Tuesday, April 7, 2026
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बाढ़ राहत में भ्रष्टाचार का भंडाफोड़: तहसील से तंत्र तक हिल गया सिस्टम

भ्रष्टाचार कोविड महामारी या कैंसर से भी अधिक खतरनाक बीमारी है, क्योंकि यह धीरे-धीरे पूरे तंत्र को अंदर से खोखला कर देता है

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में शासन- प्रशासन की विश्वसनीयता का सबसे महत्वपूर्ण आधार जनता का विश्वास होता है।जब यह विश्वास कमजोर पड़ता है,तब केवल व्यवस्था ही नहीं,बल्कि लोकतंत्र की आत्मा भी आहत होती है। हाल ही में संसद के दोनों सदनों द्वारा इसी पृष्ठभूमि में पारित जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 एक ऐतिहासिक और संरचनात्मक सुधार के रूप में सामने आया है।यह केवल एक विधायी परिवर्तन नहीं,बल्कि शासन की सोच में बदलाव का प्रतीक है,जहां दंड आधारित नियंत्रण से हटकर विश्वास आधारित अनुपालन की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।परंतु मेरे 45 साल के मीडिया अनुभव व 15 साल के अधिवक्ता अनुभव में शायद पहली बार हाल ही में मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला में सामने आया बाढ़ राहत घोटाला इसी विश्वास पर एक गंभीर प्रहार था,लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इस मामले में जिस प्रकार की कठोर और व्यापक प्रशासनिक कार्रवाई की गई,उसने पूरे देश में एक नई उम्मीद जगाई है। यह घटना केवल एक सटीक घोटाले की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस निर्णायक मोड़ का संकेत है जहां से भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध वास्तविक और प्रभावी लड़ाई की शुरुआत हो सकती है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि इस पूरे मामले में सबसे सराहनीय भूमिका जिला कलेक्टर की रही, विशेष रूप से उनके द्वारा दिखाई गई दृढ़ इच्छाशक्ति की। कलेक्टर ने न केवल इस घोटाले की गहन जांच करवाई,बल्कि 18 पटवारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देकर एक स्पष्ट संदेश दिया कि भ्रष्टाचार के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक नैतिक घोषणा थी कि अब व्यवस्था में ईमानदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही विभागीय जांच के आदेश और नौकरी से बर्खास्तगी की सिफारिश ने यह सुनिश्चित किया कि दोषियों को हर स्तर पर जवाबदेह ठहराया जाएगा। पूरे भारतवर्ष में अनेकों सरकारी कर्मचारियों पर कुछ अपवाद छोड़कर अगर हम संज्ञान लें तो एक सामाजिक पहलू भी है, जिस पर ध्यान देना आवश्यक है।अक्सर देखा जाता है कि सरकारी कर्मचारियों की जीवनशैली उनके आधिकारिक वेतन से कहीं अधिक उच्च होती है, जिससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि अतिरिक्त आय के स्रोत क्या हैं। यदि इस दिशा में नियमित निगरानी और संपत्ति का ऑडिट किया जाए, तो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है। श्योपुर की घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब केवल सतही सुधारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि गहराई में जाकर व्यवस्था को बदलना होगा। मेरा यह आर्टिकल मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर लिखा गया है। 

अगर हम भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की इस ऐतिहासिक घटना को समझने की करें तो, वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में आई भीषण बाढ़ ने हजारों किसानों और ग्रामीणों को प्रभावित किया। प्राकृतिक आपदा के बाद राज्य सरकार द्वारा राहत के रूप में करोड़ों रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई थी। इस राहत पैकेज में चार प्रमुख श्रेणियां थीं-फसल नुकसान, मकान क्षति, मवेशियों की हानि और अन्य सामान्य सहायता। यह राशि उन लोगों के लिए जीवनरेखा थी, जिनकी आजीविका पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी। लेकिन दुर्भाग्यवश, इसी संवेदनशील व्यवस्था में भ्रष्टाचार का ऐसा जाल बुना गया, जिसने न केवल पीड़ितों को उनके अधिकार से वंचित किया,बल्कि प्रशासनिक तंत्र की साख पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया।जांच में सामने आया कि लगभग 960 किसानों के लिए स्वीकृत राहत राशि में से 794 वास्तविक लाभार्थियों को दरकिनार कर दिया गया और उनकी जगह 87 अपात्र व्यक्तियों के 127 बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर कर दिया गया।यह पूरा घोटाला करीब 5 करोड़ रुपये का था। इस संगठित भ्रष्टाचार में निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर उच्च अधिकारियों तक की संलिप्तता स्पष्ट रूप से सामने आई। इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जिनपर आरोप है कि उन्होंने बिना समुचित जांच के फर्जी लाभार्थियों को मंजूरी दी। परिणामस्वरूप उन्हें निलंबित किया गया और बाद में जेल भी भेजा गया।  पूरे देश में शायद पहली बार कलेक्टर की हिम्मत और चौंकाने वाली कार्रवाई को समझने की करें तो, इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब यह स्पष्ट हुआ कि फर्जी लाभार्थियों की सूची तैयार करने में 18 पटवारियों की सीधी भूमिका थी।पटवारी,जो ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माने जाते हैं और जिनका सीधा संपर्क किसानों से होता है,उन्हीं के द्वारा इस प्रकार की धोखाधड़ी ने पूरे सिस्टम की जड़ों को हिला दिया। इन पटवारियों ने न केवल फर्जी सर्वे तैयार किए, बल्कि अपने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में सरकारी धन ट्रांसफर करवा दिया। यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि सामाजिक नैतिकता और सरकारी जिम्मेदारी का खुला उल्लंघन था। 

