Monday, July 6, 2026
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गैस-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सपा का विरोध, जनता की समस्याओं को लेकर उठी आवाज

भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।

80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

भारतीय पीएम की इंडो- पैसिफिक यात्रा 6-11 जुलाई 2025 :भारत की एक्ट ईस्ट नीति का नया अध्याय और हिंद- प्रशांत में उभरती वैश्विक शक्ति की रणनीति- व्यापक समग्र विश्लेषण

भारत की इस इंडो-पैसिफिक यात्रा को अनेक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ 2026 की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहलों में से एक मान रहे हैं

गोंदिया -वैश्विक स्तरपर भारतीय पीएम की 6 से 11 जुलाई 2026 तक की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की छह दिवसीय यात्रा जिसपर भारत से पूरे विश्व की नज़रें लगी हुई है,केवल तीन देशों काराजनयिक दौरा नहीं है, बल्कि यह भारत की लगभग एक दशक से अधिक समय से विकसित हो रही एक्ट ईस्ट  नीति का सबसे परिपक्व और व्यापक स्वरूप है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हिंद- प्रशांत क्षेत्र विश्व राजनीति, वैश्विक अर्थव्यवस्था,समुद्री व्यापार, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और सामरिक संतुलन का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है, विश्व की लगभग आधी आबादी, वैश्विक जीडीपी का बड़ा हिस्सा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार काअधिकांश भाग इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि भारत का इस क्षेत्र में सक्रिय,संतुलित और बहु आयामी नेतृत्व केवल उसकी विदेश नीति का विस्तार नहीं बल्कि उसकी वैश्विक भूमिका का पुनर्परिभाषण भी है। यही कारण है कि इस यात्रा को एक्ट ईस्ट नीति के एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।यह यात्रा केवल एक नियमित विदेश दौरा नहीं है, बल्कि यह उस बदलती वैश्विक व्यवस्था का प्रतीक है जिसमें भारत स्वयं को हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र के एक उत्तरदायी, विश्वसनीय और निर्णायक साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है।जिसपर भारत से पूरे विश्व की नजरें लगी हुई है इस यात्रा का उद्देश्य भारत की एक्ट ईस्ट नीति, मुक्त, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक,समुद्री सुरक्षाव्यापार प्रौद्योगिकी, रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों, आपूर्ति श्रृंखला और लोगों के बीच संबंधों को नई गति देना है। इस दौरान तीनों देशों के शीर्ष नेतृत्व से द्विपक्षीय वार्ता, व्यापारिक समुदाय से संवाद और भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संपर्क कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। 

साथियों, आज विश्व की भू-राजनीति का केंद्र तेजी से हिंद -प्रशांत क्षेत्र की ओर स्थानांतरित हो रहा है। वैश्विक समुद्री व्यापार का बड़ा भाग इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है, जबकि ऊर्जा आपूर्ति,डिजिटल कनेक्टिविटी और वैश्विक उत्पादन नेटवर्क भी इसी क्षेत्र पर निर्भर हैं। ऐसे समय में भारत का उद्देश्य केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना नहीं है,बल्कि एक ऐसी व्यवस्था को मजबूत करना भी है जिसमें अंतरराष्ट्रीय कानून,नौवहन की स्वतंत्रता और सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान बना रहे। यही कारण है कि इस यात्रा को अनेक अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ 2026 की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहलों में से एक मान रहे हैं।भारत की एक्ट ईस्ट नीति अब केवल दक्षिण- पूर्व एशिया के साथ सांस्कृतिक संबंधों तक सीमित नहीं रही। यह आर्थिक,सामरिक,तकनीकी और समुद्री साझेदारी का व्यापक ढांचा बन चुकी है। इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड इस रणनीति के तीन महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। 

साथियों, इंडोनेशिया विश्व का सबसे बड़ा मुस्लिम-बहुल लोकतंत्र है और मलक्का जलडमरूमध्य के निकट उसकी रणनीतिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है।ऑस्ट्रेलिया महत्वपूर्ण खनिजों, रक्षा सहयोग और हिंद-प्रशांत सुरक्षा का प्रमुख भागीदार है, जबकि न्यूज़ीलैंड के साथ व्यापार, कृषि, शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं।इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक आयाम चीन के बढ़ते प्रभाव की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।भारत ने कहीं भी प्रत्यक्ष टकराव की नीति नहीं अपनाई है,लेकिन वह नियम- आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संतुलित शक्ति संरचना का समर्थन करता है। दक्षिण चीन सागर, समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रश्नों पर भारत समान विचार वाले देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह यात्रा किसी सैन्य गठबंधन का संदेश नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, संतुलन और साझेदारी का संकेत है।भारत और इंडोनेशिया के संबंध इस यात्रा में विशेष महत्व रखते हैं। दोनों देश हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को जोड़ने वाले समुद्री क्षेत्र में स्थित हैं। रक्षा सहयोग,समुद्री निगरानी, डिजिटल साझेदारी, बंदरगाह विकास और संभावित रक्षा निर्यात जैसे विषय एजेंडे में शामिल हैं। विशेष रूप से ब्रह्मोस मिसाइल और समुद्री सुरक्षा सहयोग पर चर्चा अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समुदाय की निगाहों में है। 

साथियों, ऑस्ट्रेलिया के साथ संबंध पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व गति से मजबूत हुए हैं। आज दोनों देश केवल लोकतांत्रिक साझेदार नहीं बल्कि महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी भी हैं।रक्षा अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, विज्ञान तथा महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति इस संबंध के प्रमुख आधार बन चुके हैं।विशेष रूप से लिथियम, कोबाल्ट और अन्य महत्वपूर्ण खनिज भारत के ऊर्जा संक्रमण और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।विश्व अर्थव्यवस्था आज आपूर्ति श्रृंखलाओं के पुनर्गठन के दौर से गुजर रही है। महामारी, भू- राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों ने देशों को विश्वसनीय साझेदार खोजने के लिए प्रेरित किया है। भारत इस अवसर को विश्वसनीय विनिर्माण केंद्र के रूप में बदलना चाहता है। यदि इस यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, लॉजिस्टिक्स और महत्वपूर्ण खनिजों पर नए समझौते आगे बढ़ते हैं तो इसका प्रभाव भारतीय उद्योग,रोजगार और निर्यात पर भी सटीकता से दिखाई दे सकता है। 

