Wednesday, July 15, 2026
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गैस-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सपा का विरोध, जनता की समस्याओं को लेकर उठी आवाज

भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।

80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय का जिलेभर में हुआ भव्य स्वागत,

मगहर बाईपास पर गौरव कुमार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने किया अभिनंदन

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय के प्रथम जनपद आगमन पर जिलाध्यक्ष नीतू सिंह के नेतृत्व में जिलेभर में विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए गए। जगह-जगह पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया। इसी क्रम में मगहर पुलिस चौकी बाईपास पर जिला कार्यसमिति सदस्य एवं मनोनीत सभासद गौरव कुमार के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने क्षेत्रीय अध्यक्ष का जोरदार स्वागत किया।
स्वागत यात्रा की शुरुआत किया एजेंसी से हुई, जहां पूर्व विधायक दिग्विजय नारायण “जय चौबे” ने स्वागत किया। इसके बाद हनुमान मंदिर मगहर पर पूर्व विधायक राकेश सिंह बघेल, श्री दुर्गा मंदिर मगहर पर पूर्व चेयरमैन संगीता वर्मा, मगहर पुलिस चौकी पर मनोनीत सभासद गौरव कुमार, मंझरिया में धनघटा विधायक गणेश चंद्र चौहान, सोनी होटल पर विधायक अंकुर राज तिवारी, मेहदावल बाईपास पुल के नीचे सभी ब्लॉक प्रमुखों, नेदुला चौराहा पर नील मणि, सरेया बाईपास पर नगर टीम एवं युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं तथा अंत में जिला कार्यालय पर जिलाध्यक्ष नीतू सिंह के नेतृत्व में जिला संगठन ने उनका भव्य स्वागत किया।
जिले के नगर पंचायत मगहर में पुलिस चौकी बाईपास पर आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रमुख रूप से मनोनीत सभासद ई. अरुण गुप्ता, रवि साहनी, सूरज निषाद, मुकेश निषाद, सबलू, अदहम अली एवं इज़हार अहमद का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर दिलीप मणि त्रिपाठी, मुरली चौरसिया, सर्वजीत चौरसिया, अरविंद निषाद, विक्की, अरुण गुप्ता, विद्याधर यादव, राम रतन चौरसिया, हरिकेश, पंकज, पप्पू निषाद, सोनू निषाद, मनीष कन्नौजिया, अमन कुमार, सज्जू, वीरेंद्र गुप्ता, दया, शैलेन्द्र सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पत्रकारों ने सांसद विजय कुमार दुबे से लगाई गुहार, रेल यात्रा रियायत बहाल कराने की उठाई मांग


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद की मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, कुशीनगर ने पत्रकारों को पूर्व में उपलब्ध रेल यात्रा रियायत सुविधा को पुनः शुरू कराने की मांग को लेकर सांसद विजय कुमार दुबे को ज्ञापन सौंपा है। समिति का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान अस्थायी रूप से स्थगित की गई यह सुविधा आज तक बहाल नहीं हो सकी है, जिससे मान्यता प्राप्त पत्रकारों को समाचार संकलन और जनहित से जुड़े कार्यों के दौरान अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
समिति के अध्यक्ष एस.एन. शुक्ला के नेतृत्व में भेजे गए पत्र में कहा गया है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकार समाज और सरकार के बीच महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं। दूर-दराज क्षेत्रों में जाकर समाचार संकलन, जनसमस्याओं को उजागर करने तथा सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत सामने लाने के लिए पत्रकारों को लगातार यात्रा करनी पड़ती है। ऐसे में रेल यात्रा रियायत सुविधा उनके कार्य को अधिक प्रभावी और सुगम बनाती थी।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि कोरोना महामारी के दौरान रेल मंत्रालय ने विभिन्न रियायती सुविधाओं के साथ पत्रकारों को मिलने वाली यात्रा रियायत भी अस्थायी रूप से बंद कर दी थी। महामारी समाप्त होने के बाद भी इस व्यवस्था को पुनः लागू नहीं किया गया, जिससे देशभर के मान्यता प्राप्त पत्रकार प्रभावित हैं।
पत्रकार समिति ने सांसद विजय कुमार दुबे से अनुरोध किया है कि वे इस विषय को संसद तथा रेल मंत्रालय के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाकर पत्रकारों की रेल यात्रा रियायत सुविधा को शीघ्र बहाल कराने के लिए सकारात्मक पहल करें। समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि सांसद इस जनहित और पत्रकार हित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीरता से पहल करेंगे।

विश्व युवा कौशल दिवस पर रोजगार मेले में 42 युवाओं को मिला रोजगार

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान चकदही में आयोजित वृहद रोजगार मेले में 11 प्रतिष्ठित कंपनियों ने भाग लिया। मेले में 169 अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार दिया, जिनमें से 42 युवाओं का विभिन्न कंपनियों में चयन कर उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान किए गए।
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, डी.डी.यू.जी.के.वाई., उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन एवं सेवायोजन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रोजगार मेले का शुभारंभ संयुक्त निदेशक प्रशिक्षण/शिक्षु, बस्ती मंडल, बस्ती ने किया। इस दौरान चयनित अभ्यर्थियों को ऑफर लेटर (एलओआई) वितरित किए गए तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित किया गया।
जिला समन्वयक कौशल विकास मिशन ने बताया कि रोजगार मेले में लेग प्रो सॉल्यूशन, यूनिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, एलआईसी इंडिया, पीयू परिवहन विभाग, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, अमेज़न, शिव शक्ति, गीगा कारपूल, उमोजा मार्केट प्लेस प्राइवेट लिमिटेड, स्पार्क मिंडा तथा सर्वसिद्धि मैनेजमेंट कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड सहित 11 प्रतिष्ठित कंपनियों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक प्रशिक्षण/शिक्षु, बस्ती मंडल, जिला समन्वयक कौशल विकास मिशन, प्रधानाचार्य राजकीय आईटीआई खलीलाबाद एवं हैसर बाजार, एमआईएस प्रबंधक, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, डेटा एंट्री ऑपरेटर तथा सभी ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