अगर हम इस प्रकरण की पूरे भारत ही नहीं वैश्विक स्तरपर गूँज की करें तो, इस कार्रवाई का प्रभाव केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहा,बल्कि पूरे देश के प्रशासनिक तंत्र में एक हलचल पैदा कर दी। पहली बार ऐसा देखने को मिला कि एक ही तहसील के इतने बड़े पैमाने पर पटवारियों के खिलाफ एक साथ कार्रवाई की गई हो। यह घटना उन लाखों ईमानदार सरकारी कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा है, जो व्यवस्था में सुधार लाना चाहते हैं, लेकिन अक्सर दबाव और भय के कारण चुप रहते हैं।भ्रष्टाचार को यदि एक बीमारी माना जाए, तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह कोविड महामारी या कैंसर से भी अधिक खतरनाक है, क्योंकि यह धीरे-धीरे पूरे तंत्र को अंदर से खोखला कर देता है इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण केवल व्यक्तिगत लालच नहीं, बल्कि सामूहिक मिलीभगत है, जिसमें निचले स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक एक श्रृंखला बन जाती है। श्योपुर का मामला इसी सच्चाई को उजागर करता है कि जब तक इस पूरी श्रृंखला को तोड़ा नहीं जाएगा, तब तक भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। 

साथियों बात अगर हम पूरे भारत में कलेक्टरों द्वारा स्वत संज्ञान लेकर इस प्रकार की कार्रवाई को प्राथमिकता देने की करें तो, इस संदर्भ में सभी राज्यों के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे इस मामले से सबक लें और अपने-अपने क्षेत्रों में इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई करें। सबसे पहला कदम डिजिटल सत्यापन की दिशा में होना चाहिए। राहत राशि और अन्य सरकारी योजनाओं के वितरण में आधार-लिंक्ड बैंक खातों का उपयोगअनिवार्य किया जाना चाहिए और लाभार्थियों की सूची को सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी।दूसरा महत्वपूर्ण उपाय स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा थर्ड पार्टी ऑडिट है। जब तक जांच पूरी तरह निष्पक्ष और बाहरी एजेंसी द्वारा नहीं की जाएगी, तब तक आंतरिक मिलीभगत के कारण सच्चाई सामने आना कठिन रहेगा। श्योपुर मामले में भी जब ऑडिट हुआ, तभी यह घोटाला उजागर हो पाया।तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है कठोर जवाबदेही। केवल निलंबन या स्थानांतरण से भ्रष्टाचार नहीं रुकता, बल्कि इसके लिए सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। श्योपुर में जिस प्रकार से अभियोजन की मंजूरी दी गई और गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हुई, वह एक आदर्श उदाहरण है। इससे यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार करने वालों को केवल प्रशासनिक दंड ही नहीं, बल्कि कानूनी परिणाम भी भुगतने होंगे। इसके अतिरिक्त ग्राम सभाओं के माध्यम से लाभार्थियों की सूची का सत्यापन भी एक प्रभावी उपाय हो सकता है। स्थानीय स्तर पर लोगों को शामिल करने सेपारदर्शिता बढ़ती है और गलत लाभार्थियों की पहचान आसानी से हो सकती है। यह लोकतंत्र के विकेंद्रीकरण की भावना के अनुरूप भी है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला और उस पर हुई कार्रवाई भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह केवल एक जिले की घटना नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी और एक अवसर दोनों है। चेतावनी इसलिए कि यदि भ्रष्टाचार को समय रहते नहीं रोका गया, तो यह व्यवस्था को पूरी तरह खोखला कर देगा, और अवसर इसलिए कि यदि इसी प्रकार की सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई देशभर में की जाए,तो एक स्वच्छ और पारदर्शी प्रशासन की स्थापना संभव है।आज आवश्यकता इस बात की है कि हर राज्य, हर जिला और हर तहसील इस घटना से प्रेरणा ले और अपने स्तर पर सुधार की प्रक्रिया शुरू करे। यदि ऐसा होता है, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत वास्तव में एक भ्रष्टाचार-मुक्त राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

