Friday, July 17, 2026
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गैस-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सपा का विरोध, जनता की समस्याओं को लेकर उठी आवाज

भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।

80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

उपजाऊ जमीन पर सड़क बनाने का आरोप, डीएम के आदेश पर जांच शुरू

मेंहदावल के लहरौली ठाकुराई गांव में सड़क निर्माण पर विवाद, किसान ने पीडब्ल्यूडी व ठेकेदार पर लगाए गंभीर आरोप

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के मेंहदावल तहसील के लहरौली ठाकुराई गांव में सड़क निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। गांव के एक किसान ने अपनी निजी कृषि भूमि पर जबरन सड़क निर्माण कराए जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से शिकायत की है। मामला जिलाधिकारी आलोक कुमार तक पहुंचने पर उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित उपजिलाधिकारी को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
गांव निवासी हीरालाल का आरोप है कि उनकी निजी भूमि, गाटा संख्या-117 पर बिना सहमति के जेसीबी से खुदाई कर सड़क निर्माण कराया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें न तो पूर्व सूचना दी गई और न ही भूमि अधिग्रहण अथवा अन्य वैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई। विरोध दर्ज कराने के बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया।
किसानो का दावा है कि राजस्व अभिलेखों और सरकारी नक्शे में सड़क का निर्धारित मार्ग उनकी भूमि से अलग है। उनके अनुसार प्रस्तावित मार्ग पर पहले से खड़ंजा सड़क मौजूद है, इसके बावजूद उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का उपयोग सड़क निर्माण के लिए किया जा रहा है। इससे फसल और जमीन दोनों को नुकसान पहुंचने की बात उन्होंने शिकायत में कही है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य सरकारी अभिलेखों के अनुरूप कराया जाए। साथ ही उनकी भूमि को हुए नुकसान का नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए तथा जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार पक्षों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
मामले की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित एसडीएम को निष्पक्ष जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल सड़क निर्माण को लेकर गांव में चर्चा का माहौल है। एक ओर किसान अपनी कृषि भूमि को बचाने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन जांच के माध्यम से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कह रहा है। अब सभी की निगाहें एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि सड़क निर्माण निर्धारित योजना के अनुरूप हो रहा है या शिकायत में लगाए गए आरोपों में तथ्य हैं।

हल्दी में 14 घंटे से अधिक बिजली गुल, उमस भरी गर्मी में 200 गांवों के लोग बेहाल

बलिया (राष्ट्र क़ी परम्परा )

विद्युत उपकेंद्र सोनवानी की बिजली आपूर्ति व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। गुरुवार शाम हुई बारिश के बाद क्षेत्र में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। शुक्रवार शाम तक भी हल्दी, भरसौंता, सुल्तानपुर और नंदपुर समेत कई गांवों में बिजली बहाल नहीं हो सकी, जिससे उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिली। जानकारी के अनुसार, बारिश के दौरान विद्युत लाइन में फाल्ट आने और एक पोल टूट जाने के कारण आपूर्ति बाधित हो गई। विभागीय कर्मचारियों ने बताया कि पोल क्षतिग्रस्त होने से मरम्मत कार्य में समय लग रहा है। वहीं उपकेंद्र से जुड़े अन्य क्षेत्रों में शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई, लेकिन हल्दी फीडर से जुड़े गांव देर शाम तक अंधेरे में डूबे रहे। लगभग 14 घंटे से अधिक समय तक बिजली नहीं रहने से उपकेंद्र से जुड़े करीब 200 गांवों के लोगों को उमस भरी गर्मी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक दिक्कत बुजुर्गों, बीमारों, महिलाओं और छोटे बच्चों को हुई। लंबे समय तक बिजली गुल रहने से इनवर्टर भी जवाब दे गए, जिससे पेयजल संकट गहरा गया। कई घरों में पानी भरने, भोजन बनाने और अन्य दैनिक कार्य प्रभावित रहे। ग्राम सभा भरसौंता के प्रधान प्रतिनिधि मनीष सिंह, सुल्तानपुर के प्रधान प्रतिनिधि डॉ. संपूर्णानंद, नंदपुर के प्रधान ओमप्रकाश पांडेय सहित संतोष सिंह और कुणाल सिंह ने आरोप लगाया कि विद्युत उपकेंद्र सोनवानी से आए दिन घंटों बिजली कटौती की जाती है, लेकिन उपभोक्ताओं को इसकी पूर्व सूचना तक नहीं दी जाती। इससे आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से मांग की है कि आपूर्ति व्यवस्था में स्थायी सुधार किया जाए, लंबी और बार-बार होने वाली कटौती पर रोक लगे तथा किसी तकनीकी खराबी की स्थिति में उपभोक्ताओं को समय रहते सूचना उपलब्ध कराई जाए। इस संबंध में अवर अभियंता (जेई) प्रदुम्न यादव ने बताया कि रात में हल्दी फीडर में फाल्ट हो गया था, जिसके कारण बिजली आपूर्ति बाधित हुई। अन्य क्षेत्रों में सप्लाई बहाल कर दी गई है, जबकि हल्दी क्षेत्र में मरम्मत कार्य जारी है और जल्द ही बिजली आपूर्ति सामान्य कर दी जाएगी।

भारतीय दृष्टि से लिखा जाए इतिहास, औपनिवेशिक सोच से बाहर निकलने का समय: डॉ. बालमुकुंद पांडे

