Sunday, April 26, 2026
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80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

हिंदी विभाग को मिला नया नेतृत्व: प्रो. विमलेश मिश्र ने संभाली विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा तथा पत्रकारिता विभाग में आचार्य प्रोफेसर विमलेश कुमार मिश्र ने दोपहर पूर्व विभागाध्यक्ष का दायित्व ग्रहण किया। चक्रानुक्रम के तहत यह जिम्मेदारी अब तक प्रोफेसर दीपक प्रकाश त्यागी संभाल रहे थे, जिनका 3 माह 13 दिन का दूसरा कार्यकाल पूर्ण होने के साथ 3 वर्ष की अवशेष अवधि 24 अप्रैल को समाप्त हुई।
प्रोफेसर विमलेश मिश्र हिंदी साहित्य के मध्यकाल, भोजपुरी साहित्य एवं भारतीय काव्यशास्त्र के प्रतिष्ठित विद्वान हैं। उन्होंने अब तक 6 मौलिक पुस्तकें लिखी हैं तथा 7 पुस्तकों का संपादन किया है। वे लंबे समय तक ‘अभिधा’ और ‘विजयम’ पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे हैं। साथ ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के लिए भोजपुरी विषय पर महत्वपूर्ण पाठ्य सामग्री तैयार कर चुके हैं। वर्तमान में वे साहित्य अकादमी, दिल्ली के एक प्रोजेक्ट पर लेखन कार्य कर रहे हैं।
प्रोफेसर मिश्र के पास समृद्ध प्रशासनिक अनुभव भी है। वे पिछले तीन वर्षों से विश्वविद्यालय के क्रीड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं और इससे पूर्व पांच वर्षों तक डेलीगेसी के उपाध्यक्ष रहे। राष्ट्रीय सेवा योजना में भी उन्होंने लगातार चार वर्षों तक कार्यक्रम अधिकारी के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई।
अध्यक्ष के रूप में अपनी पहली बैठक में उन्होंने कहा कि शिक्षक पहले अपने संस्थान और अंततः समाज की थाती होता है। इस जिम्मेदारी को जितनी गंभीरता से समझा जाएगा, दायित्वों का निर्वहन उतनी ही निष्ठा से संभव होगा।
दायित्व ग्रहण करने के बाद शाम 5:00 बजे उन्होंने विभागीय सदस्यों के साथ कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन से मुलाकात की, जिसमें हिंदी विभाग की भावी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। कुलपति ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्य, अधिष्ठाता एवं अधिकारियों ने प्रसन्नता व्यक्त की, वहीं शोधार्थियों ने वृक्षारोपण कर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

कुर्थीजाफरपुर : चेयरमैन के रिश्तेदारों को हुआ आवासीय पट्टा 39 साल बाद रद्द

जिलाधिकारी ने दिया कब्जा हटाने का आदेश

मऊ (राष्ट्र की परम्परा) जनपद के कुर्थीजाफरपुर नगर पंचायत के वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष के रिश्तेदारों को लगभग 39 वर्ष पूर्व हुए आवासीय भूमि आवंटन को जिलाधिकारी ने निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 66 के तहत की गई।
मामला गाटा संख्या 740, रकबा 0.056 हेक्टेयर से जुड़ा है, जिसका आवंटन वर्ष 1985 में तत्कालीन उप जिलाधिकारी द्वारा किया गया था। इस संबंध में वर्ष 2025 में राज्य सरकार की ओर से वाद दाखिल किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि आवंटन प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और अपात्र एवं संपन्न व्यक्तियों को लाभ पहुंचाया गया।
जांच के दौरान सामने आया कि आवंटन से पूर्व न तो मुनादी कराई गई और न ही पात्रता सूची तैयार की गई। साथ ही, आवंटित भूमि पर निर्धारित तीन वर्ष के भीतर आवास निर्माण भी नहीं किया गया। वर्तमान में उक्त भूमि पर केवल चारदीवारी व गेट लगाकर कब्जा किया गया है, जबकि आवंटी अन्यत्र मकान में रह रहे हैं।
तहसील व लेखपाल की आख्या में यह भी स्पष्ट हुआ कि आवंटन के समय संबंधित व्यक्ति स्वयं भूमि प्रबंधक समिति का सदस्य था और बिना कलेक्टर की अनुमति के पट्टा स्वीकृत कराया गया, जो नियमों के विपरीत है।
वहीं, प्रतिवादियों की ओर से दावा किया गया कि मामला समय-सीमा के बाहर है और राजनीतिक द्वेष के चलते कार्रवाई की गई है। साथ ही यह भी कहा गया कि कई मूल पट्टेदारों का निधन हो चुका है, इसलिए कार्यवाही विधिसम्मत नहीं है।
सभी पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों के परीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने पाया कि आवंटन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं और नियमों का उल्लंघन किया गया।
जिलाधिकारी प्रवीण मिश्रा ने अपने आदेश में वर्ष 1985 के आवासीय आवंटन को निरस्त करते हुए संबंधित भूमि से कब्जा हटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही तहसीलदार को आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रशासन अब उक्त भूमि का पुनः उपयोग सुनिश्चित करेगा ।