साथियों, न्यूज़ीलैंड यात्रा का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि कई दशकों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह महत्वपूर्ण राजकीय यात्रा मानी जा रही है। कृषि अनुसंधान, डेयरी प्रौद्योगिकी,खाद्य प्रसंस्करण शिक्षा, पर्यटन और मुक्त व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएँ खुल सकती हैं। दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संबंध और भारतीय समुदाय भी इस साझेदारी की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। भारत की समुद्री नीति अब केवल तटीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। हिंद महासागर में मानवीय सहायता, आपदा राहत,समुद्री डकैती विरोधी अभियान,समुद्री पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित समुद्री व्यापार मार्ग भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं। इसी संदर्भ में भारत का मुक्त, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण विश्व समुदाय के लिए भी सटीकता से महत्वपूर्ण बन गया है। 

साथियों, इस यात्रा में व्यापारिक समुदाय के साथ होने वाली बैठकों का भी विशेष महत्व है। भारत आज विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। डिजिटल भुगतान, स्टार्टअप, हरित ऊर्जा, रक्षा विनिर्माण और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश आकर्षित करने की भारत की क्षमता लगातार बढ़ रही है। यदि इन क्षेत्रों में नई साझेदारियाँ बनती हैं तो इसका सकारात्मक प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था और दीर्घकालिक निवेश वातावरण पर पड़ सकता है।भारतीय प्रवासी समुदाय इस पूरी यात्रा का एक महत्वपूर्ण आयाम है।ऑस्ट्रेलिया,न्यूज़ीलैंड और इंडोनेशिया में बसेभारतीय मूल के लोग शिक्षा,व्यापार, विज्ञान चिकित्सा और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इन समुदायों के साथ संवाद भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति को और मजबूत करता हैँ।विशेषज्ञों का मानना है कि 21वीं सदी की विश्व व्यवस्था केवल सैन्य शक्ति से निर्धारित नहीं होगी। तकनीक, आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री संपर्क, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु सहयोग और विश्वसनीय साझेदारियाँ भविष्य की शक्ति के वास्तविक आधार होंगे। भारत की यह यात्रा इन्हीं सभी आयामों को एक साथ जोड़ने का प्रयास है।इस पूरी यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण आयाम हिंद-प्रशांत की सामरिक संरचना में भारत की बढ़ती भूमिका है। भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि उसका उद्देश्य किसी देश के विरुद्ध सैन्य गठबंधन बनाना नहीं, बल्कि ऐसा क्षेत्रीय वातावरण तैयार करना है जहाँ सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान हो,समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन हो और छोटे-बड़े सभी देशों को समान अवसर मिलें। यही दृष्टिकोण भारत को एक संतुलित, विश्वसनीय और जिम्मेदार शक्ति के रूप में स्थापित करता है।

अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि भारतीय पीएम की इंडो- पैसिफिक यात्रा को केवल तीन देशों की यात्रा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।यह भारत की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसके माध्यम से वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन,सहयोग,आर्थिक विकास और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का समर्थक बनकर उभरना चाहता है। यदि इस यात्रा से व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और निवेश के क्षेत्रों में ठोस प्रगति होती है, तो इसका प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहेगा,बल्कि पूरे इंडो- पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक और आर्थिक संरचना पर भी दिखाई देगा। यही कारण है कि विश्व के नीति- निर्माता,रणनीतिक विशेषज्ञ, निवेशक और सामान्य नागरिक इस यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में देख रहे हैं।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

तेज रफ्तार ई-रिक्शा ने छीनी मासूम की जिंदगी, खेलते समय 7 वर्षीय वंदना की दर्दनाक मौत


शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)। खुटार थाना क्षेत्र के ग्राम मुरादपुर में रविवार देर शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में सात वर्षीय मासूम बच्ची की जान चली गई। घर के पास अन्य बच्चों के साथ खेल रही बच्ची को तेज रफ्तार ई-रिक्शा ने टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल बच्ची को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जानकारी के अनुसार, मुरादपुर निवासी रामभरोसे शर्मा की सात वर्षीय पुत्री वंदना रविवार शाम अपने घर के बाहर बच्चों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान तेज गति से गुजर रहे एक ई-रिक्शा ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास के ग्रामीण तुरंत सहायता के लिए दौड़ पड़े।
बताया गया कि घटना के समय वंदना की मां सोनी पशुओं के लिए चारा लेने गई थीं। सूचना मिलते ही वह घटनास्थल पर पहुंचीं और ग्रामीणों की मदद से घायल बेटी को अस्पताल लेकर गईं, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों ने बताया कि वंदना के पिता रामभरोसे शर्मा रोजी-रोटी के सिलसिले में दो दिन पहले जौनपुर गए थे। बेटी की मौत की सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया। वंदना चार भाई-बहनों में सबसे छोटी थी, जिससे पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना की सूचना मिलने पर खुटार पुलिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने ई-रिक्शा चालक की तलाश शुरू कर दी है तथा हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
इस घटना के बाद ग्रामीणों ने गांव की सड़कों पर तेज रफ्तार वाहनों के संचालन पर रोक लगाने और बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

आज का राशिफल: 6 जुलाई 2026, सोमवार चंद्रमा-शनि की युति, सौभाग्य योग और कल्पवृक्ष योग का विशेष संयोग


