Sunday, April 5, 2026
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एफसीआरए 2026: राष्ट्रीय सुरक्षा की ढाल या लोकतांत्रिक स्वतंत्रता पर प्रहार?

फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल 2026: संप्रभुता, सिविल सोसाइटी और लोकतंत्र के बीच संतुलन का संघर्ष

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत में विदेशी धन के प्रवाह और उसके उपयोग को नियंत्रित करने वाला कानूनफॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) लंबे समय से राजनीतिक,सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय बहस का केंद्र रहा है। वर्ष 2026 में प्रस्तावित फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल 2026 ने इस बहस को और तीखा बना दिया है। एक ओर सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और संप्रभुता की रक्षा के लिए मास्टरस्ट्रोक बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष और सिविल सोसाइटी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार मान रहे हैं।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यह केवल एक कानूनी संशोधन नहीं,बल्कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे,राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और वैश्विक संबंधों को प्रभावित करने वाला व्यापक मुद्दा बन गया है।भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण लोकतंत्र में गैर- सरकारी संगठन (एनजीओ),ट्रस्ट और सिविल सोसाइटी संस्थाएं सामाजिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, मानवाधिकार और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इन संगठनों को अक्सर विदेशी स्रोतों से आर्थिक सहायता प्राप्त होती है, जिससे वे अपने कार्यक्रमों और अभियानों को प्रभावी ढंग से संचालित कर सकें। इसी संदर्भ में भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल 2026 (एफसीआरए 2026) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विवादास्पद विधायी पहल के रूप में उभरा है। इस बिल का घोषित उद्देश्य विदेशी फंडिंग को नियंत्रित कर पारदर्शिता बढ़ाना और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है, लेकिन इसके प्रावधानों और संभावित प्रभावों को लेकर विपक्ष और सिविल सोसाइटी में व्यापक असहमति देखी जा रही है। एफसीआरए कानून का मूल उद्देश्य विदेशी धन के प्रवाह को विनियमित करना है ताकि इसका उपयोग भारत की संप्रभुता,अखंडता और सुरक्षा के खिलाफ न हो।यह कानून पहली बार 1976 में लागू किया गया था और बाद में 2010 में इसे व्यापक रूप से संशोधित किया गया। 2020 में भी इसमें कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए थे, जिनमें प्रशासनिक खर्च की सीमा, सब-ग्रांटिंग पर रोक और आधार आधारित पहचान जैसे प्रावधान शामिल थे। 2026 का प्रस्तावित संशोधन इसी श्रृंखला का अगला चरण माना जा रहा है, जिसमें सरकार और अधिक सख्ती लाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।सरकार का तर्क है कि पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि कुछ एनजीओ विदेशी फंडिंग का उपयोग ऐसे कार्यों में कर रहे हैं जो न केवल देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं,बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी प्रभावित करते हैं। उदाहरण के तौर पर, सरकार का दावा है कि विदेशी धन का उपयोग अवैध धर्मांतरण, अलगाववादी गतिविधियों और नीतिगत हस्तक्षेप के लिए किया गया है। इसलिए,एफसीआरए 2026 का मुख्य उद्देश्य इन खतरों को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी सहायता का उपयोग केवल वैध और पारदर्शी उद्देश्यों के लिए ही हो।सरकार के अनुसार, यह बिल डीप स्टेट जैसी अवधारणाओं को खत्म करने की दिशा में एक कदम है जहाँ गैर-सरकारी संस्थाएँ विदेशी प्रभाव के जरिए नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में, यह तर्क दिया जा रहा है कि विदेशी फंडिंग का उपयोग कभी-कभी सामाजिक अशांति,विरोध आंदोलनों या राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने के लिए किया जा सकता है। इसलिए कड़े नियंत्रण जरूरी हैं।
साथियों बात अगर हम इस बिल के प्रमुख प्रावधानों को समझने की करें तो इसमें विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए कड़े पंजीकरण और निगरानी तंत्र को लागू करना शामिल है।सरकार ने यह भी प्रस्तावित किया है कि यदि किसी एनजीओ का लाइसेंस रद्द हो जाता है या वह स्वयं सरेंडर करता है,तो उसके द्वारा विदेशी फंड से निर्मित संपत्तियों को सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण के अधीन ले लिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी संपत्तियां निजी लाभ या संदिग्ध गतिविधियों के लिए उपयोग न हों, बल्कि उन्हें सार्वजनिक हित में उपयोग किया जा सके।इसके अतिरिक्त, बिल में यह भी प्रावधान किया गया है कि विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठन नीतिगत मामलों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप नहीं कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि लोकतंत्र में नीति निर्माण का अधिकार केवल निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास होना चाहिए और बाहरी वित्तपोषण से प्रभावित संस्थाओं को इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।हालांकि, इन प्रावधानों को लेकर विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों ने गंभीर आपत्तियां जताई हैं। उनका आरोप है कि यह बिल सरकार को अत्यधिक शक्तियां प्रदान करता है, जिससे वह असहमति की आवाजों को दबा सकती है। विपक्ष का कहना है कि नीतिगत हस्तक्षेप की परिभाषा बहुत व्यापक और अस्पष्ट है, जिससे सरकार किसी भी संगठन को मनमाने ढंग से निशाना बना सकती है। विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों और मानवाधिकार संगठनों को लेकर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि वे इस कानून के तहत सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
