भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है। दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।
बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है। सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।
जनगणना कार्य में तेजी, प्रगणकों और सुपरवाइजरों को दिए गए आवश्यक निर्देश
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)/जिला जनगणना अधिकारी सत्य प्रकाश ने बताया कि भारत की जनगणना 2027 के अंतर्गत मकानों की गणना का कार्य 22 मई 2026 से 20 जून 2026 तक कराया जा रहा है। जनपद के सभी मकानों की गणना सुनिश्चित करने के लिए समस्त चार्ज अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि चार्ज अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर जनगणना कार्य में लगे प्रगणकों एवं सुपरवाइजरों से संपर्क कर रहे हैं तथा कार्य में आने वाली प्रक्रियागत समस्याओं का निराकरण कर प्रगति सुनिश्चित कर रहे हैं। आमजन से भी जनगणना कार्य में सहयोग करने की अपील की गई है। इसी क्रम में चार्ज ऑफिसर एवं तहसीलदार खलीलाबाद आनंद ओझा, नगर पंचायत बेलहर के अधिशाषी अधिकारी अमित सिंह, तहसीलदार धनघटा रामजी, नगर पंचायत मेंहदावल के अधिशाषी अधिकारी तथा बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह द्वारा विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर जनगणना कार्य का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने प्रगणकों और क्षेत्रवासियों से संवाद कर जनगणना कार्य में सहयोग का संदेश दिया। मेहदावल तहसील में एचएलबी 0621 के प्रगणक शिवचंद्र कुमार मौर्य एवं उनके सुपरवाइजर राम अनुज द्वारा अपने पूरे ब्लॉक के 156 जनगणना मकानों की गणना पूर्ण कर नक्शा जमा किया गया। कम समय में किए गए इस कार्य की सराहना की गई।
दिल्ली में क्वॉड का रणनीतिक मंथन: क्या अब बदल जाएगी वैश्विक शक्ति व्यवस्था?
✒️ लेखक : एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र
नई दिल्ली में 26 मई 2026 को संपन्न हुई क्वॉड विदेश मंत्रियों की बैठक केवल एक औपचारिक कूटनीतिक आयोजन नहीं थी, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच चार प्रमुख लोकतांत्रिक शक्तियों — भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया — का रणनीतिक मंथन थी। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा संकट और वैश्विक सप्लाई चेन पर खतरे गहराते जा रहे हैं तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता अंतरराष्ट्रीय चिंताओं को बढ़ा रही है, तब नई दिल्ली में हुई यह बैठक वैश्विक शक्ति संतुलन की नई दिशा तय करती दिखाई दी। भारतीय विदेश मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी की उपस्थिति ने स्पष्ट संकेत दिया कि क्वॉड अब केवल संवाद मंच नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोग का प्रभावशाली वैश्विक समूह बन चुका है।
इंडो-पैसिफिक बना वैश्विक रणनीति का केंद्र बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र को वैश्विक विकास और स्थिरता का मुख्य इंजन बताया गया। भारत ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में स्वतंत्र, खुला और समावेशी वातावरण बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। भारत ने अप्रत्यक्ष रूप से चीन की विस्तारवादी नीतियों और समुद्री आक्रामकता पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का दबाव या शक्ति प्रदर्शन क्षेत्रीय संतुलन के लिए खतरा बन सकता है। यह संदेश विशेष रूप से दक्षिण चीन सागर, ताइवान जलडमरूमध्य और हिंद महासागर में बढ़ती सामरिक गतिविधियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समुद्री सुरक्षा और फ्रीडम ऑफ नेविगेशन पर जोर क्वॉड बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय समुद्री सुरक्षा रहा। हिंद-प्रशांत क्षेत्र विश्व व्यापार का प्रमुख समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी देश को एकतरफा तरीके से समुद्री नियंत्रण स्थापित करने की अनुमति न मिले। विशेषज्ञों के अनुसार यह संदेश चीन की समुद्री रणनीति को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सप्लाई चेन और क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ा फोकस कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के बाद वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरी सामने आ चुकी है। इसी कारण क्वॉड देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ सप्लाई चेन को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरण और आधुनिक तकनीक में इन खनिजों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभी तक इन क्षेत्रों में चीन का बड़ा दबदबा रहा