Tuesday, April 7, 2026
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पेट्रोल संकट का असर: बाजार बंद, शादियों पर पाबंदी, ट्रांसपोर्ट फ्री

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पाकिस्तान में ऊर्जा संकट से सख्ती: रात 8 बजे के बाद बाजार बंद, 10 बजे के बाद शादियों पर रोक


लाहौर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)ऊर्जा संकट और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों के बीच Shehbaz Sharif की सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए देशभर में एक तरह का “मिनी लॉकडाउन” लागू करने का फैसला किया है। यह निर्णय पेट्रोलियम उत्पादों की कमी, ऊर्जा संरक्षण और सरकारी खर्च में कटौती के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, Pakistan के पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान, इस्लामाबाद कैपिटल टेरिटरी, गिलगित-बाल्टिस्तान और आजाद जम्मू-कश्मीर में 7 अप्रैल से नए नियम लागू हो गए हैं। इन नियमों के तहत बाजार, मंडियां और शॉपिंग मॉल रात 8 बजे बंद कर दिए जाएंगे।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब वैश्विक स्तर पर तनाव और तेल आपूर्ति में बाधा का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिख रहा है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से ऊर्जा खपत में कमी आएगी और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
खैबर पख्तूनख्वा के डिविजनल मुख्यालयों को थोड़ी राहत दी गई है, जहां बाजार और मॉल रात 9 बजे तक खुले रह सकेंगे। हालांकि रोजमर्रा की जरूरतों की दुकानें और डिपार्टमेंटल स्टोर भी अधिकतर स्थानों पर रात 8 बजे तक ही संचालित होंगे।
सरकार ने शादी समारोहों पर भी कड़ा नियंत्रण लागू किया है। बेकरी, रेस्तरां, तंदूर और अन्य खानपान से जुड़े प्रतिष्ठान रात 10 बजे तक ही खुले रहेंगे। इसके बाद सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी। मैरिज हॉल, मार्की और अन्य व्यावसायिक स्थलों पर रात 10 बजे के बाद शादी समारोह आयोजित नहीं किए जा सकेंगे। इतना ही नहीं, निजी घरों और संपत्तियों में भी देर रात शादियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
हालांकि, आम जनता की जरूरी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ सेवाओं को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है। मेडिकल स्टोर और फार्मेसियों को सामान्य रूप से खुले रहने की अनुमति दी गई है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई असर न पड़े।
सरकार ने नागरिकों को राहत देने के लिए कुछ सकारात्मक कदम भी उठाए हैं। गिलगित और मुजफ्फराबाद में अंतर-शहरी सार्वजनिक परिवहन (बस सेवा) को एक महीने के लिए मुफ्त कर दिया गया है। इसका पूरा खर्च संघीय सरकार उठाएगी, जिससे आम लोगों को आर्थिक राहत मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय अल्पकालिक राहत तो दे सकता है, लेकिन दीर्घकाल में पाकिस्तान को ऊर्जा उत्पादन, वैकल्पिक स्रोतों और आर्थिक सुधारों पर गंभीरता से काम करना होगा।
ऊर्जा संकट केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी कई देश इससे प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में यह कदम संकट प्रबंधन का एक हिस्सा है, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इन प्रतिबंधों का असर व्यापारियों, छोटे दुकानदारों और शादी उद्योग से जुड़े लोगों पर पड़ना तय है। हालांकि सरकार का कहना है कि देश की आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा बचत के लिए यह जरूरी कदम है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये प्रतिबंध कितने प्रभावी साबित होते हैं और क्या इससे देश के ऊर्जा संकट में वास्तविक सुधार देखने को मिलता है या नहीं।

महराजगंज: सूचना छुपाने पर कार्रवाई: ठूठीबारी थानाध्यक्ष निलंबित, एसपी का सख्त संदेश

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने ठूठीबारी थानाध्यक्ष नवनीत नागर को गंभीर लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, संबंधित मामले में समय से उच्चाधिकारियों को सूचना नहीं दी गई और घटना के वास्तविक तथ्यों को छुपाने का प्रयास किया गया।मामला सामने आने पर एसपी ने तुरंत जांच कराई, जिसमें प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए गए। इसके बाद तत्काल निलंबन की कार्रवाई की गई।

पुलिस प्रशासन का कहना है कि किसी भी घटना की सही और समय पर जानकारी देना बेहद जरूरी है। इसमें लापरवाही से न केवल विभाग की छवि प्रभावित होती है, बल्कि आम जनता का भरोसा भी कमजोर होता है।