भागवत कथा में शुकदेव-परीक्षित संवाद और भक्ति का महत्व बताया गया

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। नगर के रुद्रपुर स्टैंड पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को कथा व्यास आचार्य राघवेंद्र ने शुकदेव द्वारा परीक्षित को दिए गए उपदेशों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने आसन, श्वास, संग और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखते हुए बुद्धि के माध्यम से मन को भगवान के स्थूल रूप में लगाने की महत्ता बताई।

कथा के दौरान सृष्टि क्रम का वर्णन करते हुए ब्रह्मा की संकल्प सृष्टि, चार ऋषियों की उत्पत्ति, दस ऋषियों का प्राकट्य, छाया से कर्दम, वाणी से सरस्वती, वाम भाग से सतरूपा और दक्षिण भाग से मनु की उत्पत्ति का प्रसंग सुनाया गया। मनु की संतानों में देवहूति, आकूति, प्रसूति, उतानपाद और प्रियव्रत का उल्लेख करते हुए उनके जीवन प्रसंगों को विस्तार से बताया गया।

देवहूति और कर्दम के विवाह तथा कपिल भगवान के जन्म, सांख्य दर्शन के उपदेश, आकूति और रुचि प्रजापति, प्रसूति और दक्ष प्रजापति के विवाह, सती और शिव विवाह तथा दक्ष यज्ञ विध्वंस जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इसके साथ ही ध्रुव चरित्र, अंग, वेन, पृथु, प्राचीनबरही, प्रियव्रत, ऋषभ और जड़भरत की कथाओं के माध्यम से जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला गया।

कथा में अजामिल, वृत्रासुर और प्रह्लाद के प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया गया कि हर परिस्थिति में भक्ति और समभाव बनाए रखना चाहिए। भगवान के दरबार में जाति-पाति या पद का कोई भेदभाव नहीं होता, सभी समान हैं।

कार्यक्रम में यजमान विवेकानंद तिवारी, उषा तिवारी, डॉ अजय मिश्र, डॉ प्रदीप मिश्र, रामेश्वर यादव, सोनकर, बलभद्र तिवारी, राजेन्द्र सिंह, हृदयेश तिवारी, श्रीराम वर्मा, शिवशंकर जायसवाल, अशोक सोनकर, विजयकांत मिश्र, रमेश तिवारी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजक अभयानंद तिवारी ने सभी कथा प्रेमियों का आभार व्यक्त किया।

अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट का आरोपी गिरफ्तार

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के थाना कोतवाली हाटा पुलिस ने अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में वांछित एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 6 अप्रैल 2026 को की गई।
पुलिस के अनुसार मुकदमा संख्या 132/2026 के तहत धारा 137(2), 352, 87, 64(1) बीएनएस एवं 3/4 पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान दीपक कुमार पुत्र राजाराम बांसफोर निवासी वार्ड नंबर 05 कस्बा सुकरौली, सरदार पटेल नगर, थाना कोतवाली हाटा, जनपद कुशीनगर के रूप में हुई है।
आरोपी की गिरफ्तारी थाना कोतवाली हाटा पुलिस टीम द्वारा की गई। टीम में प्रभारी निरीक्षक संजय दूबे, उपनिरीक्षक चंद्रभूषण पाण्डेय, कांस्टेबल सतीश सिंह और कांस्टेबल अमरजीत कुमार शामिल रहे। पुलिस ने आरोपी को आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद न्यायालय भेज दिया है।

10 अप्रैल से तीन पालियों में होंगी सम सेमेस्टर परीक्षाएं

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में सत्र 2025-26 के अंतर्गत सेमेस्टर प्रणाली के तहत स्नातक एवं स्नातकोत्तर सम सेमेस्टर (द्वितीय सेमेस्टर को छोड़कर) के संस्थागत एवं बैक पेपर के अर्ह विद्यार्थियों की परीक्षाएं 10 अप्रैल 2026 से प्रारम्भ होंगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार परीक्षा की विस्तृत समय सारणी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। सभी छात्र-छात्राओं को निर्देशित किया गया है कि वे समय सारणी का अवलोकन कर अपनी तैयारियां सुनिश्चित करें।
परीक्षाएं प्रतिदिन तीन पालियों में आयोजित की जाएंगी। प्रथम पाली प्रातः 08:00 बजे से 09:30 बजे तक, द्वितीय पाली 11:30 बजे से 01:00 बजे तक तथा तृतीय पाली अपराह्न 02:00 बजे से 03:30 बजे तक संचालित की जाएगी। स्नातक (चतुर्थ एवं षष्ठम सेमेस्टर) तथा स्नातकोत्तर कक्षाओं की परीक्षाएं निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सम्पन्न कराई जाएंगी।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने सभी परीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विद्यार्थी आत्मविश्वास एवं अनुशासन के साथ परीक्षा में सम्मिलित हों। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी छात्र-छात्राएं उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाएंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी सम्बद्ध महाविद्यालयों एवं परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, जिससे परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष एवं सुचारु रूप से सम्पन्न हो सके।

भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस पर सेवा, समर्पण और राष्ट्र प्रथम का संकल्प दोहराया

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर जिला कार्यालय पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें पार्टी के प्रेरणास्रोत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम जिलाध्यक्ष नीतू सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने पार्टी की 47 वर्षों की सेवा, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण की यात्रा को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी विश्व के सबसे बड़े सेवा संगठन के रूप में निरंतर समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए कार्य कर रही है।
इस अवसर पर कार्यकर्ताओं को स्थापना दिवस की बधाई देते हुए ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प को और अधिक सशक्त करने का आह्वान किया गया। साथ ही सेवा और समर्पण की भावना के साथ निरंतर कार्य करते रहने की प्रेरणा दी गई।
इस अवसर पर खलीलाबाद के विधायक अंकुर राज तिवारी, धनघटा के विधायक गणेश चौहान, मेहदावल के विधायक अनिल त्रिपाठी, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि नित्यानंद जी, नामित सभासद गौरव निषाद, सतविंदर पाल सिंह जज्जी, अमर राय, डॉक्टर सत्यपाल पाल, रुद्रनाथ मिश्र, गणेश पाण्डेय, मुकेश गौड़ सहित जिला पदाधिकारीगण एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

बलिया जनपद में किसानों के हित में चलाए जा रहे फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)

जनपद में किसानों के हित में चलाए जा रहे फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान को तेज करने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने गंगा बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 6 अप्रैल से 15 अप्रैल तक सभी ग्राम पंचायतों में विशेष कैंप लगाकर इस अभियान को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उनका लक्ष्य है कि अप्रैल माह के भीतर ही शत-प्रतिशत फॉर्मर रजिस्ट्री सुनिश्चित कर ली जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए जनपद, तहसील और ब्लॉक स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। इन कंट्रोल रूम के माध्यम से हर दो घंटे में प्रगति रिपोर्ट ली जाएगी, ताकि कार्य की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और आवश्यकतानुसार तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि कैंप की जानकारी पहले से ही ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधियों को दे दी जाए, जिससे अधिक से अधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।किसानों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए प्रशासन ने जमीनी स्तर पर भी विशेष रणनीति बनाई है। जिलाधिकारी ने सफाई कर्मियों, आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और कोटेदारों की मदद लेने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को कैंप स्थल तक लाने में सहयोग मिल सके। इससे ग्रामीण स्तर पर जागरूकता भी बढ़ेगी और अधिक संख्या में किसान रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।बैठक में जिलाधिकारी ने लेखपालों को विशेष रूप से सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के नाम खतौनी में गलत दर्ज हैं या जिनके अंश निर्धारण में त्रुटि है, उन्हें तुरंत ठीक किया जाए। यदि ये त्रुटियां समय रहते ठीक नहीं की गईं, तो फॉर्मर रजिस्ट्री में बाधा उत्पन्न हो सकती है और किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए राजस्व विभाग को इस दिशा में तेजी और सटीकता के साथ कार्य करने को कहा गया है। इसके अलावा, जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि जिन गांवों में अब तक फॉर्मर रजिस्ट्री की प्रगति धीमी है, वहां विशेष ध्यान दिया जाए और प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे पूरी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम करते हुए 15 अप्रैल तक अधिकतम लक्ष्य हासिल करने का प्रयास करें।
इस समीक्षा बैठक में मुख्य राजस्व अधिकारी, समस्त एसडीएम, बीडीओ, लेखपाल, उप कृषि निदेशक सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन की इस मेगा योजना से उम्मीद है कि जिले के सभी किसानों को समय पर रजिस्ट्री का लाभ मिल सकेगा और उन्हें भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