किताबों से नहीं साइबर ठगी से लिख रहा था भविष्य

B.Sc. छात्र निकला फर्जी लोन गैंग का मास्टरमाइंड, 10% कमीशन पर खुलवाए सैकड़ों खाते

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l पढ़ाई-लिखाई कर परिवार का सहारा बनने की उम्र में दो युवकों ने आसान कमाई का ऐसा रास्ता चुना, जिसने न सिर्फ उनकी जिंदगी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया, बल्कि रिश्तेदारों और दोस्तों को भी कानूनी संकट में डाल दिया। गोरखपुर पुलिस ने फर्जी लोन ऐप के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गोरखपुर पुलिस ने फर्जी लोन देने के नाम पर देशभर के लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाने वाले दो युवकों को गिरफ्तार किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में 22 वर्षीय मनजीत कुमार बीएससी सेकेंड ईयर का छात्र है, जबकि उसका साथी 23 वर्षीय विजय विश्वकर्मा इंटरमीडिएट और आईटीआई पास है।
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि मनजीत सोशल मीडिया पर फर्जी लोन कंपनी का पेज और मोबाइल एप बनाकर लोगों को कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा देता था। रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग और इंश्योरेंस फीस के नाम पर लोगों से ऑनलाइन रकम वसूल ली जाती थी, लेकिन न लोन मिलता था और न ही पैसा वापस होता था।
वहीं विजय विश्वकर्मा इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी था। वह 10 प्रतिशत कमीशन लेकर लोगों के बैंक खाते खुलवाता था। हैरानी की बात यह है कि उसने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों के नाम पर सैकड़ों बैंक खाते खुलवाए, जिनमें साइबर ठगी की रकम मंगवाई जाती थी। बाद में एटीएम से नकदी निकालकर रकम का बंटवारा किया जाता था।
लगातार साइबर अपराध में इस्तेमाल होने के कारण अब इन खातों को विभिन्न एजेंसियों ने फ्रीज कर दिया है। इससे वे लोग भी मुश्किल में पड़ गए हैं, जिन्होंने कुछ पैसों के लालच या बिना पूरी जानकारी के अपने खाते उपलब्ध करा दिए थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और नकदी बरामद की है। दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
यह सिर्फ साइबर ठगी की कहानी नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की हकीकत है जो मेहनत से पहले शॉर्टकट पर भरोसा करने लगी है। जिस उम्र में मनजीत किताबों से अपना भविष्य संवार सकता था, उसने फर्जी लोन ऐप बनाकर लोगों की जमा-पूंजी लूटने का रास्ता चुना। वहीं कुछ हजार रुपये के कमीशन के लालच में विजय ने अपने ही रिश्तेदारों और दोस्तों को ऐसे जाल में फंसा दिया कि आज उनके बैंक खाते फ्रीज हैं और वे भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। आसान कमाई का यह लालच अब दोनों युवकों के भविष्य पर भारी पड़ गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति-2026: विज्ञान, नवाचार और जनभागीदारी का नया युग

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत आज विकसित भारत- 2047 के अमृतकाल में प्रवेश कर चुका है,जहाँ आर्थिक प्रगति के साथ- साथ एक सुदृढ़,आधुनिक, वैज्ञानिक तथा जन-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माण भी राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गया है  भारत आज केवल विश्व की सबसे बड़ी आबादी वाला लोकतांत्रिक राष्ट्र ही नहीं, बल्कि तेजी से उभरती हुई स्वास्थ्य महाशक्ति बनने की दिशा में भी निरंतर आगे बढ़ रहा है।किसी भी राष्ट्र की वास्तविक समृद्धि केवल उसके सकल घरेलू उत्पाद से नहीं मापी जाती, बल्कि उसके नागरिकों के स्वास्थ्य,अनुसंधान क्षमता, चिकित्सा नवाचार तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं से भी आंकी जाती है। यही कारण है कि भारत सरकार का स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय निरंतर ऐसी नीतियाँ और कानून विकसित कर रहा है जो देश की स्वास्थ्य प्रणाली को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सशक्त बना सकें।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र अधिवक्ता होने के नाते इस आर्टिकल के माध्यम से आम जनता को यह जानकारी देना चाहूंगा कि अभी हाल ही में 8 जुलाई 2026 को जारी की गई डब्ल्यूएचओ- आईएआर सी ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन कैंसर 2026 क़ी कैंसर सुनामी 2050 की चेतावनी से दुनियाँ  चिंतित हो गई है? इसके पहले हमने देखे क़ि कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनियाँ को यह स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी देश की वास्तविक ताकत केवल उसकी सैन्य या आर्थिक क्षमता नहीं होती, बल्कि उसकी स्वास्थ्य व्यवस्था, वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमता और दवा प्रणाली की मजबूती भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।महामारी के दौरान भारत ने टीकों के अनुसंधान,उत्पादन और वैश्विक आपूर्ति में जो भूमिका निभाई, उसने दुनिया का ध्यान भारतीय वैज्ञानिक क्षमता की ओर आकर्षित किया।इसी अनुभव के आधार पर अब भारत सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रही है।इसी दिशा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति-2026 तथा राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग विधेयक-2026 के मसौदे सार्वजनिक सुझावों के लिए जारी किए गए हैं।इन पर क्रमशः 27 जुलाई 2026 तथा 31 जुलाई 2026 तक नागरिकों वैज्ञानिकों, चिकित्सा विशेषज्ञों, फार्मासिस्टों, शिक्षाविदों,उद्योग जगत तथा अन्य हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। यह पहल इस बात का प्रमाण है कि सरकार नीति निर्माण को केवल सरकारी प्रक्रिया न मानकर जनभागीदारी पर आधारित लोकतांत्रिक प्रक्रिया बनाना चाहती है। 