होमगार्ड्स एनरोलमेंट–2025 परीक्षा का निरीक्षण, डीएम-एसपी ने परखी व्यवस्थाएं

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी द्वारा उत्तर प्रदेश होमगार्ड्स एनरोलमेंट–2025 की लिखित परीक्षा के दृष्टिगत जनपद के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। प्रथम पाली के दौरान अधिकारियों ने राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, डॉ. बी.आर. अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय, शिवजपत सिंह इंटरमीडिएट कॉलेज भिटौली तथा जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज सहित कई केंद्रों का भ्रमण कर परीक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने परीक्षा कक्षों का गहन निरीक्षण करते हुए सेक्टर मजिस्ट्रेट, स्टेटिक मजिस्ट्रेट, कक्ष निरीक्षकों एवं ड्यूटी में तैनात पुलिस बल को निर्देशित किया कि परीक्षा को पूर्णतः निष्पक्ष, शांतिपूर्ण एवं सुचितापूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखना सभी अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा परीक्षा केंद्रों पर स्थापित सीसीटीवी कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया गया। उन्होंने निगरानी व्यवस्था को निरंतर सक्रिय बनाए रखने तथा प्रत्येक गतिविधि पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए। साथ ही, परीक्षार्थियों के लिए उपलब्ध कराई गई सुविधाओं—बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं—की भी जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
अधिकारियों ने संबंधित कार्मिकों को निर्देशित किया कि परीक्षा अवधि के दौरान सभी केंद्रों पर सतर्कता बनाए रखते हुए शासन एवं भर्ती बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, जिससे परीक्षा पारदर्शी एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रथम पाली में राजकीय कन्या इंटर कॉलेज में 372 परीक्षार्थी उपस्थित एवं 118 अनुपस्थित रहे। डॉ. बी.आर. अंबेडकर राजकीय महाविद्यालय में 374 परीक्षार्थी उपस्थित तथा 116 अनुपस्थित रहे। शिवजपत सिंह इंटरमीडिएट कॉलेज भिटौली में 376 परीक्षार्थी उपस्थित रहे, जबकि 114 अनुपस्थित दर्ज किए गए। वहीं, जवाहर लाल नेहरू पीजी कॉलेज (ब्लॉक-ए) में 370 परीक्षार्थी उपस्थित तथा 110 अनुपस्थित रहे।

निंदा छोड़ें, आत्मचिंतन अपनाएं: यही है श्रेष्ठता का मार्ग

गोंदिया, महाराष्ट्र।
“न विना परवादेन रमते दुर्जनोजन:। काक: सर्वरसान भुक्ते विनामध्यम न तृप्यति।।“
अर्थात् दुष्ट व्यक्ति बिना निंदा किए आनंद नहीं पाते, जैसे कौआ सभी रसों का सेवन करता है, परंतु गंदगी के बिना संतुष्ट नहीं होता।

