Saturday, July 18, 2026
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गैस-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सपा का विरोध, जनता की समस्याओं को लेकर उठी आवाज

भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।

80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

मिट्टी के घर से संसद तक: रवि किशन ने गोरखपुर विश्वविद्यालय में छात्रों को दिया सफलता का मंत्र

‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में संभाला कार्यभार, पहले ही व्याख्यान में संघर्ष, अनुशासन और आत्मविश्वास का दिया संदेश

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शुरू की गई ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ योजना के अंतर्गत गोरखपुर के सांसद एवं अभिनेता रवि किशन शुक्ला ने शनिवार को ललित कला एवं संगीत विभाग में औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण किया। अपने पहले व्याख्यान में उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की आदत को सफलता का सबसे बड़ा आधार बताते हुए अपने संघर्षपूर्ण जीवन के अनुभव साझा किए।
रवि किशन ने कहा कि यदि व्यक्ति के भीतर दृढ़ संकल्प और अटूट आत्मविश्वास हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता। उन्होंने कहा कि एक समय वह मिट्टी के घर में रहते थे, लेकिन लगातार मेहनत, संघर्ष और अपनी कला के प्रति समर्पण ने उन्हें संसद तक पहुंचाया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा पर विश्वास रखने, लगातार अभ्यास करने और बड़े सपने देखने का आह्वान किया। साथ ही भरोसा दिलाया कि गोरखपुर के युवाओं की प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में वह हरसंभव सहयोग करेंगे।
उन्होंने कहा कि ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में वह अपनी जिम्मेदारी पूरी गंभीरता से निभाएंगे। कक्षाओं में नियमित उपस्थिति, अनुशासन और सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी ताकि विद्यार्थियों को इस पहल का अधिकतम लाभ मिल सके।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना है, जिससे शिक्षा अधिक रोजगारपरक, व्यवहारिक और जीवनोपयोगी बन सके।
ललित कला एवं संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर अनुभूति दुबे ने रवि किशन का स्वागत करते हुए कहा कि उनके जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले कलाकार का विश्वविद्यालय से जुड़ना विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और व्यावसायिक कौशल के लिए अत्यंत प्रेरणादायी साबित होगा।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने अभिनय, कला, करियर, संघर्ष और सफलता से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका रवि किशन ने विस्तार से उत्तर देते हुए उनका मार्गदर्शन किया।
इस अवसर पर प्रोफेसर उषा सिंह, डॉ. गौरी शंकर चौहान, डॉ. प्रदीप साहनी, डॉ. प्रदीप राजोरिया सहित विभाग के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

जम्मू-कश्मीर के डोडा में SOG और युवक के बीच झड़प, युवक की मौत; तीन जवान घायल, भद्रवाह में इंटरनेट सेवा निलंबित

डोडा/जम्मू-कश्मीर (राष्ट्र की परम्परा)। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार देर रात स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और एक युवक के बीच हुई झड़प में युवक की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि SOG के तीन जवान घायल हो गए। घटना के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने भद्रवाह क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर SOG की टीम ने भद्रवाह-गंधोह मार्ग पर तलाशी अभियान चलाया। इसी दौरान एक युवक को पूछताछ के लिए रोका गया।

अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ के दौरान युवक ने कथित तौर पर एक SOG जवान की सर्विस राइफल छीनने का प्रयास किया, जिसके बाद हाथापाई हुई और गोली चल गई। इस घटना में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि SOG के तीन जवान भी घायल हुए।

सभी घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान युवक की मृत्यु हो गई। वहीं, घायल जवानों का इलाज जारी है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।

घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त पुलिस बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की गई है तथा तलाशी अभियान जारी है। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने भद्रवाह क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं, ताकि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोका जा सके।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। प्रशासन ने नागरिकों से शांति बनाए रखने और केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करने की अपील की है।

जम्मू-कश्मीर: सांबा के आसमान में 9 सेकेंड तक दिखी रहस्यमयी रोशनी, जांच में जुटीं सुरक्षा एजेंसियां

सांबा/जम्मू-कश्मीर (राष्ट्र की परम्परा)। जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में सोमवार रात करीब 9 बजे आसमान में लगभग 9 सेकेंड तक दिखाई दी रहस्यमयी रोशनी ने लोगों के बीच कौतूहल और चर्चा का माहौल पैदा कर दिया। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने इसके वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा किए, जो तेजी से वायरल हो रहे हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आसमान में अचानक तेज चमक वाली रोशनी दिखाई दी, जो कुछ क्षण तक नजर आने के बाद अचानक गायब हो गई। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

प्रारंभिक स्तर पर कुछ लोगों ने इसे उल्कापिंड (Meteor), कुछ ने इल्यूमिनेशन राउंड (Illumination Round) और कुछ ने अन्य संभावित कारणों से जोड़कर देखा। हालांकि, अब तक किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

