैन मंसूरी,लार वजीर अहमद,भागलपुर डॉ रमेश कुशवाहा,बनकटा बृजेश यादव, भटनी धर्मवीर भारती,भलुअनी के के तिवारी ,परमानन्द प्रसाद,मोजाहिद लारी,सैयद फिरोज अहमद आदि ने सम्बोधित किया।

परीक्षा या कारोबार? पेपर लीक ने खोली शिक्षा तंत्र की सबसे खतरनाक परत

ब्लूटूथ, सॉल्वर गैंग और करोड़ों का खेल: भारत में एग्जाम माफिया का संगठित साम्राज्य

पेपर लीक प्रकरण: “घर का भेदी लंका ढाए” से “कोचिंग उद्योग की काली अर्थव्यवस्था” तक


✍लेखक : एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र
भारत आज विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश है। करोड़ों विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अपने भविष्य का निर्माण करना चाहते हैं। डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, वैज्ञानिक और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में जाने का सपना लेकर युवा वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं। लेकिन जब राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाजार में बिकते दिखाई दें और जांच एजेंसियां रसायन विज्ञान तथा जीव विज्ञान के शिक्षकों, कोचिंग संचालकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों को गिरफ्तार करें, तब केवल एक परीक्षा नहीं टूटती बल्कि पूरी मेरिट आधारित व्यवस्था पर जनता का विश्वास भी डगमगा जाता है।
दिनांक 18 मई 2026 तक नीट यूजी पेपर लीक प्रकरण में कई राज्यों से 10 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें रसायन और जीव विज्ञान के शिक्षक, एक नामी कोचिंग संस्थान का संचालक और पूर्व शिक्षक भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह घटनाक्रम इस ओर संकेत करता है कि भारत में परीक्षा प्रणाली अब केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं रह गई है, बल्कि यह संगठित आर्थिक अपराध, साइबर अपराध और नैतिक पतन का संयुक्त संकट बन चुकी है।
“घर का भेदी लंका ढाए” — सिस्टम के भीतर से टूटती सुरक्षा
आज आम नागरिकों के बीच यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि यदि प्रश्नपत्र लीक हो रहा है तो इसके पीछे केवल बाहरी अपराधी नहीं हो सकते। कहीं न कहीं सिस्टम के भीतर बैठे लोग, संवेदनशील डेटा तक पहुंच रखने वाले कर्मचारी, प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े तत्व, डिजिटल सर्वर संभालने वाले तकनीकी विशेषज्ञ, परिवहन श्रृंखला से जुड़े कर्मचारी अथवा परीक्षा केंद्रों से संबंधित अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं।
यही भारतीय परीक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी कमजोरी है — सुरक्षा बाहर से कम और भीतर से अधिक टूट रही है।
एग्जाम माफिया का संगठित नेटवर्क
पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल, इंजीनियरिंग, शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती, रेलवे भर्ती तथा अन्य सरकारी परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार कई मामलों में प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और गुप्त डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से प्रसारित किए गए।
कहीं प्रिंटिंग प्रेस से कॉपी बाहर निकाली गई, कहीं एन्क्रिप्टेड फाइल तक अवैध पहुंच बनाई गई, तो कहीं परीक्षा केंद्रों पर ब्लूटूथ डिवाइस, माइक्रो ईयरफोन और सॉल्वर गैंग सक्रिय पाए गए। यह पूरा तंत्र दर्शाता है कि परीक्षा अपराध अब स्थानीय स्तर की धोखाधड़ी नहीं बल्कि अत्यंत संगठित “एग्जाम माफिया इकोसिस्टम” बन चुका है।
प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव
भारत में एक सीट के लिए हजारों से लेकर लाखों उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा करते हैं। मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में स्थिति और भी अधिक तनावपूर्ण है। सीमित सरकारी सीटें, निजी कॉलेजों की ऊंची फीस, पारिवारिक अपेक्षाएं और सामाजिक प्रतिष्ठा का दबाव विद्यार्थियों को मानसिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना देता है।
ऐसे माहौल में यदि कोई गिरोह “रैंक दिलाने” या “पेपर उपलब्ध कराने” का दावा करता है, तो कुछ लोग लालच, भय अथवा निराशा में उसके जाल में फंस जाते हैं। यही वह मनोवैज्ञानिक स्थिति है जिसका फायदा अपराधी नेटवर्क उठाते हैं।
कोचिंग उद्योग की काली अर्थव्यवस्था
भारत की कोचिंग अर्थव्यवस्था हजारों करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। राजस्थान का कोटा, दिल्ली का मुखर्जी नगर, पटना, हैदराबाद, पुणे और इंदौर जैसे शहर शिक्षा आधारित व्यावसायिक केंद्र बन चुके हैं। अधिकांश कोचिंग संस्थान ईमानदारी से शिक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन इसी विशाल उद्योग के भीतर कुछ लालची तत्वों पर शिक्षा को “रैंक खरीदो” मॉडल में बदलने के आरोप लगते रहे हैं।
जब सफलता को उत्पाद और रैंक को व्यावसायिक ब्रांड बना दिया जाता है, तब नैतिक सीमाएं कमजोर पड़ने लगती हैं। कुछ जांचों में यह आरोप सामने आया कि कुछ कोचिंग संचालकों ने अपने संस्थान की सफलता दर बढ़ाने के लिए अवैध नेटवर्क से संपर्क बनाए।