आज के समाज में यह श्लोक अत्यंत प्रासंगिक प्रतीत होता है। जब हम दूसरों की आलोचना करते हैं, तब हमें यह भी याद रखना चाहिए कि हम स्वयं भी त्रुटियों से परिपूर्ण हैं। एक उंगली जब हम किसी और पर उठाते हैं, तो तीन उंगलियां हमारी ओर संकेत करती हैं—यह केवल कहावत नहीं, बल्कि जीवन का गहरा सत्य है।
सृष्टि के रचयिता ने मनुष्य को श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान की है, ताकि वह गुण और अवगुण के बीच सही चयन कर सके। किंतु अक्सर हम अवगुणों को चुन लेते हैं और अंततः परिस्थितियों या ईश्वर को दोष देने लगते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल हमारे व्यक्तित्व को कमजोर करती है, बल्कि समाज में नकारात्मकता भी फैलाती है।
निंदा करना एक ऐसा अवगुण है, जो प्रारंभ में सुखद प्रतीत होता है, परंतु अंततः मन में अशांति और तनाव उत्पन्न करता है। किसी की आलोचना करके हम अपने अहंकार को क्षणिक संतुष्टि तो दे सकते हैं, लेकिन उसकी वास्तविक योग्यता, अच्छाई और सत्य को कभी कम नहीं कर सकते। सूर्य पर बादल छा जाने से उसकी रोशनी कम नहीं होती, उसी प्रकार सच्चे गुणों को निंदा से दबाया नहीं जा सकता।
हम अक्सर दूसरों के दोष आसानी से देख लेते हैं, लेकिन अपने दोषों को नजरअंदाज कर देते हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसे हम चंद्रमा के दाग देख लेते हैं, पर अपनी आंखों का काजल नहीं देख पाते। वास्तव में, दूसरों में जो दोष हमें दिखाई देते हैं, वे कहीं न कहीं हमारे भीतर की दूषित प्रवृत्तियों का ही प्रतिबिंब होते हैं।
महापुरुषों ने भी निंदा से बचने की सीख दी है। उनका मानना था कि दूसरों के दोष देखने के बजाय उनके गुणों को अपनाना चाहिए। निंदा न केवल संबंधों में कटुता लाती है, बल्कि व्यक्ति की विश्वसनीयता भी कम कर देती है।
यह भी सत्य है कि संसार में ऐसा कोई नहीं है जिसकी आलोचना न होती हो। कोई कम बोलने पर, कोई अधिक बोलने पर, तो कोई अपनी भाषा या व्यवहार के कारण आलोचना का शिकार होता है। इसलिए दूसरों की बातों से विचलित होने के बजाय आत्मचिंतन और आत्मविकास पर ध्यान देना ही श्रेष्ठ मार्ग है।
दूसरों की निंदा में समय व्यर्थ करने से बेहतर है कि हम अपने व्यक्तित्व को मजबूत बनाएं। जब हम अपने गुणों को विकसित करते हैं और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं, तो निंदक स्वतः ही पीछे छूट जाते हैं।
अतः निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि निंदा त्यागकर आत्मचिंतन अपनाना ही सच्ची प्रगति का मार्ग है। स्वयं को श्रेष्ठ सिद्ध करने के बजाय विनम्रता अपनाने वाला व्यक्ति ही वास्तव में गुणवान और महान होता है।
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)

विकसित भारत का लक्ष्य विश्व मानवता की सुरक्षा का उद्घोष: प्रो. राजशरण शाही

शैक्षिक उन्नयन एवं सामाजिक परिवर्तन के लिए पुरातन छात्रों की भूमिका सराहनीय: कुलपति

शिक्षाशास्त्र विभाग में राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुरातन छात्र सम्मेलन

शिक्षक शिक्षा में नवाचार से ही साकार होगा विकसित भारत @2047 का संकल्प

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं पुरातन छात्र सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविदों, पुरातन छात्रों, शोधार्थियों, नीति-निर्माताओं एवं शिक्षा विशेषज्ञों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए “विकसित भारत @2047: शिक्षक शिक्षा की भूमिका” विषय पर समकालीन एवं भविष्यपरक आयामों पर गहन विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। संयोजक प्रो. सुषमा पाण्डेय ने संगोष्ठी की प्रस्तावना एवं अतिथि परिचय प्रस्तुत किया, जबकि संचालन एवं स्वागत भाषण आयोजन सचिव डॉ. राजेश कुमार सिंह ने किया। प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो. सुनीता दुबे ने की तथा आभार सह-संयोजक प्रो. उदय सिंह ने व्यक्त किया।
संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य शिक्षक शिक्षा की केंद्रीय भूमिका को सुदृढ़ करते हुए भारत को ज्ञान-आधारित, समावेशी एवं नवाचार-प्रेरित राष्ट्र के रूप में विकसित करना रहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में शिक्षक शिक्षा की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विचार करते हुए गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी शिक्षकों के निर्माण पर बल दिया गया।
मुख्य अतिथि प्रो. राजशरण शाही ने कहा कि शिक्षा की जड़ें राष्ट्र की संस्कृति से जुड़ी होनी चाहिए। भारतीय शिक्षा को केवल सूचना का नहीं, बल्कि ज्ञान का केंद्र बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत बताते हुए कुशल शिक्षकों के निर्माण को विकसित भारत की आधारशिला बताया।
तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने शिक्षक शिक्षा की चुनौतियाँ, डिजिटल एवं एआई आधारित नवाचार, गुणवत्ता सुनिश्चितता, सतत व्यावसायिक विकास, समावेशी शिक्षा, भारतीय ज्ञान प्रणाली और 21वीं सदी के कौशल जैसे विषयों पर विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि आज शिक्षक केवल ज्ञान प्रदाता नहीं, बल्कि मार्गदर्शक, नवप्रवर्तनकर्ता और सामाजिक परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में उभर रहा है।
द्वितीय सत्र में आयोजित पुरातन छात्र सम्मेलन की अध्यक्षता कुलपति प्रो. पूनम टण्डन ने की। इस दौरान पुरातन छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए विभाग के विकास में सहयोग का संकल्प लिया। विभिन्न सुझाव भी प्रस्तुत किए गए, जो विश्वविद्यालय के शैक्षणिक उन्नयन में सहायक होंगे।
समापन सत्र में कुलपति प्रो. पूनम टण्डन ने कहा कि यह आयोजन शिक्षाशास्त्र विभाग की अकादमिक सक्रियता को सुदृढ़ करने के साथ ही “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य में शिक्षक शिक्षा की निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है। आयोजन के अंत में सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