साथियों,आज पूरी दुनियाँ स्वास्थ्य क्षेत्र में चौथी औद्योगिक क्रांति का अनुभव कर रही है।आर्टिफिशल इंटेलीजेंस,मशीन लर्निंग,जीन एडिटिंग,बिग डेटा, रोबोटिक सर्जरी, टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड जैसी तकनीकें चिकित्सा व्यवस्था का स्वरूप बदल रही हैं। ऐसे समय में भारत यदि अपनी अनुसंधान नीति और फार्मेसी शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक नहीं बनाता, तो भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे रह सकता है।राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति-2026 का मूल उद्देश्य भारत में स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा देना है। कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया कि जिन देशों की वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमता मजबूत होती है, वे महामारी, नई बीमारियों और स्वास्थ्य आपदाओं का सामना अधिक प्रभावी ढंग से कर सकते हैं। भारत ने भी कोरोना काल में वैक्सीन निर्माण, दवा उत्पादन तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की, किंतु इस अनुभव ने यह भी बताया कि अनुसंधान के लिए दीर्घकालिक निवेश, आधुनिक प्रयोगशालाएँ, प्रशिक्षित वैज्ञानिक, गुणवत्ता पूर्ण डेटा तथा उद्योग एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग आवश्यक है।नई नीति इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान को अधिक समन्वित, पारदर्शी,नैतिक तथा नवाचार- आधारित बनाने का प्रयास करती है। 

साथियों, यह नीति केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य अनुसंधान को सीधे जनस्वास्थ्य से जोड़ना है।कैंसर,मधुमेह,हृदय रोग, मानसिक स्वास्थ्य, क्षय रोग, दुर्लभ बीमारियाँ,एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस,मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा वृद्धजन स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान को प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता जीनोमिक्स बायोटेक्नोलॉजी, डिजिटल हेल्थ, बिग डेटा तथा प्रिसिजन मेडिसिन जैसे आधुनिक क्षेत्रों में अनुसंधान को बढ़ावा देकर भारत को वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार केंद्र बनाने का लक्ष्य भी इस नीति में दिखाई देता है। अनुसंधान में नैतिक मानकों का पालन, डेटा सुरक्षा, रोगियों के अधिकारों की रक्षा तथा वैज्ञानिक पारदर्शिता को भी नीति का महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग विधेयक-2026 भारत की फार्मेसी शिक्षा एवं पेशेवर नियमन में व्यापक सुधार का प्रयास है। आज भारत विश्व की फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड के रूप में प्रसिद्ध है। देश विश्व के अनेक देशों को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएँ उपलब्ध कराता है। भारतीय औषधि उद्योग वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है, किंतु फार्मेसी शिक्षा, प्रशिक्षण, पंजीकरण व्यवस्था, व्यावसायिक नैतिकता तथा आधुनिक कौशल विकास में समय के साथ सुधार की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही थी। प्रस्तावित विधेयक इन्हीं कमियों को दूर करने का प्रयास करता है ताकि भारत में फार्मेसी शिक्षा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो सके। 

साथियों,विधेयक का उद्देश्य केवल एक नया आयोग बनाना नहीं है,बल्कि पूरे नियामक ढाँचे का आधुनिकीकरण करना है। इसमें फार्मेसी शिक्षा कीगुणवत्ता बढ़ाने, आधुनिक पाठ्यक्रम लागू करने, डिजिटल पंजीकरण प्रणाली विकसित करने, राज्यों और केंद्र के बीच बेहतरसमन्वय स्थापित करने, फार्मासिस्टों के लिए सतत व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने तथा मरीज- केंद्रित फार्मेसी सेवाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। यदि ये सुधार प्रभावी रूप से लागू होते हैं तो देश में दवा वितरण व्यवस्था और अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक तथा सटिका से जवाबदेह बन सकती है। 

साथियों, इन दोनों मसौदों का सबसे बड़ा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा। मजबूत स्वास्थ्य अनुसंधान प्रणाली के कारण नई दवाओं, वैक्सीनों और उपचार पद्धतियों का विकास तेज होगा। रोगों की शीघ्र पहचान संभव होगी, उपचार अधिक प्रभावी होगा तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा। फार्मेसी शिक्षा में सुधार से अधिक प्रशिक्षित और उत्तरदायी फार्मासिस्ट तैयार होंगे, जिससे दवाओं के सुरक्षित उपयोग, रोगियों को उचित परामर्श तथा नकली एवं निम्न गुणवत्ता वाली दवाओं पर नियंत्रण में मदद मिलेगी। डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने में भी सटीकता से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 

साथियों, वैश्विक स्तर पर भी इन सुधारों का महत्व अत्यंतव्यापक है।वर्तमान समय में विश्वस्वास्थ्य अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी, डिजिटल हेल्थ, मेडिकल डिवाइस, वैक्सीन विकास तथा प्रिसिजन मेडिसिन के क्षेत्र में तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। अमेरिका,ब्रिटेन, जर्मनी, जापान,दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों ने अनुसंधान एवं नवाचार को राष्ट्रीय विकास का आधार बनाया है। यदि भारत भी इन दोनों सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करता है तो वह वैश्विक क्लीनिकल रिसर्च, फार्मास्यूटिकल निर्माण,जैव- प्रौद्योगिकी तथा स्वास्थ्य नवाचार का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे विदेशी निवेश, रोजगार, निर्यात तथा वैज्ञानिक सहयोग के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। 

साथियों, हालाँकि, इन सुधारों की सफलता केवल कानून बनाने से सुनिश्चित नहीं होगी। इसके लिए अनुसंधान पर पर्याप्त सार्वजनिक एवं निजी निवेश बढ़ाना होगा, ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसंधान सुविधाएँ विकसित करनी होंगी, मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएँ स्थापित करनी होंगी तथा युवा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन देना होगा। साथ ही डेटा सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, अनुसंधान नैतिकता, बौद्धिक संपदा अधिकार तथा रोगियों की गोपनीयता जैसे विषयों पर भी स्पष्ट और प्रभावी व्यवस्था विकसित करनी होगी। फार्मेसी शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण, उद्योग- अकादमिक सहयोग तथा आधुनिक तकनीकों का सटीकता से समावेश भी आवश्यक होगा। 

