Friday, April 10, 2026
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भारत-नेपाल सीमा पर बड़ी कार्रवाई: 5700 नशीले इंजेक्शन के साथ दो तस्कर गिरफ्तार

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महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भारत-नेपाल सीमा पर सक्रिय ड्रग तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना पुरन्दरपुर पुलिस और एसओजी स्वाट टीम की संयुक्त कार्रवाई में बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने रानीपुर चौराहे से दो तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से नशे के लिए दुरुपयोग किए जाने वाले 5700 इंजेक्शन बरामद किए हैं, जिनकी बाजार कीमत करीब 10 लाख रुपये आंकी गई है।

यह कार्रवाई एडीजी गोरखपुर जोन अशोक मुथा जैन और डीआईजी गोरखपुर रेंज एस. चनप्पा के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई। पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ और क्षेत्राधिकारी फरेंदा अनुरुद्ध कुमार के पर्यवेक्षण में टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।

मुखबिर से सूचना मिलने पर थाना पुरन्दरपुर क्षेत्र के रानीपुर चौराहे पर घेराबंदी की गई। सुबह करीब 5 बजे यूपी 53 एफएन 8304 नंबर की कार को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें सवार दो व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया।

गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान राजेन्द्र धरिकार उर्फ इलू निवासी जुगौंली, सोनौली और आदित्य कुमार मिश्र निवासी कम्हरिंया बुजुर्ग, कोल्हुई के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान कार की डिक्की से 1900 एम्पुल डायजेपाम, 1900 बुप्रेनॉर्फिन और 1900 प्रोमेथाजीन हाइड्रोक्लोराइड इंजेक्शन बरामद किए गए। इसके अलावा दो मोबाइल फोन, एक एटीएम कार्ड, 9000 रुपये नकद और कार भी जब्त की गई।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे इन इंजेक्शनों को नेपाल ले जाकर ऊंचे दामों पर बेचते थे और पिछले करीब छह महीने से इस तस्करी में सक्रिय थे। पुलिस के अनुसार बरामद दवाएं सामान्यतः चिकित्सीय उपयोग में आती हैं, लेकिन इनका अवैध रूप से नशे के लिए उपयोग किया जाता है। इनका मिश्रण कर कॉकटेल ड्रग तैयार किया जाता है, जो युवाओं में तेजी से फैल रहा है और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है।

इस मामले में थाना पुरन्दरपुर में मु.अ.सं. 96/2026 के तहत धारा 8/21/23 एनडीपीएस एक्ट में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को न्यायालय भेज दिया गया है। पुलिस अब इस तस्करी नेटवर्क की सप्लाई चेन की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा करने की बात कही जा रही है।

इस कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा पूरी टीम को 25,000 रुपये के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि नशे के खिलाफ इस अभियान में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

लंबे इंतजार के बाद शिक्षामित्रों को राहत, मानदेय में भारी इजाफा

उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों को बड़ी राहत, मानदेय 10,000 से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के लाखों शिक्षामित्रों को बड़ी सौगात देते हुए उनके मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि का निर्णय लिया है। बेसिक शिक्षा विभाग से जारी शासनादेश के अनुसार अब परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को 10,000 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 18,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। यह नई व्यवस्था 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।
यह निर्णय अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश के तहत लिया गया है, जिसे बेसिक शिक्षा अनुभाग-5, लखनऊ से जारी किया गया। शासन के इस कदम को शिक्षामित्रों के लंबे समय से चल रहे मांगों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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प्रदेश में वर्तमान समय में लगभग 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं, जो प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षामित्र योजना की शुरुआत वर्ष 1999 में इस उद्देश्य से की गई थी कि प्रदेश में शिक्षक-छात्र अनुपात को संतुलित रखा जा सके और प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमिकरण सुनिश्चित हो।
सरकार के इस फैसले के अनुसार शिक्षामित्रों को वर्ष में 11 माह तक 18,000 रुपये प्रतिमाह की दर से मानदेय दिया जाएगा। पहले यह राशि मात्र 10,000 रुपये थी, जिसे अब लगभग 80 प्रतिशत तक बढ़ाया गया है। इस बढ़ोतरी से शिक्षामित्रों की आर्थिक स्थिति में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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शासनादेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि संबंधित विभाग इस आदेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करें। इसके लिए महानिदेशक, स्कूल शिक्षा सहित विभिन्न अधिकारियों को आदेश की प्रतिलिपि भेजी गई है ताकि समयबद्ध तरीके से इसका क्रियान्वयन किया जा सके।
इस फैसले के बाद प्रदेश के शिक्षामित्रों में खुशी की लहर देखी जा रही है। लंबे समय से मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन और ज्ञापन दिए जा रहे थे। ऐसे में सरकार का यह निर्णय उनके लिए राहत भरा साबित हो सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फैसले से न केवल शिक्षामित्रों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा। बेहतर आर्थिक स्थिति के चलते शिक्षामित्र अपने कार्य को और अधिक समर्पण के साथ कर सकेंगे, जिसका सीधा लाभ छात्रों को मिलेगा।