वृद्धावस्था में मानसिक स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौती: संवेदनशील समाज और पारिवारिक सहयोग की आवश्यकता- प्रो. आदेश अग्रवाल

एलुमनी मीट में गूंजा मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा, वृद्धजनों के सम्मान पर बल

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग द्वारा शनिवार को “अलोहामोरा’26” के अंतर्गत वार्षिक एलुमनी मीट का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग और वृद्धावस्था पर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि के साथ हुआ।
विभागाध्यक्ष प्रो. धनंजय कुमार ने स्वागत भाषण में पूर्व छात्रों के योगदान को विभाग की सुदृढ़ता का आधार बताते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का लाइव प्रसारण फेसबुक के माध्यम से किया गया, जिसमें देश-विदेश से 100 से अधिक पूर्व छात्र ऑनलाइन जुड़े और अपने अनुभव साझा किए।
विशिष्ट अतिथि प्रो. अराधना शुक्ला ने “कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में मानसिक स्वास्थ्य” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि डिजिटल निर्भरता, आभासी संबंधों और सूचना के अत्यधिक प्रवाह के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। उन्होंने भावनात्मक जुड़ाव, आत्म-नियंत्रण और सामाजिक समर्थन तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि प्रो. आदेश अग्रवाल ने “मानसिक स्वास्थ्य एवं वृद्धावस्था” विषय पर कहा कि बढ़ती उम्र के साथ अकेलापन, निर्भरता और सामाजिक अलगाव जैसी समस्याएँ मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। उन्होंने परिवार, समाज और नीति-निर्माताओं की साझा जिम्मेदारी पर बल देते हुए अंतर-पीढ़ी संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूक्लियर परिवार व्यवस्था के कारण वृद्धजनों का सामाजिक समर्थन तंत्र कमजोर हो रहा है, ऐसे में संवाद, संवेदनशीलता और सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने विश्वविद्यालय और पूर्व छात्रों के बीच सहयोग को और सशक्त बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर प्रो. प्रेम सागर नाथ तिवारी, प्रो. अनुपम नाथ त्रिपाठी, प्रो. चित्तरंजन मिश्रा, प्रो. नाज़िश बानो, प्रो. मंजू मिश्रा, प्रो. आर.पी. सिंह, डॉ. अंशु मिश्रा सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं शिक्षक उपस्थित रहे। अंत में डॉ. गरिमा सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
कार्यक्रम में “मेंटल हेल्थ: साइको-सोशल पर्सपेक्टिव्स” श्रृंखला की तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। यह श्रृंखला कुल 10 पुस्तकों का व्यापक अकादमिक संकलन है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों पर गहन अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अनुभूति दुबे ने पुस्तकों का परिचय प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह श्रृंखला शोधार्थियों, विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए उपयोगी संदर्भ सामग्री है। लोकार्पित पुस्तकों में “एजिंग: इश्यूज एंड इंटरवेंशन्स”, “मेंटल हेल्थ एट वर्कप्लेस” तथा “मेंटल हेल्थ: प्रमोशन एंड प्रिवेंशन” शामिल हैं।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि ने पुस्तकों को समकालीन समय की आवश्यकता बताया, वहीं अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति ने इसे अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

संतकबीरनगर की शिवांगी कांत का राष्ट्रपति भवन कार्यक्रम में चयन, लौटने पर भव्य स्वागत

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद की उभरती युवा कलाकार शिवांगी कांत के राष्ट्रपति भवन में आयोजित प्रतिष्ठित आर्टिस्ट-इन-रेजिडेंस कार्यक्रम में चयन के बाद पहली बार गृह जनपद आगमन पर खलीलाबाद में उनका भव्य स्वागत किया गया। उनकी इस उपलब्धि से पूरे जिले में गर्व और उत्साह का माहौल है।