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय इतिहास को विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों और औपनिवेशिक इतिहासकारों के नजरिए तक सीमित रखना देश के गौरवशाली अतीत के साथ अन्याय है। समय की मांग है कि इतिहास का पुनर्पाठ भारतीय दृष्टिकोण, भारतीय स्रोतों और सांस्कृतिक परंपराओं के आधार पर किया जाए। यह विचार अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने व्यक्त किए।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग, सतीश चंद्र मित्तल शोध संस्थान तथा भारतीय इतिहास संकलन समिति, गोरक्ष प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “भारतीय इतिहास लेखन में नए बदलाव एवं चुनौतियाँ” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में इतिहास लेखन के बदलते प्रतिमानों, औपनिवेशिक इतिहास दृष्टि की समीक्षा तथा भारतीय परिप्रेक्ष्य से इतिहास के पुनर्लेखन पर गंभीर मंथन हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि के साथ हुआ। इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार तिवारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इतिहास केवल घटनाओं का संकलन नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और आत्मबोध का आधार है। इसलिए भारतीय दृष्टि से इतिहास का अध्ययन और लेखन आज पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कला संकायाध्यक्ष एवं प्राचीन इतिहास विभाग के प्रो. राजवंत राव ने कहा कि राजनीतिक स्वतंत्रता के दशकों बाद भी भारतीय शिक्षा व्यवस्था औपनिवेशिक मानसिकता के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक ज्ञान-पद्धति ने योजनाबद्ध तरीके से भारतीय ज्ञान परंपरा, भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को हाशिये पर धकेलने का प्रयास किया। भारतीय इतिहास और संस्कृति की सही समझ के लिए इस मानसिकता से बाहर निकलना आवश्यक है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. एस.एन. चौबे ने कहा कि इतिहास लेखन तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने चौरी-चौरा के उदाहरण का उल्लेख करते हुए बताया कि लंबे समय तक इसे “चौरी-चौरा कांड” कहा गया, जबकि बाद के शोधों ने इसे “चौरी-चौरा घटना” के रूप में स्थापित किया। यह परिवर्तन केवल शब्दों का नहीं, बल्कि इतिहास को देखने की दृष्टि का परिवर्तन है।
इतिहास विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. निधि चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय इतिहास के अनेक महत्वपूर्ण अध्याय वर्षों तक उपेक्षित रहे। भारतीय इतिहास संकलन योजना ने लोक परंपराओं, पुरातात्विक साक्ष्यों, अभिलेखों और भारतीय स्रोतों को सामने लाकर इतिहास की अनेक रिक्तियों को भरने का कार्य किया है।
मुख्य वक्ता डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि नवस्थापित सतीश चंद्र मित्तल शोध संस्थान भारतीय दृष्टि से इतिहास अध्ययन और शोध का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने भारत के गौरवशाली अतीत को विकृत कर अंग्रेज़ी दृष्टिकोण को इतिहास लेखन पर आरोपित किया। परिणामस्वरूप भारतीय सभ्यता, संस्कृति, विज्ञान, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां इतिहास के मुख्य विमर्श से बाहर हो गईं। उन्होंने शोधार्थियों से भारतीय स्रोतों, भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को आधार बनाकर शोध करने का आह्वान किया।
संगोष्ठी के प्रश्नोत्तर सत्र में शोधार्थियों ने इतिहास लेखन, स्रोतों की प्रामाणिकता और भारतीय इतिहास के पुनर्पाठ से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. सुनीता ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. आशीष कुमार सिंह, प्रो. श्वेता सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

PMEGP Scheme Kushinagar: मजदूर से उद्योगपति बने अशोक विश्वकर्मा, 30 लोगों को मिला रोजगार

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) ने जनपद कुशीनगर के गंगा छपरा, कुरहवा-अहिरौली बाजार निवासी अशोक विश्वकर्मा की जिंदगी बदल दी। कभी फर्नीचर की दुकान पर मजदूरी करने वाले अशोक आज ‘महालक्ष्मी फर्नीचर’ के सफल संचालक हैं और अपने उद्योग के माध्यम से 25 से 30 लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।

अशोक विश्वकर्मा ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिली। परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्होंने फर्नीचर की दुकान पर मजदूरी की और बाद में दिल्ली जाकर फर्नीचर निर्माण का प्रशिक्षण व अनुभव प्राप्त किया।

गृह जनपद लौटने के बाद उन्होंने अपना उद्योग शुरू करने का सपना देखा, लेकिन पूंजी की कमी सबसे बड़ी बाधा थी। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) की जानकारी मिली। उन्होंने ग्राम उद्योग कार्यालय के माध्यम से आवेदन किया, जिसके बाद उनकी परियोजना स्वीकृत हुई और बैंक से 15 लाख रुपये का ऋण मिला।

ऋण मिलने के बाद अशोक ने ‘महालक्ष्मी फर्नीचर’ की स्थापना की। गुणवत्तापूर्ण कार्य और मेहनत के बल पर उनका कारोबार लगातार बढ़ता गया। वर्तमान में उनके प्रतिष्ठान में नियमित रूप से 12 से 13 लोग कार्यरत हैं, जबकि सीजन के दौरान 25 से 30 लोगों को रोजगार मिलता है। उनकी मासिक आय अब 60 हजार से 70 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है।

अशोक का कहना है कि पहले आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी, लेकिन अब परिवार आत्मनिर्भर और खुशहाल जीवन जी रहा है। उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

अशोक विश्वकर्मा की सफलता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर सीमित संसाधनों वाले लोग भी अपना उद्योग स्थापित कर सकते हैं और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। PMEGP योजना आज आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में गुणवत्ता लाने के लिए डिजिटल तकनीक का करें प्रभावी उपयोग


जिला पंचायत संसाधन केंद्र भिनगा श्रावस्ती में खण्ड स्तरीय प्रशिक्षण सम्पन्न, Q-GPDP एवं डिजिटल पंचायत पर मिला व्यवहारिक प्रशिक्षण