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हालांकि, कुछ संगठनों का कहना है कि यह वृद्धि स्वागतयोग्य है, लेकिन अभी भी स्थायी समाधान की आवश्यकता है। शिक्षामित्र लंबे समय से स्थायी नियुक्ति की मांग भी करते रहे हैं, जिस पर सरकार को आगे विचार करना होगा।
फिलहाल, मानदेय में यह वृद्धि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखी जा रही है, जिससे हजारों परिवारों को आर्थिक संबल मिलेगा और शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार होगा।

प्रदर्शनी में झलकी विद्यार्थियों की रचनात्मकता और कौशल

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग में आयोजित 10 दिवसीय कौशल विकास कार्यशाला का समापन भव्य प्रदर्शनी एवं प्रमाणपत्र वितरण समारोह के साथ हुआ।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा टाई-एंड-डाई, बाटिक, ब्लॉक प्रिंटिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग, डिजिटल एम्ब्रॉयडरी, मैक्रमे एवं स्टेंसिल आर्ट जैसे हस्तनिर्मित उत्पादों का प्रदर्शन एवं विक्रय किया गया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, गुणवत्ता और नवाचार की सराहना की गई।
मुख्य अतिथि कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाते हैं और उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यशाला में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्रा अनुप्रिया यादव को सर्वोत्तम प्रशिक्षु के रूप में सम्मानित करते हुए डिजिटल सिलाई मशीन प्रदान की गई। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दिव्या रानी सिंह ने बताया कि इस प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को व्यावहारिक कौशल प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. नीता सिंह ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं। यह कार्यशाला Usha International Limited के सहयोग से आयोजित की गई।
समापन पर प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए तथा प्रदर्शनी में उत्पादों की बिक्री से विद्यार्थियों में उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की भावना को बल मिला।

वनस्पति विज्ञान विभाग में मेमोरियल लेक्चर सीरीज, विशेषज्ञों ने विज्ञान और शोध पर रखे विचार

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में 10 अप्रैल को प्रो. के.एस. भार्गव मेमोरियल लेक्चर, प्रो. ए.के. श्रीवास्तव मेमोरियल लेक्चर तथा प्रो. कमल रिसर्च फाउंडेशन लेक्चर की एक दिवसीय श्रृंखला का भव्य आयोजन हुआ।
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर जितेंद्र पांडे (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय), प्रोफेसर एस.एन. पाण्डेय (लखनऊ विश्वविद्यालय) तथा प्रोफेसर ए.एन. राय (डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय) उपस्थित रहे। प्रो. ए.एन. राय इस विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र भी हैं।
कार्यक्रम की संरक्षक कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. के.एस. भार्गव एवं प्रो. कमल के योगदान को याद करते हुए विश्वविद्यालय को वैश्विक पहचान दिलाने में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।
वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अनिल कुमार द्विवेदी ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन सचिव डॉ. दीपा श्रीवास्तव एवं डॉ. राजवीर सिंह चौहान की सक्रिय भूमिका से कार्यक्रम सफल रहा।
द्वितीय सत्र में व्याख्यान श्रृंखला का शुभारंभ हुआ। प्रथम व्याख्यान में प्रो. जितेंद्र पांडे ने “गीता और विज्ञान” विषय पर विचार रखे, जबकि द्वितीय व्याख्यान में प्रो. एस.एन. पाण्डेय ने “माइक्रोन्यूट्रिएंट मैनेजमेंट एंड क्रॉप प्रोडक्शन अंडर एनवायरमेंटल स्ट्रेस” विषय पर व्याख्यान दिया।
लंच के उपरांत प्रो. कमल रिसर्च फाउंडेशन लेक्चर आयोजित हुआ, जिसमें विश्वप्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रोफेसर कमल अस्वस्थता के बावजूद उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रो. ए.एन. राय ने “प्रो. कमल: व्यक्तित्व एवं कृतित्व” विषय पर व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम में विज्ञान संकाय के डीन प्रोफेसर अजय सिंह सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य, शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। संचालन डॉ. दीपा श्रीवास्तव ने किया।

वोटरों की बढ़ी ताकत: अंतिम सूची में 84 लाख से ज्यादा नए नाम जुड़े

अंतिम निर्वाचक नामावली 2026 जारी—मतदाताओं में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, कई जिलों में बड़ा उछाल


