Monday, April 27, 2026
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80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

“शहरी भारत का नया ब्लूप्रिंट: नीति आयोग की बड़ी पहल”

नीति आयोग की रिपोर्ट: शहरी भारत के भविष्य को नई दिशा देने वाली व्यापक रूपरेखा


भारत तेजी से शहरीकरण के दौर से गुजर रहा है, जहां शहर अब केवल आवासीय क्षेत्र नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में नीति आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट “Strengthening Urban Governance in India: A Framework for Reform” देश के शहरी प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। यह रिपोर्ट विशेष रूप से 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए एक समग्र सुधार ढांचा प्रस्तुत करती है।

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शहरीकरण: अवसर और चुनौतियों का संगम
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, वर्ष 2030 तक भारत की लगभग 40% आबादी शहरों में निवास करेगी। यह परिवर्तन आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देगा, लेकिन साथ ही यातायात जाम, प्रदूषण, जल संकट, आवास की कमी और असमानता जैसी समस्याओं को भी गहरा करेगा। रिपोर्ट इन चुनौतियों के मूल में कमजोर प्रशासनिक संरचना को प्रमुख कारण मानती है।
संस्थागत बिखराव: प्रशासनिक जटिलता की जड़
भारत के अधिकांश शहरों में नगर निगम, विकास प्राधिकरण और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा है। इससे निर्णय प्रक्रिया धीमी और जटिल हो जाती है। रिपोर्ट एकीकृत प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता पर जोर देती है, ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
अधूरा विकेंद्रीकरण: 74वें संशोधन का सीमित प्रभाव
हालांकि 74वें संविधान संशोधन के तहत शहरी निकायों को सशक्त बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन वास्तविकता में उन्हें पर्याप्त अधिकार नहीं मिले। रिपोर्ट सुझाव देती है कि नगर निकायों को प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता प्रदान की जाए।

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वित्तीय कमजोरी: विकास में बाधा
नगर निकायों की आय सीमित है और वे राज्य व केंद्र सरकार पर निर्भर हैं। रिपोर्ट में संपत्ति कर सुधार, यूजर चार्जेज और म्युनिसिपल बॉन्ड्स जैसे उपाय सुझाए गए हैं, जिससे वित्तीय स्थिरता लाई जा सके।
जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी
शहरी प्रशासन में पारदर्शिता की कमी और नागरिक भागीदारी का अभाव एक बड़ी समस्या है। रिपोर्ट डिजिटल गवर्नेंस, सामाजिक ऑडिट और नागरिक सहभागिता को बढ़ाने पर बल देती है।
तकनीक की भूमिका: स्मार्ट गवर्नेंस की दिशा
डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली, ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म और डिजिटल सेवाएं प्रशासन को अधिक कुशल बना सकती हैं। स्मार्ट सिटी मिशन के अनुभवों को व्यापक स्तर पर लागू करने की जरूरत है।
पर्यावरणीय चुनौतियां: टिकाऊ विकास की आवश्यकता
जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जल संकट शहरी जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। रिपोर्ट हरित बुनियादी ढांचे, जल संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की सिफारिश करती है।
वैश्विक मॉडल से सीख
सिंगापुर, लंदन और न्यूयॉर्क जैसे शहरों के उदाहरण बताते हैं कि सफल शहरी शासन के लिए स्पष्ट अधिकार, मजबूत वित्तीय आधार और जवाबदेही आवश्यक हैं। भारत इन मॉडलों से सीख लेकर अपनी नीतियों को बेहतर बना सकता है।
आगे की राह
रिपोर्ट के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक है:
राजनीतिक इच्छाशक्ति
संस्थागत सुधार
नागरिक सहभागिता
निजी क्षेत्र के साथ सहयोग
यदि इन कदमों को गंभीरता से लागू किया गया, तो भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ शहरी अर्थव्यवस्था स्थापित कर सकता है।


✍️ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)

आध्यात्म, सेवा और संस्कारों से समाज में बदलाव ला रहा गायत्री परिवार

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✍️ कैलाश सिंह

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। वर्तमान समय में जब समाज भौतिकता, उपभोक्तावाद और भागदौड़ भरी जीवनशैली के बीच मानवीय मूल्यों से दूर होता जा रहा है, ऐसे दौर में गायत्री परिवार एक सशक्त वैचारिक एवं सामाजिक आंदोलन के रूप में उभरकर सामने आया है। यह संगठन आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के साथ-साथ सेवा, संस्कार और नैतिक मूल्यों के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है।

गायत्री परिवार का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति, परिवार और समाज के समग्र उत्थान की सोच के साथ कार्य करता है। संगठन की मूल भावना “हम बदलेंगे, युग बदलेगा” के सिद्धांत पर आधारित है, जो आत्म परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन का आधार मानती है। यह विचारधारा व्यक्ति को आत्मचिंतन, आचरण सुधार और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करती है।

संगठन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह आध्यात्म को व्यवहारिक जीवन से जोड़ता है। शिक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और वृक्षारोपण जैसे क्षेत्रों में संगठन सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा नशामुक्ति अभियान और दहेज, छुआछूत जैसी कुरीतियों के खिलाफ भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समय-समय पर जागरूकता अभियान, यज्ञ, सत्संग, स्वास्थ्य शिविर और स्वच्छता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिससे समाज के हर वर्ग तक सकारात्मक संदेश पहुंच सके। खासतौर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे अभियान वर्तमान समय की बड़ी आवश्यकता बन चुके हैं।

