Tuesday, May 12, 2026
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गैस-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सपा का विरोध, जनता की समस्याओं को लेकर उठी आवाज

भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।

80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

शिक्षा मंत्री से मिला परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ समस्याओं के समाधान का मिला भरोसा

पटना(राष्ट्र की परम्परा)
परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नवमनोनीत शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान महासंघ के पदाधिकारियों ने अंग वस्त्र और पुष्पगुच्छ (बुके) भेंट कर शिक्षा मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी।

शिक्षक समस्याओं पर हुई विस्तृत चर्चा

​मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के शिक्षकों को आ रही विभिन्न प्रशासनिक और सेवा संबंधी समस्याओं से मंत्री को अवगत कराया। महासंघ के नेताओं ने शिक्षकों के लंबित मामलों, वेतन विसंगतियों और कार्यदशाओं में सुधार को लेकर एक मांग पत्र भी सौंपा।

मंत्री का आश्वासन: “जल्द निकलेगा समाधान”

​शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना। उन्होंने आश्वस्त करते हुए कहा कि,
​”सरकार शिक्षकों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। शिक्षक राष्ट्र के निर्माता हैं और उनकी जायज समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर यथाशीघ्र हल किया जाएगा।”

संगठन के पदाधिकारियों ने साझा किए विचार

​मुलाकात के बाद महासंघ के नेताओं ने मीडिया से बात करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी:
​नवनीत कुमार (प्रदेश अध्यक्ष) एवं प्रणय कुमार (प्रदेश संयोजक): “शिक्षा मंत्री के साथ सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई है। हमें पूर्ण विश्वास है कि उनके नेतृत्व में शिक्षकों की लंबे समय से लंबित मांगों पर ठोस निर्णय लिया जाएगा।”

​शिशिर कुमार पाण्डेय (प्रदेश संगठन महामंत्री) एवं अशोक कुमार (प्रदेश अध्यक्ष, प्रधान शिक्षक प्रकोष्ठ): “शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया है कि विभागीय स्तर पर आने वाली बाधाओं को दूर कर जल्द ही राहत पहुंचाई जाएगी।”

​मृत्युंजय ठाकुर (प्रदेश मीडिया प्रभारी): “महासंघ शिक्षकों की आवाज को मजबूती से उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्री जी के सकारात्मक रुख से प्रदेश के लाखों शिक्षकों में आशा की नई किरण जगी है।”

​इस अवसर पर संगठन के कई अन्य प्रमुख सदस्य भी मौजूद रहे, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षकों के सम्मान को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

सांध्य ‘नित्य हलचल’ पर पीएचडी बनी विश्व का प्रथम शोधकार्य

शोधार्थी डॉ. मुकुट अग्रवाल के नाम दर्ज हुआ विश्व-रिकार्ड

नारनौल/हरियाणा(राष्ट्र की परम्परा)
हरियाणा की हिंदी-पत्रकारिता के विकास में ‘नित्य हलचल’ की भूमिका’ विषय पर सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी (राजस्थान) से पीएचडी करने वाले शोधार्थी मुकुट अग्रवाल का नाम विश्व के किसी भी सांध्य हिंदी-दैनिक पर पीएचडी करने वाले प्रथम शोधार्थी के रूप में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है। इसके साथ ही, ‘नित्य हलचल’ विश्व का प्रथम सांध्य हिंदी-दैनिक बन गया है, जिस पर पीएचडी हुई है तथा सिंघानिया विश्वविद्यालय विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय बन गया है, जहाँ यह शोधकार्य संपन्न हुआ है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स प्रबंधन द्वारा प्रदत्त प्रमाण-पत्र, मैडल, प्रतीक-चिह्न और टीशर्ट शोधार्थी डॉ. मुकुट अग्रवाल को भेंटकर सम्मानित करते हुए, सिंघानिया विश्वविद्यालय के कुलपति तथा भारतीय प्रशासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी डॉ. मनोजकुमार गर्ग ने कहा कि डॉ. मुकुट अग्रवाल की यह विशिष्ट उपलब्धि सिंघानिया विश्वविद्यालय के लिए भी बड़े गौरव और गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि हमारा विश्वविद्यालय नवाचार को इसी प्रकार प्राथमिकता और प्रोत्साहन देता रहेगा। आचार्य एवं सांस्कृतिक संकाय अधिष्ठाता तथा विख्यात साहित्यकार डॉ. रामनिवास ‘मानव’ ने भी, इस महत्त्वपूर्ण उपलब्धि हेतु डॉ. मुकुट अग्रवाल को बधाई देते हुए, स्पष्ट किया कि ‘नित्य हलचल’ जैसे किसी सांध्य हिंदी-दैनिक पर पीएचडी होना सचमुच एक ऐतिहासिक घटना है। उन्होंने आशा प्रकट की कि इससे पत्रकारिता के विकास में सांध्यकालीन समाचार-पत्रों की भूमिका और उनके योगदान के महत्त्व को रेखांकित करने में सहायता मिलेगी। इस अवसर पर आयोजित संक्षिप्त कार्यक्रम में 20वीं शताब्दी के अंतिम दशक में हिसार से प्रकाशित ‘नित्य हलचल’ की संपादक रही और वर्तमान में नारनौल निवासी डॉ. कांता भारती, शोध-निर्देशक डॉ. आरती प्रजापति, उपकुलपति डॉ. पवन त्रिपाठी, कुलसचिव एमआई हाशमी, शोध-अधिष्ठाता डॉ. सुमेर सिंह, मीडिया-संकाय अधिष्ठाता डॉ. मनोज वर्गीज, लोक-संपर्क अधिकारी डॉ. मोनिका सैनी तथा ऋतु मुकुट अग्रवाल की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। ज्ञातव्य है कि उक्त शोध-प्रबंध प्रकाशित होकर शीघ्र ही पाठकों को उपलब्ध होने जा रहा है।

नीट संकट और परीक्षा-व्यवस्था की विश्वसनीयता

पारदर्शिता के नाम पर बार-बार टूटता भरोसा, और सुधार की अनिवार्य चुनौती

नीट-2026 को लेकर उत्पन्न अनिश्चितता और रद्दीकरण संबंधी आशंकाओं ने लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। प्रतियोगी परीक्षाएँ केवल चयन की प्रक्रिया नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य, परिश्रम और विश्वास का आधार होती हैं। यदि परीक्षा-प्रणाली पर बार-बार सवाल उठते हैं, तो इसका सबसे बड़ा असर ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्रों पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल परीक्षा आयोजित करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पारदर्शिता, समयबद्ध सूचना और निष्पक्षता सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक हो जाता है। परीक्षा-व्यवस्था में भरोसा बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक शिक्षा-तंत्र की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
भारत की प्रतियोगी परीक्षा-व्यवस्था केवल प्रवेश की प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, अवसर और प्रतिभा-परीक्षण का आधार है। जब राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट जैसी राष्ट्रीय परीक्षा को लेकर अनियमितता, संदिग्धता या रद्दीकरण की स्थिति बनती है, तो केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि लाखों विद्यार्थियों का भरोसा, समय और मानसिक संतुलन भी टूटता है। परीक्षा किसी तकनीकी आयोजन भर का नाम नहीं है; यह उस भरोसे का प्रतीक है जिसमें राज्य यह सुनिश्चित करता है कि परिश्रम, योग्यता और तैयारी का उचित मूल्य मिलेगा। इसलिए परीक्षा-प्रणाली की विश्वसनीयता किसी भी लोकतांत्रिक शिक्षा-व्यवस्था की रीढ़ होती है।