शिवांगी कांत, बंजरिया पूर्वी (खलीलाबाद) निवासी सीआरपीएफ जवान रामाकांत यादव और सुशीला यादव की पुत्री हैं। उन्हें यह अवसर वाराणसी स्थित हस्तशिल्प सेवा केंद्र के माध्यम से प्राप्त हुआ, जो वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन संचालित है। उन्होंने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर से चित्रकला (बीएफए) की शिक्षा प्राप्त की है और डीएलएड भी किया है।

ज्ञात हो कि राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान द्रौपदी मुर्मु ने पारंपरिक कला से जुड़े कलाकारों से मुलाकात कर उनकी कलाकृतियों का अवलोकन किया। इस कार्यक्रम में देशभर से चयनित कलाकार कावी, निर्मल, माता नी पछेड़ी और गोंड जैसी कला विधाओं पर कार्य करते हुए अपनी प्रतिभा को निखार रहे हैं।

यह आर्टिस्ट-इन-रेजिडेंस कार्यक्रम भारतीय सांस्कृतिक विरासत और कला परंपराओं को संरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है, जो उभरते कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करता है।

जनपद आगमन पर भव्य स्वागत

गृह जनपद लौटने पर नेदुला चौराहे पर स्थानीय लोगों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और परिजनों ने शिवांगी कांत का पुष्पगुच्छ व अंगवस्त्र देकर जोरदार स्वागत किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे और इसे जिले के लिए गौरव का क्षण बताया।

शिवांगी कांत ने क्या कहा

शिवांगी कांत ने बताया कि राष्ट्रपति भवन में बिताया गया समय अत्यंत प्रेरणादायक रहा। वहां देशभर के कलाकारों के साथ संवाद और सीखने का अवसर मिला, जिससे उनकी कला को नई दिशा मिली है।

उन्होंने कहा कि वे अपनी कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति, लोकजीवन और समकालीन विषयों को नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करेंगी।

परिवार और गुरुओं को दिया श्रेय

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुओं और जनपदवासियों के सहयोग व आशीर्वाद को दिया। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी कला के माध्यम से समाज और देश के लिए सकारात्मक योगदान देने की बात कही।

इस अवसर पर नगर पालिकाध्यक्ष जगत जायसवाल, शिक्षक संघ की अध्यक्ष अंबिका देवी, राम स्नेही यादव, नवीन पाण्डेय, रमेश प्रसाद सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

देवरिया: 21 मई तक स्वगणना, 22 मई से घर-घर सर्वे; लापरवाही पर FIR के निर्देश

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनगणना-2027 के प्रथम चरण के तहत जिले में 7 मई से 21 मई तक स्वगणना (Self Enumeration) अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद 22 मई से 20 जून तक घर-घर सर्वेक्षण (मकान सूचीकरण) का कार्य किया जाएगा। जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने सभी विभागों को सक्रिय भूमिका निभाने और अभियान की व्यापक तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

डीएम ने बताया कि स्वगणना के दौरान नागरिक ऑनलाइन पोर्टल या क्यूआर कोड के माध्यम से स्वयं अपने और अपने परिवार का विवरण दर्ज कर सकेंगे। अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पूरे जिले में जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

इसके अंतर्गत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर संपर्क, जनप्रतिनिधियों का प्रशिक्षण, विद्यालयों और महाविद्यालयों में विशेष कार्यक्रम तथा विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया जाएगा। सभी विभागों को नोडल अधिकारी नामित कर शत-प्रतिशत सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

डीएम ने यह भी कहा कि आमजन को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि कोई भी व्यक्ति इस प्रक्रिया से वंचित न रह जाए। इसके लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया, पोस्टर, बैनर व पंपलेट के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

22 मई से घर-घर सर्वे शुरू

स्वगणना चरण के बाद 22 मई से गणनाकर्मी घर-घर जाकर मकानों और परिवारों का विवरण दर्ज करेंगे। पूरे अभियान की लगातार निगरानी और समीक्षा की जाएगी, ताकि कार्य समयबद्ध और सटीक तरीके से पूरा हो सके।

लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई

प्रशासन ने प्रशिक्षण और ड्यूटी में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि अनुपस्थित रहने या कार्य में ढिलाई बरतने वाले प्रगणक और सुपरवाइजर के खिलाफ जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के तहत FIR दर्ज कराई जाएगी।
इस प्रावधान के तहत दोषी को तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

प्रशासन के अनुसार, पहले अनुपस्थित कर्मियों को कारण बताओ नोटिस दिया जाएगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी, और फिर भी सुधार न होने पर FIR दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