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इस कार्रवाई के जरिए एसपी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि ड्यूटी में लापरवाही, सूचना छुपाना या तथ्यों से छेड़छाड़ किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी थाना प्रभारियों और पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें।

इस घटना के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और इसे अनुशासनात्मक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल निलंबित थानाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और आगे कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

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झपकी बनी जानलेवा: बाबा धाम से लौट रही स्कॉर्पियो पेड़ से टकराई, चालक की मौत

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भिटौली थाना क्षेत्र के भैंसा पुल के पास मंगलवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया। बाबा धाम से दर्शन कर लौट रहे एक परिवार की स्कॉर्पियो कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई। हादसे में चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार, कोतवाली क्षेत्र के शिवनगर वार्ड नंबर-7 निवासी रामदयाल वर्मा अपने परिवार के साथ बाबा धाम से लौट रहे थे। स्कॉर्पियो (UP56 K 0099) को सतभरिया निवासी संतोष कुमार वर्मा चला रहे थे। वाहन में कुल 8 लोग सवार थे, जिनमें 4 वयस्क और 4 बच्चे शामिल थे।

बताया जा रहा है कि सुबह करीब 6:30 बजे भैंसा पुल के पास चालक को अचानक झपकी आ गई, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गया और पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी तेज थी कि गाड़ी के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए।

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हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परतावल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने चालक संतोष कुमार वर्मा को मृत घोषित कर दिया।

गंभीर रूप से घायल रामदयाल वर्मा और उनकी पत्नी को बेहतर इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया है। अन्य बच्चों समेत परिवार के बाकी सदस्य सुरक्षित हैं या उन्हें मामूली चोटें आई हैं।

घटना की सूचना मिलते ही मृतक के परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण चालक को आई झपकी बताया जा रहा है।

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कानपुर में शादी के बाद किडनी के लिए दबाव, पत्नी से 30 लाख की मांग; FIR दर्ज

कानपुर (राष्ट्र की परम्परा)। कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर शादी से पहले गंभीर किडनी की बीमारी छिपाने और बाद में किडनी या 30 लाख रुपये की मांग कर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है।

पीड़िता के अनुसार, उसकी शादी 22 जून 2023 को लखनऊ निवासी निशांत कुमार से हुई थी। शादी के बाद पति का व्यवहार असामान्य लगा। जब महिला ने इस बारे में पूछताछ की, तो उसे टाल दिया गया और कथित तौर पर दूसरी शादी की बात तक कही गई।

महिला ने बताया कि पति लगातार दवाइयां लेता था, जिससे शक होने पर उसने मेडिकल रिपोर्ट देखी। रिपोर्ट में सामने आया कि पति की दोनों किडनी पहले से खराब थीं और वह लंबे समय से इलाज करा रहा था।

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पीड़िता का आरोप है कि ससुराल पक्ष ने यह बात जानबूझकर शादी से पहले छिपाई। शादी के बाद उस पर 30 लाख रुपये लाने या किडनी दान करने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर उसे गाली-गलौज और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पति का किसी अन्य महिला से संबंध था और परिवार ने उसकी शिकायतों को नजरअंदाज किया। अक्टूबर 2024 में मायके जाते समय उसके गहने भी छीन लिए गए।

पीड़िता की शिकायत पर चकेरी थाने में पति, ससुर और अन्य ससुराल पक्ष के लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, धोखाधड़ी और धमकी सहित विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की गई है।

थाना प्रभारी अजय प्रकाश मिश्र ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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तीन दिवसीय एयरोमॉडलिंग वर्कशॉप का आयोजन, कुलपति ने की सराहना

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में 6 से 8 अप्रैल 2026 तक आयोजित तीन दिवसीय एयरोमॉडलिंग वर्कशॉप के अंतर्गत टेकस्फीयर टीम ने कुलपति प्रो. पूनम टंडन से भेंट कर उन्हें वर्कशॉप में आमंत्रित किया। इस अवसर पर प्रति कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी, आईईटी डीन प्रो. हिमांशु पांडेय तथा निदेशक एस. एन. तिवारी के मार्गदर्शन में आईटी विभाग की एचओडी डॉ. शिवांगी श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की।

वर्कशॉप का शुभारंभ मंगलवार को हुआ, जो तीन दिनों तक चलेगा। इसमें छात्रों को एयरोमॉडलिंग के क्षेत्र में व्यावहारिक एवं तकनीकी ज्ञान प्रदान किया जा रहा है। आज आयोजित सत्र में इंस्ट्रक्टर चंदन विश्वकर्मा ने थ्योरी लेक्चर के माध्यम से मूलभूत अवधारणाओं को स्पष्ट किया।