नीट जैसे मामलों में सबसे चिंताजनक तथ्य केवल यह नहीं कि कोई एक घटना घट गई, बल्कि यह है कि ऐसी घटनाएँ बार-बार क्यों सामने आती हैं। जब कोई राष्ट्रीय परीक्षा संदेह के घेरे में आती है, तो पूरा सार्वजनिक विश्वास डगमगाने लगता है। विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक, कोचिंग संस्थान और प्रशासन—सभी एक ऐसे प्रश्न से जूझते हैं जिसका उत्तर केवल प्रेस विज्ञप्तियों से नहीं मिल सकता। प्रश्न यह है कि क्या हमारी परीक्षा-व्यवस्था वास्तव में इतनी मजबूत है कि वह पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा—तीनों मोर्चों पर एक साथ टिक सके? यदि नहीं, तो समस्या केवल एक परीक्षा की नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की है।

परीक्षा-व्यवस्था का संकट अचानक पैदा नहीं होता। यह उन छोटी-छोटी कमजोरियों से बनता है जिन्हें समय रहते ठीक नहीं किया जाता। प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया, गोपनीय सामग्री का संरक्षण, लॉजिस्टिक ट्रांसपोर्ट, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, तकनीकी सत्यापन, पहचान-प्रक्रिया और उत्तर-पत्रों की हैंडलिंग—इन सभी स्तरों पर यदि एक भी कड़ी कमजोर हो जाए, तो पूरी व्यवस्था संदेह के घेरे में आ सकती है। आधुनिक समय में परीक्षा केवल कागज और कलम का आयोजन नहीं रह गई है; वह सूचना, सुरक्षा और नियंत्रण के अत्यंत जटिल नेटवर्क से जुड़ी प्रणाली बन चुकी है। इसलिए किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही का सीधा प्रभाव छात्रों के भविष्य पर पड़ता है।

यह भी समझना होगा कि परीक्षा-प्रणाली में भरोसा केवल पारदर्शिता से नहीं बनता, बल्कि निरंतरता से बनता है। यदि विद्यार्थी को यह आश्वासन न हो कि उसकी मेहनत का मूल्य स्थिर और सुरक्षित है, तो उसकी तैयारी अनिश्चितता में बदल जाती है। एक ईमानदार छात्र परीक्षा केंद्र तक पहुँचने से पहले ही मन में कई प्रश्न लेकर आता है—क्या प्रश्नपत्र सुरक्षित रहेगा? क्या कोई अनुचित लाभ नहीं ले जाएगा? क्या पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष होगी? जब ऐसे प्रश्न सामान्य हो जाएँ, तब समझ लेना चाहिए कि संकट केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नैतिक भी है। शिक्षा का मूल उद्देश्य अवसर की समानता है, और यदि वही कमजोर पड़ जाए, तो व्यवस्था अपने उद्देश्य से भटक जाती है।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा जैसी परीक्षा में यह चिंता और अधिक गंभीर हो जाती है, क्योंकि यह केवल एक पेशेवर प्रवेश-परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के सामाजिक-आर्थिक सपनों का केंद्र है। ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र, निम्न-मध्यम वर्ग के अभ्यर्थी और छोटे शहरों के युवा सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी योग्यता के बल पर आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। लेकिन जब परीक्षा की शुचिता पर प्रश्न उठते हैं, तब सबसे अधिक नुकसान इन्हीं विद्यार्थियों का होता है। जिनके पास प्रभाव, संसाधन या नेटवर्क है, वे कई बार व्यवस्था की कमजोरियों से निकल जाते हैं; पर जिनके पास केवल मेहनत है, वे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। इसलिए परीक्षा की पारदर्शिता केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का भी प्रश्न है।

परीक्षा-व्यवस्था का संकट विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पहले ही अत्यधिक तनावपूर्ण होती है। छात्र लंबे समय तक कठोर अनुशासन, सीमित सामाजिक जीवन, पारिवारिक अपेक्षाओं और भविष्य की अनिश्चितता के बीच रहते हैं। जब ऐसी स्थिति में परीक्षा का भविष्य ही संदिग्ध हो जाए, तो मानसिक दबाव कई गुना बढ़ जाता है। कुछ विद्यार्थी हताश हो जाते हैं, कुछ अपनी रणनीति बार-बार बदलते हैं, और कुछ गहरे अवसाद में भी चले जाते हैं। इसलिए परीक्षा-प्रशासन को यह समझना चाहिए कि वह केवल तिथियाँ घोषित करने या केंद्र स्थापित करने का काम नहीं कर रहा, बल्कि युवाओं के भविष्य का भरोसा संभाल रहा है।

डिजिटल युग ने परीक्षा-प्रशासन को सुविधाएँ भी दी हैं और नई चुनौतियाँ भी। ऑनलाइन पंजीकरण, डिजिटल पहचान, सीसीटीवी निगरानी, एन्क्रिप्टेड डेटा और केंद्रीकृत नियंत्रण जैसी व्यवस्थाओं ने परीक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाया है। लेकिन इसी के साथ तकनीकी जोखिम भी बढ़े हैं। डेटा लीक, सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़, आंतरिक मिलीभगत, साइबर घुसपैठ और गलत सूचना का प्रसार—ये सभी नई चुनौतियाँ बनकर सामने आए हैं। इसलिए केवल तकनीक अपनाना पर्याप्त नहीं है; उसकी सुरक्षा, ऑडिट और जवाबदेही भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए। यदि तकनीक ही कमजोर हो जाए, तो पारदर्शिता का दावा खोखला साबित होगा।

परीक्षा-व्यवस्था में सुधार के लिए सबसे पहले जवाबदेही तय करनी होगी। जब कोई परीक्षा विवाद में आती है, तो अक्सर ध्यान केवल घटना पर केंद्रित रहता है। लेकिन असली प्रश्न यह है कि उस घटना की अनुमति किसकी लापरवाही से मिली। परीक्षा-आयोजक संस्था, संबंधित मंत्रालय, सुरक्षा एजेंसियाँ, केंद्र-स्तरीय अधिकारी और स्थानीय प्रशासन—सभी की भूमिका की समीक्षा आवश्यक है। जवाबदेही का अर्थ केवल किसी एक अधिकारी को हटाना नहीं, बल्कि पूरे ढाँचे का पुनर्मूल्यांकन करना है। यदि दोषी पकड़े नहीं जाते, प्रक्रिया की कमियाँ सार्वजनिक नहीं होतीं और सुधारात्मक कदम नहीं उठाए जाते, तो हर बार वही संकट दोहराया जाएगा।

दूसरी आवश्यकता स्वतंत्र और समयबद्ध ऑडिट की है। प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर परीक्षा-समापन तक हर चरण का सुरक्षित रिकॉर्ड होना चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तत्काल जांच संभव हो, इसके लिए ऐसा तंत्र चाहिए जो पारदर्शी भी हो और तेज भी। साथ ही परीक्षा-प्रबंधन में बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जहाँ कोई एक व्यक्ति या विभाग पूरी प्रक्रिया पर एकाधिकार न रखे। नियंत्रण का विकेंद्रीकरण और निगरानी का केंद्रीकरण—यही संतुलन सुरक्षित परीक्षा-तंत्र की आधारशिला बन सकता है।

तीसरी आवश्यकता विश्वसनीय संवाद व्यवस्था की है। सोशल मीडिया के दौर में अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं। ऐसे में संस्थाओं को केवल सही सूचना ही नहीं, बल्कि समय पर सूचना भी देनी चाहिए। अस्पष्टता संदेह को जन्म देती है। यदि छात्रों को यह स्पष्ट न हो कि अगला कदम क्या होगा, परिणाम कब आएगा, या पुनर्परीक्षा होगी या नहीं, तो वे अनावश्यक तनाव में घिर जाते हैं। इसलिए परीक्षा-प्रशासन को अपने संवाद को औपचारिकता से निकालकर भरोसेमंद सार्वजनिक सेवा में बदलना होगा।

