Tuesday, April 14, 2026
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023: सशक्तिकरण या प्रॉक्सी राजनीति का नया खतरा?

नारी शक्ति कानून पर सवाल: क्या बढ़ेगा प्रॉक्सी कंट्रोल?

विशेष संसद सत्र (16-18 अप्रैल 2026) के संदर्भ में नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है। यह अधिनियम संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर राजनीतिक भागीदारी में ऐतिहासिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करता है। इसका उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि लोकतंत्र को अधिक समावेशी, संतुलित और न्यायपूर्ण बनाना है।
हालांकि, इस महत्वपूर्ण पहल के साथ कई गंभीर चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। सबसे बड़ी चिंता प्रॉक्सी राजनीति और बैक-डोर कंट्रोल की है, जहाँ निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के स्थान पर वास्तविक शक्ति उनके पति या अन्य पुरुष रिश्तेदारों के हाथों में होती है। पंचायत स्तर पर “सरपंच पति” की प्रवृत्ति पहले से ही स्थापित उदाहरण है, जो इस खतरे की गंभीरता को दर्शाती है।

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लोकतंत्र का मूल आधार प्रतिनिधित्व और जवाबदेही है। जब मतदाता किसी महिला को उसकी क्षमता और नेतृत्व के आधार पर चुनते हैं, तो वे उससे सक्रिय भूमिका की अपेक्षा करते हैं। लेकिन यदि निर्णय कोई और लेता है, तो यह मतदाता के विश्वास के साथ धोखा है और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आरक्षण लागू होने के बाद राजनीतिक दल अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए परिवार की महिलाओं को उम्मीदवार बनाकर अप्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित कर सकते हैं। यह प्रवृत्ति न केवल वंशवाद को बढ़ावा देती है, बल्कि वास्तविक महिला नेतृत्व के उभरने में बाधा भी बनती है।
तीसरा बड़ा खतरा आपराधिक दखल का है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, कई मामलों में महिलाओं को आपराधिक नेटवर्क द्वारा ढाल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, क्योंकि उन पर कम संदेह होता है। यदि यही प्रवृत्ति राजनीति में प्रवेश करती है, तो यह लोकतंत्र और कानून व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
हालांकि, यह भी सच है कि किसी भी सामाजिक परिवर्तन के शुरुआती दौर में चुनौतियाँ स्वाभाविक होती हैं। अंतरराष्ट्रीय अनुभव बताते हैं कि जब महिला आरक्षण को शिक्षा, प्रशिक्षण और संस्थागत सुधारों के साथ जोड़ा गया, तो सकारात्मक परिणाम सामने आए। रवांडा, नॉर्वे और फ्रांस जैसे देशों में महिला नेतृत्व ने नीतिगत गुणवत्ता और सामाजिक विकास को नई दिशा दी है।

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भारतीय संदर्भ में भी समाधान स्पष्ट है। केवल आरक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके साथ ठोस सुधार आवश्यक हैं। सबसे पहले, प्रॉक्सी नेतृत्व को रोकने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान और कठोर दंड व्यवस्था लागू करनी होगी। यदि यह साबित हो कि कोई प्रतिनिधि केवल नाममात्र का है और वास्तविक नियंत्रण किसी अन्य व्यक्ति के पास है, तो उस पर और संबंधित व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
दूसरा, महिला जनप्रतिनिधियों के लिए अनिवार्य राजनीतिक और प्रशासनिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर और प्रभावी नेता बन सकें। तीसरा, राजनीतिक दलों को अपनी आंतरिक संरचना में पारदर्शिता लानी होगी और महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि वास्तविक नेतृत्व के रूप में आगे बढ़ाना होगा।
इसके अलावा, मीडिया और नागरिक समाज की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्हें ऐसे मामलों को उजागर करना होगा जहाँ महिलाओं का दुरुपयोग हो रहा हो। इससे न केवल जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि समाज में जागरूकता भी विकसित होगी।
संवैधानिक दृष्टि से भी यह अधिनियम संतुलित है। समानता के अधिकार के साथ-साथ महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान की अनुमति भारतीय संविधान देता है। इसलिए यह जरूरी है कि इस नीति को न्याय और अवसर के संतुलन के साथ लागू किया जाए, ताकि यह किसी नए असंतुलन को जन्म न दे।
अंततः, नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 भारत के लोकतांत्रिक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम इसे “संख्यात्मक प्रतिनिधित्व” से आगे बढ़ाकर “वास्तविक सशक्तिकरण” में कैसे बदलते हैं। यदि प्रॉक्सी राजनीति, आपराधिक हस्तक्षेप और बैक-डोर कंट्रोल पर प्रभावी रोक लगाई गई, तो यह अधिनियम देश के लिए एक सामाजिक क्रांति साबित हो सकता है।

