Friday, June 5, 2026
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गैस-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सपा का विरोध, जनता की समस्याओं को लेकर उठी आवाज

भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।

80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

सेल्फी से ज्यादा सेवा

पेड़ लगाना ही नहीं, रखना भी है ध्यान।
जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।।

पाँच जून के दिन सभी, लें ऐसा संकल्प।
सूखे पौधों को मिले, जीवन का फिर विकल्प।।
सेवा का संदेश हो, होता तब कल्याण—
जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।।

रोपे थे जो वर्ष भर, खड़े वहीं लाचार।
पानी बिन मुरझा रहे, कैसे हों साकार।।
पहले उनको सींचिए, फिर करना गुणगान—
जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।।

सेल्फी लेकर क्या मिला, यदि पौधों में टूट।
धरती माँ की गोद से, हरियाली ले लूट।।
कर्मों से पहचान हो, नहीं दिखावा-ज्ञान—
जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।।

छाया, फल और प्राण का, देते जो उपहार।
उनके प्रति भी चाहिए, अपना कुछ उपकार।।
पेड़ों से ही जीवित है, धरती का सम्मान—
जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।।

‘प्रियंका’ यही वृक्ष ही, जीवन का आधार।
इनसे ही खुशहाल है, प्रकृति का संसार।।
पाँच जून पर लीजिए, बस इतना अरमान—
जल देकर जीवन मिले, छेड़ो ये अभियान।।

डॉ. प्रियंका सौरभ

जिले के छात्र ने कोटा में फांसी लगाकर दी जान

संत कबीर नगर/कोटा (राष्ट्र की परम्परा)। राजस्थान के कोटा शहर में एक कोचिंग छात्र द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। जवाहर नगर थाना क्षेत्र के पुराने राजीव गांधी नगर स्थित एक पीजी में रह रहे 17 वर्षीय छात्र का शव कमरे में फंदे से लटका मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।
मृतक की पहचान जनपद संत कबीर नगर निवासी प्रभाशंकर ओझा के पुत्र आर्यन ओझा के रूप में हुई है। वह फरवरी 2026 में कोटा आया था और यहां इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
पुलिस के अनुसार बुधवार देर रात सूचना मिली कि छात्र ने अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए एमबीएस अस्पताल की मोर्च्यूरी में भेज दिया गया।
मामले की पड़ताल कर रहे एएसआई जवाहर लाल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है। पुलिस कमरे की तलाशी लेने के साथ ही आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। मौके से कोई सुसाइड नोट मिलने की जानकारी नहीं है।
घटना की सूचना छात्र के परिजनों को दे दी गई है। परिजनों के कोटा पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव उन्हें सौंपा जाएगा। पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

भविष्य के अधिवक्ताओं को मिला कोर्ट का व्यावहारिक प्रशिक्षण

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष रणधीर सिंह के निर्देशन में जनपद न्यायालय में विधि छात्र-छात्राओं के लिए ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ अन्जय कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में गुरुवार को विभिन्न विधि महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने न्यायालय की कार्यप्रणाली को करीब से समझा तथा बयान और जिरह की प्रक्रिया की महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित इस इंटर्नशिप कार्यक्रम का उद्देश्य विधि छात्रों को विधिक सहायता योजनाओं और कानूनी जागरूकता से जोड़ना है। अन्जय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि विधि के छात्रों के लिए इंटर्नशिप उनके पेशेवर जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पुस्तकीय ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव में बदलने का अवसर प्रदान करती है। इससे छात्रों को न्यायालयीन कार्यवाही को समझने और अपने विधिक कौशल को विकसित करने में सहायता मिलती है।
कार्यक्रम में डिप्टी डिफेंस काउंसिल संजीव कुमार पांडेय, असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल मो. दानिश, प्रज्ञा श्रीवास्तव, मुलायम यादव, राम भवन चौधरी सहित एपीएन कॉलेज बस्ती, पीडी लॉ कॉलेज, खलीलाबाद तथा पं. सूर्यनारायण चतुर्वेदी विधि महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

केंद्र सरकार के 12 वर्षों की उपलब्धियों से रूबरू होगा जनपद, 15 दिवसीय अभियान आज से