युवा पीढ़ी को सही दिशा देने के लिए संगठन द्वारा संस्कार शिविर, व्यक्तित्व विकास कार्यशालाएं और नैतिक शिक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास होता है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी संगठन उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। महिला मंडलों के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने और सामाजिक भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।

हालांकि, डिजिटल युग में युवाओं को जोड़ना और आधुनिक माध्यमों के जरिए अपने संदेश का प्रभावी प्रसार करना संगठन के लिए चुनौती बना हुआ है। इसके बावजूद, संगठन की प्रतिबद्धता और कार्यशैली को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि वह इन चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।

गायत्री परिवार का मूल संदेश स्पष्ट है—सच्चा आध्यात्म वही है, जो मानव सेवा में झलकता है। जब व्यक्ति अपने भीतर के प्रकाश को पहचान कर समाज के कल्याण में योगदान देता है, तभी एक सशक्त, संतुलित और समृद्ध समाज का निर्माण संभव होता है।

Ayurveda Health Tips: आयुर्वेद अपनाएं, पाएं स्वस्थ जीवन — डॉ. शिवाकांत मिश्र का बड़ा संदेश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और अनियमित खान-पान के बीच अब लोग तेजी से पारंपरिक चिकित्सा पद्धति Ayurveda की ओर लौट रहे हैं। इसी संदर्भ में Dr. Shivakant Mishra ने कहा कि आयुर्वेद केवल इलाज नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली है जो शरीर, मन और आत्मा के संतुलन पर आधारित है।

जीवनशैली सुधार ही है असली इलाज

डॉ. मिश्र के अनुसार:

• आयुर्वेद में व्यक्ति की प्रकृति (वात, पित्त, कफ) के अनुसार उपचार किया जाता है
• जड़ी-बूटियों के साथ योग, प्राणायाम और पंचकर्म को महत्व दिया जाता है
• यह पद्धति शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करती है

उन्होंने बताया कि सही दिनचर्या अपनाने से कई बीमारियों से बचाव संभव है।

बढ़ती बीमारियों का कारण क्या?

आज के समय में तेजी से बढ़ रही समस्याएं:

• मधुमेह (Diabetes)
• उच्च रक्तचाप (BP)
• मोटापा
• पाचन संबंधी रोग
• मानसिक तनाव

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इन सभी का मुख्य कारण:

• खराब लाइफस्टाइल
• जंक फूड
• नींद की कमी
• शारीरिक गतिविधि की कमी

आयुर्वेदिक दिनचर्या: क्या करें, क्या न करें

डॉ. मिश्र ने स्वस्थ जीवन के लिए ये सुझाव दिए:

• ब्रह्ममुहूर्त में उठें

• रोज योग और प्राणायाम करें
• दिनभर पर्याप्त पानी पिएं
• ताजा और सात्विक भोजन लें
• फास्ट फूड और ज्यादा तेल से बचें
• पर्याप्त नींद लें
• मानसिक संतुलन बनाए रखें

सरकार भी दे रही आयुर्वेद को बढ़ावा

Ministry of AYUSH के माध्यम से आयुर्वेद को बढ़ावा दिया जा रहा है:

• गांव-गांव तक आयुर्वेदिक सेवाएं
• आयुर्वेदिक अस्पतालों की संख्या में वृद्धि
• जागरूकता अभियान

आयुर्वेद: सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प

डॉ. मिश्र ने कहा कि यदि लोग आधुनिक जीवनशैली के साथ आयुर्वेद को अपनाएं, तो:

• बीमारियों से बचाव संभव
• इम्युनिटी मजबूत
• जीवन संतुलित और स्वस्थ

आयुर्वेद आज के समय में एक safe, effective और natural healthcare system के रूप में उभर रहा है।

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UP Investment Boost: CM योगी ने 17 कंपनियों को दिया Letter of Comfort, बोले- “UP = Safety, Stability & Speed”

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। Yogi Adityanath ने उत्तर प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देते हुए 17 फार्मा कंपनियों को Letter of Comfort (LOC) प्रदान किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश अब “Safety, Stability और Speed” की गारंटी वाला राज्य बन चुका है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिन प्रदेश के औद्योगिक विकास और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उन्होंने सभी निवेशकों को सफल निवेश के लिए शुभकामनाएं दीं।

2000 करोड़ निवेश से 10,000+ युवाओं को रोजगार

मुख्यमंत्री के अनुसार:

• करीब ₹2000 करोड़ का निवेश रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में होगा
• इससे 10,000 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलेगा
• निवेश सीधे प्रदेश की 25 करोड़ जनता के विश्वास से जुड़ा है

“बीमारू राज्य से ग्रोथ इंजन बना यूपी”

Narendra Modi के नेतृत्व का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा:

• यूपी अब देश का ग्रोथ इंजन बन चुका है
• राज्य का GSDP 36 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है
• पिछले 9 वर्षों में नीति और नीयत में बड़ा बदलाव आया है

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निवेश के लिए UP क्यों बना पसंदीदा राज्य?

मुख्यमंत्री ने यूपी की खासियत बताते हुए कहा:

• बड़ा मार्केट + मजबूत डिमांड
• पर्याप्त लैंड बैंक उपलब्ध
• 56% युवा वर्कफोर्स
• 21,000+ स्टार्टअप सक्रिय
• 34+ सेक्टोरल पॉलिसी लागू

साथ ही “निवेश मित्र”, “निवेश सारथी” और “उद्यमी मित्र” जैसे प्लेटफॉर्म निवेशकों को आसान सुविधा दे रहे हैं।

45 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

सीएम योगी के अनुसार:

• अब तक ₹45 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले
• ₹15 लाख करोड़ जमीन पर उतर चुके
• जल्द ₹7–8 लाख करोड़ और लागू होंगे

मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा विस्तार

• 2017 में मेडिकल कॉलेज: 40
• अब बढ़कर: 83 मेडिकल कॉलेज
• हर कॉलेज के साथ नर्सिंग संस्थान

इससे हेल्थ सेक्टर में तेजी से सुधार हुआ है।

किन कंपनियों को मिला LOC?

