गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के प्रति जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से शुक्रवार प्रातःकाल विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से भव्य स्कूटी रैली का आयोजन किया गया। रैली उत्साह और अनुशासन के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
यह रैली पूर्व में आयोजित मानव श्रृंखला एवं पदयात्रा की कड़ी के रूप में निकाली गई, जिससे अभियान को निरंतरता मिली। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ शहर के आमजन तक अधिनियम के महत्व को पहुंचाना रहा।
रैली में छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों, शिक्षकगण एवं कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रतिभागियों ने स्कूटी और मोटरसाइकिल के साथ सहभागिता की। कई प्रतिभागियों ने केसरिया साफा पहनकर उत्साह और एकजुटता का परिचय दिया। ढोल-नगाड़ों और नारों से वातावरण ऊर्जावान बना रहा।
रैली विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होती हुई पुनः वहीं समाप्त हुई। “नारी शक्ति राष्ट्र शक्ति” और “सशक्त नारी, समृद्ध भारत” जैसे नारों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि यह अधिनियम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग में भी महिलाओं के लिए आरक्षण, सीटों का रोटेशन तथा जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होने जैसे प्रावधान शामिल हैं। इससे नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और लोकतंत्र अधिक समावेशी बनेगा।
कुलपति प्रो पूनम टंडन ने कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने के साथ राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को सशक्त करेगा।
कार्यक्रम की नोडल अधिकारी प्रो. दिव्या रानी सिंह ने प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में जागरूकता और समानता की भावना को मजबूत करते हैं।
रैली के दौरान प्रतिभागियों को हेल्पलाइन नंबर 9667173333 पर मिस्ड कॉल देकर “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” के समर्थन में भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. अनुपमा कौशिक, डॉ. संध्या त्रिपाठी, डॉ. सुधा मोदी, डॉ. के. सुनीता, डॉ. सुषमा पांडेय, डॉ. सुषमा श्रीवास्तव, डॉ. संध्या श्रीवास्तव, डॉ. सारिका जायसवाल, डॉ. अनीता सिंह, डॉ. स्नेहलता सिंह और डॉ. प्रियंका श्रीवास्तव सहित कई शिक्षकों व अधिकारियों की उपस्थिति रही।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विश्वविद्यालय की भव्य स्कूटी रैली, जागरूकता का दिया संदेश
विश्व धरोहर दिवस पर काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर राजकीय बौद्ध संग्रहालय गोरखपुर, क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र गोरखपुर एवं गोरखपुर लिटरेरी सोसायटी के संयुक्त तत्वावधान में 18 अप्रैल 2026 को “एक शाम भारतीय सांस्कृतिक धरोहर एवं संविधान के शिल्पकार के नाम” विषयक काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य महामंडलेश्वर कनकेश्वरी नंद गिरी करेंगी, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन उपस्थित रहेंगी। कार्यक्रम का संचालन मिन्नत गोरखपुरी द्वारा किया जाएगा।
इस अवसर पर अवधेश निगम “राजू” (देवरिया), सुभाष चंद्र यादव (सिवान), प्रमोद चोखानी, कुंवर सचिन सिंह (चौरी-चौरा), एकता उपाध्याय, गौतम गोरखपुरी एवं आसिया गोरखपुरी काव्य पाठ प्रस्तुत करेंगे। साथ ही सामाजिक एवं साहित्यिक क्षेत्र में योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया जाएगा।
कार्यक्रम यशोधरा सभागार (राजकीय बौद्ध संग्रहालय), गोरखपुर में शाम 4:30 बजे से आयोजित होगा। इसकी जानकारी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र गोरखपुर के प्रभारी डॉ. यशवंत सिंह राठौड़ ने दी।
मंडल में राजस्व व्यवस्था को मिली नई तकनीक
खेतों की नापजोख अब होगी हाईटेक
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l गोरखपुर मंडल में राजस्व कार्यों को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अपर आयुक्त (न्यायिक) अजय राय द्वारा मंडल की सभी तहसीलों के तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को ज़ी एन एस एस आधारित आधुनिक खेत नाप उपकरण (ट्रिम्बल कैटालिस्ट DA2) वितरित किए गए। इन उपकरणों की कुल लागत पांच लाख रुपये से अधिक है।