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 5 जून से 21 जून 2026 तक जनपद में आयोजित होने वाले समेकित जनकल्याण एवं जनजागरूकता अभियान की तैयारियों एवं कार्ययोजना की समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश की ग्राम्य विकास राज्यमंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम ने की।
बैठक में विधायक खलीलाबाद अंकुर राज तिवारी, विधायक मेहदावल अनिल कुमार त्रिपाठी, विधायक धनघटा गणेश चंद्र चौहान, जिलाधिकारी आलोक कुमार, पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) सत्य प्रकाश तथा मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रभारी मंत्री ने अभियान के तहत निर्धारित कार्यक्रमों की विभागवार तैयारियों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य सरकार द्वारा किए गए ऐतिहासिक विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम जनता तक पहुंचाना तथा विकास में जनभागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी कार्यक्रमों को सेवा, संस्कार, सुशासन और सम्मान की मूल भावना के अनुरूप संचालित करने पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत जनपद के अमृत सरोवरों, तालाबों, सड़कों, नदी और नहर किनारों पर व्यापक वृक्षारोपण किया जाएगा।
8 से 14 जून तक विशेष जनसंपर्क एवं जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनके तहत जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी चिकित्सकों, अधिवक्ताओं, शिक्षकों, उद्यमियों, व्यवसायियों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न वर्गों से संवाद स्थापित करेंगे। 11 से 14 जून तक मीडिया संवाद एवं प्रेस वार्ताओं के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों को साझा किया जाएगा।
14 से 16 जून तक जनकल्याण शिविर एवं स्वास्थ्य मेले आयोजित होंगे, जबकि 16 से 17 जून तक विकसित भारत संकल्प सम्मेलन के माध्यम से प्रबुद्धजन विकासखंडों का भ्रमण कर केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी देंगे।
17 से 20 जून तक विकास प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न विभाग अपनी योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित करेंगे। वहीं 18 और 19 जून को प्राकृतिक खेती कार्यशाला आयोजित कर किसानों को जैविक, प्राकृतिक एवं नकदी फसलों की खेती के प्रति जागरूक किया जाएगा।
21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बृहद योग शिविर का आयोजन होगा। इसके साथ ही प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान के तहत सामाजिक संगठनों, छात्र-छात्राओं और आमजन को प्लास्टिक उपयोग से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया जाएगा।
प्रभारी मंत्री ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि वे निर्धारित समयावधि में अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करते हुए सभी कार्यक्रमों को सफल बनाएं तथा जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें।
जनपद भ्रमण के दौरान प्रभारी मंत्री ने लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन परिसर में वृक्षारोपण भी किया।
जिलाधिकारी आलोक कुमार ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि 15 दिवसीय अभियान की सफलता के लिए पूरी तैयारी के साथ कार्य करें और सभी कार्यक्रमों का गुणवत्तापूर्ण आयोजन सुनिश्चित करें। उन्होंने प्रभारी मंत्री एवं जनप्रतिनिधियों का आभार भी व्यक्त किया।

महिला बंदियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के उपलक्ष्य में जिला कारागार गोरखपुर की महिला बैरक में “महिला बंदियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग” विषय पर विशेष योग प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा तथा कुलपति प्रो. पूनम टंडन के मार्गदर्शन में किया गया।
इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की गतिविधियां “योग फॉर हेल्दी एजिंग” विषय के अंतर्गत आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में महिला बंदियों को योग के माध्यम से स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में योग एवं ध्यान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने की एक समग्र जीवन पद्धति है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन के संदेश में कहा गया कि योग महिला बंदियों में आत्म-निरीक्षण, आत्म-नियंत्रण और आत्मविश्वास की भावना विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के साथ पुनर्वास की प्रक्रिया भी मजबूत होगी।
योग प्रशिक्षकों ने महिला बंदियों को ताड़ासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन, वज्रासन, सुखासन, बालासन, शवासन, पश्चिमोत्तानासन, मन पवनमुक्तासन, अधोमुख श्वानासन, उष्ट्रासन तथा सेतु बंधासन सहित विभिन्न योगासनों का अभ्यास कराया। साथ ही नाड़ी शोधन, अनुलोम-विलोम प्राणायाम तथा ध्यान साधना के माध्यम से तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने के उपाय बताए गए।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण हास्य योग रहा, जिसमें महिला बंदियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके अतिरिक्त महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बटरफ्लाई आसन, अर्ध कटि चक्रासन तथा मरीचि आसन का भी अभ्यास कराया गया।

महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. दिव्या रानी सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि भविष्य में इच्छुक महिला बंदियों को प्रशिक्षित कर “योग साथी” के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई जा रही है।
कार्यक्रम में जेल अधीक्षक डी.के. पांडे, जेलर अरुण कुमार तथा उप-जेलर अनीता श्रीवास्तव सहित कारागार प्रशासन के अधिकारियों ने सहयोग प्रदान किया। महिला बंदियों ने योगाभ्यास के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए इसे नियमित रूप से अपनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रतिदिन योग एवं ध्यान करने, ओम् उच्चारण करने तथा सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। महिला बंदियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि योगाभ्यास से उन्हें मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और नई ऊर्जा का अनुभव हुआ।

बीबीएयू में प्रवेश प्रक्रिया तेज, 65 स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन जारी

विद्यार्थी हित में नई शैक्षणिक एवं अधोसंरचनात्मक योजनाओं की घोषणा

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया को लेकर प्रेस वार्ता आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इस अवसर पर डीन ऑफ एकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, एडमिशन सेल समिति के अध्यक्ष प्रो. अमित कुमार सिंह तथा जनसंपर्क अधिकारी डॉ. रचना गंगवार उपस्थित रहीं।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुखी एवं कौशल आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार नए पाठ्यक्रम और सुविधाएं विकसित कर रहा है। उन्होंने बताया कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य प्रगति पर है और इसके सितंबर तक पूर्ण होने की संभावना है।