साथियों, एक लोकतांत्रिक राष्ट्र में सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित करना केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है,बल्कि नीति निर्माण को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने का माध्यम है चिकित्सक,वैज्ञानिक,फार्मासिस्ट,शिक्षण संस्थान, अस्पताल, उद्योग संगठन, सामाजिक संस्थाएँ तथा आम नागरिक अपने अनुभवों के आधार पर ऐसे सुझाव दे सकते हैं जो भविष्य में इन नीतियों और कानूनों को अधिक उपयोगी बना सकें। यह जनभागीदारी ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है।यदि सुझावों के आधार पर अंतिम नीति और विधेयक को व्यापक,व्यवहारिक तथा भविष्य उन्मुख स्वरूप दिया जाता है तो भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था नई ऊँचाइयों तक पहुँच सकती है।इससे देश में अनुसंधान संस्कृति मजबूत होगी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होगा, चिकित्सा शिक्षा और फार्मेसी शिक्षा विश्वस्तरीय बनेगी तथा भारत वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व की दिशा में और अधिक सशक्त होकर आगे बढ़ेगा। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान नीति-  2026 तथा राष्ट्रीय फार्मेसी आयोग विधेयक-2026 केवल दो मसौदा दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि विकसित भारत की भावी स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला हैं। यदि सरकार इन पर प्राप्त सुझावों का गंभीरतापूर्वक परीक्षण कर उन्हें अंतिम स्वरूप में समुचित स्थान देती है और उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करती है, तो भारत न केवल अपने नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध करा सकेगा, बल्कि स्वास्थ्य अनुसंधान, दवा निर्माण, चिकित्सा शिक्षा और वैज्ञानिक नवाचार के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनने की दिशा में भी ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त करेगा। यही विकसित भारत-2047 की वास्तविक भावना है, जहाँ विज्ञान, अनुसंधान, गुणवत्ता, पारदर्शिता और जनभागीदारी मिलकर स्वस्थ, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करेंगी।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

कुशीनगर में मीडिया स्थायी समिति में प्रतिनिधित्व की मांग, मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति ने निदेशक सूचना को भेजा पत्र


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के पत्रकारों के अधिकारों और उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, कुशीनगर ने महत्वपूर्ण पहल की है। समिति ने उत्तर प्रदेश के निदेशक सूचना, लखनऊ को पत्र भेजकर मांग की है कि जिला प्रशासन द्वारा गठित की जाने वाली मीडिया की स्थायी समिति में मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के प्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
समिति के अध्यक्ष एस.एन. शुक्ला ने अपने पत्र में कहा है कि मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, कुशीनगर एक पंजीकृत एवं सक्रिय संगठन है, जिसमें जनपद के सभी मान्यता प्राप्त पत्रकार सदस्य एवं पदाधिकारी के रूप में जुड़े हुए हैं। ऐसे में पत्रकारों से जुड़े विषयों पर गठित किसी भी सरकारी समिति में संगठन का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था और पारदर्शिता की दृष्टि से आवश्यक है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मीडिया स्थायी समिति में संगठन के प्रतिनिधियों की भागीदारी से पत्रकारों की समस्याओं, सुझावों और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रशासन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा। इससे शासन, प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा पत्रकारों के हितों की रक्षा भी अधिक मजबूती से हो सकेगी।
समिति ने निदेशक सूचना से अनुरोध किया है कि इस संबंध में कुशीनगर जिला प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि मीडिया की स्थायी समिति का गठन करते समय मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के प्रतिनिधियों को उचित स्थान दिया जा सके। संगठन का कहना है कि इससे जिले के पत्रकारों की भागीदारी बढ़ेगी और पत्रकार हितों से जुड़े मामलों के समाधान में भी सकारात्मक सहयोग मिलेगा।

पत्रकार संगठन में बड़ा बदलाव, आरके भट्ट को महामंत्री और संजय चाणक्य को नई जिम्मेदारी


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, कुशीनगर की महत्वपूर्ण बैठक रविवार को पडरौना नगर स्थित एक स्थानीय होटल में संपन्न हुई। संगठन के अध्यक्ष एस.एन. शुक्ला की अध्यक्षता तथा संरक्षक ओमप्रकाश द्विवेदी एवं प्रभुनाथ गुप्त के मार्गदर्शन में आयोजित बैठक में संगठन को अधिक सक्रिय, मजबूत और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में संगठनात्मक बदलाव, पत्रकार हितों की सुरक्षा तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में सर्वसम्मति से संगठन के महामंत्री पद पर वरिष्ठ पत्रकार आरके भट्ट को नई जिम्मेदारी सौंपी गई। पूर्व महामंत्री की निष्क्रियता को देखते हुए कोषाध्यक्ष कृष्ण मोहन पांडेय ने आरके भट्ट का नाम प्रस्तावित किया, जिसे उपस्थित सभी सदस्यों ने ध्वनिमत से स्वीकार कर लिया। वहीं, आरके भट्ट के महामंत्री बनने से रिक्त हुए उपाध्यक्ष पद पर वरिष्ठ पत्रकार संजय चाणक्य का सर्वसम्मति से निर्वाचन किया गया।
बैठक में संगठन को नियमित रूप से सक्रिय बनाए रखने के लिए प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार को मासिक बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही संगठन के स्थायी कार्यालय की स्थापना का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का दायित्व संगठन मंत्री हेमंत चौरसिया को सौंपा गया, जो कार्यालय की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।
पत्रकारों की समस्याओं के त्वरित समाधान और प्रशासनिक संवाद को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह भी तय किया गया कि प्रत्येक तीन माह में उत्तर प्रदेश के सूचना निदेशक एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ त्रैमासिक बैठक आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में पत्रकारों से जुड़े मुद्दों, सुरक्षा, अधिकारों तथा कार्य संबंधी समस्याओं पर चर्चा कर समाधान का प्रयास किया जाएगा।
बैठक के दौरान सहायक निदेशक एवं जिला सूचना अधिकारी कार्यालय से जुड़े पत्रकारों के साथ हाल में हुए कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने इस घटना को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री तथा सूचना निदेशक को पत्र भेजकर निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग करने का निर्णय लिया।
अध्यक्ष एस.एन. शुक्ला ने कहा कि संगठन पत्रकारों के सम्मान, अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक मुद्दे पर मजबूती से खड़ा रहेगा तथा किसी भी प्रकार के उत्पीड़न को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने संगठन की एकजुटता को ही पत्रकार हितों की सबसे बड़ी ताकत बताया।