साथियों बात अगर हम इस बिल के संशोधन पर विपक्ष वह समाज के तर्क को समझने की करें तो पूरे विपक्ष ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया है।उनका कहना है कि यह कानून सरकार को अत्यधिक शक्तियाँ देता है,जिससे वह असहमति की आवाज़ों को दबा सकती है।एनजीओ,मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा सकता है।विपक्ष का यह भी आरोप है कि राष्ट्रीय हित जैसी अस्पष्ट परिभाषा का दुरुपयोग कर सरकार आलोचनात्मक संगठनों को बंद कर सकती है।इसके अलावा, आधार अनिवार्यता और निगरानी प्रणाली को निजता के अधिकार के खिलाफ बताया जा रहा है।लोकसभा और राज्यसभा में इस बिल को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। विपक्षी सांसदों ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला बताते हुए नारेबाजी की और वॉकआउट किया।संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संगठन बनाने के अधिकार पर यह बिल प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। यदि किसी संगठन को केवल इस आधार पर प्रतिबंधित किया जाता है कि वह सरकारी नीतियों की आलोचना कर रहा है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत होगा। इस संदर्भ में कई विशेषज्ञों ने यह सवाल उठाया है कि क्या सरकार पारदर्शिता के नाम पर सिविल सोसाइटी की स्वतंत्रता को सीमित कर रही है।केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में इस बिल को लेकर विशेष रूप से तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। केरल में, जहां शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एनजीओ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इस बिल को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक बहस छिड़ गई है। राज्य सरकार और विपक्षी दलों का कहना है कि यह कानून राज्य के विकास कार्यों को प्रभावित कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बाधित कर सकता है।संसद में इस बिल को लेकर जो गतिरोध उत्पन्न हुआ, वह केवल राजनीतिक असहमति का परिणाम नहीं था, बल्कि यह गहरे वैचारिक मतभेदों को भी दर्शाता है। विपक्ष ने इस बिल को संसदीय समिति के पास भेजने की मांग की, ताकि इसके प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा और समीक्षा की जा सके। उनका मानना था कि इतने महत्वपूर्ण और व्यापक प्रभाव वाले कानून को जल्दबाजी में पारित करना उचित नहीं होगा।सरकार हालांकि इस बिल को राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए आवश्यक बताते हुए इसे शीघ्र पारित करने के पक्ष में थी। लेकिन विपक्ष के विरोध, संसद में हंगामे और सहमति के अभाव के कारण इसे स्थगित कर दिया गया। यह स्थगन इस बात का संकेत है कि सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर अभी भी सटीक रूप से सहमति नहीं बन पाई है।
साथियों बात अगर हम इस संशोधन बिल से सिविल सोसाइटी पर प्रभाव: नियंत्रण या सुधार? इसको समझने की करें तोभारत में सिविल सोसाइटी संगठनों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है चाहे वह शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण या मानवाधिकार का क्षेत्र हो।इस बिल के बाद, छोटे और मध्यम एनजीओ के लिए विदेशी फंड प्राप्त करना कठिन हो सकता है। इससे उनकी गतिविधियाँ सीमित हो सकती हैं।हालांकि, सरकार का तर्क है कि इससे केवल फर्जी या संदिग्ध संगठनों पर असर पड़ेगा, जबकि वास्तविक काम करने वाले संगठनों को कोई समस्या नहीं होगी।यह बहस इस मूल प्रश्न पर आकर टिकती है—क्या नियंत्रण पारदर्शिता लाता है या स्वतंत्रता को सीमित करता है?
साथियों बात अगर हम इस बिल को अंतरराष्ट्रीय परिपेक्ष में समझने की करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तरपर भी इस बिल को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।कई वैश्विक मानवाधिकार संगठनों और विदेशी सरकारों ने चिंता व्यक्त की है कि भारत में सिविल सोसाइटी की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया जा रहा है। उनका कहना है कि ऐसे कानून लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा है कि यह देश का आंतरिक मामला है और हर संप्रभु राष्ट्र को अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा करने का अधिकार है।इस पूरे परिदृश्य में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या पारदर्शिता और सुरक्षा के नाम पर सख्ती जरूरी है, या फिर इससे लोकतांत्रिक स्वतंत्रता पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें न केवल विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोका जाए, बल्कि सिविल सोसाइटी की भूमिका और स्वतंत्रता को भी संरक्षित किया जाए।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि एफसीआरए 2026 केवल एक विधायी प्रस्ताव नहीं है, बल्किr यह भारत के लोकतांत्रिक ढांचे,नागरिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की एक जटिल चुनौती का प्रतिनिधित्व करता है। संसद में इसका स्थगन यह दर्शाता है कि इस विषय पर व्यापक सहमति और गहन विचार- विमर्श की आवश्यकता है।आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर किस प्रकार का समाधान निकालते हैं और क्या यह कानून वास्तव में अपने घोषित उद्देश्यों को पूरा कर पाता है या नहीं।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्

