गैस बुकिंग और केवाईसी प्रक्रिया को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। मोबाइल नंबर बदलने के बाद एजेंसी में समय से सूचना न देने पर उपभोक्ताओं को ओटीपी प्राप्त करने में दिक्कत हो रही है, जिससे गैस बुकिंग प्रभावित हो रही है। वहीं, आदर्श नगर पंचायत सिकंदरपुर क्षेत्र में कमर्शियल गैस की बुकिंग न होने से छोटे व्यापारियों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो गया है।जलपा चौक निवासी मुन्ना मोदी ने बताया कि कई दिनों से कमर्शियल गैस की बुकिंग नहीं हो पा रही है, जिससे दुकान संचालन में भारी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि एजेंसी स्तर पर समस्या का समाधान नहीं होने से व्यापार प्रभावित हो रहा है। इसी तरह बस स्टेशन चौराहे पर चाय-नाश्ते की दुकान लगाने वाले बड़ा निवासी आशीष कुमार ने बताया कि वह रोज़ सुबह छोला-भटूरा की दुकान लगाते थे, लेकिन गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण पिछले दो दिनों से उनकी दुकान बंद है।छोटे-छोटे दुकानदारों का कहना है कि गैस की कमी और बुकिंग की दिक्कतों के चलते उनका कारोबार ठप पड़ता जा रहा है। उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करने में भी कठिनाई हो रही है। उपभोक्ताओं ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि गैस बुकिंग व्यवस्था को सुचारू किया जाए और केवाईसी व ओटीपी से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए, ताकि आम जनता और व्यापारियों को राहत मिल एचपी गैस के मैनेजर झुनझुन कुमार ने बताया की लोगो की समस्याओ को दूर किया जा रहा है हमारी गाड़ी गाव गाव घूम रही है पेपर से जो दिक्क़त है उसको हम ठीक कर रहे है
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने पुलिस लाइन स्थित आरटीसी रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर का निरीक्षण कर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रशिक्षुओं को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने प्रशिक्षुओं को अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और जनता के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने की सीख देते हुए कहा कि पुलिस का मुख्य उद्देश्य कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना और आमजन में सुरक्षा की भावना स्थापित करना है। एसपी ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता, समय पालन और पुलिस सेवा के मूलभूत सिद्धांतों पर जोर देते हुए कहा कि प्रशिक्षण काल ही एक सक्षम, आदर्श और उत्तरदायी पुलिस कर्मी के निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस की छवि उसके आचरण और कार्यशैली से बनती है, इसलिए हर प्रशिक्षु को ईमानदारी, निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। इस दौरान उन्होंने आधुनिक पुलिसिंग की जरूरतों पर प्रकाश डालते हुए साइबर अपराध की रोकथाम, कानून-व्यवस्था बनाए रखने, भीड़ नियंत्रण, महिला एवं बाल सुरक्षा और अपराध नियंत्रण की रणनीतियों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। साथ ही तकनीकी दक्षता, त्वरित निर्णय क्षमता और सूझ-बूझ विकसित करने पर विशेष बल दिया, ताकि बदलते परिवेश में पुलिस और अधिक प्रभावी बन सके। कार्यक्रम में अपर पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने प्रशिक्षुओं का उत्साहवर्धन करते हुए अनुशासन का कड़ाई से पालन करने, शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत रहने और प्रशिक्षण को पूरी गंभीरता व समर्पण के साथ ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया। अंत में एसपी ने निर्देश दिया कि प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्यों को अपने दैनिक कार्यों में लागू करें, जिससे जनपद में कानून-व्यवस्था और अधिक मजबूत हो तथा पुलिस के प्रति आमजन का विश्वास और सुदृढ़ हो सके।
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर के सहयोग से महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा “AI for All” नामक विशेष पहल का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के युवाओं के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