है, लेकिन क्वॉड अब वैकल्पिक आपूर्ति नेटवर्क विकसित करना चाहता है। भारत और अमेरिका के बीच क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन सहयोग को इस बैठक की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। तकनीक, साइबर सुरक्षा और एआई सहयोग बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, साइबर डिफेंस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर व्यापक चर्चा हुई। डिजिटल जासूसी, साइबर अपराध और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दों को भविष्य की वैश्विक सुरक्षा से जोड़ते हुए क्वॉड देशों ने सुरक्षित तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर सहमति जताई। यह स्पष्ट संकेत है कि भविष्य के शक्ति संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि डेटा, साइबर स्पेस और डिजिटल नेटवर्क भी रणनीतिक युद्धक्षेत्र बनेंगे। आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस बैठक का एक महत्वपूर्ण संदेश आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को दोहराना रहा। भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा वैश्विक मंचों पर उठाता रहा है। इस बार भी भारत ने स्पष्ट कहा कि आतंकवाद मानवता और वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा है तथा इसके खिलाफ कठोर वैश्विक सहयोग आवश्यक है। यह संदेश उन ताकतों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद को समर्थन देती हैं। मिडिल ईस्ट संकट और ऊर्जा सुरक्षा ईरान से जुड़े तनाव, अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को नई चुनौती दी है। क्वॉड देशों ने चिंता व्यक्त की कि यदि यह संकट और गहराया तो वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और आर्थिक स्थिरता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण नई दिल्ली बैठक में मिडिल ईस्ट के हालात पर विशेष रणनीतिक चर्चा की गई। क्यों चीन क्वॉड को “एशियाई नाटो” कहता है? चीन लंबे समय से क्वॉड को “एशियाई नाटो” कहता रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि क्वॉड की बढ़ती सक्रियता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए चुनौती बनती दिखाई दे रही है। हालांकि क्वॉड देश लगातार यह कहते रहे हैं कि यह किसी सैन्य गठबंधन के रूप में नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक सहयोग मंच के रूप में कार्य कर रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि चीन की बढ़ती समुद्री और सामरिक गतिविधियों ने इस समूह को और अधिक प्रासंगिक बना दिया है। भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका नई दिल्ली में सफल क्वॉड बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब केवल दक्षिण एशिया की शक्ति नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक विमर्श का प्रमुख केंद्र बन चुका है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा जैसे जटिल मुद्दों पर भारत ने संतुलित और बहुआयामी कूटनीति का परिचय दिया है। भारत की सक्रिय भूमिका यह संकेत देती है कि आने वाले समय में विश्व राजनीति अधिक बहुध्रुवीय स्वरूप की ओर बढ़ सकती है, जहां लोकतांत्रिक शक्तियां मिलकर वैश्विक संतुलन बनाए रखने का प्रयास करेंगी। नई दिल्ली में संपन्न क्वॉड विदेश मंत्रियों की बैठक ने स्पष्ट संकेत दिया है कि विश्व राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, पश्चिम एशिया संकट, ऊर्जा आपूर्ति, साइबर सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और वैश्विक सप्लाई चेन जैसे मुद्दे अब आपस में गहराई से जुड़ चुके हैं। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का यह रणनीतिक सहयोग आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन को नई दिशा दे सकता है। दिल्ली में हुआ यह मंथन केवल चार देशों की बैठक नहीं, बल्कि बदलती विश्व व्यवस्था की नई पटकथा का संकेत माना जा रहा है। लेखक – एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी कर विशेषज्ञ, स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि एवं संगीत साधक गोंदिया, महाराष्ट्र