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित अंतिम निर्वाचक नामावली ने प्रदेश की चुनावी तस्वीर को नई दिशा दे दी है। जारी आंकड़ों के अनुसार मतदाताओं की कुल संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो लोकतंत्र की मजबूती और बढ़ती जनभागीदारी का स्पष्ट संकेत है। खासतौर पर युवा और महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी ने इस सूची को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो पुरुष मतदाताओं की संख्या 13,39,84,792 दर्ज की गई है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 7,30,71,061 है, जो कुल का 54.54 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं तृतीय लिंग के मतदाताओं की संख्या 6,09,09,525 (45.46 प्रतिशत) दर्ज की गई है। यह आंकड़े समाज के हर वर्ग की चुनावी प्रक्रिया में बढ़ती भागीदारी को दर्शाते हैं।
युवा मतदाताओं की बात करें तो 18-19 आयु वर्ग के मतदाताओं की संख्या में भी वृद्धि देखी गई है। हालांकि कुल प्रतिशत में यह अभी कम है, लेकिन संख्या में लगातार बढ़ोतरी भविष्य के चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जेण्डर रेशियो 834 दर्ज किया गया है, जो संतुलन की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

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मसौदा मतदाता सूची के मुकाबले अंतिम सूची में कुल 84,28,767 मतदाताओं की वृद्धि हुई है। इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या में 42,27,902 और महिला मतदाताओं में 42,00,778 की वृद्धि दर्ज की गई है। तृतीय लिंग के मतदाताओं में 87 की वृद्धि हुई है, जबकि 18-19 आयु वर्ग के मतदाताओं में 14,29,379 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जेण्डर रेशियो में भी 10 अंकों की वृद्धि देखी गई है, जो सामाजिक संतुलन की ओर इशारा करता है।
जनपद स्तर पर देखें तो प्रयागराज में सबसे अधिक 3,29,421 मतदाताओं की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बाद लखनऊ में 2,85,961, बरेली में 2,57,920, गाजियाबाद में 2,43,666 और जौनपुर में 2,37,590 मतदाताओं की वृद्धि हुई है। यह आंकड़े बताते हैं कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मतदाता संख्या तेजी से बढ़ रही है।

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विधानसभा क्षेत्रों में भी कई जगहों पर उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 82,898 मतदाताओं की वृद्धि हुई है। इसके बाद जौनपुर में 56,118, लखनऊ पश्चिम में 54,822, लोनी में 53,679 और फिरोजाबाद में 47,757 मतदाताओं की वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि न केवल जनसंख्या के विस्तार का परिणाम है, बल्कि जागरूकता अभियानों और चुनाव आयोग के प्रयासों का भी असर है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया अब अधिक पारदर्शी और सुलभ हो गई है, जिससे अधिक लोग इसमें शामिल हो पा रहे हैं।
कुल मिलाकर, अंतिम निर्वाचक नामावली 2026 प्रदेश में लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। आने वाले चुनावों में यह बढ़ी हुई मतदाता संख्या निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

युवा उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन सख्त, एक सप्ताह में ऋण निस्तारण के निर्देश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजनाओं की समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी उपस्थित रहे।
बैठक में उपायुक्त उद्योग/सदस्य सचिव राजकुमार शर्मा ने योजना की अद्यतन प्रगति की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि मिशन कार्यालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु जनपद का लक्ष्य 1600 निर्धारित किया गया है, जिसे सभी बैंकों को प्रेषित कर दिया गया है।
जिलाधिकारी श्री कुमार ने बैठक में उपस्थित सभी बैंकर्स, क्षेत्रीय प्रबंधकों एवं जिला समन्वयकों को निर्देशित किया कि योजना के अंतर्गत विभिन्न बैंक शाखाओं में लंबित ऋण पत्रावलियों का निस्तारण एक सप्ताह के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अग्रणी जिला प्रबंधक एसबीआई लीड बैंक पवन कुमार सिन्हा को निर्देश दिया कि उद्योग विभाग की योजनाओं में लंबित आवेदन पत्रों का सतत फॉलोअप कर प्रगति सुनिश्चित कराएं तथा स्वीकृति एवं वितरण से संबंधित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण करें।
मुख्य विकास अधिकारी श्री त्रिपाठी ने भी सभी जिला बैंक समन्वयकों को निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजनांतर्गत प्राप्त आवेदन पत्रों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए। साथ ही उपायुक्त उद्योग एवं अग्रणी जिला प्रबंधक को योजना की नियमित समीक्षा करते हुए लक्ष्यानुरूप प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
इस दौरान वित्तीय वर्ष 2025-26 में उत्कृष्ट प्रगति करने वाले जिला बैंक समन्वयकों, बैंक शाखा प्रबंधकों, अग्रणी जिला प्रबंधक पवन कुमार सिन्हा तथा उ0प्र0 ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक विजय प्रसाद को प्रशस्ति-पत्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। साथ ही योजना के अंतर्गत चयनित युवा उद्यमियों को भी प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।
बैठक में उपायुक्त उद्योग राजकुमार शर्मा, जितेंद्र कुमार गौतम, सहायक आयुक्त उद्योग सहित अन्य जनपद स्तरीय अधिकारी, अग्रणी जिला प्रबंधक एवं जिला बैंक समन्वयक उपस्थित रहे।