श्रावस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर एवं विकासोन्मुख बनाने की दिशा में गुरुवार को डी पी आर सी भिनगा श्रावस्ती में विकास खंड स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसका शुभारंभ बृजेश कुमार पाण्डेय वरिष्ठ फैकल्टी डी पी आर सी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तभी सफल होगी जब उसका निर्माण स्थानीय आवश्यकताओं, जनसहभागिता तथा डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग के साथ किया जाएगा। उन्होंने सभी अधिकारियों से प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को ग्राम स्तर तक पहुंचाकर योजनाओं के गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन का आह्वान किया।
जिला कॉर्डिनेटर स्वच्छ भारत मिशन राज कुमार तिवारी ने बताया कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार पंचायत में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबन्धन पर नए कानून 2026 में पंचायतों में स्वच्छता को लेकर बनाए गये नियमों के बारे में बताते हुए कहा कि इसे पंचायत की कार्य योजना में सम्मिलित कीजिए । प्रशिक्षक चंचल देवी ने बताया कि ग्राम सभा की बैठक का शेड्यूल जारी कर आम जन के साथ एससी एसटी, महिला, बुजुर्ग एवं दिव्यांग जन की उपस्थिति एवं लाइन डिपार्टमेंट के अधिकारी एवं कर्मचारी की सहभागिता सुनिश्चित कर, वित्तीय समावेशन एवं ओएसआर बढ़ाना है। जिससे क्वालिटी जीपीडीपी का निर्माण हो सके। हमें हर हाल में 15 अगस्त 2026 तक इसे ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड रहना है।
प्रशिक्षण का संचालन एवं मुख्य प्रशिक्षक अनिल कुमार तिवारी द्वारा किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को GPDP की 8-चरणीय प्रक्रिया, Q-GPDP, GPDP ब्लूप्रिंट, पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI), डिजिटल पंचायत ब्लूप्रिंट, ई-ग्राम स्वराज पोर्टल तथा ग्राम गरीबी निवारण योजना (VPRP) के ग्राम पंचायत विकास योजना में समेकन के विषय में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही योजनाओं के डिजिटल अपलोड, अभिसरण एवं सहभागी योजना निर्माण की व्यवहारिक प्रक्रिया का प्रदर्शन भी किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बताया गया कि ग्राम पंचायतों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का निर्माण, विभागीय योजनाओं के प्रभावी अभिसरण तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए विभिन्न व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से योजना निर्माण की प्रक्रिया को सरल ढंग से समझाया गया।
इस प्रशिक्षण में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रावस्ती की सचिव अनुप्रिया द्वारा सामाजिक रूप से सुरक्षित एवं न्याय संगत ग्राम पंचायत बनाने पर जोर देते हुए बताया कि ग्राम सभा के गरीब एवं जरूरतमंदों को विधिक सेवा मुफ़्त में दी जा रही है, पंचायत सहायकों को संबोधित करते हुए कहा कि , बाल विवाह,बाल भिक्षावृत्ति, बाल श्रम, घरेलू हिंसा रोकने हेतु जागरूकता पैदा करें साथ ही बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कार्य योजना में अंकित करें एवं पंचायतों को बाल हितैषी एवं महिला हितैषी की बनाने की दिशा में कार्य योजना तैयार करें।
जिला परियोजना प्रबंधक सपना यादव द्वारा पंचायत पोर्टल, जी पी डी पी पोर्टल, पंचायत निर्णय ऐप, ई ग्राम स्वराज के बारे में तकनीकी जानकारी दी।
कार्यक्रम में जिला समन्वयक सी 3 द्वारा पंचायतों में जी पी डी पी की कार्य योजना के तहत स्वास्थ्य एवं पोषण के बजट को डालने के बारे में तथा संकल्पित विषय स्वस्थ पंचायत एवं महिला हितैषी पंचायत बनाने के बारे में जानकारी दी।
इस कार्यक्रम में पंचायत सचिव, पंचायत सहायक, उपस्थित रहे।

मानव गरिमा को प्राथमिकता: 70 वर्ष से अधिक, गंभीर बीमार और दिव्यांग कैदियों के लिए सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत की न्यायपालिका ने 16 जुलाई 2026 को एक ऐसा ऐतिहासिक और मानवीय कदम उठाया है,जो केवल जेल प्रशासन या कैदियों तक सीमित नहीं है,बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र,संविधान, मानवाधिकार और न्याय व्यवस्था की संवेदनशीलता का भी प्रतीक बन गया है। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे तीन महीने के भीतर 70 वर्ष से अधिक आयु के, गंभीर एवं लाइलाज बीमारियों से पीड़ित तथा शारीरिक रूप से अक्षम कैदियों की समयपूर्व अथवा अनुकंपा के आधार पर रिहाई के लिए एक समान, व्यापक, पारदर्शी और मानवीय नीति तैयार करें।यह आदेश भारतीय न्यायिक इतिहास में इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि पहली बार सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे देश में एकरूपता लाने के उद्देश्य से स्पष्ट समयसीमा निर्धारित की है। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र अधिवक्ता होने के नाते इस आर्टिकल के माध्यम से आम जनता को जानकारी देना चाहूंगा क़ि भारतीय संविधान का मूल दर्शन केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं,बल्कि उन्हें सुधार का अवसर देना भी है।संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है। यह अधिकार जेल की चारदीवारी के भीतर भी समाप्त नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति जीवन के अंतिम पड़ाव पर है, कैंसर, एड्स,अंतिम चरण की किडनी या अन्य असाध्य बीमारी से जूझ रहा है अथवा ऐसा दिव्यांग है जो अपना दैनिक कार्य स्वयं नहीं कर सकता, तो उसके साथ मानवीय व्यवहार करना एक सभ्य लोकतंत्र का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश इसी संवैधानिक दर्शन को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में उठाया गया एक निर्णायक कदम है।अदालत ने इस दलील को स्वीकार किया कि गंभीर रूप से अक्षम और मृत्यु शय्या पर पड़े कैदियों को जेल में बंद रखना न केवल क्रूरता है,बल्कि यह देश के नागरिकों को मिलने वाले समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) और जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का भी खुला उल्लंघन है।इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब कोई बुजुर्ग या गंभीर रूप से बीमार कैदी जेल से बाहर आए, तो उसे अचानक लावारिस न छोड़ दिया जाए। रिहाई के बाद भी उसे निरंतर चिकित्सा सहायता मिलती रहे, यदि उसका परिवार उसे अपनाने से इनकार कर दे तो उसे वृद्धाश्रम या सरकारी आश्रय गृहों में जगह मिले, और सामाजिक कल्याण योजनाओं के माध्यम से उसे वित्तीय सहायता या पेंशन मिल सके। यह समग्र दृष्टिकोण इस फैसले को एक सामान्य अदालती आदेश से ऊपर उठाकर एक महान सामाजिक सुधार और मानवीय क्रांति का दस्तावेज बनाता है, जिसकी गूंज आगामी 19 जनवरी 2027 को होने वाली सुनवाई में देश के सामने होगी। 