चौथी और सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता कठोर और निश्चित दंड व्यवस्था की है। प्रश्नपत्र लीक, जालसाजी, सेंधमारी या आंतरिक सहयोग जैसी अनियमितताओं पर केवल नैतिक निंदा पर्याप्त नहीं है। जब तक अपराधियों को त्वरित और निश्चित दंड नहीं मिलेगा, तब तक व्यवस्था में सुधार अधूरा रहेगा। शिक्षा-क्षेत्र में दंड का उद्देश्य प्रतिशोध नहीं, बल्कि निवारण होना चाहिए। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि अनियमितता करने वाला यह समझ सके कि उसे लाभ नहीं, बल्कि त्वरित क्षति मिलेगी। तभी ईमानदार विद्यार्थी को यह भरोसा मिलेगा कि उसकी मेहनत सुरक्षित है।

भारत को अब ऐसी परीक्षा-संस्कृति की आवश्यकता है जिसमें छात्र को शक नहीं, सुरक्षा का अनुभव हो; जिसमें प्रशासन केवल आदेश देने वाला नहीं, बल्कि उत्तरदायी संरक्षक बने; और जिसमें पारदर्शिता केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हर प्रक्रिया में दिखाई दे। यही वह मार्ग है जिससे शिक्षा-व्यवस्था पर लौटता विश्वास संभव हो सकता है। यदि सुधार अभी नहीं किए गए, तो हर नई परीक्षा पुराने संदेहों की पुनरावृत्ति बनती रहेगी। और जब भरोसा बार-बार टूटता है, तो केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक पीढ़ी का आत्मविश्वास भी आहत होता है।

इसलिए नीट संकट को केवल एक घटना मानकर भूल जाना समाधान नहीं होगा। इसे एक चेतावनी की तरह समझना होगा। यह चेतावनी है कि यदि परीक्षा-व्यवस्था को तकनीकी चमक, औपचारिक घोषणाओं और तात्कालिक प्रतिक्रियाओं के भरोसे छोड़ दिया गया, तो भविष्य में संकट और गहरे होंगे। अब समय आ गया है कि परीक्षा-व्यवस्था को केवल नियंत्रण का नहीं, बल्कि न्याय, विश्वास और जवाबदेही का संस्थान बनाया जाए। यही सुधार आने वाली पीढ़ियों के लिए आवश्यक है और वर्तमान विद्यार्थियों के प्रति राज्य की नैतिक जिम्मेदारी भी।

डॉo सत्यवान सौरभ
कवि एवं सामाजिक विचारक

साइबर ठगी के शिकार युवक को मिली बड़ी राहत, पुलिस ने वापस कराए 65 हजार रुपये

थाना चौक साइबर सेल की तत्परता से पीड़ित के खाते में लौटी धनराशि, पुलिस टीम की हो रही सराहना

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के थाना चौक क्षेत्र में साइबर ठगी का शिकार हुए एक युवक को पुलिस की सक्रियता और त्वरित कार्रवाई के चलते बड़ी राहत मिली है। थाना चौक साइबर सेल टीम ने प्रभावी प्रयास करते हुए ठगी गई धनराशि में से 65,481 रुपये पीड़ित के खाते में वापस करा दिए। इस सराहनीय कार्यवाही से आमजन में पुलिस के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना चौक क्षेत्र के चैनपुर निवासी चित्रांगद चौरसिया पुत्र सिब्बन लाल वर्मा के साथ ऑन-लाइन फ्रॉड के माध्यम से 95,481 रुपये की साइबर ठगी कर ली गई थी। ठगी का एहसास होते ही पीड़ित ने तत्काल ऑन-लाइन शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मामला थाना चौक साइबर सेल के संज्ञान में आया।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देश पर थाना चौक साइबर सेल टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू की। साइबर तकनीकी जांच एवं आवश्यक विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए टीम ने संबंधित माध्यमों से संपर्क कर धनराशि को होल्ड कराया। लगातार प्रयासों और पीड़ित की सजगता के परिणामस्वरूप 65,481 रुपये सफलतापूर्वक पीड़ित के बैंक खाते में वापस करा दिए गए।
धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित एवं उसके परिजनों ने महराजगंज पुलिस का आभार व्यक्त किया। वहीं क्षेत्र में साइबर सेल की इस कार्रवाई की व्यापक सराहना की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की ऑन-लाइन ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
इस कार्यवाही मे
उप-निरीक्षक अंकित कुमार राय,कंप्यूटर ऑपरेटर ग्रेड-ए प्रिया सिंह,कांस्टेबल विशाल प्रजापति, की अहम भूमिका रही।
पुलिस की इस त्वरित एवं सफल कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि जागरूकता और समय पर शिकायत दर्ज कराने से साइबर अपराधों में ठगी गई धनराशि वापस पाना संभव है।

सड़क और नाली की समस्या से जूझ रही केवटलिया की जनता

सड़क के धंसने से हादसों का खतरा

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
नगरपालिका स्थित केवटलिया की जनता सड़क और बजबजाती नाली की समस्या से परेशान हैं।
देई माता मंदिर के सामने से केवटलिया पूरब को जाने वाली प्रमुख सड़क काफ़ी हद तक धंस गई है, जगह-जगह गहरे गड्ढे होने से बाइक और चार पहिया वाहनों का निकलना मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आए दिन वाहन पलट जाते हैं और लोग घायल हो जाते हैं। बरसात में स्थिति और खराब हो जाती है। लोगो ने कहा की नगर पालिका से कई बार सड़क बनवाने की गुहार लगाई गई, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
केवटलिया के घुरा प्रसाद, स्नेही राजभर, शिवजीत और हृदया पाण्डेय ने शीघ्र सड़क निर्माण की मांग की है। वहीं सरवन पाण्डेय ने बताया कि सफाई कर्मि कभी नाली की सफाई नही करते है । उन्होंने कहा की नाली जाम होने से गंदा पानी सड़क पर फैल रहा है। इससे बीमारियों के फैलने की आशंका बनी हुई है।
पूछे जाने पर अधिशासी अधिकारी निरुपमा प्रताप ने बताया कि सड़के प्रस्तावित हैं नाली की सफाई के लिए कर्मचारियों को भेज कर तत्काल समस्या का समाधान करा दिया जाएगा।

पुरुषोत्तम मास के स्वामी हैं भगवान विष्णु – आचार्य अजय

17 मई रविवार से शुरू होकर 15 जून सोमवार तक रहेगा पुरुषोत्तम मास

सलेमपुर, देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। भगवान विष्णु के अर्चना और पूजन को समर्पित पुरुषोत्तम मास जिसे अधिक मास भी कहते हैं, इसे भगवान विष्णु की भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस साल इस महीने की शुरुआत 17 मई दिन रविवार को हो रहा है ,समापन 15 जून सोमवार को होगा। उक्त बातें बताते हुए आचार्य अजय शुक्ल ने कहा कि इस महीने में शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माना जाता है।लेकिन पूजा, जप,तप और दान का करोड़ गुना अधिक शुभ फल प्राप्त होता है।पौराणिक कथाओं के अनुसार इस अधिक मास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं इस लिए इसे पुरुषोत्तम मास कहते हैं।यह महीना हिन्दू पंचांग और ऋतु के संतुलन के लिए होता है।चंद्र और सौर वर्ष के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए अधिक मास 30 दिनों का समय जोड़ता है,जो ऋतुओं के अनुसार सही समय की गणना सुनिश्चित करता है।
आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि यह महीना सत्कर्म और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाला है।इस साल यह ज्येष्ठ मास में लग रहा है तो इसे अधिक ज्येष्ठ मास भी कहेंगे।