इन 17 कंपनियों ने यूपी के अलग-अलग जिलों में निवेश का प्रस्ताव दिया है:

• बायोजेंटा लाइफसाइंस (बाराबंकी) – ₹1250 करोड़
• रोमन्स मेडवर्ल्ड (नोएडा) – ₹136.89 करोड़
• हाईग्लांस लेबोरेट्रीज (नोएडा) – ₹120 करोड़
• कोटेक हेल्थकेयर (गाजियाबाद) – ₹100 करोड़
• जेबी रेमेडीज (हाथरस/नोएडा) – ₹70 करोड़
• पॉजिट्रॉन बायोजेनिक्स (कानपुर) – ₹60.24 करोड़
• आईवी टेक हेल्थकेयर (अलीगढ़) – ₹56.12 करोड़
• जेबीजेएम पैरेंट्रल्स (ललितपुर) – ₹51 करोड़
• रास्पा फार्मा (रायबरेली) – ₹45.21 करोड़
• एनबीएस ग्रुप (सीतापुर) – ₹42.59 करोड़
• वेलनेस जेडक्योर (जालौन) – ₹11.65 करोड़
• कैमले इंडस्ट्रीज (सहारनपुर) – ₹10 करोड़
• रेडिकॉन लैब (नोएडा) – ₹10 करोड़
• संजीवनी मेडिटेक (बरेली) – ₹7.95 करोड़
• सेफकॉन लाइफसाइंसेज (बरेली) – ₹6.43 करोड़
• RAP मेड सर्जिकल (हाथरस) – ₹5.53 करोड़
• वोडा केमिकल (हापुड़) – ₹4.84 करोड़

Heatwave Alert: 45°C पार तापमान, IMD ने जारी किया 3 दिन का रेड अलर्ट, जानें कब मिलेगी राहत

नई दिल्ली/लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। देश के कई हिस्सों में इस समय मौसम के दो बिल्कुल अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं, वहीं पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

India Meteorological Department (IMD) के अनुसार, उत्तर भारत के कई राज्यों में तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है और अगले तीन दिनों तक लू से राहत मिलने की संभावना नहीं है।

इन राज्यों में Heatwave का रेड अलर्ट

IMD के मुताबिक इन राज्यों में लू का असर सबसे ज्यादा रहेगा:

• उत्तर प्रदेश
• दिल्ली
• हरियाणा
• पंजाब
• राजस्थान
• जम्मू-कश्मीर

खास बात: दिन ही नहीं, रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल रही, जिसे “गरम रात” (Warm Night) की स्थिति कहा जा रहा है।

यूपी का बांदा बना सबसे गर्म शहर
• बांदा (उत्तर प्रदेश): 46.6°C (देश में सबसे ज्यादा)
• बाड़मेर/जैसलमेर: 46°C
• प्रयागराज: 45.7°C
• कोटा/चित्तौड़गढ़: 45.2°C

इससे साफ है कि उत्तर भारत पूरी तरह हीटवेव जोन में आ चुका है।

रात में भी नहीं मिल रही राहत

उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कई इलाकों में:

• न्यूनतम तापमान सामान्य से काफी ज्यादा
• रात में भी उमस और गर्म हवाएं
• नींद और स्वास्थ्य पर असर

दूसरी तरफ: पूर्वोत्तर में भारी बारिश का अलर्ट

इन राज्यों में 27 अप्रैल से 2 मई तक भारी बारिश की चेतावनी:

• अरुणाचल प्रदेश
• असम
• मेघालय
• नागालैंड
• मणिपुर
• मिजोरम
• त्रिपुरा

साथ में:

• आंधी
• बिजली गिरने का खतरा

50–70 किमी/घंटा की तेज हवाएं

बिहार–बंगाल में भी बदलेगा मौसम

पूर्वी भारत में:

• बिहार
• झारखंड
• पश्चिम बंगाल
• ओडिशा

यहां गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना है।

कब मिलेगी गर्मी से राहत?

IMD के अनुसार:

• 28 अप्रैल के बाद तापमान में 3–5°C गिरावट
• 29 अप्रैल से आंधी + हल्की बारिश
• धीरे-धीरे हीटवेव में कमी

यानी अभी 2–3 दिन और सावधानी जरूरी है।

IMD की चेतावनी: ऐसे बचें लू से

जरूरी सावधानियां:

• दोपहर 12 से 4 बजे तक बाहर न निकलें
• हल्के और ढीले कपड़े पहनें
• ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं
• सिर को ढककर रखें (टोपी/गमछा)
• बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें

आंधी-तूफान के दौरान:

• पेड़ या खुले मैदान में न रहें
• बिजली के खंभों से दूर रहें

हिमाचल में बारिश-आंधी का अलर्ट

हिमाचल प्रदेश में 28–30 अप्रैल के बीच:

• कांगड़ा
• कुल्लू
• शिमला
• चंबा
• किन्नौर

इन जिलों में बारिश और तेज हवाएं परेशानी बढ़ा सकती हैं।

पुलिस लाइन में भव्य दीक्षांत परेड

493 महिला प्रशिक्षुओं ने ली शपथ कानून-व्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l पुलिस लाइन गोरखपुर के परेड ग्राउंड पर रविवार को महिला रिक्रूट आरक्षियों की भव्य दीक्षांत परेड का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल प्रशिक्षण पूर्ण कर चुकी महिला आरक्षियों के लिए गर्व का क्षण था, बल्कि जनपद की कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डीआईजी रेंज एस. चन्नप्पा ने परेड की सलामी ली और प्रशिक्षुओं का उत्साहवर्धन किया।
गौरतलब है कि पुलिस महानिदेशक प्रशिक्षण, लखनऊ द्वारा 21 जुलाई 2025 को प्रदेश के 112 प्रशिक्षण केंद्रों में करीब 60,000 प्रशिक्षुओं का आधारभूत प्रशिक्षण शुरू कराया गया था। इसी क्रम में गोरखपुर जनपद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में कुल 493 महिला प्रशिक्षुओं का नौ माह का कठिन एवं अनुशासित प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान शारीरिक दक्षता, कानून की जानकारी, आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता, हथियार संचालन, ड्रिल और अनुशासन पर विशेष ध्यान दिया गया।
दीक्षांत परेड का दृश्य अत्यंत आकर्षक और अनुशासित रहा। परेड का नेतृत्व प्रथम परेड कमांडर आकांक्षा यादव ने किया, जिन्होंने शानदार कमान संभालते हुए मुख्य अतिथि को सलामी दिलाई। उनके नेतृत्व में 12 टोलियों ने सुसंगठित और प्रभावशाली मार्च पास्ट प्रस्तुत किया, जिसने उपस्थित सभी लोगों को प्रभावित किया। द्वितीय परेड कमांडर के रूप में अजिता सिंह तथा तृतीय परेड कमांडर के रूप में अंजली तिवारी ने भी अपने दायित्व का उत्कृष्ट निर्वहन किया।
मुख्य अतिथि डीआईजी एस. चन्नप्पा ने परेड का निरीक्षण करते हुए प्रशिक्षुओं की अनुशासन, एकरूपता और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला पुलिसकर्मियों की बढ़ती भागीदारी कानून-व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, प्रभावी और जनोन्मुखी बनाएगी। उन्होंने प्रशिक्षुओं से अपेक्षा की कि वे ईमानदारी, साहस और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें।
इस अवसर पर लखनऊ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल माध्यम से प्रदेशभर में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले लगभग 60,000 प्रशिक्षुओं को आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित पुलिस बल राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की रीढ़ होता है और इन नए आरक्षियों से कानून-व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
दीक्षांत परेड के उपरांत मुख्य अतिथि द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिला आरक्षियों को सम्मानित किया गया। इस सम्मान से प्रशिक्षुओं का उत्साह और आत्मविश्वास और अधिक बढ़ा।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कोस्तुभ ने अपने संबोधन में कहा कि “आज का दिन आप सभी के जीवन का महत्वपूर्ण दिन है। यह आपके कर्तव्य पथ का पहला कदम है। अपने दायित्वों से कभी पीछे न हटें और पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ सेवा करें।” उनके इस संदेश ने प्रशिक्षुओं को कर्तव्यनिष्ठा का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद जनपद गोरखपुर को 256 महिला रिक्रूट आरक्षी प्राप्त होंगी, जबकि 237 महिला आरक्षियों को जनपद कुशीनगर भेजा जाएगा। इसके अतिरिक्त गोरखपुर को अन्य प्रशिक्षण संस्थानों से भी 983 रिक्रूट आरक्षी प्राप्त होंगे। इस प्रकार कुल 1239 रिक्रूट आरक्षियों को व्यवहारिक प्रशिक्षण हेतु जनपद के विभिन्न थानों पर नियुक्त किया जाएगा।
इन नए पुलिसकर्मियों की तैनाती से जनपद में पुलिस बल की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे कानून-व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा अपराध और अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। विशेष रूप से महिला पुलिसकर्मियों की बढ़ती संख्या से महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित होगी।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी दीपक मीणा, एसपी नॉर्थ ज्ञानेंद्र, एसपी साउथ दिनेश कुमार पुरी, एसपी अपराध सुधीर जायसवाल, एसपी ट्रैफिक अमित श्रीवास्तव, सहायक पुलिस अधीक्षक/सीओ कैंट अरुण कुमार, सहायक पुलिस अधीक्षक दिनेश गोदारा सहित अन्य अधिकारी, प्रशिक्षकगण, प्रशिक्षुओं के अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
परेड ग्राउंड पर आयोजित इस समारोह में अनुशासन, गरिमा और उत्साह का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। इस दीक्षांत परेड के साथ ही इन महिला आरक्षियों के जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ है, जो आगे चलकर समाज में सुरक्षा, सेवा और विश्वास की मजबूत कड़ी बनेंगी।