इस पहल का उद्देश्य खेतों की नापजोख में सटीकता लाना, भूमि विवादों को कम करना और राजस्व कार्यों को डिजिटल एवं पारदर्शी बनाना है।
मंडल की इन तहसीलों को मिला लाभ
गोरखपुर मंडल के चारों जनपदों की तहसीलों को यह उपकरण उपलब्ध कराए गए—
गोरखपुर: सदर, बांसगांव, गोला, खजनी, सहजनवा, कैंपियरगंज
देवरिया: देवरिया सदर, बरहज, सलेमपुर, रुद्रपुर, भाटपार रानी
कुशीनगर: पडरौना, कसया, हाटा, तमकुहीराज, खड्डा
महाराजगंज: सदर, नौतनवा, फरेंदा (आनंदनगर), निचलौल
कैसे काम करेगी नई व्यवस्था
GNSS तकनीक उपग्रह के माध्यम से जमीन की लोकेशन को बेहद सटीक तरीके से निर्धारित करती है। इसके जरिए खेतों की नापजोख अब डिजिटल माध्यम से और वास्तविक समय (रीयल टाइम) में की जा सकेगी। इससे पारंपरिक माप प्रणाली की कमियों को दूर किया जा सकेगा।
राजस्व विभाग के इन कार्यों में होगा उपयोग
खेतों और प्लॉट की सटीक पैमाइश
जमीन की सीमा निर्धारण (डिमार्केशन)
भूमि विवादों के समाधान में तेजी
राजस्व अभिलेखों का मिलान और अपडेट
सरकारी योजनाओं के लिए भूमि चिन्हांकन
अवैध कब्जों की पहचान
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
नई तकनीक से किसानों को अब—
कम समय में सही माप उपलब्ध होगा
विवादों में कमी आएगी
बार-बार नाप कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी
अधिकारियों को दिए गए निर्देश
अपर आयुक्त (न्यायिक) ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उपकरणों का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ किया जाए। साथ ही उनके रखरखाव और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि यह तकनीक राजस्व विभाग को आधुनिक, जवाबदेह और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रशासन को बेहतर परिणाम की उम्मीद
अधिकारियों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से गोरखपुर मंडल में राजस्व कार्यों की गति बढ़ेगी, पारदर्शिता आएगी और भूमि संबंधी विवादों के निपटारे में उल्लेखनीय सुधार होगा।
सहायक आचार्य पुनर्परीक्षा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में, व्यवस्थाओं की समीक्षा
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। आगामी 18 व 19 अप्रैल को आयोजित होने वाली सहायक आचार्य पुनर्परीक्षा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। इसी क्रम में गुरुवार को एसीएम द्वितीय राजू कुमार ने संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में एसीएम द्वितीय ने कहा कि परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने-अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन करने के निर्देश दिए।
जनपद में कुल 11 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां लगभग 18,600 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। परीक्षा 18 और 19 अप्रैल को दो पालियों में आयोजित की जाएगी।
एसीएम द्वितीय ने निर्देश दिए कि सभी परीक्षा केंद्रों पर समय से पहले व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली जाएं। परीक्षार्थियों की फ्रिस्किंग, बायोमेट्रिक सत्यापन (आइरिस स्कैन) और सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य रूप से लागू की जाए। साथ ही पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
उन्होंने सेक्टर और स्टैटिक मजिस्ट्रेट को नियमित रूप से परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण करने तथा किसी भी समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित कराने को कहा। प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई और गोपनीयता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि परीक्षा के दिन सभी अधिकारी और कार्मिक समय से रिपोर्टिंग करें और समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो सके। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि सभी तैयारियां पूर्ण हैं और परीक्षा को सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है।