उन्होंने अमेठी परिसर में लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से चल रहे विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां आधुनिक कंप्यूटर लैब, लाइव लेक्चर सुविधा, अत्याधुनिक ऑडिटोरियम, छात्रावास विस्तार, विद्युत सब-स्टेशन और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। वहीं लखनऊ परिसर को नेट-जीरो कार्बन कैंपस के रूप में विकसित करने, जैव विविधता संरक्षण, ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग, हर्बल गार्डन विस्तार तथा स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने की योजनाओं पर भी कार्य चल रहा है।
प्रो. अमित कुमार सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में 55 सीयूईटी-पीजी आधारित तथा 10 गैर-सीयूईटी स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है। देशभर के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी आवेदन कर रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों और अभिभावकों से समय पर आवेदन करने तथा विश्वविद्यालय की आधिकारिक प्रवेश प्रक्रिया का पालन करने की अपील की।
विश्वविद्यालय में एम.ए., एम.एससी., इंटीग्रेटेड एम.एससी., एमबीए, एमसीए, एम.एड., एलएलएम, एम.टेक. सहित विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। सीयूईटी-पीजी आधारित पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन 7 जून 2026 तक किए जा सकते हैं, जबकि विलंब शुल्क के साथ 13 जून तक आवेदन स्वीकार किए जाएंगे। गैर-सीयूईटी पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन प्रक्रिया 24 जून तक तथा विलंब शुल्क के साथ 30 जून 2026 तक जारी रहेगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार सामान्य, ओबीसी एवं ईडब्ल्यूएस वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क 500 रुपये तथा एससी, एसटी एवं दिव्यांगजन अभ्यर्थियों के लिए 300 रुपये निर्धारित किया गया है। निर्धारित तिथि के बाद आवेदन करने पर सभी श्रेणियों के लिए 1000 रुपये विलंब शुल्क देय होगा।

जिलाधिकारी ने शिक्षक को किया सम्मानित

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l विगत सप्ताह विकास कार्यो के लोकार्पण व शिलान्यास कार्यक्रम मे देवरिया पधारे मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश के जनसभा का मुख्य मंच से पंकज शुक्ल ने कुशलता पूर्वक संचालन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया। तदुपारान्त
जिला प्रशासन के तरफ से जिलाधिकारी देवरिया मधुसूदन हुल्गी तथा मुख्य विकास अधिकारी देवरिया राजेश कुमार सिह ने पंकज को जिलाधिकारी कार्यालय से निर्गत प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
ध्यातव्य है कि 22-05-2026 को प्रदेश के मुख्यमंत्री सेवा, सुरक्षा और सुशासन के साथ-साथ विकास कार्यो की बडी सौगात देने के लिए भीमपुर-देवरिया मे पधारे थे।
पंकज शुक्ल मूल रूप से देवरिया जिले के बरहज तहसील के अन्तर्गत स्थित पुरैना शुक्ल गाँव के निवासी है और प्राथमिक विद्यालय लबकनी गंगा, विकास खण्ड-बरहज, देवरिया में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं।इनकी सैकड़ों रचनाए देश विदेश की विविध पत्र पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशित होती रहती हैं।इन्हें भारत के विविध साहित्यिक व शैक्षणिक मंचों से सम्मानित किया जा चुका है।
जिला प्रशासन द्वारा सम्मानित होने पर पंकज शुक्ल को समाज सेवी राजेश मिश्र, ईओ संजय मिश्रा,जिला कार्यकारी अधिकारी विजय मिश्रा,जिला कार्यक्रम अधिकारी आदिश मिश्रा,डीसी मनरेगा आलोक पाण्डेय,प्रोफेसर ओम प्रकाश शुक्ल,बीईओ सत्यप्रकाश कुशवाहा,सूरज कुमार,देवमुनी बर्मा,गोपाल मिश्र,विनयशील मिश्र, डायट मेन्टर अनिल तिवारी,एसआरजी शीला चतुर्वेदी,उमाशंकर द्विवेदी,वरिष्ठ कवयित्री डिम्पल तिवारी, माण्डवी सिंह,मोहिनी द्विवेदी,प्रिया अवधेश,दुर्गावती, अनिल निषाद,अजय सिह, आदि ने बधाई दी।