कलयुगी दामाद ने ससुराल में तिहरा हमला, पत्नी व सास की मौत, ससुर गंभीर

इलाके के बछईपुर गांव के छोटका पूरा में शनिवार की देर रात एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। कलयुगी दामाद ने ससुराल पहुंचकर अपनी पत्नी, सास और ससुर पर चाकू से हमला कर दिया। इस हमले में पत्नी और सास की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि ससुर की हालत गंभीर बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, बछईपुर गांव के छोटका पूरा निवासी 56 वर्षीय अंतू गुप्ता अपने परिवार के साथ खाना खाकर सो गए थे। देर रात गड़वार थाना क्षेत्र के सिंहाचवर निवासी उनका दामाद अमित गुप्ता अचानक घर पहुंचा। किसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया, जिसके बाद अमित ने ससुर अंतू गुप्ता, सास 52 वर्षीय सुशीला देवी और अपनी पत्नी 25 वर्षीय प्रीति गुप्ता का चाकू से गला काट दिया।घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस को सूचना दी। घायलों को एंबुलेंस से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बछईपुर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने सुशीला देवी और प्रीति गुप्ता को मृत घोषित कर दिया। गंभीर रूप से घायल अंतू गुप्ता को पहले सदर अस्पताल और फिर वाराणसी के ट्रामा सेंटर रेफर किया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।सूचना मिलते ही रसड़ा सीओ आलोक गुप्ता के नेतृत्व में नगरा, भीमपुरा, फेफना और गड़वार थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुट गई। बताया जाता है कि आरोपी अमित गुप्ता पहले भी अपनी पत्नी की हत्या की कोशिश कर चुका था, जिसके बाद परिजन उसे मायके ले आए थे।पुलिस ने आरोपी के भाई, बहन और जीजा को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और लोग इस निर्मम वारदात से स्तब्ध हैं।

रविप्रताप सिंह ने मोहन सेतु के निर्माण में देरी पर उठाए सवाल, आंदोलन की चेतावनी

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। कांग्रेस प्रवक्ता रविप्रताप सिंह ने कार्यकर्ताओं के साथ अर्धनिर्मित मोहन सेतु का सर्वेक्षण कर प्रदेश सरकार पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उत्तर और दक्षिण क्षेत्र के विकास की धुरी माने जाने वाले इस सेतु का निर्माण कार्य तत्काल शुरू किया जाए, अन्यथा कांग्रेस कार्यकर्ता आमजन के साथ आंदोलन और अनवरत अनशन के लिए बाध्य होंगे।

रविप्रताप सिंह ने बताया कि पूर्व में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा मोहन सेतु मार्ग के किनारे धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया था। उस समय प्रशासन की ओर से कुछ माह में कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है।

सर्वेक्षण के दौरान प्रवक्ता ने उपजिलाधिकारी से फोन पर वार्ता कर सेतु निर्माण की स्थिति की जानकारी मांगी। इस पर उपजिलाधिकारी ने संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। इसके बावजूद कांग्रेस प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि यदि शीघ्र कार्य प्रारंभ नहीं हुआ तो कांग्रेस जन आमजन के साथ व्यापक आंदोलन छेड़ेंगे।

इस दौरान बृजेश सिंह, भोला तिवारी, डॉ. शैलेन्द्र जायसवाल, रवि तिवारी, कृष्णा सिंह, सौर्य प्रताप सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

हिंदी विभाग को मिला नया नेतृत्व: प्रो. विमलेश मिश्र ने संभाली विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा पत्रकारिता विभाग में आचार्य प्रोफेसर विमलेश कुमार मिश्र ने दोपहर पूर्व विभागाध्यक्ष का दायित्व ग्रहण किया। चक्रानुक्रम के तहत यह जिम्मेदारी अब तक प्रोफेसर दीपक प्रकाश त्यागी संभाल रहे थे, जिनका 3 माह 13 दिन का दूसरा कार्यकाल पूर्ण होने के साथ 3 वर्ष की अवशेष अवधि 24 अप्रैल को समाप्त हुई।
प्रोफेसर विमलेश मिश्र हिंदी साहित्य के मध्यकाल, भोजपुरी साहित्य एवं भारतीय काव्यशास्त्र के प्रतिष्ठित विद्वान हैं। उन्होंने अब तक 6 मौलिक पुस्तकें लिखी हैं तथा 7 पुस्तकों का संपादन किया है। वे लंबे समय तक ‘अभिधा’ और ‘विजयम’ पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे हैं। साथ ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के लिए भोजपुरी विषय पर महत्वपूर्ण पाठ्य सामग्री तैयार कर चुके हैं। वर्तमान में वे साहित्य अकादमी, दिल्ली के एक प्रोजेक्ट पर लेखन कार्य कर रहे हैं।
प्रोफेसर मिश्र के पास समृद्ध प्रशासनिक अनुभव भी है। वे पिछले तीन वर्षों से विश्वविद्यालय के क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं और इससे पूर्व पांच वर्षों तक डेलीगेसी के उपाध्यक्ष रहे। राष्ट्रीय सेवा योजना में भी उन्होंने लगातार चार वर्षों तक कार्यक्रम अधिकारी के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई।
अध्यक्ष के रूप में अपनी पहली बैठक में उन्होंने कहा कि शिक्षक पहले अपने संस्थान और अंततः समाज की थाती होता है। इस जिम्मेदारी को जितनी गंभीरता से समझा जाएगा, दायित्वों का निर्वहन उतनी ही निष्ठा से संभव होगा।
दायित्व ग्रहण करने के बाद शाम 5:00 बजे उन्होंने विभागीय सदस्यों के साथ कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन से मुलाकात की, जिसमें हिंदी विभाग की भावी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। कुलपति ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्य, अधिष्ठाता एवं अधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त की, वहीं शोधार्थियों ने वृक्षारोपण कर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