“जनगणना 2027: विकास, राजनीति और समाज का नया ब्लूप्रिंट”

भारत की जनगणना 2027: सुप्रीम कोर्ट की मुहर के साथ डेटा क्रांति की ओर बढ़ता देश, सामाजिक न्याय और नीतिगत बदलाव का नया अध्याय

भारत में प्रस्तावित जनगणना 2027 केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संरचना को नए सिरे से परिभाषित करने वाला ऐतिहासिक कदम साबित होने जा रही है। लगभग 146 करोड़ से अधिक आबादी वाले इस विशाल देश में अंतिम जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी, जबकि नियमानुसार यह प्रक्रिया 2021 में पूरी होनी थी। लेकिन वैश्विक महामारी कोविड-19 और प्रशासनिक चुनौतियों के चलते यह टलती रही। अब 2027 में होने वाली जनगणना को भारत के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच 10 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने जातिगत जनगणना को रोकने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ठोस आधार प्रस्तुत नहीं कर पाया और नीतिगत मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप उचित नहीं है। इससे सरकार को इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का स्पष्ट रास्ता मिल गया है।
2027 की जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता इसका पूर्णतः डिजिटल होना है। पहली बार मोबाइल ऐप, ऑनलाइन पोर्टल, जियो-टैगिंग और रियल टाइम डेटा संग्रहण जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे डेटा अधिक सटीक, तेज और पारदर्शी होगा। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स के माध्यम से सरकार को योजनाएं बनाने में बड़ी सहायता मिलेगी।

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इस जनगणना का एक और महत्वपूर्ण पहलू जातिगत डेटा संग्रह है। वर्ष 1931 के बाद पहली बार सभी जातियों का व्यापक डेटा एकत्र किया जाएगा। अब तक केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आंकड़े ही लिए जाते रहे हैं। यह पहल सामाजिक न्याय, संसाधनों के समान वितरण और नीतिगत सुधारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, इसके साथ यह बहस भी जुड़ी है कि इससे सामाजिक विभाजन बढ़ सकता है, जबकि समर्थक इसे सटीक नीति निर्माण का आधार मानते हैं।
जनगणना 2027 को दो चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण 2026 में हाउस लिस्टिंग और आवास गणना का होगा, जबकि दूसरा चरण फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना का होगा। इसमें नागरिकों की आयु, शिक्षा, रोजगार, जीवन स्तर और जाति से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी।
इस बार जनगणना में 33 प्रश्न शामिल किए गए हैं, जो केवल जनसंख्या तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जीवनशैली, तकनीकी पहुंच और आर्थिक स्थिति का भी आकलन करेंगे। पानी, बिजली, शौचालय, इंटरनेट, मोबाइल, वाहन और उपभोग से जुड़े प्रश्न सरकार को जमीनी हकीकत समझने में मदद करेंगे।

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आर्थिक दृष्टि से यह जनगणना अगले एक दशक की विकास योजनाओं का आधार बनेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल ढांचे से जुड़ी नीतियां इन्हीं आंकड़ों के आधार पर तय होंगी। वहीं सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर यह प्रतिनिधित्व, आरक्षण और अधिकारों की बहस को भी प्रभावित कर सकती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की यह डिजिटल जनगणना एक उदाहरण बन सकती है। यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है, तो अन्य विकासशील देशों के लिए यह एक मॉडल के रूप में उभरेगी कि कैसे तकनीक के माध्यम से बड़े पैमाने पर डेटा संग्रहण और नीति निर्माण किया जा सकता है।
स्पष्ट है कि जनगणना 2027 केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक व्यापक दस्तावेज होगी। यदि इसे पारदर्शिता और संतुलन के साथ लागू किया गया, तो यह देश को अधिक समावेशी और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


संकलनकर्ता: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)