आंगनबाड़ी सहायिका चयन में पारदर्शिता बढ़ाने की पहल, 152 अभ्यर्थिनियां पात्

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

जिले में आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पदों पर चल रही चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से सोमवार को गंगा ऑडिटोरियम हॉल में विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विकास खंड बॉसडीह, बेरूआरवारी एवं बैरिया की सभी आवेदिकाओं को आमंत्रित किया गया।कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी, उपायुक्त श्रम रोजगार मनरेगा, जिला कार्यक्रम अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति रही। अधिकारियों ने शासनादेश दिनांक 17 सितंबर 2025 के तहत निर्धारित चयन मानदंडों की विस्तृत जानकारी आवेदिकाओं को दी।इसके बाद प्राप्त आवेदनों का लाइव प्रस्तुतीकरण किया गया तथा केंद्रवार चयनित अभ्यर्थिनियों की सूची सभी के सामने साझा की गई, जिससे प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा सके। बैठक के दौरान आवेदिकाओं द्वारा उठाई गई आपत्तियों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।जांच के दौरान कुछ अनियमितताओं की आशंका के चलते विकास खंड बॉसडीह के 4 तथा बैरिया के 2 आंगनबाड़ी केंद्रों पर चयन प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है।
पूरी प्रक्रिया के बाद बॉसडीह में 50, बेरूआरवारी में 45 और बैरिया में 57 अभ्यर्थिनियां पात्र पाई गईं। इस प्रकार कुल 152 अभ्यर्थिनियों को चयन के लिए योग्य माना गया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और शिकायत-मुक्त बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न उत्पन्न

सीसी रोड निर्माण में लापरवाही, पांच दिनों से रास्ता बंद, राहगीर परेशान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के सेमरियावां ब्लॉक क्षेत्र के बूधा खुर्द चौराहे पर सीसी रोड निर्माण कार्य में लापरवाही सामने आई है। ठेकेदार द्वारा पिछले पांच दिनों से मार्ग को बाधित कर दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण के बाद उसकी उचित देखरेख (तराई आदि) भी नहीं की गई है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। रास्ता बंद होने के कारण आसपास के गांवों के लोगों को लंबा चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों में इसको लेकर आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मार्ग को सुचारु कराने और निर्माण कार्य की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।