देवरिया में युवक रहस्यमय ढंग से लापता, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

भागलपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। मईल थाना क्षेत्र के धरमेर गांव निवासी 25 वर्षीय युवक अरमान अंसारी के रहस्यमय ढंग से लापता होने से इलाके में सनसनी फैल गई है। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और परिजनों ने पुलिस से जल्द कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, अरमान अंसारी 23 अप्रैल 2026 की शाम करीब 6 बजे घर से किसी काम के लिए निकले थे, लेकिन इसके बाद से वापस नहीं लौटे। देर रात तक घर न पहुंचने पर परिजनों की चिंता बढ़ गई और अगले दिन उन्होंने रिश्तेदारों व आसपास के क्षेत्रों में तलाश शुरू की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

परिजनों ने मईल थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। युवक के लापता होने के समय उसने लाल रंग की टी-शर्ट और काले रंग की पैंट पहन रखी थी। इसी हुलिए के आधार पर बाजारों, चौराहों और अन्य स्थानों पर भी पूछताछ की गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है।
परिवार के अनुसार, अरमान मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ था और उसका किसी से कोई विवाद भी नहीं था। ऐसे में उसका अचानक गायब होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

पुलिस का कहना है कि शिकायत दर्ज कर ली गई है और युवक की तलाश के लिए संभावित स्थानों पर टीमें लगाई गई हैं। जल्द ही मामले का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

साथ ही परिजनों ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी को युवक के संबंध में कोई जानकारी मिले, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें।

देवरिया: मई माह का निःशुल्क राशन वितरण शुरू, 8 मई तक मिलेगा लाभ

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में राशन कार्डधारकों के लिए मई माह का निःशुल्क खाद्यान्न वितरण शुरू कर दिया गया है। जिला पूर्ति अधिकारी संजय कुमार पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाएगा।

उन्होंने बताया कि अंत्योदय कार्डधारकों को प्रति कार्ड 35 किलोग्राम खाद्यान्न निःशुल्क दिया जाएगा, जिसमें 10 किलोग्राम गेहूं और 25 किलोग्राम चावल शामिल है।

वहीं पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को प्रति यूनिट (प्रति व्यक्ति) 5 किलोग्राम खाद्यान्न मिलेगा, जिसमें 1 किलोग्राम गेहूं और 4 किलोग्राम चावल शामिल रहेगा।

यह वितरण 24 अप्रैल 2026 से 08 मई 2026 तक किया जाएगा। सभी कार्डधारकों से अपील की गई है कि वे अपने निकटतम उचित दर की दुकान से निर्धारित अवधि के भीतर राशन प्राप्त कर लें।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: राजनीतिक उठा-पटक और आक्रामक प्रचार का संग्राम

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पश्चिम बंगाल का चुनाव भारतीय लोकतंत्र का एक अत्यंत जीवंत, संवेदनशील और संघर्षपूर्ण अध्याय माना जाता है। यहाँ की राजनीतिक उठा-पटक, तीखा और आक्रामक प्रचार, वैचारिक टकराव तथा जमीनी गतिविधियाँ इसे अन्य राज्यों के चुनावों से अलग पहचान देती हैं। बंगाल की राजनीति केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान, क्षेत्रीय अस्मिता और गहरे वैचारिक संघर्ष का प्रतीक भी है।

राजनीतिक परिदृश्य और प्रमुख दल

राज्य में मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीएम) प्रमुख भूमिका निभाते हैं।

ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है, जबकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा लगातार अपने जनाधार को विस्तार देने में जुटी है।

चुनावी उठा-पटक और समीकरण

बंगाल की राजनीति में दल-बदल, गठबंधन और नए समीकरण बनना आम बात है। चुनाव के समय कई नेता पार्टियां बदलते हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल जाते हैं।

भाजपा ने पिछले चुनावों में टीएमसी से कई नेताओं को अपने साथ जोड़कर अपनी ताकत बढ़ाई, वहीं टीएमसी ने संगठन को मजबूत करने और बागियों को नियंत्रित करने पर ध्यान केंद्रित किया। कांग्रेस और वामपंथी दलों ने भी गठबंधन बनाकर अपनी खोई जमीन वापस पाने की कोशिश की है, लेकिन उन्हें अभी भी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