डीडीयूजीयू में त्वरित एवं विस्तारित डिग्री कार्यक्रम लागू करने की पहल, समिति गठित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नवीन विनियमों के अनुरूप विद्यार्थियों को अधिक लचीली एवं विद्यार्थी-केंद्रित उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने यूजीसी (स्नातक एवं स्नातकोत्तर उपाधि प्रदान करने हेतु अनुदेशन के न्यूनतम मानदण्ड) विनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक समिति का गठन किया है। यह समिति विश्वविद्यालय में त्वरित डिग्री कार्यक्रम (एडीपी) तथा विस्तारित डिग्री कार्यक्रम (ईडीपी) लागू करने की रूपरेखा तैयार करेगी।
यूजीसी विनियम, 2025 के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता, रुचि और परिस्थितियों के अनुरूप अध्ययन अवधि में लचीलापन प्रदान कर सकते हैं। इसके तहत मेधावी विद्यार्थी निर्धारित पाठ्यक्रम एवं क्रेडिट आवश्यकताओं को पूरा करते हुए कम समय में अपनी डिग्री प्राप्त कर सकेंगे, जबकि अन्य विद्यार्थी आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त समय लेकर उसी डिग्री को पूर्ण कर सकेंगे।
विनियमों के अनुसार एडीपी और ईडीपी केवल स्नातक कार्यक्रमों पर लागू होंगे। इनमें पाठ्यक्रम, शिक्षण की गुणवत्ता, क्रेडिट, परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली नियमित कार्यक्रमों के समान रहेगी, केवल अध्ययन अवधि में परिवर्तन होगा। तीन वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को विद्यार्थी पांच सेमेस्टर में तथा चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम को छह अथवा सात सेमेस्टर में पूरा कर सकेंगे। वहीं विस्तारित डिग्री कार्यक्रम के अंतर्गत अध्ययन अवधि को अधिकतम दो अतिरिक्त सेमेस्टर तक बढ़ाया जा सकेगा।
यूजीसी ने यह व्यवस्था भी की है कि विश्वविद्यालय प्रथम अथवा द्वितीय सेमेस्टर के अंत में विद्यार्थियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर एडीपी एवं ईडीपी के लिए उनका चयन कर सकते हैं। त्वरित डिग्री कार्यक्रम के लिए कुल स्वीकृत प्रवेश क्षमता के 10 प्रतिशत तक विद्यार्थियों को अवसर प्रदान किया जा सकेगा।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को उनकी सीखने की क्षमता और व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देगी। इससे शिक्षा प्रणाली अधिक लचीली, समावेशी और परिणामोन्मुख बनेगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नवाचार, बहुविषयक शिक्षा, अकादमिक लचीलापन तथा छात्र-केंद्रित शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
समिति यूजीसी विनियमों में वर्णित प्रावधानों, क्रेडिट संरचना, पात्रता मानदण्डों तथा कार्यान्वयन प्रक्रिया का अध्ययन कर अपनी संस्तुतियां प्रस्तुत करेगी। इसके बाद विश्वविद्यालय की वैधानिक समितियों की स्वीकृति प्राप्त कर एडीपी एवं ईडीपी कार्यक्रमों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इससे डीडीयूजीयू प्रदेश के उन अग्रणी विश्वविद्यालयों में शामिल होगा जो विद्यार्थियों को अपनी गति से उच्च शिक्षा पूर्ण करने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।

सीड ड्रिल तकनीक से आसान हुई धान की खेती, किसानों को समय और लागत में मिल रही बड़ी राहत

बेहन, रोपाई और मजदूरों की समस्या से छुटकारा, आधुनिक कृषि तकनीक की ओर बढ़ रहे किसान

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है और इसका सकारात्मक प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है। धान की खेती में किसानों को बेहन तैयार करने, रोपाई कराने और मजदूरों की व्यवस्था करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब सीड ड्रिल तकनीक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभरी है।

सीड ड्रिल मशीन की मदद से किसान सीधे खेत में धान की बुआई कर रहे हैं। इससे न केवल खेती की लागत कम हो रही है, बल्कि समय और श्रम की भी उल्लेखनीय बचत हो रही है।

पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक सुविधाजनक

किसानों का कहना है कि पारंपरिक पद्धति से धान की खेती में पहले बेहन तैयार करने में कई सप्ताह लग जाते थे। इसके बाद रोपाई के लिए मजदूरों की व्यवस्था और बढ़ती मजदूरी दरों का सामना करना पड़ता था, जिससे खेती का खर्च लगातार बढ़ रहा था।

सीड ड्रिल मशीन के उपयोग से अब इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल रही है। मशीन द्वारा बीजों की बुआई निश्चित दूरी और उचित गहराई पर की जाती है, जिससे पौधों का विकास बेहतर होता है और फसल की गुणवत्ता में भी सुधार की संभावना बढ़ जाती है।

कम बीज, कम लागत और बेहतर उत्पादन

विशेषज्ञों के अनुसार सीड ड्रिल तकनीक से बीज की खपत कम होती है और खेत में समान रूप से बुआई होने से उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना रहती है। मशीन की सहायता से कम समय में बड़े क्षेत्र में बुआई संभव हो जाती है, जिससे मौसम की अनिश्चितताओं से होने वाले नुकसान का जोखिम भी कम हो जाता है।

कई किसानों ने इस तकनीक को अपनाकर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए हैं। उनका कहना है कि जहां पहले एक एकड़ खेत की रोपाई के लिए कई मजदूरों की आवश्यकता होती थी, वहीं अब सीड ड्रिल मशीन कुछ घंटों में ही बुआई का कार्य पूरा कर देती है।

कृषि विभाग भी कर रहा प्रोत्साहित

कृषि विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक खेती की तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग समय की मांग है।