कार्यक्रम का आयोजन MPIT के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के माध्यम से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज फाउंडेशन के सहयोग से किया जा रहा है। इस पहल के तहत प्रतिभागियों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्रदान की जाएगी, जिससे वे डिजिटल युग की चुनौतियों के प्रति सजग और सक्षम बन सकें। इस संबंध में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के डीन डॉ. रघु राम अचल ने कहा कि “AI for All कार्यक्रम युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसके माध्यम से वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा जैसे उभरते क्षेत्रों की बुनियादी समझ हासिल कर सकते हैं। इस तरह की पहल से प्रदेश के युवाओं को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सकेगा।” पंजीकरण प्रक्रिया 2 अप्रैल 2026 को दोपहर 12 बजे से शुरू हो चुकी है, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि 9 अप्रैल 2026 दोपहर 12 बजे निर्धारित की गई है। कोर्स 15 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होगा। यह प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क है। कोर्स की कुल अवधि 21 घंटे की होगी, जिसे प्रतिभागियों को 90 दिनों के भीतर पूरा करना होगा। इच्छुक अभ्यर्थी दिए गए लिंक https://iur.ls/MPIT_AI के माध्यम से अपना पंजीकरण कर सकते हैं।
सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। बलिया जिले के सिकंदरपुर नगर क्षेत्र में अतिक्रमण की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। सड़कों पर बढ़ते अवैध कब्जों के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है और यातायात व्यवस्था चरमरा गई है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा समस्या
स्थानीय लोगों के अनुसार हॉस्पिटल रोड से रेलवे स्टेशन तक, बस स्टेशन चौराहे से जलपा चौक और सुनार गली होते हुए अस्पताल तक अतिक्रमण का असर सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। दुकानदारों द्वारा सड़क तक फैलाए गए सामान के कारण आए दिन जाम की स्थिति बन रही है।
जाम और हादसों का बढ़ा खतरा
नागरिकों का कहना है कि सड़कों के किनारे और डिवाइडर के पास खड़े वाहनों से सड़कें संकरी हो जाती हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। लोगों ने नियम तोड़ने वालों पर चालान की मांग की है।
• अस्पताल की व्यवस्था सुधारी जाए • स्ट्रीट लाइटों की नियमित जांच और मरम्मत हो • सफाई व्यवस्था बेहतर की जाए
साथ ही वार्ड सदस्यों से हर महीने कार्यों का फीडबैक देने की मांग भी उठी है।
नगर पंचायत का एक्शन
नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी मनोज पांडेय ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। दुकानदारों को इसकी सूचना दी जा रही है और जल्द ही पुलिस-प्रशासन के सहयोग से अभियान चलाया जाएगा।
लोगों को कार्रवाई का इंतजार
नगरवासियों को उम्मीद है कि इस बार प्रशासन ठोस कदम उठाएगा और सिकंदरपुर को अतिक्रमण मुक्त बनाकर यातायात को सुचारु किया जाएगा।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। इजरायल, संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच तेजी से बढ़ते तनाव को लेकर ज्यूडिशियल काउंसिल ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से तत्काल और निर्णायक कार्रवाई की मांग की है। काउंसिल ने औपचारिक पत्र के माध्यम से चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इसके वैश्विक स्तर पर गंभीर और विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं।
आपात बैठक और युद्धविराम प्रस्ताव की मांग
ज्यूडिशियल काउंसिल ने UNSC से आग्रह किया है कि:
• तुरंत आपातकालीन बैठक बुलाई जाए • एक बाध्यकारी युद्धविराम प्रस्ताव पारित किया जाए • संबंधित देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता शुरू कराई जाए
काउंसिल ने कहा कि अब केवल चर्चा का समय नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।
पिछले कुछ सप्ताहों में यह संघर्ष काफी तीव्र हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान, मिसाइल हमले और जवाबी कार्रवाई से भारी तबाही हुई है। इससे नागरिकों की मौत, बुनियादी ढांचे को नुकसान और बड़े पैमाने पर विस्थापन की स्थिति बनी है।
वैश्विक संकट की चेतावनी
ज्यूडिशियल काउंसिल के चेयरमैन राजीव अग्निहोत्री ने कहा कि यह स्थिति अब क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक संकट का रूप ले चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह संघर्ष बढ़ता है, तो:
• वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी • ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी • अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा गहराएगा
मानवीय संकट पर गहरी चिंता
काउंसिल ने कहा कि इस संघर्ष का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। लगातार बढ़ती मौतें और बुनियादी ढांचे का विनाश अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
UNSC की जिम्मेदारी पर जोर
ज्यूडिशियल काउंसिल ने कहा कि वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखना UNSC की ऐतिहासिक जिम्मेदारी है। ऐसे में किसी भी तरह की देरी या निष्क्रियता को अंतरराष्ट्रीय दायित्व की विफलता माना जाएगा।
आर्थिक संकट का भी खतरा
अग्निहोत्री ने चेतावनी दी कि लंबे समय तक जारी संघर्ष से:
• तेल की कीमतों में तेजी • सप्लाई चेन बाधित • महंगाई और वित्तीय अस्थिरता