श्रीराम कथा एवं भागवत कथा का भव्य आयोजन 17मई से

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
नगरपालिका क्षेत्र केवटलिया स्थित हनुमान ज़ी की कुटी पर 17 मई से श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन होगा एवं दिव्य कथा का समापन 24 मई को होगा।
ततपश्चात 25 जून से श्रीराम कथा के साथ सुंदरकांड का विधिवत पाठ आयोजित किया जा रहा है, इसको लेकर भव्य आयोजन की तैयारी जोरों पर चल रही है।
मंदिर के प्रमुख पुजारी केशरी दास ने बताया कि यह पूरा आयोजन भक्तिभाव के माहौल के साथ संपन्न होगा। उन्होंने कहा कि धरती माँ भक्तो की भक्ति के बल पर ही टिकी हुई है। इसलिए सभी श्रद्धालुओं से आग्रह है कि भगवान के इस दिव्य कार्यक्रम मे भारी संख्या में पहुंचकर कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करें।
केशरी दास ने बताया कि कथा के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसके लिए मंदिर परिसर में पंडाल, पेयजल और बैठने की समुचित व्यवस्था की जा रही है।
वहीं पुजारी ने बताया कि मंदिर परिसर के दीवाल की जर्जर स्थिति पर चिंता जताई, कहा कि मंदिर की दीवाल का दक्षिणी हिस्सा काफी फट हो चुका है जो कभी भी गिर सकता है। यदि यह किसी श्रद्धालु पर गिरा तो बड़ा हादसा हो सकता है।
उन्होंने नगर के लोगों और शासन प्रशासन से मांग की है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए बाउंड्री के दीवाल की तत्काल मरम्मत कराई जाए। केशरी दास ने कथा में सहयोग के लिए क्षेत्र के सम्मानित जनमानस से अपील की है।