राष्ट्र की परम्परा | धर्म-ज्योतिष डेस्क
आज 6 जुलाई 2026, सोमवार को प्रातः 9:57 बजे चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश कर शनि देव के साथ युति बना रहे हैं। यह संयोग देवगुरु बृहस्पति के नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद में बन रहा है, जिससे आध्यात्मिक चिंतन, कर्म और धैर्य का विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा। आज का दिन सौभाग्य योग से भी युक्त है, इसलिए शुभ कार्यों, पूजा-पाठ और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए अनुकूल माना गया है।
सोमवार के अधिपति चंद्र देव हैं। ऐसे में भगवान शिव का जल एवं दूध के मिश्रण से अभिषेक करना तथा सफेद रंग का प्रयोग करना शुभ फलदायी माना गया है।
आज का पंचांग
तिथि: आषाढ़ कृष्ण पक्ष षष्ठी
वार: सोमवार
नक्षत्र: पूर्वाभाद्रपद
योग: सौभाग्य
अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11:35 से दोपहर 12:30 बजे तक
राहुकाल: प्रातः 7:30 से 9:00 बजे तक
पंचक: प्रभावी
भद्रा: दोपहर 1:47 बजे से
आज का विशेष विषय: कल्पवृक्ष योग
ज्योतिष के अनुसार ऐसा माना जाता है कि लगभग 100 में से 40 कुंडलियों में ऐसा योग किसी न किसी रूप में पाया जाता है, लेकिन उसका पूर्ण फल बहुत कम लोगों को प्राप्त होता है।
वे चार प्रमुख योग जो व्यक्ति को दूसरों के लिए “कल्पवृक्ष” बना सकते हैं—
गुरु और चंद्रमा की युति अथवा आमने-सामने की स्थिति (गजकेसरी योग)
नवमेश का दशम या एकादश भाव में होना
गुरु और शुक्र की युति
गुरु, शुक्र अथवा बुध का एकादश भाव में स्थित होना
महत्वपूर्ण सूत्र: केवल योग होना पर्याप्त नहीं है। सत्कर्म, सेवा, विनम्रता और पुरुषार्थ के बिना यह योग बीज की तरह सुप्त रह जाता है।
मेष
कार्यक्षेत्र में सफलता मिलेगी। व्यापार में लाभ के संकेत हैं। प्रेम संबंध मधुर रहेंगे। विद्यार्थियों को मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।
शुभ अंक: 9
शुभ रंग: लाल
उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
वृषभ
आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परिवार में सुखद वातावरण रहेगा। पुराने कार्य पूरे होंगे। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।
शुभ अंक: 6
शुभ रंग: सफेद
उपाय: गरीबों को दूध का दान करें।
मिथुन
नए अवसर प्राप्त होंगे। व्यापार में विस्तार संभव है। विद्यार्थियों के लिए दिन शुभ है। दांपत्य जीवन सुखद रहेगा।
शुभ अंक: 5
शुभ रंग: हरा
उपाय: भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें।
कर्क
मान-सम्मान बढ़ेगा। नौकरी में उन्नति के योग हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा। मानसिक शांति बनी रहेगी।
शुभ अंक: 2
शुभ रंग: सफेद
उपाय: चंद्रमा को जल अर्पित करें।
सिंह
कार्य में व्यस्तता रहेगी। निवेश सोच-समझकर करें। प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी।
शुभ अंक: 1
शुभ रंग: सुनहरा
उपाय: शिव चालीसा का पाठ करें।
कन्या
रुके हुए कार्य पूरे होंगे। आर्थिक लाभ मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए दिन अनुकूल रहेगा।
शुभ अंक: 5
शुभ रंग: हरा
उपाय: गौ सेवा करें।
तुला
व्यापार में लाभ होगा। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।
शुभ अंक: 6
शुभ रंग: गुलाबी
उपाय: सफेद मिठाई का दान करें।
वृश्चिक
आत्मविश्वास बढ़ेगा। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। प्रेम संबंध मजबूत होंगे।
शुभ अंक: 9
शुभ रंग: मरून
उपाय: “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जप करें।
धनु
भाग्य का साथ मिलेगा। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। व्यापार में लाभ होगा।
शुभ अंक: 3
शुभ रंग: पीला
उपाय: केले के वृक्ष की पूजा करें।
मकर
संयम से कार्य करें। अनावश्यक विवाद से बचें। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।
शुभ अंक: 8
शुभ रंग: नीला
उपाय: शनिदेव के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
कुंभ
साझेदारी के कार्यों में सफलता मिलेगी। नए संपर्क लाभ देंगे। परिवार का सहयोग मिलेगा।
शुभ अंक: 8
शुभ रंग: आसमानी
उपाय: शिव मंदिर में जल चढ़ाएं।
मीन
चंद्रमा आपकी राशि में होने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। महत्वपूर्ण कार्य पूरे होंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। विद्यार्थियों के लिए समय अनुकूल है।
शुभ अंक: 7
शुभ रंग: सफेद
उपाय: भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें।
आज का संदेश
आज का दिन धैर्य, सेवा और सकारात्मक सोच का है। यदि आपकी कुंडली में शुभ गुरु योग हैं तो उन्हें केवल भाग्य नहीं, बल्कि सत्कर्म और परिश्रम से ही पूर्ण फल प्राप्त होता है। भगवान शिव की आराधना करें, मन को शांत रखें और दूसरों की सहायता का संकल्प लें। यही आज का वास्तविक “कल्पवृक्ष” बनने का मार्ग है।
(यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार फल भिन्न हो सकते हैं।)

“फ्यूनरल ऑफ द सेंचुरी?” 9 जुलाई 2026 को अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई पर टिकी दुनिया की नजरें

क्या यह विश्व इतिहास का सबसे बड़ा अंतिम संस्कार हो सकता है?

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर मध्य-पूर्व का इतिहास केवल युद्धों,तेल,परमाणु कार्यक्रमों और कूटनीतिक संघर्षों से नहीं लिखा गया है, बल्कि ऐसे प्रतीकात्मक आयोजनों से भी लिखा गया है जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों की राजनीति और जनमानस को प्रभावित किया।28 फरवरी 2026 कों ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार ऐसा ही एक आयोजन बनता दिखाई दे रहा है। फरवरी में हुए अमेरिकी-इजरायली हमले में उनकी मृत्यु के बाद सुरक्षा कारणों से अंतिम संस्कार तत्काल नहीं किया जा सका और उसे कई महीनों के लिए स्थगित करना पड़ा। अब जुलाई में शुरू हुई बहु-दिवसीय अंतिम यात्रा को ईरानी नेतृत्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता, शहादत, प्रतिरोध और राजनीतिक संदेश के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। अनेक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के अनुसार अंतिम यात्रा तेहरान से शुरू होकर विभिन्न धार्मिक स्थलों से गुजरते हुए 9 जुलाई को मशहद में दफ़न के साथ पूरी होगी।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र इलेक्ट्रॉनिक सोशल मीडिया में लगातार देख रहा हूं कि ईरानी सरकारी मीडिया और कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में इसे फनरल ऑफ़ द सेंचुरी यानें शताब्दी का अंतिम संस्कार कहा जा रहा है। आयोजकों का दावा है कि पूरे कार्यक्रम में करोड़ों लोग शामिल हो सकते हैं, जबकि स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियाँ अभी केवल लाखों से करोड़ों तक की संभावित भीड़ का उल्लेख कर रही हैं और अंतिम संख्या की पुष्टि बाद में होने की बात कह रही हैं। कुछ रिपोर्टों में 1.5 से 2 करोड़ तथा कुछ में इससे भी अधिक उपस्थिति का अनुमान लगाया गया है, किंतु इन आँकड़ों की सटीकता से  स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है। हालांकि यह पूरी जानकारी मीडिया से उठाई गई है। 