कुर्थीजाफरपुर : चेयरमैन के रिश्तेदारों को हुआ आवासीय पट्टा 39 साल बाद रद्द

जिलाधिकारी ने दिया कब्जा हटाने का आदेश

मऊ (राष्ट्र की परम्परा) जनपद के कुर्थीजाफरपुर नगर पंचायत के वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष के रिश्तेदारों को लगभग 39 वर्ष पूर्व हुए आवासीय भूमि आवंटन को जिलाधिकारी ने निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 66 के तहत की गई।
मामला गाटा संख्या 740, रकबा 0.056 हेक्टेयर से जुड़ा है, जिसका आवंटन वर्ष 1985 में तत्कालीन उप जिलाधिकारी द्वारा किया गया था। इस संबंध में वर्ष 2025 में राज्य सरकार की ओर से वाद दाखिल किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि आवंटन प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और अपात्र एवं संपन्न व्यक्तियों को लाभ पहुंचाया गया।
जांच के दौरान सामने आया कि आवंटन से पूर्व न तो मुनादी कराई गई और न ही पात्रता सूची तैयार की गई। साथ ही, आवंटित भूमि पर निर्धारित तीन वर्ष के भीतर आवास निर्माण भी नहीं किया गया। वर्तमान में उक्त भूमि पर केवल चारदीवारी व गेट लगाकर कब्जा किया गया है, जबकि आवंटी अन्यत्र मकान में रह रहे हैं।
तहसील व लेखपाल की आख्या में यह भी स्पष्ट हुआ कि आवंटन के समय संबंधित व्यक्ति स्वयं भूमि प्रबंधक समिति का सदस्य था और बिना कलेक्टर की अनुमति के पट्टा स्वीकृत कराया गया, जो नियमों के विपरीत है।
वहीं, प्रतिवादियों की ओर से दावा किया गया कि मामला समय-सीमा के बाहर है और राजनीतिक द्वेष के चलते कार्रवाई की गई है। साथ ही यह भी कहा गया कि कई मूल पट्टेदारों का निधन हो चुका है, इसलिए कार्यवाही विधिसम्मत नहीं है।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों के परीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने पाया कि आवंटन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं और नियमों का उल्लंघन किया गया।
जिलाधिकारी प्रवीण मिश्रा ने अपने आदेश में वर्ष 1985 के आवासीय आवंटन को निरस्त करते हुए संबंधित भूमि से कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही तहसीलदार को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रशासन अब उक्त भूमि का पुनः उपयोग सुनिश्चित करेगा ।

होमगार्ड्स एनरोलमेंट–2025 परीक्षा का निरीक्षण, डीएम-एसपी ने परखी व्यवस्थाएं

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी द्वारा उत्तर प्रदेश होमगार्ड्स एनरोलमेंट–2025 की लिखित परीक्षा के दृष्टिगत जनपद के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। प्रथम पाली के दौरान अधिकारियों ने राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, डॉ. बी.आर. अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय, शिवजपत सिंह इंटरमीडिएट कॉलेज भिटौली तथा जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज सहित कई केंद्रों का भ्रमण कर परीक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने परीक्षा कक्षों का गहन निरीक्षण करते हुए सेक्टर मजिस्ट्रेट, स्टेटिक मजिस्ट्रेट, कक्ष निरीक्षकों एवं ड्यूटी में तैनात पुलिस बल को निर्देशित किया कि परीक्षा को पूर्णतः निष्पक्ष, शांतिपूर्ण एवं सुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना सभी अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा परीक्षा केंद्रों पर स्थापित सीसीटीवी कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया गया। उन्होंने निगरानी व्यवस्था को निरंतर सक्रिय बनाए रखने तथा प्रत्येक गतिविधि पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। साथ ही, परीक्षार्थियों के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं—बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं—की भी जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
अधिकारियों ने संबंधित कार्मिकों को निर्देशित किया कि परीक्षा अवधि के दौरान सभी केंद्रों पर सतर्कता बनाए रखते हुए शासन एवं भर्ती बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, जिससे परीक्षा पारदर्शी एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रथम पाली में राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में 372 परीक्षार्थी उपस्थित एवं 118 अनुपस्थित रहे। डॉ. बी.आर. अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय में 374 परीक्षार्थी उपस्थित तथा 116 अनुपस्थित रहे। शिवजपत सिंह इंटरमीडिएट कॉलेज भिटौली में 376 परीक्षार्थी उपस्थित रहे, जबकि 114 अनुपस्थित दर्ज किए गए। वहीं, जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज (ब्लॉक-ए) में 370 परीक्षार्थी उपस्थित तथा 110 अनुपस्थित रहे।

निंदा छोड़ें, आत्मचिंतन अपनाएं: यही है श्रेष्ठता का मार्ग

गोंदिया, महाराष्ट्र।
“न विना परवादेन रमते दुर्जनोजन:। काक: सर्वरसान भुक्ते विनामध्यम न तृप्यति।।“
अर्थात् दुष्ट व्यक्ति बिना निंदा किए आनंद नहीं पाते, जैसे कौआ सभी रसों का सेवन करता है, परंतु गंदगी के बिना संतुष्ट नहीं होता।