यदि किसी संस्थान के छात्र बड़ी संख्या में शीर्ष रैंक प्राप्त करते हैं तो अगले वर्ष उस संस्थान में प्रवेश लेने वालों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। फीस बढ़ती है, ब्रांड वैल्यू बढ़ती है और आर्थिक लाभ कई गुना हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां शिक्षा का पवित्र क्षेत्र अपराध और लालच की प्रयोगशाला बनने लगता है।
डिजिटल युग में बढ़ी चुनौती
पहले पेपर फोटोकॉपी या फैक्स के माध्यम से लीक होते थे, लेकिन अब एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, क्लाउड स्टोरेज, स्क्रीन शेयरिंग और डार्क वेब जैसी तकनीकों का उपयोग होने लगा है। साइबर अपराधियों और तकनीकी विशेषज्ञों की संलिप्तता ने जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
कई बार प्रश्नपत्र का स्क्रीनशॉट कुछ ही मिनटों में हजारों लोगों तक पहुंच जाता है। यह डिजिटल स्पीड प्रशासनिक प्रतिक्रिया से कहीं अधिक तेज होती है।
सबसे बड़ा नुकसान ईमानदार विद्यार्थियों को
पेपर लीक का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव उन करोड़ों छात्रों पर पड़ता है जो वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा में बैठते हैं। जब परीक्षा रद्द होती है तो छात्रों की मानसिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। पुनर्परीक्षा का तनाव, आर्थिक बोझ, तैयारी की अनिश्चितता और भविष्य को लेकर भय विद्यार्थियों को अंदर तक तोड़ देता है।
कई परिवार कर्ज लेकर कोचिंग और हॉस्टल का खर्च उठाते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होना केवल प्रशासनिक घटना नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक त्रासदी बन जाता है।
वैश्विक उदाहरण और भारत की चुनौती
चीन, दक्षिण कोरिया, अमेरिका तथा कई अफ्रीकी देशों में भी परीक्षा धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। चीन में “गाओकाओ” परीक्षा के दौरान ड्रोन और हाईटेक डिवाइस रोकने के लिए अत्यंत कड़े कदम उठाए जाते हैं। दक्षिण कोरिया में विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा के दिन पूरे देश की यातायात व्यवस्था तक नियंत्रित की जाती है।
भारत को भी पारंपरिक प्रशासनिक मॉडल से आगे बढ़कर “नेशनल एग्जाम सिक्योरिटी आर्किटेक्चर” विकसित करना होगा।
लोकतांत्रिक समानता पर हमला
प्रतियोगी परीक्षाएं गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अवसर का सबसे बड़ा माध्यम होती हैं। गांव का छात्र भी परीक्षा के माध्यम से डॉक्टर, इंजीनियर अथवा अधिकारी बन सकता है। लेकिन यदि परीक्षा प्रणाली भ्रष्ट हो जाए तो सामाजिक गतिशीलता रुक जाती है और प्रतिभा की जगह पैसे तथा संपर्क का प्रभाव बढ़ने लगता है।
इससे युवाओं में निराशा और व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा होता है।
क्या केवल गिरफ्तारियों से समाधान संभव है?
उत्तर स्पष्ट है — नहीं।
यदि सिस्टम की संरचनात्मक कमजोरियों को नहीं सुधारा गया तो नए गिरोह पुराने गिरोहों की जगह लेते रहेंगे। भारत को परीक्षा सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय सुधारों की आवश्यकता है।
आवश्यक सुधार
ब्लॉकचेन आधारित प्रश्नपत्र ट्रैकिंग
एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम
सीमित एक्सेस कंट्रोल
बायोमेट्रिक सत्यापन
रियल टाइम साइबर निगरानी
परीक्षा केंद्रों का डिजिटल ऑडिट
कोचिंग संस्थानों के लिए नियामक प्राधिकरण
पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट
दोषियों की संपत्ति जब्ती
राष्ट्रीय परीक्षा सुरक्षा एजेंसी की स्थापना
नैतिक पुनर्निर्माण की आवश्यकता
आज आवश्यकता केवल कठोर कानूनों की नहीं बल्कि नैतिक पुनर्निर्माण की भी है। शिक्षक, अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ यदि अपने दायित्व को राष्ट्रीय जिम्मेदारी समझें तभी वास्तविक सुधार संभव है।
एक शिक्षक का अपराध केवल कानूनी अपराध नहीं बल्कि पीढ़ियों के भविष्य के साथ विश्वासघात है। जब कोई शिक्षक प्रश्नपत्र बेचता है तो वह केवल कागज नहीं बेचता बल्कि मेहनत, सपने और सामाजिक न्याय को भी बेच देता है।
पेपर लीक प्रकरण केवल कुछ गिरफ्तारियों की खबर नहीं है। यह उस गहरे संकट का संकेत है जहां एक ओर सिस्टम की आंतरिक कमजोरियां हैं और दूसरी ओर शिक्षा को मुनाफे की मशीन बना देने वाली मानसिकता।
“घर का भेदी लंका ढाए” की कहावत आज भारतीय परीक्षा प्रणाली पर भयावह रूप से लागू होती दिखाई देती है। यदि भीतर बैठे भ्रष्ट तत्वों और बाहर सक्रिय शिक्षा माफिया के गठजोड़ को नहीं तोड़ा गया तो करोड़ों युवाओं का विश्वास टूटता जाएगा।
लेकिन यदि कठोर राजनीतिक इच्छाशक्ति, तकनीकी सुधार, नैतिक जवाबदेही और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के साथ व्यापक सुधार किए जाएं तो भारत इस संकट को अवसर में बदल सकता है। तब परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने की प्रक्रिया नहीं बल्कि वास्तविक प्रतिभा, मेहनत और समान अवसर का उत्सव बन सकेगी।