साथियों बात अगर हम देश में अभी तक समयपूर्व रिहाई की व्यवस्था को समझने की करें तो यह प्रत्येक राज्य में अलग- अलग नियमों पर आधारित रही है। कहीं कैदी को 14 वर्ष बाद विचार का अवसर मिलता है, कहीं 20 वर्ष बाद, तो कहीं अनेक प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण पात्र कैदियों की फाइलें वर्षों तक लंबित रहती हैं। कई बार मेडिकल रिपोर्ट समय पर नहीं बनती, कई बार जेल प्रशासन और गृह विभाग के बीच पत्राचार में महीनों निकल जाते हैं,तो कहीं राजनीतिक अथवा प्रशासनिक उदासीनता के कारण आवेदन फाइलों में दबे रह जाते हैंपरिणामस्वरूप अनेक बुजुर्ग और गंभीर बीमार कैदी न्याय मिलने से पहले ही जेल में दम तोड़ देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस असमानता और प्रशासनिक ढिलाई को संविधान की भावना के विपरीत माना है।अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश सभी कैदियों के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य केवल उन विशेष परिस्थितियों वाले कैदियों के लिए मानवीय राहत सुनिश्चित करना है जो 70 वर्ष से अधिक आयु के हैं, जिनकी बीमारी लाइलाज है या जो गंभीर शारीरिक अक्षमता के कारण सामान्य जीवन जीने में असमर्थ हैं। ऐसे मामलों में राज्य सरकारें चिकित्सकीय परीक्षण, सुरक्षा मूल्यांकन तथा अन्य कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए समयपूर्व अथवा अनुकंपा के आधार पर रिहाई का निर्णय लेंगी। अर्थात यह स्वतः रिहाई का आदेश नहीं बल्कि पारदर्शी और समयबद्ध निर्णय प्रक्रिया सुनिश्चित करने का निर्देश है।इस निर्णय का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में एक समान नीति बनाने पर जोर दिया है। 

साथियों, आज तक विभिन्न राज्यों की नीतियों में इतनी अधिक भिन्नता रही है कि समान परिस्थितियों वाले दो कैदियों को केवल अलग- अलग राज्यों में होने के कारण अलग-अलग व्यवहार का सामना करना पड़ता था। न्याय के सिद्धांत के अनुसार समान परिस्थितियों में समान व्यवहार होना चाहिए। यही कारण है कि अदालत ने राष्ट्रीय स्तर पर एकरूपता लाने का सटीक निर्देश दिया है।डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने की दिशा में भी यह आदेश अत्यंत महत्वपूर्ण है। अदालत ने निर्देश दिया है कि समयपूर्व रिहाई की पूरी प्रक्रिया को ई-प्रिज़न्स पोर्टल से जोड़ा जाए।इससे आवेदन जमा होने से लेकरमेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट, जेल प्रशासन की अनुशंसा,गृह विभाग की स्वीकृति और अंतिम निर्णय तक प्रत्येक चरण डिजिटल रूप से दर्ज होगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि भ्रष्टाचार,फाइलों के गायब होने,अनावश्यक देरी और जवाबदेही की कमी जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण लगेगा। यदि किसी स्तरपर आवेदन लंबित रहेगा तो यह स्पष्ट होगा कि देरी किस अधिकारी या विभाग के स्तर पर हुई है। 

साथियों, डिजिटल मॉनिटरिंग का यह मॉडल भारत में न्यायिक प्रशासन के आधुनिकीकरण का उत्कृष्टउदाहरण बन सकता है।जिस प्रकार आयकर, पासपोर्ट,भूमि अभिलेख, जीएसटी और न्यायालयों की ई-फाइलिंग प्रणाली ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी बनाया है, उसी प्रकार जेल प्रशासन में डिजिटल निगरानी भविष्य में व्यापक सुधारों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।सुप्रीम कोर्ट ने केवल निर्देश देकर अपने दायित्व की औपचारिकता पूरी नहीं की है। उसने इस पूरे मामले की निरंतर निगरानी का भी निर्णय लिया है।अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को छह महीने के भीतर अनुपालन हलफनामा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि नीति बनाई गई या नहीं, उसे अधिसूचित किया गया या नहीं, कितने मामलों पर विचार हुआ और कितने पात्र कैदियों को सटीकता से  रिहा किया गया। 

साथियों, इस मामले की अगली सुनवाई 19 जनवरी 2027 को निर्धारित की गई है,जब सर्वोच्च न्यायालय स्वयं प्रत्येक राज्य की प्रगति की समीक्षा करेगा। यह दर्शाता है कि न्यायपालिका इस विषय को केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि व्यावहारिक परिणामों तक पहुँचाना चाहती है।यह निर्णय भारतीय जेलों की गंभीर समस्या अत्यधिक भीड़ को कम करने की दिशा में भी सहायक हो सकता है। देश की अनेक जेलें अपनी स्वीकृत क्षमता से कहीं अधिक कैदियों को रखने के लिए विवश हैं। भीड़भाड़ के कारण स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छता, सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास जैसी व्यवस्थाएं प्रभावित होती हैं। यदि वास्तव में अति वृद्ध, असाध्य रोगग्रस्त और अक्षम कैदियों के मामलों का समयबद्ध समाधान होता है तो जेलों पर दबाव कम होगा और प्रशासन उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेगा। 

साथियों, आर्थिक दृष्टि से भी यह निर्णय महत्वपूर्ण है। गंभीर बीमार कैदियों के इलाज पर राज्य सरकारों को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती है। कई मामलों में जेल अस्पताल पर्याप्त नहीं होते और उन्हें बाहरी अस्पतालों में भर्ती कराना पड़ता है, जहाँ सुरक्षा व्यवस्था पर भी अतिरिक्त व्यय होता है। यदि ऐसे कैदियों को कानून के अनुरूप मानवीय आधार पर रिहा किया जाता है तो सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव होगा। हालांकि आर्थिक लाभ इस आदेश का प्रमुख उद्देश्य नहीं है; इसका मूल आधार मानव गरिमा और संवैधानिक करुणा है। 