आज के समाज में यह श्लोक अत्यंत प्रासंगिक प्रतीत होता है। जब हम दूसरों की आलोचना करते हैं, तब हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हम स्वयं भी त्रुटियों से परिपूर्ण हैं। एक उंगली जब हम किसी और पर उठाते हैं, तो तीन उंगलियां हमारी ओर संकेत करती हैं—यह केवल कहावत नहीं, बल्कि जीवन का गहरा सत्य है।
सृष्टि के रचयिता ने मनुष्य को श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान की है, ताकि वह गुण और अवगुण के बीच सही चयन कर सके। किंतु अक्सर हम अवगुणों को चुन लेते हैं और अंततः परिस्थितियों या ईश्वर को दोष देने लगते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल हमारे व्यक्तित्व को कमजोर करती है, बल्कि समाज में नकारात्मकता भी फैलाती है।
निंदा करना एक ऐसा अवगुण है, जो प्रारंभ में सुखद प्रतीत होता है, परंतु अंततः मन में अशांति और तनाव उत्पन्न करता है। किसी की आलोचना करके हम अपने अहंकार को क्षणिक संतुष्टि तो दे सकते हैं, लेकिन उसकी वास्तविक योग्यता, अच्छाई और सत्य को कभी कम नहीं कर सकते। सूर्य पर बादल छा जाने से उसकी रोशनी कम नहीं होती, उसी प्रकार सच्चे गुणों को निंदा से दबाया नहीं जा सकता।
हम अक्सर दूसरों के दोष आसानी से देख लेते हैं, लेकिन अपने दोषों को नजरअंदाज कर देते हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसे हम चंद्रमा के दाग देख लेते हैं, पर अपनी आंखों का काजल नहीं देख पाते। वास्तव में, दूसरों में जो दोष हमें दिखाई देते हैं, वे कहीं न कहीं हमारे भीतर की दूषित प्रवृत्तियों का ही प्रतिबिंब होते हैं।
महापुरुषों ने भी निंदा से बचने की सीख दी है। उनका मानना था कि दूसरों के दोष देखने के बजाय उनके गुणों को अपनाना चाहिए। निंदा न केवल संबंधों में कटुता लाती है, बल्कि व्यक्ति की विश्वसनीयता भी कम कर देती है।
यह भी सत्य है कि संसार में ऐसा कोई नहीं है जिसकी आलोचना न होती हो। कोई कम बोलने पर, कोई अधिक बोलने पर, तो कोई अपनी भाषा या व्यवहार के कारण आलोचना का शिकार होता है। इसलिए दूसरों की बातों से विचलित होने के बजाय आत्मचिंतन और आत्मविकास पर ध्यान देना ही श्रेष्ठ मार्ग है।
दूसरों की निंदा में समय व्यर्थ करने से बेहतर है कि हम अपने व्यक्तित्व को मजबूत बनाएं। जब हम अपने गुणों को विकसित करते हैं और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं, तो निंदक स्वतः ही पीछे छूट जाते हैं।
अतः निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि निंदा त्यागकर आत्मचिंतन अपनाना ही सच्ची प्रगति का मार्ग है। स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने के बजाय विनम्रता अपनाने वाला व्यक्ति ही वास्तव में गुणवान और महान होता है।
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)

विकसित भारत का लक्ष्य विश्व मानवता की सुरक्षा का उद्घोष: प्रो. राजशरण शाही

शैक्षिक उन्नयन एवं सामाजिक परिवर्तन के लिए पुरातन छात्रों की भूमिका सराहनीय: कुलपति

शिक्षाशास्त्र विभाग में राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुरातन छात्र सम्मेलन

शिक्षक शिक्षा में नवाचार से ही साकार होगा विकसित भारत @2047 का संकल्प

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुरातन छात्र सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविदों, पुरातन छात्रों, शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं एवं शिक्षा विशेषज्ञों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए “विकसित भारत @2047: शिक्षक शिक्षा की भूमिका” विषय पर समकालीन एवं भविष्यपरक आयामों पर गहन विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। संयोजक प्रो. सुषमा पाण्डेय ने संगोष्ठी की प्रस्तावना एवं अतिथि परिचय प्रस्तुत किया, जबकि संचालन एवं स्वागत भाषण आयोजन सचिव डॉ. राजेश कुमार सिंह ने किया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो. सुनीता दुबे ने की तथा आभार सह-संयोजक प्रो. उदय सिंह ने व्यक्त किया।
संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य शिक्षक शिक्षा की केंद्रीय भूमिका को सुदृढ़ करते हुए भारत को ज्ञान-आधारित, समावेशी एवं नवाचार-प्रेरित राष्ट्र के रूप में विकसित करना रहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में शिक्षक शिक्षा की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विचार करते हुए गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी शिक्षकों के निर्माण पर बल दिया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. राजशरण शाही ने कहा कि शिक्षा की जड़ें राष्ट्र की संस्कृति से जुड़ी होनी चाहिए। भारतीय शिक्षा को केवल सूचना का नहीं, बल्कि ज्ञान का केंद्र बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत बताते हुए कुशल शिक्षकों के निर्माण को विकसित भारत की आधारशिला बताया।
तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने शिक्षक शिक्षा की चुनौतियाँ, डिजिटल एवं एआई आधारित नवाचार, गुणवत्ता सुनिश्चितता, सतत व्यावसायिक विकास, समावेशी शिक्षा, भारतीय ज्ञान प्रणाली और 21वीं सदी के कौशल जैसे विषयों पर विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि आज शिक्षक केवल ज्ञान प्रदाता नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, नवप्रवर्तनकर्ता और सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में उभर रहा है।
द्वितीय सत्र में आयोजित पुरातन छात्र सम्मेलन की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टण्डन ने की। इस दौरान पुरातन छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए विभाग के विकास में सहयोग का संकल्प लिया। विभिन्न सुझाव भी प्रस्तुत किए गए, जो विश्वविद्यालय के शैक्षणिक उन्नयन में सहायक होंगे।
समापन सत्र में कुलपति प्रो. पूनम टण्डन ने कहा कि यह आयोजन शिक्षाशास्त्र विभाग की अकादमिक सक्रियता को सुदृढ़ करने के साथ ही “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य में शिक्षक शिक्षा की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है। आयोजन के अंत में सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

वृद्धावस्था में मानसिक स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौती: संवेदनशील समाज और पारिवारिक सहयोग की आवश्यकता- प्रो. आदेश अग्रवाल

एलुमनी मीट में गूंजा मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा, वृद्धजनों के सम्मान पर बल