राहत की बात यह है कि घटना के संबंध में किसी भी प्रकार के धमाके, मलबा मिलने या जान-माल के नुकसान की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारी उपलब्ध वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और तकनीकी तथ्यों के आधार पर रहस्यमयी रोशनी के वास्तविक कारण का पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारणों को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आएगी।

बहराइच: नवाबगंज में सेंध लगाकर लाख रुपये के जेवरात व नकदी चोरी, पीड़िता ने पुलिस से लगाई न्याय की गुहार

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद बहराइच के थाना नवाबगंज क्षेत्र में चोरी की एक और बड़ी घटना सामने आई है। ग्राम पंचायत सती जोर के मजरा चरगंहवा निवासी फुलकोरा, पत्नी स्वर्गीय महेश, ने अज्ञात चोरों के खिलाफ थाना नवाबगंज में प्रार्थना पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है।

पीड़िता के अनुसार, 16/17 जुलाई 2026 की रात अज्ञात चोरों ने मकान की पश्चिम दिशा की दीवार में सेंध लगाकर घर में प्रवेश किया। इसके बाद घर में रखे बक्से से सोने की नथ, चांदी की पायल, चांदी की जंजीर, चांदी का खड़ुवा तथा 5,000 रुपये नकद चोरी कर फरार हो गए।

पीड़िता का कहना है कि चोरी गए जेवरात और नकदी की कुल कीमत लगभग एक लाख रुपये है। घटना के बाद परिवार और गांव के लोगों में दहशत का माहौल है। पीड़िता ने पुलिस से चोरी गए सामान की बरामदगी और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।

मामले में थाना प्रभारी नवाबगंज जितेन्द्र कुमार यादव ने बताया कि घटना की सूचना प्राप्त हुई है। पीड़िता के प्रार्थना पत्र के आधार पर मामले की जांच की जा रही है तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एनएचआई से वार्ता के बाद कपरवार सेतु पर दोपहिया वाहनों का आवागमन शुरू

कपरवार/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
राप्ती नदी पर स्थित कपरवार सेतु पर सुरक्षा कारणों से वाहनों के आवागमन पर रोक लगाए जाने से गोरखपुर और देवरिया के बीच आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस बीच कपरवार रामजानकी मार्ग स्थित चौकी पर कांग्रेस प्रवक्ता रवि प्रताप सिंह और समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह ने एनएचआई के अधिकारियों से फोन पर वार्ता कर आमजन की समस्याओं से अवगत कराया।
वार्ता के बाद एनएचआई अधिकारियों ने दोपहिया वाहनों के आवागमन की अनुमति दे दी। हालांकि सुरक्षा के मद्देनजर चारपहिया, भारी वाहनों समेत अन्य सभी वाहनों के संचालन पर रोक जारी रहेगी।
एनएचआई अधिकारियों ने बताया कि कपरवार सेतु के निर्माण कार्य के लिए तीन कंपनियों को बुलाया गया है। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
रवि प्रताप सिंह और अर्जुन सिंह ने कहा कि यदि अगले 100 घंटे के भीतर सेतु निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो क्षेत्रीय जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि सेतु बंद होने से प्रतिदिन हजारों यात्रियों, छात्रों, व्यापारियों और मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था न होने से लोगों को अतिरिक्त समय और धन खर्च करना पड़ रहा है।
इस दौरान दिवाकर चौरसिया, सुमीत तिवारी, राहुल, विवेक, हरिश्चंद्र, कमलेश, विजली, अखिलेश, पंकज, नीरज वर्मा, अभिषेक सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

अनियमित यात्रा की रोकथाम के लिए सघन टिकट अभियान

वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा)
मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन के निर्देशन एवं वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक प्रशस्ति श्रीवास्तव के नेतृत्व में पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी मंडल के विभिन्न रेलखंडों पर बिना टिकट एवं अनियमित यात्रा की रोकथाम के लिए सघन टिकट जांच अभियान निरंतर चलाया जा रहा है।
इसी क्रम में 17 जुलाई 2026 को मऊ–इन्दारा रेलखंड पर गाड़ी संख्या 65107 भटनी–वाराणसी सिटी, 15104 बनारस–गोरखपुर एक्सप्रेस, 14006 आनंद विहार–सीतामढ़ी एक्सप्रेस सहित अन्य मेल एवं सवारी गाड़ियों में विशेष टिकट जांच अभियान चलाया गया। इसके अतिरिक्त इन्दारा–दोहरीघाट रेलखंड पर किमी 7/2 के समीप गाड़ी संख्या 65121 दोहरीघाट-वाराणसी सिटी सवारी गाड़ी में भी विशेष जांच की गई।
मुख्य वाणिज्य निरीक्षक, मऊ अखिलेश सिंह एवं मुख्य टिकट निरीक्षक राम प्रभाव यादव के नेतृत्व में आयोजित इस संयुक्त अभियान में रेलवे सुरक्षा बल के उप निरीक्षक राम प्रवेश यादव सहित रेलवे सुरक्षा बल एवं राजकीय रेलवे पुलिस के कुल 11 सुरक्षा कर्मियों तथा वाराणसी रेड टीम एवं आईसीपी, मऊ के 11 टिकट जांच कर्मचारियों ने भाग लिया।
टिकट जांच अभियान के दौरान 83 बिना टिकट यात्रियों को पकड़ा गया, जिनसे ₹48,035 अड़तालीस हजार पैंतीस रुपये रेल राजस्व के रूप में वसूल किए गए।
जांच अभियान के दौरान संबंधित स्टेशनों के टिकट काउंटरों पर यात्रा टिकट लेने के लिए यात्रियों की लंबी कतारें भी देखने को मिलीं, जो यात्रियों में वैध टिकट लेकर यात्रा करने के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक प्रशस्ति श्रीवास्तव ने यात्रियों से अपील की कि वे सदैव वैध यात्रा टिकट लेकर ही यात्रा करें, रेलवे नियमों का पालन करें तथा ट्रेनों एवं रेलवे परिसरों में स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग प्रदान करें।