आस्था का बाज़ारीकरण: वीआईपी दर्शन बनाम आम श्रद्धालु, बराबरी पर बड़ा सवाल

आस्था या सुविधा? वीआईपी दर्शन पर उठते गंभीर सवाल


भारत में धर्म और आस्था केवल व्यक्तिगत विश्वास नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन की मजबूत नींव हैं। मंदिर और तीर्थ स्थल सदियों से समानता, शांति और आध्यात्मिक संतुलन के प्रतीक रहे हैं। “भगवान के दरबार में सब बराबर हैं” जैसी मान्यताएं भारतीय समाज के मूल में रही हैं। लेकिन हाल के वर्षों में यह धारणा धीरे-धीरे चुनौती के घेरे में आती दिखाई दे रही है।
देश के प्रमुख मंदिरों में वीआईपी दर्शन की बढ़ती व्यवस्था ने एक नई बहस को जन्म दिया है। विशेष पूजन, अभिषेक और आरती के नाम पर भारी शुल्क देकर कुछ श्रद्धालु मिनटों में दर्शन कर लेते हैं, जबकि आम लोग घंटों लंबी कतारों में खड़े रहते हैं। यह अंतर केवल सुविधा का नहीं, बल्कि अनुभव और सम्मान का भी बन जाता है।
एक ओर आर्थिक रूप से सक्षम लोग सहज और व्यवस्थित दर्शन का लाभ उठाते हैं, वहीं दूसरी ओर आम श्रद्धालु भीड़, धक्का-मुक्की और कई बार दुर्व्यवहार का सामना करते हैं। यह स्थिति केवल असुविधाजनक नहीं, बल्कि उनकी आस्था को ठेस पहुंचाने वाली भी होती है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है—क्या अब आस्था भी “प्रीमियम सेवा” बनती जा रही है?
वीआईपी दर्शन के पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि इससे मंदिरों को अतिरिक्त आय होती है, जिससे व्यवस्थाओं में सुधार संभव होता है। यह तर्क आंशिक रूप से सही है, क्योंकि बड़े मंदिरों में लाखों श्रद्धालुओं की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन जब यह व्यवस्था असंतुलित हो जाती है और आम श्रद्धालुओं की सुविधा प्रभावित होने लगती है, तब यह एक गंभीर सामाजिक समस्या बन जाती है।
कई बार देखा गया है कि वीआईपी दर्शन के दौरान सामान्य कतारों को रोक दिया जाता है, जिससे आम लोगों का इंतजार और बढ़ जाता है। इससे असंतोष और आक्रोश स्वाभाविक रूप से बढ़ता है। इसके साथ ही कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों का दोहरा व्यवहार—वीआईपी के लिए विनम्रता और आम लोगों के लिए कठोरता—भी सामाजिक असमानता को और गहरा करता है।
धार्मिक स्थलों का उद्देश्य केवल पूजा नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन प्रदान करना होता है। लेकिन जब वहां पहुंचने वाला व्यक्ति भेदभाव और अव्यवस्था का सामना करता है, तो उसका आध्यात्मिक अनुभव प्रभावित होता है। यह स्थिति न केवल निराशाजनक है, बल्कि आस्था की मूल भावना के विपरीत भी है।
इस समस्या का समाधान संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण में निहित है। मंदिर प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि वीआईपी सेवाएं सीमित रहें और आम श्रद्धालुओं के अधिकार प्रभावित न हों। भीड़ प्रबंधन के लिए तकनीक का उपयोग—जैसे ऑनलाइन बुकिंग, टाइम स्लॉट और डिजिटल कतार व्यवस्था—सभी के लिए बेहतर अनुभव सुनिश्चित कर सकते हैं।
इसके साथ ही कर्मचारियों को संवेदनशीलता और शिष्टाचार का प्रशिक्षण देना भी जरूरी है, ताकि हर श्रद्धालु को समान सम्मान मिल सके। सरकार और मंदिर ट्रस्टों को इस दिशा में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए, जिससे पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित हो सके।
समाज की भूमिका भी इस मुद्दे में महत्वपूर्ण है। जब तक लोग इस असमानता को सामान्य मानते रहेंगे, तब तक बदलाव संभव नहीं है। आस्था का वास्तविक अर्थ केवल पूजा नहीं, बल्कि समानता, करुणा और न्याय को अपनाना भी है।
आज समय की मांग है कि हम इस पर गंभीरता से विचार करें—क्या हम ऐसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं जहां भगवान के दर्शन भी आर्थिक स्थिति पर निर्भर हों? या फिर हम उस मूल भावना को बचाए रखेंगे, जिसमें हर श्रद्धालु समान अधिकार और सम्मान का पात्र है?
मंदिरों की पवित्रता उनकी भव्यता से नहीं, बल्कि वहां मिलने वाले अनुभव से तय होती है। यदि वह अनुभव भेदभाव से भरा होगा, तो आस्था की नींव कमजोर पड़ जाएगी। इसलिए जरूरी है कि हम मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाएं, जहां हर व्यक्ति को यह महसूस हो कि वह सच में भगवान के दरबार में है—जहां सब बराबर हैं।