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आक्रामक प्रचार और रणनीति

बंगाल चुनाव में प्रचार बेहद आक्रामक, योजनाबद्ध और रचनात्मक होता है। विशाल जनसभाएँ, रोड शो, डिजिटल अभियान और घर-घर संपर्क इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशाल रैलियाँ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के जोशीले रोड शो चुनावी माहौल को पूरी तरह गरमा देते हैं।
जहाँ टीएमसी “बंगाली अस्मिता” को केंद्र में रखती है, वहीं भाजपा “विकास”, “राष्ट्रवाद” और “सुशासन” जैसे मुद्दों को प्रमुखता देती है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Facebook, WhatsApp और Twitter (अब X) पर भी डिजिटल चुनावी जंग देखने को मिलती है।

मुद्दे और मतदाताओं की प्राथमिकताएँ

बंगाल चुनाव में बेरोजगारी, विकास, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे प्रमुख रहते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाएँ और किसान-मजदूर वर्ग के मुद्दे प्रभावी होते हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे पर ज्यादा फोकस रहता है।

युवा मतदाता अब अधिक जागरूक हैं और उनके मुद्दे चुनावी परिणामों को निर्णायक रूप से प्रभावित कर रहे हैं।

हिंसा और विवाद

पश्चिम बंगाल के चुनावों में समय-समय पर हिंसा और विवाद भी देखने को मिलते हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि भारत निर्वाचन आयोग और प्रशासन निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं।

मीडिया और जनमत की भूमिका

मीडिया चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। टीवी, अखबार और डिजिटल प्लेटफॉर्म जनता तक जानकारी पहुंचाने के साथ-साथ जनमत को भी प्रभावित करते हैं।

डिजिटल युग में सूचना की गति बढ़ने के साथ-साथ भ्रम फैलने का खतरा भी बढ़ा है, इसलिए मतदाताओं को सजग रहना आवश्यक है।

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होमगार्ड भर्ती परीक्षा: महराजगंज में 3 दिन ट्रैफिक अलर्ट, भारी वाहनों की एंट्री बंद

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश होमगार्ड्स एनरोलमेंट-2025 परीक्षा को शांतिपूर्ण और जाममुक्त तरीके से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया है। 25 अप्रैल से 27 अप्रैल 2026 तक आयोजित परीक्षा को देखते हुए नगर क्षेत्र में कड़ी यातायात व्यवस्था लागू रहेगी।

प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, परीक्षा के तीनों दिन सुबह 07:00 बजे से शाम 07:00 बजे तक नगर में भारी और व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। ट्रक, बस, ट्रेलर समेत अन्य बड़े वाहनों को शहर में आने की अनुमति नहीं होगी, ताकि ट्रैफिक दबाव कम किया जा सके।

यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए सिंदुरिया, शिकारपुर, झनझनपुर और पकड़ी चौकी को प्रमुख नो-एंट्री और डायवर्जन प्वाइंट बनाया गया है। इन स्थानों पर पुलिस बल तैनात कर भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजा जाएगा।

परीक्षा के दौरान ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीमें लगातार निगरानी रखेंगी। परीक्षा केंद्रों के आसपास विशेष व्यवस्था की गई है, ताकि भीड़भाड़ और जाम की स्थिति न बने। जरूरत पड़ने पर मोबाइल टीमें भी सक्रिय रहेंगी।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ये सभी व्यवस्थाएं परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए की गई हैं, ताकि वे समय से अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकें।

जिला प्रशासन ने वाहन चालकों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें, जिससे परीक्षा का सफल संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

मन को हल्का बनाएं, अपेक्षाओं से दूरी बढ़ाएं

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— नवनीत मिश्र
मनुष्य का जीवन अपेक्षाओं के ताने-बाने से बुना हुआ है। हम हर दिन, हर संबंध और हर परिस्थिति से कुछ न कुछ उम्मीद रखते हैं। ये अपेक्षाएँ कभी प्रेरणा बनती हैं, तो कभी हमारे दुख और तनाव का कारण भी बन जाती हैं। सच तो यह है कि अनावश्यक अपेक्षाओं से दूरी बनाना ही मन की सच्ची शांति की शुरुआत है।

अपेक्षाओं का स्वभाव ऐसा होता है कि वे हमें बाहरी परिस्थितियों और लोगों के व्यवहार पर निर्भर बना देती हैं। जब चीजें हमारे अनुसार होती हैं, तो क्षणिक सुख मिलता है; लेकिन जैसे ही परिस्थितियाँ बदलती हैं या लोग हमारी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते, हम निराशा, क्रोध और असंतोष से भर जाते हैं। यही वह बिंदु है, जहाँ अपेक्षाएँ हमारे मानसिक संतुलन को प्रभावित करने लगती हैं।