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना के अंतर्गत बेलहर कला ब्लॉक सभागार में जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सहायक प्रबंधक पंकज कुमार पाण्डेय ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि प्रथम चरण में 5 लाख रुपये तक की परियोजनाओं के लिए चार वर्षों तक 100 प्रतिशत ब्याज मुक्त तथा कोलेटरल गारंटी मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल क्षेत्र के आवेदकों को परियोजना लागत का 10 प्रतिशत स्वयं का अंशदान बैंक में जमा करना होगा, जिसे परियोजना ऋण के साथ मुक्त किया जाएगा। योजना के लिए आयु सीमा 21 से 40 वर्ष निर्धारित है तथा न्यूनतम शैक्षिक योग्यता कक्षा 8 उत्तीर्ण होना आवश्यक है। साथ ही कौशल प्रशिक्षण प्राप्त होना भी अनिवार्य है। कौशल प्रशिक्षण में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, ओडीओपी प्रशिक्षण योजना, एससी/एसटी/ओबीसी प्रशिक्षण योजना, उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन, आईटीआई, पॉलीटेक्निक अथवा खादी ग्रामोद्योग विभाग से प्रशिक्षित अभ्यर्थी पात्र माने जाएंगे। आवेदन केवल विभागीय पोर्टल msme.up.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन स्वीकार किए जा रहे हैं। सीएम फेलो जया राना ने योजना की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि गूगल प्ले स्टोर से सीएम युवा ऐप डाउनलोड कर योजना से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। मिशन निदेशक लखनऊ द्वारा जनपद के लिए 1600 लाभार्थियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कार्यक्रम में एडीओ पंचायत बेलहर कला पंकज सिंह, पंचायत सहायक, समूह सखी, बीसी सखी, रोजगार सेवक, ब्लॉक के कर्मचारी, डाटा एंट्री ऑपरेटर बलवंत सिंह, कंप्यूटर ऑपरेटर शिवांगी चौधरी सहित बड़ी संख्या में युवक-युवतियां उपस्थित रहे।
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। शासन के निर्देश के क्रम में 27 मई 2026 दिन बुधवार को ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर घोषित सार्वजनिक अवकाश की तिथि में परिवर्तन किया गया है। यह तिथि चंद्र दर्शन के आधार पर परिवर्तनीय थी। उत्तर प्रदेश में अब ईद-उल-अजहा (बकरीद) 28 मई 2026 दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। इसके दृष्टिगत 27 मई 2026 को घोषित सार्वजनिक अवकाश को परिवर्तित करते हुए 28 मई 2026 दिन गुरुवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।
सुबह 7 बजे से रात 7 बजे तक ही खुले रहेंगे पेट्रोल पंप, तय मात्रा में मिलेगा ईंधन
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में डीजल-पेट्रोल वितरण व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने तथा किसानों को राहत देने के उद्देश्य से जिला पूर्ति अधिकारी ए.पी.सिंह ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जारी आदेश के अनुसार अब जनपद के सभी पेट्रोल पंप सामान्य रूप से सुबह 7 बजे से रात 7 बजे तक ही संचालित किए जाएंगे। जिला पूर्ति अधिकारी द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए डीजल की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ईंधन की कालाबाजारी और अनावश्यक भंडारण रोकने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। मेडिकल इमरजेंसी अथवा अन्य अपरिहार्य स्थिति में निर्धारित समय के अतिरिक्त ईंधन देने से पहले संबंधित अधिकारियों अथवा पुलिस को सूचना देना अनिवार्य होगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति केवल वाहनों में ही की जाएगी। जरीकेन, डिब्बा, बोतल अथवा अन्य किसी पात्र में पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जाएगा। किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ट्रैक्टर एवं कृषि कार्य में प्रयुक्त वाहनों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। निर्धारित मात्रा के अनुसार भारी वाहनों को अधिकतम 50 लीटर, हल्के वाहनों को 20 लीटर, ट्रैक्टर-ट्रॉली को 20 लीटर तथा मोटरसाइकिलों को 2 से 3 लीटर तक ईंधन दिया जाएगा। वहीं विशेष परिस्थितियों में संबंधित तहसील क्षेत्र के उपभोक्ताओं को आधार कार्ड सत्यापन के बाद जरीकेन में अधिकतम 10 लीटर ईंधन उपलब्ध कराया जा सकेगा। प्रशासन को शिकायत मिली थी कि कुछ लोग किसानों के नाम पर अधिक मात्रा में डीजल लेकर गांवों में ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए अब किसानों की पहचान संबंधित तहसील के आधार कार्ड से सत्यापित करने के बाद ही डीजल उपलब्ध कराया जाएगा। आदेश में यह भी कहा गया है कि किसानों के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति को विशेष परिस्थितियों में ही डीजल दिया जाएगा तथा इसके लिए संबंधित अधिकारी अथवा पुलिस को सूचित करना आवश्यक होगा। एंबुलेंस और शव वाहन को प्राथमिकता के आधार पर ईंधन उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। जिला पूर्ति अधिकारी ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।
कांग्रेसियों ने तपती धूप में नगर के डाकबंगला से तहसील कार्यालय तक प्रदर्शन कर की जनसभा
सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार पांडेय के नेतृत्व में देश मे पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते मूल्य,महंगाई, भ्र्ष्टाचार व समान शिक्षा नीति लागू करने की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दोपहर की तपती धूप में सलेमपुर डाकबंगला से बस स्टैंड, गांधी चौक होते हुए तहसील मुख्यालय तक सद्भावना पदयात्रा निकालकर तहसील कार्यालय पर जनसभा कर राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार हरि प्रसाद को सौंपा। सम्बोधित करते हुए किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र कुमार पांडेय ने कहा कि यह सरकार पेट्रोल, डीजल,गैस सिलेंडर के दाम को बढ़ाकर महंगाई की मार से बेहाल कर दिया है। जनता इससे निजात चाहती है। इस सरकार में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से खराब हो गई है। मुख्य अतिथि कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विजयशेखर मल्ल रोशन ने कहा कि कांग्रेस ने देश का चौमुखी विकास किया।देश मे कल कारखाने लगाकर रोजगार देने का काम किया। लेकिन यह सरकार उन सभी कल कारखानों को बेचने का काम कर रही है।बिना कांग्रेस के इस देश का भला नहीं हो सकता है। पंचायती राज प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव चंद्रभूषण पांडेय ने कहा कि इस देश को एक समान शिक्षा नीति की आवश्यकता है।यह सरकार शिक्षा को महंगी कर दिया है जिससे गरीब परिवार के लोग उच्च शिक्षा से वंचित हो जा रहे हैं। कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष डॉ धर्मेन्द्र पांडेय ने कहा कि आज भाजपा सरकार से आम जनता उब गई है कांग्रेस के तरफ आशा भरी निगाहों से देख रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नागेंद्र शुक्ल ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बल पर इस निकम्मी सरकार को उखाड़ फेंकने का काम करेगी। सभा को जिला उपाध्यक्ष भरत मणि त्रिपाठी, शैलेश दूबे, राजेश मिश्र,विमल मिश्र,मुक्तिनाथ, रजनीश उपाध्याय, प्रह्लाद तिवारी, सरोज पांडेय, परमानन्द यादव एडवोकेट, लालसाहब यादव,रामअशीष गौंड़,विनोद दूबे, महेन्द्र यादव,आचार्य हरेन्द्र मिश्र, नागेंद्र तिवारी, मनीष रजक,डॉ रमेश कुशवाहा, पन्नालाल पाठक,परमानन्द प्रसाद,गंगासागर मिश्र, उत्तेज मिश्र जयराम उपाध्याय, प्रमोद श्रीवास्तव, डॉ नरेन्द्र यादव,रोहित यादव, राहुल मिश्र,रामेश्वर कुशवाहा, सुरेंद्र यादव, प्रमोद चौधरी,अशोक कुमार,सुजीत कुमार आदि ने सम्बोधित किया।
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) पद्मिनी एकादशी के उपलक्ष्य में श्याम प्रेमियों की पहली बार खाटू श्याम दर्शन यात्रा मंगलवार को श्री लक्ष्मी नारायण व खाटू श्याम मंदिर, हनुमानगढ़ी से सुबह 10 बजे भाजपा नेता अमित केडिया की अगुवाई व देखरेख में प्रस्थान की । नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने बस को झंडी दिखाकर रवाना किया। यात्रा से पूर्व खाटू श्याम मंदिर में दर्शनार्थियों ने पूजा पाठ व मंगल आरती किया। आयोजक अमित केडिया ने कहा कि केवल मात्र ग्यारह सौ रुपए में ए.सी. युक्त बस द्वारा श्याम प्रेमियों की सुलभ यात्रा कराई जा रही है। इस अवसर पर पंडित गजानंद शर्मा, पंडित मुरारी लाल शर्मा , जितेन्द्र भारत, आनन्द मोदनवाल, गुड्डू जायसवाल, गुड्डू चौरसिया, बैजनाथ जायसवाल, सुनील गुप्ता , सूर्यनाथ मोदनवाल, जीउत मोदनवाल, किशन मद्धेशिया, मुरारी जायसवाल, लक्ष्मण जायसवाल, मुन्ना गुप्ता, मनोज गुप्ता, रतन वर्मा, मुकेश, रमाशंकर जायसवाल, नीरज, बिट्टू मद्धेशिया,अभय जायसवाल, निशा शर्मा, उपासना केडिया,उर्मिला देवी, दुर्गावती देवी, प्रियंका देवी, दुलारी देवी, जयंती देवी आदि उपस्थित रहीं।
स्वास्थ्य, बिजली, सड़क और किसानों की समस्याओं के समाधान की उठाई मांग
सिकन्दरपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विधानसभा 359 सिकन्दरपुर की विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को जिला अध्यक्ष Umashankar Pathak के नेतृत्व में उपजिलाधिकारी Rishikant Rajvanshi को ज्ञापन सौंपकर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।
ज्ञापन में स्वास्थ्य, बिजली, सड़क, सिंचाई, पेयजल और किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परेशान है, लेकिन संबंधित विभाग समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं हैं।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सिकन्दरपुर की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता जताते हुए सभी जांच मशीनों और स्वास्थ्य सुविधाओं को तत्काल सुचारु कराने की मांग की। साथ ही अस्पताल अधीक्षक को हटाने की भी मांग रखी गई। नेताओं का आरोप था कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के कारण मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में क्षेत्र में स्थापित आरओ मशीनों को दुरुस्त कराने और इंडिया मार्का हैंडपंपों की मरम्मत कराकर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की गई। किसानों की समस्याओं को उठाते हुए नहरों में पर्याप्त पानी छोड़े जाने, सरकारी गोदामों में समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराने तथा बिजली संकट समाप्त करने की मांग भी की गई।