नीतीश युग का अंत, सम्राट चौधरी के साथ नई राजनीति की शुरुआत

बिहार में सत्ता का नया अध्याय: सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने से बदलेगा राजनीतिक समीकरण


पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आ चुका है। लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक दौर के बाद अब राज्य को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना न सिर्फ सत्ता परिवर्तन है, बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत भी है। पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कोई चेहरा बिहार के मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने जा रहा है, जिससे प्रदेश की राजनीति में एक नया युग शुरू होने की चर्चा तेज हो गई है।
करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का वर्चस्व रहा। लालू प्रसाद यादव के दौर के बाद नीतीश कुमार को सर्वमान्य नेता के रूप में देखा जाता रहा है। लेकिन अब उनके राज्यसभा जाने और मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। बीजेपी विधायक दल ने सम्राट चौधरी को अपना नेता चुनकर स्पष्ट कर दिया है कि अब पार्टी खुद नेतृत्व की कमान संभालने को तैयार है।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। वे एक मजबूत राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी छह बार विधायक और सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी मां भी विधायक रही हैं। इस पारिवारिक पृष्ठभूमि ने उन्हें राजनीति की बारीकियों को समझने में मदद की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल के साथ की थी और राबड़ी देवी सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री बने थे। बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और संगठन में अपनी अलग पहचान बनाई।

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बीजेपी में आने के बाद सम्राट चौधरी ने संगठन को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत किया। वर्तमान में वे उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री के रूप में भी काम कर चुके हैं, जिससे उन्हें प्रशासनिक अनुभव भी मिला है। यही अनुभव अब मुख्यमंत्री पद पर उनकी कार्यशैली को और प्रभावी बना सकता है।
सम्राट चौधरी अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं और कुशवाहा समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। नीतीश कुमार को अति पिछड़ा और पिछड़ा वर्ग का मजबूत समर्थन प्राप्त था। ऐसे में सम्राट चौधरी की ताजपोशी बीजेपी की एक रणनीतिक चाल मानी जा रही है, जिससे वह इस सामाजिक आधार को अपने पक्ष में बनाए रखना चाहती है।
तारापुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक सम्राट चौधरी की छवि एक सक्रिय और जमीनी नेता की है। वे संगठन और सरकार दोनों में अपनी क्षमता साबित कर चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके नेतृत्व में बीजेपी बिहार में अपनी पकड़ और मजबूत करेगी। अब तक सरकार को समर्थन देने वाली बीजेपी पहली बार पूरी तरह ‘ड्राइविंग सीट’ पर नजर आएगी।
सम्राट चौधरी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उन्होंने नीतीश कुमार का विश्वास भी हासिल किया। यही कारण है कि वे गठबंधन राजनीति के बीच भी संतुलन बनाने में सक्षम माने जाते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे प्रशासनिक स्तर पर कितनी तेजी से फैसले लेते हैं और जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरे उतरते हैं।

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बिहार में विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दे लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। अब सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन मुद्दों पर ठोस काम करने की होगी। यदि वे इन क्षेत्रों में प्रभावी प्रदर्शन करते हैं, तो यह न केवल उनके राजनीतिक भविष्य को मजबूत करेगा, बल्कि बीजेपी के लिए भी राज्य में स्थायी आधार तैयार कर सकता है।
कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। यह बदलाव केवल चेहरे का नहीं, बल्कि राजनीतिक संस्कृति और नेतृत्व शैली का भी हो सकता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह नया नेतृत्व बिहार को किस दिशा में ले जाता है।

डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई

कपरवार/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह के कपरवार स्थित आवास पर भारत रत्न भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अनिल गोस्वामी, चंद्रिका प्रसाद, सुशील कन्नौजिया, सुरेंद्र कन्नौजिया, बिपिन गोंड, राज कुमार बारी, केशव प्रसाद, प्रकाश प्रसाद, बालेश्वर पासवान, बिनानंद प्रसाद, शिवनाथ चौहान, दीपान्शु भारती और राजाराम साहनी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अर्जुन सिंह ने कहा कि बाबा साहब ने समाज के कमजोर, वंचित और शोषित वर्गों को समान अधिकार दिलाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका संघर्ष और विचार आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

कांग्रेसियों ने कांग्रेस कार्यालय पर डॉ भीमराव की जयंती मनाई

समाज के उद्धारक थे बाबा भीमराव अम्बेडकर – रविप्रताप सिंह

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
मंगलवार को डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओ ने कांग्रेस कार्यालय लाजपत भवन पर कांग्रेस के पार्टी प्रवक्ता रविप्रताप सिंह के नेतृत्व मे बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के चित्र पर फूल माला अर्पित कर उनके विलक्षण प्रतिभा को याद किया। इसी क्रम मे रविप्रताप सिंह ने तहसील क्षेत्र के अंतर्गत बनकटिया गांव मे स्थित बाबा भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर हर्षोल्लास के साथ जयंती मनाई।
इस अवसर पर रविप्रताप सिंह ने कहा कि, भाजपा सरकार बाबा साहब द्वारा रचित संविधान को मिटाना चाहती है लेकिन कांग्रेस यह होने नहीं देगा। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया गया है कि हम सभी लोग भाजपा के दमनकारी नीति को दूर कर संविधान को बचाने का कार्य करे। उन्होंने कहा कि डॉ भीमराव अम्बेडकर समाज के उद्धारक थे, आज उनके द्वारा रचित संविधान के तहत ही हम सभी लोगो को, कुछ भी कहने और सुनने कि आजादी मिली है। उन्होंने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि उत्तर और दक्षिण के विकास की धुरी कही जाने वाली मोहन सेतु आज अपनी दशा पर आँसू बहा रहा है। रविप्रताप सिंह ने कहा कि मोहन सेतु को लेकर ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रभारी अविनाश पाण्डेय एवं प्रदेश अध्यक्ष अजय राय से इंदरा भवन मे मिलकर एक वार्ता हुई, इस वार्ता के दौरान अविनाश पाण्डेय ने कहा कि मोहन सेतु के निर्माण के लिए एक व्यापक आंदोलन कांग्रेसियों द्वारा होना अनिवार्य है, यह आंदोलन अनवरत चलता रहेगा जब तक की प्रदेश कि योगी सरकार मोहन सेतु को बनवाने के लिए मजबूर न हो जाय। इसी क्रम मे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि, इस व्यापक आंदोलन मे ऐ सी सी आई का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।इस दौरान भोला तिवारी, चन्द्रभूषण पाण्डेय, रविप्रकाश तिवारी, डॉ शैलेन्द्र जायसवाल , कोदई सोनकर, धर्मेंद्र पाण्डेय,ब्रजेश सिंह, विकास यादव एवं महिलाओ सहित आदि लोग मौजूद रहे।

बाबा साहब आंबेडकर जयंती पर डीएम दीपक मीणा ने अर्पित की श्रद्धांजलि

संविधान, समानता और सामाजिक न्याय के प्रतीक को किया नमन अधिकारियों-कर्मचारियों ने लिया संकल्प