देवरिया-कुशीनगर में निवेश की बयार: बड़े उद्योगपतियों ने दिखाई दिलचस्पी

पूर्वांचल की तकदीर बदलने की तैयारी: देवरिया में निवेशकों का महामंथन


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।पूर्वांचल के विकास को नई गति देने और जनभागीदारी आधारित मॉडल को मजबूत बनाने के उद्देश्य से देवरिया में आयोजित ‘अमृत प्रयास समिट’ ने निवेश के क्षेत्र में नई उम्मीदें जगाई हैं। सांसद शशांक मणि के नेतृत्व में आयोजित इस समिट में देश-विदेश के प्रमुख उद्यमियों और निवेशकों ने भाग लेकर क्षेत्रीय विकास की संभावनाओं पर गहन मंथन किया।
बरपार स्थित जागृति उद्यम केंद्र में आयोजित इस समिट में लगभग 40 प्रतिष्ठित मेहमानों की उपस्थिति रही, जिनमें विलियम बिसेल, शीतल अरोड़ा, TCS, Boston Consulting Group, PwC, Siemens और Gates Foundation जैसे बड़े नाम शामिल रहे।
अमृत प्रयास: 10 साल की रणनीति के साथ विकास का रोडमैप
समिट को संबोधित करते हुए सांसद शशांक मणि ने ‘अमृत प्रयास’ की 10 वर्षीय रणनीति साझा करते हुए कहा कि यह पहल विकसित भारत और विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्पों को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी और प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पूर्वांचल में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि देवरिया और कुशीनगर जैसे सांस्कृतिक और पर्यावरणीय रूप से समृद्ध क्षेत्र निवेशकों के लिए संभावनाओं का केंद्र बन सकते हैं।
अमृत प्रयास के 7 संकल्प: विकास की आधारशिला समिट में ‘अमृत प्रयास’ के सात प्रमुख संकल्पों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया:
नकदी फसल और एग्रो प्रोसेसिंग को बढ़ावा
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन
महिला उद्यमिता और सशक्तिकरण
पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में विकास
योजनाबद्ध शहरीकरण
डिजिटल उपयोग को बढ़ावा
पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास
इन संकल्पों के माध्यम से एक समग्र और संतुलित विकास मॉडल तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
निवेश और रोजगार: स्थानीय इकोसिस्टम पर जोर
समिट के दौरान खासतौर पर इस बात पर चर्चा हुई कि किस तरह स्थानीय स्तर पर उद्योगों को बढ़ावा देकर युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। सांसद ने बताया कि पांच विधानसभा क्षेत्रों में जनभागीदारी के जरिए मजबूत आर्थिक इकोसिस्टम विकसित करने की योजना बनाई गई है।
किसानों के लिए आधुनिक तकनीक, भंडारण, सस्ती क्रेडिट सुविधा और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया। इससे कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाएं बनीं आकर्षण का केंद्र
समिट में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं को भी प्रस्तुत किया गया, जिनमें शामिल हैं:
देवरिया अमृत रेलवे स्टेशन का विकास
देवरिया बाईपास परियोजना
नारायणी रॉकेट सेंटर
मां देवरही मंदिर का जीर्णोद्धार (सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा)
इन परियोजनाओं से क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने के साथ-साथ पर्यटन और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर गहन चर्चा
समिट के दूसरे चरण में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पर विशेष चर्चा हुई। इसमें भूमि उपलब्धता, सरकारी स्वीकृतियां, प्रशासनिक सहयोग और जनभागीदारी जैसे विषय प्रमुख रहे।
‘क्लोज्ड डोर इन्वेस्टर सर्किल’ के तहत निवेशकों और नीति निर्माताओं के बीच भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसमें क्षेत्र में रक्षा, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश की संभावनाओं को भी प्रस्तुत किया गया।
स्वावलंबन और उद्यमिता को मिला बढ़ावा
जागृति उद्यम केंद्र की भूमिका की सराहना करते हुए सांसद ने कहा कि यह संस्थान स्वावलंबी भारत अभियान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है।
पूर्वांचल के लिए नई उम्मीद
‘अमृत प्रयास समिट’ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि जनभागीदारी, सरकारी सहयोग और निवेशकों की भागीदारी एक साथ आए, तो देवरिया और कुशीनगर जैसे क्षेत्र विकास के नए मॉडल बन सकते हैं।
यह समिट केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि पूर्वांचल के आर्थिक भविष्य की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