कांग्रेस नेताओं ने नगर क्षेत्र में बने एमआरएफ सेंटर की निष्पक्ष जांच कराने, जर्जर सड़कों की मरम्मत और अघोषित बिजली कटौती पर रोक लगाने की मांग भी उठाई। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण लगाने की बात कही गई।
ज्ञापन में मालदाह चट्टी स्थित विश्वकर्मा मंदिर के स्वरूप में किसी प्रकार का बदलाव न किए जाने की मांग की गई। साथ ही कांग्रेस नेताओं ने National Testing Agency पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ न करने की बात कही।
कांग्रेस पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो पार्टी आंदोलन करने को बाध्य होगी। उपजिलाधिकारी ने ज्ञापन प्राप्त कर संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का आश्वासन दिया।
इस दौरान पूर्व जिला अध्यक्ष सच्चिदानंद तिवारी, मदन यादव, धीरेन्द्र आनंद मिश्र, महेश कुमार तिवारी, हृदयानंद पांडे, अखिलेश कनौजिया, नेहा देवी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बरहज (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रवादी जन संग्रह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Rajendra Prasad Pandey के प्रथम जनपद आगमन पर कार्यकर्ताओं द्वारा भव्य स्वागत और अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन जिला अध्यक्ष राजेश मिश्रा के नेतृत्व में कपरवार क्षेत्र में किया गया, जहां बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के आगमन पर कार्यकर्ताओं ने गाजे-बाजे और फूल-मालाओं के साथ उनका स्वागत किया। इस दौरान गांधी चौक पर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण भी किया गया।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने कहा कि पार्टी संगठन को विभिन्न क्षेत्रों में मजबूत करने के उद्देश्य से कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद और मुलाकात की जा रही है। उन्होंने संगठन विस्तार और जनसंपर्क अभियान को तेज करने पर जोर दिया।
इस अवसर पर जिला अध्यक्ष राजेश मिश्रा, जिला महासचिव साकेत शाही, सत्य प्रकाश मिश्रा, राजेश मद्धेशिया, सुमित तिवारी, पवन, नीरज, जगदीश, शैलेश, अभिषेक और जयशंकर तिवारी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सरयू स्नान के दौरान दो युवक डूबे थे, एक को बचाया गया था
बरहज (राष्ट्र की परम्परा)। मोहन सेतु के पास सरयू नदी में डूबे किशोर अमन राजभर का शव घटना के पांचवें दिन बरामद कर लिया गया। शव मिलने के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जय नगर निवासी अमन राजभर (12) पुत्र स्वर्गीय बबलू राजभर, अर्पित राजभर (11) पुत्र पवन राजभर और सुधीर राजभर (14) पुत्र शोभनाथ राजभर बीते शुक्रवार को भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए घर से बिना बताए सरयू नदी में स्नान करने मोहन सेतु के पास पहुंचे थे।
नदी की गहराई अधिक होने के कारण तीनों किशोर डूबने लगे। मौके पर मौजूद लोगों ने सुधीर राजभर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन अमन और अर्पित नदी में लापता हो गए। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस टीम मौके पर पहुंची तथा खोजबीन के लिए एसडीआरएफ टीम को लगाया गया।
काफी मशक्कत के बाद शनिवार शाम को मेहियवां के पास से अर्पित राजभर का शव बरामद कर लिया गया था, जबकि अमन की तलाश लगातार जारी थी। पांचवें दिन अमन का शव नदी के उस पार विनटोलिया गांव के सामने नदी किनारे मिला।
SDRF और पुलिस टीम ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए देवरिया भेज दिया। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। थानाध्यक्ष Vishal Upadhyay ने बताया कि नदी में डूबे दोनों किशोरों के शव बरामद कर लिए गए हैं।
वहीं सुरौली थाना क्षेत्र के एक अन्य मामले में 15 दिन पूर्व दादी के अंतिम संस्कार के बाद सरयू नदी में स्नान के दौरान लापता हुए अंश चौहान (13) का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।
बिजली कटौती और डीजल संकट के बीच गांवों में तेजी से बढ़ रहा सोलर सिस्टम का उपयोग
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। लगातार बढ़ती डीजल-पेट्रोल की कीमतों, अनियमित बिजली आपूर्ति और ऊर्जा संकट के बीच ग्रामीण इलाकों में सौर ऊर्जा नई उम्मीद बनकर उभर रही है। गांवों में किसान और आम नागरिक तेजी से सोलर सिस्टम अपना रहे हैं। खेतों की सिंचाई से लेकर घरों की रोशनी तक अब सौर ऊर्जा ग्रामीण जीवन का अहम हिस्सा बनती जा रही है।