एसडीएम ज्ञान प्रताप सिंह का सख्त संदेश—लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त

पहले ही दिन फरियादियों की सुनी समस्याएं, त्वरित निस्तारण के दिए निर्देश

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
सदर तहसील में नवागत उप जिलाधिकारी (एसडीएम) ज्ञान प्रताप सिंह ने शुक्रवार को अपने पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया। कार्यभार संभालते ही उन्होंने अपने कार्यशैली का स्पष्ट संदेश देते हुए जनसुनवाई को प्राथमिकता दी और कार्यालय पहुंचे फरियादियों की समस्याओं को बारी-बारी से गंभीरता पूर्वक सुना। पहले ही दिन उनकी सक्रियता और संवेदनशीलता से फरियादियों में उम्मीद जगी।
एसडीएम ज्ञान प्रताप सिंह ने कहा कि उनकी प्राथमिकता हर फरियादी की समस्या का समयबद्ध और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी व्यक्ति को एक ही समस्या के लिए बार-बार कार्यालय का चक्कर न लगाना पड़े। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अब व्यवस्था में सुधार लाया जाएगा और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।
कार्यभार ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों—नायब तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल तथा पटल प्रभारियों के साथ बैठक कर सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोई भी फाइल एक दिन से अधिक लंबित नहीं रखी जाएगी और सभी मामलों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। विशेष रूप से किसानों और आम जनता से जुड़े मामलों को तत्काल हल करने पर जोर दिया गया।
एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले क्या होता था, इससे उन्हें कोई सरोकार नहीं है। अब उनका पूरा ध्यान वर्तमान व्यवस्था को सुधारने और जनता को बेहतर सेवा देने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी फरियादी को बेवजह तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और हर समस्या का समाधान पारदर्शी तरीके से किया जाएगा।
उन्होंने सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने पटल पर नियमित रूप से बैठकर जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करें और सौंपे गए दायित्वों का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन करें। लापरवाही या अनावश्यक देरी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एसडीएम ज्ञान प्रताप सिंह की इस पहल से तहसील में कार्यसंस्कृति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। फरियादियों ने भी उनकी सक्रियता और संवेदनशील रवैये की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि अब उनकी समस्याओं का शीघ्र और प्रभावी समाधान संभव हो सकेगा। प्रशासन की इस नई पहल से सदर तहसील में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की संभावना है।

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने एनएसएस स्वयंसेवक कृष्णानन्द जायसवाल को किया सम्मानित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सक्रिय स्वयंसेवक कृष्णानन्द जायसवाल को भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत संचालित ‘माई भारत’ के प्रतिष्ठित ‘नेशन फर्स्ट चैलेंज’ में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूथ कन्वेंशन के दौरान सम्मानित किया।
देशभर से आयोजित इस प्रतियोगिता में केवल पांच शीर्ष विजेताओं का चयन किया गया, जिनमें कृष्णानन्द जायसवाल ने स्थान बनाया। विशेष बात यह रही कि वह पूरे उत्तर भारत से चयनित एकमात्र युवा प्रतिनिधि रहे। यह उपलब्धि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए भी गर्व का विषय है।
18 मई से 30 जून 2026 तक आयोजित ‘नेशन फर्स्ट चैलेंज’ का उद्देश्य युवाओं को विकसित भारत-2047 के संकल्प से जोड़ते हुए सामाजिक सेवा, जनजागरूकता, स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन, पर्यटन विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक उत्तरदायित्व जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना था। प्रतिभागियों का चयन उनके नवाचार, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक प्रभाव और राष्ट्रहित में किए गए कार्यों के आधार पर किया गया।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक प्रो. सत्यपाल सिंह, डॉ. आलोक कुमार सहित कार्यक्रम अधिकारियों और शिक्षकों ने कृष्णानन्द जायसवाल को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विश्वास जताया कि वह आगे भी समाज और राष्ट्रहित में उल्लेखनीय कार्य कर विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएंगे।

