भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है। दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।
बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है। सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।
ब्लूटूथ, सॉल्वर गैंग और करोड़ों का खेल: भारत में एग्जाम माफिया का संगठित साम्राज्य
पेपर लीक प्रकरण: “घर का भेदी लंका ढाए” से “कोचिंग उद्योग की काली अर्थव्यवस्था” तक
✍लेखक : एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र भारत आज विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश है। करोड़ों विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से अपने भविष्य का निर्माण करना चाहते हैं। डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, वैज्ञानिक और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में जाने का सपना लेकर युवा वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं। लेकिन जब राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले बाजार में बिकते दिखाई दें और जांच एजेंसियां रसायन विज्ञान तथा जीव विज्ञान के शिक्षकों, कोचिंग संचालकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों को गिरफ्तार करें, तब केवल एक परीक्षा नहीं टूटती बल्कि पूरी मेरिट आधारित व्यवस्था पर जनता का विश्वास भी डगमगा जाता है। दिनांक 18 मई 2026 तक नीट यूजी पेपर लीक प्रकरण में कई राज्यों से 10 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें रसायन और जीव विज्ञान के शिक्षक, एक नामी कोचिंग संस्थान का संचालक और पूर्व शिक्षक भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह घटनाक्रम इस ओर संकेत करता है कि भारत में परीक्षा प्रणाली अब केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं रह गई है, बल्कि यह संगठित आर्थिक अपराध, साइबर अपराध और नैतिक पतन का संयुक्त संकट बन चुकी है। “घर का भेदी लंका ढाए” — सिस्टम के भीतर से टूटती सुरक्षा आज आम नागरिकों के बीच यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि यदि प्रश्नपत्र लीक हो रहा है तो इसके पीछे केवल बाहरी अपराधी नहीं हो सकते। कहीं न कहीं सिस्टम के भीतर बैठे लोग, संवेदनशील डेटा तक पहुंच रखने वाले कर्मचारी, प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े तत्व, डिजिटल सर्वर संभालने वाले तकनीकी विशेषज्ञ, परिवहन श्रृंखला से जुड़े कर्मचारी अथवा परीक्षा केंद्रों से संबंधित अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। यही भारतीय परीक्षा प्रणाली की सबसे बड़ी कमजोरी है — सुरक्षा बाहर से कम और भीतर से अधिक टूट रही है। एग्जाम माफिया का संगठित नेटवर्क पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल, इंजीनियरिंग, शिक्षक भर्ती, पुलिस भर्ती, रेलवे भर्ती तथा अन्य सरकारी परीक्षाओं में लगातार पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार कई मामलों में प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और गुप्त डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से प्रसारित किए गए। कहीं प्रिंटिंग प्रेस से कॉपी बाहर निकाली गई, कहीं एन्क्रिप्टेड फाइल तक अवैध पहुंच बनाई गई, तो कहीं परीक्षा केंद्रों पर ब्लूटूथ डिवाइस, माइक्रो ईयरफोन और सॉल्वर गैंग सक्रिय पाए गए। यह पूरा तंत्र दर्शाता है कि परीक्षा अपराध अब स्थानीय स्तर की धोखाधड़ी नहीं बल्कि अत्यंत संगठित “एग्जाम माफिया इकोसिस्टम” बन चुका है। प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव भारत में एक सीट के लिए हजारों से लेकर लाखों उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा करते हैं। मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में स्थिति और भी अधिक तनावपूर्ण है। सीमित सरकारी सीटें, निजी कॉलेजों की ऊंची फीस, पारिवारिक अपेक्षाएं और सामाजिक प्रतिष्ठा का दबाव विद्यार्थियों को मानसिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना देता है। ऐसे माहौल में यदि कोई गिरोह “रैंक दिलाने” या “पेपर उपलब्ध कराने” का दावा करता है, तो कुछ लोग लालच, भय अथवा निराशा में उसके जाल में फंस जाते हैं। यही वह मनोवैज्ञानिक स्थिति है जिसका फायदा अपराधी नेटवर्क उठाते हैं। कोचिंग उद्योग की काली अर्थव्यवस्था भारत की कोचिंग अर्थव्यवस्था हजारों करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। राजस्थान का कोटा, दिल्ली का मुखर्जी नगर, पटना, हैदराबाद, पुणे और इंदौर जैसे शहर शिक्षा आधारित व्यावसायिक केंद्र बन चुके हैं। अधिकांश कोचिंग संस्थान ईमानदारी से शिक्षा प्रदान करते हैं, लेकिन इसी विशाल उद्योग के भीतर कुछ लालची तत्वों पर शिक्षा को “रैंक खरीदो” मॉडल में बदलने के आरोप लगते रहे हैं। जब सफलता को उत्पाद और रैंक को व्यावसायिक ब्रांड बना दिया जाता है, तब नैतिक सीमाएं कमजोर पड़ने लगती हैं। कुछ जांचों में यह आरोप सामने आया कि कुछ कोचिंग संचालकों ने अपने संस्थान की सफलता दर बढ़ाने के लिए अवैध नेटवर्क से संपर्क बनाए। यदि किसी संस्थान के छात्र बड़ी संख्या में शीर्ष रैंक प्राप्त करते हैं तो अगले वर्ष उस संस्थान में प्रवेश लेने वालों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। फीस बढ़ती है, ब्रांड वैल्यू बढ़ती है और आर्थिक लाभ कई गुना हो जाता है। यही वह बिंदु है जहां शिक्षा का पवित्र क्षेत्र अपराध और लालच की प्रयोगशाला बनने लगता है। डिजिटल युग में बढ़ी चुनौती पहले पेपर फोटोकॉपी या फैक्स के माध्यम से लीक होते थे, लेकिन अब एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, क्लाउड स्टोरेज, स्क्रीन शेयरिंग और डार्क वेब जैसी तकनीकों का उपयोग होने लगा है। साइबर अपराधियों और तकनीकी विशेषज्ञों की संलिप्तता ने जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। कई बार प्रश्नपत्र का स्क्रीनशॉट कुछ ही मिनटों में हजारों लोगों तक पहुंच जाता है। यह डिजिटल स्पीड प्रशासनिक प्रतिक्रिया से कहीं अधिक तेज होती है। सबसे बड़ा नुकसान ईमानदार विद्यार्थियों को पेपर लीक का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव उन करोड़ों छात्रों पर पड़ता है जो वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा में बैठते हैं। जब परीक्षा रद्द होती है तो छात्रों की मानसिक स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। पुनर्परीक्षा का तनाव, आर्थिक बोझ, तैयारी की अनिश्चितता और भविष्य को लेकर भय विद्यार्थियों को अंदर तक तोड़ देता है। कई परिवार कर्ज लेकर कोचिंग और हॉस्टल का खर्च उठाते हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द होना केवल प्रशासनिक घटना नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक त्रासदी बन जाता है। वैश्विक उदाहरण और भारत की चुनौती चीन, दक्षिण कोरिया, अमेरिका तथा कई अफ्रीकी देशों में भी परीक्षा धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। चीन में “गाओकाओ” परीक्षा के दौरान ड्रोन और हाईटेक डिवाइस रोकने के लिए अत्यंत कड़े कदम उठाए जाते हैं। दक्षिण कोरिया में विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा के दिन पूरे देश की यातायात व्यवस्था तक नियंत्रित की जाती है। भारत को भी पारंपरिक प्रशासनिक मॉडल से आगे बढ़कर “नेशनल एग्जाम सिक्योरिटी आर्किटेक्चर” विकसित करना होगा। लोकतांत्रिक समानता पर हमला प्रतियोगी परीक्षाएं गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अवसर