सीड ड्रिल मशीन को धान की खेती के लिए एक प्रभावी और किफायती विकल्प बताया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन और कम लागत का लाभ मिल रहा है।

गांवों में बढ़ रही तकनीक की लोकप्रियता

ग्रामीण क्षेत्रों में सीड ड्रिल तकनीक को लेकर किसानों में उत्साह देखा जा रहा है। खेतों से लेकर गांव की चौपालों तक इस आधुनिक कृषि यंत्र की चर्चा हो रही है। किसानों का मानना है कि यदि इसी तरह आधुनिक उपकरणों का उपयोग बढ़ता रहा तो खेती अधिक सरल, कम खर्चीली और लाभदायक बन सकेगी।

Muzaffarpur Hospital Fire: प्रसाद अस्पताल आग हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 5, सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान

मुजफ्फरपुर (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड में मृतकों की संख्या बढ़कर 5 हो गई है। अस्पताल के आईसीयू में लगी आग के बाद कई मरीज धुएं की चपेट में आ गए थे, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ।

घटना के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची तथा घायलों को तत्काल अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया। हादसे को लेकर पूरे राज्य में शोक की लहर है।

सरकार ने जताया दुख, मुआवजे का ऐलान

बिहार सरकार की ओर से हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री की ओर से मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि देने का ऐलान किया गया है।

सरकार ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए अधिकारियों को प्रभावित परिवारों की हर संभव मदद सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

आईसीयू में लगी थी भीषण आग

जानकारी के अनुसार, अस्पताल के आईसीयू में तड़के आग लग गई थी। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को हादसे की संभावित वजह माना जा रहा है। आग लगने के बाद पूरे आईसीयू में धुआं फैल गया, जिससे मरीजों की हालत बिगड़ गई।

दमकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया और कई मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि पांच मरीजों की जान नहीं बचाई जा सकी।

जांच के आदेश

प्रशासन ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। अस्पताल में मौजूद अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, विद्युत उपकरणों और सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह हादसा एक बार फिर अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

महराजगंज में जर्जर हुआ शिकारपुर पुल, गहरे गड्ढों से हर दिन हादसे का खतरा

नारायणी शाखा नहर पर बने पुल में गहरे गड्ढों से बढ़ा खतरा, मरम्मत न होने से लोगों में आक्रोश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के शिकारपुर चौराहे के समीप नारायणी शाखा नहर पर बना पुल इन दिनों गंभीर बदहाली का शिकार है। पुल की सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी है और बीच में बने गहरे गड्ढे राहगीरों एवं वाहन चालकों के लिए खतरे का कारण बन गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

सिंदुरिया-शिकारपुर मार्ग पर स्थित यह पुल घुघली क्षेत्र सहित दर्जनों गांवों को राष्ट्रीय राजमार्ग-730 से जोड़ता है। यही वजह है कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में दोपहिया और चारपहिया वाहन, स्कूली छात्र-छात्राएं, किसान, व्यापारी और नौकरीपेशा लोग इस मार्ग से आवागमन करते हैं।

गहरे गड्ढों से बढ़ा दुर्घटना का खतरा

पुल के मध्य भाग में बने गहरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर रात के समय और बारिश के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। बरसात में गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार कई बाइक और साइकिल सवार गड्ढों में फंसकर गिर चुके हैं। हालांकि अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है, लेकिन हालात लगातार चिंताजनक बने हुए हैं।

वर्षों से मरम्मत का इंतजार

जानकारी के अनुसार नारायणी (गंडक) नदी से निकली त्रिवेणी नहर प्रणाली का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1904 से 1909 के बीच कराया गया था। यह नहर पूर्वांचल के कई जिलों की सिंचाई व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। समय के साथ नहरों का विस्तार और आधुनिकीकरण हुआ, लेकिन उनसे जुड़े कई पुलों की स्थिति जर्जर होती चली गई।

शिकारपुर का यह पुल भी लंबे समय से मरम्मत और रखरखाव के अभाव का सामना कर रहा है। क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन को इसकी खराब स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

आर्थिक और सामाजिक गतिविधियां भी प्रभावित

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यह मार्ग बाजार, स्कूल, अस्पताल और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता है। पुल की जर्जर स्थिति न केवल लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी है, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों पर भी असर डाल रही है।

मानसून में और बढ़ी चिंता

मानसून की शुरुआत के साथ पुल की समस्या और गंभीर हो गई है। गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों को रास्ते का सही अनुमान नहीं लग पाता। वहीं भारी वाहनों के गुजरने से पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिससे सड़क और अधिक टूटती जा रही है।

स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि जल्द मरम्मत नहीं कराई गई तो पुल की संरचना को भी नुकसान पहुंच सकता है।

प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

क्षेत्रीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से पुल की तकनीकी जांच कराने, क्षतिग्रस्त हिस्सों की तत्काल मरम्मत कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर पुल के सुदृढ़ीकरण का कार्य शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल एक पुल की समस्या नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

Kota Student Suicide: कोटा में यूपी के छात्र की मौत, कमरे में फंदे से लटका मिला शव