जैसे संकट उत्पन्न हो सकते हैं, जिसका सबसे अधिक असर विकासशील देशों पर पड़ेगा।
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में ग्राम रोजगार सेवकों ने लंबित मानदेय और कम वेतन को लेकर तीखी नाराजगी जाहिर की है। उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के बैनर तले सैकड़ों कर्मचारियों ने जिलाध्यक्ष/प्रांतीय उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद के नेतृत्व में अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की।
8 माह से नहीं मिला मानदेय
संघ की ओर से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद पंकज चौधरी को संबोधित ज्ञापन में कहा गया कि ग्राम रोजगार सेवकों को पिछले 8 महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है।
सिर्फ ₹7,788 प्रतिमाह के मानदेय पर काम करना और वह भी समय पर न मिलना, कर्मचारियों के लिए बड़ी आर्थिक समस्या बन गया है।
परिवार चलाना हुआ मुश्किल
रोजगार सेवकों का कहना है कि भुगतान न होने के कारण:
• रोजमर्रा के खर्च प्रभावित हो रहे हैं • बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है • इलाज तक कराना मुश्किल हो गया है
उन्होंने बताया कि अगस्त 2025 से अब तक भुगतान न मिलने से सैकड़ों परिवार संकट में हैं।
ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि वे पंचायत स्तर पर सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं—
• सर्वे कार्य • फोटो रजिस्ट्रेशन • पोर्टल अपडेट • प्रशासनिक जिम्मेदारियां
पूरी निष्ठा से निभाते हैं, इसके बावजूद उन्हें न सम्मानजनक वेतन मिल रहा है और न समय पर भुगतान।
प्रमुख मांगें
संघ ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार के सामने कई अहम मांगें रखीं:
• 8 माह का लंबित मानदेय तुरंत भुगतान • मानदेय बढ़ाकर ₹35,000 प्रतिमाह किया जाए • 19 वर्षों से कार्यरत सेवकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा मिले • अतिरिक्त कार्यों के लिए अलग बजट की व्यवस्था • 2021 की घोषणाओं और HR पॉलिसी को लागू किया जाए
आंदोलन की चेतावनी
ग्राम रोजगार सेवकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने वाले कर्मचारी खुद ही उपेक्षा का शिकार हैं।
प्रशासन से वार्ता
बताया गया कि ज्ञापन मिलने के बाद प्रदेश अध्यक्ष ने डीएम से बातचीत कर मामले में जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
इस दौरान ब्लॉक अध्यक्ष, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में ग्राम रोजगार सेवक मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर अपनी मांगों को रखा।
कपरवार/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जिले के कपरवार क्षेत्र में महाराजा निषादराज गुह की जयंती बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह के आवास पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
बड़ी संख्या में जुटे लोग
कार्यक्रम में निषाद समाज सहित विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने एकजुट होकर महाराजा निषादराज गुह को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके जीवन आदर्शों को याद किया।
आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प
इस मौके पर वक्ताओं ने महाराजा निषादराज गुह के जीवन, त्याग और समाज के प्रति उनके योगदान को विस्तार से बताया। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और समाज में एकता व भाईचारा बनाए रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान समाज की एकता, अधिकार और सम्मान को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक समरसता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है।
अर्जुन सिंह का संबोधन
इस अवसर पर अर्जुन सिंह ने कहा कि महाराजा निषादराज गुह का जीवन हमें बराबरी, सम्मान और भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि निषाद समाज का इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है और अब समय है कि उन्हें उनका पूरा अधिकार और सम्मान मिले। उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा निषाद समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करती रहेगी।
ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में राजा राम साहनी, ब्रह्मानंद साहनी, शिवम साहनी, अरविंद साहनी, प्रदीप साहनी, अवनीश साहनी, शिवनाथ चौहान, संजय साहनी, राज कुमार साहनी, अमर प्रसाद, सुमित भारती एवं निखिल साहनी सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे।
अहमदाबाद (राष्ट्र की परम्परा)। IPL के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने गुजरात टाइटंस को 6 रनों से हराकर शानदार जीत दर्ज की। मैच का नतीजा आखिरी ओवर तक टिका रहा, जहां तुषार देशपांडे की सधी हुई गेंदबाजी ने गुजरात से जीत छीन ली।
राजस्थान का मजबूत स्कोर – 210 रन