तेज रफ्तार ट्रेलर की टक्कर से कार क्षतिग्रस्त, बाल-बाल बचे पिता-पुत्र

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के मगहर हाईवे पर तेज रफ्तार ट्रेलर ने एक कार को टक्कर मार दी, जिससे कार को काफी दूरी तक घसीट दिया गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग तुरंत सहायता के लिए दौड़ पड़े।
हादसे में कार सवार जिले के नगर पंचायत हरिहरपुर निवासी हर्ष पाल और उनके पिता दिवाकर पाल को हल्की चोटें आईं। राहत की बात यह रही कि दोनों गंभीर रूप से घायल नहीं हुए और बड़ा हादसा टल गया।
घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को प्राथमिक उपचार दिलाया गया।

सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर, 30 दिन में सूचना देना अनिवार्य

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। राज्य सूचना आयुक्त राकेश कुमार ने मेहदावल तहसील में जन सूचना अधिकारियों के साथ बैठक कर सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत निर्धारित प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी और उनके प्रभावी अनुपालन के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवेदक द्वारा मांगी गई सूचनाएं हर हाल में 30 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाएं और अधिनियम के तहत दिए गए अधिकारों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सूचना उपलब्ध कराते समय आवश्यक प्रपत्र एवं संलग्नक अवश्य जोड़े जाएं, ताकि सूचना मांगने वाले के आशय की पुष्टि हो सके। किसी भी स्थिति में अधूरी या भ्रामक सूचना उपलब्ध न कराई जाए। उन्होंने प्रत्येक जन सूचना अधिकारी को अपने कार्यालय में एक रजिस्टर संधारित करने का निर्देश दिया, जिसमें आवेदन प्राप्ति से लेकर निस्तारण तक का विवरण तिथि वार दर्ज हो।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई आवेदन संबंधित विभाग से जुड़ा नहीं है तो उसे 5 दिनों के भीतर संबंधित विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाए। सूचना आयुक्त ने कहा कि आवेदन प्राप्त होते ही उस पर तत्काल कार्यवाही शुरू की जाए, जिससे अनावश्यक विलंब न हो।
उन्होंने बताया कि जन सूचना अधिकारी केवल अपने कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विषयों पर ही सूचना प्रदान कर सकते हैं। निजी संस्थानों से संबंधित जानकारी भी वहीं तक दी जा सकती है, जहां तक जन सूचना अधिकारी की पहुंच हो। किसी भी व्यक्ति या थर्ड पार्टी से संबंधित सूचना, संबंधित पक्ष की अनुमति के बाद ही उपलब्ध कराई जाए।
इस दौरान उप जिलाधिकारी मेहदावल संजीव कुमार, तहसीलदार अल्पिका वर्मा, उपायुक्त उद्योग राजकुमार शर्मा, सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज सहित विभिन्न विभागों के जन सूचना अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रबंधक ने ग्रीष्मकालीन यात्रियों की सुविधाओ का व्यापक निरिक्षण किया

वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा)l मंडल रेल प्रबंधक वाराणसी आशीष जैन ने 04 अप्रैल,2026 शनिवार को ज्ञानपुर रोड रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं,परिचालनिक व्यवस्था, संरक्षा, ग्रीष्मकालीन यात्रियों की सुख-सुविधाओं का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान मंडल रेल प्रबंधक ने ज्ञानपुर रोड स्टेशन के पैदल उपरिगामी पुल,प्लेटफार्मो की सरफेस, यात्री शेड,साइनेजेस, सर्कुलेटिंग एरिया ,स्टेशन भवन,केंद्रीयकृत स्टेशन पैनल,रिले रूम, आई पी एस रूम,यात्री प्रतीक्षालय, यात्री आरक्षण केंद्र,आरक्षित एवं अनारक्षित टिकट प्रणाली,फूड एण्ड कैटरिंग स्टालों,वाटर बूथ, शौचालय,पी डब्ल्यू आई कार्यालय एवं स्टोर का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में मंडल रेल प्रबंधक ने स्टेशन के प्लेटफार्म पर लगे स्टेशन नेम बोर्ड को व्यवस्थित करने,शौचालयों एवं वाटर बूथों की व्यापक साफ-सफाई कराने, पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने, फूड स्टालों पर रेट लिस्ट और डस्टबिन लगाने,प्लेटफार्म पर निष्प्रयोज्य सामग्रियों को हटाने, प्लेटफार्मों के शेड में आर सी सी बेंच और पंखे बढ़ाने, दीवारों पर लगे अनावश्यक बैनर एवं पोस्टर को हटाने , प्लेटफॉर्म पर अनाधिकृत प्रेवश को बन्द करने, प्लेटफॉर्म पर विजिबल केबलों को ढकने ,संरक्षा उपकरणों के नियमित अनुरक्षण व निरीक्षण करने,गाड़ियों को पूर्व निर्धारित प्लेटफॉर्म पर लेने,सीनियर सेक्शन इंजीनियर(रेल पथ) के स्टोर में पड़ी आवश्यक सामग्रियों का निस्तारण करने,रेलवे कार्यालयों में वाहन न रखने तथा स्टेशन परिसर को साफ-सफाई रखने को सम्बंधित को निर्देश दिया।
ज्ञानपुर रोड स्टेशन पर संरक्षा उपकरणों के निरीक्षण के क्रम में मंडल रेल प्रबंधक जैन ने पॉइंट्स एण्ड क्रासिंग निरीक्षण किया और संरक्षा के सभी मानदण्डों को परखा।
इसके पूर्व उन्होंने ज्ञानपुर रोड स्टेशन यार्ड में स्थित समपार संख्या 39A का संरक्षा निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने गेट मैन का संरक्षा ज्ञान परखा और गेट की पैनल इंटरलॉकिंग समेत संरक्षा के विभिन्न पहलुओं की जांच की और संबंधित को दिशा निर्देश दिया।
इस निरीक्षण के अवसर सहायक मंडल इंजीनियर मुक्ता सिंह सहित वरिष्ठ पर्वेक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