कौटिल्य परिषद आयोजित करेगा परशुराम जयंती पर भव्य कार्यक्रम
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)l कौटिल्य परिषद, गोरखपुर द्वारा भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी परिषद की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में दी गई।
परिषद के अनुसार 19 अप्रैल 2026 (रविवार) को पूर्वाह्न 11 बजे से दीवानी कचहरी परिसर में भगवान परशुराम जी की जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोग भाग लेंगे।
प्रेस वार्ता में राणा पाठक, अश्वनी दुबे और राजेश दुबे ने बताया कि कौटिल्य परिषद एक सामाजिक संगठन है, जो समाज हित में कार्य करते हुए आपसी समन्वय और सामाजिक एकता को मजबूत करने का प्रयास करता है। परिषद का उद्देश्य विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर लोगों को जागरूक करना और समाज में सकारात्मक सोच का प्रसार करना है।
आयोजन के दौरान भगवान परशुराम जी के जीवन और आदर्शों पर प्रकाश डाला जाएगा। साथ ही समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को एक मंच पर लाकर सामाजिक समरसता का संदेश दिया जाएगा।
परिषद के पदाधिकारियों ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर भगवान परशुराम जी के विचारों को आत्मसात करें और कार्यक्रम को सफल बनाएं।
जन समस्याओं का त्वरित समाधान करें अधिकारी: योगी आदित्यनाथ
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान लगातार दूसरे दिन शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन में करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता की समस्याओं पर त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि शिकायतों का समाधान गुणवत्तापूर्ण और संतुष्टिपरक होना चाहिए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री स्वयं लोगों के पास जाकर उनकी समस्याएं सुनीं और प्रार्थना पत्र लेकर संबंधित अधिकारियों को निस्तारण के लिए सौंपे। उन्होंने प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी मामलों का समयबद्ध, निष्पक्ष और प्रभावी समाधान किया जाए।
कार्यक्रम में कई लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग लेकर पहुंचे। इस पर मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जरूरतमंदों के इलाज का इस्टीमेट शीघ्र तैयार कर उपलब्ध कराया जाए, ताकि सरकार समय पर आर्थिक सहायता दे सके।
इसके अलावा कुछ महिलाओं ने आवास की समस्या रखी। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि पात्र लोगों को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजनाओं के तहत पक्का मकान उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जो भी पात्र लोग अब तक वंचित हैं, उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
अवैध तमंचा और कारतूस के साथ युवक गिरफ्तार, पुलिस की कार्रवाई तेज
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में अपराध और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना बरहज पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अभियुक्त को अवैध असलहे के साथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत की गई.पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि रगड़गंज से पैना जाने वाले मार्ग पर स्थित एक खाली झोपड़ी में संदिग्ध व्यक्ति मौजूद है। सूचना के आधार पर पहुंची पुलिस टीम ने मौके से अभिषेक यादव उर्फ सचिन (32 वर्ष), निवासी बरठा लाला थाना मईल को गिरफ्तार कर लिया।तलाशी के दौरान अभियुक्त के पास से एक अवैध देशी कट्टा 315 बोर और एक जिंदा कारतूस बरामद किया गया। इस संबंध में थाना बरहज में आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक रामलक्ष्मण सिंह, कांस्टेबल दीपक यादव और कांस्टेबल विश्वजीत यादव की टीम शामिल रही। पुलिस की इस सक्रियता से क्षेत्र में अवैध हथियार रखने वालों में हड़कंप है।
साइकिल पाकर खिल उठीं बेटियां, शिक्षा की राह हुई आसान
कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)l समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित अनुसूचित जनजाति यूनिफार्म एवं साइकिल योजना के तहत नगर पंचायत रामकोला स्थित सामुदायिक भवन में बालिकाओं को साइकिल वितरित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य दूरदराज क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं की विद्यालय तक पहुंच को आसान बनाना और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम में कक्षा 6 की 2, कक्षा 9 की 4 और कक्षा 11 की 2 छात्राओं सहित कुल 8 बालिकाओं को साइकिल प्रदान की गई। साइकिल मिलने से छात्राओं को स्कूल आने-जाने में सुविधा होगी, जिससे उनकी नियमित उपस्थिति और पढ़ाई में सुधार की उम्मीद है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक विनय प्रकाश गोंड ने कहा कि इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक पात्र बालिकाएं इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि कोई भी बालिका शिक्षा से वंचित न रहे और सभी को समान अवसर मिल सके।इस दौरान जिला समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर यादव, छात्राओं के अभिभावक, संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्य तथा अन्य जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रशासन की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
मूक-बधिर बच्चों के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट योजना: ₹6 लाख तक अनुदान, 25 अप्रैल अंतिम तिथि
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में मूक-बधिर बच्चों के जीवन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा कॉक्लियर इम्प्लांट योजना संचालित की जा रही है। जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी प्रियंका चौधरी ने बताया कि इस योजना के तहत 0 से 5 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चों को लाभ दिया जाएगा, जो सुनने और बोलने में असमर्थ हैं।योजना के अंतर्गत श्रवण बाधित बच्चों का कॉक्लियर इम्प्लांट कराया जाता है, जिससे वे सुनने और बोलने में सक्षम हो सकें। इसके लिए प्रति बच्चे लगभग ₹6 लाख तक का अनुदान सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है। विभाग द्वारा चयनित चिकित्सालयों में ही यह सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, ताकि उपचार की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके।अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अपने पात्र बच्चों के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करें। आवेदन के साथ दिव्यांग प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो, माता-पिता का आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा।आवेदन पत्र जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी कार्यालय, विकास भवन, कक्ष संख्या-17 में 25 अप्रैल 2026 तक जमा किए जा सकते हैं। प्राप्त आवेदनों के आधार पर पात्र बच्चों का परीक्षण कराया जाएगा और चयनित बच्चों को योजना का लाभ दिलाया जाएगा।यह योजना न केवल बच्चों के स्वास्थ्य और संचार क्षमता में सुधार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि उनके भविष्य को संवारने में भी सहायक सिद्ध होगी।
पूर्व सैनिक ने पुलिस अधीक्षक से लगाई गुहार
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l स्थानीय क्षेत्र के पकडी तिवारी गांव निवासी सेवानिवृत सैनिक रामकरन यादव ने पुलिस अधीक्षक देवरिया को पत्रक देकर बेटी की शादी में पुलिस द्वारा किसी प्रकार के व्यवधान न डालने की गुहार लगाई है।
एसपी को दिये गये पत्रक में पूर्व सैनिक ने यह बताया है कि उनके भाई गामा यादव जो दूबौली के ग्राम प्रधान है, उनके व परिवार के साथ किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत संबंध नही है, उनकी बेटी की शादी अप्रैल माह मे है। शादी में पुलिस द्वारा किसी भी प्रकार का व्यवधान न किया जाय, वह स्वयं सेना मे हवलदार रहे है, वह हमेशा कानून का पालन करते रहे है। उन्होने बताया कि शादी को लेकर स्थानीय पुलिस द्वारा उन्हे व परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान न करने, अनावश्यक पुछताछ न करने की गुहार लगाई है।
संसद में रणनीति बनाम लोकतंत्र: किसकी होगी जीत?