साथियों बात अगर हम चार महीने तक सुरक्षित रखा गया पार्थिव शरीर,शिया परंपरा और अभूतपूर्व राष्ट्रीय तैयारी को समझने की करें तो,इस पूरे आयोजन का सबसे असाधारण पक्ष यह है कि अयातुल्ला खामेनेई और उनके परिवार के 4 अन्य दिवंगत सदस्यों के पार्थिव शरीरों को लगभग चार महीने तक संरक्षित रखा गया। सामान्य इस्लामी परंपरा में मृत्यु के बाद शीघ्र दफ़न को सर्वोत्तम माना जाता है, लेकिन युद्ध, बड़े सुरक्षा संकट या अन्य असाधारण परिस्थितियों में विलंब की अनुमति दी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अवधि में शवों को रासायनिक संरक्षण (एम्बामिंग) के बजाय नियंत्रित तापमान वाले रेफ्रिजरेटेड कोल्ड स्टोरेज में रखा गया होगा, ताकि धार्मिक मान्यताओं का सम्मान बना रहे।युद्धकालीन परिस्थितियों के कारण अंतिम संस्कार टालना केवल धार्मिक निर्णय नहीं था,बल्कि एक राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति भी थी। ईरान को आशंका थी कि यदि युद्ध के दौरान इतने बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए गए तो दुश्मन देश या आतंकी संगठन भीड़ या शीर्ष नेतृत्व को निशाना बना सकते हैं। इसी कारण अंतिम संस्कार तब तक स्थगित रखा गया जब तक व्यापक सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो गई। 

साथियों बात अगर हम तेहरान में शुरू हुए इस शोक समारोह के लिए राजधानी को अभूतपूर्व सुरक्षा घेरे में बदल दिया गया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार सेना, पुलिस, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स,स्वयंसेवी संगठन और प्रशासनिक तंत्र को संयुक्त रूप से तैनात किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है और कुछ अवधियों के लिए हवाई क्षेत्र पर भी विशेष नियंत्रण रखा गया है। सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में पाँच करोड़ रोटियाँ, हजारों जल-छिड़काव केंद्र, सैकड़ों पार्किंग स्थल और करोड़ों श्रद्धालुओं जैसी तैयारियों के दावे सामने आए हैं। हालांकि इन सभी विशिष्ट आँकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें ईरानी या अन्य मीडिया के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य के रूप में। दूसरी ओर, यह स्पष्ट है कि आयोजन के पैमाने को देखते हुए भोजन,पेयजल, चिकित्सा सहायता,भीड़ नियंत्रण और परिवहन की सटीकता से व्यापक व्यवस्थाएँ की गई है। 

साथियों, इस अंतिम यात्रा को केवल एक राज्य समारोह नहीं बल्कि शिया धार्मिक संस्कृति की निरंतरता के रूप में भी प्रस्तुत किया जा रहा है। शिया परंपरा में शहादत का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है और करबला की ऐतिहासिक स्मृति आज भी धार्मिक और राजनीतिक चेतना का आधार मानी जाती है। इसी कारण ईरानी नेतृत्व खामेनेई की मृत्यु को राष्ट्रीय प्रतिरोध और धार्मिक धैर्य के प्रतीक के रूप में स्थापित करने का प्रयास कर रहा है।दूसरी ओर, यह भी सत्य है कि ईरान के भीतर सभी नागरिक इस आयोजन को एक समान दृष्टि से नहीं देखते। निर्वासित विपक्षी समूह और कुछ आलोचक इसे राज्य- प्रायोजित राजनीतिक प्रदर्शन बताते हैं, जबकि समर्थकों के लिए यह राष्ट्रीय सम्मान और श्रद्धांजलि का अवसर है। इसलिए यह अंतिम संस्कार केवल शोक का नहीं, बल्कि ईरान के भीतर मौजूद राजनीतिक मतभेदों का भी दर्पण बन गया है। 

साथियों बात अगर हम  मुस्लिम देशों की प्रतिक्रिया: एकजुटता और व्यावहारिक राजनीति का मिश्रण को समझने की करें तो रिपोर्टों के अनुसार लगभग 30 देशों के प्रतिनिधिमंडलों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। रूस, पाकिस्तान तथा क्षेत्र के कई देशों के प्रतिनिधियों के आने की खबरें हैं, जबकि अधिकांश पश्चिमी देशों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। इससे यह संकेत मिलता है कि कईमुस्लिम और क्षेत्रीय देश ईरान के साथ संवाद बनाए रखना चाहते हैं, भले ही उनकी अपनी विदेश नीतियाँ अलग-अलग हों।क्या यह सचमुच विश्व इतिहास का सबसे बड़ा अंतिम संस्कार हो सकता है?इतिहास में अनेक विशाल अंतिम संस्कार हुए हैं, जिनमें 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी का अंतिम संस्कार भी शामिल है, जिसमें लगभग एक करोड़ लोगों की उपस्थिति का व्यापक उल्लेख मिलता है। वर्तमान आयोजन के बारे में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि इसकी भीड़ उस रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है। हालांकि अंतिम और स्वतंत्र रूप से सत्यापित आँकड़े उपलब्ध होने के बाद ही यह निश्चित रूप से कहा जा सकेगा कि यह वास्तव में विश्व का सबसे बड़ा अंतिम संस्कार था या नहीं।यह अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि मध्य-पूर्व की बदलती शक्ति-संरचना का भी प्रतीक माना जा रहा है। ईरान अपने समर्थक समूहों और सहयोगी देशों को यह संदेश देना चाहता है कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद उसकी राजनीतिक और सैन्य संरचना कायम है। दूसरी ओर अमेरिका, इज़राइल और उनके सहयोगी इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह आयोजन भविष्य की वार्ताओं, क्षेत्रीय गठबंधनों और सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। 

साथियों, इस समारोह में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के आने की भी खबरें हैं। चीन ने वरिष्ठ प्रतिनिधि भेजने की घोषणा की है, जबकि क्षेत्रीय सहयोगी देशों और कई धार्मिक प्रतिनिधि मंडलों की भागीदारी की भी सूचना है। भारत से भी कुछ सार्वजनिक हस्तियों के शामिल होने की मीडिया रिपोर्टें सामने आई हैं, हालांकि आधिकारिक भारतीय सरकारी प्रतिनिधित्व की प्रकृति अलग-अलग रिपोर्टों में भिन्न बताई गई है। इस प्रकार यह आयोजन केवल एक अंतिम संस्कार नहीं रह गया है; यह ईरान की आंतरिक राजनीति, शिया धार्मिक पहचान, राष्ट्रीय सुरक्षा, जन-समर्थन और वैश्विक कूटनीति का संगम बन गया है। आने वाले वर्षों में इतिहासकार संभवतः इसे केवल एक धार्मिक घटना नहीं बल्कि 21वीं सदी के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक -प्रतीकात्मक आयोजनों में से एक के रूप में भी सटीकता से  देखेंगे। 