बैठक में संगठन के नए लोगो (Logo) के डिजाइन को भी सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई। कार्यक्रम में ओमप्रकाश द्विवेदी, प्रभुनाथ गुप्त, आरके भट्ट, हेमंत चौरसिया, संजय चाणक्य, शैलेश उपाध्याय, राजेश दुबे ‘राजू’, संतोष सिंह, अभय मिश्रा, अजय कुमार मिश्रा, अनिल कुमार पांडेय, अशोक कुमार शुक्ला, कृष्ण मोहन दीक्षित, कृष्ण मोहन पांडेय, राज सिंह सहित संगठन के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में उमड़ी भीड़, मंगलम हॉस्पिटल ने शुरू की अत्याधुनिक कैंसर सेवा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए शनिवार, का दिन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि लेकर आया। शहर के औरा-चौरी रोड स्थित मंगलम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में विशाल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इसी अवसर पर अस्पताल में अत्याधुनिक ऑन्कोलॉजी (कैंसर) विभाग का विधिवत शुभारंभ किया गया, जिससे अब देवरिया सहित आसपास के जिलों के कैंसर मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही आधुनिक उपचार की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद डॉ. शशांक मणि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के उपचार के लिए मरीजों को अब महानगरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। स्थानीय स्तर पर आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता मरीजों के समय, धन और मानसिक परेशानी—तीनों को कम करेगी। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के इस प्रयास को जनहित में सराहनीय कदम बताया।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार नवस्थापित ऑन्कोलॉजी विभाग में आधुनिक तकनीक आधारित कैंसर उपचार की सुविधाएं विकसित की गई हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में मरीजों को बेहतर परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही अस्पताल में प्रत्येक माह के दूसरे रविवार को निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर आमजन को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिया जाएगा।
कार्यक्रम में ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जी. मेहर कुमार, डॉ. आभा अग्रवाल, डॉ. मंगल सिंह, डॉ. जे.एन. पाण्डेय, मैनेजिंग डायरेक्टर एस.पी. अग्रवाल, बेला अग्रवाल, डॉ. उमाकांत पाण्डेय, डॉ. सी.पी. मल्ल, डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. एच.एस. राय सहित अनेक चिकित्सक, गणमान्य नागरिक एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
अस्पताल के सीईओ राजीव कुमार मिश्रा एवं मैनेजर सत्य प्रकाश यादव ने बताया कि अस्पताल में अनुभवी चिकित्सकों के साथ प्रशिक्षित नर्सिंग, फार्मेसी, पैथोलॉजी तथा अन्य तकनीकी स्टाफ की समर्पित टीम मरीजों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं देने के लिए निरंतर कार्यरत है। उन्होंने सभी अतिथियों, चिकित्सकों एवं शिविर में पहुंचे लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने स्वास्थ्य परीक्षण कराया तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त किया। क्षेत्रवासियों ने अस्पताल में कैंसर उपचार की नई सुविधा शुरू होने का स्वागत करते हुए इसे पूर्वांचल की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

2050 का स्वास्थ्य संकट: कैंसर बनेगा सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती?

कैंसर अब केवल वृद्धावस्था की बीमारी नहीं, कई देशों में कम आयु के लोगों में भी कैंसर के मामलों में भयंकर वृद्धि देखी जा रही है

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएच ओ) और उसकी विशेषीकृत संस्था इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) द्वारा 8 जुलाई 2026 को जारी ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन कैंसर 2026 ने पूरी दुनियाँ के नीति-निर्माताओं,वैज्ञानिकों,चिकित्सकों और आम नागरिकों को गंभीर चेतावनी दी है। यह केवल एक स्वास्थ्य रिपोर्ट नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के सामने खड़े सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का दस्तावेज़ है।रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि यदि वर्तमान जीवनशैली प्रदूषण,तंबाकू और शराब का बढ़ता सेवन,अस्वास्थ्यकर खानपान, शारीरिक निष्क्रियता तथा समय पर जांच और उपचार की कमी जारी रही,तो वर्ष 2050 तक दुनियाँ कैंसर की ऐसी लहर का सामना करेगी जिसे विशेषज्ञ “कैंसर तसुनामी” (कैंसर सुनामी) कह रहे हैं। यह सुनामी केवल अस्पतालों को नहीं,बल्कि अर्थव्यवस्था,परिवार, सामाजिक संरचना और मानव विकास को भी गहराई से प्रभावित करेगी।रिपोर्ट के अनुसार आज दुनिया में हर पाँच में से एक व्यक्ति अपने जीवनकाल में किसी न किसी प्रकार के कैंसर का सामना कर सकता है। पुरुषों में लगभग हर नौ में से एक तथा महिलाओं में लगभग हर बारह में से एक व्यक्ति की कैंसर से मृत्यु होने काजोखिम है।यदि वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही तो वर्ष 2050 तक दुनियाँ में नए कैंसर मामलों की संख्या लगभग 3.5 करोड़ प्रतिवर्ष तक पहुँच सकती है, जो वर्तमान स्तर की तुलना में लगभग दोगुनी होगी।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यदि रिपोर्ट की आशंका सही निकली तो इसका अर्थ है कि आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य प्रणालियों पर अभूतपूर्व दबाव पड़ेगा,उपचार की लागत कई गुना बढ़ेगी और लाखों परिवार आर्थिक रूप से टूट सकते हैं।रिपोर्ट यह भी बताती है कि कैंसर केवल चिकित्सा विज्ञान की चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता का भी दर्पण है। उच्च आय वाले देशों में आधुनिक जांच, अत्याधुनिक उपचार, कैंसर स्क्रीनिंग और बीमा सुविधाओं के कारण रोगियों के बचने की संभावना अधिक हैजबकि निम्न और मध्यम आय वाले देशों में देर से पहचान, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, महंगी दवाएँ, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी तक सीमित पहुँच तथा आर्थिक असमानताओं के कारण मृत्यु दर कहीं अधिक है। यही कारण है कि वैज्ञानिक इसे केवल स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि स्वास्थ्य न्याय का भी प्रश्न मान रहे हैं। 