18 जुलाई को प्रकाशित होगी अंतिम मतदेय स्थल सूची, राजनीतिक दलों के सुझावों पर हुई चर्चा

डीएम बोले- आयोग के निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी ढंग से पूरी की जा रही प्रक्रिया, शेष आपत्तियां तत्काल दर्ज कराने की अपील

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।विधानसभा निर्वाचन की तैयारियों के तहत जनपद के मतदेय स्थलों की सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव सिंह सोंगरवाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में मतदेय स्थलों के संभावित परिवर्तन, विभाजन और प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
जिलाधिकारी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार प्रस्तावित सभी मतदेय स्थलों का संबंधित उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों से भौतिक सत्यापन कराया गया है। सत्यापन के दौरान प्राप्त शिकायतों और सुझावों का नियमानुसार परीक्षण एवं निस्तारण किया जा चुका है। इसके बाद 18 जुलाई 2026 को जनपद के मतदेय स्थलों की अंतिम सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मतदेय स्थलों के निर्धारण की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और निर्वाचन आयोग की गाईडलाइन के अनुरूप संचालित की जा रही है, ताकि प्रत्येक मतदाता को अपने मतदान केंद्र पर आसानी से पहुंचने की सुविधा मिल सके।
बैठक में जिलाधिकारी ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से कहा कि यदि किसी मतदेय स्थल को लेकर अब भी कोई आपत्ति या सुझाव शेष है तो उसे तत्काल संबंधित सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एआरओ) के समक्ष प्रस्तुत करें, जिससे समय रहते उसका निस्तारण किया जा सके।
उन्होंने निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए कि मतदेय स्थलों से संबंधित सभी औपचारिकताएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करते हुए भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में जनपद के सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, संबंधित प्रशासनिक अधिकारी तथा विभिन्न मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहें।

अनाथ और निराश्रितों के पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन सख्त, हर मंगलवार चलेगा विशेष रेस्क्यू अभियान

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। सड़क पर रहने वाले अनाथ, परित्यक्त और असहाय व्यक्तियों के चिन्हांकन तथा पुनर्वास को लेकर जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) चन्द्रेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय चिन्हांकन समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें न्यायालय एवं शासन के निर्देशों के अनुपालन पर विस्तृत चर्चा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में निर्देश दिया गया कि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के निराश्रित व्यक्तियों को संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर आश्रय गृह, चिकित्सा परिचर्या गृह अथवा अन्य उपयुक्त संस्थानों में भेजा जाएगा। वहीं 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के मिलने पर उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अपर जिलाधिकारी ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को समाज कल्याण विभाग की कल्याण साथी हेल्पलाइन-14568, महिला हेल्पलाइन 181 तथा चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए, ताकि आमजन सड़क पर मिले निराश्रित, महिलाओं और बच्चों की सूचना तत्काल प्रशासन तक पहुंचा सकें।
बैठक में मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम-2017 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। साथ ही शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक मंगलवार को विशेष रेस्क्यू अभियान चलाकर ऐसे व्यक्तियों को सुरक्षित आश्रय और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया।
बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी बृजेश कुमार, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, डॉ. अमर सिंह गौतम, अरुण कुमार ओझा, अधिवक्ता नरेन्द्र चौधरी, राम शब्द, एस.बी. सागर, मोनिका शुक्ला, प्रिंस कुमार झा सहित विभिन्न विभागों एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

चार माह बाद बाइक चोरी का खुलासा: गोरखपुर का युवक गिरफ्तार, चोरी की बाइक बरामद

बृजमनगंज पुलिस की कार्रवाई, फरार साथी की तलाश जारी

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। बृजमनगंज थाना पुलिस ने करीब चार माह पहले हुई बाइक चोरी की घटना का सफल खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी की गई मोटरसाईकिल बरामद कर ली है। पुलिस पूछ-ताछ में आरोपी ने अपने एक साथी के साथ मिलकर बाइक चोरी करने की बात स्वीकार की है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी फरेंदा दीपशिखा वर्मा के पर्यवेक्षण में अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत यह सफलता मिली।
थानाध्यक्ष मदन मोहन मिश्र के नेतृत्व में गठित टीम ने मुखबिर की सूचना के आधार पर गोरखपुर निवासी कमलेश पुत्र रामप्रीत पासवान (23) को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से चोरी की गई मोटरसाइकिल U P 56 A B 7784 बरामद की गई।
जानकारी के अनुसार 28 मार्च 2026 को सिकड़ा कोइलाडांड़ निवासी सुखदेव यादव ने अपनी मोटरसाईकिल चोरी होने की तहरीर दी थी। इस मामले में थाना बृजमनगंज में मुकदमा संख्या 84/2026, धारा 303(2) बीएनएस के तहत अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी तक पहुंचकर चोरी की बाइक बरामद कर ली।
पूछ-ताछ में कमलेश ने बताया कि उसने अपने साथी उदय, निवासी मोहनापुर पासी टोला, पादरी बाजार (गोरखपुर) के साथ मिलकर सिकड़ा गांव से बाइक चोरी की थी। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी को महराजगंज न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है, जबकि फरार आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में उप-निरीक्षक अमित कुमार सिंह, उपनिरीक्षक अरविंद कुमार यादव, कांस्टेबल धीरेन्द्र सिंह यादव एवं आरक्षी अतुल मिश्रा शामिल रहें।