का सबसे बड़ा माध्यम होती हैं। गांव का छात्र भी परीक्षा के माध्यम से डॉक्टर, इंजीनियर अथवा अधिकारी बन सकता है। लेकिन यदि परीक्षा प्रणाली भ्रष्ट हो जाए तो सामाजिक गतिशीलता रुक जाती है और प्रतिभा की जगह पैसे तथा संपर्क का प्रभाव बढ़ने लगता है। इससे युवाओं में निराशा और व्यवस्था के प्रति अविश्वास पैदा होता है। क्या केवल गिरफ्तारियों से समाधान संभव है? उत्तर स्पष्ट है — नहीं। यदि सिस्टम की संरचनात्मक कमजोरियों को नहीं सुधारा गया तो नए गिरोह पुराने गिरोहों की जगह लेते रहेंगे। भारत को परीक्षा सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय सुधारों की आवश्यकता है। आवश्यक सुधार ब्लॉकचेन आधारित प्रश्नपत्र ट्रैकिंग एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम सीमित एक्सेस कंट्रोल बायोमेट्रिक सत्यापन रियल टाइम साइबर निगरानी परीक्षा केंद्रों का डिजिटल ऑडिट कोचिंग संस्थानों के लिए नियामक प्राधिकरण पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट दोषियों की संपत्ति जब्ती राष्ट्रीय परीक्षा सुरक्षा एजेंसी की स्थापना नैतिक पुनर्निर्माण की आवश्यकता आज आवश्यकता केवल कठोर कानूनों की नहीं बल्कि नैतिक पुनर्निर्माण की भी है। शिक्षक, अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ यदि अपने दायित्व को राष्ट्रीय जिम्मेदारी समझें तभी वास्तविक सुधार संभव है। एक शिक्षक का अपराध केवल कानूनी अपराध नहीं बल्कि पीढ़ियों के भविष्य के साथ विश्वासघात है। जब कोई शिक्षक प्रश्नपत्र बेचता है तो वह केवल कागज नहीं बेचता बल्कि मेहनत, सपने और सामाजिक न्याय को भी बेच देता है। पेपर लीक प्रकरण केवल कुछ गिरफ्तारियों की खबर नहीं है। यह उस गहरे संकट का संकेत है जहां एक ओर सिस्टम की आंतरिक कमजोरियां हैं और दूसरी ओर शिक्षा को मुनाफे की मशीन बना देने वाली मानसिकता। “घर का भेदी लंका ढाए” की कहावत आज भारतीय परीक्षा प्रणाली पर भयावह रूप से लागू होती दिखाई देती है। यदि भीतर बैठे भ्रष्ट तत्वों और बाहर सक्रिय शिक्षा माफिया के गठजोड़ को नहीं तोड़ा गया तो करोड़ों युवाओं का विश्वास टूटता जाएगा। लेकिन यदि कठोर राजनीतिक इच्छाशक्ति, तकनीकी सुधार, नैतिक जवाबदेही और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था के साथ व्यापक सुधार किए जाएं तो भारत इस संकट को अवसर में बदल सकता है। तब परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने की प्रक्रिया नहीं बल्कि वास्तविक प्रतिभा, मेहनत और समान अवसर का उत्सव बन सकेगी।
संकलनकर्ता एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया, महाराष्ट्र
यूपी में स्वास्थ्य क्रांति: लोहिया संस्थान बनेगा 1010 बेड का सुपर स्पेशलिटी सेंटर
प्रयागराज SRN अस्पताल विस्तार को मिली जमीन, मेट्रो परियोजनाओं को भी हरी झंडी
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा, मेट्रो रेल और ग्रामीण निकायों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी देकर विकास योजनाओं को नई गति देने का फैसला किया है। राजधानी लखनऊ स्थित Dr. Ram Manohar Lohia Institute of Medical Sciences में अत्याधुनिक 1010 बेडेड मल्टी स्पेशलिटी इमरजेंसी सेंटर अस्पताल, नया टीचिंग ब्लॉक और ओपीडी ब्लॉक बनाने की स्वीकृति दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 855.04 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार के अनुसार, शहीद पथ स्थित संस्थान के नए परिसर में बनने वाला यह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देगा। परियोजना के अंतर्गत 1010 बेड की सुविधा के साथ 200 सीट क्षमता वाला आधुनिक शिक्षण ब्लॉक भी विकसित किया जाएगा, जिससे चिकित्सा छात्रों को अत्याधुनिक प्रशिक्षण वातावरण मिलेगा। इसके साथ ही प्रदेशभर के मरीजों को बेहतर आपातकालीन और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इसी क्रम में Swaroop Rani Nehru Hospital के विस्तार और उच्चीकरण के लिए बड़ी राहत दी गई है। प्रयागराज मंडल के सबसे बड़े टर्शियरी स्तर के इस सरकारी अस्पताल के विस्तार हेतु 31,314 वर्गमीटर भूमि चिकित्सा शिक्षा विभाग को 90 वर्षों के लिए मात्र एक रुपये वार्षिक किराये पर हस्तांतरित किए जाने का निर्णय लिया गया है। यह अस्पताल वर्ष 1961 से संचालित है और यहां प्रयागराज सहित प्रतापगढ़, कौशाम्बी, फतेहपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, भदोही, बांदा और चित्रकूट तक के मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। नई भूमि मिलने से अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा एवं जांच सुविधाओं का विस्तार संभव हो सकेगा। प्रदेश सरकार ने शहरी परिवहन परियोजनाओं को भी गति देने की दिशा में अहम फैसले लिए हैं। Uttar Pradesh Metro Rail Corporation Limited को आगरा मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के अंतर्गत आगरा कैंट से कालिंदी विहार कॉरिडोर में मेट्रो स्टेशन और वायडक्ट निर्माण के लिए 550 वर्गमीटर भूमि निःशुल्क हस्तांतरित किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है। यह भूमि आगरा के चक अव्वल क्षेत्र में स्थित है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह हस्तांतरण अपवादस्वरूप होगा और भविष्य के लिए उदाहरण नहीं माना जाएगा। इसके अलावा Lucknow Metro फेज-1बी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर, चारबाग से वसंतकुंज परियोजना को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। लगभग 5801.05 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के लिए भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच त्रिपक्षीय एमओयू को मंजूरी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। इससे राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और मजबूत होगी। पशुपालन एवं पशु चिकित्सा शिक्षा से जुड़े छात्रों को भी सरकार ने बड़ी सौगात दी है। प्रदेश के पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों का इंटर्नशिप भत्ता 4 हजार रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 12 हजार रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस निर्णय से लगभग 300 छात्रों को लाभ मिलेगा और सरकार पर अतिरिक्त 4.20 करोड़ रुपये का व्ययभार आएगा। सरकार का मानना है कि इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा और पशु स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता बेहतर होगी। ग्रामीण निकायों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी सरकार ने अहम कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन का निर्णय लिया गया है। आयोग में पांच सदस्य होंगे, जिनमें एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश अध्यक्ष बनाए जाएंगे। आयोग पिछड़े वर्गों की सामाजिक स्थिति, प्रतिनिधित्व और आरक्षण की आवश्यकता पर अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट देगा। आयोग का कार्यकाल सामान्यतः छह माह का रखा जाएगा। सरकार के इन फैसलों को स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक परिवहन नेटवर्क, चिकित्सा शिक्षा सुदृढ़ीकरण और सामाजिक प्रतिनिधित्व की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं का असर प्रदेश की स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत संरचना पर व्यापक रूप से दिखाई देने की उम्मीद है।