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए राजस्थान रॉयल्स ने 210 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया।
• यशस्वी जायसवाल: 55 रन • वैभव सूर्यवंशी: 31 रन • ध्रुव जुरेल: 75 रन (सबसे बड़ी पारी)
ओपनिंग में 70 रनों की साझेदारी ने टीम को मजबूत शुरुआत दी।
गुजरात की शानदार शुरुआत, लेकिन अंत में हार
211 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए गुजरात टाइटंस की शुरुआत भी दमदार रही। साई सुदर्शन ने 73 रन बनाकर टीम को जीत के करीब पहुंचा दिया था। 18 ओवर तक टीम का स्कोर 196 रन था और जीत लगभग तय लग रही थी।
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। दिल्ली-एनसीआर में इन दिनों मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण पूरे क्षेत्र में बादल छाए हुए हैं, तेज हवाएं चल रही हैं और कई इलाकों में बारिश के साथ ओलावृष्टि भी दर्ज की गई है।
आज कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, आज दिनभर आसमान में बादल छाए रहने की संभावना है। शाम के समय कई इलाकों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि, आज के लिए भारी बारिश का कोई बड़ा अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
तापमान में गिरावट, गर्मी से राहत
बारिश और बादलों के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।
दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता (AQI) भी चिंता बढ़ा रही है।
• आनंद विहार: 250 (खराब) • अशोक विहार: 180 • बवाना: 143 • चांदनी चौक: 156 • नोएडा सेक्टर-1: 208
अधिकांश इलाकों में AQI मध्यम से खराब श्रेणी में बना हुआ है।
किसानों पर सबसे ज्यादा असर
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। गेहूं और सरसों की खड़ी फसलें तेज हवाओं और ओलों की वजह से प्रभावित हुई हैं, जिससे उत्पादन में गिरावट की आशंका है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
IMD Advisory (सलाह):
• तेज हवाओं और बारिश के दौरान खुले स्थानों से बचें • किसानों को फसल सुरक्षा के उपाय करने की सलाह • AQI खराब होने पर मास्क का इस्तेमाल करें
नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। मध्य पूर्व में जारी Israel-Iran War के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल आने वाले दिनों में ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर बड़ा हवाई हमला कर सकता है। इस संभावित हमले में बिजली उत्पादन प्लांट, ऊर्जा वितरण नेटवर्क और अन्य महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा सकता है।
48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद बढ़ी हलचल
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा दिए गए 48 घंटे के अल्टीमेटम के तहत हो सकती है। हालांकि, इस अल्टीमेटम को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नेतन्याहू का बड़ा बयान
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि इजरायली वायु सेना का ऑपरेशन अब ईरान के बड़े बुनियादी ढांचे तक फैल चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे उद्योगों को निशाना बनाया जा रहा है, जो नागरिक और सैन्य दोनों उपयोग में आते हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल का दावा है कि ईरान के लगभग 70% स्टील उद्योग को नुकसान पहुंचाया जा चुका है। इजरायल का कहना है कि इन उद्योगों से बनने वाला स्टील हथियार निर्माण में इस्तेमाल हो रहा था। इसके अलावा पेट्रोकेमिकल सेक्टर को भी टारगेट किया जा रहा है, जो ईरान की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है।
ऊर्जा सेक्टर अगला निशाना
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, इजरायल का अगला लक्ष्य ईरान का ऊर्जा और बिजली नेटवर्क हो सकता है। इस हमले में पावर प्लांट, ग्रिड सिस्टम और वितरण नेटवर्क को नुकसान पहुंचाने की रणनीति बनाई जा रही है।
वैश्विक चिंता बढ़ी
इस बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता गहराती जा रही है। अगर यह हमला होता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल 2026: संप्रभुता, सिविल सोसाइटी और लोकतंत्र के बीच संतुलन का संघर्ष
गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत में विदेशी धन के प्रवाह और उसके उपयोग को नियंत्रित करने वाला कानूनफॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) लंबे समय से राजनीतिक,सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय बहस का केंद्र रहा है। वर्ष 2026 में प्रस्तावित फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल 2026 ने इस बहस को और तीखा बना दिया है। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और संप्रभुता की रक्षा के लिए मास्टरस्ट्रोक बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष और सिविल सोसाइटी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार मान रहे हैं।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यह केवल एक कानूनी संशोधन नहीं,बल्कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे,राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और वैश्विक संबंधों को प्रभावित करने वाला व्यापक मुद्दा बन गया है।भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण लोकतंत्र में गैर- सरकारी संगठन (एनजीओ),ट्रस्ट और सिविल सोसाइटी संस्थाएं सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, मानवाधिकार और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इन संगठनों को अक्सर विदेशी स्रोतों से आर्थिक सहायता प्राप्त होती है, जिससे वे अपने कार्यक्रमों और अभियानों को प्रभावी ढंग से संचालित कर सकें। इसी संदर्भ में भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल 2026 (एफसीआरए 2026) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विवादास्पद विधायी पहल के रूप में उभरा है। इस बिल का घोषित उद्देश्य विदेशी फंडिंग को नियंत्रित कर पारदर्शिता बढ़ाना और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है, लेकिन इसके प्रावधानों और संभावित प्रभावों को लेकर विपक्ष और सिविल सोसाइटी में व्यापक असहमति देखी जा रही है। एफसीआरए कानून का मूल उद्देश्य विदेशी धन के प्रवाह को विनियमित करना है ताकि इसका उपयोग भारत की संप्रभुता,अखंडता और सुरक्षा के खिलाफ न हो।यह कानून पहली बार 1976 में लागू किया गया था और बाद में 2010 में इसे व्यापक रूप से संशोधित किया गया। 2020 में भी इसमें कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे, जिनमें प्रशासनिक खर्च की सीमा, सब-ग्रांटिंग पर रोक और आधार आधारित पहचान जैसे प्रावधान शामिल थे। 2026 का प्रस्तावित संशोधन इसी श्रृंखला का अगला चरण माना जा रहा है, जिसमें सरकार और अधिक सख्ती लाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।सरकार का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि कुछ एनजीओ विदेशी फंडिंग का उपयोग ऐसे कार्यों में कर रहे हैं जो न केवल देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं,बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी प्रभावित करते हैं। उदाहरण के तौर पर, सरकार का दावा है कि विदेशी धन का उपयोग अवैध धर्मांतरण, अलगाववादी गतिविधियों और नीतिगत हस्तक्षेप के लिए किया गया है। इसलिए,एफसीआरए 2026 का मुख्य उद्देश्य इन खतरों को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी सहायता का उपयोग केवल वैध और पारदर्शी उद्देश्यों के लिए ही हो।सरकार के अनुसार, यह बिल डीप स्टेट जैसी अवधारणाओं को खत्म करने की दिशा में एक कदम है जहाँ गैर-सरकारी संस्थाएँ विदेशी प्रभाव के जरिए नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में, यह तर्क दिया जा रहा है कि विदेशी फंडिंग का उपयोग कभी-कभी सामाजिक अशांति,विरोध आंदोलनों या राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए किया जा सकता है। इसलिए कड़े नियंत्रण जरूरी हैं। साथियों बात अगर हम इस बिल के प्रमुख प्रावधानों को समझने की करें तो इसमें विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए कड़े पंजीकरण और निगरानी तंत्र को लागू करना शामिल है।सरकार ने यह भी प्रस्तावित किया है कि यदि किसी एनजीओ का लाइसेंस रद्द हो जाता है या वह स्वयं सरेंडर करता है,तो उसके द्वारा विदेशी फंड से निर्मित संपत्तियों को सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण के अधीन ले लिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी संपत्तियां निजी लाभ या संदिग्ध गतिविधियों के लिए उपयोग न हों, बल्कि उन्हें सार्वजनिक हित में उपयोग किया जा सके।इसके अतिरिक्त, बिल में यह भी प्रावधान किया गया है कि विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठन नीतिगत मामलों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप नहीं कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि लोकतंत्र में नीति निर्माण का अधिकार केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास होना चाहिए और बाहरी वित्तपोषण से प्रभावित संस्थाओं को इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।हालांकि, इन प्रावधानों को लेकर विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनका आरोप है कि यह बिल सरकार को अत्यधिक शक्तियां प्रदान करता है, जिससे वह असहमति की आवाजों को दबा सकती है। विपक्ष का कहना है कि नीतिगत हस्तक्षेप की परिभाषा बहुत व्यापक और अस्पष्ट है, जिससे सरकार किसी भी संगठन को मनमाने ढंग से निशाना बना सकती है। विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों और मानवाधिकार संगठनों को लेकर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि वे इस कानून के तहत सबसे अधिक प्रभावित होंगे। साथियों बात अगर हम इस बिल के संशोधन पर विपक्ष वह समाज के तर्क को समझने की करें तो पूरे विपक्ष ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है।