जनपद के कई गांवों में बिजली कटौती और महंगे डीजल ने किसानों की परेशानियां बढ़ा दी थीं। पहले किसानों को सिंचाई के लिए डीजल चालित पंपों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब सोलर पंप कम खर्च में सिंचाई का प्रभावी विकल्प बन रहे हैं। किसानों का कहना है कि सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों के इस्तेमाल से खेती की लागत कम हुई है और आर्थिक बोझ में भी राहत मिली है।
ग्रामीण क्षेत्रों में अब घरों की छतों पर भी सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। इससे बिजली बिल कम होने के साथ-साथ कटौती के दौरान भी लोगों को राहत मिल रही है। गांवों में रहने वाले लोग अब सोलर सिस्टम के जरिए पंखा, बल्ब, मोबाइल चार्जिंग, पानी की मोटर और छोटे घरेलू उपकरण आसानी से चला पा रहे हैं। इससे ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।
सरकार द्वारा भी सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइट, सोलर पंप और घरेलू सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जिससे बिजली संकट से जूझ रहे इलाकों को राहत मिल रही है। साथ ही सोलर उपकरणों की स्थापना और रखरखाव से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सौर ऊर्जा पूरी तरह स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा स्रोत है। इससे कार्बन उत्सर्जन नहीं होता, जिससे प्रदूषण कम करने और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है। यही वजह है कि दुनिया के कई देश अब पारंपरिक ईंधनों के बजाय सौर ऊर्जा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
ऊर्जा संकट और बढ़ती महंगाई के इस दौर में सौर ऊर्जा केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकता बनती जा रही है। यदि सरकार और समाज मिलकर गांव-गांव तक सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दें, तो आने वाले समय में देश ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।
दोबारा लौट रहे लोग लकड़ी की खाट पर: सादगी, स्वास्थ्य और संस्कृति की नई पहचान
आधुनिक जीवनशैली के बीच परंपरा, स्वास्थ्य और पर्यावरण का पुनर्जागरण
लेखक : डॉ. सत्यवान सौरभ कवि, सामाजिक विचारक एवं स्तंभकार
भारत की पारंपरिक जीवनशैली में लकड़ी की खाट केवल सोने या बैठने का साधन नहीं थी, बल्कि सामाजिक संवाद, पारिवारिक आत्मीयता और प्राकृतिक जीवन का प्रतीक मानी जाती थी। बदलते समय, शहरीकरण और आधुनिक फर्नीचर के बढ़ते प्रभाव के बीच खाट धीरे-धीरे घरों से गायब होती चली गई। लेकिन अब एक बार फिर लोग लकड़ी की खाट की ओर लौट रहे हैं। यह वापसी केवल एक पुराने फर्नीचर की वापसी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और सांस्कृतिक मूल्यों के पुनर्जागरण का संकेत है। भारतीय जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है खाट भारत के गांवों, चौपालों और आंगनों में खाट सदियों से जीवन का केंद्र रही है। इसे चारपाई, खटिया और मंजी जैसे नामों से भी जाना जाता है। किसान दिनभर की मेहनत के बाद खाट पर विश्राम करते थे, बुजुर्ग उसी पर बैठकर सामाजिक और पारिवारिक फैसले लेते थे और बच्चे उसी वातावरण में बड़े होते थे। खाट केवल फर्नीचर नहीं थी, बल्कि सामाजिक जुड़ाव का माध्यम भी थी। आधुनिकता के दौर में क्यों कम हुई खाट की लोकप्रियता समय के साथ आधुनिक बेड, फोम गद्दे और आकर्षक फर्नीचर समृद्धि और आधुनिक जीवनशैली के प्रतीक बन गए। विज्ञापनों और बदलती उपभोक्तावादी सोच ने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि आराम केवल महंगे गद्दों में ही संभव है। परिणामस्वरूप खाट को पिछड़ेपन से जोड़कर देखा जाने लगा और वह धीरे-धीरे घरों से बाहर हो गई। स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जा रही खाट आज जब कमर दर्द, गर्दन दर्द और रीढ़ से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, तब लोग पारंपरिक विकल्पों की ओर फिर लौट रहे हैं। लकड़ी की खाट शरीर को संतुलित सहारा देती है और उसका बुना हुआ ढांचा शरीर का भार समान रूप से वितरित करता है। इससे रीढ़ पर अनावश्यक दबाव कम पड़ता है और शरीर को प्राकृतिक आराम मिलता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अत्यधिक मुलायम गद्दों की तुलना में संतुलित सतह पर सोना कई लोगों के लिए अधिक आरामदायक हो सकता है। यही कारण है कि अब लोग स्वास्थ्य की दृष्टि से खाट को नए नजरिए से देखने लगे हैं। गर्मियों में प्राकृतिक ठंडक का अनुभव भारत जैसे गर्म जलवायु वाले देश में खाट का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। फोम और स्प्रिंग वाले गद्दे शरीर की गर्मी को रोक लेते हैं, जबकि