वैश्विक तनाव, कच्चे तेल और शेयर बाजारों में उथल-पुथल: निवेशकों की बढ़ती धड़कनों के बीच विश्व अर्थव्यवस्था का नया संकेत
मई 2026 का दूसरा सप्ताह वैश्विक अर्थव्यवस्था, भारतीय वित्तीय बाजारों और आम नागरिकों के लिए अत्यंत संवेदनशील संकेत लेकर आया। यह सप्ताह केवल शेयर बाजारों के उतार-चढ़ाव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह स्पष्ट कर दिया कि आज की दुनिया में अर्थव्यवस्था, भू-राजनीति, ऊर्जा संकट, मुद्रा विनिमय और निवेशक मनोविज्ञान कितनी गहराई से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। एक ओर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और भारतीय रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दीं। डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के पार पहुंचने की आशंकाओं ने बाजार और आम जनता दोनों की चिंता बढ़ा दी है। शेयर बाजारों में अस्थिरता का दौर पूरे सप्ताह भारतीय शेयर बाजार अस्थिरता के दौर से गुजरते रहे। सप्ताह की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई, बीच में तेजी भी दिखाई दी, लेकिन अंतिम कारोारी सत्र में अचानक बिकवाली बढ़ने से बाजार फिर दबाव में आ गया। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि बड़े निवेशकों में अभी भी भरोसे की कमी बनी हुई है। निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर सतर्क बने हुए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि बाजार की अंतिम घंटे की गिरावट यह दर्शाती है कि निवेशकों के भीतर भविष्य को लेकर अनिश्चितता गहराती जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता खतरा पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव रहा। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस बात से चिंतित हैं कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी प्रकार का संकट उत्पन्न होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी प्रकार का सैन्य या राजनीतिक तनाव सीधे तेल की कीमतों पर असर डालता है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करते हैं, ऐसे संकट से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। महंगा तेल और बढ़ती महंगाई की आशंका कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का अर्थ केवल पेट्रोल और डीजल का महंगा होना नहीं है। इसका प्रभाव परिवहन, उद्योग, कृषि, बिजली उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं तक पहुंचता है। जब परिवहन लागत बढ़ती है तो खाद्य सामग्री, उपभोक्ता वस्तुएं और आवश्यक सेवाएं महंगी होने लगती हैं। इससे महंगाई का दबाव बढ़ता है और आम नागरिक की जेब पर सीधा असर पड़ता है। विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं तो भारतीय रिजर्व बैंक को ब्याज दरों को लेकर कठोर रुख अपनाना पड़ सकता है। रुपया 96 पार: क्यों बढ़ी चिंता? इस सप्ताह की सबसे बड़ी आर्थिक घटनाओं में से एक भारतीय रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी रही। डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के पार पहुंचने की चर्चा ने वित्तीय जगत में हलचल पैदा कर दी। रुपये की कमजोरी का सीधा अर्थ है कि विदेशों से आयातित वस्तुएं अधिक महंगी हो जाएंगी। भारत कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, औद्योगिक मशीनें और कई महत्वपूर्ण कच्चे माल डॉलर में खरीदता है। जब रुपया कमजोर होता है तो समान मात्रा में आयात करने के लिए अधिक रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसका असर उद्योगों, व्यापार और आम जनता सभी पर पड़ता है। रुपये की गिरावट के प्रमुख कारण रुपये की कमजोरी के पीछे कई कारण जिम्मेदार रहे। अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों से डॉलर को मजबूती मिली विदेशी निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी बाजारों का रुख किया पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ाया विदेशी पूंजी निकासी से भारतीय मुद्रा बाजार प्रभावित हुआ हालांकि कुछ दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी की, लेकिन बाजार में स्थिरता नहीं बन सकी। किन क्षेत्रों पर सबसे ज्यादा असर? सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीक से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की रुचि बनी रही। दैनिक उपभोग से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी स्थिरता दिखाई दी क्योंकि अनिश्चित समय में निवेशक इन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित मानते हैं। इसके विपरीत धातु, तेल एवं गैस, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और रियल एस्टेट क्षेत्र दबाव में रहे। भू-राजनीति तय कर रही बाजारों की दिशा अब यह स्पष्ट दिखाई देने लगा है कि वैश्विक बाजार केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं चलते। युद्ध, प्रतिबंध, तेल आपूर्ति, समुद्री मार्ग और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति भी बाजारों की दिशा तय कर रहे हैं। निवेशक अब केवल कंपनियों के मुनाफे और घाटे को नहीं देख रहे, बल्कि वे यह भी विश्लेषण कर रहे हैं कि दुनिया के किस क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है और उसका असर किन उद्योगों पर पड़ेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के बावजूद ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर है। तेल महंगा होने पर व्यापार घाटा बढ़ता है, रुपया कमजोर होता है और महंगाई का दबाव बढ़ जाता है। सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की है। विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग कर रुपये को लंबे समय तक स्थिर रखना संभव नहीं होगा। इसके लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण, निर्यात वृद्धि और घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत करना आवश्यक होगा। आम जनता पर क्या पड़ेगा असर? यदि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं। इससे परिवहन लागत बढ़ेगी और खाद्यान्न, दूध, सब्जियों सहित रोजमर्रा की वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। मध्यम वर्ग की बचत और खर्च दोनों प्रभावित होंगे। वहीं शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के सामने चिंता की स्थिति बनी रह सकती है। हालांकि दीर्घकालिक निवेशकों के लिए गिरता बाजार अवसर भी माना जा रहा है। सोना बना सुरक्षित निवेश वैश्विक अनिश्चितता के दौर में सोना एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत बना हुआ है। युद्ध और आर्थिक संकट की आशंकाओं के बीच निवेशक पारंपरिक रूप से सोने की ओर आकर्षित होते हैं। यदि पश्चिम एशिया का संकट और गहराता है तो सोने की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों की स्थिति अमेरिका के प्रमुख शेयर सूचकांक नई ऊंचाइयों के करीब पहुंचे। तकनीकी कंपनियों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मजबूत उपभोक्ता खर्च ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को फिलहाल मजबूती दी है। इसके विपरीत एशियाई बाजारों में अस्थिरता बनी रही। जापान, चीन और हांगकांग के बाजार दबाव में रहे। यूरोप के बाजार भी ऊर्जा संकट और बढ़ती तेल कीमतों से प्रभावित दिखाई दिए। भारत के लिए सकारात्मक संकेत भी मौजूद चुनौतियों के बावजूद भारत की दीर्घकालिक विकास क्षमता अभी भी मजबूत मानी जा रही है। विशाल घरेलू