साथियों, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह निर्णय भारत की न्यायिक सोच को आधुनिक मानवाधिकार मूल्यों के अनुरूप स्थापित करता है। संयुक्त राष्ट्र के नेल्सन मंडेला नियम तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानक इस बात पर बल देते हैं कि कैदियों के साथ भी गरिमापूर्ण व्यवहार किया जाए और गंभीर रूप से बीमार अथवा वृद्ध कैदियों के मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।अनेक विकसित देशों में कंपानसेट रिलीज़ या मेडिकल परोले जैसी व्यवस्थाएं पहले से लागू हैं। 

साथियों, भारत का यह कदम वैश्विक मानकों की दिशा में एक सकारात्मक प्रगति माना जा सकता है।यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि मानवीय दृष्टिकोण का अर्थ न्याय से समझौता नहीं है। समाज की सुरक्षा सर्वोपरि है। इसलिए प्रत्येक मामले में अपराध की प्रकृति, पीड़ित पक्ष के अधिकार, कैदी का व्यवहार, चिकित्सकीय स्थिति और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे पहलुओं पर विधि के अनुसार विचार किया जाएगा। इस नीति का उद्देश्य अपराध को क्षमा करना नहीं बल्कि उन विशेष परिस्थितियों में संवेदनशील निर्णय लेना है जहाँ कठोर दंड का उद्देश्य लगभग समाप्त हो चुका हो और मानवीय गरिमा को प्राथमिकता देना अधिक न्यायसंगत हो।इस आदेश का एक अप्रत्यक्ष सकारात्मक प्रभाव जेल सुधारों पर भी पड़ेगा। यदि डिजिटल रिकॉर्डिंग, समयबद्ध प्रक्रिया, मेडिकल मूल्यांकन और नियमित निगरानी प्रभावी ढंग से लागू होती है तो भविष्य में पैरोल, फर्लो, कानूनी सहायता, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास कार्यक्रमों में भी व्यापक सुधार का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। यह भारतीय जेल प्रशासन को अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत सिद्ध हो सकती है। 

साथियों, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका भी इस निर्णय में उल्लेखनीय है। समाज के कमजोर, गरीब और असहाय वर्गों को न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कार्यरत इस संस्था ने जनहित याचिका के माध्यम से एक ऐसे वर्ग की आवाज सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचाई, जो स्वयं अपनी पीड़ा प्रभावी ढंग से व्यक्त करने की स्थिति में नहीं था। यह भारतीय न्याय व्यवस्था में संस्थागत संवेदनशीलताक़ा सकारात्मक उदाहरण है। 

साथियों, यदि राज्य सरकारें निर्धारित समयसीमा के भीतर स्पष्ट नीति बनाकर उसे प्रभावी ढंग से लागू करती हैं तो इसका लाभ केवल कुछ सौ या कुछ हजार कैदियों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे शासन-प्रशासन की कार्यसंस्कृति में भी सुधार आएगा। अधिकारियों को समयसीमा के भीतर निर्णय लेने की आदत विकसित होगी, डिजिटल रिकॉर्डिंग से जवाबदेही बढ़ेगी और न्यायिक निर्देशों के पालन की संस्कृति मजबूत होगी।

आगे की सबसे बड़ी चुनौती नीति बनाना नहीं बल्कि उसका निष्पक्ष और प्रभावी क्रियान्वयन होगा। राज्यों को विशेषज्ञ चिकित्सकों, जेल प्रशासन, विधि विशेषज्ञों, मानवाधिकार आयोगों और समाजसेवी संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर ऐसी नीति तैयार करनी होगी जो मानवीय होने के साथ-साथ विधिसम्मत और संतुलित भी हो। यदि क्रियान्वयन पारदर्शी रहा तो यह आदेश आने वाले वर्षों में भारतीय जेल सुधारों का मील का पत्थर बन सकता है। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन का कर का इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि 16 जुलाई 2026 का यह निर्णय भारतीय न्यायपालिका की उस संवेदनशील सोच का प्रमाण है जिसमें न्याय केवल दंड तक सीमित नहीं बल्कि सुधार, पुनर्वास, करुणा और मानव गरिमा से भी जुड़ा है। तीन महीने में एक समान नीति, ई-प्रिज़न्स पोर्टल के माध्यम से डिजिटल निगरानी, छह महीने में अनुपालन रिपोर्ट और 19 जनवरी 2027 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वयं समीक्षा ये सभी पहलू इस बात का संकेत हैं कि अदालत इस विषय पर केवल निर्देश देकर पीछे हटने वाली नहीं है। यदि यह पहल सफल होती है तो भारत की जेल व्यवस्था अधिक मानवीय, पारदर्शी, जवाबदेह और संविधान के मूल आदर्शों के अनुरूप बन सकती है। यही किसी भी विकसित लोकतंत्र और विकसित भारत की पहचान है।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

आईजीआरएस शिकायत पर डीएम पहुंचे मौके पर दो प्रकरणों की जांच की

भाटपाररानी/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी नेबुधवार को भाटपाररानी तहसील अंतर्गत आईजीआरएस के दो प्रकरणों के निस्तारण के लिए मौके पर पहुंचकर वास्तविकता की जांच की। जांच में आए तथ्यों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
जिलाधिकारी भाटपार रानी नगर निवासी निवासी योगेंद्र राय द्वारा आईजीआरएस की एक शिकायत जो दर्ज पोखर एवं तालाब की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे तथा बहियारी बघेल निवासी शांति देवी द्वारा 116 के आदेश का अनुपालन में प्रतिपक्षी द्वारा बाधा उत्पन्न किए जाने की शिकायती प्रकरण की जांच जिलाधिकारी द्वारा मौके पर पहुंचकर किया गया।
जांच के दौरान योगेंद्र राय के प्रकरण में यह तथ्य सामने आया कि प्रकरण उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-67 के अंतर्गत न्यायालय में विचाराधीन है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को मुकदमे का त्वरित निस्तारण कर न्यायालय के आदेशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा ऐसे प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
बहियारी बघेल निवासी शांति देवी के प्रकरण में यह जांच में आया कि धारा 116 के आदेश के उपरांत अनुपालन में प्रतिपक्षी द्वारा बाधा उत्पन्न की जा रही है। जिलाधिकारी ने मौके पर जांच कर फरियादी शांति देवी को आदेश का अनुपालन किए जाने को कहा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रतिपक्षी अनुपालन में अवरोध उत्पन्न करें तो प्रशासन के संज्ञान में लाएं उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान उपजिलाधिकारी भाटपाररानी, तहसीलदार, राजस्व विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