  • संकलनकर्ता
    एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
    गोंदिया, महाराष्ट्र

योगी कैबिनेट के बड़े फैसले: स्वास्थ्य, मेट्रो और आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव

यूपी में स्वास्थ्य क्रांति: लोहिया संस्थान बनेगा 1010 बेड का सुपर स्पेशलिटी सेंटर


प्रयागराज SRN अस्पताल विस्तार को मिली जमीन, मेट्रो परियोजनाओं को भी हरी झंडी

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, मेट्रो रेल और ग्रामीण निकायों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी देकर विकास योजनाओं को नई गति देने का फैसला किया है। राजधानी लखनऊ स्थित Dr. Ram Manohar Lohia Institute of Medical Sciences में अत्याधुनिक 1010 बेडेड मल्टी स्पेशलिटी इमरजेंसी सेंटर अस्पताल, नया टीचिंग ब्लॉक और ओपीडी ब्लॉक बनाने की स्वीकृति दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 855.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
सरकार के अनुसार, शहीद पथ स्थित संस्थान के नए परिसर में बनने वाला यह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगा। परियोजना के अंतर्गत 1010 बेड की सुविधा के साथ 200 सीट क्षमता वाला आधुनिक शिक्षण ब्लॉक भी विकसित किया जाएगा, जिससे चिकित्सा छात्रों को अत्याधुनिक प्रशिक्षण वातावरण मिलेगा। इसके साथ ही प्रदेशभर के मरीजों को बेहतर आपातकालीन और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
इसी क्रम में Swaroop Rani Nehru Hospital के विस्तार और उच्चीकरण के लिए बड़ी राहत दी गई है। प्रयागराज मंडल के सबसे बड़े टर्शियरी स्तर के इस सरकारी अस्पताल के विस्तार हेतु 31,314 वर्गमीटर भूमि चिकित्सा शिक्षा विभाग को 90 वर्षों के लिए मात्र एक रुपये वार्षिक किराये पर हस्तांतरित किए जाने का निर्णय लिया गया है। यह अस्पताल वर्ष 1961 से संचालित है और यहां प्रयागराज सहित प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, भदोही, बांदा और चित्रकूट तक के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। नई भूमि मिलने से अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा एवं जांच सुविधाओं का विस्तार संभव हो सकेगा।
प्रदेश सरकार ने शहरी परिवहन परियोजनाओं को भी गति देने की दिशा में अहम फैसले लिए हैं। Uttar Pradesh Metro Rail Corporation Limited को आगरा मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के अंतर्गत आगरा कैंट से कालिंदी विहार कॉरिडोर में मेट्रो स्टेशन और वायडक्ट निर्माण के लिए 550 वर्गमीटर भूमि निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। यह भूमि आगरा के चक अव्वल क्षेत्र में स्थित है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह हस्तांतरण अपवादस्वरूप होगा और भविष्य के लिए उदाहरण नहीं माना जाएगा।
इसके अलावा Lucknow Metro फेज-1बी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर, चारबाग से वसंतकुंज परियोजना को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। लगभग 5801.05 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच त्रिपक्षीय एमओयू को मंजूरी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। इससे राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और मजबूत होगी।
पशुपालन एवं पशु चिकित्सा शिक्षा से जुड़े छात्रों को भी सरकार ने बड़ी सौगात दी है। प्रदेश के पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता 4 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस निर्णय से लगभग 300 छात्रों को लाभ मिलेगा और सरकार पर अतिरिक्त 4.20 करोड़ रुपये का व्ययभार आएगा। सरकार का मानना है कि इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा और पशु स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता बेहतर होगी।
ग्रामीण निकायों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी सरकार ने अहम कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का निर्णय लिया गया है। आयोग में पांच सदस्य होंगे, जिनमें एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश अध्यक्ष बनाए जाएंगे। आयोग पिछड़े वर्गों की सामाजिक स्थिति, प्रतिनिधित्व और आरक्षण की आवश्यकता पर अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगा। आयोग का कार्यकाल सामान्यतः छह माह का रखा जाएगा।
सरकार के इन फैसलों को स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक परिवहन नेटवर्क, चिकित्सा शिक्षा सुदृढ़ीकरण और सामाजिक प्रतिनिधित्व की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं का असर प्रदेश की स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत संरचना पर व्यापक रूप से दिखाई देने की उम्मीद है।

तेल संकट, कमजोर रुपया और डगमगाते बाजार: क्या नई आर्थिक आंधी की आहट है?