(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)

आभासी माध्यमों की भाषा से मौखिक परंपराओं को चुनौती: प्रो. जीएन देवी

राष्ट्रीय संगोष्ठी में मौखिक परंपराओं पर मंथन, एआई की भाषा को बताया चुनौती

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेज़ी विभाग एवं आईसीएसएसआर, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में “ट्रेडिशन, ट्रांसमिशन एवं ट्रांसफॉर्मेशन: ओरेलिटी एंड इंडीजिनस नॉलेज सिस्टम्स ऑफ साउथ एशिया इन अ ग्लोबल वर्ल्ड” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रोफ़ेसर जी एन देवी ने बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि मौखिक परंपराओं के प्रसार में आभासी माध्यमों की भाषाएं एक बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि गोरक्षभूमि में आना उनके लिए सौभाग्य का विषय है। नाथ संप्रदाय का प्रभाव देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक रूप से देखा जाता है। महाराष्ट्र में अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि मराठी परंपरा में नाथ संप्रदाय के गुरु गहिनीनाथ की गोरखबानी से प्रभावित होकर एक साधारण बालक निरूक्तिनाथ, आगे चलकर नाथ संप्रदाय और वारकरी परंपरा के प्रतिष्ठित संत के रूप में स्थापित हुए। यह परंपरा भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई सीमाओं को पार कर जनमानस की चेतना को गहराई से प्रभावित करती रही है।
परंपरा के संप्रेषण एवं रूपांतरण पर विचार रखते हुए उन्होंने कहा कि परंपरा स्थानीय और सुदूर यथार्थ के सम्मिश्रण एवं संचार से समृद्ध होती है। ओरेलिटी को केवल मौखिक ध्वनि तक सीमित न मानते हुए उन्होंने इसे एक व्यापक मानसिक प्रक्रिया बताया, जो मानव की संवेदनाओं, अनुभवों और सांस्कृतिक स्मृतियों से जुड़ी होती है।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भाषा को वर्चुअल बताते हुए कहा कि यह मानव भाषण के लिए संभावित खतरा उत्पन्न कर सकती है, क्योंकि एआई की भाषा आभासी संरचना पर आधारित होती है, जबकि ओरेलिटी वास्तविक मानवीय अनुभव और अभिव्यक्ति से संबंधित है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रोफ़ेसर नंदिनी साहू ने लोक संस्कृति के क्षेत्र में बढ़ती शोध संभावनाओं तथा विश्वविद्यालयों में संचालित हो रहे विविध अकादमिक कार्यक्रमों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कुलपति प्रोफ़ेसर पूनम टंडन ने स्मारिका का विमोचन करते हुए अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि इस प्रकार की राष्ट्रीय संगोष्ठियां भाषा, मौखिक परंपरा और स्वदेशी ज्ञान परंपराओं को समझने और संरक्षित करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करती हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रोफ़ेसर जी एन देवी द्वारा अंग्रेज़ी में लिखित पुस्तक “महाभारत: द एपिक एंड द नेशन” के हिंदी अनुवाद “महाभारत: महाकाव्य एवं राष्ट्र” का लोकार्पण भी किया गया, जिसका अनुवाद अंग्रेज़ी विभाग के पुरातन छात्र हरि प्रताप त्रिपाठी ने किया है।
कार्यक्रम की समन्वयक विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर सुनीता मुर्मू एवं सह-संयोजक प्रोफ़ेसर गौर हरि बेहेरा ने आभार व्यक्त किया। संचालन आयोजक सचिव डॉ. आमोद कुमार राय ने किया।

सरकार की उपलब्धियों को घर-घर पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी: प्रभाकर दुबे

सहजनवां/गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय जनता पार्टी द्वारा चलाए जा रहे वार्ड/गांव सम्पर्क अभियान के तहत नगर पंचायत घघसरा बाजार में चेयरमैन प्रभाकर दुबे ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार के 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आम जनमानस के बीच पहुंचकर जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों से संबंधित पत्रक वितरित किया।
इस अवसर पर चेयरमैन प्रभाकर दुबे ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बीते 9 वर्षों में विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। गरीब, किसान, महिला और युवाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए यह सम्पर्क अभियान महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को घर-घर तक पहुंचाना हम सभी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है।
इस दौरान कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों और लाभार्थीपरक कार्यक्रमों की जानकारी लोगों को दी तथा संवाद स्थापित किया।
कार्यक्रम में शक्ति केंद्र संयोजक संजय त्रिपाठी, मनोनीत सभासद राम जनक मौर्य, अवधनाथ मिश्रा, राजन मिश्रा, शुभम राज एवं अवनीश मिश्रा सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