खाट के नीचे और ऊपर दोनों ओर से हवा का प्रवाह बना रहता है। इससे शरीर को प्राकृतिक ठंडक मिलती है और नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। बढ़ती बिजली खपत और एयर कंडीशनर पर निर्भरता के दौर में खाट एक प्राकृतिक और ऊर्जा बचाने वाला विकल्प बनकर सामने आ रही है। पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक आज पूरी दुनिया टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण की बात कर रही है। आधुनिक फर्नीचर में प्लास्टिक, केमिकल और सिंथेटिक फोम का उपयोग बढ़ता जा रहा है, जिनका पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसके विपरीत लकड़ी और प्राकृतिक रस्सियों से बनी खाट पर्यावरण-अनुकूल मानी जाती है। खाट लंबे समय तक चलती है, आसानी से मरम्मत हो जाती है और इसके अधिकांश हिस्से प्राकृतिक रूप से नष्ट हो सकते हैं। यही कारण है कि पर्यावरण के प्रति जागरूक लोग अब खाट को टिकाऊ जीवनशैली का हिस्सा मानने लगे हैं। कम खर्च में टिकाऊ विकल्प महंगे फर्नीचर और ब्रांडेड गद्दों की बढ़ती कीमतों के बीच खाट आर्थिक रूप से भी बेहतर विकल्प साबित हो रही है। स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाई गई खाट कम लागत में उपलब्ध हो जाती है और वर्षों तक उपयोग में रहती है। जरूरत पड़ने पर उसकी रस्सियां बदलकर उसे फिर से नया बनाया जा सकता है। इससे न केवल ग्रामीण कारीगरों को रोजगार मिलता है, बल्कि स्थानीय हस्तकला को भी बढ़ावा मिलता है। शहरों में भी बढ़ रहा खाट का चलन अब खाट केवल गांवों तक सीमित नहीं रही। बड़े शहरों में भी लोग इसे आधुनिक इंटीरियर डिजाइन का हिस्सा बना रहे हैं। बालकनी, टैरेस, गार्डन और कैफे में खाट का उपयोग सजावटी और उपयोगी दोनों रूपों में किया जा रहा है। रिसॉर्ट, होमस्टे और देसी थीम वाले कैफे भी ग्राहकों को पारंपरिक अनुभव देने के लिए खाट का उपयोग कर रहे हैं। यह परंपरा और आधुनिकता के सुंदर मेल का उदाहरण बनता जा रहा है। सोशल मीडिया पर बढ़ी लोकप्रियता सोशल मीडिया ने भी खाट की वापसी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। “सस्टेनेबल लिविंग”, “देसी लाइफस्टाइल” और “रूट्स की ओर वापसी” जैसे ट्रेंड युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। लोग अपने घरों और फार्महाउस में खाट के साथ तस्वीरें साझा कर रहे हैं और इसे एक सांस्कृतिक पहचान के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं। नई पीढ़ी अब उन परंपराओं को नए नजरिए से देख रही है जिन्हें कभी पुराना और अप्रासंगिक माना जाता था। सामाजिक आत्मीयता का प्रतीक भारतीय साहित्य, लोकगीतों और फिल्मों में खाट का विशेष स्थान रहा है। यह आत्मीयता, संवाद और सामूहिकता का प्रतीक मानी जाती है। एक समय था जब परिवार के सदस्य खाट पर बैठकर घंटों बातचीत करते थे। आज डिजिटल युग में, जब लोग एक ही घर में रहकर भी मोबाइल स्क्रीन तक सीमित हो गए हैं, खाट जैसे सामूहिक बैठने के स्थान सामाजिक निकटता को फिर जीवित कर सकते हैं। परंपरा और आधुनिकता का संतुलन यह जरूरी नहीं कि आधुनिक फर्नीचर पूरी तरह अप्रासंगिक हो गया हो। आधुनिक जीवन की आवश्यकताएं अलग हैं और कई परिस्थितियों में आधुनिक बेड अधिक सुविधाजनक भी हो सकते हैं। लेकिन खाट की बढ़ती लोकप्रियता यह जरूर दर्शाती है कि लोग अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, पर्यावरण और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी महत्व देने लगे हैं। जड़ों की ओर लौटता समाज लकड़ी की खाट का पुनर्जागरण उस व्यापक सामाजिक बदलाव का हिस्सा है जिसमें लोग अपनी जड़ों की ओर लौटने का प्रयास कर रहे हैं। चाहे जैविक खेती हो, पारंपरिक भोजन हो, मिट्टी के बर्तन हों या खाट—समाज अब यह महसूस कर रहा है कि विकास का अर्थ केवल नई तकनीक नहीं, बल्कि उन परंपराओं को समझना भी है जो जीवन को सरल, स्वस्थ और संतुलित बनाती हैं। आज जब जीवन तेजी से जटिल होता जा रहा है, तब लकड़ी की खाट सादगी, संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य का संदेश देती है। यही कारण है कि लोग दोबारा लकड़ी की खाट की ओर लौट रहे हैं।
12 वर्षों बाद जीवनमुक्त सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी के पावन मुख से सत्संग श्रवण कर भावविभोर हुए हजारों श्रद्धालु
हरे माधव सत्संग रूपी मानसरोवर में डुबकी लगाने उमड़ा आस्था का जनसैलाब