इस अवसर पर टेकस्फीयर की प्रेसिडेंट अपलक गुप्ता, वाइस प्रेसिडेंट अर्यमा श्रीवास्तव, हेड्स स्वस्तिक पांडेय, ऋतुराज राजपूत एवं अभिजीत गुप्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समन्वय में कोऑर्डिनेटर विकास विश्वकर्मा का विशेष योगदान रहा।

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कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने टेकस्फीयर टीम के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियाँ छात्रों को वास्तविक तकनीकी अनुभव प्रदान करती हैं तथा उनके आत्मविश्वास को सुदृढ़ करती हैं। उन्होंने इस पहल को अत्यंत उपयोगी बताते हुए वर्कशॉप के समापन दिवस पर उपस्थित रहने की सहमति भी प्रदान की।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में टेकस्फीयर टीम के समर्पित प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्कशॉप का समापन 8 अप्रैल 2026 को होगा, जिसमें प्रतिभागियों द्वारा तैयार मॉडल्स का प्रदर्शन एवं उत्कृष्ट प्रतिभागियों का सम्मान किया जाएगा।

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ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की तबीयत पर सस्पेंस, बेहोशी की खबरों से हलचल

तेहरान/मिडिल ईस्ट (राष्ट्र की परम्परा)। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की सेहत को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ब्रिटेन के अखबार द टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई बेहोश बताए जा रहे हैं और उनका इलाज ईरान के कोम शहर के एक अस्पताल में चल रहा है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 56 वर्षीय मुज्तबा खामेनेई फिलहाल देश चलाने की स्थिति में नहीं हैं। यह जानकारी कथित तौर पर डिप्लोमैटिक मेमो और अमेरिका-इजरायल के इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर सामने आई है। हालांकि, इस खबर की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद मुज्तबा खामेनेई को देश की कमान सौंपी गई थी। बताया जाता है कि उसी हमले में वह भी घायल हुए थे।

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सत्ता संभालने के बाद से मुज्तबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं, जिससे उनकी सेहत और लोकेशन को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। इससे पहले उनके रूस में इलाज की खबरें भी आई थीं, जिन्हें बाद में खारिज कर दिया गया था।

हाल ही में उन्होंने फारसी नववर्ष नवरोज और ईद-उल-फितर के मौके पर लिखित संदेश जारी कर लोगों को बधाई दी थी। लेकिन अब उनकी हालत को लेकर आई नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

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ईरान में बढ़ा तनाव: अमेरिकी चेतावनी के बीच युवाओं की ‘मानव श्रृंखला’ से जवाब, दुनिया की नजरें तेहरान पर


तेहरान (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। Donald Trump की ओर से दी गई सख्त समय सीमा और बुनियादी ढांचों पर हमले की चेतावनी के बाद Iran ने एक असाधारण रणनीतिक कदम उठाया है। ईरानी सरकार ने देश के युवाओं, खिलाड़ियों और कलाकारों से ऊर्जा केंद्रों और परमाणु संयंत्रों के आसपास एक विशाल ‘मानव श्रृंखला’ बनाने का आह्वान किया है। इस पहल को “उज्ज्वल भविष्य के लिए ईरान के युवाओं की मानव श्रृंखला” नाम दिया गया है।
यह कदम केवल सुरक्षा का प्रयास नहीं, बल्कि एक मजबूत कूटनीतिक और मनोवैज्ञानिक संदेश भी है। Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खेल और युवा मंत्रालय ने युवाओं से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर देश के प्रमुख ऊर्जा और परमाणु स्थलों के आसपास एकजुट होकर खड़े हों। इस आयोजन के जरिए ईरान दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत गंभीर युद्ध अपराध माना जाता है।
ईरान के युवा मामलों के उप मंत्री अलीरेज़ा रहीमी ने एक वीडियो संदेश में कहा कि यह विचार खुद युवाओं की ओर से आया है। उन्होंने कहा, “हम एक-दूसरे का हाथ थामकर खड़े होंगे और दुनिया को बताएंगे कि हमारे संसाधनों पर हमला स्वीकार नहीं किया जाएगा।” यह बयान दर्शाता है कि ईरान अपनी जनता को इस संकट में सीधे शामिल कर एकजुटता का प्रदर्शन करना चाहता है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब White House में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा कि यदि ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ को खोलने पर सहमत नहीं होता, तो अमेरिका उसके पुलों और बिजली संयंत्रों को निशाना बना सकता है। उन्होंने मंगलवार रात 8 बजे (ईटी) तक की डेडलाइन तय की थी, जबकि एक व्यापक समझौते के लिए आधी रात तक का समय भी दिया गया।
ट्रंप के बयान ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने यहां तक कहा कि “पूरे देश को एक ही रात में खत्म किया जा सकता है,” जो कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद गंभीर संकेत माना जा रहा है। इन बयानों ने संभावित युद्ध अपराधों को लेकर बहस भी तेज कर दी है, क्योंकि नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना जिनेवा कन्वेंशन के तहत प्रतिबंधित है।
दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान की सरकारी एजेंसी Islamic Republic News Agency के अनुसार, तेहरान ने 45 दिन के संघर्षविराम प्रस्ताव को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि वह केवल स्थायी समाधान चाहता है। ईरान ने अपना जवाब Pakistan के माध्यम से भेजा है, जो इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
काहिरा में ईरानी मिशन के प्रमुख मोजतबा फ़िरदौसी पौर ने कहा कि ईरान तभी किसी समझौते के लिए तैयार होगा, जब उसे भविष्य में किसी भी हमले से सुरक्षा की गारंटी मिलेगी। यह रुख दर्शाता है कि तेहरान अस्थायी समाधान के बजाय दीर्घकालिक सुरक्षा चाहता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा मानव श्रृंखला बनाना एक प्रतीकात्मक कदम जरूर है, लेकिन इसके पीछे गहरी रणनीति छिपी है। इससे एक ओर जहां अंतरराष्ट्रीय सहानुभूति हासिल करने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर संभावित हमलों को नैतिक रूप से चुनौती देना भी शामिल है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि नागरिकों को इस तरह संवेदनशील स्थलों के आसपास इकट्ठा करना जोखिम भरा हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है। Strait of Hormuz, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, पहले ही तनाव का केंद्र बना हुआ है। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल दुनिया की निगाहें तेहरान और वॉशिंगटन पर टिकी हैं। क्या यह टकराव खुली जंग में बदलेगा या कूटनीति से कोई रास्ता निकलेगा, यह आने वाले घंटों में स्पष्ट हो जाएगा।