झोपड़ी पर बुलडोज़र लेकिन मॉल पर खामोशी क्यों?- डॉ सत्यवान सौरभ

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हरियाणा (राष्ट्र की परम्परा)
भारत के शहरों में अतिक्रमण कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन जिस तरह से इस पर कार्रवाई की जाती है, वह एक बड़े सामाजिक और प्रशासनिक असंतुलन की ओर इशारा करती है। हर कुछ दिनों में खबरें आती हैं कि कहीं झुग्गियाँ तोड़ी गईं, कहीं रेहड़ी-पटरी वालों को हटाया गया, कहीं फुटपाथ खाली कराए गए। यह सब कानून के दायरे में उचित भी हो सकता है, क्योंकि सार्वजनिक स्थानों पर अवैध कब्जा किसी भी शहर के सुव्यवस्थित विकास में बाधा बनता है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या अतिक्रमण केवल उन्हीं तक सीमित है, जिनकी आवाज़ सबसे कमजोर है?
यदि हम ईमानदारी से अपने शहरों को देखें, तो पाएंगे कि अतिक्रमण का दायरा कहीं अधिक व्यापक है। बड़े-बड़े मॉल और कॉम्प्लेक्स अपने पार्किंग क्षेत्र से बाहर सड़कों तक वाहनों की कतारें फैला देते हैं। अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस और निजी वाहनों का ऐसा जमावड़ा होता है कि सड़कें संकरी पड़ जाती हैं। दुकानों के सामने सामान सड़क तक फैल जाता है, जिससे पैदल चलने वालों के लिए जगह ही नहीं बचती। लेकिन इन पर कार्रवाई या तो बहुत कम होती है या फिर केवल दिखावे के लिए की जाती है। इसके विपरीत, जब बात रेहड़ी-पटरी वालों या झोपड़ियों की आती है, तो कार्रवाई तेज, सख्त और अक्सर निर्दयी हो जाती है।
यह स्थिति केवल प्रशासनिक अक्षमता का परिणाम नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के भीतर मौजूद वर्गीय असमानता को भी उजागर करती है। कानून का उद्देश्य सभी के लिए समान होना चाहिए, लेकिन व्यवहार में यह अक्सर कमजोरों पर ही अधिक कठोरता से लागू होता है। जब गरीब की झोपड़ी तोड़ी जाती है, तो वह केवल एक ढांचा नहीं टूटता, बल्कि उसके जीवनयापन का आधार भी छिन जाता है। वहीं, जब किसी बड़े प्रतिष्ठान द्वारा सड़क पर अतिक्रमण किया जाता है, तो उसे ‘व्यवसायिक आवश्यकता’ या ‘सुविधा’ के नाम पर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
अतिक्रमण के इस असमान दृष्टिकोण का एक और पहलू प्रशासनिक लापरवाही भी है। शहरों की सड़कों के बीचोंबीच खड़े बिजली के खंभे और ट्रांसफॉर्मर अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। ये न केवल यातायात को बाधित करते हैं, बल्कि कई बार जानलेवा भी साबित होते हैं। इसके बावजूद इन्हें हटाने या व्यवस्थित करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते। यह एक ऐसा अतिक्रमण है, जो स्वयं व्यवस्था द्वारा किया गया है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी तय करने से बचा जाता है।
इसी प्रकार, शहरों के सैक्टरों और कॉलोनियों में लोगों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा करना भी आम होता जा रहा है। जाली और फेंसिंग लगाकर पार्कों, गलियों और खाली स्थानों को निजी संपत्ति की तरह उपयोग किया जाता है। यह धीरे-धीरे एक सामान्य प्रथा बन जाती है, क्योंकि इस पर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं होती। परिणामस्वरूप, शहरों का नियोजित ढांचा बिगड़ता जाता है और सार्वजनिक स्थान सिमटते जाते हैं।
शहरी यातायात की समस्या को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि केवल अतिक्रमण हटाने से समाधान नहीं निकलेगा। बुनियादी ढांचे में सुधार भी उतना ही आवश्यक है। दिल्ली रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर यदि हर चौराहे पर लेफ्ट टर्न के लिए स्लिप रोड बनाई जाए, तो यातायात का दबाव काफी हद तक कम हो सकता है। इसी तरह, उचित पार्किंग व्यवस्था, फुटपाथों का विकास और ट्रैफिक प्रबंधन के आधुनिक उपाय भी जरूरी हैं। लेकिन इन दीर्घकालिक समाधानों पर ध्यान देने के बजाय अक्सर तात्कालिक और दृश्यात्मक कार्रवाइयों को प्राथमिकता दी जाती है।
अतिक्रमण के मुद्दे को समझने के लिए यह भी जरूरी है कि हम इसके सामाजिक और आर्थिक कारणों को पहचानें। बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में शहरों की ओर आते हैं। उनके पास स्थायी आवास या दुकान खरीदने के संसाधन नहीं होते, इसलिए वे फुटपाथों या खाली स्थानों पर अपना काम शुरू करते हैं। यह उनके लिए केवल एक ‘अतिक्रमण’ नहीं, बल्कि जीविका का साधन होता है। ऐसे में यदि उन्हें हटाया जाता है, तो उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। बिना पुनर्वास के की गई कार्रवाई केवल समस्या को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करती है।
इसके विपरीत, बड़े प्रतिष्ठानों द्वारा किया गया अतिक्रमण अक्सर लाभ बढ़ाने के उद्देश्य से होता है। वे अपने सीमित क्षेत्र से बाहर निकलकर सार्वजनिक स्थानों का उपयोग करते हैं, जिससे उनका व्यवसाय बढ़ता है, लेकिन इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई न होना यह दर्शाता है कि प्रभाव और संसाधनों का कानून के अनुपालन पर कितना असर पड़ता है।
समाधान के लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि अतिक्रमण की परिभाषा को स्पष्ट और समान रूप से लागू किया जाए। चाहे वह गरीब की झोपड़ी हो या किसी बड़े संस्थान का विस्तार—दोनों को एक ही नजर से देखा जाना चाहिए। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के हो और उसमें पारदर्शिता बनी रहे।
इसके साथ ही, शहरी नियोजन को अधिक समावेशी बनाना होगा। रेहड़ी-पटरी वालों के लिए निर्धारित स्थान, सस्ती आवास योजनाएं, और छोटे व्यवसायों के लिए वैध ढांचे विकसित किए जाने चाहिए। इससे न केवल अतिक्रमण की समस्या कम होगी, बल्कि शहरों की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
तकनीक का उपयोग भी इस दिशा में सहायक हो सकता है। डिजिटल मैपिंग, जीआईएस और ड्रोन सर्वे के माध्यम से अतिक्रमण की पहचान अधिक सटीकता से की जा सकती है। इससे कार्रवाई में पारदर्शिता आएगी और किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव की संभावना कम होगी।
अंततः, अतिक्रमण का मुद्दा केवल कानून का नहीं, बल्कि न्याय, समानता और संवेदनशीलता का भी है। जब तक हम इस समस्या को समग्र दृष्टिकोण से नहीं देखेंगे और सभी वर्गों पर समान रूप से कानून लागू नहीं करेंगे, तब तक इसका स्थायी समाधान संभव नहीं है। शहरों को व्यवस्थित और सुगम बनाने के लिए जरूरी है कि नियमों का पालन हर कोई करे—चाहे वह आम नागरिक हो या कोई बड़ा संस्थान।
यह समय है कि हम यह तय करें कि कानून वास्तव में सबके लिए समान है या नहीं। यदि हम एक न्यायपूर्ण और व्यवस्थित समाज की कल्पना करते हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई भी उसी सिद्धांत पर आधारित हो। क्योंकि जब तक न्याय में समानता नहीं होगी, तब तक विकास भी अधूरा ही रहेगा।