बाजार, युवा जनसंख्या, तकनीकी प्रगति और बुनियादी ढांचे में निवेश भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति प्रदान करते हैं। इसी कारण वैश्विक संकटों के बावजूद भारत दुनिया की प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में अग्रणी बना हुआ है। मई 2026 का यह सप्ताह विश्व अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी की तरह सामने आया है। इसने स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक दुनिया में किसी एक क्षेत्र का तनाव पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। मध्य-पूर्व का संकट भारत की जेब और बाजार दोनों पर असर डाल रहा है। गिरता रुपया, महंगा तेल और बढ़ती वैश्विक अनिश्चितता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। निवेशकों के लिए यह समय धैर्य, संतुलित रणनीति और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाने का है। आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति, तेल बाजार और ब्याज दरों की दिशा ही तय करेगी कि विश्व अर्थव्यवस्था स्थिरता की ओर बढ़ती है या नई उथल-पुथल की ओर।
✍️ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र कर विशेषज्ञ | स्तंभकार | साहित्यकार | अंतरराष्ट्रीय लेखक | चिंतक | कवि | संगीत माध्यमा | सीए (एटीसी)
पेपर लीक और परीक्षा माफिया के दौर में सीबीएसई की नई व्यवस्था क्यों बनी छात्रों के लिए उम्मीद की किरण
✍️ लेखक : एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र भारत सहित पूरी दुनिया में शिक्षा व्यवस्था तेजी से डिजिटल और तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली, क्लाउड आधारित डेटा प्रबंधन और डिजिटल मूल्यांकन ने शिक्षा को अधिक सुविधाजनक और वैश्विक बनाया है। आज छात्र घर बैठे प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं, ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और डिजिटल मार्कशीट प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन तकनीकी विकास के साथ शिक्षा प्रणाली के सामने गंभीर चुनौतियां भी उभर रही हैं। परीक्षा पेपर लीक, मूल्यांकन अनियमितताएं, साइबर धोखाधड़ी और परीक्षा माफियाओं का बढ़ता नेटवर्क अब शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। इसी संवेदनशील माहौल में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी Central Board of Secondary Education द्वारा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों के बाद पुनर्मूल्यांकन और रीचेकिंग की नई प्रक्रिया लागू करना एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम माना जा रहा है। सीबीएसई की तीन चरणों वाली पारदर्शी प्रक्रिया सीबीएसई ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और छात्र हितैषी बनाने के लिए तीन चरणों वाली ऑनलाइन प्रणाली लागू की है। इसमें उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी, अंकों का सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी सुविधा जिन छात्रों को अपने मूल्यांकन पर संदेह है, वे 19 मई से 22 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर अपनी उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी प्राप्त कर सकते हैं। प्रति विषय 700 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। यह व्यवस्था छात्रों को यह समझने का अवसर देती है कि परीक्षक ने उत्तरों का मूल्यांकन किस प्रकार किया है, किन प्रश्नों में अंक कटे हैं और कहीं कोई प्रश्न बिना जांचे तो नहीं रह गया। डिजिटल कॉपी उपलब्ध होने से छात्र स्वयं अपने प्रदर्शन का विश्लेषण कर सकेंगे। यह शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।
अंकों के सत्यापन की प्रक्रिया अंकों के सत्यापन के लिए आवेदन 26 मई से 29 मई 2026 तक किए जा सकेंगे। इस प्रक्रिया के अंतर्गत छात्र यह जांच करवा सकेंगे कि कुल अंक सही तरीके से जोड़े गए हैं या नहीं तथा कोई उत्तर बिना जांचा तो नहीं रह गया। इसके लिए 500 रुपये प्रति विषय शुल्क निर्धारित किया गया है। भारत जैसे विशाल परीक्षा तंत्र में लाखों उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन होता है। ऐसे में छोटी मानवीय त्रुटियां भी छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं। एक अंक कम या अधिक होने से मेरिट, छात्रवृत्ति, कॉलेज प्रवेश और प्रतियोगी परीक्षाओं की पात्रता प्रभावित हो सकती है।
पुनर्मूल्यांकन यानी री-इवैल्यूएशन यदि किसी छात्र को लगता है कि उसके उत्तरों का उचित मूल्यांकन नहीं हुआ है, तो वह प्रश्नवार पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकता है। यह प्रक्रिया भी 26 मई से 29 मई 2026 तक चलेगी। प्रति प्रश्न 100 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद अंक बढ़ सकते हैं, घट सकते हैं या यथावत रह सकते हैं और अंतिम निर्णय बोर्ड का ही मान्य होगा। यह व्यवस्था छात्रों को अकादमिक न्याय प्रदान करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। पूर्णतः ऑनलाइन प्रक्रिया से बढ़ेगी पारदर्शिता सीबीएसई ने सभी आवेदन प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन रखा है। आवेदन केवल आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। इससे भ्रष्टाचार, बिचौलियों और अनावश्यक देरी की संभावनाएं कम होंगी। साथ ही रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और प्रक्रिया को तेज बनाने में भी सहायता मिलेगी। हालांकि डिजिटल प्रणाली के साथ साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता जैसी चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं। शिक्षा व्यवस्था के पूर्ण डिजिटलीकरण के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा तंत्र आवश्यक होगा। सप्लीमेंट्री परीक्षा छात्रों के लिए राहत सीबीएसई ने यह भी घोषणा की है कि कंपार्टमेंट श्रेणी के छात्रों और प्रदर्शन सुधारने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सप्लीमेंट्री परीक्षा 15 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी। “लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स” भरने की प्रक्रिया 2 जून 2026 से शुरू होगी। यह व्यवस्था आधुनिक शिक्षा प्रणाली के उस सिद्धांत को मजबूत करती है जिसमें छात्रों को सुधार और पुनः अवसर प्रदान किए जाते हैं। पेपर लीक और परीक्षा माफियाओं का बढ़ता खतरा हाल ही में Central Bureau of Investigation द्वारा नीट यूजी पेपर लीक मामले में की गई कार्रवाई ने पूरे देश को झकझोर दिया। जांच एजेंसी ने कथित मुख्य सरगना को गिरफ्तार किया, जो महाराष्ट्र के लातूर का एक केमिस्ट्री प्रोफेसर बताया गया। जांच में सामने आया कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की संलिप्तता ने गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यह केवल अपराध नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास संकट का संकेत है। जब परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोग ही गोपनीयता भंग करें, तो छात्रों और अभिभावकों का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है। पेपर लीक के सामाजिक और मानसिक दुष्प्रभाव पेपर लीक की घटनाएं केवल परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं रहतीं। इनके दूरगामी सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव होते हैं। लाखों छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं, परिवार