संसद का रण: महिला आरक्षण पर सियासी शतरंज, रूल 66 ने बदली बहस की दिशा

भारत की संसद में 16 से 18 अप्रैल 2026 के विशेष सत्र के दौरान जो घटनाक्रम सामने आया, उसने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को एक नए विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। यह केवल विधायी कार्यवाही नहीं, बल्कि रणनीति, संवैधानिक व्याख्या और राजनीतिक शक्ति संतुलन का जटिल संगम बन चुका है। केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को एक साथ प्रस्तुत करना और फिर रूल 66 को निलंबित करना इस पूरे घटनाक्रम को असाधारण बना देता है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित रहा है। सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसका समर्थन करते हुए भी इसके साथ जोड़े गए परिसीमन विधेयक पर गंभीर आपत्ति जता रहा है। परिसीमन का मुद्दा विशेष रूप से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।
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लोकसभा की कार्यप्रणाली में रूल 66 एक तकनीकी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो यह सुनिश्चित करता है कि यदि कोई विधेयक दूसरे पर निर्भर है, तो दोनों पर अलग-अलग विचार और मतदान हो। लेकिन इस नियम के निलंबन के बाद सरकार ने तीनों विधेयकों को एक साथ पारित कराने का रास्ता खोल दिया है। यही वह बिंदु है जहां से पूरी राजनीतिक शतरंज शुरू होती है।
सरकार की यह रणनीति विपक्ष को एक कठिन स्थिति में डाल देती है। विपक्ष के सामने अब केवल दो विकल्प हैं—या तो तीनों विधेयकों के पक्ष में मतदान करे या तीनों के खिलाफ। यदि वह महिला आरक्षण का समर्थन करता है, तो परिसीमन भी स्वतः पारित हो जाएगा, और यदि परिसीमन का विरोध करता है, तो उसे महिला आरक्षण के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा। यही कारण है कि इसे “आगे कुआं, पीछे खाई” की स्थिति कहा जा रहा है।
संख्या बल के लिहाज से भी यह मामला रोचक है। संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जबकि सरकार के पास पूर्ण संख्या नहीं है। ऐसे में रणनीति, समय प्रबंधन और विपक्ष की एकजुटता या बिखराव इस पूरे खेल में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
इस बीच अधिसूचना को लेकर भी विवाद गहरा गया है। 2023 के संविधान संशोधन को लागू करने की अधिसूचना ऐसे समय जारी की गई, जब उसी कानून में संशोधन पर बहस चल रही थी। विपक्ष ने इसे प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए सरकार पर जल्दबाजी और नियमों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
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संसद में बहस के दौरान तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी का “चैरिटी बिगिन्स एट होम” वाला बयान सियासी तापमान को और बढ़ा गया। उन्होंने सत्ताधारी दल से मांग की कि पहले अपने संगठन और सरकार में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दें, यहां तक कि प्रधानमंत्री पद को भी रोटेशन के आधार पर महिलाओं को सौंपने का सुझाव दिया। इस बयान ने सदन में तीखी प्रतिक्रिया और हंगामे को जन्म दिया।
परिसीमन का मुद्दा भी इस पूरे घटनाक्रम का संवेदनशील पहलू है। 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों का निर्धारण लंबे समय से स्थगित रहा है। अब जब इसे फिर से उठाया गया है, तो दक्षिण भारत के राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी घट सकती है। इससे क्षेत्रीय असंतुलन की नई बहस शुरू हो गई है।