छुट्टी पर प्रधानमन्त्री मौज मस्ती में मोदी

आलेख-बादल सरोज

जितनी फुर्सत में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं, उतनी निश्चिन्तता और मौजमस्ती में दुनिया का शायद ही कोई राष्ट्र प्रमुख हो ।
पूरी दुनिया फिक्रमंद हुई पड़ी है, ट्रम्प और नेतन्याहू के थोपे गए ईरान युद्ध और लेबनान हमलों के प्रभावों और नतीजों का आंकलन कर रही है। होरमुज़ जलडमरूमध्य की पहले बंदी और अब अमरीकी नाकेबंदी के निहितार्थ को समझने में लगी हैं। उनके असरात से अपने-अपने देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बचाने और संभालने के लिए रास्ते ढूँढने में जुटी है। आर्थिक जगत की वैश्विक संस्थाएं भारत की आर्थिक गति-प्रगति को लेकर सवाल पर सवाल खड़े कर रही हैं, जिनके जवाब देने और अगर वे सही हैं, तो जरूरी दुरुस्ती और सुधार करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय उनका इन्तजार कर रहा है, मगर लगता है देश के प्रधानमंत्री छुट्टी पर हैं और उस पद पर विराजे नरेंद्र मोदी वीतरागी, तटस्थ, निस्पृह भाव के साथ पूरी बेफिक्री से मौजमस्ती और सैर सपाटे में मशगूल हैं।
उनकी पिछले कुछ दिनों की ‘व्यस्तताओं’ पर ही नजर डालने से बात और साफ़ हो जाती है। जब केंद्र सरकार भारतीय नागरिकों के लिए किसी भी मार्ग से ईरान की यात्रा न करने की हिदायत जारी कर रही थी, भारत के झंडे लगे जहाज होरमुज़ में असमंजस में खड़े थे, अमरीकी नाकेबंदी ने उनकी सलामती खतरे में डाल दी थी, ऐसे में प्रधानमंत्री कहाँ थे? वे बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान हुगली नदी में नाव में सचमुच की सैर करते हुए एक महंगे कैमरे से न जाने किसकी तस्वीरे खीचने का अभिनय कर रहे थे। ऐसा करते हुए हुए आठों आयामों पर तैनात अपने फोटोग्राफरों से अपनी ही तस्वीर उतरवा रहे थे।
इस फोटोशूट से फारिग होते ही वे सीधे गंगटोक जा पहुंचे और सिक्किम के 50वें राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर स्थानीय बच्चों के साथ स्पोर्ट्स जैकेट और जूतों में फुटबॉल खेलते हुए तस्वीरें खिंचवाई। उनकी सरकार की विज्ञप्तियों में इसे ऊर्जा से भरे मोदी का अवतार बताया गया। यहाँ से उड़कर वे अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी (बनारस) में अवतरित हुए, जहां वे अब तक 5 बार गंगा आरती में भाग लेते हुए फोटो भी खिंचवा चुके हैं और फिल्म भी बनवा चुके हैं। इस बार यहाँ दो दिन तक रुककर अनेक विशेष फोटो शूट करवाए और वीडियो बनवाये। महिलाओं के सम्मेलन में पहले भाषण देते हुए, फिर उनसे चर्चा करते हुए फोटो शूट का अगला चरण पूरा किया।
अगले दिन बनारस में ही 14 किलोमीटर लंबा रोड शो कर दिखाया। इस रोड शो में फूलों से सजी खुली गाड़ी में उनकी तस्वीरें और काशी की गलियों में लोगों का अभिवादन स्वीकार करते हुए उनके फोटोशूट सामने आए। रोड शो के समापन पर उन्होंने काशी विश्वनाथ के मन्दिर में हाजिरी लगाई।
मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय उन्होंने सबसे मारक फोटो शूट कराया। शंकर के वेश में श्रृंगार करके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में डमरू लेकर तस्वीरें खिंचाई और इन्हें “भक्ति और शक्ति” के प्रतीक के रूप में अपने ही ट्विटर (अब एक्स) हैंडल से दुनिया भर को दिखाया भी। लगता है, यहाँ थोड़ी सी चूक हुई है : शिव का वेश धरते हुए डमरू और त्रिशूल तो थाम लिया, मगर गले में सांप पहनना भूल गए।
इसके पहले असम के डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान में काम करने वाली महिलाओं के साथ फोटो सेशन किया जा चुका था। नित नए, कई बार एक ही दिन में अनेक नए-नए परिधान में फोटो खिंचाने के इस चरण की पूर्णाहुति विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद भाजपा कार्यालय में हुए उत्सव में हुई। यहाँ उन्होंने पारंपरिक बंगाली धोती और पहनावे में तस्वीरें खिंचवाई। इन सबके पहले वे अंडमान निकोबार की सैर कर आये थे और एक भरा-पूरा फोटो अलबम बनवा लाये थे। प्रधानमंत्री के सैर-सपाटे की यह अभी-अभी की ताज़ी-ताज़ी झलकें हैं। अपने 12 वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने कितने दिन इस तरह के कामों के लिए निकाले हैं, इसका विवरण उनकी आधिकारिक साईट में भी नहीं समा पाया है।
फोटो शूट करवाने की उनकी आसक्ति कितनी अधिक है, यह बात 14 फरवरी 2019 को हुए पुलवामा आतंकी हमले के दौरान देखी भी जा चुकी है और जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन राज्यपाल एवं प्रशासक सतपाल मलिक द्वारा दर्ज भी की जा चुकी है। मलिक ने बताया था कि जब पुलवामा पर हमला हुआ था, उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में डिस्कवरी चैनल के लिए एक शूटिंग में व्यस्त थे। यह काम उन्हें इतना जरूरी लगा था कि दोपहर 3 बजकर 10 मिनट पर इस आतंकी हमले की खबर आने के बाद भी वे शाम करीब 6:30 बजे तक बोट सफारी और फोटोशूट करवाते रहे थे।
इन मौज मस्ती की यात्राओं के अलावा इसी दौरान बाकी का समय मोदी जी ने उस काम – चुनाव अभियान – में लगाया, जिसमें वे सिद्धहस्त और पारंगत दोनों हैं। हाल में निबटे 2026 के पांच राज्यों — पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी — के विधानसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 23 चुनावी रैलियां और रोड शो किए। मोदी का सबसे अधिक ध्यान पश्चिम बंगाल पर रहा, जहाँ उन्होंने सबसे ज्यादा 18 रैलियां और रोड शो किये। असम में 2, तमिलनाडू, केरल और पूदुचेरी में एक-एक रैली की।
चुनावी आमसभाओं में घनगरज उनका प्रिय शगल रहा है और यह लगातार बढ़ता जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 206 रैलियां, रोड शो और जनसभाएं कीं थीं। यह संख्या 2019 में की गई 142 रैलियों की तुलना में 64 अधिक थी, जो एक नया रिकॉर्ड है। प्रायोजित टीवी और मीडिया में दिए 80 से अधिक इंटरव्यूज इसके अलावा हैं। विदेशी यात्राओं की आधिकारिक सूची पीएमओ की वेबसाइट पर नियमित रूप से अपडेट की जाती है, लेकिन घरेलू यात्राओं के कुल दिनों का नवीनतम आंकड़ा सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध नहीं है। सिर्फ 2018 तक की रिपोर्ट है, जो 313 दिनों तक मोदी के दिल्ली में न रहने का उल्लेख करती है।
अगर देश का प्रधानमंत्री यही सब कर रहा है, तो फिर प्रधानमंत्री का काम कौन कर रहा है? अगर यही मौज मस्ती, फोटो बाजी, पर्यटन और चुनावी रैलियाँ ही प्रधानमंत्री का काम है, तो सवाल उठता है कि वो कौन है, जो असल में वह काम कर रहा है, जिसके लिये प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है। देश के सामने दरपेश सवालों पर कैबिनेट की मीटिंग करके रास्ते निकालने और जरूरी कदम उठाने का काम कौन कर रहा है – और अगर कर रहा है, तो किस अधिकार से कर रहा है? ध्यान रहे, ये वही प्रधानमंत्री हैं, जिनके बारे में उनकी भक्त मंडली दावा करती है कि वे कभी छुट्टी नहीं लेते, कि वे 18-18 घंटे काम करते हैं।
यह सिर्फ देश के भीतर के पर्यटन भर का मामला नहीं है, मोदी के नाम भारत के सबसे अधिक विदेश यात्रा करने वाले प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड भी है। अभी तक वे 99 अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं कर चुके हैं, जिसमें वे 79 से अधिक देशों में , कईयों में दो-दो, तीन-तीन बार भी गए। वर्ष 2014 में पदभार ग्रहण करने के बाद से वे पृथ्वी के 7 महाद्वीपों में से 6 महाद्वीपों की यात्रा कर चुके है। इस मामले में उनका जो रिकॉर्ड है, वह दुनिया के किसी भी राजनेता के नाम नहीं होगा।
सातवें महाद्वीप अन्टार्कटिका भी वे जाते-जाते रह गए। अप्रैल 2025 में, चिली – जिसे अंटार्कटिका का प्रवेश द्वार माना जाता है — के राष्ट्रपति ने उन्हें अंटार्कटिका का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया था, इसलिए यह मानकर चला जाना चाहिए कि वे इस महाद्वीप को भी जाए बिना नहीं छोड़ेंगे, वहां भी फोटो शूट करवाकर ही मानेंगे।
इसी महीने मई 2026 में वे चार यूरोपीय देशों — नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड और इटली — की यात्रा पर जाने वाले हैं। यह यात्रा 15 से 20 मई के बीच निर्धारित है, जो यूरोपीय संघ के साथ हालिया समझौते के बाद उनकी पहली यूरोप यात्रा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक उनकी अब तक की विदेश यात्राओं पर कोई 66 अरब रुपयों का खर्चा हो चुका है।
प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर खर्च ज्यादा मायने नहीं रखता। मायने वह हासिल रखता है, जो इन यात्राओं के बाद हुआ होता है। संसदीय लोकतंत्र में हर विदेश यात्रा के बाद प्रधानमंत्री संसद के जरिये पूरे देश को यह बताया करते थे, उस यात्रा में उन्होंने क्या किया, किन मुद्दों पर चर्चा हुई, देश को क्या मिला। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से संसद को सूचित किये जाने की यह प्रथा भी समाप्त हो गई है ।
अब मास्को से लौटते हुए बीच रास्ते में अचानक फ्लाइट लाहौर की तरफ मुड़ जाती है और भारत का प्रधान मंत्री, बिन बुलाये मेहमान के रूप में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की नवासी की शादी में बनारसी साड़ियों और पठानी सूट्स का भात लेकर पहुँच जाता है। उस यात्रा में क्या हुआ, यह किसी को नहीं पता चलता। पाकिस्तान और दूसरे देशों के मीडिया से पता चलता है कि चौंकाने वाली इस कूटनीति के पीछे सौजन्य कम था, विदेश नीति और भी कम थी, अडानी की बिजली और जिंदल की स्टील फैक्ट्री का लेना-देना कुछ अधिक था। सिर्फ यहीं भर नहीं, अधिकाँश विदेश यात्राओं में प्रधानमंत्री के दल में अडानी की मौजूदगी और ऑस्ट्रेलिया से मोजाम्बिक तक हुए अडानी के धंधे से जुड़े करार इन यात्राओं की ‘उपलब्धियों’ के बारे में बता देते हैं।
विदेशों की यात्राएं उन देशों के साथ मित्रता को गाढ़ी और मजबूत करने के लिए होती हैं। नए व्यापारिक अनुबंधों और परस्पर बढ़ते-बढाते सांस्कृतिक संबंधों के लिए होती हैं। नए गठबंधन बनाने के लिए होती हैं। संकट में एक-दूसरे का साथ देने के वादे करने के लिए होती हैं। इतनी सारी, रिकॉर्ड तोड़ विदेश यात्राओं के बाद हासिल क्या हुआ है, यह आज पूरी दुनिया में भारत की स्थिति को देखकर पता चल जाता है।
एक भी पड़ोसी देश ऐसा नहीं है, जिसका नाम लेकर यह बताया जा सके कि उसके साथ हमारे रिश्ते सामान्य हैं। परम्परा से जिन देशों के साथ दोस्ती और विश्वास बना रहा, वह नेपाल और बांग्ला देश तक आज हमारे साथ नहीं हैं। कम से कम उस तरह तो बिलकुल नहीं है, जिस तरह से मोदी सरकार के आने के पहले हुआ करते थे।
मोदी जी द्वारा अपनी यात्राओं से लगभग पूरी दुनिया नाप लेने के बाद आज वैश्विक परिदृश्य में भारत अब तक के सबसे मुश्किल मुकाम पर खडा हुआ है। न अपनी मर्जी से तेल देख पा रहा हैं, न उसकी धार देख पा रहा है। अपने विश्वस्त और सदा-सर्वदा साथ देने वाले मित्र देशों के साथ अमरीका और इजरायल जैसे दुष्ट देशों द्वारा किये जा रहे सरासर गैरकानूनी बर्ताव पर मुंह खोलने तक का साहस नहीं कर पा रहा है। अपनी खुद की संप्रभुता पर होने वाली टीका-टिप्पणियों तक का जवाब नहीं दे पा रहा है।
इतना डरा हुआ है कि ब्रिक्स जैसे जिन साझे मंचों का अध्यक्ष है, उनमें भी नेतृत्वकारी भूमिका तक नहीं निबाह पा रहा है। इसका मतलब यही हुआ कि ज्यादातर विदेश यात्राएं या तो पर्यटन बनकर रह गयीं या अडानी-अम्बानी के व्यावसयिक हितों का माध्यम या दोनों ही बन कर रह गयीं।
कुल जमा यह कि भारत का प्रधानमंत्री अनुपस्थित है। उसे जहां होना चाहिए, वहां छोड़कर बाकी सब जगह वह उपस्थित है : कभी सैर सपाटों में, कभी फोटो शूट में, अक्सर चुनावी रैलियों में और बाकी बचे समय में दुनिया घूमने में व्यस्त है। उसके पास उसी देश के बारे में कुछ अच्छा करने का वक़्त नहीं है, जिसका वह निर्वाचित मुखिया है। और ऐसा होना कतई अच्छी बात नहीं है।