ग्राम रोजगार सेवकों की समस्याओं के समाधान का भरोसा, शंकर वाटिका में भव्य स्वागत

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ जनपदीय इकाई महराजगंज के तत्वावधान में जिला मुख्यालय स्थित शंकर वाटिका में एक भव्य स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व संघ के जिलाध्यक्ष/ प्रांतीय उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद ने किया। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निवर्तमान सांसद प्रतिनिधि भरथ शुक्ला एवं काशीनाथ सिंह का जोरदार स्वागत किया गया।

समारोह में जनपद भर से बड़ी संख्या में ग्राम रोजगार सेवकों की उपस्थिति रही, जिससे पूरे आयोजन में उत्साह और ऊर्जा का माहौल बना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष/प्रांतीय उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद ने बताया कि दोनों प्रतिनिधियों ने हाल ही में लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचकर ग्राम रोजगार सेवकों की ज्वलंत समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।

उन्होंने रोजगार सेवकों की विभिन्न मांगों से संबंधित विस्तृत ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपते हुए समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने इन मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए सकारात्मक आश्वासन दिया है और कहा है कि ग्राम रोजगार सेवकों की समस्याओं का निस्तारण जल्द कराया जाएगा।

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इस आश्वासन से जनपद के रोजगार सेवकों में नई उम्मीद जगी है और संगठन के पदाधिकारियों ने इसे एक महत्वपूर्ण पहल करार दिया है।
समारोह में जिला महासचिव इंद्रमणि विश्वकर्मा, घुघली ब्लॉक अध्यक्ष बंधु मद्धेशिया, ब्लॉक महामंत्री राहुल कुमार गुप्ता, इंद्र विजय यादव, प्रवीण मणि त्रिपाठी, राहुल गुप्ता, संतोष रैना, धनराज, राजेंद्र, धर्मेंद्र, ओमप्रकाश सिंह, ओम प्रकाश आर्य, सर्वेश मद्धेशिया, अमित कुमार, मोहन लाल प्रजापति, अशोक कुमार, चिन्नू प्रसाद, राम मिलन तथा पूर्व ग्राम प्रधान वकील उपाध्याय, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि कमाल अहमद सहित तमाम
ग्राम रोजगार सेवक मौजूद रहें।

समारोह के अंत में संगठन के पदाधिकारियों ने सरकार से अपेक्षा जताई कि ग्राम रोजगार सेवकों के हित में शीघ्र ठोस निर्णय लेकर उनकी लंबित समस्याओं का समाधान किया जाएगा, जिससे प्रदेश भर के रोजगार सेवकों को राहत मिल सके।

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फार्मर आईडी अब अनिवार्य: योजनाओं का लाभ लेने के लिए 15 अप्रैल तक कराएं रजिस्ट्रेशन

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के किसानों के लिए अब फार्मर आईडी (किसान पहचान पत्र) अनिवार्य कर दी गई है। कृषि विभाग के अनुसार, सभी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए यह पहचान पत्र जरूरी होगा।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक, बीज, कीटनाशी और कृषि यंत्रों के वितरण सहित सभी लाभार्थीपरक योजनाएं अब फार्मर आईडी के आधार पर ही संचालित होंगी। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Price) पर होने वाली खरीद में भी यह अनिवार्य रहेगी।

जानकारी के अनुसार, मई 2026 से रासायनिक उर्वरकों का वितरण पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, जिसे AgriStack से जोड़ा जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और पात्र किसानों को समय पर लाभ मिल सकेगा।
किसानों के पंजीकरण के लिए 6 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान जनपद के सभी ग्राम पंचायतों में कैंप मोड में संचालित हो रहा है।

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किसानों से अपील की गई है कि वे ग्राम सचिवालय (पंचायत भवन) में जाकर आधार कार्ड, खतौनी और मोबाइल नंबर के साथ अपना रजिस्ट्रेशन कराएं। इसके अलावा जनसेवा केंद्र, मोबाइल ऐप और कृषि विभाग के कर्मचारियों की मदद से भी पंजीकरण कराया जा सकता है।

उप कृषि निदेशक Sanjeev Kumar Patel ने किसानों से समय रहते रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की है, ताकि वे भविष्य में किसी भी योजना के लाभ से वंचित न रहें।