ऑनलाइन बेटिंग, कैसीनो और डिजिटल गेमिंग पर एक समान कानून की बढ़ती आवश्यकता

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।ऐसे समय में देश के सामने केवल आर्थिक विकास की चुनौती नहीं है,बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, कानून का प्रभावी शासन, युवाओं का भविष्य और डिजिटल युग में बदलती जीवनशैली के अनुरूप आधुनिक कानून बनाने की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। जुआ, कैसीनो और ऑनलाइन सट्टेबाजी इन्हीं विषयों में से एक है, जिसपर लंबे समय से देश में स्पष्ट, समग्र और आधुनिक नीति का अभाव दिखाई देता है। भारत में जुआ और कैसीनो के लिए कोई एक समान केंद्रीय (राष्ट्रीय) कानून नहीं है।अधिकांश मामलों में अभी भी पब्लिक गेबलिंग एक्ट,1867 (जहाँ लागू है) तथा राज्यों के अपने- अपने कानून लागू होते हैं। गोवा,सिक्किम और कुछ हद तक दमन-दीव में लाइसेंस प्राप्त कैसीनो की अनुमति है, जबकि कई राज्यों में जुआ पूर्ण या आंशिक रूप से प्रतिबंधित है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समान मॉडल कानून की आवश्यकता की चर्चा समय-समय पर होती रही है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र अधिवक्ता होने के नाते बताना चाहूंगा क़ि, वर्तमान डिजिटल प्रौद्योगिकी के दौर में सोशल मीडिया,ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन कसीनो,बेटिंग ऐप्स,फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफ़ॉर्म शॉर्ट वीडियो ऐप्स, लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म,एआई आधारित चैट प्लेटफ़ॉर्म, वीडियो शेयरिंग साइट्स तथा अन्य डिजिटल माध्यमों का प्रभाव तेजी से बढ़ा है।इनका सकारात्मक उपयोग शिक्षा, नवाचार और संचार के लिए उपयोगी है,लेकिन अनियंत्रित और कम उम्र में उपयोग बच्चों एवं युवाओं में नशे जैसी डिजिटल लत,मानसिक तनाव,पढ़ाई में गिरावट, आर्थिक नुकसान और सामाजिक समस्याओं का कारण भी बन रहा है।इसी चिंता को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़े प्रतिबंधों की दिशा में कदम उठाए हैं,जबकि ब्रिटेन सहित कई देशों ने आयु सत्यापन ऑनलाइन सुरक्षा और बाल संरक्षण संबंधी नियमों को सख्त बनाया है।भारत में भी डिजिटल सुरक्षा,ऑनलाइन गेमिंग और बच्चों की सुरक्षा को लेकर नीतिगत स्तरपर लगातार विचार-विमर्श और नियामकीय सटीकता से प्रयास जारी हैं। 

साथियों, इसी क्रम में गोवा सरकार ने 16 जुलाई 2026 को अधिसूचित गोवा कसीनो (संशोधन) कानून के तहत कसीनो में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित कर दी। इसका उद्देश्य युवाओं को जुए की लत और उसके सामाजिक- आर्थिक दुष्प्रभावों से बचाना हैवर्तमान में अधिकांश भारतीय राज्यों में कसीनो या ऑनलाइन जुए के संबंध में अलग-अलग कानून हैं, लेकिन गोवा की तरह 21 वर्ष की स्पष्ट आयु-सीमा का मॉडल सभी राज्यों में समान रूप से लागू नहीं है। कई राज्यों ने जुए पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लगाया है, जबकि कुछ राज्यों ने ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी पर अलग-अलग नियम बनाए हैं।आज आवश्यकता इस बात की है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर बच्चों और युवाओं की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया,ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन कसीनो और अन्य व्यसनी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर प्रभावी आयु सत्यापन, समय- सीमा, अभिभावकीय नियंत्रण तथा कठोर नियामकीय व्यवस्था लागू करें। यदि गोवा का 21 वर्ष आयु-सीमा मॉडल अन्य राज्यों में भी अपनाया जाता है,तो यह युवा पीढ़ी को डिजिटल और जुए की लत से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकता है। 

साथियो 16 जुलाई 2026 से गोवा सरकार द्वारा उठाए गए दो महत्वपूर्ण कदम, 21 वर्ष से कम आयु के युवाओं के कैसीनो में प्रवेश पर प्रतिबंध तथा कैसीनो उद्योग पर कर एवं नियामक व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने की पहल ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नई बहस को जन्म दिया है। यह बहस केवल गोवा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रश्न पूरे भारत के सामने खड़ा करती है कि यदि किसी राज्य में कैसीनो या जुए की अनुमति है,तो क्या उसे सख्त कानून पारदर्शी कर व्यवस्था और सामाजिकउत्तरदायित्व के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए?और यदि किसी राज्य में इसकी अनुमति नहीं है,तो क्या अवैध जुआ और ऑनलाइन सट्टेबाजी पर नियंत्रण के लिए सटीकता से  आधुनिक कानून नहीं बनने चाहिए? 