लैरोदोनवार के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में 73 लाख रुपये की लागत से बनेगी बहुउद्देशीय धर्मशाला, हुआ भूमिपूजन

मऊ (राष्ट्र की परम्परा) जनपद के कोपागंज ब्लॉक स्थित प्राचीन शिव मंदिर लैरोदोनवार के प्रांगण में मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण कार्य के तहत बहुउद्देशीय धर्मशाला निर्माण के लिए भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ।

अजय सिंह योगी सेवक के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में पूज्य महाराज जी द्वारा स्वीकृत लगभग 73 लाख रुपये की लागत से बनने वाली धर्मशाला के निर्माण कार्य का शुभारंभ विधि-विधान से किया गया।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों ने भगवान शिव एवं माता दुर्गा का आशीर्वाद लेते हुए मंदिर परिसर के विकास कार्य को लेकर खुशी व्यक्त की। जल्द ही तैयार होने वाली यह सुंदर धर्मशाला श्रद्धालुओं और क्षेत्र के लोगों के लिए उपयोगी साबित होगी तथा मंदिर की शोभा बढ़ाएगी।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी ग्रामवासियों एवं क्षेत्रवासियों का आयोजकों ने हृदय से आभार व्यक्त किया।

दोहरीघाट–मधुबन मार्ग चौड़ीकरण से प्रभावित किसानों के साथ जिलाधिकारी ने की बैठक

शासनादेश के अनुरूप किसानों के हितों की होगी पूरी सुरक्षा,किसी का अहित नहीं होने दिया जाएगा: जिलाधिकारी

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)जनपद में प्रस्तावित दोहरीघाट–मधुबन मार्ग के चौड़ीकरण कार्य से प्रभावित काश्तकारों के साथ जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक कर उनकी समस्याओं एवं सुझावों को विस्तार से सुना। बैठक में निबंधन कार्यालय द्वारा सड़क के किनारे अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के सर्किल रेट एवं भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर किसानों के साथ विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में सब रजिस्ट्रार ने बताया कि मार्ग चौड़ीकरण से ग्राम पंचायत पुरमोती, रसूलपुर एवं बिलौली सोनबरसा के किसान प्रभावित होंगे। किसानों ने पूर्व में ही भूमि का अंश निर्धारण किए जाने तथा सर्किल रेट का उचित एवं न्यायसंगत निर्धारण किए जाने की मांग रखी।
जिलाधिकारी ने उपस्थित किसानों को शासनादेशों की जानकारी देते हुए आश्वस्त किया कि भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता एवं नियमानुसार संपन्न कराई जाएगी तथा किसी भी किसान का किसी प्रकार का अहित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन के प्रावधानों के अनुरूप किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सर्किल रेट एवं अन्य सभी आवश्यक बिंदुओं का निर्धारण किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी मधुबन, सब रजिस्ट्रार एवं लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारियों को निर्देशित किया कि सर्किल रेट का निर्धारण पूरी निष्पक्षता एवं तथ्यों के आधार पर किया जाए। उन्होंने नगर एवं ग्रामीण क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुरूप अलग-अलग मानकों को ध्यान में रखते हुए सर्किल रेट निर्धारित करने के भी निर्देश दिए।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सड़क चौड़ीकरण परियोजना को जनहित एवं क्षेत्र के विकास की दृष्टि से सकारात्मक रूप में लें तथा प्रशासन का सहयोग करें। साथ ही अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप उच्च गुणवत्ता के साथ समयबद्ध ढंग से पूर्ण कराया जाए।
बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रवेंद्र कुमार, उप जिलाधिकारी मधुबन, मधुबन सर्किल क्षेत्र के सब रजिस्ट्रार, लोक निर्माण विभाग के अधिकारी तथा प्रभावित ग्राम पंचायतों के समस्त प्रभावित किसान उपस्थित रहे।

टूटा हाथ, टूटा भरोसा! डीआईजी के आदेश के बाद भी न्याय से वंचित पीड़ित

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के धर्मसिंहवा थाना क्षेत्र के सेवहा बाबू और जखनियां गांव के अपराध पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। आरोप है कि पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) के आदेश के बावजूद धर्मसिंहवा पुलिस ने अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है। इससे स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
सेवहा बाबू गांव निवासी बुजुर्ग राम विजय ने आरोप लगाया कि गांव के कुछ दबंगों ने उनके साथ मारपीट की, जिससे उनका हाथ टूट गया। घटना के बाद उन्होंने स्थानीय थाने में तहरीर दी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक (एसपी) और पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) से न्याय की गुहार लगाई। आरोप है कि उच्चाधिकारियों के निर्देश मिलने के बाद भी धर्मसिंहवा थाने में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
पीड़ितों का कहना है कि सेवहा बाबू और जखनियां गांव के कई लोग भी इसी तरह अपनी शिकायतों को लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिल रहा। उनका आरोप है कि थाना स्तर पर मामलों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे पीड़ितों का कानून व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हो रहा है।
पीड़ितों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए तथा मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाए।

उत्कृष्ट शिक्षक ही गढ़ते हैं राष्ट्र का भविष्य : प्रो. पूनम टंडन

बदलते शैक्षिक परिवेश के अनुरूप स्वयं को निरंतर अद्यतन करें शिक्षक : प्रो. संजीव कुमार

अध्ययन, मनन और चिंतन से ही बनता है श्रेष्ठ शिक्षक : प्रो. पी. सी. त्रिवेदी

डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में 12वें फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम (गुरु दक्षता) का शुभारम्भ, 13 राज्यों के 143 शिक्षक ले रहे हैं प्रशिक्षण