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संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। Election Commission of India के निर्देशानुसार अर्हता तिथि 01 जनवरी 2026 के आधार पर विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के तहत जनपद में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी Alok Kumar ने की।

बैठक में उप जिला निर्वाचन अधिकारी/अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) Jaiprakash सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान विधानसभा क्षेत्रों की फोटोयुक्त निर्वाचक नामावलियों को अंतिम रूप से प्रकाशित किया गया।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि 6 जनवरी 2026 से 6 मार्च 2026 तक दावे और आपत्तियां प्राप्त की गईं, जिनका निस्तारण 1 अप्रैल 2026 तक पूरा कर लिया गया। इसके बाद अब अंतिम सूची जारी कर दी गई है।

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विधानसभा क्षेत्रवार मतदाता संख्या:

• 312 मेहदावल: 4,12,243 मतदाता
• 313 खलीलाबाद: 4,07,189 मतदाता
• 314 धनघटा (अजा): 3,50,084 मतदाता

इस प्रकार जनपद में कुल 11,69,516 मतदाता पंजीकृत किए गए हैं। जनपद का जेंडर रेशियो 811 और ई-पिक रेशियो 54.70 दर्ज किया गया है।

बैठक में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मतदाता सूची की प्रतियां उपलब्ध कराई गईं। अधिकारी ने बताया कि अंतिम सूची आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध है, जहां नागरिक अपने नाम की जांच कर सकते हैं।
जिन पात्र मतदाताओं का नाम अभी सूची में शामिल नहीं हो पाया है, वे Form-06 भरकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

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नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। देशभर में आम नागरिकों को न्याय तक आसान पहुंच उपलब्ध कराने के लिए Judicial Council ने बड़ी पहल की है। काउंसिल ने कई प्रमुख शहरों में लीगल एड सेंटर खोलने की घोषणा की है।

इस योजना के तहत New Delhi, Dehradun, Kanpur, Lucknow, Fatehpur, Jaipur, Sultanpur, Etawah और Bharatpur में जल्द ही ये केंद्र शुरू किए जाएंगे।

इन लीगल एड सेंटरों का मुख्य उद्देश्य गरीब, वंचित, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, मजदूर और छात्रों सहित सभी वर्गों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। यहां लोगों को प्रारंभिक कानूनी सलाह, दस्तावेज़ी मार्गदर्शन, शिकायत निवारण और उनके अधिकारों की जानकारी दी जाएगी।

काउंसिल के चेयरमैन Rajeev Agnihotri ने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से न्याय व्यवस्था को लोगों के और करीब लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि “न्याय केवल अदालतों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हर नागरिक तक पहुंचना चाहिए।”

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इन केंद्रों पर नागरिक विवाद, पारिवारिक मामले, उपभोक्ता शिकायतें, साइबर अपराध, महिला एवं बाल अधिकार, श्रम विवाद और वरिष्ठ नागरिक संरक्षण से जुड़े मामलों में मार्गदर्शन मिलेगा। साथ ही कानूनी साक्षरता शिविर, जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

काउंसिल के अनुसार, इन केंद्रों का संचालन अधिवक्ताओं, स्वयंसेवकों, सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से किया जाएगा। इसके अलावा, टेलीफोनिक सहायता और शिकायत समाधान की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लोग भी लाभ उठा सकें।

यह पहल देश में कानूनी जागरूकता बढ़ाने और हर व्यक्ति को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर नगर के ईचौना पश्चिमी वार्ड में गोष्ठी का आयोजन कर Samuel Hahnemann की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत उनके चित्र पर माल्यार्पण कर की गई।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए Nisha Tiwari ने कहा कि डॉ सैमुअल हैनिमैन होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के जनक थे। उन्होंने 18वीं सदी के अंत में इस चिकित्सा प्रणाली की स्थापना की, जो आज भी विश्वभर में प्रचलित है। उनकी प्रसिद्ध कृति Organon of Medicine आज भी होम्योपैथी चिकित्सकों के लिए मार्गदर्शक मानी जाती है।

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इस अवसर पर Dharmendra Pandey ने कहा कि होम्योपैथी एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है, जिसमें रोग का उपचार उन्हीं तत्वों से किया जाता है जो उसके लक्षण उत्पन्न करते हैं। उन्होंने बताया कि यह पद्धति सुरक्षित है और इसमें साइड इफेक्ट न के बराबर होते हैं।

कार्यक्रम में डॉ एस के तिवारी, मनोज पांडेय, राजकुमार पटवा, अमित कुमार यादव, अखिलेश मिश्र, मोहन प्रसाद, सुनील तिवारी, सत्यम पांडेय, रमेश मद्देशिया और मुन्ना नाथ तिवारी सहित कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।

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