साथियों बात कर हम  अमेरिका पर प्रभाव: कूटनीतिक दबाव और नई रणनीतिक चुनौती को समझने की करें तो यदि अंतिम संस्कार में विशाल जनसमूह और अनेक देशों के प्रतिनिधि मंडल शामिल होते हैं,तो यह अमेरिका के लिए केवल एक शोक समारोह नहीं बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी होगा।ईरान इस आयोजन को राष्ट्रीय एकता,प्रतिरोध और अपनी राज्य व्यवस्था की निरंतरता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान इस अवसर का उपयोग अमेरिका और उसके सहयोगियों पर मनोवैज्ञानिक तथा कूटनीतिक दबाव बनाने के लिए भी कर सकता है। 

साथियों बात अगर हम भारत की भूमिका: संतुलित कूटनीति की परीक्षा को समझने की करें तो भारत के लिए ईरान एक महत्वपूर्ण ऊर्जा, संपर्क और क्षेत्रीय साझेदार है, वहीं अमेरिका भी उसका प्रमुख रणनीतिक सहयोगी है। इसलिए भारत की नीति परंपरागत रूप से संतुलन की रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भारत से प्रतिनिधिमंडल और कुछ सार्वजनिक हस्तियों ने श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में भाग लिया है, जबकि भारत आधिकारिक स्तर पर क्षेत्रीय शांति, संवाद और स्थिरता का समर्थन करता रहा है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन करें इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे के यदि इस अंतिम संस्कार में वास्तव में अभूतपूर्व जनसमूह और व्यापक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी दर्ज होती है, तो यह केवल एक नेता की विदाई नहीं बल्कि ईरान की राजनीतिक पहचान,शिया धार्मिक परंपरा और क्षेत्रीय प्रभाव का प्रदर्शन भी माना जाएगा।साथ ही, यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि भीड़ के आकार,भाग लेने वाले देशों की संख्या और आयोजन से जुड़े कई दावे अभी भी विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और आधिकारिक बयानों पर आधारित हैं;इनके सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि समय के साथ अधिक स्पष्ट होगी

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

देवरिया कांग्रेस बैठक में कार्यकर्ताओं का जोश, संगठन विस्तार पर विजय कुशवाहा का बड़ा संदेश

कांग्रेस प्रदेश संगठन मंत्री विजय कुशवाहा का देवरिया में भव्य स्वागत, संगठन विस्तार पर हुआ मंथ

गोविन्द प्रताप मौर्य की रिपोर्ट


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शहर स्थित कांग्रेस कार्यालय में रविवार को कांग्रेस की मासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने, कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका बढ़ाने तथा आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान नव नियुक्त प्रदेश संगठन मंत्री (श्रम प्रकोष्ठ) विजय कुशवाहा का जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से फूल-माला पहनाकर गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि संगठन की वास्तविक ताकत बूथ और ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं से आती है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से अपने-अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा और सक्रियता के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संगठन को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक कार्यकर्ता की भागीदारी आवश्यक है।
अपने संबोधन में प्रदेश संगठन मंत्री विजय कुशवाहा ने कहा कि प्रदेश और देश की जनता वर्तमान सरकार की नीतियों का आकलन कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियों का असर शिक्षा, पारंपरिक व्यापार और विभिन्न संस्थानों पर पड़ा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से जनसंपर्क बढ़ाने और कांग्रेस की नीतियों को गांव-गांव तक पहुंचाने का आग्रह किया।
बैठक में संगठन विस्तार, सदस्यता अभियान और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श किया गया। कार्यकर्ताओं ने संगठन को और अधिक मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
बैठक में मार्कण्डेय मिश्रा, नागेन्द्र शुक्ला, बदरे आलम, प्रेमलाल भारती, धर्मेंद्र पांडेय, भरत मणि त्रिपाठी, सजीव मिश्रा (प्रवक्ता), चंदन वर्मा, दीनदयाल यादव, मनीष रजक, विनोद दुबे, राम प्रवेश सिंह, शिव शंकर सिंह सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

बरहज में बिजली संकट पर जनाक्रोश, 7 दिन का अल्टीमेटम; सुधार नहीं हुआ तो आमरण अनशन और तालाबंदी

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती से परेशान बरहज नगर के लोगों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। व्यापारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नगरवासियों की संयुक्त बैठक में विद्युत व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग करते हुए प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम दिया गया। चेतावनी दी गई कि यदि निर्धारित समय के भीतर बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो क्रमिक अनशन, आमरण अनशन, विद्युत विभाग के कार्यालय पर तालाबंदी और जनप्रतिनिधियों के कार्यक्रमों के बहिष्कार सहित व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि सोमवार को आयोजित तहसील दिवस में प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर नगर की गंभीर विद्युत समस्या से अवगत कराया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से बरहज के नागरिक अघोषित बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति की समस्या झेल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस ओर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।

नगरवासियों का कहना है कि भीषण गर्मी में घंटों बिजली गुल रहने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। व्यापार, शिक्षा, पेयजल व्यवस्था और छोटे कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। लोगों ने स्पष्ट किया कि अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस कार्रवाई और नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी।
बैठक को पूर्व चेयरमैन एवं आंदोलन संयोजक अजीत जायसवाल, पूर्व प्राचार्य प्रो. अजय कुमार मिश्र, सचिन सिंह, प्रदीप जायसवाल, प्रदीप गुप्ता, जितेंद्र भारत, अमित जायसवाल, जितेंद्र शर्मा, मनोज गुप्ता और मुकेश पटेल सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। सभी ने नगरवासियों से एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन विद्यानंद पांडेय ने किया। बैठक में बड़ी संख्या में व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

खाने उतरे, ट्रेन छूटी और खुल गया राज; देवरिया स्टेशन पर पकड़ा गया अंतरराज्यीय चोर गिरोह

जालंधर में चोरी, देवरिया में गिरफ्तारी; दुर्लभ सिक्के और राडो घड़ी समेत लाखों का माल बरामद