वैश्विक तनाव, कच्चे तेल और शेयर बाजारों में उथल-पुथल: निवेशकों की बढ़ती धड़कनों के बीच विश्व अर्थव्यवस्था का नया संकेत

मई 2026 का दूसरा सप्ताह वैश्विक अर्थव्यवस्था, भारतीय वित्तीय बाजारों और आम नागरिकों के लिए अत्यंत संवेदनशील संकेत लेकर आया। यह सप्ताह केवल शेयर बाजारों के उतार-चढ़ाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह स्पष्ट कर दिया कि आज की दुनिया में अर्थव्यवस्था, भू-राजनीति, ऊर्जा संकट, मुद्रा विनिमय और निवेशक मनोविज्ञान कितनी गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
एक ओर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और भारतीय रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दीं। डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के पार पहुंचने की आशंकाओं ने बाजार और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
शेयर बाजारों में अस्थिरता का दौर
पूरे सप्ताह भारतीय शेयर बाजार अस्थिरता के दौर से गुजरते रहे। सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई, बीच में तेजी भी दिखाई दी, लेकिन अंतिम कारोारी सत्र में अचानक बिकवाली बढ़ने से बाजार फिर दबाव में आ गया।
यह स्थिति इस बात का संकेत है कि बड़े निवेशकों में अभी भी भरोसे की कमी बनी हुई है। निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर सतर्क बने हुए हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बाजार की अंतिम घंटे की गिरावट यह दर्शाती है कि निवेशकों के भीतर भविष्य को लेकर अनिश्चितता गहराती जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता खतरा
पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव रहा। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस बात से चिंतित हैं कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी प्रकार का संकट उत्पन्न होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य या राजनीतिक तनाव सीधे तेल की कीमतों पर असर डालता है।
भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करते हैं, ऐसे संकट से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
महंगा तेल और बढ़ती महंगाई की आशंका
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का अर्थ केवल पेट्रोल और डीजल का महंगा होना नहीं है। इसका प्रभाव परिवहन, उद्योग, कृषि, बिजली उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं तक पहुंचता है।
जब परिवहन लागत बढ़ती है तो खाद्य सामग्री, उपभोक्ता वस्तुएं और आवश्यक सेवाएं महंगी होने लगती हैं। इससे महंगाई का दबाव बढ़ता है और आम नागरिक की जेब पर सीधा असर पड़ता है।
विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं तो भारतीय रिजर्व बैंक को ब्याज दरों को लेकर कठोर रुख अपनाना पड़ सकता है।
रुपया 96 पार: क्यों बढ़ी चिंता?
इस सप्ताह की सबसे बड़ी आर्थिक घटनाओं में से एक भारतीय रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी रही। डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के पार पहुंचने की चर्चा ने वित्तीय जगत में हलचल पैदा कर दी।
रुपये की कमजोरी का सीधा अर्थ है कि विदेशों से आयातित वस्तुएं अधिक महंगी हो जाएंगी। भारत कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, औद्योगिक मशीनें और कई महत्वपूर्ण कच्चे माल डॉलर में खरीदता है।
जब रुपया कमजोर होता है तो समान मात्रा में आयात करने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसका असर उद्योगों, व्यापार और आम जनता सभी पर पड़ता है।
रुपये की गिरावट के प्रमुख कारण
रुपये की कमजोरी के पीछे कई कारण जिम्मेदार रहे।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों से डॉलर को मजबूती मिली
विदेशी निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी बाजारों का रुख किया
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ाया
विदेशी पूंजी निकासी से भारतीय मुद्रा बाजार प्रभावित हुआ
हालांकि कुछ दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी की, लेकिन बाजार में स्थिरता नहीं बन सकी।
किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर?
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की रुचि बनी रही।