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
भारत रत्न, भारतीय संविधान के शिल्पकार एवं सामाजिक न्याय के अग्रदूत डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर मंगलवार को जिलाधिकारी दीपक मीणा ने अपने सहयोगी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बाबा साहब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके महान व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण किया गया।
जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कहा कि डॉ. आंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा, समानता और अधिकारों की स्थापना का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने अपने कठिन परिश्रम, विद्वता और दूरदर्शिता से भारतीय संविधान का निर्माण कर देश को एक सशक्त लोकतांत्रिक आधार प्रदान किया। उनके द्वारा रचित संविधान ने हर नागरिक को समान अधिकार, न्याय और गरिमा के साथ जीने का अधिकार सुनिश्चित किया।
डीएम ने कहा कि बाबा साहब ने समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया और एक समतामूलक समाज की नींव रखी। आज उनका विचार “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणास्रोत है।
उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे बाबा साहब के आदर्शों को अपने कार्य व्यवहार में उतारें और शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में पूरी निष्ठा के साथ कार्य करें। डीएम ने कहा कि प्रशासन का दायित्व है कि वह पारदर्शिता, संवेदनशीलता और न्याय के सिद्धांतों पर चलते हुए जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
इस अवसर पर एडीएम वित्त विनीत कुमार सिंह, एडीएम सिटी अंजनी कुमार सिंह, मुख्य राजस्व अधिकारी हिमांशु वर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट उत्कर्ष श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने बाबा साहब के विचारों को आत्मसात करने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान बाबा साहब के जीवन, उनके संघर्षों और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि डॉ. आंबेडकर का योगदान केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने भारत को एक आधुनिक, समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज बनाने की दिशा दिखाई।

हमारा संविधान भारत की आत्मा है, संवैधानिक दायरे में रहकर जनता की सेवा करना ही बाबा साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि:डीएम

अंबेडकर जयंती पर संविधानिक मूल्यों की दिलाई गई शपथ

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर कलेक्ट्रेट सभागार में “सामाजिक न्याय, समानता, शिक्षा और सशक्तिकरण” थीम पर कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें अपर जिलाधिकारी (वि/रा) जय प्रकाश एवं अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) चंद्रेश कुमार सिंह सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी व अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों ने बाबा साहब के चित्र पर माल्यार्पण कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। जिलाधिकारी ने सभी को संविधान के मूल्यों—सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता एवं बंधुत्व—की शपथ दिलाई।
अपने संबोधन में जिलाधिकारी ने कहा कि हमारा संविधान देश की आत्मा है और इसके दायरे में रहकर जनता की सेवा करना ही बाबा साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि एक लोक सेवक के रूप में आमजन की गरिमा का सम्मान करते हुए उनकी समस्याओं का नियमानुसार समाधान करना हमारा कर्तव्य है।
उन्होंने बाबा साहब के जीवन संघर्षों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा, समानता और न्याय के लिए आजीवन संघर्ष किया और एक समतामूलक समाज की नींव रखी। जिलाधिकारी ने संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों एवं कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए सभी से इनके पालन का संकल्प लेने का आह्वान किया।
इस अवसर पर अपर उप जिलाधिकारी सुधीर कुमार, एसओसी विनय कुमार सिंह, जिला होमगार्ड कमांडेंट शैलेंद्र मिश्रा, प्रशासनिक अधिकारी बद्री प्रसाद, सूचना अधिकारी सुरेश कुमार सरोज सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।

पति और ससुराल पक्ष पर उत्पीड़न का आरोप, दो आरोपी हिरासत में

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
टीवी न्यूज़ चैनल “भारत समाचार” पर प्रसारित खबर के बाद थाना गौरीबाजार क्षेत्र के एक पारिवारिक विवाद का मामला सामने आया है। पीड़िता रम्भा देवी ने आरोप लगाया है कि उसके पति और ससुराल पक्ष द्वारा उसे और उसकी बेटी को प्रताड़ित किया जा रहा है तथा घर में रहने नहीं दिया जा रहा। साथ ही अपशब्द कहने और धमकी देने के भी आरोप लगाए गए हैं।
जानकारी के अनुसार, पीड़िता ने 13 अप्रैल 2026 को मिशन शक्ति केंद्र, थाना गौरीबाजार में तहरीर देकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। तहरीर में बताया गया कि ससुराल पक्ष द्वारा दबाव बनाकर उससे तलाक के कागजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए हैं। मामला सामने आने के बाद मिशन शक्ति टीम ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए पीड़िता की काउंसलिंग की और हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया।
पुलिस ने प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना गौरीबाजार में मुकदमा संख्या 153/2026 के तहत धारा 85, 352, 351(2) बीएनएस में केस दर्ज कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए 14 अप्रैल 2026 को पुलिस ने दो आरोपियों—अभय जायसवाल और अभिषेक जायसवाल—को हिरासत में लेकर निरोधात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, मामले की विवेचना जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई और पीड़ितों को न्याय दिलाना प्राथमिकता है।