बाढ़ राहत में भ्रष्टाचार का भंडाफोड़: तहसील से तंत्र तक हिल गया सिस्टम

भ्रष्टाचार कोविड महामारी या कैंसर से भी अधिक खतरनाक बीमारी है, क्योंकि यह धीरे-धीरे पूरे तंत्र को अंदर से खोखला कर देता है

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में शासन- प्रशासन की विश्वसनीयता का सबसे महत्वपूर्ण आधार जनता का विश्वास होता है।जब यह विश्वास कमजोर पड़ता है,तब केवल व्यवस्था ही नहीं,बल्कि लोकतंत्र की आत्मा भी आहत होती है। हाल ही में संसद के दोनों सदनों द्वारा इसी पृष्ठभूमि में पारित जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 एक ऐतिहासिक और संरचनात्मक सुधार के रूप में सामने आया है।यह केवल एक विधायी परिवर्तन नहीं,बल्कि शासन की सोच में बदलाव का प्रतीक है,जहां दंड आधारित नियंत्रण से हटकर विश्वास आधारित अनुपालन की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।परंतु मेरे 45 साल के मीडिया अनुभव व 15 साल के अधिवक्ता अनुभव में शायद पहली बार हाल ही में मध्य प्रदेश के श्योपुर जिला में सामने आया बाढ़ राहत घोटाला इसी विश्वास पर एक गंभीर प्रहार था,लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इस मामले में जिस प्रकार की कठोर और व्यापक प्रशासनिक कार्रवाई की गई,उसने पूरे देश में एक नई उम्मीद जगाई है। यह घटना केवल एक सटीक घोटाले की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस निर्णायक मोड़ का संकेत है जहां से भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध वास्तविक और प्रभावी लड़ाई की शुरुआत हो सकती है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि इस पूरे मामले में सबसे सराहनीय भूमिका जिला कलेक्टर की रही, विशेष रूप से उनके द्वारा दिखाई गई दृढ़ इच्छाशक्ति की। कलेक्टर ने न केवल इस घोटाले की गहन जांच करवाई,बल्कि 18 पटवारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देकर एक स्पष्ट संदेश दिया कि भ्रष्टाचार के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। यह निर्णय केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक नैतिक घोषणा थी कि अब व्यवस्था में ईमानदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही विभागीय जांच के आदेश और नौकरी से बर्खास्तगी की सिफारिश ने यह सुनिश्चित किया कि दोषियों को हर स्तर पर जवाबदेह ठहराया जाएगा। पूरे भारतवर्ष में अनेकों सरकारी कर्मचारियों पर कुछ अपवाद छोड़कर अगर हम संज्ञान लें तो एक सामाजिक पहलू भी है, जिस पर ध्यान देना आवश्यक है।अक्सर देखा जाता है कि सरकारी कर्मचारियों की जीवनशैली उनके आधिकारिक वेतन से कहीं अधिक उच्च होती है, जिससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि अतिरिक्त आय के स्रोत क्या हैं। यदि इस दिशा में नियमित निगरानी और संपत्ति का ऑडिट किया जाए, तो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सकता है। श्योपुर की घटना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि अब केवल सतही सुधारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि गहराई में जाकर व्यवस्था को बदलना होगा। मेरा यह आर्टिकल मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर लिखा गया है। 