अनूप तिवारी की रिपोर्ट

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत देवरिया सदर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने अंतरराज्यीय चोरी गिरोह के दो शातिर सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लगभग आठ लाख रुपये मूल्य का चोरी का माल बरामद किया है। बरामद सामान में ब्रिटिश काल के दुर्लभ चांदी के सिक्के, प्राचीन मूर्तियां, चांदी के आभूषण, बर्तन, महंगी ब्रांडेड घड़ियां और नकदी शामिल है।
पुलिस के अनुसार राजकीय रेलवे पुलिस अनुभाग गोरखपुर के निर्देश पर देवरिया सदर रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध व्यक्तियों की सघन जांच की जा रही थी। इसी दौरान प्लेटफॉर्म नंबर एक के पश्चिमी छोर पर दो युवक पुलिस टीम को देखकर बचने का प्रयास करने लगे। संदेह होने पर जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने दोनों को घेरकर हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उनके बैग से बड़ी मात्रा में कीमती सामान बरामद हुआ, जिसके संबंध में वे कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के समस्तीपुर जनपद के थाना पूसा क्षेत्र के हरपुर मुहम्दा निवासी 28 वर्षीय रवि कुमार और 20 वर्षीय सरमन पासवान के रूप में हुई है। पूछताछ में दोनों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने साथी छोटू पासवान के साथ मिलकर पंजाब के जालंधर जिले में एक बंद मकान में चोरी की वारदात को अंजाम दिया था। चोरी के बाद तीनों ने सामान आपस में बांट लिया और ट्रेन से बिहार लौट रहे थे।
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि देवरिया स्टेशन पर खाने-पीने का सामान लेने के लिए वे ट्रेन से नीचे उतरे थे। इसी दौरान उनकी ट्रेन छूट गई। दूसरी ट्रेन का इंतजार करते समय उनकी गतिविधियां पुलिस को संदिग्ध लगीं और जांच में पूरा मामला खुल गया। उनका तीसरा साथी छोटू पासवान पहले ही दूसरी ट्रेन से अपने हिस्से का सामान लेकर निकल चुका था, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
बरामद सामान में राडो कंपनी की एक कीमती घड़ी, मेडिसि ब्रांड की दो घड़ियां, भगवान हनुमान, नटराज और राधा-कृष्ण की प्राचीन मूर्तियां, लक्ष्मी-गणेश अंकित चांदी के सिक्के, ब्रिटिश शासनकाल के चार दुर्लभ चांदी के सिक्के, आठ जोड़ी चांदी की पायल, चार चांदी के कड़े, चांदी का कलश, गिलास, थाली तथा 89,569 रुपये नकद शामिल हैं। इसके अलावा पुराने समय के 10, 20, 25 और 50 पैसे के बड़ी संख्या में सिक्के भी बरामद किए गए हैं।
पुलिस उपाधीक्षक रेलवे सविरत्न गौतम ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आरोपी पेशेवर चोरी गिरोह के सदस्य प्रतीत हो रहे हैं, जो विभिन्न राज्यों में बंद मकानों की रेकी कर चोरी की घटनाओं को अंजाम देते थे। बरामद ऐतिहासिक और प्राचीन वस्तुओं का विधिक एवं तकनीकी मूल्यांकन कराया जा रहा है। साथ ही पंजाब पुलिस से भी संपर्क कर संबंधित मामलों की जानकारी साझा की जा रही है।
इस कार्रवाई में उत्कृष्ट कार्य करने वाली जीआरपी और आरपीएफ टीम को पुलिस अधीक्षक रेलवे लक्ष्मी निवास मिश्र ने दो हजार रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है।
जीआरपी थाना देवरिया में आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है। फरार आरोपी छोटू पासवान की तलाश जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

रेल ट्रैक पर मिला युवक का शव, हादसा या कुछ और? पुलिस कर रही जांच

मालगाड़ी की चपेट में आने से युवक की दर्दनाक मौत, पुलिस हर पहलू की जांच में जुटी

सतीश पाण्डेय की रिपोर्ट


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। महराजगंज जनपद के कोठीभार थाना क्षेत्र में शनिवार शाम एक दर्दनाक रेल हादसे में 35 वर्षीय युवक की मालगाड़ी की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लेकर पंचनामा की कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल पुलिस हादसे के कारणों की गहन जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम करीब 5:15 बजे सिसवां बाजार रेलवे स्टेशन अधीक्षक ने गेटमैन से मिली सूचना के आधार पर कोठीभार पुलिस को मेमो भेजा। सूचना में बताया गया कि सिसवां बाजार-घुघली रेलखंड पर रेलवे किलोमीटर संख्या 334/14-15 के पास स्थित पिपरिया ढाला के समीप एक व्यक्ति मालगाड़ी की चपेट में आ गया है।
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। मृतक की पहचान बर्मा शर्मा (35 वर्ष) पुत्र अमला शर्मा, निवासी ग्राम रामपुर बांगर, थाना नेंबुआ नौरंगिया, जनपद कुशीनगर के रूप में हुई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजते हुए परिजनों को घटना की सूचना दे दी।
प्रारंभिक जांच में युवक की मौत मालगाड़ी की चपेट में आने से होना सामने आया है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह महज दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है तथा घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।
कोठीभार पुलिस के अनुसार समाचार लिखे जाने तक मृतक के परिजनों की ओर से कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई थी। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद रेल यातायात को सामान्य कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

देवरिया टैक्स बार को मिला नया नेतृत्व, पदाधिकारियों ने ली शपथ

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया टैक्स बार एसोसिएशन के सत्र 2026-27 का शपथ ग्रहण समारोह शुक्रवार सायं सिविल लाइन स्थित एक होटल में गरिमापूर्ण वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह में नवनिर्वाचित पदाधिकारियों ने अपने-अपने पद एवं दायित्वों की शपथ लेकर अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा तथा संगठन को सशक्त बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में निवर्तमान अध्यक्ष राकेश कुमार पाठक एडवोकेट ने बताया कि वे लगातार 12 वर्षों से टैक्स बार की कार्यकारिणी में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते आ रहे हैं। समारोह में निवर्तमान अध्यक्ष शांति स्वरूप दुबे ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष कृष्णानंद सिंह ‘दीपू’ को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इसके उपरांत अध्यक्ष कृष्णानंद सिंह ने उपाध्यक्ष राकेश कुमार पाठक, महासचिव रोशन कुमार जायसवाल, कोषाध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा, संयुक्त सचिव कुलदीप कुमार गुप्ता तथा कार्यकारिणी सदस्य शांति स्वरूप दुबे, विष्णु कुमार गुप्ता, मोहित सेन एवं राकेश कुमार यादव को शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण के बाद अध्यक्ष कृष्णानंद सिंह ने कहा कि टैक्स अधिवक्ताओं के सम्मान, अधिकार और समस्याओं के समाधान के लिए संगठन हमेशा मजबूती से कार्य करेगा। अधिवक्ता हितों की रक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
समारोह के दौरान बार एसोसिएशन के सदस्यों ने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों का पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण कर स्वागत किया तथा सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं। पूरे कार्यक्रम में संगठन की एकजुटता और अधिवक्ताओं के हित में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