दैनिक उपभोग से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी स्थिरता दिखाई दी क्योंकि अनिश्चित समय में निवेशक इन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित मानते हैं।
इसके विपरीत धातु, तेल एवं गैस, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और रियल एस्टेट क्षेत्र दबाव में रहे।
भू-राजनीति तय कर रही बाजारों की दिशा
अब यह स्पष्ट दिखाई देने लगा है कि वैश्विक बाजार केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं चलते। युद्ध, प्रतिबंध, तेल आपूर्ति, समुद्री मार्ग और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति भी बाजारों की दिशा तय कर रहे हैं।
निवेशक अब केवल कंपनियों के मुनाफे और घाटे को नहीं देख रहे, बल्कि वे यह भी विश्लेषण कर रहे हैं कि दुनिया के किस क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है और उसका असर किन उद्योगों पर पड़ेगा।
भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती
भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के बावजूद ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर है। तेल महंगा होने पर व्यापार घाटा बढ़ता है, रुपया कमजोर होता है और महंगाई का दबाव बढ़ जाता है।
सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर रुपये को लंबे समय तक स्थिर रखना संभव नहीं होगा। इसके लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण, निर्यात वृद्धि और घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत करना आवश्यक होगा।
आम जनता पर क्या पड़ेगा असर?
यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी और खाद्यान्न, दूध, सब्जियों सहित रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं।
मध्यम वर्ग की बचत और खर्च दोनों प्रभावित होंगे। वहीं शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के सामने चिंता की स्थिति बनी रह सकती है।
हालांकि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए गिरता बाजार अवसर भी माना जा रहा है।
सोना बना सुरक्षित निवेश
वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सोना एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत बना हुआ है। युद्ध और आर्थिक संकट की आशंकाओं के बीच निवेशक पारंपरिक रूप से सोने की ओर आकर्षित होते हैं।
यदि पश्चिम एशिया का संकट और गहराता है तो सोने की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों की स्थिति
अमेरिका के प्रमुख शेयर सूचकांक नई ऊंचाइयों के करीब पहुंचे। तकनीकी कंपनियों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मजबूत उपभोक्ता खर्च ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फिलहाल मजबूती दी है।
इसके विपरीत एशियाई बाजारों में अस्थिरता बनी रही। जापान, चीन और हांगकांग के बाजार दबाव में रहे।
यूरोप के बाजार भी ऊर्जा संकट और बढ़ती तेल कीमतों से प्रभावित दिखाई दिए।
भारत के लिए सकारात्मक संकेत भी मौजूद
चुनौतियों के बावजूद भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता अभी भी मजबूत मानी जा रही है। विशाल घरेलू बाजार, युवा जनसंख्या, तकनीकी प्रगति और बुनियादी ढांचे में निवेश भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति प्रदान करते हैं।
इसी कारण वैश्विक संकटों के बावजूद भारत दुनिया की प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी बना हुआ है।
मई 2026 का यह सप्ताह विश्व अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी की तरह सामने आया है। इसने स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक दुनिया में किसी एक क्षेत्र का तनाव पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
मध्य-पूर्व का संकट भारत की जेब और बाजार दोनों पर असर डाल रहा है। गिरता रुपया, महंगा तेल और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
निवेशकों के लिए यह समय धैर्य, संतुलित रणनीति और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने का है। आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति, तेल बाजार और ब्याज दरों की दिशा ही तय करेगी कि विश्व अर्थव्यवस्था स्थिरता की ओर बढ़ती है या नई उथल-पुथल की ओर।