मेधावी छात्रों का हुआ सम्मान, विद्यालय में दिखा उत्साह का माहौल

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सिसवा क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय बरवां विद्यापति में सोमवार को मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अपनी-अपनी कक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को मेडल एवं पाठ्य सामग्री देकर सम्मानित किया गया, जिससे विद्यालय परिसर में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम में कक्षा पांचवीं के छात्र गोलू ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि अमृता द्वितीय और अंजू तृतीय स्थान पर रहीं। इसी प्रकार कक्षा आठवीं में प्रिंसी गुप्ता ने प्रथम स्थान हासिल किया, कृष्णा कुमार द्वितीय तथा प्रतीक तृतीय स्थान पर रहें। सभी मेधावी विद्यार्थियों को विद्यालय परिवार की ओर से मेडल व उपहार देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
इस अवसर पर प्रधानाध्यापक रामचंद्र कन्नौजिया ने कहा कि ऐसे सम्मान समारोह से बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित होती है और वे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने सभी छात्रों को निरंतर मेहनत करने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में शिक्षक कुलदीप चंद, मंजू यादव, हरिनारायण यादव, श्रृंखला श्रीवास्तव, ब्रजेश कुमार, मिथिलेश्वर पाठक, रुक्मिणी पटेल, रिंका वर्मा एवं अनुज कुमार तिवारी सहित विद्यालय परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने मेधावी छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

लक्ष्य प्राप्ति हेतु पूरी ऊर्जा के साथ परिश्रम ज़रूरी -डॉक्टर अजय

कम्प्यूटर शिक्षा मे सफलता प्राप्त करने पर छात्र छात्राओं को किया गया सम्मानित

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता .क्रमबद्ध और नियमित अध्ययन ,कठोर श्रम और लक्ष्य प्राप्ति के लिए पूरी तरह समर्पण के द्वारा ही सफलता की कहानी लिखी जा सकती है। उक्त उद्गार जायसवाल अतिथि भवन बरहज में आयोजित लक्षय कंप्यूटर क्लास के अंकपत्र वितरण समारोह को संबोधित करते हुए, बतौर मुख्य अतिथि स्थानीय महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य प्रोफ़ेसर अजय कुमार मिश्र ने व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि आज कृत्रिम प्रज्ञा के बढ़ते प्रभाव वाले युग में तर्कशक्ति, चिंतन शक्ति और लेखन शक्ति को सजो कर रखना एक कठिन चुनौती है,आज के युवा वर्ग पर बहुत महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी है। इस परीक्षा में सर्वोच्च अंक से सफल होने वाले छात्रों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा के इस युग में अपनी योग्यता को सफलता के माध्यम से प्रमाणित करने की ज़िम्मेदारी आप की है और मुझे पूरा विश्वास है कि आप इसमें सफल होंगे। विशिष्ट अतिथि पूर्व प्रधानाचार्य गणेश मिस्र ने कहा इतिहास साक्षी है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं और परिस्थितियों की दास नहीं रही है, बल्कि जिसने भी कठोर श्रम किया है सफलता के शिखर पर वही पहुँचा है। अध्यक्षीय संबोधन में भाजपा नेता अमित जायसवाल ने कहा कि चुनौतियों से घबराना नहीं है बल्कि पूरी ऊर्जा के साथ डटकर चुनौतियों का मुक़ाबला करते हुए सफलता की इबारत लिखनी है।इस अवसर पर लगभग 75 छात्र छात्राओं को अंक पत्र वितरित किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से किया गया। संसथान की डायरेक्टर दिव्या मद्देशिया ने आगंतुक अतिथियों के सम्मान में स्वागत भाषण दिया साथ ही अंगवस्त्र देकर उन्हें सम्मानित किया। आभार प्रदर्शन संस्था के डायरेक्टर चंदन गौड़ ने किया और संचालन विद्यानंद पांडे ने किया। जायसवाल अतिथि भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र छात्राओं ने सहभाग किया।समारोह को छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष निशिकांत दीक्षित प्रखर कुमार आदि ने भी संबोधित किया।
कम्प्यूटर शिक्षा मे कड़ा संघर्ष करते हुए प्रथम स्थान शिवांश पाण्डेय ने हासिल की जबकि द्वितीय स्थान पर जाह्नवी गुप्ता रही, वही अपनी सफलता पर हर्षित होते हुए धीरज राजभर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया । इन विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि डॉ अजय कुमार मिश्रा ने अंक पत्र एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किये।