उनका कहना है कि यह कानून सरकार को अत्यधिक शक्तियाँ देता है,जिससे वह असहमति की आवाज़ों को दबा सकती है।एनजीओ,मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा सकता है।विपक्ष का यह भी आरोप है कि राष्ट्रीय हित जैसी अस्पष्ट परिभाषा का दुरुपयोग कर सरकार आलोचनात्मक संगठनों को बंद कर सकती है।इसके अलावा, आधार अनिवार्यता और निगरानी प्रणाली को निजता के अधिकार के खिलाफ बताया जा रहा है।लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी सांसदों ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला बताते हुए नारेबाजी की और वॉकआउट किया।संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संगठन बनाने के अधिकार पर यह बिल प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। यदि किसी संगठन को केवल इस आधार पर प्रतिबंधित किया जाता है कि वह सरकारी नीतियों की आलोचना कर रहा है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत होगा। इस संदर्भ में कई विशेषज्ञों ने यह सवाल उठाया है कि क्या सरकार पारदर्शिता के नाम पर सिविल सोसाइटी की स्वतंत्रता को सीमित कर रही है।केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में इस बिल को लेकर विशेष रूप से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। केरल में, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एनजीओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इस बिल को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक बहस छिड़ गई है। राज्य सरकार और विपक्षी दलों का कहना है कि यह कानून राज्य के विकास कार्यों को प्रभावित कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बाधित कर सकता है।संसद में इस बिल को लेकर जो गतिरोध उत्पन्न हुआ, वह केवल राजनीतिक असहमति का परिणाम नहीं था, बल्कि यह गहरे वैचारिक मतभेदों को भी दर्शाता है। विपक्ष ने इस बिल को संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की, ताकि इसके प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा और समीक्षा की जा सके। उनका मानना था कि इतने महत्वपूर्ण और व्यापक प्रभाव वाले कानून को जल्दबाजी में पारित करना उचित नहीं होगा।सरकार हालांकि इस बिल को राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए आवश्यक बताते हुए इसे शीघ्र पारित करने के पक्ष में थी। लेकिन विपक्ष के विरोध, संसद में हंगामे और सहमति के अभाव के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। यह स्थगन इस बात का संकेत है कि सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर अभी भी सटीक रूप से सहमति नहीं बन पाई है। साथियों बात अगर हम इस संशोधन बिल से सिविल सोसाइटी पर प्रभाव: नियंत्रण या सुधार? इसको समझने की करें तोभारत में सिविल सोसाइटी संगठनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है चाहे वह शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण या मानवाधिकार का क्षेत्र हो।इस बिल के बाद, छोटे और मध्यम एनजीओ के लिए विदेशी फंड प्राप्त करना कठिन हो सकता है। इससे उनकी गतिविधियाँ सीमित हो सकती हैं।हालांकि, सरकार का तर्क है कि इससे केवल फर्जी या संदिग्ध संगठनों पर असर पड़ेगा, जबकि वास्तविक काम करने वाले संगठनों को कोई समस्या नहीं होगी।यह बहस इस मूल प्रश्न पर आकर टिकती है—क्या नियंत्रण पारदर्शिता लाता है या स्वतंत्रता को सीमित करता है? साथियों बात अगर हम इस बिल को अंतरराष्ट्रीय परिपेक्ष में समझने की करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तरपर भी इस बिल को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।कई वैश्विक मानवाधिकार संगठनों और विदेशी सरकारों ने चिंता व्यक्त की है कि भारत में सिविल सोसाइटी की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया जा रहा है। उनका कहना है कि ऐसे कानून लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा है कि यह देश का आंतरिक मामला है और हर संप्रभु राष्ट्र को अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा करने का अधिकार है।इस पूरे परिदृश्य में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या पारदर्शिता और सुरक्षा के नाम पर सख्ती जरूरी है, या फिर इससे लोकतांत्रिक स्वतंत्रता पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें न केवल विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोका जाए, बल्कि सिविल सोसाइटी की भूमिका और स्वतंत्रता को भी संरक्षित किया जाए। अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि एफसीआरए 2026 केवल एक विधायी प्रस्ताव नहीं है, बल्किr यह भारत के लोकतांत्रिक ढांचे,नागरिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की एक जटिल चुनौती का प्रतिनिधित्व करता है। संसद में इसका स्थगन यह दर्शाता है कि इस विषय पर व्यापक सहमति और गहन विचार- विमर्श की आवश्यकता है।आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर किस प्रकार का समाधान निकालते हैं और क्या यह कानून वास्तव में अपने घोषित उद्देश्यों को पूरा कर पाता है या नहीं।