✍️ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र
कर विशेषज्ञ | स्तंभकार | साहित्यकार | अंतरराष्ट्रीय लेखक | चिंतक | कवि | संगीत माध्यमा | सीए (एटीसी)

डिजिटल शिक्षा युग में चुनौती और समाधान: सीबीएसई की पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली पर व्यापक विश्लेषण

पेपर लीक और परीक्षा माफिया के दौर में सीबीएसई की नई व्यवस्था क्यों बनी छात्रों के लिए उम्मीद की किरण


✍️ लेखक : एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र
भारत सहित पूरी दुनिया में शिक्षा व्यवस्था तेजी से डिजिटल और तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली, क्लाउड आधारित डेटा प्रबंधन और डिजिटल मूल्यांकन ने शिक्षा को अधिक सुविधाजनक और वैश्विक बनाया है। आज छात्र घर बैठे प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं, ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और डिजिटल मार्कशीट प्राप्त कर सकते हैं।
लेकिन तकनीकी विकास के साथ शिक्षा प्रणाली के सामने गंभीर चुनौतियां भी उभर रही हैं। परीक्षा पेपर लीक, मूल्यांकन अनियमितताएं, साइबर धोखाधड़ी और परीक्षा माफियाओं का बढ़ता नेटवर्क अब शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
इसी संवेदनशील माहौल में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी Central Board of Secondary Education द्वारा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों के बाद पुनर्मूल्यांकन और रीचेकिंग की नई प्रक्रिया लागू करना एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
सीबीएसई की तीन चरणों वाली पारदर्शी प्रक्रिया
सीबीएसई ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और छात्र हितैषी बनाने के लिए तीन चरणों वाली ऑनलाइन प्रणाली लागू की है। इसमें उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी, अंकों का सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