साथियों, गोवा भारत का प्रमुख पर्यटन राज्य है,जहाँ वर्षों से लाइसेंस प्राप्त कैसीनो संचालित हो रहे हैं। देश और विदेश से आने वाले पर्यटक राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।कैसीनो उद्योग से सरकार को राजस्व प्राप्त होता है,हजारों लोगों को रोजगार मिलता है और पर्यटन क्षेत्र को गति मिलती है। किंतु दूसरी ओर जुए की लत,आर्थिक बर्बादी, पारिवारिक विवाद,मानसिक तनाव,अपराध और युवाओं पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव जैसी चिंताएँ भी सामने आती रही हैं। इसलिए गोवा सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि आर्थिक गतिविधि तभी स्वीकार्य है,जब वह सामाजिक उत्तरदायित्व और सख्त कानूनी निगरानी के साथ संचालित हो।21 वर्ष से कम आयु के युवाओं के कैसीनो में प्रवेश पर प्रतिबंध एक अत्यंत दूरदर्शी कदम माना जा सकता है। विश्वभर के मनोवैज्ञानिक और न्यूरोसाइंस विशेषज्ञ मानते हैं कि किशोरावस्था और प्रारंभिक युवावस्था में निर्णय लेने की क्षमता पूरी तरह परिपक्व नहीं होती। इस आयु में जोखिम उठाने की प्रवृत्ति अधिक होती है और तत्काल लाभ का आकर्षण व्यक्ति को गलत निर्णयों की ओर ले जा सकता है। यदि इस अवस्था में जुए की लत लग जाए तो उसका प्रभाव केवल आर्थिक नहीं बल्कि मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। इसलिए गोवा का यह निर्णय केवल प्रवेश रोकने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा का निर्णय है। 

साथियों गोवा सरकार का दूसरा महत्वपूर्ण कदम कैसीनो उद्योग को अधिक उत्तरदायी कर व्यवस्था और नियामक ढाँचे के अंतर्गत लाने का है। किसी भी आर्थिक गतिविधि का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं होना चाहिए। यदि सरकार कर के माध्यम से प्राप्त राजस्व का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य,खेल, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों पर करती है,तो यह व्यवस्था समाज और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है। कराधान का अर्थ केवल सरकारी आय बढ़ाना नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में सटिका से  पारदर्शिता,जवाबदेही और वैधता स्थापित करना भी होता है। 

साथियों,भारत में वर्तमान स्थिति काफी असमान है।गोवा सिक्किम और दमन जैसे कुछ क्षेत्रों में सीमित रूप से कैसीनो की अनुमति है, जबकि अधिकांश राज्यों में सार्वजनिक जुआ प्रतिबंधित है।इसके बावजूदऑनलाइन जुआ विदेशी बेटिंग प्लेटफॉर्म और डिजिटल सट्टेबाजी का तेजी से विस्तार हो रहा है। लाखों भारतीय मोबाइल फोन के माध्यम से ऐसे प्लेटफॉर्म तक पहुँच रहे हैं, जिन पर राज्य सरकारों का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है। इससे कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर अपराध और युवाओं में जुए की लत जैसी समस्याएँ बढ़ने की आशंका बनी रहती है। यह स्थिति स्पष्ट संकेत देती है कि केवल पुराने कानूनों के सहारे आधुनिक डिजिटल चुनौतियों का सटीकता से समाधान संभव नहीं है। 

साथियों, भारत में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जुआ और सट्टेबाजी से जुड़े अनेक कानून औपनिवेशिक काल के हैं,जबकि आज की दुनियाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन गेमिंग के युग में प्रवेश कर चुकी है। आज कोई व्यक्ति कुछ ही मिनटों में मोबाइल फोन से अंतरराष्ट्रीय बेटिंग वेबसाइट पर पैसा लगा सकता है।यदि सरकार केवल प्रतिबंध की नीति अपनाती है, तो अवैध गतिविधियाँ भूमिगत हो जाती हैं। यदि पूर्ण स्वतंत्रता देती है, तो सामाजिक नुकसान बढ़ सकता है।इसलिए आवश्यकता एक संतुलित नीति की है,जहाँ सटीकता से  कानून भी हो,निगरानी भी हो और सामाजिक उत्तरदायित्व भी हो। 