विकास भवन में धूमधाम से मनाई गई बाबा साहब अंबेडकर की 135वीं जयंती

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
विकास भवन के सभागार में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी विवेक कुमार श्रीवास्तव ने की, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य बाबा साहब के विचारों को आत्मसात करते हुए सामाजिक समरसता और समानता के मूल्यों को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत श्रद्धांजलि सभा से हुई, जिसमें मुख्य विकास अधिकारी सहित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने बाबा साहब के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके बाद आयोजित गोष्ठी में उनके जीवन, संघर्ष और योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित वक्ताओं ने बताया कि बाबा साहब केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि एक महान समाज सुधारक और अर्थशास्त्री भी थे, जिनके विचार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।
अपने संबोधन में मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध रहें। इस अवसर पर सभी उपस्थित लोगों को भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ कराया गया तथा न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को बनाए रखने की शपथ दिलाई गई।
कार्यक्रम में जिला उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता, जिला पंचायत राज अधिकारी कुमार अमरेंद्र, डीसी मनरेगा राजीव कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी विकास रश्मि मिश्रा, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी सुशील कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। सभी ने बाबा साहब के बताए ‘सामाजिक समरसता’ के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

महराजगंज: कस्तूरबा विद्यालय में हैंडपंप पर विषैले जीव के काटने से छात्रा की मौत, मचा हड़कंप

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। थाना फरेंदा क्षेत्र स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, खजूरिया में सोमवार को एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। विद्यालय परिसर में लगे हैंडपंप से पानी भरने गई एक छात्रा को विषैले जीव ने काट लिया, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

हैंडपंप पर पानी भरते समय हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, छात्रा अपनी सहेलियों के साथ हैंडपंप पर पानी लेने गई थी। इसी दौरान अचानक उसके पैर की उंगली में तेज दर्द हुआ। शुरुआत में इसे मामूली चोट समझा गया, लेकिन कुछ ही देर में उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।
उसे चक्कर आने लगे, शरीर में कमजोरी और गला सूखने जैसी शिकायतें सामने आईं। स्थिति गंभीर होते देख सहपाठियों ने तुरंत विद्यालय स्टाफ को सूचना दी।

अस्पताल में तोड़ा दम

विद्यालय प्रशासन ने बिना देरी किए छात्रा को जिला संयुक्त चिकित्सालय, महराजगंज पहुंचाया। डॉक्टरों ने तत्काल इलाज शुरू किया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसे बचाया नहीं जा सका और चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
इस घटना के बाद विद्यालय में दहशत और शोक का माहौल बन गया।

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डीएम-एसपी ने किया निरीक्षण

घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा और पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी मौके पर पहुंचे। उन्होंने विद्यालय परिसर का निरीक्षण किया और हैंडपंप के आसपास की स्थिति का जायजा लिया।
अधिकारियों ने विद्यालय प्रशासन से पूरी जानकारी ली और अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों से भी बातचीत की। जिलाधिकारी ने मामले की जांच के निर्देश देते हुए जल्द रिपोर्ट मांगी है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस दुखद घटना के बाद आवासीय विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिसर में साफ-सफाई, झाड़ियों की कटाई और कीटनाशक छिड़काव की कमी को लेकर आशंका जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाते, तो इस हादसे को टाला जा सकता था।

परिजनों में कोहराम, क्षेत्र में शोक

छात्रा की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। गांव और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई है। विद्यालय की अन्य छात्राएं भी इस घटना से सहमी हुई हैं।

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महराजगंज में भीषण सड़क हादसा: रोडवेज बस की टक्कर से बाइक सवार 3 युवकों की मौत, इलाके में शोक