पारिवारिक विवाद में युवक की गला दबाकर हत्या आरोपी हिरासत मे

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
सहजनवा थाना क्षेत्र के ग्राम भरपही में पारिवारिक विवाद के चलते एक युवक की गला दबाकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। घटना को लेकर क्षेत्र में सनसनी फैल गई है, वहीं पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान संजय दत्त के रूप में हुई है। उनकी पत्नी वंदना ने थाने में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि गांव के ही संदीप गौड़ ने पारिवारिक विवाद के चलते उनके पति की गला दबाकर हत्या कर दी।
घटना 9 मई की रात करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है, जबकि मामले की सूचना 11 मई को पुलिस को दी गई। तहरीर के आधार पर सहजनवा थाना में संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि मृतक के शव का पोस्टमार्टम पहले ही कराया जा चुका है। आरोपी संदीप गौड़ को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
घटना के बाद मौके पर पुलिस बल तैनात कर शांति व्यवस्था बनाए रखी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है और जल्द ही पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा।

फर्जी दुष्कर्म मुकदमे में फंसाने और अवैध वसूली करने वाली युवती गिरफ्त

झूठे केस में जेल भेजने के बाद दोबारा मांगे जा रहे थे लाखों रुपये, पुलिस ने किया खुलासा

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद की थाना सिंदुरिया पुलिस ने बलात्कार के फर्जी मुकदमे में लोगों को फंसाकर अवैध धन उगाही करने के गंभीर मामले का पर्दाफाश करते हुए एक युवती को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया है। मामले को लेकर क्षेत्र में काफी चर्चा बनी हुई है।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तथा क्षेत्राधिकारी सदर अंकुर गौतम के पर्यवेक्षण में अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना सिंदुरिया पुलिस को यह सफलता मिली।
जानकारी के अनुसार अनुसार 10 मई 2026 को ग्राम पड़री उर्फ मीरगंज निवासी सत्यदेव चौहान ने थाना सिंदुरिया में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि जानकी पुत्री राम आशीष ने उसके भाई सूरज चौहान से प्रेम विवाह किया था। विवाह के कुछ समय बाद विवाद उत्पन्न होने पर जानकी ने सूरज चौहान और उनके रिश्तेदार अनिल चौहान के खिलाफ अपनी नाबालिग बहन से दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज कराकर दोनों को जेल भिजवा दिया।
आरोप है कि इसके बाद जानकी ने सत्यदेव चौहान तथा उनके बहनोई राम केवल चौहान को भी फर्जी दुष्कर्म मुकदमे में फंसाने की धमकी देनी शुरू कर दी। पीड़ित पक्ष से जेल से बचाने और मुकदमा न लिखवाने के नाम पर पहले 40 हजार रुपये वसूले गए, जबकि बाद में एक-एक लाख रुपये की अतिरिक्त मांग कर लगातार धमकाया जा रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सिंदुरिया में मु.अ.सं. 106/2026, धारा 308(6) एवं 317(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस टीम ने 11 मई 2026 को मुखबिर की सूचना पर अभियुक्ता को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार अभियुक्ता की पहचान जानकी पुत्री राम आशीष, निवासी ग्राम अहिरौली टोला विशुनपुर घाट (मदरहा), थाना घुघली, जनपद महराजगंज के रूप में हुई है। उसकी उम्र लगभग 24 वर्ष बताई जा रही है तथा वह बी.ए. द्वितीय वर्ष की छात्रा है।
पुलिस ने अभियुक्ता के पास से 5,200 रुपये नकद, पीली धातु की एक जोड़ी कान की बाली तथा एक वीवो Y 21 स्मार्टफोन बरामद किया है।
गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में उप-निरीक्षक अमित रंजन सिंह, महिला उप-निरीक्षक प्रियंका मौर्य, कांस्टेबल इंद्रेश यादव, राम जनम यादव, महिला कांस्टेबल श्रुति, रुनिंया, सोनम एवं सुस्मिता शामिल रहीं।