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा आयोजित 12वें फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम (गुरु दक्षता) का शुभारम्भ बुधवार को ऑनलाइन माध्यम से हुआ। चार सप्ताह तक चलने वाला यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 जुलाई से 11 अगस्त, 2026 तक आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य नव नियुक्त एवं कार्यरत शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों, अनुसंधान, शैक्षणिक नेतृत्व तथा उच्च शिक्षा की समकालीन आवश्यकताओं से परिचित कराना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि नई शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में शिक्षकों की भूमिका पहले की अपेक्षा कहीं अधिक व्यापक और उत्तरदायित्वपूर्ण हो गई है। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी का निर्माता है। उन्होंने शिक्षकों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, उत्कृष्ट अनुसंधान तथा उच्च स्तरीय शोध प्रकाशनों के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया। उन्होंने वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन जैसी राष्ट्रीय पहल का अधिकतम उपयोग करते हुए शोध एवं प्रकाशन की गुणवत्ता बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि निरंतर सीखना, नवाचार तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता ही भारतीय उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिला सकती है।
मुख्य अतिथि महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि आज का शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि शोधकर्ता, नवप्रवर्तक और दूरदर्शी चिंतक भी होना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी अपने भीतर असीम संभावनाएँ लेकर आता है और शिक्षक का दायित्व उन संभावनाओं को पहचानकर उन्हें सही दिशा देना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा अब केवल पारंपरिक कक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा नवाचार आधारित शिक्षण की ओर अग्रसर है। बदलती पीढ़ी की आवश्यकताओं को समझते हुए शिक्षकों को स्वयं को समयानुकूल बनाना होगा
सारस्वत अतिथि एवं दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. पी. सी. त्रिवेदी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि शिक्षा एक पुष्प के समान है, जिसकी सुगंध तभी फैलती है जब शिक्षक और विद्यार्थी समान समर्पण के साथ ज्ञानार्जन की प्रक्रिया में सहभागी बनते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। उन्होंने शिक्षकों से अध्ययन, अध्यापन, मनन और चिंतन को अपनी सतत शैक्षणिक संस्कृति का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि माननीय कुलपति प्रो. पूनम टंडन के प्रेरणादायी नेतृत्व एवं सतत मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय में शिक्षक क्षमता संवर्धन हेतु अनेक अभिनव कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान का संप्रेषक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का प्रमुख आधार है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के व्यक्तित्व, शिक्षण कौशल, अनुसंधान क्षमता तथा शैक्षणिक नेतृत्व को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने प्रतिभागियों से प्रशिक्षण की प्रत्येक गतिविधि में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करते हुए कार्यक्रम का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम समन्वयक प्रो. अनिल कुमार यादव ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की.
इस फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम में 143 प्रतिभागी पंजीकृत हैं, जो 30 से अधिक विषयों एवं उनके अनेक उप-विषयों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें भाषा एवं साहित्य, विज्ञान, वाणिज्य एवं प्रबंधन, सामाजिक विज्ञान, राजनीति एवं विधि, शिक्षा, कंप्यूटर विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान, संगीत, चित्रकला तथा भारतीय ज्ञान प्रणाली सहित अनेक विषय शामिल हैं। प्रतिभागी उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु तथा तेलंगाना सहित 13 राज्यों के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से जुड़े हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूर्णिमा मिश्रा ने किया, जबकि सह-समन्वयक डॉ. आकाश अग्रवाल ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय का जिलेभर में हुआ भव्य स्वागत,

मगहर बाईपास पर गौरव कुमार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने किया अभिनंदन

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय के प्रथम जनपद आगमन पर जिलाध्यक्ष नीतू सिंह के नेतृत्व में जिलेभर में विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए गए। जगह-जगह पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया। इसी क्रम में मगहर पुलिस चौकी बाईपास पर जिला कार्यसमिति सदस्य एवं मनोनीत सभासद गौरव कुमार के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने क्षेत्रीय अध्यक्ष का जोरदार स्वागत किया।
स्वागत यात्रा की शुरुआत किया एजेंसी से हुई, जहां पूर्व विधायक दिग्विजय नारायण “जय चौबे” ने स्वागत किया। इसके बाद हनुमान मंदिर मगहर पर पूर्व विधायक राकेश सिंह बघेल, श्री दुर्गा मंदिर मगहर पर पूर्व चेयरमैन संगीता वर्मा, मगहर पुलिस चौकी पर मनोनीत सभासद गौरव कुमार, मंझरिया में धनघटा विधायक गणेश चंद्र चौहान, सोनी होटल पर विधायक अंकुर राज तिवारी, मेहदावल बाईपास पुल के नीचे सभी ब्लॉक प्रमुखों, नेदुला चौराहा पर नील मणि, सरेया बाईपास पर नगर टीम एवं युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं तथा अंत में जिला कार्यालय पर जिलाध्यक्ष नीतू सिंह के नेतृत्व में जिला संगठन ने उनका भव्य स्वागत किया।
जिले के नगर पंचायत मगहर में पुलिस चौकी बाईपास पर आयोजित कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रमुख रूप से मनोनीत सभासद ई. अरुण गुप्ता, रवि साहनी, सूरज निषाद, मुकेश निषाद, सबलू, अदहम अली एवं इज़हार अहमद का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर दिलीप मणि त्रिपाठी, मुरली चौरसिया, सर्वजीत चौरसिया, अरविंद निषाद, विक्की, अरुण गुप्ता, विद्याधर यादव, राम रतन चौरसिया, हरिकेश, पंकज, पप्पू निषाद, सोनू निषाद, मनीष कन्नौजिया, अमन कुमार, सज्जू, वीरेंद्र गुप्ता, दया, शैलेन्द्र सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

पत्रकारों ने सांसद विजय कुमार दुबे से लगाई गुहार, रेल यात्रा रियायत बहाल कराने की उठाई मांग