लोककला से रंगमंच तक, पूर्वांचल की प्रतिभाओं को मिला स्थायी सांस्कृतिक मंच

पूर्वांचल को मिला सांस्कृतिक धरोहर का नया मंच, 300 साल पुराने बरगद की छांव में शुरू हुआ विमला रामकृष्ण बजाज एम्फीथिएटर


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। पूर्वांचल की समृद्ध लोक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को नया मंच देने की दिशा में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया। बरपार स्थित जागृति उद्यम केंद्र-पूर्वांचल परिसर में विमला रामकृष्ण बजाज एम्फीथिएटर का लोकार्पण किया गया। करीब 300 वर्ष पुराने विशाल बरगद के वृक्ष की छांव में विकसित यह ओपन एयर एम्फीथिएटर अब कलाकारों, विद्यार्थियों, सांस्कृतिक संस्थाओं और युवाओं की रचनात्मक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा।
उद्घाटन के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में बजाज बिऑन्ड के चीफ सीएसआर प्रोजेक्ट्स एवं प्रिंसिपल ऑफिसर श्याम मनियार ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक पहचान उसकी संस्कृति, कला और रचनात्मक अभिव्यक्ति से होती है। उन्होंने बताया कि संस्था शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आजीविका और सामुदायिक सशक्तीकरण के साथ-साथ सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में भी लगातार कार्य कर रही है। पूर्वांचल में इस एम्फीथिएटर की स्थापना का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों और युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए एक स्थायी एवं आधुनिक मंच उपलब्ध कराना है।
जागृति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशुतोष कुमार ने कहा कि पूर्वांचल लोकगीत, लोकनाट्य, शास्त्रीय संगीत और रंगमंच जैसी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का केंद्र रहा है। यह एम्फीथिएटर केवल एक मंच नहीं बल्कि सांस्कृतिक संवाद, कला संवर्धन और नई प्रतिभाओं को अवसर देने का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि देवरिया और आसपास के जिलों में इस तरह का खुला सांस्कृतिक मंच उपलब्ध नहीं है, जिससे क्षेत्रीय कलाकारों को अब अभ्यास और प्रस्तुति के लिए बेहतर स्थान मिल सकेगा।
करीब 465 वर्ग फुट क्षेत्रफल में निर्मित यह मंच लगभग 300 वर्ष पुराने बरगद और सुंदर कमल कुंड के बीच आकर्षक ढंग से तैयार किया गया है। मंच के सामने लगभग 500 दर्शकों के बैठने की क्षमता वाली सीढ़ीनुमा दर्शक दीर्घा बनाई गई है। शाम के समय रंगीन प्रकाश व्यवस्था, प्राकृतिक वातावरण और बरगद की लटकती जटाएं इस पूरे परिसर को विशेष आकर्षण प्रदान करती हैं।
एम्फीथिएटर में भविष्य में लोकगीत, लोकनाट्य, शास्त्रीय संगीत, नृत्य, नाटक, साहित्यिक कार्यक्रम, सांस्कृतिक उत्सव, विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां तथा स्थानीय संस्थाओं के आयोजन किए जाएंगे। इसके अलावा योग, ध्यान और रचनात्मक कार्यशालाओं का आयोजन भी यहां संभव होगा। सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स और युवा इन्फ्लुएंसर्स के लिए भी यह स्थान एक बेहतरीन लोकेशन के रूप में विकसित होने की संभावना रखता है।
पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने वाला यह एम्फीथिएटर आने वाले समय में कला, संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में नई संभावनाओं का द्वार खोल सकता है।

टीईटी परीक्षा के चलते डीएवी स्कूल के पास लगा जाम, आर्य समाज मार्ग पर घंटों रेंगते रहे वाहन


मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के डीएवी इंटर कॉलेज में आयोजित टीईटी परीक्षा के दौरान आर्य समाज मार्ग पर भारी यातायात दबाव के कारण जाम की स्थिति बन गई। परीक्षा केंद्र पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के साथ उनके परिजन भी पहुंचे, जिससे सड़क पर वाहनों का आवागमन प्रभावित हो गया। कुछ समय के लिए दोपहिया और चारपहिया वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और लोगों को गंतव्य तक पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
परीक्षा शुरू होने से पहले और समाप्ति के बाद आर्य समाज मार्ग पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया। सड़क पर जगह-जगह धीमी गति से वाहन रेंगते रहे, जिससे स्थानीय नागरिकों, राहगीरों और बाजार आने-जाने वाले लोगों को भी असुविधा हुई।


यातायात व्यवस्था संभालने के लिए पुलिसकर्मी मौके पर तैनात रहे। उन्होंने वाहनों को व्यवस्थित तरीके से निकालने का प्रयास किया, जिसके बाद धीरे-धीरे जाम की स्थिति सामान्य हुई। हालांकि परीक्षा के दौरान कई बार वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि डीएवी इंटर कॉलेज जैसे बड़े परीक्षा केंद्रों पर प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान पहले से विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया जाना चाहिए। पार्किंग की समुचित व्यवस्था, अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती और वैकल्पिक मार्गों की जानकारी समय रहते उपलब्ध कराई जाए तो अभ्यर्थियों और आम नागरिकों दोनों को राहत मिल सकती है।
टीईटी जैसी बड़ी परीक्षाओं में हजारों अभ्यर्थियों की आवाजाही को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर बेहतर यातायात प्रबंधन की आवश्यकता महसूस की जा रही है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की जाम की समस्या से बचा जा सके।

भीषण गर्मी में प्यासा हनुमान घाट: नगर पालिका का पेयजल केंद्र बंद, श्रद्धालु और राहगीर परेशान


मऊ (राष्ट्र की परंपरा)।भीषण गर्मी के बीच नगर पालिका परिषद मऊ की लापरवाही लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। हनुमान घाट मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और राहगीरों की सुविधा के लिए स्थापित सार्वजनिक पेयजल केंद्र बंद पड़ा है। नलों में पानी नहीं आने से मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं, बुजुर्गों, महिलाओं और राहगीरों को भीषण गर्मी में पेयजल के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।


हनुमान घाट मंदिर नगर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। गर्मी के मौसम में यहां पेयजल केंद्र लोगों के लिए बड़ी राहत साबित होना चाहिए था, लेकिन जलापूर्ति बंद होने से यह सुविधा केवल नाम मात्र की रह गई है।
पेयजल केंद्र पर बड़े अक्षरों में “जल ही जीवन है” का संदेश अंकित है, लेकिन नलों से पानी नहीं निकलने के कारण यह संदेश व्यवस्था पर सवाल खड़े करता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका परिषद को सार्वजनिक सुविधाओं की नियमित निगरानी करनी चाहिए ताकि आमजन को समय पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन से मांग की है कि पेयजल केंद्र की तत्काल जांच कराकर खराबी दूर की जाए तथा नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए, जिससे भीषण गर्मी में लोगों को राहत मिल सके और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को पेयजल के लिए परेशान न होना पड़े।