नागपुर/गोंदिया, भारत की आध्यात्मिक परंपरा सदैव मानव कल्याण, सर्वधर्म समभाव और परमार्थ की जीवंत धारा रही है। इसी दिव्य परंपरा का अद्भुत स्वरूप 17 मई 2026 को नागपुर तथा 20 मई 2026 को जालना, महाराष्ट्र में आयोजित “हरे माधव सत्संग” में देखने को मिला, जहां 12 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जीवनमुक्त सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी के पावन मुखारविंद से सत्संग श्रवण करने हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सत्संग स्थल पर श्रद्धालुओं की इतनी अधिक संख्या पहुंची कि विशाल मैदान और भव्य पंडाल भी छोटा पड़ गया। स्थिति यह रही कि आयोजकों को पंडाल की साइड बाउंड्री कवर खोलकर बाहर अतिरिक्त मेटिंग बिछाकर श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था करनी पड़ी। दूर-दूर तक केवल श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुपम दृश्य दिखाई दे रहा था। ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान ऐसा प्रतीत हुआ मानो धरती पर किसी दिव्य लोक का अवतरण हो गया हो। वातावरण में भक्ति, प्रेम और सत्संग की ऐसी मधुर धारा प्रवाहित हो रही थी जिसे शब्दों में पूर्णतः व्यक्त कर पाना संभव नहीं है। हजारों भक्त सतगुरु प्रेम में तल्लीन होकर बाबा ईश्वरशाह साहिब जी के श्रीदर्शन एवं अमृतमयी वचनों का लाभ प्राप्त कर रहे थे। रात्रि 2 बजे तक श्रद्धालु सतगुरु भक्ति में भावविभोर होकर सद्गुणगान करते रहे। आधुनिक पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव वाले वर्तमान समय में भारतीय शाश्वत संस्कृति का यह विराट स्वरूप उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति का अनुभव कराने वाला रहा। भक्तों ने भावुक होकर विनती की कि वर्ष में कम से कम दो बार “हरे माधव सत्संग” का आयोजन अवश्य कराया जाए, ताकि अधिक से अधिक श्रद्धालु इस आध्यात्मिक अमृत का लाभ प्राप्त कर सकें। हरे माधव परमार्थ पंथ के उन्नायक सद्गुरु बाबा ईश्वरशाह महाराज जी की भक्ति, प्रेम और परमार्थ की यह अलौकिक धारा आज भी लाखों लोगों के जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान कर रही है। नागपुर और जालना का यह दिव्य आयोजन श्रद्धा, आस्था और भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति के विराट स्वरूप का जीवंत उदाहरण बन गया।
✍️ लेखक : कर विशेषज्ञ, स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि, संगीत माध्यमा, सीए (एटीसी), एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र
चित्तौरा झील तट पर श्रद्धालुओं ने लिया जल संरक्षण का सामूहिक संकल्प
बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। चक्रवर्ती सम्राट राष्ट्रवीर Maharaja Suheldev के विजय उत्सव तथा गंगा दशहरा के पावन अवसर पर पौराणिक चित्तौरा झील तट पर सरयू आरती एवं जल संरक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम महाराजा सुहेलदेव सेवा समिति, जिला प्रशासन और जिला पर्यटन-संस्कृति परिषद के संयुक्त तत्वावधान में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के दौरान सरयू नदी का पूजन-अर्चन कर जल एवं पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पर्यावरणविद, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य विकास अधिकारी Sunil Kumar Dhanwanta ने कहा कि “जल ही जीवन है” और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नदियों, तालाबों, झीलों और पोखरों का संरक्षण बेहद आवश्यक है। उन्होंने जल स्रोतों की नियमित साफ-सफाई और संरक्षण पर जोर दिया।
पीडी डीआरडीए मनीष कुमार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए नदियों का सामूहिक रखरखाव जरूरी है। साथ ही भूमिगत जल स्तर बढ़ाने के लिए व्यापक प्रयास किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में जल संकट से बचा जा सके।
महामना मालवीय मिशन के अध्यक्ष अवध संजीव श्रीवास्तव एडवोकेट ने बताया कि पर्यावरण और जल संरक्षण के लिए लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। नदी और तालाबों के तटीय क्षेत्रों में पंचवटी प्रजाति के वृक्षों का रोपण कर उन्हें स्थानीय सहयोग से संरक्षित किया जा रहा है।
महाराजा सुहेलदेव सेवा समिति के सचिव दिलीप कुमार अर्जुन ने कहा कि चित्तौरा झील के संरक्षण और साफ-सफाई के लिए प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपील की।
महंत स्वामी विष्णु देवाचार्य जी महाराज के नेतृत्व में सरयू नदी तट पर सामूहिक प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जिसमें “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” की मंगलकामना की गई।
कार्यक्रम का संचालन कार्यकारी अध्यक्ष कृष्ण मोहन गोयल ने किया। इस अवसर पर गोसेवा आयोग सदस्य राजेश सिंह सेंगर, मुख्य राजस्व अधिकारी सौरभ दुबे, नगर मजिस्ट्रेट राजेश प्रसाद, पर्यावरणविद डॉ. पंकज श्रीवास्तव, विहिप नेता अजय सिंह अज्जू सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग और अधिकारी उपस्थित रहे। समापन अवसर पर सभी लोगों ने पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।