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के कोठीभार थाना क्षेत्र में सोमवार देर शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में तीन युवकों की जान चली गई। तेज रफ्तार रोडवेज बस और बाइक की आमने-सामने टक्कर इतनी भीषण थी कि तीनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सबया-चिरैयाकोट मार्ग पर हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 13 अप्रैल 2026 की रात करीब 8:15 बजे सबया-चिरैयाकोट पेट्रोल पंप के पास यह हादसा हुआ। महराजगंज डिपो की रोडवेज बस निचलौल से सिसवा की ओर जा रही थी, जबकि बाइक सवार युवक विपरीत दिशा से आ रहे थे।
टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीनों युवक बस के नीचे आ गए, जिससे मौके पर ही स्थिति गंभीर हो गई।

तीनों मृतकों की पहचान

हादसे में जान गंवाने वाले युवकों की पहचान इस प्रकार हुई है:

• साहिल साहनी (पुत्र डोमई)
• किसन साहनी (पुत्र भीखम साहनी), निवासी सोनबरसा, थाना कोठीभार
• अंबरीश साहनी (पुत्र रामजीयावन), निवासी टेढ़वा, थाना घुघली

घटना के बाद पुलिस ने सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिसवा पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

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पुलिस जांच में जुटी, बस चालक हिरासत में

सूचना मिलते ही थाना अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और हालात को नियंत्रित किया। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

वहीं, बस को कब्जे में लेते हुए चालक लल्लन (निवासी भिटौली बाजार) को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस हादसे के कारणों की गहन जांच कर रही है।

परिवारों में कोहराम, लोगों में आक्रोश

इस हृदयविदारक हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया है। पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तेज रफ्तार वाहनों पर सख्त नियंत्रण और सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है।

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सड़क बनी श्मशान: हाईवा-बाइक भिड़ंत में दो युवकों की जिंदगी खत्म

NH-80 पर मौत की रफ्तार: नई बाइक सवार दो युवकों की दर्दनाक मौत ग्रामीणों ने सड़क किया जाम

लखीसराय (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जिले के सूर्यगढ़ा थाना क्षेत्र में सोमवार देर शाम राष्ट्रीय राजमार्ग-80 (NH-80) पर रतनपुर गांव के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। तेज रफ्तार गिट्टी लदे हाईवा ट्रक और बाइक की आमने-सामने हुई जोरदार टक्कर में बाइक सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद जहां परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिट्टी लोड हाईवा ट्रक लखीसराय से मुंगेर की ओर जा रहा था, जबकि बाइक सवार युवक मुंगेर से लखीसराय की तरफ लौट रहे थे। रतनपुर गांव के समीप दोनों वाहनों के बीच आमने-सामने की टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और दोनों युवकों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। टक्कर की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोनों शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए, जिससे घटनास्थल पर मौजूद लोग भी सिहर उठे।

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बताया जा रहा है कि दोनों युवक एक नई बाइक पर सवार थे, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर BR 46 T 1484 (जमुई) है। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने बाइक और मृतकों के पास से मिले मोबाइल व अन्य सामान के आधार पर उनकी पहचान करने की कोशिश शुरू की। जांच के बाद मृतकों की पहचान जमुई जिले के मंझवे गांव निवासी दीपक कुमार और दिलीप कुमार के रूप में हुई।
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। हादसे से आक्रोशित लोगों ने लखीसराय–सूर्यगढ़ा NH-80 को जाम कर दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए दोषी ट्रक चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। कुछ लोगों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और इस मार्ग पर लगातार हो रहे हादसों को लेकर चिंता व्यक्त की।

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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सूर्यगढ़ा थाना अध्यक्ष रोहित कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने स्थानीय लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया और जाम हटवाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद यातायात को बहाल किया जा सका। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। ट्रक चालक मौके से फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है और गांव में सन्नाटा छाया हुआ है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सड़कों पर बढ़ती लापरवाही और तेज रफ्तार किस तरह मासूम जिंदगियों को लील रही है। जरूरत है कि प्रशासन के साथ-साथ आम लोग भी यातायात नियमों का सख्ती से पालन करें, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
खबर के लिए उपयुक्त फोटो (विवरण):
NH-80 पर दुर्घटनाग्रस्त बाइक और हाईवा ट्रक, आसपास जुटी भीड़, पुलिस जांच करती हुई, सड़क पर लगा जाम — हाई इम्पैक्ट ब्रेकिंग न्यूज़ विजुअल।