सम्पूर्ण समाधान दिवस में 172 शिकायतों की सुनवाई, 22 का मौके पर निस्तारण

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के मेहदावल तहसील में जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में सम्पूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनसामान्य की शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए उनके समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनता की शिकायतों का समाधान शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सम्पूर्ण समाधान दिवस के दौरान जिले की तीनों तहसीलों में कुल 172 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 22 मामलों का मौके पर निस्तारण किया गया, जबकि 15 प्रकरणों में स्थलीय निरीक्षण हेतु टीम भेजी गई। मेहदावल तहसील में 64 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 12 का तत्काल निस्तारण किया गया तथा 8 मामलों में मौके पर जांच के निर्देश दिए गए। शेष मामलों को संबंधित विभागों को सौंपते हुए समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए गए।
कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों की सुनवाई अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह ने की और थानाध्यक्षों को प्रत्येक मामले में मौके पर जाकर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसी क्रम में खलीलाबाद तहसील में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) जय प्रकाश की अध्यक्षता में समाधान दिवस आयोजित हुआ, जहां 54 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। इनमें से 6 मामलों का मौके पर निस्तारण किया गया तथा 5 प्रकरणों में स्थलीय निरीक्षण के निर्देश दिए गए। पुलिस मामलों की सुनवाई पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर अमित कुमार द्वारा की गई।
वहीं धनघटा तहसील में मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित समाधान दिवस में भी 54 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 4 का मौके पर निस्तारण किया गया तथा 2 मामलों में जांच टीम गठित की गई। अधिकारियों को भूमि विवाद, पैमाइश, अतिक्रमण और राजस्व संबंधी मामलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए।
सम्पूर्ण समाधान दिवस में जनपद स्तरीय अधिकारी, उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, पुलिस अधिकारी एवं राजस्व कर्मचारी उपस्थित रहे।

27 वर्षों की सेवा के बाद ड्राइवर राजू प्रसाद सेवानिवृत्त

अधिकारियों ने सम्मानपूर्वक दी विदाई

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा) मंडलायुक्त कार्यालय गोरखपुर में कार्यरत ड्राइवर राजू प्रसाद के सेवा निवृत्त होने पर शनिवार को एक भावुक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। वर्ष 1997 से अपनी सेवाएं दे रहे राजू प्रसाद ने करीब 27 वर्षों तक निष्ठा और ईमानदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया।
इस अवसर पर अपर आयुक्त प्रशासन जय प्रकाश एवं अपर आयुक्त न्यायिक राजेश श्रीवास्तव ने उन्हें गौतम बुद्ध की प्रतिमा एवं अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। अधिकारियों ने उनके लंबे कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि राजू प्रसाद ने अपने सेवाकाल में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।
विदाई समारोह के दौरान कार्यालय के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और स्वस्थ जीवन की कामना की। कार्यक्रम का माहौल भावुक रहा, जहां सहकर्मियों ने उनके साथ बिताए पलों को याद किया।
अंत में राजू प्रसाद ने सभी अधिकारियों और सहकर्मियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान सभी का सहयोग और स्नेह मिला, जिसे वह हमेशा याद रखेंगे।
समारोह के पश्चात उन्हें सम्मानपूर्वक विदा किया गया।

माता-पिता और शिक्षक के समन्वय से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ता है: पुष्पा चतुर्वेदी