भारी आर्थिक बोझ उठाते हैं और पूरा भविष्य एक परीक्षा पर निर्भर हो जाता है। ऐसे में पेपर लीक होने पर ईमानदार छात्रों का मनोबल टूटता है और योग्यता आधारित व्यवस्था कमजोर पड़ जाती है। इसी कारण अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों ने डिजिटल एन्क्रिप्शन, मल्टी लेयर ऑथेंटिकेशन, लाइव मॉनिटरिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी तकनीकों को अपनाया है। भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन विशाल जनसंख्या और बहुस्तरीय प्रशासनिक ढांचे के कारण चुनौतियां अधिक जटिल हैं। शिक्षा व्यवस्था में तकनीक और नैतिकता दोनों जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा मंत्रालय को बहुस्तरीय सुरक्षा रणनीति अपनानी चाहिए। प्रश्न पत्र निर्माण से लेकर वितरण और मूल्यांकन तक हर चरण में डिजिटल ट्रैकिंग, एन्क्रिप्शन और निगरानी अनिवार्य की जानी चाहिए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम, ब्लॉकचेन तकनीक, सुरक्षित क्लाउड सर्वर, फेस रिकग्निशन और बायोमेट्रिक सत्यापन भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। लेकिन तकनीक के साथ प्रशासनिक ईमानदारी और नैतिक मूल्यों को भी समान महत्व देना होगा। यदि व्यवस्था के भीतर भ्रष्टाचार मौजूद रहेगा, तो अत्याधुनिक तकनीक भी विफल हो सकती है। शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखना समय की मांग आज शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विकास, आर्थिक प्रगति और सामाजिक स्थिरता की आधारशिला बन चुकी है। यदि परीक्षा प्रणाली पर से विश्वास समाप्त हो जाए तो प्रतिभा आधारित व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है। सीबीएसई की नई पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन प्रणाली निश्चित रूप से छात्र हितैषी और पारदर्शी पहल है। इससे छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका देखने और मूल्यांकन की निष्पक्षता जांचने का अधिकार मिलता है। लेकिन दूसरी ओर पेपर लीक जैसी घटनाएं यह भी संकेत देती हैं कि शिक्षा व्यवस्था में अभी गहरे सुधारों की आवश्यकता बाकी है। भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में से एक है। करोड़ों युवाओं का भविष्य शिक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है। इसलिए परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाना राष्ट्रीय आवश्यकता बन चुका है। वर्तमान डिजिटल युग शिक्षा के लिए अवसर और चुनौती दोनों लेकर आया है। एक ओर तकनीक पारदर्शिता, सुविधा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का मार्ग खोल रही है, वहीं दूसरी ओर साइबर अपराध, पेपर लीक और मूल्यांकन अनियमितताएं नई चिंताएं पैदा कर रही हैं। सीबीएसई की नई पुनर्मूल्यांकन व्यवस्था सकारात्मक प्रयास अवश्य है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता तभी संभव होगी जब पूरी परीक्षा प्रणाली में ईमानदारी, जवाबदेही और कठोर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। शिक्षा केवल परीक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की आत्मा है। इस आत्मा की रक्षा करना आज पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बन चुका है।
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) तहसील रुद्रपुर में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी और पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर ने फरियादियों की समस्याएं सुनकर संबंधित विभागों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान पुराने राजस्व मामलों के लंबित रहने पर अधिकारियों को सख्त चेतावनी भी दी गई। समाधान दिवस में अधिशासी अभियंता आरईडी और जलनिगम की अनुपस्थिति पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए दोनों अधिकारियों का स्पष्टीकरण तलब किया। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी अधिकारी सुबह 10 बजे तक अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर समाधान दिवस का संचालन सुनिश्चित करें। राजस्व मामलों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने धारा 24 और 116 से जुड़े पांच-पांच पुराने मामलों की फाइलें मंगाकर जांच की। तहसीलदारों को निर्देश दिया गया कि वर्ष 2023, 2024 और 2025 के लंबित मामलों का प्रभावी अनुश्रवण कर शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। लापरवाही पाए जाने पर प्रतिकूल प्रविष्टि की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। बंटवारे से जुड़े मामलों में पारित आदेशों के पालन पर भी जिलाधिकारी ने सख्ती दिखाई। उन्होंने कहा कि आदेश जारी होने के बाद भी यदि अनुपालन लंबित रहता है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण सत्रों की जांच के लिए लगभग डेढ़ दर्जन जिला स्तरीय अधिकारियों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेजा गया। निरीक्षण के दौरान गर्भवती महिलाओं की जांच, दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता, मातृ शिशु कार्ड तथा बच्चों के नियमित वजन की स्थिति की जांच करने के निर्देश दिए गए। चिलमन मुहान निवासी फरियादी की धारा 176 से संबंधित शिकायत पर जिलाधिकारी ने चकबंदी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम गठित कर स्थलीय निरीक्षण कराने के निर्देश दिए। वहीं उसरा बाजार में इंटरलॉकिंग सड़क पर अतिक्रमण की शिकायत मिलने पर उप जिलाधिकारी को मौके पर जाकर जांच और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने को कहा गया। समाधान दिवस में ग्राम कोरवा निवासी दिव्यांग महिला लुरकी देवी को ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराने और उनका आयुष्मान कार्ड बनवाने की प्रक्रिया तहसील परिसर में ही शुरू कराई गई। ग्राम पिंडरी से जुड़े विवादित प्रकरण में दो लेखपालों और पुलिस टीम को मौके पर भेजकर समाधान कराने के निर्देश दिए गए। पुलिस अधीक्षक ने थाना प्रभारियों को भूमि विवाद और पारिवारिक मामलों में राजस्व विभाग के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई करने तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। सम्पूर्ण समाधान दिवस में कुल 61 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 12 मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। प्राप्त शिकायतों में राजस्व विभाग के 27, पुलिस विभाग के 8, विकास विभाग के 6, खाद्य एवं रसद विभाग के 4 तथा अन्य विभागों के 16 मामले शामिल रहे। कार्यक्रम में उप जिलाधिकारी रुद्रपुर अवधेश निगम, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ए.के. गुप्ता, तहसीलदार समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव चन्द्र प्रकाश तिवारी ने शनिवार को वृद्धाश्रम गड़वार का औचक निरीक्षण कर वहां रह रहे वृद्धजनों की समस्याएं सुनीं तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। यह निरीक्षण माननीय जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल कुमार झा के मार्गदर्शन में किया गया। निरीक्षण के दौरान सचिव ने वृद्धजनों से आत्मीय बातचीत करते हुए उनके रहन-सहन, खान-पान एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। वृद्धजनों द्वारा बताई गई समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए उन्होंने अधीक्षक को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। सचिव ने जिला चिकित्साधिकारी को पत्र भेजकर वृद्धाश्रम में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित कराने के निर्देश भी दिए, ताकि वृद्धजनों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि किसी वरिष्ठ नागरिक को किसी प्रकार की विधिक सहायता की आवश्यकता हो तो वह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय से संपर्क कर सकता है।निरीक्षण के बाद वृद्धाश्रम परिसर में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में वृद्धजनों को विभिन्न कानूनी अधिकारों एवं सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। सचिव चन्द्र प्रकाश तिवारी ने विशेष रूप से माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया। इस अवसर पर अधीक्षक अजित कुमार, लेखाकार भूपेन्द्र सिंह, स्टोर कीपर तेजबहादुर, केयर टेकर मुकेश सिंह, दयाशंकर वर्मा सहित अन्य कर्मचारी एवं वृद्धजन उपस्थित रहे।