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा शनिवार को “अलोहामोरा’26” के अंतर्गत वार्षिक एलुमनी मीट का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग और वृद्धावस्था पर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि के साथ हुआ।
विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने स्वागत भाषण में पूर्व छात्रों के योगदान को विभाग की सुदृढ़ता का आधार बताते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण फेसबुक के माध्यम से किया गया, जिसमें देश-विदेश से 100 से अधिक पूर्व छात्र ऑनलाइन जुड़े और अपने अनुभव साझा किए।
विशिष्ट अतिथि प्रो. अराधना शुक्ला ने “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में मानसिक स्वास्थ्य” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि डिजिटल निर्भरता, आभासी संबंधों और सूचना के अत्यधिक प्रवाह के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने भावनात्मक जुड़ाव, आत्म-नियंत्रण और सामाजिक समर्थन तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि प्रो. आदेश अग्रवाल ने “मानसिक स्वास्थ्य एवं वृद्धावस्था” विषय पर कहा कि बढ़ती उम्र के साथ अकेलापन, निर्भरता और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएँ मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। उन्होंने परिवार, समाज और नीति-निर्माताओं की साझा जिम्मेदारी पर बल देते हुए अंतर-पीढ़ी संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूक्लियर परिवार व्यवस्था के कारण वृद्धजनों का सामाजिक समर्थन तंत्र कमजोर हो रहा है, ऐसे में संवाद, संवेदनशीलता और सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने विश्वविद्यालय और पूर्व छात्रों के बीच सहयोग को और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रो. प्रेम सागर नाथ तिवारी, प्रो. अनुपम नाथ त्रिपाठी, प्रो. चित्तरंजन मिश्रा, प्रो. नाज़िश बानो, प्रो. मंजू मिश्रा, प्रो. आर.पी. सिंह, डॉ. अंशु मिश्रा सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं शिक्षक उपस्थित रहे। अंत में डॉ. गरिमा सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में “मेंटल हेल्थ: साइको-सोशल पर्सपेक्टिव्स” श्रृंखला की तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। यह श्रृंखला कुल 10 पुस्तकों का व्यापक अकादमिक संकलन है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों पर गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अनुभूति दुबे ने पुस्तकों का परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह श्रृंखला शोधार्थियों, विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री है। लोकार्पित पुस्तकों में “एजिंग: इश्यूज एंड इंटरवेंशन्स”, “मेंटल हेल्थ एट वर्कप्लेस” तथा “मेंटल हेल्थ: प्रमोशन एंड प्रिवेंशन” शामिल हैं।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि ने पुस्तकों को समकालीन समय की आवश्यकता बताया, वहीं अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति ने इसे अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

संतकबीरनगर की शिवांगी कांत का राष्ट्रपति भवन कार्यक्रम में चयन, लौटने पर भव्य स्वागत

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद की उभरती युवा कलाकार शिवांगी कांत के राष्ट्रपति भवन में आयोजित प्रतिष्ठित आर्टिस्ट-इन-रेजिडेंस कार्यक्रम में चयन के बाद पहली बार गृह जनपद आगमन पर खलीलाबाद में उनका भव्य स्वागत किया गया। उनकी इस उपलब्धि से पूरे जिले में गर्व और उत्साह का माहौल है।

शिवांगी कांत, बंजरिया पूर्वी (खलीलाबाद) निवासी सीआरपीएफ जवान रामाकांत यादव और सुशीला यादव की पुत्री हैं। उन्हें यह अवसर वाराणसी स्थित हस्तशिल्प सेवा केंद्र के माध्यम से प्राप्त हुआ, जो वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन संचालित है। उन्होंने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर से चित्रकला (बीएफए) की शिक्षा प्राप्त की है और डीएलएड भी किया है।

ज्ञात हो कि राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान द्रौपदी मुर्मु ने पारंपरिक कला से जुड़े कलाकारों से मुलाकात कर उनकी कलाकृतियों का अवलोकन किया। इस कार्यक्रम में देशभर से चयनित कलाकार कावी, निर्मल, माता नी पछेड़ी और गोंड जैसी कला विधाओं पर कार्य करते हुए अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं।

यह आर्टिस्ट-इन-रेजिडेंस कार्यक्रम भारतीय सांस्कृतिक विरासत और कला परंपराओं को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है, जो उभरते कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करता है।

जनपद आगमन पर भव्य स्वागत

गृह जनपद लौटने पर नेदुला चौराहे पर स्थानीय लोगों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और परिजनों ने शिवांगी कांत का पुष्पगुच्छ व अंगवस्त्र देकर जोरदार स्वागत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और इसे जिले के लिए गौरव का क्षण बताया।

शिवांगी कांत ने क्या कहा

शिवांगी कांत ने बताया कि राष्ट्रपति भवन में बिताया गया समय अत्यंत प्रेरणादायक रहा। वहां देशभर के कलाकारों के साथ संवाद और सीखने का अवसर मिला, जिससे उनकी कला को नई दिशा मिली है।

उन्होंने कहा कि वे अपनी कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति, लोकजीवन और समकालीन विषयों को नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करेंगी।

परिवार और गुरुओं को दिया श्रेय

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुओं और जनपदवासियों के सहयोग व आशीर्वाद को दिया। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी कला के माध्यम से समाज और देश के लिए सकारात्मक योगदान देने की बात कही।

इस अवसर पर नगर पालिकाध्यक्ष जगत जायसवाल, शिक्षक संघ की अध्यक्ष अंबिका देवी, राम स्नेही यादव, नवीन पाण्डेय, रमेश प्रसाद सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।