पूरे घटनाक्रम ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या संसदीय नियमों का इस प्रकार उपयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है? सरकार इसे सुधारों को गति देने का प्रयास बता रही है, जबकि विपक्ष इसे बहस को सीमित करने और प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास मानता है।
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वैश्विक स्तर पर भी इस घटनाक्रम पर नजरें टिकी हुई हैं। भारत, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है, उसकी संसद में होने वाली हर बड़ी घटना अंतरराष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनती है। यह स्थिति भारत की लोकतांत्रिक छवि को या तो मजबूत कर सकती है या सवालों के घेरे में ला सकती है।
अंततः यह स्पष्ट है कि संसद में चल रहा यह संघर्ष केवल तीन विधेयकों तक सीमित नहीं है। यह भारतीय लोकतंत्र की कार्यप्रणाली, संवैधानिक मर्यादाओं और राजनीतिक रणनीति की परीक्षा है। रूल 66 का निलंबन, संयुक्त मतदान और अधिसूचना का समय—ये सभी कदम एक बड़े सियासी खेल का हिस्सा हैं, जिसके परिणाम दूरगामी होंगे।
— एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)
रात के अंधेरे में लूट खनन माफियाओ का बोलबाला
राजस्व और जन सुरक्षा दोनों पर गहरा रहा है संकट
भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
सरयू नदी के किनारों पर चल रहा खनन अब केवल पर्यावरण या स्थानीय समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह एक गहरी प्रशासनिक विफलता और संभावित मिलीभगत का संकेत देता है। एक ओर बाढ़ से बचाव के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर नदी किनारे पत्थर डाले जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रात के अंधेरे में अवैध खनन उसी सुरक्षा व्यवस्था को खोखला कर रहा है। जबकि आम जनता के इन अमूल्य धरोहर को
बेख़ौफ़ माफियाओं द्वारा चंद रुपयों के लिए मिटाया जा रहा है और प्रशासन मूक दर्शक बना हुआ है।
यह विरोधाभास कई गंभीर सवाल खड़े करता है—क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी अनदेखी की जा रही है?
राजस्व का खुला नुकसान
अवैध खनन सीधे-सीधे सरकार के राजस्व पर चोट है। बिना अनुमति मिट्टी और बालू का दोहन कर खनन माफिया लाखों-करोड़ों का मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि सरकार को मिलने वाला टैक्स और रॉयल्टी शून्य हो जाती है। यह न केवल आर्थिक अपराध है, बल्कि देश के संसाधनों की खुली लूट भी है।
सुरक्षा कार्यों पर पानी फेरता खनन
भागलपुर क्षेत्र में बाढ़ और कटान से बचाव के लिए वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं—स्पर, बोल्डर पिचिंग, और कटाव रोधी कार्य। लेकिन अवैध खनन इन सभी प्रयासों को निष्प्रभावी बना देता है। नदी की धारा बदलती है, किनारे कमजोर होते हैं और बस्तियां पुनः खतरे में आ जाती हैं।
मिलीभगत के संकेत
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि खनन माफिया बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर काम नहीं कर सकते। रात में मशीनों की आवाज, ट्रैक्टर-ट्रॉली की आवाजाही और पुल के पास गतिविधियां—ये सब बिना किसी रोक-टोक के चल रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं?
पर्यावरण और भविष्य पर खतरा
नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने से
जलस्तर, जैव विविधता और आसपास के खेतों पर भी असर पड़ता है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है
क्या होना चाहिए समाधान?