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा: दौसा में स्लीपर बस-ट्रेलर की टक्कर, 8 लोगों की मौत, कई घायल

दौसा (राष्ट्र की परम्परा)। राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। हरिद्वार से इंदौर जा रही एक निजी स्लीपर बस कोलवा थाना क्षेत्र के रेस्ट एरिया के पास ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर के बाद बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में जा गिरी और उसके पिछले हिस्से में आग लग गई।

इस हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है।

नींद में थे अधिकांश यात्री

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय अधिकांश यात्री गहरी नींद में थे। टक्कर इतनी तेज थी कि बस की ऊपरी बर्थ पर सो रहे कई यात्री नीचे गिर पड़े। हादसे के बाद बस में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।

राहत एवं बचाव अभियान

सूचना मिलते ही कोलवा थाना पुलिस, एंबुलेंस और राहत दल मौके पर पहुंच गए। स्थानीय लोगों की मदद से बस में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला गया और घायलों को दौसा जिला अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किया गया है। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे

हादसे की सूचना मिलते ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेंद्र फौजदार, पुलिस उपाधीक्षक धर्मेंद्र कुमार, कोतवाली थाना प्रभारी भगवान सहाय शर्मा, उपखंड अधिकारी संजू मीणा, तहसीलदार गजानन मीणा, जिला कलेक्टर डॉ. सौम्या झा और पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों के इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया और बेहतर उपचार के निर्देश दिए।

हादसे की जांच शुरू

कोलवा थाना पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त बस और ट्रेलर को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में ट्रेलर से टक्कर के बाद बस के अनियंत्रित होकर खाई में गिरने की बात सामने आई है। हादसे के चलते कुछ समय के लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर यातायात भी प्रभावित रहा।

LPG Price Cut: 5 किलो ‘छोटू’ गैस सिलेंडर हुआ ₹13 सस्ता, जानें आपके शहर में नया रेट

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महंगाई के बीच LPG उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। तेल विपणन कंपनियों ने 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर की कीमत में ₹13 की कटौती कर दी है। नई कीमतें आज से लागू हो गई हैं। इसके बाद राजधानी दिल्ली में 5 किलो का ‘छोटू’ गैस सिलेंडर अब ₹808.50 में मिलेगा।

यह राहत खासतौर पर छोटे परिवारों, पीजी में रहने वाले छात्रों, किराएदारों और छोटे दुकानदारों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है।

क्या होता है FTL गैस सिलेंडर?

FTL (Free Trade LPG) सिलेंडर की कीमत बाजार के अनुसार तय होती है। इस सिलेंडर पर सरकार की ओर से कोई सब्सिडी नहीं दी जाती। 5 किलो वाला यह सिलेंडर कम गैस खपत वाले उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायों के बीच काफी लोकप्रिय है।

5 किलो LPG सिलेंडर के नए रेट

शहर नया रेट
दिल्ली₹808.50
मुंबई₹780
कोलकाता₹840
चेन्नई₹825
पटना₹890
लखनऊ₹850
जयपुर₹835
भोपाल₹820
हैदराबाद₹860
बेंगलुरु₹845

क्यों सस्ता हुआ 5 किलो LPG सिलेंडर?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने के बाद तेल कंपनियों ने 5 किलो FTL सिलेंडर के दाम घटाने का फैसला लिया है।
हालांकि, 14.2 किलो घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में भी ₹183.50 की कटौती की गई है।

अपने शहर का LPG रेट कैसे चेक करें?

उपभोक्ता Indane, Bharat Gas और HP Gas की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने शहर के नवीनतम LPG सिलेंडर के रेट देख सकते हैं। तेल कंपनियां समय-समय पर कीमतों में संशोधन करती रहती हैं।

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में की जवाबी एयरस्ट्राइक, ISKP ठिकानों को निशाना बनाने का दावा

काबुल/इस्लामाबाद (राष्ट्र की परम्परा)। पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में कथित एयरस्ट्राइक किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसने 30 जून की देर रात पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में जवाबी कार्रवाई की। मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान का लक्ष्य इस्लामिक स्टेट खोरासान (ISKP) और उससे जुड़े ठिकाने थे।

पाकिस्तान की कार्रवाई के बाद जवाबी हमला

अफगानिस्तान का कहना है कि 29 जून की रात पाकिस्तान ने उसके तीन प्रांतों में हवाई हमले किए थे, जिनमें 36 नागरिकों की मौत हुई। इसी के जवाब में अफगान बलों ने पाकिस्तान के भीतर कथित ISKP ठिकानों पर कार्रवाई की।

अफगान रक्षा मंत्रालय का दावा

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बलूचिस्तान के पिशिन जिले के सरनान बाजार क्षेत्र में जिस इमारत को निशाना बनाया गया, वह ISKP और अन्य “उपद्रवी नेटवर्क” का संयुक्त अड्डा था। मंत्रालय ने दावा किया कि अभियान पूरी तरह सटीक था और किसी भी नागरिक ठिकाने को निशाना नहीं बनाया गया।

पाकिस्तान का अलग दावा

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जिस इमारत पर हमला हुआ वह एक स्कूल था, जहां अफगान सेना के पूर्व सैनिक रह रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया कि इस हमले में तीन पूर्व सैनिक घायल हुए हैं। बताया जा रहा है कि ये पूर्व सैनिक बाद में नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (NRF) से जुड़ गए थे।

खैबर पख्तूनख्वा में भी कार्रवाई का दावा

अफगानिस्तान ने दावा किया कि खैबर पख्तूनख्वा के कंबर खेल और चित्राल क्षेत्र में भी ISKP के ठिकानों को निशाना बनाया गया। हालांकि इन हमलों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

इस बीच, पेशावर के पास हसन खेल इलाके में एक मकान पर ड्रोन का मलबा गिरने से एक महिला की मौत और छह लोगों के घायल होने की खबर है। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक यह मलबा एयर डिफेंस इंटरसेप्शन के दौरान गिरा। अफगानिस्तान ने इस घटना में अपनी प्रत्यक्ष भूमिका से इनकार किया है।

बढ़ सकता है दोनों देशों के बीच तनाव

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के दावों में स्पष्ट विरोधाभास है। दोनों देशों की ओर से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं और स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।