साथियों, मेरे विचार से भारत को अब एक मॉडल जुआ एवं कैसीनो विनियमन कानून (मॉडल गंबलिंग एंड कैसीनो रेगुलेशन लॉ) तैयार करना चाहिए। यह कानून पूरे देश पर अनिवार्य रूप से लागू न होकर राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल हो सकता है।प्रत्येक राज्य अपनी सामाजिक सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार इसे अपनाने या संशोधित करने का अधिकार रखे।इससे देशभर में न्यूनतम कानूनी मानक (मिनिमम् लीगल स्टैण्डर्ड्स) स्थापित होंगे और कानूनी अस्पष्टता दूर होगी।इस मॉडल कानून का पहला सिद्धांत होना चाहिए, युवाओं की सुरक्षा सर्वोपरि। पूरे देश में 21 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति के कैसीनो या उच्च जोखिम वाले जुआ प्लेटफॉर्म तक पहुँचने पर प्रतिबंध होना चाहिए। आधार, पासपोर्ट या अन्य सरकारी पहचान-पत्र के माध्यम से डिजिटल आयु सत्यापन अनिवार्य बनाया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर भारी जुर्माना, लाइसेंस रद्द करने और आपराधिक कार्रवाई का सटीकता से प्रावधान होना चाहिए। 

साथियों, दूसरा महत्वपूर्ण प्रावधान जिम्मेदार जुआ (रिस्पांसिबल गेबलिंग) होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को जुए की लत से बचाना चाहता है,तो उसे स्वैच्छिक प्रतिबंध का अधिकार मिलना चाहिए। परिवार के सदस्यों को भी विशेष परिस्थितियों में न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ऐसे व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगाने का अधिकार मिल सकता है।प्रत्येक कैसीनो में सटीकता से  मनोवैज्ञानिक परामर्श, हेल्पलाइन चेतावनी संदेश और नशामुक्ति सहायता केंद्र अनिवार्य किए जाने चाहिए। 

साथियों, तीसरा व चौथा महत्वपूर्ण पहलू पारदर्शी कर व्यवस्था है। कैसीनो उद्योग से प्राप्त राजस्व का निश्चित प्रतिशत शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, मानसिक स्वास्थ्य, नशामुक्ति अभियान और महिला सुरक्षा कार्यक्रमों पर खर्च करना कानून द्वारा अनिवार्य किया जा सकता है। इससे जनता को यह विश्वास मिलेगा कि सरकार केवल कर संग्रह नहीं कर रही, बल्कि सामाजिक कल्याण के लिए उसका उपयोग भी कर रही है।चौथा पक्ष डिजिटल और ऑनलाइन जुए का नियमन है। विदेशी बेटिंग प्लेटफॉर्म, अवैध ऐप और अनधिकृत वेबसाइटें भारतीय युवाओं को तेजी से आकर्षित कर रही हैं। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक, प्रवर्तन निदेशालय, साइबर पुलिस और राज्यों की एजेंसियों के बीच समन्वित व्यवस्था विकसित कर ऐसे प्लेटफॉर्मों पर प्रभावी नियंत्रण सटीकता से स्थापित किया जाना चाहिए। 

साथियों, कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि जुआ सामाजिक बुराई है और इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर देना चाहिए। यह विचार अपनी जगह सम्माननीय है।वहीं दूसरा पक्ष कहता है कि जहाँ माँग मौजूद है, वहाँ पूर्ण प्रतिबंध से अवैध बाजार और संगठित अपराध बढ़ते हैं। विश्व के अनेक देशों का अनुभव बताता है कि कठोर नियमन, पारदर्शी कर व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा उपाय पूर्ण प्रतिबंध की तुलना में अधिक प्रभावी सिद्ध हुए हैंइसलिए प्रत्येक राज्य को अपनी परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए, किंतु किसी भी स्थिति में अवैध जुए और डिजिटल सट्टेबाजी को कानून से बाहर नहीं छोड़ा जा सकता। 

साथियों, मेरे मत में भारत सरकार को विधि आयोग, नीति आयोग, गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा सभी राज्यों के प्रतिनिधियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित करनी चाहिए। यह समिति विश्व के सफल मॉडलों का अध्ययन कर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप एक व्यापक मॉडल कानून तैयार करे। इस कानून में 21 वर्ष की न्यूनतम आयु, डिजिटल पहचान सत्यापन, लाइसेंस प्रणाली, सीसीटीवी निगरानी, मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी नियम, जिम्मेदार जुआ कार्यक्रम, स्वैच्छिक प्रतिबंध व्यवस्था, कर पारदर्शिता, नियमित ऑडिट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का पंजीकरण, भ्रामक विज्ञापनों पर रोक तथा कठोर दंड जैसी व्यवस्थाएँ शामिल होनी चाहिए। 

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत: महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में ‘विकसित भारत यूथ कनेक्ट’ कार्यक्रम