अवैध खनन पर तत्काल और सख्त कार्रवाई
जिम्मेदार अधिकारियों की जांच और जवाबदेही तय करना
रात में गश्त और निगरानी के लिए विशेष टीमों का गठन
स्थानीय लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लेना
सरयू किनारे हो रहा अवैध खनन
केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि देश के संसाधनों और जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। जब तक प्रशासनिक तंत्र ईमानदारी से कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक “विकास” के नाम पर हो रहा यह खेल यूं ही चलता रहेगा। अब समय है कि इस गठजोड़ को तोड़ा जाए और व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए।
सिकंदरपुर में 18 अप्रैल को बजरंग दल का विरोध प्रदर्शन, बैठक में बनी रूपरेखा
सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
स्थानीय जलपा माता मंदिर प्रांगण में शुक्रवार को बजरंग दल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आगामी 18 अप्रैल को प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तय की गई। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने देशभर में आयोजित किए जा रहे विरोध कार्यक्रमों के तहत सिकंदरपुर में भी प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।बैठक में जानकारी दी गई कि 18 अप्रैल दिन शनिवार को शाम 5:00 बजे से विरोध प्रदर्शन प्रारंभ होगा। इसके लिए सभी कार्यकर्ता एवं समर्थक संघस्थान महाराणा प्रताप शाखा, पुराना पोस्ट ऑफिस पर एकत्रित होंगे, जहां से प्रदर्शन की शुरुआत की जाएगी। आयोजन को सफल बनाने के लिए जिम्मेदारियां भी निर्धारित की गईं और कार्यकर्ताओं से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का आह्वान किया गया।जिला संयोजक प्रतीक राय ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन द्वारा देशव्यापी स्तर पर यह विरोध प्रदर्शन विभिन्न मुद्दों को लेकर किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील की कि वे इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से अपनी बात रखने के लिए इस तरह के कार्यक्रम आवश्यक हैं।
बैठक के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम को सफल और प्रभावी बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों तक सूचना पहुंचाने के लिए जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा, ताकि कार्यक्रम में व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।इस अवसर पर आकाश राय, सार्थक राय, सौरभ मिश्रा, आलोक सोनी, आर्यन पांडे, अर्जुन, रमेश गुप्ता, आदित्य बरनवाल सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने अपने-अपने स्तर से कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेदारी ली।बैठक का समापन संगठन के पदाधिकारियों द्वारा एकजुटता और अनुशासन बनाए रखते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने के संकल्प के साथ किया गया।
8 माह से मानदेय बकाया: 12 ब्लॉकों में मनरेगा कर्मियों की कलमबंद हड़ताल, विकास कार्य ठप
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में मनरेगा कर्मियों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। 8 माह से लंबित मानदेय, ईपीएफ कटौती की राशि जमा न होने और अन्य समस्याओं के विरोध में जिले के सभी 12 विकास खंडों में ग्राम रोजगार सेवकों सहित मनरेगा कर्मियों ने शुक्रवार से कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल के चलते मनरेगा से जुड़े सभी कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे ग्रामीण विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद ने बताया कि पिछले 8 महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। इससे कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है और परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। अप्रैल माह में बच्चों के स्कूल में दाखिले तक प्रभावित हो रहे हैं।

जिले के सदर, परतावल, घुघली, पनियरा, फरेंदा, निचलौल, धानी, बृजमनगंज और मिठौरा समेत सभी ब्लॉकों के मनरेगा कर्मचारी हड़ताल में शामिल हैं। कर्मचारियों ने संबंधित खंड विकास अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कार्य बहिष्कार की सूचना दे दी है।