90 शिकायतों में 8 का मौके पर निस्तारण, मिड डे मील में केवल खिचड़ी परोसने की शिकायत पर जांच के आदेश
बलिया(राष्ट्र की परम्परा )
तहसील बैरिया में शनिवार को आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह एवं पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने दूर-दराज से पहुंचे फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। समाधान दिवस में बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने पेंशन, राशन कार्ड, वरासत, बैनामा तथा भूमि कब्जे से जुड़े मामलों को उठाया। इनमें सर्वाधिक शिकायतें जमीन कब्जे से संबंधित रहीं। जिलाधिकारी ने राजस्व एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि भूमि विवाद के मामलों में मौके पर जाकर जांच करें तथा प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आम जनता को न्याय दिलाने में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समाधान दिवस के दौरान एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के कई प्राथमिक विद्यालयों में मिड डे मील योजना के तहत बच्चों को प्रतिदिन केवल खिचड़ी ही परोसी जा रही है। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारी बैरिया को तीन दिनों के भीतर पांच प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। वहीं तहसीलदार को दस विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता की जांच कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया। सम्पूर्ण समाधान दिवस में कुल 90 आवेदन पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 8 मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष मामलों को संबंधित विभागों को सौंपते हुए शीघ्र समाधान के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अधिकारी अपने विभाग से जुड़े मामलों का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ निस्तारण करें, ताकि फरियादियों को समय पर न्याय मिल सके। वहीं पुलिस अधीक्षक ने सभी थानाध्यक्षों को निर्देशित किया कि शिकायतकर्ताओं द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्रों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस दौरान उपजिलाधिकारी बैरिया संजय कुमार कुशवाहा, तहसीलदार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। न्यायालय कक्षों का उद्घाटन समाधान दिवस के उपरांत जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह एवं पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने तहसील बैरिया में न्यायालय उप जिलाधिकारी (न्यायिक) बैरिया तथा न्यायालय नायब तहसीलदार सुरेमनपुर कक्ष का फीता काटकर उद्घाटन किया। जिलाधिकारी ने कहा कि नए न्यायालय कक्षों के शुरू होने से क्षेत्रीय लोगों को राजस्व एवं प्रशासनिक मामलों के निस्तारण में सुविधा मिलेगी तथा न्यायिक कार्यों में तेजी आएगी। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए किए जा रहे ऐसे प्रयास आम जनता के लिए लाभकारी साबित होंगे। उद्घाटन के बाद अधिकारियों ने न्यायालय कक्षों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
मालदह उपकेंद्र पर शनिवार को आयोजित 33/11 केवी विद्युत मेगा कैम्प में उपभोक्ताओं की बिजली संबंधी शिकायतों का त्वरित निस्तारण किया गया। कैम्प में पहुंचे 16 उपभोक्ताओं की स्मार्ट मीटर, गलत बिजली बिल एवं अन्य तकनीकी समस्याओं को दर्ज कर उनका समाधान कराया गया। विभाग द्वारा सभी शिकायतों को 1912 पोर्टल पर दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की गई।कैम्प के दौरान विभागीय कर्मचारियों ने उपभोक्ताओं की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और मौके पर ही संबंधित शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया पूरी की। साथ ही उपभोक्ताओं को बिजली विभाग की विभिन्न सुविधाओं, ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था तथा निस्तारण प्रक्रिया के बारे में जानकारी देकर जागरूक भी किया गया।इस अवसर पर जूनियर इंजीनियर ने बताया कि मेगा कैम्प का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को एक ही स्थान पर त्वरित एवं पारदर्शी समाधान उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर एवं बिजली बिल से जुड़ी शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जा रहा है।उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की बिजली संबंधी समस्या होने पर अनावश्यक रूप से विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय सीधे उपकेंद्र पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समयबद्ध तरीके से समस्याओं का समाधान किया जा सके।
घर में घुसकर महिलाओं समेत पूरे परिवार पर टूटा कहर: लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला, युवक आईसीयू में जिंदगी की जंग लड़ रहा
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत जंगल दुधई उर्फ चेंहरी गांव शुक्रवार को उस समय दहल उठा, जब कटहल तोड़ने और जमीन के विवाद ने अचानक खूनी रूप ले लिया। मामूली कहासुनी कुछ ही देर में हिंसक संघर्ष में बदल गई और दबंगों ने कथित तौर पर एक परिवार के घर में घुसकर महिलाओं समेत सभी सदस्यों पर जानलेवा हमला कर दिया। लाठी-डंडों, लोहे की रॉड और लात-घूसों से की गई इस बेरहमी पिटाई में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि एक युवक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। घटना के बाद गांव में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है। पीड़ित अमेरिका पुत्र राजेन्द्र निवासी जंगल दुधई उर्फ चेंहरी टोला हरैया के अनुसार शुक्रवार शाम करीब चार बजे वह अपनी निजी जमीन से कटहल तोड़कर घर लौट रहे थे। आरोप है कि इसी बात को लेकर गांव के छब्बू लाल, हीरालाल, संजय, भोला, सोनू, मनोज और वीरेन्द्र समेत कई लोग भड़क गए। कुछ ही देर बाद सभी गोलबंद होकर उनके घर पहुंच गए और गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर मामला अचानक हिंसक हो गया। परिजनों का आरोप है कि दबंगों ने घर में घुसते ही हमला बोल दिया। हमलावर इतने उग्र थे कि उन्होंने महिलाओं को भी नहीं बख्शा। महिलाओं के बाल पकड़कर घसीटा गया और उन्हें लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा गया। घर में मौजूद बच्चे और बुजुर्ग चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन हमलावरों का कहर लगातार जारी रहा। हमले में मुन्ना पुत्र राजेन्द्र के सिर में गंभीर चोट आई और उनका बायां हाथ फ्रैक्चर हो गया। वहीं सोहन, त्रिभुवन, श्रीभागवत, रामसूरत, संध्या, अनुराधा, विद्यावती और सुभावती समेत कई अन्य लोग घायल हो गए। पीड़ित परिवार का कहना है कि मार-पीट के दौरान दबंग लगातार धमकी दे रहे थे कि यदि कटहल वाली जमीन नहीं छोड़ी गई तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा। घटना के दौरान गांव में अफरा-तफरी मच गई। चीख-पुकार सुनकर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे, जिसके बाद आरोपी फरार हो गए। पीड़ित परिवार ने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और पूछ-ताछ कर वापस लौट गई। इसके बाद पीड़ितों ने आईटीएम चौकी चेंहरी पर लिखित शिकायत देकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।