ब्लूमिंग बड्स स्कूल के शिक्षक-अभिभावक सम्मेलन में मेधावियों का सम्मान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिला मुख्यालय खलीलाबाद और गोरखपुर जनपद स्थित ब्लूमिंग बड्स स्कूल की सभी शाखाओं में शनिवार को वार्षिक शिक्षक-अभिभावक सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें शत-प्रतिशत अभिभावकों की सहभागिता रही। इस अवसर पर विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित हुआ तथा छात्रों के शैक्षिक प्रदर्शन और उनके उज्ज्वल भविष्य को लेकर सार्थक चर्चा हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रबंध निर्देशिका पुष्पा चतुर्वेदी द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जब माता-पिता और शिक्षक मिलकर बच्चों के विकास में योगदान देते हैं, तो उनकी सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास में अद्भुत वृद्धि होती है। उन्होंने इस सम्मेलन को छात्रों के शैक्षिक प्रदर्शन में सुधार का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
सम्मेलन के दौरान शिक्षकों ने अभिभावकों को उनके बच्चों की शैक्षिक प्रगति से अवगत कराया तथा उनकी जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए आवश्यक मार्गदर्शन दिया। अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपने सुझाव साझा किए।

इस अवसर पर उत्कृष्ट अंक अर्जित करने वाले मेधावी छात्रों को गोल्ड मेडल, प्रशस्ति पत्र एवं शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह ने छात्रों को और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।
प्रधानाचार्य शैलेश त्रिपाठी ने अभिभावकों का स्वागत करते हुए कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल शिक्षा प्रदान करना ही नहीं, बल्कि बच्चों को अनुशासित, चरित्रवान एवं जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकें।
इस अवसर पर इंडस्ट्रियल एरिया शाखा की प्रधानाचार्य वसुंधरा मिश्रा, एग्जीक्यूटिव हेड दिनेश चंद्र पांडे, कंगारू किड्स प्री-प्राइमरी की कोऑर्डिनेटर रिया मेहता, गीडा शाखा की प्रधानाचार्य रिमझिम सिंह, विनय कुमार शुक्ला, सीमा सिंह, राजू सिंह, उप प्रधानाचार्य अनूप विश्वकर्मा, डॉ. मीना सिंह, विवेकानंद शुक्ला, प्रयाग नारायण शुक्ला, मिथिलेश पांडेय, हेमंत तिवारी, अम्बरीष राय, वैभव राय, ध्रुव मौर्य सहित बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।

जनपद में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम, पैथोलॉजी और एक्स-रे केंद्रों के खिलाफ प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)

जनपद में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम, पैथोलॉजी और एक्स-रे केंद्रों के खिलाफ प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई की जा रही है। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह के निर्देश पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर के अधीक्षक तथा बलिया से आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सिकंदरपुर क्षेत्र में व्यापक जांच अभियान चलाया। इस दौरान कई स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण किया गया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।जांच के क्रम में सर्वप्रथम टीम तहसील दार अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे एवं पैथोलॉजी केंद्र पर पहुंची। वहां पर कोई भी चिकित्सक उपस्थित नहीं मिला और न ही किसी प्रकार की जांच की जा रही थी। इस पर डॉक्टर दिग्विजय द्वारा संचालक को कड़ी चेतावनी दी गई कि जब तक योग्य डॉक्टर उपस्थित न हों, तब तक किसी भी प्रकार की सेवा संचालित न की जाए। साथ ही निर्देश दिया गया कि डॉक्टर के आने पर ही दूरभाष के माध्यम से सूचना देकर कार्य प्रारंभ किया जाए।
इसके बाद टीम मनियर रोड स्थित आर बी एल स्वास्थ्य केंद्र जलालीपुर पहुंची, जहां केवल एक स्टाफ नर्स और एक एएनएम मौजूद मिलीं। वहां भी कोई डॉक्टर नहीं था। टीम ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया कि चिकित्सक की उपस्थिति के बिना अस्पताल का संचालन न किया जाए और डॉक्टर के आने पर ही मरीजों का उपचार शुरू किया जाए।जांच टीम इसके बाद राहुल चिकित्सा केंद्र सिकंदरपुर पहुंची। यहां पाया गया कि केंद्र का पंजीकरण 31 मार्च को समाप्त हो चुका है। संचालक द्वारा नवीनीकरण के लिए आवेदन किए जाने की पुष्टि हुई, जिस पर टीम ने आवश्यक दस्तावेजों की जांच की और आगे की प्रक्रिया के लिए निर्देश दिए।अगले चरण में टीम अमर पुष्प सेवा केंद्र, नवरत्न पुर पहुंची, जहां सभी कागजात सही पाए गए। इस केंद्र की व्यवस्था संतोषजनक रही, जिस पर टीम ने संतुष्टि व्यक्त की।सिकंदरपुर-बेल्थरा रोड मार्ग स्थित कृष्णा हॉस्पिटल का भी निरीक्षण किया गया। वहां केवल स्टाफ नर्स मौजूद मिली और किसी भी मरीज का इलाज होते नहीं पाया गया। इस पर भी टीम ने सख्त निर्देश जारी किए कि बिना चिकित्सक के अस्पताल का संचालन नहीं किया जाएगा।डॉ. दिग्विजय ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेशानुसार यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि अवैध रूप से संचालित संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और यह अभियान तब तक चलता रहेगा, जब तक उच्च स्तर से कोई अन्य निर्देश प्राप्त नहीं होता।इस कार्रवाई से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पराली में आग से मचा हड़कंप, ग्रामीणों की सतर्कता से टली बड़ी घटना