मेष संक्रांति: नव ऊर्जा, नव आरंभ का पर्व

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✍️ नवनीत मिश्र

भारतीय संस्कृति में समय-चक्र को अत्यंत सूक्ष्मता और वैज्ञानिक दृष्टि से समझा गया है। इसी परंपरा में मेष संक्रांति एक महत्वपूर्ण खगोलीय और सांस्कृतिक पर्व है, जो सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है। यह केवल एक ज्योतिषीय घटना नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि और मानवीय जीवन के नवोदय का प्रतीक भी है।

सौर नववर्ष की शुरुआत

सतुआन यानी मेष संक्रांति को भारतीय सौर नववर्ष का आरंभ माना जाता है। इस दिन से सूर्य की ऊर्जा अधिक प्रखर हो जाती है और दिन लंबे होने लगते हैं। यह समय नए संकल्प, नई शुरुआत और उत्साह का प्रतीक है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व विभिन्न नामों से मनाया जाता है:

• बैसाखी (पंजाब)
• पुथंडु (तमिलनाडु)
• पोइला बोइशाख (पश्चिम बंगाल)
• विशु (केरल)

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प्रकृति और कृषि से गहरा संबंध

यह समय ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है। शीत ऋतु के समाप्त होते ही धरती पर हरियाली छा जाती है और फसल कटाई का दौर शुरू होता है। किसानों के लिए यह विशेष महत्व रखता है, क्योंकि उनकी मेहनत का फल इसी समय मिलता है।

इसलिए मेष संक्रांति को समृद्धि, कृतज्ञता और प्रकृति के प्रति आभार का पर्व भी कहा जाता है।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और सूर्य देव की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फलदायी होता है।
आध्यात्मिक रूप से यह पर्व हमें सिखाता है:

• जीवन में परिवर्तन अनिवार्य है
• हर बदलाव नई संभावनाएं लेकर आता है
• सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास से आगे बढ़ना चाहिए

नए जीवन की प्रेरणा

सूर्य का मेष राशि में प्रवेश साहस, नेतृत्व और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम पुराने नकारात्मक विचारों को छोड़कर नए लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ें।
मेष संक्रांति केवल एक तिथि नहीं, बल्कि नवजीवन, नवसृजन और सकारात्मकता का उत्सव है। यह हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाने, परिश्रम का सम्मान करने और नए उत्साह के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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विश्लेषण: शिक्षित युवाओं में बढ़ती बेरोज़गारी – एक गंभीर चुनौती

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भारत में युवाओं की बड़ी आबादी को लंबे समय से “डेमोग्राफिक डिविडेंड” के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन मौजूदा हालात इस उम्मीद पर सवाल खड़े कर रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्नातक युवाओं में बेरोज़गारी दर 40% तक पहुंच गई है, जो देश के रोजगार ढांचे की कमजोरियों को उजागर करती है।

आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं

• 15–29 वर्ष के युवाओं की संख्या: 36.7 करोड़
• संभावित कार्यबल: 26.3 करोड़
• स्नातक या उससे अधिक शिक्षित: 6.3 करोड़
• बेरोज़गार स्नातक: 1.1 करोड़

यह साफ दर्शाता है कि देश में शिक्षा और रोजगार के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।

कृषि की ओर लौटता रोजगार – विकास की उलटी दिशा

आर्थिक विकास में सामान्यतः लोग कृषि से उद्योग और सेवा क्षेत्र की ओर जाते हैं, लेकिन भारत में उल्टा रुझान दिख रहा है।

2021-24 के बीच बने 8.2 करोड़ नए रोजगारों में से करीब 4 करोड़ कृषि क्षेत्र में जुड़े। यह दर्शाता है कि लोग मजबूरी में कम आय वाले क्षेत्रों की ओर लौट रहे हैं।

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महिलाओं की भागीदारी – मजबूरी या सशक्तिकरण?

कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन यह सशक्तिकरण नहीं बल्कि मजबूरी का संकेत है।

अधिकतर महिलाएं बिना वेतन के पारिवारिक कार्यों में जुड़ी हैं या छोटे स्तर पर स्वरोज़गार कर रही हैं।

शिक्षा पर घटता भरोसा

• पिछले वर्षों में शिक्षा में दाखिला बढ़ा, लेकिन अब गिरावट देखने को मिल रही है

• 72% युवाओं ने पढ़ाई छोड़ने का कारण आर्थिक दबाव बताया

यह दिखाता है कि युवा अब शिक्षा को रोजगार की गारंटी नहीं मान रहे।

डिमांड-सप्लाई का असंतुलन

समस्या की जड़ है:

• नौकरी की कमी
• शिक्षित युवाओं की अधिकता

इस कारण:

• ग्रेजुएट युवाओं को कम स्किल वाली नौकरी करनी पड़ रही है
• सैलरी कम हो रही है
• स्किल का मूल्य घट रहा है

डेमोग्राफिक डिविडेंड बन सकता है संकट

भारत की युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन यदि उन्हें रोजगार नहीं मिला तो यही ताकत संकट में बदल सकती है।

सरकार और नीति निर्माताओं के लिए यह समय है कि वे:

• रोजगार सृजन पर ध्यान दें
• स्किल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दें
• उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करें

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देवरिया: डॉ. आंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ का भव्य आयोजन

देवरिया/बरहज (राष्ट्र की परम्परा)। भारत के संविधान निर्माता B. R. Ambedkar की 135वीं जयंती की पूर्व संध्या पर नगर पालिका परिषद गौरा बरहज के वार्ड उजरा मोहाँव में “नारी शक्ति वंदन सम्मेलन” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी देखने को मिली।

मुख्य अतिथि ने दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि गीता विश्वकर्मा (सदस्य, राज्य महिला आयोग, उत्तर प्रदेश) ने डॉ. आंबेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने दलित, शोषित और पिछड़े वर्गों को संविधान के माध्यम से न्याय और अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया।

महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर

इस अवसर पर नगर पालिका परिषद गौरा बरहज की अध्यक्ष श्वेता जायसवाल और अधिशासी अधिकारी निरुपमा प्रताप की विशेष उपस्थिति रही। दोनों ने नगर क्षेत्र में चल रहे महिला सशक्तिकरण और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला।

नगरपालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने Narendra Modi और Yogi Adityanath के नेतृत्व में चल रहे “नारी शक्ति वंदन” जैसे अभियानों की सराहना करते हुए कहा कि इन पहलों से महिलाओं के सर्वांगीण विकास को नई दिशा मिल रही है।

श्रद्धांजलि और जनसहभागिता

कार्यक्रम में उपस्थित सभासदों, नगर पालिका कर्मचारियों और सैकड़ों नागरिकों ने डॉ. आंबेडकर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजन के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।

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US-Iran War: होर्मुज समेत ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी, F-35B और MV-22 की तैनाती

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच United States ने ईरान के समुद्री इलाकों और बंदरगाहों के आसपास सख्त नाकेबंदी लागू कर दी है। अमेरिकी सेना ने इस अभियान के तहत 15 से ज्यादा जंगी जहाज तैनात किए हैं, जिससे क्षेत्र में हालात और गंभीर हो गए हैं।

USS Tripoli और फाइटर जेट्स की तैनाती

USS Tripoli (LHA-7) को अरब सागर में तैनात किया गया है। इस आधुनिक युद्धपोत पर अत्याधुनिक F-35B Lightning II फाइटर जेट्स और MV-22 Osprey एयरक्राफ्ट तैनात हैं, जो लगातार समुद्री क्षेत्र में निगरानी और गश्त कर रहे हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमान CENTCOM के अनुसार, यह नाकेबंदी भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से लागू की गई।

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समुद्री गतिविधियों पर कड़ी नजर

CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों, अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के समुद्री मार्गों पर लागू होगी। हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।

अमेरिकी सेना का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी संभावित खतरे को रोकना है।

बढ़ता तनाव, युद्ध जैसे हालात

USS Tripoli को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पारंपरिक वेल डेक के बिना अधिक संख्या में फाइटर जेट्स तैनात कर सके। युद्ध जैसी स्थिति में यह 20 से ज्यादा F-35B जेट्स को संचालित करने में सक्षम है।
इस तैनाती के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है और वैश्विक स्तर पर इसके असर की आशंका जताई जा रही है, खासकर तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर।

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