सभी घायलों को सरकारी एम्बुलेंस से जिला संयुक्त चिकित्सालय महराजगंज पहुंचाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। परिजनों के मुताबिक देर रात मुन्ना की हालत अचानक बिगड़ने लगी। उन्हें लगातार उल्टी और चक्कर आने लगे, जिसके बाद चिकित्सकों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए रेफर कर दिया। बाद में उन्हें शहर के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। परिवार का आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई और मेडिकल परीक्षण में भी लापरवाही बरती गई। पीड़ितों का कहना है कि चौकी प्रभारी ने उन्हें गंभीरता से लेने के बजाय फटकार लगाते हुए यह कहकर भगा दिया कि तुम लोग शराब पीकर झगड़ा करते हो। इस आरोप के बाद पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक महराजगंज से तत्काल एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। वहीं गांव में बढ़ते तनाव को देखते हुए ग्रामीण किसी बड़ी घटना की आशंका जता रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मासूम बेटे को शौच कराने के बाद पानी भरने गई थी शमा परवीन, टिल्लू पंप चालू करते ही हुआ दर्दनाक हादसा
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पनियरा थाना क्षेत्र के इलाहाबाद गांव में शनिवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। घर के पीछे लगे नल पर पानी भरने गई एक महिला की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा इतना अचानक और भयावह था कि परिवार को संभलने तक का मौका नहीं मिला। महिला अपने पीछे दो मासूम बच्चों को छोड़ गई है, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। मृतका की पहचान 35 वर्षीय शमा परवीन पत्नी समीर अंसारी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि शनिवार सुबह करीब 5:30 बजे शमा परवीन अपने तीन वर्षीय बेटे अर्सलान को शौच कराने के बाद घर के पीछे लगे नल पर पानी भरने गई थीं। रोज की तरह उन्होंने पानी भरने के लिए टिल्लू पंप का मोटर चालू किया, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह सुबह उनकी जिंदगी की आखिरी सुबह साबित होगी। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार मोटर चालू होते ही अचानक नल के पाइप में करंट उतर आया। जैसे ही शमा परवीन ने नल को पकड़ा, वह तेज करंट की चपेट में आ गईं। करंट इतना तेज था कि वह मौके पर ही गंभीर रूप से झुलसकर जमीन पर गिर पड़ीं। आस-पास कोई मौजूद न होने के कारण कुछ देर तक किसी को घटना की जानकारी नहीं हो सकी। कुछ समय बाद जब उनके पति समीर अंसारी बाहर निकले तो पत्नी को नल के पास अचेत अवस्था में पड़ा देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल मोटर का स्विच बंद किया और शोर मचाकर गांव वालों को बुलाया। आनन-फानन में परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे तथा शमा परवीन को निजी वाहन से इलाज के लिए पनियरा ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उनकी सांसें थम गईं। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। पति समीर अंसारी, जो पेशे से इलेक्ट्रिक प्लंबर हैं, पत्नी की मौत से पूरी तरह टूट गए हैं। वहीं 10 वर्षीय बेटे अरशद अंसारी और तीन वर्षीय अर्सलान की हालत देख हर किसी की आंखें नम हो जा रही हैं। मासूम बच्चों को अब भी यकीन नहीं हो रहा कि उनकी मां हमेशा के लिए उन्हें छोड़कर चली गई है। हादसे की खबर मिलते ही मायके पक्ष के लोग भी गांव पहुंच गए। घर में चीख-पुकार और मातम का माहौल बना रहा। गांव के लोग परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे रहे। परिजन शव को सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी में लगे रहे। ग्रामीणों ने इस हादसे के बाद बिजली उपकरणों और मोटरों की नियमित जांच कराने की जरूरत बताई है। लोगों का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हो जाती है। गांव में हुई इस घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है।
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) स्थानीय थाना क्षेत्र अंतर्गत कपरवार नौकाटोला निवासी रिटायर्ड शिक्षक, जयप्रकाश श्रीवास्तव के घर में घुसकर पड़ोसियों ने लाठी डंडे से हमला बोल दिया। जिससे शिक्षक को गंभीर चोट आई है। मारपीट के दौरान शिक्षक के पाकेट से दुकान के बिक्री का ढाई हजार रुपया भी छीन ले गये। प्राप्त जानकारी के अनुसार नौकाटोला निवासी जयप्रकाश श्रीवास्तव प्राथमिक विद्यालय से रिटायर्ड शिक्षक है। सड़क के उत्तर तरफ उनका घर व हाता है।हाते में आम के पेड़े पर फल लगा है। और उनके घरके पिछे रहने वाले पड़ोसी चोरी से आम तोड़ रहे थे, जयप्रकाश लाल ने मना किया तो गाली गलौज देने लगे । इसके बाद जयप्रकाश अपने घर के दुकान पर बैठे थे । इसी बीच करीब चार पाँच की संख्या में पुवको ने लाठी डंडा लेकर घर में घुस कर हमला बोल दिये । मारपीट के दौरान दुकान के विक्री का करीब ढाई हमार रुपया भी जयप्रकाश के पाकेट निकाल कर ले लिये । मार पीट के बाद जानमाल की धमकी देते चले गये। घर पर अकेले जयप्रकाश मास्टर व उनकी पत्नी रहती है। घटना की सूचना कपरवार चौकी पर तैनात पुलिस को दिया। सूचना पर हल्का पुलिस मौके पर पहुँच घायल जयप्रकाश को ईलाज कराने के बाद तहरीर लेकर थाने पर बुलाया है। घायल जयप्रकाश का ईलाज चल रहा है। थानाध्यक्ष विशाल कुमार उपाध्याय ने बताया की तहरीर मिली है। मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की जा रही है।
हालत गंभीर: जिला अस्पताल रेफर, श्यामदेउरवां क्षेत्र में मचा हड़कंप
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के श्यामदेंउरवा थाना क्षेत्र में गुरुवार की रात पारिवारिक विवाद ने खौफनाक रूप ले लिया। पत्नी से कहासुनी के बाद एक व्यक्ति ने आवेश में आकर हंसिए से अपना गला काट लिया। गंभीर हालत में घायल व्यक्ति को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परतावल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल महराजगंज रेफर कर दिया गया। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। जानकारी के अनुसार श्यामदेंउरवां गांव निवासी मोहन 45 वर्ष का किसी घरेलू बात को लेकर पत्नी से विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि पति-पत्नी के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक होती रही। विवाद बढ़ने पर पत्नी शिकायत करने के लिए थाने की ओर चली गई। इसी दौरान गुस्से और तनाव में आए मोहन ने घर में रखा हंसिया उठाकर अपने ही गले पर वार कर लिया। गले पर वार होते ही मोहन खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ा। घटना देखकर परिवार के लोग घबरा गए और घर में चीख-पुकार मच गई। शोर सुनकर आस-पास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलते ही श्यामदेउरवां पुलिस तत्काल घटना-स्थल पर पहुंची और घायल को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परतावल भेजा। घायल को अस्पताल पहुंचाने में पुलिस के साथ उसके भाई सोहन तथा गांव के चौकीदार प्रहलाद ने भी मदद की। सीएचसी पर डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन हालत गंभीर देखते हुए उसे जिला अस्पताल महराजगंज रेफर कर दिया गया। इस संबंध में थानाध्यक्ष अभिषेक सिंह ने बताया कि पारिवारिक विवाद के दौरान व्यक्ति द्वारा खुद को घायल करने की सूचना मिली थी। मामले की जांच की जा रही है। फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से कोई तहरीर नहीं दी गई है।
सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। सलेमपुर रेलवे स्टेशन के दक्षिणी रेलवे फाटक पर शुक्रवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जहां एक युवक ने चलती ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जुट गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रेलवे फाटक बंद था और लोग ट्रेन गुजरने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक युवक साइकिल से वहां पहुंचा। बताया जा रहा है कि युवक ने अपनी साइकिल फाटक के पास छोड़ी और लखनऊ से वाराणसी जा रही कृषक एक्सप्रेस के सामने अचानक छलांग लगा दी। ट्रेन की चपेट में आने से युवक का शरीर दो हिस्सों में बंट गया और उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना को देखकर आसपास मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। सूचना मिलते ही जीआरपी के कांस्टेबल प्रदीप कुमार मौके पर पहुंचे और शव को रेलवे ट्रैक से हटवाकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कराई। प्रारंभ में मृतक की पहचान नहीं हो सकी थी, जिसके बाद पुलिस पहचान कराने के प्रयास में जुटी रही। इसी बीच घटना स्थल की तस्वीरें और जानकारी सोशल मीडिया तथा व्हाट्सएप पर वायरल होने लगी। फोटो देखने के बाद मझौली राज निवासी एक व्यक्ति ने मृतक की पहचान वार्ड नंबर 1 हरिजन बस्ती, मझौली राज निवासी बृजेश कुमार पुत्र रमाकांत प्रसाद के रूप में की तथा इसकी सूचना परिजनों को दी। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन बदहवास हालत में मौके पर पहुंचे। शव की स्थिति देखकर परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे क्षेत्र में घटना को लेकर शोक और चर्चा का माहौल बना रहा। जीआरपी ने पंचनामा की कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए देवरिया भेज दिया। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
बदमाशों ने घेरकर की बेरहमी से पिटाई, सोने- चांदी के जेवरात व बाइक लेकर फरार
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के पुंरदरपुर थाना क्षेत्र में गुरुवार की शाम एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। घर लौट रहे एक सर्राफा कारोबारी को बदमाशों ने सुनसान जंगल मार्ग में रोक कर बेरहमी से पीटा और लाखों रुपये के सोने-चांदी के जेवरात तथा बाइक लूटकर फरार हो गए। घटना के बाद व्यापारियों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। प्राप्त जानकारी के अनुसार लक्ष्मीपुर बाजार निवासी रंजीत सोनी 35 वर्ष ग्राम पंचायत मानिक तालाब के धनहिंया चौराहे पर सोने-चांदी की दुकान संचालित करते हैं। रोजाना की तरह गुरुवार की शाम करीब सात बजे वह दुकान बंद कर अपनी बाइक से घर लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि जैसे ही वह मल्हंनी फुलवरिया के समीप जंगल क्षेत्र में पहुंचे, पहले से घात लगाए बैठे चार से पांच बदमाशों ने उन्हें रोक लिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सभी बदमाश बाइक पर सवार थे और वारदात पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दी गई। बदमाशों ने कारोबारी पर अचानक हमला बोल दिया और डंडों से ताबड़-तोड़ हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। हमले के बाद बदमाश उनके पास मौजूद लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात और बाइक लूटकर फरार हो गए। घटना इतनी तेजी से हुई कि आस-पास मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं सके। बदमाशों के भाग जाने के बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और घायल व्यापारी को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लक्ष्मीपुर पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में चीख- पुकार मच गई। वहीं क्षेत्र के व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों में भी भय और आक्रोश का माहौल देखने को मिला। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं से आमजन खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस आस-पास के लोगों से पूछ-ताछ करने के साथ इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की विशेष टीम गठित कर दी गई है। इस संबंध में चौकी इंचार्ज संजय सिंह ने बताया कि स्वर्ण व्यवसायी के साथ मार-पीट और लूट की सूचना प्राप्त हुई है। व्यापारी द्वारा जेवरात और बाइक लूटने का आरोप लगाया गया है। पुलिस द्वारा सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।
बस पकड़ने पहुंचे थे न्यायालय कर्मी, हादसे के बाद न्यायिक परिवार में शोक की लहर
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। महराजगंज शहर स्थित रोडवेज बस डिपो परिसर में गुरुवार को हुए दर्दनाक हादसे में ग्राम न्यायालय निचलौल से जुड़े वरिष्ठ लिपिक एवं न्यायालय कर्मी मानवेन्द्र मिश्रा की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद डिपो परिसर में अफरा-तफरी मच गई, जबकि न्यायालय कर्मियों, अधिवक्ताओं और कर्मचारियों में शोक की लहर दौड़ गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार मानवेन्द्र मिश्रा बस पकड़ने के लिए रोडवेज डिपो पहुंचे थे। इसी दौरान डिपो परिसर में खड़ी एक रोडवेज बस अचानक पीछे की ओर बढ़ने लगी। अचानक हुई इस घटना में वह संभल नहीं सके और बस के पिछले पहिए की चपेट में आ गए। हादसा इतना भयावह था कि मौके पर मौजूद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों तथा डिपो कर्मचारियों की मदद से गंभीर रूप से घायल मानवेन्द्र मिश्रा को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटना-स्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मानवेन्द्र मिश्रा के निधन की खबर मिलते ही न्यायालय परिसर में शोक का माहौल छा गया। अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मचारियों ने इसे न्यायिक परिवार के लिए अपूर्णनीय क्षति बताते हुए गहरा दुख व्यक्त किया। बड़ी संख्या में अधिवक्ता, कर्मचारी एवं परिचित जिला अस्पताल पहुंचकर परिजनों को सांत्वना देते रहे। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने रोडवेज बस डिपो की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि डिपो परिसर में वाहनों की आवाजाही अव्यवस्थित ढंग से होती है, जिससे यात्रियों की जान हमेशा खतरे में बनी रहती है। उन्होंने डिपो प्रशासन से स्पष्ट पार्किंग व्यवस्था, वाहनों की नियंत्रित आवाजाही, चेतावनी संकेतक बोर्ड तथा सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू नहीं किया गया तो भविष्य में भी इस तरह के दर्दनाक हादसे दोहराए जा सकते हैं। फिलहाल इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक और संवेदना का माहौल बना हुआ है।