हरे माधव सत्संग 2026 : भारत की आध्यात्मिक चेतना का विश्वव्यापी संदेश

भारत : चेतना, अध्यात्म और मानवता की वैश्विक भूमि

भारत केवल एक भौगोलिक राष्ट्र नहीं, बल्कि चेतना, अनुभूति और आत्मज्ञान की वह दिव्य ऊर्जा है जिसने सदियों से विश्व को आध्यात्मिक प्रकाश प्रदान किया है। यह वही भूमि है जहाँ ऋषियों ने तप किया, वेदों की ऋचाएँ गूँजीं, भगवान बुद्ध ने करुणा का संदेश दिया, भगवान महावीर ने अहिंसा को धर्म का सर्वोच्च स्वरूप बताया और संत कबीर ने मानवता को जाति-पंथ से ऊपर रखा।
भारत की आध्यात्मिक परंपरा सदैव यह संदेश देती रही है कि मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति बाहरी संसार में नहीं, बल्कि उसके भीतर स्थित चेतना में निहित है। जीवन मुक्त सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी के परम सत्य वचनों का सार भी यही है कि आत्मज्ञान ही मानव जीवन का वास्तविक प्रकाश है।
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र का मानना है कि आधुनिक विज्ञान आज मानव मस्तिष्क की क्षमताओं पर शोध कर रहा है, जबकि भारतीय अध्यात्म हजारों वर्षों पहले यह सिद्ध कर चुका था कि ध्यान, साधना और सकारात्मक चेतना से मनुष्य अपने भीतर अद्भुत शक्ति का अनुभव कर सकता है।
ध्यान और योग : मानसिक संतुलन का वैश्विक मार्ग
भारतीय ध्यान परंपरा के अनुसार जब व्यक्ति मन और हृदय से ध्यान करता है, तब उसका मस्तिष्क अधिक संतुलित और सक्रिय हो जाता है। ध्यान केवल आँखें बंद करना नहीं, बल्कि अपने भीतर उतरने की प्रक्रिया है।
आज विश्व के बड़े कॉर्पोरेट संस्थान, वैज्ञानिक और चिकित्सक भी योग और मेडिटेशन को मानसिक स्वास्थ्य तथा कार्यक्षमता के लिए आवश्यक मान रहे हैं। भारतीय योग परंपरा अब वैश्विक जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
सत्संग : सकारात्मक चेतना और आत्मिक शांति का माध्यम
आध्यात्मिकता मनुष्य को जोड़ती है, तोड़ती नहीं। सत्संग का वास्तविक अर्थ है — सत्य के साथ संगति। जब व्यक्ति संतों के वचनों, भजनों, ध्यान और सेवा से जुड़ता है, तब उसका मन धीरे-धीरे विकारों से मुक्त होने लगता है।
भारतीय संत परंपरा सदैव प्रेम, सेवा, करुणा और परमार्थ को मानव जीवन का सर्वोच्च मार्ग मानती रही है।
बाबा माधवशाह-बाबा नारायणशाह दरबार बना आध्यात्मिक चेतना का केंद्र
कटनी स्थित बाबा Madhavshah-बाबा नारायणशाह दरबार आज आध्यात्मिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। यहाँ लाखों श्रद्धालु आत्मिक शांति, जीवन की दिशा और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने पहुँचते हैं।
इस परंपरा को आगे बढ़ाने वाले जीवन मुक्त सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी देश-विदेश में सत्संगों के माध्यम से मानवता को प्रेम, शांति, सेवा और आत्मज्ञान का संदेश दे रहे हैं। उनके सत्संगों में किसी धर्म, जाति या वर्ग का भेद नहीं होता, बल्कि संपूर्ण मानवता का स्वागत किया जाता है।
नागपुर में 16 और 17 मई 2026 का हरे माधव सत्संग बना आस्था का केंद्र
लगभग 12 वर्षों बाद नागपुर में जीवन मुक्त सतगुरु बाबा ईश्वरशाह साहिब जी का आगमन होने जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दे रहा है।
महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, गुजरात और राजस्थान सहित अनेक राज्यों से हजारों श्रद्धालुओं के नागपुर पहुँचने की संभावना व्यक्त की गई है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे स्टेशन और बस स्थानकों से सत्संग स्थल तक विशेष वाहनों की व्यवस्था की गई है।
रहने, विश्राम, नाश्ता, ब्रह्मभोज और अन्य सुविधाओं की व्यापक व्यवस्था भारतीय सेवा संस्कृति का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करेगी।
भव्य शोभायात्रा बनेगी आकर्षण का केंद्र
16 मई 2026 को बाबा ईश्वरशाह साहिब जी के नागपुर आगमन पर हनुमान मंदिर, हेमू कलानी चौक, जरीपटका से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।
ढोल-ताशों की गूँज, शंखध्वनि, आध्यात्मिक प्रस्तुतियाँ, बाल संस्कार बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्केटिंग शो वातावरण को भक्तिमय बना देंगे। यह आयोजन भारतीय संस्कृति की नई पीढ़ी से गहरी जुड़ाव भावना को भी दर्शाएगा।
17 मई का सत्संग : श्रद्धा, सेवा और आत्मज्ञान का महासंगम
17 मई 2026 को आयोजित होने वाला हरे माधव सत्संग आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एलईडी माध्यम से श्री कलश की महिमा और सतगुरु बाबा नारायणशाह साहिब जी से जुड़े दिव्य प्रसंग प्रस्तुत किए जाएंगे।
सत्संग में बाबा ईश्वरशाह साहिब जी के अमृत वचनों की वर्षा होगी, जो मानव जीवन को प्रेम, सेवा, त्याग और आत्मज्ञान की दिशा प्रदान करेंगे।
ब्रह्मभोज : समानता और सर्वधर्म समभाव का प्रतीक
हरे माधव ब्रह्मभोज केवल भोजन नहीं, बल्कि प्रेम, समानता और सामूहिक चेतना का प्रतीक है। जब हजारों लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं, तब जाति, पंथ और ऊँच-नीच की दीवारें स्वतः समाप्त हो जाती हैं।
भारतीय संस्कृति सदियों से यही संदेश देती आई है कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।
भारत : विश्व को शांति और आध्यात्मिक दिशा देने वाला राष्ट्र
आज जब विश्व युद्ध, तनाव, मानसिक अवसाद और भौतिक प्रतिस्पर्धा से जूझ रहा है, तब भारत की आध्यात्मिक विरासत पूरी मानवता के लिए आशा की किरण बनकर उभर रही है।
कोई वाराणसी के घाटों पर शांति खोजता है, कोई हर की पौड़ी में आस्था का अनुभव करता है, तो कोई हिमालय की गुफाओं में ध्यान का आनंद प्राप्त करता है। यही विशेषता भारत को विश्व का आध्यात्मिक ध्रुव बनाती है।
भारत सदैव यह संदेश देता आया है कि सभी धर्मों का मूल प्रेम, शांति और मानव कल्याण है। मंदिर की घंटियाँ, मस्जिद की अज़ान, गुरुद्वारे का कीर्तन और चर्च की प्रार्थना — सभी मानवता को जोड़ने का कार्य करते हैं।
नागपुर और जालना में आयोजित हरे माधव सत्संग 2026 इसी भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत उत्सव है, जो विश्व को यह संदेश देगा कि सच्चा सुख बाहरी भौतिकता में नहीं, बल्कि अपने भीतर और परमार्थमय जीवन में छिपा हुआ है।


✒️एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी
कर विशेषज्ञ, स्तंभकार, साहित्यकार, अंतरराष्ट्रीय लेखक, चिंतक, कवि एवं संगीत माध्यमा
गोंदिया, महाराष्ट्र

डीसीएम से गिरकर मजदूर की दर्दनाक मौत, परिवार में मचा कोहराम

भूसा लादने जा रही गाड़ी के पहिए के नीचे आने से मौके पर गई जान

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। घुघली थाना क्षेत्र अंतर्गत बल्लो धाम गेट के सामने सोमवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे में डीसीएम पर सवार एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा- तफरी मच गई, जबकि मृतक के परिवार में चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो उठा। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और राहगीर मौके पर जुट गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार डीसीएम संख्या यूपी 53 सीटी 7602 भूसा लादने के लिए मजदूरों को लेकर जा रही थी। बताया जा रहा है कि वाहन में कई मजदूर सवार थे और मृतक राजेश यादव पुत्र मोहित यादव डीसीएम के ऊपर केबिन पर बैठा हुआ था। इसी दौरान अचानक संतुलन बिगड़ने से वह सड़क पर गिर पड़ा। इससे पहले कि वह संभल पाता, डीसीएम का पिछला पहिया उसके ऊपर चढ़ गया। हादसा इतना भयावह था कि राजेश यादव की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
घटना बल्लो धाम गेट के ठीक सामने हुई, जहां हादसे के बाद लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही घुघली थाने के उप निरीक्षक संजय कुशवाहा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटना स्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भर पोस्टमार्टम के लिए मर्चरी हाउस महराजगंज भेज दिया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त डीसीएम को अपने कब्जे में लेकर घुघली थाने में खड़ा करा दिया है। इस संबंध में थानाध्यक्ष कुंवर गौरव सिंह ने बताया कि परिजनों से तहरीर मिलने के बाद मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।
घटना की सूचना मिलते ही मृतक की माता समेत परिवार के अन्य सदस्य मौके पर पहुंच गए। बेटे का शव देखते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। ग्रामीणों ने किसी तरह परिवार के लोगों को संभाला। स्थानीय लोगों ने बताया कि राजेश यादव मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसकी अचानक मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। गांव और आस-पास के लोगों ने इस दर्दनाक हादसे पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिए जाने की मांग की है।

शमशान घाट के कायाकल्प को लेकर कांग्रेसियो का प्रदर्शन

भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्थानीय शाखा के तत्वाधान मे कांग्रेस प्रवक्ता रविप्रताप सिंह के नेतृत्व मे भारी संख्या मे कांग्रेसी कार्यकर्ताओ एवं ग्रामीणों ने भागलपुर शमशान घाट के कायाकल्प को लेकर धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार बरहज को ज्ञापन सौपा।
बताते चले कि सोमवार को तहसील क्षेत्र भागलपुर के मुख्य चौराहे से भारी संख्या मे कांग्रेसी कार्यकर्ता एवं ग्रामीणों ने कांग्रेस प्रवक्ता रविप्रताप सिंह के नेतृत्व मे अपनी मांगो पर नारा लगाते एवं पदयात्रा करते हुए भागलपुर शमशान घाट पर पहुँचे।
यहाँ पर कांग्रेसी नेताओं व स्थानीय लोगो ने सभा को सम्बोधित कर जनहित से संबंधित मांगो पर अपने अपने विचार रखे।
कांग्रेस नेता चंद्रभूषण पाण्डेय ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि, वर्षो से दूर रहा भागलपुर का शमशान घाट आज विकास कि परिधि से बहुत दूर हो गया है। जहाँ सरकार सभी शमशान घाटों को आधुनिक बना रही है वही भागलपुर शमशान घाट पर शवदाह के लिए आने वाले जनमानस के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।
इसी क्रम मे कांग्रेस प्रवक्ता रविप्रताप सिंह ने कहा कि यह धरना प्रदर्शन अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ई के स्थानीय शाखा के तत्वाधान मे किया जा रहा है। उन्होंने चार सूत्रीय मांगो को उठाते हुए कहा कि, भागलपुर के कालीचरण शमशान घाट मुक्ति धाम पर अव्यवस्था का साम्राज्य फैला हुआ है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से ज्ञापन के माध्यम से मांग करते हुए कहा कि, कालीचरण शमशान घाट पर विद्युत शवदाह गृह का निर्माण जनहित मे तत्काल कराया जाय। तथा पक्का घाट कि सीढ़ियों को बनाया जाय ताकि शव दाह के लिए आने वाले लोगो को सुविधा मील सके। रविप्रताप सिंह ने कहा कि अंतिम यात्रा मे दूर दराज से आने वाले लोगो को धुप, गर्मी व बरसातसे बचाव के लिए टिन सेड एवं शुद्ध पिने के लिए पानी की व्यवस्था यथा शीघ्र किया जाय। ज्ञापन सौपते हुए मांग किया की शमशान घाट पर होने वाली अन्य बुनियादी सुविधाओं को जनता को प्रदान किया जाय, ताकि उन्हें किसी भी परेशानियों का सामना करना न पड़े। उन्होंने कहा की इन मुद्दों को साशन प्रशासन जल्दी पूरा नहीं करता है तो जनहित मे व्यापक आंदोलन किया जायेगा। इस दौरान ओमप्रकाश यादव, रामेश्वर जायसवाल, उदयशंकर सिंह, उदयभान सिंह, नन्द कुमार सिंह, अलाउद्दीन अंसारी, आचार्य हरेंद्र, भोलू अहमद, सेराज, अनूप, मन्नू मौर्या, मुन्ना पटेल, डॉ नरेंद्र यादव, संजय गुप्ता, भानुप्रताप सिंह, श्रीपती प्रसाद, मोनू सिंह सहित भारी संख्या मे कार्यकर्त्ता एवं स्थानीय जनता मौजूद रहे।