कोटा (राष्ट्र की परम्परा)। राजस्थान के कोटा शहर में एक बार फिर कोचिंग छात्र की मौत का मामला सामने आया है। जवाहर नगर थाना क्षेत्र के पुराना राजीव गांधी नगर इलाके में रह रहे 17 वर्षीय छात्र का शव उसके कमरे में फंदे से लटका मिला। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान आर्यन ओझा पुत्र कृपाशंकर, निवासी उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है। वह कोटा में रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था और किराए के कमरे में रहता था।

कमरे में फंदे से लटका मिला छात्र

घटना की सूचना मिलने पर जवाहर नगर थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। छात्र को तत्काल उपचार के लिए एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए एमबीएस अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया। घटना की जानकारी परिजनों को भी दे दी गई है।

आत्महत्या के कारणों की जांच जारी

प्रारंभिक जांच में छात्र के कमरे से कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। पुलिस कमरे की तलाशी लेने के साथ-साथ अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है और छात्र के इस कदम के कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

कोटा में छात्रों की मौत के मामलों पर फिर उठे सवाल

शिक्षा नगरी कोटा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान छात्रों की मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं। इस ताजा घटना के बाद एक बार फिर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव, प्रतिस्पर्धा और कोचिंग व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

UP Panchayat Election 2026: पंचायत चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार और चुनाव आयोग से मांगी चुनाव की तारीख

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि पंचायत चुनाव कब कराए जाएंगे और इसकी संभावित तारीख क्या है।

जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से कई सवाल किए। कोर्ट ने सरकार को 10 जुलाई तक पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC Commission) की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई भी 10 जुलाई को होगी।

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने पर कोर्ट के सवाल

याचिकाकर्ता ओमप्रकाश प्रजापति ने अदालत में दलील दी कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम के अनुसार ग्राम प्रधान का कार्यकाल शपथ ग्रहण की तिथि से अधिकतम पांच वर्ष का होता है। ऐसे में समय पर चुनाव न कराकर मौजूदा प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करना कानून की भावना के विपरीत है और उनके कार्यकाल को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ाने जैसा है।

याचिका में यह भी कहा गया कि पूर्व में जब पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाते थे, तब ग्राम पंचायतों के संचालन के लिए एडीओ पंचायत या अन्य सरकारी अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त किया जाता था। इसलिए इस बार भी यही व्यवस्था लागू होनी चाहिए थी।

OBC आयोग की रिपोर्ट के बाद होंगे चुनाव

सरकार की ओर से बताया गया कि पंचायत चुनाव में आरक्षण निर्धारण के लिए समर्थित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया है। आयोग अपनी रिपोर्ट निर्धारित समय में सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद आरक्षण प्रक्रिया पूरी कर चुनाव कराए जाएंगे।

हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क पर असंतोष जताते हुए आयोग की रिपोर्ट और चुनाव की संभावित समय-सीमा दोनों के बारे में स्पष्ट जानकारी मांगी है।

25 मई को जारी हुआ था आदेश

राज्य सरकार ने 25 मई को आदेश जारी कर पंचायत चुनाव संपन्न होने अथवा अगले छह माह तक मौजूदा ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त कर दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दाखिल की गई है।

जानकारी के अनुसार पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 10 जून को होना है, जबकि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो चुका है। इसी कारण प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया था।

ओम प्रकाश राजभर ने सपा पर साधा निशाना

प्रदेश के पंचायती राज मंत्री Om Prakash Rajbhar ने इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा विकास कार्यों में बाधा डालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित न हों, इसलिए प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया है।

राजभर ने आरोप लगाया कि विपक्ष इस फैसले को कानूनी विवादों में फंसाकर पंचायतों के विकास कार्यों को प्रभावित करना चाहता है।

Muzaffarpur Hospital Fire: मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल के ICU में भीषण आग, 3 मरीजों की मौत, कई गंभीर

मुजफ्फरपुर (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार के मुजफ्फरपुर शहर में गुरुवार तड़के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। हादसे में कम से कम 3 मरीजों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य मरीजों को गंभीर हालत में दूसरे अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 3 बजे अस्पताल के आईसीयू में अचानक आग लग गई। आग लगने के बाद पूरे आईसीयू में धुआं भर गया, जिससे वहां भर्ती मरीजों की हालत बिगड़ गई। घटना के समय आईसीयू में कुल 15 बेड मौजूद थे और सभी पर मरीज भर्ती थे।

धुएं की चपेट में आने से हुई मौतें

अग्निशमन विभाग के अनुसार, आग के बाद आईसीयू में तेजी से धुआं फैल गया। रेस्क्यू अभियान के दौरान 15 मरीजों को बाहर निकाला गया, जिनमें से 3 मरीजों की मौत हो गई। शेष मरीजों को उपचार के लिए अन्य अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है।

शॉर्ट सर्किट की आशंका

प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक आईसीयू में ऑक्सीजन मशीन, हार्ट मॉनिटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे हुए थे। संभावना जताई जा रही है कि किसी उपकरण में तकनीकी खराबी के कारण आग लगी हो।