साथियों बात अगर हम भारत के संदर्भ में रिपोर्ट की चेतावनी को समझने की करें तो यह और भी महत्वपूर्ण है। डब्ल्यूएचओ- आईएआरसी के अनुमानों के अनुसार भारत में हर 10 में से लगभग 1 व्यक्ति को 75 वर्ष की आयु से पहले कैंसर होने का जोखिम है। इसके साथ ही लगभग हर 100 में से 7 व्यक्तियों की 75 वर्ष की आयु से पहले कैंसर से मृत्यु होने की आशंका व्यक्त की गई है। यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो अगले 25 वर्षों में भारत में हर वर्ष सामने आने वाले कैंसर मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो सकती है। यह स्थिति केवल स्वास्थ्य मंत्रालय ही नहीं बल्कि पूरे शासन तंत्र,उद्योग, शिक्षा, पर्यावरण कृषि और समाज के लिए गंभीर चेतावनी है। 

साथियों विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। बदलती जीवनशैली, फास्ट फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन का बढ़ता उपयोग,मोटापा,शारीरिक गतिविधियों में कमी,धूम्रपान और तंबाकू सेवन,शराब का बढ़ताचलन वायु प्रदूषण,जल और मिट्टी में रासायनिक प्रदूषण औद्योगिक रसायनों का संपर्क, संक्रमण, मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या तथा बढ़ती आयु ये सभी मिलकर कैंसर के खतरे को बढ़ा रहे हैं। साथ ही बेहतर जांच तकनीकों और अधिक स्क्रीनिंग के कारण भी अब पहले की तुलना में अधिक मामलों का पता चल रहा है।ग्लोबकान के नवीनतम अनुमानों के अनुसार भारत में स्तन कैंसर, मुख कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर तेजी से बढ़ रहे हैं। पुरुषों में तंबाकू से जुड़े कैंसर विशेष रूप से अधिक हैं, जबकि महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच जागरूकता तथा उपचार की उपलब्धता में भी सटीकता से  बड़ा अंतर दिखाई देता है। 

साथियों, रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लगभग 40 प्रतिशत कैंसर मामलों को रोका जा सकता है। इसका अर्थ है कि यदि समाज जीवनशैली में सुधार करे, तंबाकू और शराब के सेवन में कमी लाए, संतुलित भोजन अपनाए, नियमित व्यायाम करे, मोटापे पर नियंत्रण रखे, प्रदूषण कम किया जाए,हेपेटाइटिस-बी और एचपीवी जैसे टीकाकरण कार्यक्रम मजबूत हों तथा समय पर स्क्रीनिंग और जांच कराई जाए, तो लाखों लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। अर्थात कैंसर पूरी तरह भाग्य का खेल नहीं है; इसका बड़ा हिस्सा रोकथाम योग्य है।रिपोर्ट समयपूर्व मृत्यु को भी गंभीर चिंता का विषय बताती है। कैंसर अब केवल वृद्धावस्था की बीमारी नहीं रह गया है। कई देशों में कम आयु के लोगों में भी कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।इससेकार्यशील आयु वर्ग प्रभावित होता है, उत्पादकता घटती है, परिवारों की आय कम होती है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ पड़ता है।कैंसर के कारण होने वाली प्रत्यक्ष चिकित्सा लागत के साथ-साथ अप्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान जैसे रोजगार का नुकसान, देखभाल का खर्च और उत्पादक श्रम-घंटों की हानि वैश्विक अर्थव्यवस्था को खरबों डॉलर का नुकसान पहुँचा सकते हैं। 

साथियों, रिपोर्ट यह भी स्वीकार करती है कि वैज्ञानिक प्रगति तेज़ी से हुई है।आधुनिक इम्यूनोथेरेपी, लक्षित उपचार जीन आधारित चिकित्सा,कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निदान तथा प्रिसिजन मेडिसिन जैसी तकनीकों ने कैंसर उपचार में नई संभावनाएँ पैदा की हैं। लेकिन इन प्रगतियों का लाभ अभी भी दुनिया की बहुत बड़ी आबादी तक समान रूप से नहीं पहुँच पा रहा है।यही असमानता वैश्विक स्वास्थ्य नीति की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।रिपोर्ट भविष्य के लिए तीन प्रमुख रणनीतिक परिवर्तन सुझाती है,बेहतर क्षमताएँ, बेहतर सुरक्षा, और बेहतर मूल्य। इनका उद्देश्य स्वास्थ्य प्रणालियों को अधिक सक्षम बनाना, रोकथाम और प्रारंभिक पहचान को मजबूत करना, गुणवत्तापूर्ण उपचार सबके लिए सुलभ बनाना तथा सीमित संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके साथ सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, स्वास्थ्य संस्थानों और नागरिक समाज के लिए सात प्रमुख सिफारिशें भी दी गई हैं, जिनमें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, मजबूत कैंसर रजिस्ट्रियाँ, अनुसंधान, प्रशिक्षित मानव संसाधन, जन-जागरूकता, समान उपचार उपलब्धता और प्रभावित समुदायों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष बल दिया गया है। 