  1. उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी सुविधा
    जिन छात्रों को अपने मूल्यांकन पर संदेह है, वे 19 मई से 22 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त कर सकते हैं।
    प्रति विषय 700 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
    यह व्यवस्था छात्रों को यह समझने का अवसर देती है कि परीक्षक ने उत्तरों का मूल्यांकन किस प्रकार किया है, किन प्रश्नों में अंक कटे हैं और कहीं कोई प्रश्न बिना जांचे तो नहीं रह गया।
    डिजिटल कॉपी उपलब्ध होने से छात्र स्वयं अपने प्रदर्शन का विश्लेषण कर सकेंगे। यह शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।
  2. अंकों के सत्यापन की प्रक्रिया
    अंकों के सत्यापन के लिए आवेदन 26 मई से 29 मई 2026 तक किए जा सकेंगे।
    इस प्रक्रिया के अंतर्गत छात्र यह जांच करवा सकेंगे कि कुल अंक सही तरीके से जोड़े गए हैं या नहीं तथा कोई उत्तर बिना जांचा तो नहीं रह गया।
    इसके लिए 500 रुपये प्रति विषय शुल्क निर्धारित किया गया है।
    भारत जैसे विशाल परीक्षा तंत्र में लाखों उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होता है। ऐसे में छोटी मानवीय त्रुटियां भी छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं। एक अंक कम या अधिक होने से मेरिट, छात्रवृत्ति, कॉलेज प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाओं की पात्रता प्रभावित हो सकती है।
  3. पुनर्मूल्यांकन यानी री-इवैल्यूएशन
    यदि किसी छात्र को लगता है कि उसके उत्तरों का उचित मूल्यांकन नहीं हुआ है, तो वह प्रश्नवार पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकता है।
    यह प्रक्रिया भी 26 मई से 29 मई 2026 तक चलेगी।
    प्रति प्रश्न 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
    सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद अंक बढ़ सकते हैं, घट सकते हैं या यथावत रह सकते हैं और अंतिम निर्णय बोर्ड का ही मान्य होगा।
    यह व्यवस्था छात्रों को अकादमिक न्याय प्रदान करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
    पूर्णतः ऑनलाइन प्रक्रिया से बढ़ेगी पारदर्शिता
    सीबीएसई ने सभी आवेदन प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन रखा है। आवेदन केवल आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।
    इससे भ्रष्टाचार, बिचौलियों और अनावश्यक देरी की संभावनाएं कम होंगी। साथ ही रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और प्रक्रिया को तेज बनाने में भी सहायता मिलेगी।
    हालांकि डिजिटल प्रणाली के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता जैसी चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। शिक्षा व्यवस्था के पूर्ण डिजिटलीकरण के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र आवश्यक होगा।
    सप्लीमेंट्री परीक्षा छात्रों के लिए राहत
    सीबीएसई ने यह भी घोषणा की है कि कंपार्टमेंट श्रेणी के छात्रों और प्रदर्शन सुधारने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा 15 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी।
    “लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स” भरने की प्रक्रिया 2 जून 2026 से शुरू होगी।
    यह व्यवस्था आधुनिक शिक्षा प्रणाली के उस सिद्धांत को मजबूत करती है जिसमें छात्रों को सुधार और पुनः अवसर प्रदान किए जाते हैं।
    पेपर लीक और परीक्षा माफियाओं का बढ़ता खतरा
    हाल ही में Central Bureau of Investigation द्वारा नीट यूजी पेपर लीक मामले में की गई कार्रवाई ने पूरे देश को झकझोर दिया।
    जांच एजेंसी ने कथित मुख्य सरगना को गिरफ्तार किया, जो महाराष्ट्र के लातूर का एक केमिस्ट्री प्रोफेसर बताया गया। जांच में सामने आया कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की संलिप्तता ने गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