संघ के जिला महासचिव इंद्रमणि विश्वकर्मा ने कहा कि बीते 20 वर्षों से कर्मचारी मनरेगा के साथ-साथ जीरो पॉवर्टी सर्वे, एसआईआर सर्वे, क्राफ्ट सर्वे, प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना में पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है।

घुघली ब्लॉक अध्यक्ष बंधु मद्धेशिया ने चेतावनी दी कि जब तक बकाया मानदेय का भुगतान और ईपीएफ की राशि खातों में जमा नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। वहीं निचलौल ब्लॉक अध्यक्ष घनश्याम कन्नौजिया ने प्रशासन पर कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति उदासीनता का आरोप लगाया।
परतावल ब्लॉक में अध्यक्ष अमित पटेल के नेतृत्व में प्रभारी बीडीओ श्याम सुंदर तिवारी को ज्ञापन सौंपा गया। इसी प्रकार अन्य सभी ब्लॉकों में भी अधिकारियों को सूचना देकर काम बंद कर दिया गया है।

हड़ताल का सीधा असर मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्यों पर पड़ा है। मजदूरों को काम आवंटन, मस्टर रोल जारी करना, भुगतान प्रक्रिया और निर्माण कार्यों की निगरानी पूरी तरह प्रभावित हो गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य ठप हो गए हैं।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस बढ़ते असंतोष को कैसे संभालता है और कर्मचारियों की मांगों पर कब तक ठोस निर्णय लिया जाता है। फिलहाल, आंदोलन जारी रहने के संकेत हैं।
कलेक्ट्रेट का कायाकल्प डीएम के नवाचारों से सिर्फ सूरत ही नहीं सीरत भी बदल रही
शाहजहांपुर(राष्ट्र की परम्परा)
कलेक्ट्रेट का स्वरूप इन दिनों एक कुशल प्रशासक की दूरदर्शी सोच का शानदार उदाहरण पेश कर रहा है। जिलाधिकारी धर्मेंद्र प्रताप सिंह के पदभार ग्रहण करने के बाद से न केवल पूरे जनपद में, बल्कि कलेक्ट्रेट परिसर में भी ऐसे अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जो हर किसी का दिल खुश कर रहे हैं। सरकारी दफ्तरों की नीरस छवि को पीछे छोड़ते हुए शाहजहांपुर कलेक्ट्रेट अब सुविधा, सुव्यवस्था और सुंदरता के एक नए प्रतिमान के रूप में उभर रहा है।इस बदलाव की सुखद बानगी बीते 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) से पूर्व देखने को मिली, जब कलेक्ट्रेट का पूरा भवन ‘फसाड लाइटिंग’ के जरिए तिरंगे की शानदार रोशनी में नहा उठा। शहीदों की इस पावन नगरी के गौरव को और गहराई से उकेरते हुए कलेक्ट्रेट स्थित मुख्य सभागार का भी भव्य रूप से नवीनीकरण कराया गया है। अब इस सभागार को महान क्रांतिकारी अमर शहीद राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ के सम्मान में ‘बिस्मिल सभागार’ नाम दिया गया है, जो यहां आने वाले हर शख्स के भीतर देशभक्ति की भावना और गर्व का संचार करता है।
सुंदरता और देशभक्ति के साथ-साथ आम जनता की सहूलियत का भी यहां पूरी संवेदनशीलता से ख्याल रखा जा रहा है। अक्सर दूर-दराज के गांवों से लोग अपनी समस्याएं लेकर ‘जनसुनवाई’ में पहुंचते हैं। उन्हें मौसम की मार न सहनी पड़े और उनका इंतजार सुविधाजनक हो, इसके लिए कलेक्ट्रेट में आम लोगों के लिए एक विशेष वातानुकूलित (एसी) पुस्तकालय का निर्माण कराया गया है। यह एक ऐसा नवाचार है जहां लोग सुकून से बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर सकते हैं और किताबें पढ़कर अपना समय सार्थक कर सकते हैं।
कलेक्ट्रेट की व्यवस्था में एक और बड़ा और साफ दिखने वाला सुधार यातायात और पार्किंग को लेकर हुआ है।
पहले जहां अधिकारियों और कर्मचारियों के वाहन परिसर में कहीं भी, बेतरतीब ढंग से खड़े हो जाते थे, वहीं अब अनुशासन का नया स्वरूप देखने को मिल रहा है। अब व्यवस्थित तरीके से निशान बना दिए गए हैं कि किस अधिकारी की गाड़ी कहां खड़ी होगी, जिससे परिसर बेहद खुला और सुव्यवस्थित नजर आता है।इस पूरे कायाकल्प में चार चांद लगा रही हैं कलेक्ट्रेट की दीवारों पर उकेरी जा रही मनमोहक और सुंदर चित्रकारियां। ये कलाकृतियां परिसर को एक नई जीवंतता प्रदान कर रही हैं।जिलाधिकारी के इन प्रयासों ने यह साबित कर दिया है कि सकारात्मक इच्छाशक्ति से एक सरकारी परिसर को न सिर्फ अनुशासित और जन-सुविधाजनक बनाया जा सकता है, बल्कि उसे इतना आकर्षक रूप भी दिया जा सकता है कि वहां आने वाले हर व्यक्ति का मन प्रफुल्लित हो उठे।