6 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने पाया आग पर काबू

फायर ऑफिसर राम निवास पांडे ने बताया कि सुबह करीब 3:55 बजे घटना की सूचना मिलने के बाद तत्काल छह फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाने के साथ-साथ मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान चलाया।

उन्होंने बताया कि 12 मरीजों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 3 मरीजों की जान नहीं बचाई जा सकी।

जांच में जुटा प्रशासन

जिलाधिकारी ने बताया कि आईसीयू में 13 नियमित बेड और दो अतिरिक्त बेड लगाए गए थे। सभी मरीज गंभीर स्थिति में थे, इसलिए उन्हें दूसरे अस्पतालों के आईसीयू में शिफ्ट किया गया है। फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है।

अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल

घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। मौके पर अस्पताल प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला। प्रशासन अब पूरे मामले की जांच कर रहा है और आग लगने के कारणों का पता लगाने में जुटा है।

अग्निकांडों से सबक: कब जागेगा सुरक्षा तंत्र और जवाबदेही का सिस्टम?

अग्निकांडों से सीख: यह केवल एक व्यक्ति या संस्था की नहीं बल्कि पूरे तंत्र की विफलता
जवाबदेही, संस्थागत विफलताएँ, भ्रष्टाचार और भविष्य की सुरक्षा का वैश्विक परिप्रेक्ष्य

✍️ एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)


अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं होते, बल्कि वे उस प्रशासनिक, नियामक और सामाजिक व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा होते हैं जिसे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। जब किसी होटल, अस्पताल, मॉल, विद्यालय, औद्योगिक इकाई या व्यावसायिक भवन में आग लगने से बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु होती है, तो यह केवल आग की लपटों का परिणाम नहीं होता, बल्कि वर्षों से जमा होती आ रही लापरवाही, नियमों की अनदेखी, कमजोर निगरानी और संस्थागत विफलताओं का दुष्परिणाम भी होता है।
3 जून 2026 को दिल्ली के मालवीय नगर क्षेत्र में स्थित एक होटल और उससे जुड़े प्रतिष्ठान में लगी भीषण आग ने एक बार फिर देश की शहरी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए। प्रारंभिक रिपोर्टों में सामने आए तथ्यों ने यह संकेत दिया कि भवन संचालन और सुरक्षा मानकों के बीच गंभीर विसंगतियाँ मौजूद थीं। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी आपदा को केवल दुर्घटना मानकर आगे बढ़ जाना पर्याप्त नहीं है; उसके पीछे मौजूद व्यवस्थागत कमियों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
अग्निकांड: दुर्घटना नहीं, प्रणालीगत विफलता का संकेत
विश्वभर के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश बड़े अग्निकांडों में मौतें आग से कम और सुरक्षा तंत्र की विफलताओं से अधिक होती हैं। इनमें प्रमुख रूप से आपातकालीन निकास की कमी, अग्निशमन उपकरणों का निष्क्रिय होना, सुरक्षा मानकों की अनदेखी, निरीक्षण में लापरवाही तथा आपदा प्रतिक्रिया में देरी शामिल हैं।
किसी भी अग्निकांड की जांच केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि आग कैसे लगी, बल्कि यह भी समझना आवश्यक है कि ऐसी स्थिति बनने ही क्यों दी गई।
भारत के प्रमुख अग्निकांड और समान पैटर्न
भारत में हुई अनेक बड़ी त्रासदियों का अध्ययन करने पर एक समान पैटर्न सामने आता है।
उपहार सिनेमा अग्निकांड (1997)
कुम्बकोणम स्कूल अग्निकांड (2004)
अमरी अस्पताल अग्निकांड
अनाज मंडी अग्निकांड (2019)
मुंडका अग्निकांड
इन सभी घटनाओं में नियमों के उल्लंघन, अपर्याप्त निरीक्षण, अवैध निर्माण, कमजोर निकासी व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही जैसी समान समस्याएँ सामने आईं।
फायर विभाग की भूमिका और जिम्मेदारी
अग्निशमन विभाग किसी भी आपदा में अंतिम रक्षा पंक्ति होता है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण उसका निवारक दायित्व है। नियमित निरीक्षण, वैध अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र, स्प्रिंकलर सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर और आपातकालीन निकास की कार्यशीलता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
यदि किसी भवन में समय के साथ अवैध विस्तार होता है और उसे वर्षों तक नहीं रोका जाता, तो यह केवल भवन मालिक की नहीं बल्कि निरीक्षण व्यवस्था की भी विफलता मानी जाएगी।
पुलिस और प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता
पुलिस की भूमिका केवल दुर्घटना के बाद जांच तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जोखिम वाले भवनों की पहचान, अवैध गतिविधियों की निगरानी और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वित कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है।
विकसित देशों में पुलिस, फायर विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच डेटा साझाकरण की प्रभावी व्यवस्था होती है, जिससे संभावित खतरों की पहचान पहले ही कर ली जाती है। भारत में इस दिशा में अभी काफी सुधार की आवश्यकता है।
आपदा प्रबंधन की वास्तविक जिम्मेदारी
आपदा प्रबंधन का अर्थ केवल राहत और बचाव कार्य नहीं है। इसका मूल उद्देश्य जोखिम को कम करना है।
नियमित मॉक ड्रिल, कर्मचारियों का प्रशिक्षण, जन-जागरूकता अभियान और निकासी योजनाओं का परीक्षण ऐसे उपाय हैं जो बड़ी त्रासदियों को रोक सकते हैं। दुर्भाग्यवश अनेक स्थानों पर ये गतिविधियाँ केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह जाती हैं।
नगर निकायों की जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण
भवन निर्माण अनुमति, व्यापार लाइसेंस, उपयोग परिवर्तन और सुरक्षा अनुपालन की प्राथमिक जिम्मेदारी नगर निकायों की होती है।
यदि रिकॉर्ड में दर्ज भवन की स्थिति और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर हो, तो यह स्पष्ट रूप से निगरानी एवं प्रवर्तन तंत्र की विफलता का संकेत है। अवैध मंजिलें, बंद निकास मार्ग, खराब विद्युत व्यवस्था और निष्क्रिय सुरक्षा उपकरण ऐसी ही विफलताओं के उदाहरण हैं।
भ्रष्टाचार: सार्वजनिक सुरक्षा का सबसे बड़ा शत्रु
जब सुरक्षा प्रमाणपत्र प्रभाव, दबाव या भ्रष्टाचार के आधार पर जारी किए जाने लगते हैं, तब भविष्य की त्रासदियों की नींव रखी जाती है।
भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं है। यह सीधे-सीधे मानव जीवन को जोखिम में डालने वाला अपराध है। निरीक्षण की औपचारिकता, अवैध निर्माणों की अनदेखी और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई न होना इसी समस्या की जड़ है।
शहरीकरण और बढ़ता सुरक्षा संकट
तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने नई चुनौतियाँ पैदा की हैं। सीमित भूमि और बढ़ती व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के कारण भवनों का अधिकतम उपयोग करने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
अतिरिक्त कमरे, अवैध मंजिलें और सुरक्षा मानकों की अनदेखी धीरे-धीरे बड़े जोखिमों को जन्म देती हैं। इसलिए शहरी विकास और अग्नि सुरक्षा को एकीकृत दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है।
तकनीक बन सकती है बड़ा समाधान
स्मार्ट सेंसर, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जोखिम विश्लेषण, डिजिटल भवन रजिस्टर और स्वचालित अलार्म प्रणाली भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि तकनीक तभी प्रभावी होगी जब उसके साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाए।
नागरिकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण
सुरक्षा केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। नागरिकों को भी सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक होना होगा।
यदि लोग असुरक्षित भवनों, होटलों और प्रतिष्ठानों के विरुद्ध शिकायत करने और सुरक्षा संबंधी जानकारी मांगने की संस्कृति विकसित करें, तो व्यवस्था पर सुधार का दबाव स्वतः बनेगा।
वैश्विक अनुभव और भारत के लिए सबक
दुनिया के अनेक देशों ने बड़ी त्रासदियों के बाद कठोर सुधार लागू किए हैं। डिजिटल निरीक्षण प्रणाली, सार्वजनिक सुरक्षा रेटिंग, ऑनलाइन रिकॉर्ड, जीपीएस आधारित निरीक्षण और गंभीर उल्लंघन पर तत्काल सीलिंग जैसी व्यवस्थाओं ने जोखिम कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत भी ऐसी प्रणालियों को व्यापक स्तर पर लागू करके सार्वजनिक सुरक्षा को अधिक मजबूत बना सकता है।
निष्कर्ष: जवाबदेही तय किए बिना नहीं रुकेगी त्रासदियाँ
किसी भी अग्निकांड को केवल एक दुर्घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यदि भवन में क्षमता से अधिक लोग मौजूद थे, सुरक्षा उपकरण निष्क्रिय थे, निरीक्षण प्रभावी नहीं थे, भ्रष्टाचार ने नियमों को कमजोर किया, बचाव कार्य में देरी हुई और जवाबदेही तय नहीं हुई, तो यह केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं बल्कि पूरे तंत्र की विफलता है।
दुनिया के किसी भी शहर में सुरक्षा का मूल सिद्धांत एक ही है—आपदा के बाद राहत से अधिक महत्वपूर्ण है आपदा से पहले रोकथाम।
जब तक पारदर्शिता, नियमित निरीक्षण, शून्य-सहिष्णुता वाली भ्रष्टाचार विरोधी नीति, तकनीकी आधुनिकीकरण, संस्थागत समन्वय और कठोर जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक ऐसी त्रासदियाँ बार-बार मानव जीवन की भारी कीमत वसूलती रहेंगी।
इसीलिए हर अग्निकांड को एक चेतावनी मानकर व्यापक और स्थायी सुधार करना ही उन लोगों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने ऐसी दुर्घटनाओं में अपने प्राण गंवाए हैं।
✍️ कलम से : एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)