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा) । महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के सहयोग से “विकसित भारत यूथ कनेक्ट कार्यक्रम” का आयोजन “नशा मुक्त युवा-विकसित भारत” विषय पर किया गया। कार्यक्रम में युवाओं को नशामुक्त जीवनशैली अपनाने, सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया। इसमें शिक्षक, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। मेघा शर्मिष्ठा और अनुष्का गोयल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों का अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया गया।
स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय के नशामुक्ति नोडल अधिकारी डॉ. दिलीप मिश्रा ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास को भी प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा, ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने तथा समाज में नशामुक्ति के प्रति व्यापक जनजागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता एवं यूथ आइकन प्रियांशु भारद्वाज ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का युवा नशामुक्त, स्वस्थ, शिक्षित और जागरूक होगा। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने के साथ-साथ परिवार, मित्रों और समाज को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया। उन्होंने डिजिटल साक्षरता, सामाजिक सेवा और नवाचार के क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर भी बल दिया।
डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि योग और ध्यान युवाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाते हैं तथा तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं पर नियंत्रण में मदद करते हैं। वहीं इंजीनियर उदयभान यादव ने कहा कि योग, प्राणायाम और मेडिटेशन युवाओं को मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच प्रदान करते हैं, जिससे वे नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. धनंजय पांडेय ने राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह युवाओं में सेवा, अनुशासन, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करती है। उन्होंने स्वयंसेवकों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन अनुमेशा मिश्रा और राघवेंद्र शुक्ला ने संयुक्त रूप से किया। समापन पर मेघा शर्मिष्ठा और अनुष्का गोयल ने वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगान की प्रस्तुति दी। अंत में सभी छात्र-छात्राओं और स्वयंसेवकों ने नशामुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने, स्वयं नशे से दूर रहने और समाज में जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लिया।
इस अवसर पर डॉ. अमित उपाध्याय, अनिल कुमार पटेल, डॉ. रवि निषाद, साध्वी नंदन पांडे, विकास कुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

बीबीएयू में वृक्षारोपण अभियान, हरित परिसर के निर्माण का लिया संकल्प

रोटरी क्लब के सहयोग से छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों ने किया पौधरोपण, कुलपति ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शुक्रवार को रोटरी क्लब ऑफ लखनऊ ट्रांस गोमती के संयुक्त तत्वावधान में सावित्रीबाई फुले महिला छात्रावास परिसर में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के नेतृत्व में शिक्षकों, छात्राओं, गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और रोटरी क्लब के पदाधिकारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण तथा हरित परिसर के निर्माण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। कार्यक्रम में संयोजक प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा, रोटरी क्लब के अध्यक्ष पूर्वी मित्तल, सचिव विनोद सिंह और कोषाध्यक्ष इला गंभीर मौजूद रहीं। अभियान में एनसीसी की 20 यूपी गर्ल्स बटालियन और 67 यूपी बटालियन ने भी सक्रिय सहयोग दिया।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि वृक्षारोपण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रत्येक नागरिक को कम से कम एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। इससे हरित और स्वच्छ भारत के निर्माण का लक्ष्य साकार किया जा सकता है।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार और समाज के सभी वर्गों से अधिक से अधिक पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बीबीएयू सतत विकास, हरित परिसर और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम संयोजक प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वृक्ष प्राकृतिक संतुलन, जैव विविधता और स्वच्छ वातावरण के आधार हैं, इसलिए पौधरोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी सभी को निभानी चाहिए।
अभियान में प्रभारी वनस्पति उद्यान डॉ. रवि शंकर वर्मा, रोटरी क्लब के सदस्य सुमित मित्तल, आलोक शुक्ला, रीता अहूजा, अतुल कपूरिया, विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्रावासों की वार्डन, गैर-शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी तथा छात्राओं ने सहभागिता की।

225 किलो महुआ लहन नष्ट, छह लीटर कच्ची शराब बरामद, आबकारी विभाग का विशेष अभियान जारी

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में अवैध शराब के निर्माण एवं बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। अभियान के दौरान 225 किलोग्राम महुआ लहन नष्ट किया गया तथा छह लीटर कच्ची शराब बरामद कर आबकारी अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया।
जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार के नेतृत्व में आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-1 खलीलाबाद एवं क्षेत्र-2 मेंहदावल ने अपनी टीम के साथ ग्राम अशरफपुर, ग्राम अमाहवा तथा आसपास के क्षेत्रों में सघन छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान अवैध शराब निर्माण में प्रयुक्त लगभग 225 किलोग्राम महुआ लहन को मौके पर ही नष्ट कराया गया।
छापेमारी के दौरान छह लीटर कच्ची शराब भी बरामद की गई। बरामदगी के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की गई।
जिला आबकारी अधिकारी ने बताया कि जनपद में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन एवं बिक्री के विरुद्ध विशेष प्रवर्तन अभियान निरंतर जारी रहेगा। दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।