जीवन को सरल और संतुलित बनाने के लिए यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति अलग है—उसकी सोच, परिस्थितियाँ और व्यवहार भी भिन्न हैं। ऐसे में सभी से एक जैसी प्रतिक्रिया की अपेक्षा करना अव्यावहारिक है। जब हम लोगों को उनके स्वभाव सहित स्वीकार करना सीख लेते हैं, तो शिकायतों की जगह समझ और सहनशीलता विकसित होने लगती है।

इसके साथ ही, हमें उन चीजों से अपेक्षा कम करनी चाहिए जो हमारे नियंत्रण में नहीं हैं। जीवन में कई परिस्थितियाँ ऐसी होती हैं, जिन पर हमारा कोई वश नहीं चलता। उन्हें बदलने की जिद केवल तनाव को जन्म देती है, जबकि उन्हें स्वीकार कर आगे बढ़ना हमें मानसिक शांति प्रदान करता है।

कृतज्ञता का भाव भी अपेक्षाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब हम अपने पास मौजूद चीजों, रिश्तों और अवसरों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, तो हमारा ध्यान कमी पर नहीं, बल्कि उपलब्धियों पर केंद्रित होता है। इससे मन में संतोष की भावना बढ़ती है और अपेक्षाओं का बोझ स्वतः हल्का हो जाता है।

दरअसल, दुख का कारण अक्सर यह नहीं होता कि हमें कुछ नहीं मिला, बल्कि यह होता है कि हमने पहले से ही तय कर लिया होता है कि हमें क्या और कैसे मिलना चाहिए। जब यह पूर्वनिर्धारित सोच वास्तविकता से मेल नहीं खाती, तो निराशा उत्पन्न होती है। इसलिए, अपेक्षाओं को कम करके वर्तमान को स्वीकार करना ही संतुलित और सुखी जीवन का मूल मंत्र है।

अंततः, जितनी कम अपेक्षाएँ होंगी, उतना ही अधिक संतोष मिलेगा। और जहाँ संतोष है, वहीं स्थायी शांति का वास होता है। अनावश्यक अपेक्षाओं से दूरी बनाकर ही हम एक हल्का, सकारात्मक और सच्चे अर्थों में खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

संतकबीरनगर में गैस सिलिंडरों से भरी DCM दुर्घटनाग्रस्त, चालक की जान बची

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र में सोनी होटल के पास गैस सिलिंडरों से लदी एक डीसीएम सड़क हादसे का शिकार हो गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई, क्योंकि वाहन का चालक केबिन में बुरी तरह फंस गया था।

घटना के दौरान स्थानीय होटल मैनेजर नंदन पांडेय ने साहस का परिचय देते हुए तत्काल राहत कार्य शुरू किया। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद चालक को सुरक्षित बाहर निकाला गया और तुरंत जिला अस्पताल भेजा गया। समय पर मिली मदद से चालक की जान बच गई।

मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने भी बचाव कार्य में सहयोग किया। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक संदीप मीणा ने नंदन पांडेय और पुलिस टीम के प्रयासों की सराहना की।

चिकित्सकों के अनुसार घायल चालक की हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है और उसका उपचार जारी है।
हादसे के कारण कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात प्रभावित रहा, जिसे बाद में सामान्य कर दिया गया। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

नेपाल सड़क हादसे के घायलों से मिले डीएम-एसपी, बेहतर इलाज के दिए निर्देश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। नेपाल में हुए सड़क हादसे में घायल लोगों का हाल-चाल लेने के लिए जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा एवं पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर का संयुक्त रूप से भ्रमण किया। इस दौरान दोनों अधिकारियों ने अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात कर उनका हाल जाना और चिकित्सकों से उपचार की प्रगति के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से वार्ता करते हुए घायलों के समुचित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार को सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने प्राचार्य से सभी आवश्यक दवाएं, जांच एवं चिकित्सकीय सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि घायलों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
प्रशासन द्वारा बेहतर समन्वय और त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक नायब तहसीलदार प्रद्युम्न सिंह एवं फार्मासिस्ट धर्मेंद्र त्रिपाठी की ड्यूटी मेडिकल कॉलेज में लगाई गई है। ये दोनों अधिकारी घायलों और उनके परिजनों को हर संभव सहयोग प्रदान करते हुए प्रशासन और अस्पताल के बीच समन्वय स्थापित कर रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार भर्ती घायलों में से 06 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद स्वस्थ होने पर छुट्टी दे दी गई है, जबकि अन्य घायलों की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। चिकित्सकीय टीम द्वारा सभी मरीजों की नियमित निगरानी की जा रही है।
इस अवसर पर डीएम और एसपी ने घायलों के परिजनों से भी मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और प्रशासन की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। जिलाधिकारी ने आश्वस्त किया कि प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार हर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।