-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्
पूर्वांचल की तकदीर बदलने की तैयारी: देवरिया में निवेशकों का महामंथन
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।पूर्वांचल के विकास को नई गति देने और जनभागीदारी आधारित मॉडल को मजबूत बनाने के उद्देश्य से देवरिया में आयोजित ‘अमृत प्रयास समिट’ ने निवेश के क्षेत्र में नई उम्मीदें जगाई हैं। सांसद शशांक मणि के नेतृत्व में आयोजित इस समिट में देश-विदेश के प्रमुख उद्यमियों और निवेशकों ने भाग लेकर क्षेत्रीय विकास की संभावनाओं पर गहन मंथन किया। बरपार स्थित जागृति उद्यम केंद्र में आयोजित इस समिट में लगभग 40 प्रतिष्ठित मेहमानों की उपस्थिति रही, जिनमें विलियम बिसेल, शीतल अरोड़ा, TCS, Boston Consulting Group, PwC, Siemens और Gates Foundation जैसे बड़े नाम शामिल रहे। अमृत प्रयास: 10 साल की रणनीति के साथ विकास का रोडमैप समिट को संबोधित करते हुए सांसद शशांक मणि ने ‘अमृत प्रयास’ की 10 वर्षीय रणनीति साझा करते हुए कहा कि यह पहल विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्पों को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी और प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूर्वांचल में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देवरिया और कुशीनगर जैसे सांस्कृतिक और पर्यावरणीय रूप से समृद्ध क्षेत्र निवेशकों के लिए संभावनाओं का केंद्र बन सकते हैं। अमृत प्रयास के 7 संकल्प: विकास की आधारशिला समिट में ‘अमृत प्रयास’ के सात प्रमुख संकल्पों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया: नकदी फसल और एग्रो प्रोसेसिंग को बढ़ावा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन महिला उद्यमिता और सशक्तिकरण पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास योजनाबद्ध शहरीकरण डिजिटल उपयोग को बढ़ावा पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास इन संकल्पों के माध्यम से एक समग्र और संतुलित विकास मॉडल तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है। निवेश और रोजगार: स्थानीय इकोसिस्टम पर जोर समिट के दौरान खासतौर पर इस बात पर चर्चा हुई कि किस तरह स्थानीय स्तर पर उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। सांसद ने बताया कि पांच विधानसभा क्षेत्रों में जनभागीदारी के जरिए मजबूत आर्थिक इकोसिस्टम विकसित करने की योजना बनाई गई है। किसानों के लिए आधुनिक तकनीक, भंडारण, सस्ती क्रेडिट सुविधा और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया। इससे कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाएं बनीं आकर्षण का केंद्र समिट में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को भी प्रस्तुत किया गया, जिनमें शामिल हैं: देवरिया अमृत रेलवे स्टेशन का विकास देवरिया बाईपास परियोजना नारायणी रॉकेट सेंटर मां देवरही मंदिर का जीर्णोद्धार (सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा) इन परियोजनाओं से क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने के साथ-साथ पर्यटन और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर गहन चर्चा समिट के दूसरे चरण में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर विशेष चर्चा हुई। इसमें भूमि उपलब्धता, सरकारी स्वीकृतियां, प्रशासनिक सहयोग और जनभागीदारी जैसे विषय प्रमुख रहे। ‘क्लोज्ड डोर इन्वेस्टर सर्किल’ के तहत निवेशकों और नीति निर्माताओं के बीच भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसमें क्षेत्र में रक्षा, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश की संभावनाओं को भी प्रस्तुत किया गया। स्वावलंबन और उद्यमिता को मिला बढ़ावा जागृति उद्यम केंद्र की भूमिका की सराहना करते हुए सांसद ने कहा कि यह संस्थान स्वावलंबी भारत अभियान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है। पूर्वांचल के लिए नई उम्मीद ‘अमृत प्रयास समिट’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि जनभागीदारी, सरकारी सहयोग और निवेशकों की भागीदारी एक साथ आए, तो देवरिया और कुशीनगर जैसे क्षेत्र विकास के नए मॉडल बन सकते हैं। यह समिट केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि पूर्वांचल के आर्थिक भविष्य की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के मगहर हाईवे पर तेज रफ्तार ट्रेलर ने एक कार को टक्कर मार दी, जिससे कार को काफी दूरी तक घसीट दिया गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग तुरंत सहायता के लिए दौड़ पड़े। हादसे में कार सवार जिले के नगर पंचायत हरिहरपुर निवासी हर्ष पाल और उनके पिता दिवाकर पाल को हल्की चोटें आईं। राहत की बात यह रही कि दोनों गंभीर रूप से घायल नहीं हुए और बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को प्राथमिक उपचार दिलाया गया।