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद की मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति, कुशीनगर ने पत्रकारों को पूर्व में उपलब्ध रेल यात्रा रियायत सुविधा को पुनः शुरू कराने की मांग को लेकर सांसद विजय कुमार दुबे को ज्ञापन सौंपा है। समिति का कहना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान अस्थायी रूप से स्थगित की गई यह सुविधा आज तक बहाल नहीं हो सकी है, जिससे मान्यता प्राप्त पत्रकारों को समाचार संकलन और जनहित से जुड़े कार्यों के दौरान अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
समिति के अध्यक्ष एस.एन. शुक्ला के नेतृत्व में भेजे गए पत्र में कहा गया है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकार समाज और सरकार के बीच महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाते हैं। दूर-दराज क्षेत्रों में जाकर समाचार संकलन, जनसमस्याओं को उजागर करने तथा सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत सामने लाने के लिए पत्रकारों को लगातार यात्रा करनी पड़ती है। ऐसे में रेल यात्रा रियायत सुविधा उनके कार्य को अधिक प्रभावी और सुगम बनाती थी।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि कोरोना महामारी के दौरान रेल मंत्रालय ने विभिन्न रियायती सुविधाओं के साथ पत्रकारों को मिलने वाली यात्रा रियायत भी अस्थायी रूप से बंद कर दी थी। महामारी समाप्त होने के बाद भी इस व्यवस्था को पुनः लागू नहीं किया गया, जिससे देशभर के मान्यता प्राप्त पत्रकार प्रभावित हैं।
पत्रकार समिति ने सांसद विजय कुमार दुबे से अनुरोध किया है कि वे इस विषय को संसद तथा रेल मंत्रालय के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाकर पत्रकारों की रेल यात्रा रियायत सुविधा को शीघ्र बहाल कराने के लिए सकारात्मक पहल करें। समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि सांसद इस जनहित और पत्रकार हित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीरता से पहल करेंगे।

विश्व युवा कौशल दिवस पर रोजगार मेले में 42 युवाओं को मिला रोजगार

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान चकदही में आयोजित वृहद रोजगार मेले में 11 प्रतिष्ठित कंपनियों ने भाग लिया। मेले में 169 अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार दिया, जिनमें से 42 युवाओं का विभिन्न कंपनियों में चयन कर उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान किए गए।
राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, डी.डी.यू.जी.के.वाई., उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन एवं सेवायोजन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रोजगार मेले का शुभारंभ संयुक्त निदेशक प्रशिक्षण/शिक्षु, बस्ती मंडल, बस्ती ने किया। इस दौरान चयनित अभ्यर्थियों को ऑफर लेटर (एलओआई) वितरित किए गए तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रेरित किया गया।
जिला समन्वयक कौशल विकास मिशन ने बताया कि रोजगार मेले में लेग प्रो सॉल्यूशन, यूनिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, एलआईसी इंडिया, पीयू परिवहन विभाग, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस, अमेज़न, शिव शक्ति, गीगा कारपूल, उमोजा मार्केट प्लेस प्राइवेट लिमिटेड, स्पार्क मिंडा तथा सर्वसिद्धि मैनेजमेंट कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड सहित 11 प्रतिष्ठित कंपनियों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक प्रशिक्षण/शिक्षु, बस्ती मंडल, जिला समन्वयक कौशल विकास मिशन, प्रधानाचार्य राजकीय आईटीआई खलीलाबाद एवं हैसर बाजार, एमआईएस प्रबंधक, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, डेटा एंट्री ऑपरेटर तथा सभी ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

किताबों से नहीं साइबर ठगी से लिख रहा था भविष्य

B.Sc. छात्र निकला फर्जी लोन गैंग का मास्टरमाइंड, 10% कमीशन पर खुलवाए सैकड़ों खाते

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l पढ़ाई-लिखाई कर परिवार का सहारा बनने की उम्र में दो युवकों ने आसान कमाई का ऐसा रास्ता चुना, जिसने न सिर्फ उनकी जिंदगी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया, बल्कि रिश्तेदारों और दोस्तों को भी कानूनी संकट में डाल दिया। गोरखपुर पुलिस ने फर्जी लोन ऐप के जरिए साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गोरखपुर पुलिस ने फर्जी लोन देने के नाम पर देशभर के लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाने वाले दो युवकों को गिरफ्तार किया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में 22 वर्षीय मनजीत कुमार बीएससी सेकेंड ईयर का छात्र है, जबकि उसका साथी 23 वर्षीय विजय विश्वकर्मा इंटरमीडिएट और आईटीआई पास है।
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि मनजीत सोशल मीडिया पर फर्जी लोन कंपनी का पेज और मोबाइल एप बनाकर लोगों को कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा देता था। रजिस्ट्रेशन, प्रोसेसिंग और इंश्योरेंस फीस के नाम पर लोगों से ऑनलाइन रकम वसूल ली जाती थी, लेकिन न लोन मिलता था और न ही पैसा वापस होता था।
वहीं विजय विश्वकर्मा इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी था। वह 10 प्रतिशत कमीशन लेकर लोगों के बैंक खाते खुलवाता था। हैरानी की बात यह है कि उसने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों के नाम पर सैकड़ों बैंक खाते खुलवाए, जिनमें साइबर ठगी की रकम मंगवाई जाती थी। बाद में एटीएम से नकदी निकालकर रकम का बंटवारा किया जाता था।
लगातार साइबर अपराध में इस्तेमाल होने के कारण अब इन खातों को विभिन्न एजेंसियों ने फ्रीज कर दिया है। इससे वे लोग भी मुश्किल में पड़ गए हैं, जिन्होंने कुछ पैसों के लालच या बिना पूरी जानकारी के अपने खाते उपलब्ध करा दिए थे।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज और नकदी बरामद की है। दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
यह सिर्फ साइबर ठगी की कहानी नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की हकीकत है जो मेहनत से पहले शॉर्टकट पर भरोसा करने लगी है। जिस उम्र में मनजीत किताबों से अपना भविष्य संवार सकता था, उसने फर्जी लोन ऐप बनाकर लोगों की जमा-पूंजी लूटने का रास्ता चुना। वहीं कुछ हजार रुपये के कमीशन के लालच में विजय ने अपने ही रिश्तेदारों और दोस्तों को ऐसे जाल में फंसा दिया कि आज उनके बैंक खाते फ्रीज हैं और वे भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। आसान कमाई का यह लालच अब दोनों युवकों के भविष्य पर भारी पड़ गया है।