अभय नाथ दूबे बने पत्रकार प्रेस परिषद (इंडिया) के पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष

बधाइयों का तांता

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े अभय नाथ दूबे को पत्रकार प्रेस परिषद (इंडिया) का पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। संगठन द्वारा यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उनके लंबे पत्रकारिता अनुभव, सक्रिय कार्यशैली तथा पत्रकार हितों के प्रति समर्पण को देखते हुए सौंपी गई है। उनके मनोनयन की सूचना मिलते ही पत्रकारों, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों एवं शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबा कृष्ण देव, चेयरमैन ऋषभ मिश्रा आजाद एवं उत्तर प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने अभय नाथ दूबे को नई जिम्मेदारी मिलने पर बधाई देते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन और अधिक मजबूत होगा तथा पत्रकारों की आवाज को नई मजबूती मिलेगी।
बधाई देने वालों में प्रमुख उद्योगपति श्रीनरायन सिंह कौशिक, यूथ आईकॉन प्रदीप सिसोदिया, भाजपा क्षेत्रीय उपाध्यक्ष सुनीता अग्रहरि, संस्कार भारती की जिलाध्यक्ष डॉ. सोनी सिंह राष्ट्रीय महामंत्री (महिला प्रभाग) भारत तिब्बत समन्वय संघ, समाजसेवी पंडित उदय राज तिवारी, मेहदावल विधायक अनिल कुमार त्रिपाठी, पूर्व छात्र संघ महामंत्री कौशल चौधरी, भाजपा नेता सचिन सिंह श्रीनेत्र, श्रवण अग्रहरी, भाजपा जिला उपाध्यक्ष ज्ञानेंद्र मिश्र, अशोक कुमार चौधरी, सत्य प्रकाश राय, जिला पंचायत सदस्य अजय शर्मा, एमडी राजेश्वर सिंह, ओंकार राय, विकास गुप्ता, विधायक अंकुर राज तिवारी, डॉ. अमरेंद्र पांडे, डायरेक्टर शोऐब अहमद नदवी, समाजसेवी विजय कुमार सिंह, दिवाकर गौतम, विजय यादव, पत्रकार रमेश दुबे, अब्दुल अजीज, वीरेंद्र यादव, प्रमोद यादव, गोरखनाथ मिश्र, श्याम सिंह, दुर्गेश उपाध्याय, शैलेंद्र यादव, अरविंद सिंह, अर्जुन राय, भारद्वाज त्रिपाठी, पीएन पाण्डेय, सुशील सोनी, दीपक पांडे, राम जोखन पांडे, इंस्पेक्टर शालिनी सिंह, प्रदीप कुमार सिंह, आरपी सिंह, वरिष्ठ पत्रकार रीवा, इंस्पेक्टर बलराम शुक्ला, अनिल त्रिपाठी, विजय कुमार गुप्ता, अमरजीत यादव, अमित जैन, विनय कुमार चतुर्वेदी, देवी प्रसाद त्रिपाठी, सुरेंद्र सिंह, बाबूल श्रीवास्तव, देवीलाल गुप्ता, अजय श्रीवास्तव, अमित पांडे, राहुल राय, पुनीत ओझा, सत्य प्रकाश वर्मा, शिवानंद चंचल, बागेश त्रिपाठी, विवेक सिंह, सुनील छापड़िया, वसीम अकरम एवं जगत जायसवाल सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल रहे।
नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष अभय नाथ दूबे ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व एवं सभी शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा एवं ईमानदारी के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष, निर्भीक एवं जनहितकारी पत्रकारिता को मजबूती प्रदान करना उनकी प्राथमिकता होगी।
पत्रकार साथियों एवं समाज के विभिन्न वर्गों ने विश्वास व्यक्त किया कि अभय नाथ दूबे के नेतृत्व में पत्रकार प्रेस परिषद (इंडिया) पश्चिमी उत्तर प्रदेश में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाएगा तथा पत्रकार हितों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाकर संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।

बाढ़ व जलभराव नियंत्रण को लेकर प्रशासन सख्त

पम्पिंग स्टेशनों से लेकर नालों की सफाई तक व्यापक तैयारी

मंडलायुक्त व महापौर की अध्यक्षता में समीक्षा

कंट्रोल रूम सक्रिय, संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l नगर में संभावित बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। नगर निगम सभागार में मंडलायुक्त अनिल ढींगरा व महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बाढ़ नियंत्रण, जल निकासी और संचारी रोगों की रोकथाम को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में नगर आयुक्त अजय जैन, जीडीए उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल, अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा, एसपी ट्रैफिक अमित श्रीवास्तव सहित अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों द्वारा बिंदुवार प्रस्तुतीकरण के माध्यम से तैयारियों की जानकारी दी गई।
पम्पिंग स्टेशनों की क्षमता बढ़ी, जल निकासी व्यवस्था मजबूत
प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि नगर क्षेत्र में स्थापित पम्पिंग स्टेशनों को पूरी तरह क्रियाशील रखा गया है। विभिन्न वार्डों में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए अतिरिक्त पम्पिंग सेट लगाए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर और पम्प उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

नालों की सफाई तेज, अतिक्रमण हटाने के निर्देश

नगर निगम द्वारा प्रमुख एवं सहायक नालों की समयबद्ध सफाई कराई जा रही है। जहां जल निकासी में बाधा है, वहां अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर विशेष टीमें तैनात की गई हैं, ताकि बारिश के दौरान त्वरित कार्रवाई हो सके।
कंट्रोल रूम सक्रिय, हेल्पलाइन जारी
आपात स्थिति से निपटने के लिए नगर निगम का कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया गया है। हेल्पलाइन नंबर जारी कर आमजन से अपील की गई है कि जलभराव या बाढ़ की स्थिति में तुरंत सूचना दें। सभी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर त्वरित राहत सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

संचारी रोगों की रोकथाम पर विशेष ध्यान

बरसात के मौसम में फैलने वाले संचारी रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया गया है। फॉगिंग, एंटी-लार्वा छिड़काव और साफ-सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाएगी।

जनजागरूकता और राहत की तैयारी

नगरवासियों को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर राहत सामग्री, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बाढ़ एवं जलभराव से निपटने के लिए सभी विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।