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। राज्य सूचना आयुक्त राकेश कुमार ने मेहदावल तहसील में जन सूचना अधिकारियों के साथ बैठक कर सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत निर्धारित प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी और उनके प्रभावी अनुपालन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवेदक द्वारा मांगी गई सूचनाएं हर हाल में 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाएं और अधिनियम के तहत दिए गए अधिकारों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सूचना उपलब्ध कराते समय आवश्यक प्रपत्र एवं संलग्नक अवश्य जोड़े जाएं, ताकि सूचना मांगने वाले के आशय की पुष्टि हो सके। किसी भी स्थिति में अधूरी या भ्रामक सूचना उपलब्ध न कराई जाए। उन्होंने प्रत्येक जन सूचना अधिकारी को अपने कार्यालय में एक रजिस्टर संधारित करने का निर्देश दिया, जिसमें आवेदन प्राप्ति से लेकर निस्तारण तक का विवरण तिथि वार दर्ज हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई आवेदन संबंधित विभाग से जुड़ा नहीं है तो उसे 5 दिनों के भीतर संबंधित विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाए। सूचना आयुक्त ने कहा कि आवेदन प्राप्त होते ही उस पर तत्काल कार्यवाही शुरू की जाए, जिससे अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने बताया कि जन सूचना अधिकारी केवल अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विषयों पर ही सूचना प्रदान कर सकते हैं। निजी संस्थानों से संबंधित जानकारी भी वहीं तक दी जा सकती है, जहां तक जन सूचना अधिकारी की पहुंच हो। किसी भी व्यक्ति या थर्ड पार्टी से संबंधित सूचना, संबंधित पक्ष की अनुमति के बाद ही उपलब्ध कराई जाए। इस दौरान उप जिलाधिकारी मेहदावल संजीव कुमार, तहसीलदार अल्पिका वर्मा, उपायुक्त उद्योग राजकुमार शर्मा, सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज सहित विभिन्न विभागों के जन सूचना अधिकारी उपस्थित रहे।
वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा)l मंडल रेल प्रबंधक वाराणसी आशीष जैन ने 04 अप्रैल,2026 शनिवार को ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं,परिचालनिक व्यवस्था, संरक्षा, ग्रीष्मकालीन यात्रियों की सुख-सुविधाओं का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान मंडल रेल प्रबंधक ने ज्ञानपुर रोड स्टेशन के पैदल उपरिगामी पुल,प्लेटफार्मो की सरफेस, यात्री शेड,साइनेजेस, सर्कुलेटिंग एरिया ,स्टेशन भवन,केंद्रीयकृत स्टेशन पैनल,रिले रूम, आई पी एस रूम,यात्री प्रतीक्षालय, यात्री आरक्षण केंद्र,आरक्षित एवं अनारक्षित टिकट प्रणाली,फूड एण्ड कैटरिंग स्टालों,वाटर बूथ, शौचालय,पी डब्ल्यू आई कार्यालय एवं स्टोर का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में मंडल रेल प्रबंधक ने स्टेशन के प्लेटफार्म पर लगे स्टेशन नेम बोर्ड को व्यवस्थित करने,शौचालयों एवं वाटर बूथों की व्यापक साफ-सफाई कराने, पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने, फूड स्टालों पर रेट लिस्ट और डस्टबिन लगाने,प्लेटफार्म पर निष्प्रयोज्य सामग्रियों को हटाने, प्लेटफार्मों के शेड में आर सी सी बेंच और पंखे बढ़ाने, दीवारों पर लगे अनावश्यक बैनर एवं पोस्टर को हटाने , प्लेटफॉर्म पर अनाधिकृत प्रेवश को बन्द करने, प्लेटफॉर्म पर विजिबल केबलों को ढकने ,संरक्षा उपकरणों के नियमित अनुरक्षण व निरीक्षण करने,गाड़ियों को पूर्व निर्धारित प्लेटफॉर्म पर लेने,सीनियर सेक्शन इंजीनियर(रेल पथ) के स्टोर में पड़ी आवश्यक सामग्रियों का निस्तारण करने,रेलवे कार्यालयों में वाहन न रखने तथा स्टेशन परिसर को साफ-सफाई रखने को सम्बंधित को निर्देश दिया। ज्ञानपुर रोड स्टेशन पर संरक्षा उपकरणों के निरीक्षण के क्रम में मंडल रेल प्रबंधक जैन ने पॉइंट्स एण्ड क्रासिंग निरीक्षण किया और संरक्षा के सभी मानदण्डों को परखा। इसके पूर्व उन्होंने ज्ञानपुर रोड स्टेशन यार्ड में स्थित समपार संख्या 39A का संरक्षा निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गेट मैन का संरक्षा ज्ञान परखा और गेट की पैनल इंटरलॉकिंग समेत संरक्षा के विभिन्न पहलुओं की जांच की और संबंधित को दिशा निर्देश दिया। इस निरीक्षण के अवसर सहायक मंडल इंजीनियर मुक्ता सिंह सहित वरिष्ठ पर्वेक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित थे।