साथियों,भारत के लिए यह रिपोर्ट एक अवसर भी है। आयुष्मान भारत,स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र,राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम,डिजिटल स्वास्थ्य मिशन, एचपीवी टीकाकरण,तंबाकू नियंत्रण अभियान, स्क्रीनिंग कार्यक्रम और कैंसर उपचार सुविधाओं का विस्तार यदि तेज़ गति से लागू किया जाए, तो आने वाले वर्षों में लाखों लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। साथ ही स्कूल स्तर से स्वास्थ्य शिक्षा, स्वच्छ पर्यावरण,पौष्टिक भोजन,नियमित व्यायाम और नशामुक्त जीवनशैली को राष्ट्रीय जनआंदोलन बनाना समय की आवश्यकता है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि यह रिपोर्ट पूरी मानवता के लिए स्पष्ट संदेश देती है कि कैंसर का भविष्य पहले से तय नहीं है।यदि सरकारें,वैज्ञानिक, चिकित्सक उद्योग,नागरिक समाज और प्रत्येक नागरिक मिलकर रोकथाम, प्रारंभिक पहचान और समान उपचार की दिशा में कार्य करें, तो संभावित कैंसर सुनामी को काफी हद तक रोका जा सकता है।लेकिन यदि चेतावनियों को अनदेखा किया गया,तो 2050 तक कैंसर केवल एक बीमारी नहीं,बल्कि वैश्विक विकास, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक कल्याण के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन जाएगा।अस्वीकरण:यह लेखसार्वजनिक जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है।स्वास्थ्य संबंधी सलाह,जांच या उपचार के लिए योग्य चिकित्सक या कैंसर विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें,जानकारी में त्रुटियाँ संभव हैँ।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

राप्ती ईको पार्क में वृक्षारोपण का महाअभियान 5,567 पौधे रोपे गए

एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत हरित गोरखपुर का संकल्प

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
नगर निगम गोरखपुर द्वारा रविवार को राप्ती ईको पार्क (एकला बांध) पर “एक पेड़ माँ के नाम” थीम के अंतर्गत विशाल वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। कार्यक्रम में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव और नगर आयुक्त अजय जैन ने स्वयं पौधरोपण कर अभियान की शुरुआत की और हरित व स्वच्छ गोरखपुर बनाने का संकल्प दोहराया।
इस दौरान ईको पार्क परिसर में विभिन्न प्रजातियों के कुल 5,567 पौधे रोपे गए। अभियान में नगर निगम की टीम, सामाजिक संस्थाओं, पर्यावरणविदों, पार्षदों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। खास बात यह रही कि सफाई निरीक्षक, मुख्य सफाई निरीक्षक और सफाई मित्रों ने भी श्रमदान कर अभियान को सफल बनाया।
कार्यक्रम में अपर नगर आयुक्त गौरव रंजन श्रीवास्तव व प्रमोद कुमार, अधिशासी अभियंता, निर्माण विभाग के अधिकारी तथा जोनल अधिकारी अविनाश प्रताप सिंह, ओम प्रकाश यादव व अनुष्का सिंह समेत नगर निगम की पूरी टीम मौजूद रही।

नगर निगम के अनुसार इस वृक्षारोपण का उद्देश्य राप्ती ईको पार्क को एक विकसित ‘ग्रीन जोन’ के रूप में स्थापित करना है। रोपे गए पौधों के संरक्षण और देखभाल के लिए विशेष व्यवस्था भी की गई है।

महापौर ने कहा कि यह अभियान केवल पौधरोपण नहीं, बल्कि पर्यावरण और मातृत्व के प्रति सम्मान का प्रतीक है। वहीं नगर आयुक्त ने सभी के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि जनभागीदारी के बल पर गोरखपुर को स्वच्छ व हरित शहर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शहर के सभी 80 वार्डों में भी वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है और नगर निगम अपने 65 हजार पौधरोपण के लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

करमैनी-बेलौली तटबंध पर बाढ़ तैयारियों का एडीएम ने लिया जायजा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। मानसून के बीच संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सत्य प्रकाश ने मेंहदावल तहसील क्षेत्र में राप्ती नदी के दाहिने तट पर स्थित करमैनी-बेलौली तटबंध का स्थलीय निरीक्षण कर बाढ़ सुरक्षा कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को तटबंधों की सतत निगरानी रखने और हर परिस्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध रखने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान ड्रेनेज खंड-2 के अंतर्गत संचालित नई बाढ़ परियोजनाओं एवं बाढ़ पूर्व तैयारियों का अवलोकन किया गया। एडीएम ने नवगों, बढ़या ठाठर और बेलौली स्थित बाढ़ चौकियों के स्टोर का निरीक्षण किया। यहां खाली सीमेंट की बोरियां, नायलॉन क्रेट, ईंट रोड़ा, गिट्टी, मोरंग तथा अन्य आवश्यक सामग्रियों का पर्याप्त भंडारण मिला।
उन्होंने अधिशासी अभियंता अजय कुमार, सहायक अभियंता मनीष राय एवं जूनियर इंजीनियरों से तटबंध पर चल रहे कार्यों की जानकारी लेते हुए संवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील स्थलों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए। साथ ही किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए सभी सुरक्षात्मक उपाय पहले से सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि बाढ़ की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
निरीक्षण के दौरान उप जिलाधिकारी मेंहदावल अरुण कुमार सहित सिंचाई एवं राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

एक पेड़ माँ के नाम महाअभियान के तहत पुलिस लाइन्स में हुआ वृक्षारोपण

एसएसपी समेत पुलिस अधिकारियों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, हर नागरिक से एक पौधा लगाने की अपील

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l “एक पेड़ माँ के नाम” वृक्षारोपण महाअभियान-2026 के तहत रविवार को पुलिस लाइन्स, गोरखपुर में भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर, पुलिस अधीक्षक नगर, पुलिस अधीक्षक यातायात सहित अन्य पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों ने परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने, उनकी नियमित देखभाल करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संकल्प दिलाया। साथ ही जैव विविधता के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संतुलन और हरित वातावरण के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया।
अधिकारियों ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान की भावनात्मक अपील को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी है, बल्कि मातृ सम्मान और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का भी प्रतीक है। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपनी माँ के नाम पर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल कर उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित रखें।
कार्यक्रम में मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पौधारोपण कर हरित गोरखपुर के निर्माण का संकल्प लिया। इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जागरूकता भी फैलाई गई, ताकि समाज के प्रत्येक वर्ग को इस अभियान से जोड़ा जा सके।

जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य पर एमएमटीटीसी का शॉर्ट टर्म प्रोग्राम आज से

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) की ओर से 13 जुलाई 2026 से “जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा एवं जनस्वास्थ्य” विषय पर आधारित शॉर्ट टर्म प्रोग्राम का ऑनलाइन शुभारंभ होगा। उद्घाटन सत्र पूर्वाह्न 11:30 बजे आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टंडन करेंगी, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे।
एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नई शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप शिक्षकों को सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के प्रति जागरूक, संवेदनशील और उत्तरदायी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य जैसे समकालीन विषयों पर प्रशिक्षण से शिक्षकों के ज्ञान, कौशल और दृष्टिकोण का विकास होगा तथा वे समाज और पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत लक्ष्य-2 (जीरो हंगर), लक्ष्य-3 (अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण) और लक्ष्य-13 (जलवायु कार्रवाई) पर केंद्रित है। कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और सतत विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देंगे।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से 75 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को वैश्विक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाते हुए उनके शिक्षण, शोध और विस्तार गतिविधियों में सतत विकास की अवधारणा को प्रभावी रूप से शामिल करना है।
शॉर्ट टर्म प्रोग्राम के कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. राकेश पाण्डेय (सहायक आचार्य, वनस्पति विज्ञान विभाग) हैं, जबकि कार्यक्रम के संयोजक प्रो. अनिल द्विवेदी हैं।

बीबीएयू में ‘वृक्षारोपण महायज्ञ 2026’ के तहत लगाए गए 8,500 पौधे, प्रदेश भाजपाध्यक्ष पंकज चौधरी ने किया शुभारंभ

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार, वन विभाग, मिशन लाइफस्टाइल फॉर इनोवेशन और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘वृक्षारोपण महायज्ञ 2026’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी रहे। इस अवसर पर सरोजिनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह, कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल और लखनऊ के मंडल वन अधिकारी शितांशु पाण्डेय भी मौजूद रहे।
केंद्रीय राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण प्रत्येक नागरिक की मूल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने ‘एक पेड़ मां के नाम’ और स्वच्छता जैसे अभियानों को जनभागीदारी का सशक्त माध्यम बताते हुए सभी से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया।
विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार का व्यापक वृक्षारोपण अभियान आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में जनआंदोलन बताया।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि बीबीएयू का ग्रीन कैंपस और समृद्ध जैव विविधता उसकी विशेष पहचान है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में पीएचडी में प्रवेश लेने वाले प्रत्येक शोधार्थी के लिए एक पौधा लगाना अनिवार्य किया गया है तथा शोध प्रबंध जमा करते समय उस पौधे के साथ जियो-टैग फोटो भी प्रस्तुत करनी होती है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी का अभियान बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर स्थित ‘समरस वन’ में अतिथियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और वन विभाग के अधिकारियों ने सामूहिक रूप से पौधारोपण किया। इस दौरान लगभग 8,500 पौधे लगाए गए, जिनमें आम, नीम, अमरूद, जामुन, मौसमी, सहजन सहित विभिन्न फलदार और छायादार प्रजातियां शामिल रहीं।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने पर्यावरण संरक्षण विषयक फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा अवध वन प्रभाग द्वारा प्रकाशित कॉफी टेबल बुक का लोकार्पण भी किया। उन्होंने स्कूली बच्चों और अभिभावकों को आम एवं सहजन के पौधों का वितरण किया तथा चित्रकला और फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम में बच्चों ने गणेश वंदना पर सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी।
वृक्षारोपण अभियान को सफल बनाने में एनसीसी कैडेट्स और वनस्पति उद्यान के प्रभारी डॉ. रवि शंकर वर्मा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी, वन विभाग के अधिकारी, अभिभावक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

वृक्ष लगाना सेवा, उसका संरक्षण साधना: चारु चौधरी

संतकबीरनगर में 29.78 लाख पौधों का रोपण

संतकबीरनगर(राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारु चौधरी ने कहा कि “वृक्ष लगाना सेवा है और उसका संरक्षण साधना है।” उन्होंने विकासखंड बघौली के ग्राम बरईपार में हरिशंकरी (पीपल, पाकड़ और बरगद) का पौधा रोपित कर ‘एक पेड़ मां के नाम’ थीम पर आधारित वृक्षारोपण महायज्ञ-2026 का शुभारंभ किया। अभियान के तहत जनपद में वन विभाग सहित विभिन्न विभागों के सहयोग से 29.78 लाख पौधों का रोपण किया गया।
कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष नीतू सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव, मेंहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी, जिलाधिकारी आलोक कुमार तथा मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी उपस्थित रहे। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष ने पाकड़, विधायक ने आम तथा जिलाधिकारी ने अमरूद का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
उपाध्यक्ष चारु चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेशभर में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भावी पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण देने का संकल्प भी है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और युवाओं से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का आह्वान किया।
भाजपा जिलाध्यक्ष नीतू सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पौधों का संरक्षण ही वृक्षारोपण अभियान की वास्तविक सफलता है।
मेंहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि वृक्ष पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ वातावरण देने के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण आवश्यक है।
जिलाधिकारी आलोक कुमार ने जनपदवासियों से वृक्षारोपण अभियान को जनआंदोलन बनाने की अपील करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को पौधे लगाने के साथ-साथ दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और अन्य नागरिकों को आम एवं सहजन के पौधे उपहार स्वरूप वितरित किए गए। वहीं, जनपद की सभी तहसीलों, विकासखंडों, ग्राम पंचायतों, विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों तथा अन्य सरकारी संस्थानों में भी वृक्षारोपण किया गया।
इस अवसर पर प्रभागीय वनाधिकारी हरिकेश यादव, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार प्रभात द्विवेदी, उपजिलाधिकारी हृदय राम तिवारी, जिला पंचायत सदस्य हनुमान कनौजिया, जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र, खंड विकास अधिकारी अर्जित प्रकाश सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।