    यह केवल अपराध नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास संकट का संकेत है।
    जब परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोग ही गोपनीयता भंग करें, तो छात्रों और अभिभावकों का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है।
    पेपर लीक के सामाजिक और मानसिक दुष्प्रभाव
    पेपर लीक की घटनाएं केवल परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं रहतीं। इनके दूरगामी सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव होते हैं।
    लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, परिवार भारी आर्थिक बोझ उठाते हैं और पूरा भविष्य एक परीक्षा पर निर्भर हो जाता है।
    ऐसे में पेपर लीक होने पर ईमानदार छात्रों का मनोबल टूटता है और योग्यता आधारित व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है।
    इसी कारण अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों ने डिजिटल एन्क्रिप्शन, मल्टी लेयर ऑथेंटिकेशन, लाइव मॉनिटरिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी तकनीकों को अपनाया है।
    भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन विशाल जनसंख्या और बहुस्तरीय प्रशासनिक ढांचे के कारण चुनौतियां अधिक जटिल हैं।
    शिक्षा व्यवस्था में तकनीक और नैतिकता दोनों जरूरी
    विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा मंत्रालय को बहुस्तरीय सुरक्षा रणनीति अपनानी चाहिए।
    प्रश्न पत्र निर्माण से लेकर वितरण और मूल्यांकन तक हर चरण में डिजिटल ट्रैकिंग, एन्क्रिप्शन और निगरानी अनिवार्य की जानी चाहिए।
    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम, ब्लॉकचेन तकनीक, सुरक्षित क्लाउड सर्वर, फेस रिकग्निशन और बायोमेट्रिक सत्यापन भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
    लेकिन तकनीक के साथ प्रशासनिक ईमानदारी और नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व देना होगा। यदि व्यवस्था के भीतर भ्रष्टाचार मौजूद रहेगा, तो अत्याधुनिक तकनीक भी विफल हो सकती है।
    शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखना समय की मांग
    आज शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास, आर्थिक प्रगति और सामाजिक स्थिरता की आधारशिला बन चुकी है।
    यदि परीक्षा प्रणाली पर से विश्वास समाप्त हो जाए तो प्रतिभा आधारित व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।
    सीबीएसई की नई पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन प्रणाली निश्चित रूप से छात्र हितैषी और पारदर्शी पहल है। इससे छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका देखने और मूल्यांकन की निष्पक्षता जांचने का अधिकार मिलता है।
    लेकिन दूसरी ओर पेपर लीक जैसी घटनाएं यह भी संकेत देती हैं कि शिक्षा व्यवस्था में अभी गहरे सुधारों की आवश्यकता बाकी है।
    भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक है। करोड़ों युवाओं का भविष्य शिक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है। इसलिए परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुका है।
    वर्तमान डिजिटल युग शिक्षा के लिए अवसर और चुनौती दोनों लेकर आया है।
    एक ओर तकनीक पारदर्शिता, सुविधा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का मार्ग खोल रही है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराध, पेपर लीक और मूल्यांकन अनियमितताएं नई चिंताएं पैदा कर रही हैं।
    सीबीएसई की नई पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था सकारात्मक प्रयास अवश्य है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता तभी संभव होगी जब पूरी परीक्षा प्रणाली में ईमानदारी, जवाबदेही और कठोर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
    शिक्षा केवल परीक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आत्मा है। इस आत्मा की रक्षा करना आज पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बन चुका है।