पथरा बाजार/सिद्धार्थनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद सिद्धार्थनगर के पथरा बाजार क्षेत्र में शनिवार सुबह पराली में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ अराजक तत्वों ने जानबूझकर खेतों में आग लगाई, जिससे आसपास की खड़ी गेहूं की फसल को भारी नुकसान का खतरा पैदा हो गया।

हालांकि, ग्रामीणों की सूझबूझ और दमकल विभाग की तत्परता से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई। घटना की सूचना मिलते ही सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंचे और आग बुझाने में जुट गए।

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं। झंहरांव और गौरी पाठक क्षेत्रों में पहले भी हजारों बीघा गेहूं की फसल आग की चपेट में आकर नष्ट हो चुकी है। शुक्रवार को भी ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाई थी और आरोपितों को चेतावनी दी थी।

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इसके बावजूद शनिवार सुबह फिर आगजनी की घटना सामने आई। ग्रामीणों ने पिपरा रामलाल गांव के कुछ लोगों पर आग लगाने का आरोप लगाया है और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर आग पर काबू नहीं पाया जाता, तो हजारों बीघा फसल जलकर राख हो सकती थी। पिछले वर्ष भी इसी तरह की घटना में भारी नुकसान हुआ था, जिसके बाद प्रशासन ने दमकल व्यवस्था मजबूत करने का आश्वासन दिया था।

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गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 में शानदार प्लेसमेंट रिकॉर्ड दर्ज किया है। संस्थान के कुल 92 विद्यार्थियों का चयन विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों में हुआ है।

इन छात्रों का चयन इंटेलिफ्थ, इन्फोडाट, इन्वेस्टोश्योर, प्रॉप शॉप, कैडेरा और टैकल बॉक्स जैसी कंपनियों में हुआ है। चयनित छात्रों में 42 आईटी, 46 सीएसई और 4 एम.एस. (एआई) के अंतिम वर्ष के विद्यार्थी शामिल हैं।
इसके अलावा सत्र 2024-25 की छात्रा वैष्णवी श्रीवास्तव को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से ऑफर लेटर प्राप्त हुआ है। उन्होंने एनपीटीईएल परीक्षा में शीर्ष 2% में स्थान हासिल कर यह सफलता प्राप्त की है।

इस प्लेसमेंट ड्राइव के तहत ऑनलाइन इंटरव्यू 25 मई 2026 को आयोजित किए गए थे। चयनित विद्यार्थियों को मई और जून माह में संबंधित कंपनियों में जॉइनिंग के निर्देश दिए गए हैं।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्लेसमेंट गतिविधियों को और मजबूत करने पर जोर दिया। वहीं, अधिष्ठाता प्रो. हिमांशु पांडेय और प्रो. एस.एन. तिवारी ने चयनित छात्रों को बधाई दी।
संस्थान के अनुसार, कई छात्र अपनी इंटर्नशिप पूरी कर चुके हैं, जबकि एक छात्र का चयन इंडियन एयर फोर्स में हुआ है और कुछ अन्य एसएसबी प्रक्रिया में शामिल हैं।

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बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। नगरा ब्लॉक के पूर्वी और उत्तरी छोर पर स्थित ग्राम पंचायत सरया गुलाब राय के राजस्व गांव रामपुर हजिया के ग्रामीणों को बुनियादी प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। तहसील जाने के लिए 20 किमी, थाना पहुंचने के लिए 12 किमी और ब्लॉक कार्यालय के लिए 13 किमी का चक्कर लगाना ग्रामीणों की मजबूरी बन गया है।

ग्रामीणों के अनुसार यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि वर्ष 1990 से चली आ रही है। प्रशासनिक सीमाओं के जटिल बंटवारे के कारण रामपुर हजिया गांव तीन हिस्सों में बंटा हुआ है, जिससे लोगों को अलग-अलग कार्यों के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता है।

रामपुर हजिया का ब्लॉक नगरा, तहसील बेल्थरारोड और थाना सिकंदरपुर में आता है। इस असंगठित व्यवस्था के चलते ग्रामीणों को समय और पैसे दोनों का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या का समाधान केवल शासन स्तर पर ही संभव है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी न्यायिक बेल्थरारोड, अभिनेंद्र सिंह ने कहा कि मामले से शासन को अवगत कराया जाएगा।