मधुमक्खी पालन की तकनीक व व्यावसायिक पहलुओं से रूबरू हुए विद्यार्थी

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर के अंतर्गत संचालित कृषि संकाय के तृतीय वर्ष में अध्ययनरत विद्यार्थियों ने पीपीगंज स्थित “हाई ग्रोथ हनी बी-फार्म” का शैक्षिक भ्रमण डॉ. सास्वती प्रेमकुमारी के मार्गदर्शन में संपन्न किया।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने मधुमक्खी पालन एवं प्रबंधन से जुड़ी विस्तृत व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। फार्म के संचालक राजू सिंह ने अत्याधुनिक मशीनों व प्रसंस्करण इकाई, मधुमक्खी छत्ता, केन्द्रीय छत्ता, फ्रेम फीडर्स, एक्सक्लूडर, शहद निष्कर्षण तकनीक, रानी मधुमक्खी पालन किट तथा कॉम्ब फाउंडेशन शीट सहित विभिन्न उपकरणों के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने शहद संग्रहण की तकनीक, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग और मार्केटिंग के प्रमुख पहलुओं की भी जानकारी दी।
डॉ. सास्वती प्रेमकुमारी ने कृषि में मधुमक्खियों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मधुमक्खियों द्वारा पर-परागण से फसलों की उपज में वृद्धि होती है, साथ ही फसल संवर्धन एवं पादप आनुवांशिक संसाधनों के संरक्षण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
इस शैक्षिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को मधुमक्खी पालन की विधा, उसके व्यावसायिक लाभ-हानि तथा रोजगार की संभावनाओं से अवगत कराना रहा।

दिल्ली विधानसभा में सुरक्षा चूक, गेट तोड़कर घुसी कार; चालक फरार

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा में सोमवार को बड़ी चूक सामने आई, जब एक कार गेट नंबर 2 को तोड़ते हुए जबरन परिसर के अंदर घुस गई। यह घटना दोपहर करीब 2 बजे की बताई जा रही है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार कुछ देर तक विधानसभा परिसर के अंदर रही। चालक सीधे विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के कार्यालय के बाहर पहुंचा और वहां एक गुलदस्ता रखकर वापस उसी कार से फरार हो गया।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, कार टाटा सिएरा मॉडल की थी, जिस पर उत्तर प्रदेश का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज था। घटना के समय चालक ने अपना चेहरा ढका हुआ था। गेट तोड़ने के दौरान लोहे का गेट भी क्षतिग्रस्त हो गया।

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घटना के समय वीआईपी गेट पर सीआरपीएफ के जवान तैनात थे। सुरक्षा एजेंसियों ने मौके पर रखे गए गुलदस्ते की जांच की, लेकिन उसमें कोई विस्फोटक या संदिग्ध वस्तु नहीं मिली।

फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान करने में जुटी है और वाहन की तलाश जारी है। अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकियों के बाद इस घटना ने सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।

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सुहागरात पर दुल्हन की सच्चाई से चौंका दूल्हा, मैनपुरी में धोखाधड़ी का मामला दर्ज

मैनपुरी (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के किशनी थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शादी के बाद दूल्हे को अपनी दुल्हन की पहचान को लेकर बड़ा खुलासा हुआ। सुहागरात के दौरान सच्चाई सामने आने पर युवक के होश उड़ गए और उसने इसे धोखाधड़ी बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

जानकारी के अनुसार, युवक की शादी 25 मार्च को बिछवां थाना क्षेत्र की एक युवती से धूमधाम से हुई थी। शादी के बाद जब दुल्हन विदा होकर ससुराल पहुंची तो परिवार में खुशियों का माहौल था। लेकिन शादी के कुछ ही दिनों बाद युवक को पता चला कि उसकी दुल्हन मंगलामुखी (किन्नर) है।

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इस खुलासे के बाद परिवार में तनाव का माहौल बन गया। युवक ने आरोप लगाया कि ससुराल पक्ष ने यह जानकारी जानबूझकर छिपाई और धोखे में रखकर शादी कराई। युवक ने थाने पहुंचकर तहरीर दी और मामले में कार्रवाई की मांग की।

युवक के अनुसार, सच्चाई सामने आने के बाद दुल्हन अपने मायके लौट गई और साथ में शादी के जेवर और नकदी भी ले गई। इस घटना से आहत युवक और उसका परिवार न्याय की मांग कर रहा है।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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UPPSC RO/ARO मुख्य परीक्षा 2023 का रिजल्ट जारी, 419 अभ्यर्थी सफल

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) मुख्य परीक्षा 2023 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है। इस भर्ती परीक्षा में कुल 419 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है।

उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट http://uppsc.up.nic.in पर जाकर अपना परिणाम देख सकते हैं। रिजल्ट जारी होने के बाद सफल अभ्यर्थियों में खुशी की लहर है।

यह परीक्षा उत्तर प्रदेश के विभिन्न विभागों में समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी के पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी। चयनित उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया के लिए आयोग द्वारा निर्देश दिए जाएंगे।

अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट चेक करें और भविष्य के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार रखें।

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