गौरतलब है कि वर्ष 2015 से पहले इस ग्राम पंचायत का नाम हजियारामपुर था, जिसे परिसीमन के बाद बदलकर सरया गुलाब राय कर दिया गया। वर्तमान में इस पंचायत की आबादी लगभग 2600 है।

ग्रामीणों ने शासन से मांग की है कि प्रशासनिक सीमाओं में सुधार कर उन्हें राहत दी जाए, ताकि अनावश्यक दूरी और परेशानियों से निजात मिल सके।

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शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा कोई बच्चा : मंत्री दयाशंकर सिंह

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

जनपद के कंपोजिट विद्यालय बसंतपुर में ‘स्कूल चलो अभियान’ के तहत भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने मंत्री को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया।कार्यक्रम में विद्यालय के बच्चों को किताबें, यूनिफॉर्म एवं अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है और सरकार का लक्ष्य है कि 6 से 14 वर्ष तक का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक चलने वाला ‘स्कूल चलो अभियान’ इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए संचालित किया जा रहा है। इसके तहत शिक्षक, जनप्रतिनिधि और समाजसेवी घर-घर जाकर बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। सरकार द्वारा बच्चों को मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और मिड-डे मील उपलब्ध कराया जा रहा है। मंत्री ने नरेंद्र मोदी और प्रदेश सरकार के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि कोरोना काल में भी सरकार ने लोगों तक राशन पहुंचाकर किसी को भूखा नहीं रहने दिया।इस अवसर पर मंत्री ने विद्यालय में बच्चों के साथ बैठकर मिड-डे मील का स्वाद चखा और भोजन की गुणवत्ता का निरीक्षण किया। साथ ही ‘स्कूल चलो अभियान’ के प्रचार-प्रसार के लिए जागरूकता वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।मंत्री ने जनपद में चल रहे विकास कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि मेडिकल कॉलेज, नया जेल परिसर, रोडवेज, स्पोर्ट्स स्टेडियम, बाईपास और सड़कों के चौड़ीकरण जैसे कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी, सीडीओ, जनप्रतिनिधि, शिक्षक, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

बिना मान्यता के चल रहे स्कूल, शिक्षा विभाग बना मूकदर्शक या मिलीभगत

कैंम्पियरगंज/गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
विकासखंड कैंम्पियरगंज के ग्राम सभा मछली गांव, टोला तुलसीपुर और अलीगढ़ में बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों के संचालन का मामला सामने आया है। क्षेत्र में खुलेआम चल रहे इन स्कूलों पर शिक्षा विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन स्कूलों में न तो बुनियादी सुविधाएं हैं और न ही योग्य शिक्षकों की नियुक्ति, फिर भी बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। अभिभावकों से मनमानी फीस वसूली जा रही है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने जांच तक करना जरूरी नहीं समझा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या शिक्षा विभाग इस पूरे मामले में मूकदर्शक बना हुआ है या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत से इन अवैध स्कूलों को संरक्षण मिल रहा है।
शिक्षा के अधिकार कानून के तहत बिना मान्यता स्कूल संचालन पूरी तरह अवैध है, बावजूद इसके इन क्षेत्रों में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिलाधिकारी और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ पर रोक लग सके।

भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर पत्थरबाजी विरोध करने पर मारपीट

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। थाना क्षेत्र के ग्राम नदुआ में गुरुवार की रात कुछ लोगों ने डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर ईंट पत्थर फेक रहे थें, जिसका विरोध करने पर मारपीट कर जाति सूचक शब्दों का प्रयोग किया गया। पिडीतो ने शनिवार को बरहज थाने का घेराव कर आरोपितों पर अभियोग पंजीकृत करने की मांग की। पीड़ितों के तहरीर पर पुलिस ने आठ के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई में जुटी गयी है।

थाना क्षेत्र के ग्राम नदुआं निवासी अभिषेक पुत्र कैलाश द्वारा दिए गए तहरीर में बताया है कि गुरुवार की शाम लगभग 6:00 बजे अंबेडकर पार्क के पास कुछ लोग इकट्ठा होकर मेरे पड़ोसी किशन , अंगद,रिता व शालिनी को जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए, गाली गुप्ता देते हुए ईटपत्थर से मारने पीटने लगे जिससे पास में अंबेडकर की मूर्ति क्षतिग्रस्त हो गई।

पीड़ित के तहरीर पर पुलिस ने गोविंद चौहान , अनुज चौहान, निकुंज चौहान, ओमनाथ चौहान, सुधीर चौहान , अंकुश चौहान, बालेंद्रचौहान, पंकज चौहान के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर लिया है।