अगर हम भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की इस ऐतिहासिक घटना को समझने की करें तो, वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में आई भीषण बाढ़ ने हजारों किसानों और ग्रामीणों को प्रभावित किया। प्राकृतिक आपदा के बाद राज्य सरकार द्वारा राहत के रूप में करोड़ों रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई थी। इस राहत पैकेज में चार प्रमुख श्रेणियां थीं-फसल नुकसान, मकान क्षति, मवेशियों की हानि और अन्य सामान्य सहायता। यह राशि उन लोगों के लिए जीवनरेखा थी, जिनकी आजीविका पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी। लेकिन दुर्भाग्यवश, इसी संवेदनशील व्यवस्था में भ्रष्टाचार का ऐसा जाल बुना गया, जिसने न केवल पीड़ितों को उनके अधिकार से वंचित किया,बल्कि प्रशासनिक तंत्र की साख पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया।जांच में सामने आया कि लगभग 960 किसानों के लिए स्वीकृत राहत राशि में से 794 वास्तविक लाभार्थियों को दरकिनार कर दिया गया और उनकी जगह 87 अपात्र व्यक्तियों के 127 बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर कर दिया गया।यह पूरा घोटाला करीब 5 करोड़ रुपये का था। इस संगठित भ्रष्टाचार में निचले स्तर के कर्मचारियों से लेकर उच्च अधिकारियों तक की संलिप्तता स्पष्ट रूप से सामने आई। इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही, जिनपर आरोप है कि उन्होंने बिना समुचित जांच के फर्जी लाभार्थियों को मंजूरी दी। परिणामस्वरूप उन्हें निलंबित किया गया और बाद में जेल भी भेजा गया।  पूरे देश में शायद पहली बार कलेक्टर की हिम्मत और चौंकाने वाली कार्रवाई को समझने की करें तो, इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब यह स्पष्ट हुआ कि फर्जी लाभार्थियों की सूची तैयार करने में 18 पटवारियों की सीधी भूमिका थी।पटवारी,जो ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माने जाते हैं और जिनका सीधा संपर्क किसानों से होता है,उन्हीं के द्वारा इस प्रकार की धोखाधड़ी ने पूरे सिस्टम की जड़ों को हिला दिया। इन पटवारियों ने न केवल फर्जी सर्वे तैयार किए, बल्कि अपने रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में सरकारी धन ट्रांसफर करवा दिया। यह केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि सामाजिक नैतिकता और सरकारी जिम्मेदारी का खुला उल्लंघन था। 

अगर हम इस प्रकरण की पूरे भारत ही नहीं वैश्विक स्तरपर गूँज की करें तो, इस कार्रवाई का प्रभाव केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहा,बल्कि पूरे देश के प्रशासनिक तंत्र में एक हलचल पैदा कर दी। पहली बार ऐसा देखने को मिला कि एक ही तहसील के इतने बड़े पैमाने पर पटवारियों के खिलाफ एक साथ कार्रवाई की गई हो। यह घटना उन लाखों ईमानदार सरकारी कर्मचारियों के लिए भी प्रेरणा है, जो व्यवस्था में सुधार लाना चाहते हैं, लेकिन अक्सर दबाव और भय के कारण चुप रहते हैं।भ्रष्टाचार को यदि एक बीमारी माना जाए, तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह कोविड महामारी या कैंसर से भी अधिक खतरनाक है, क्योंकि यह धीरे-धीरे पूरे तंत्र को अंदर से खोखला कर देता है इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण केवल व्यक्तिगत लालच नहीं, बल्कि सामूहिक मिलीभगत है, जिसमें निचले स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक एक श्रृंखला बन जाती है। श्योपुर का मामला इसी सच्चाई को उजागर करता है कि जब तक इस पूरी श्रृंखला को तोड़ा नहीं जाएगा, तब तक भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। 

साथियों बात अगर हम पूरे भारत में कलेक्टरों द्वारा स्वत संज्ञान लेकर इस प्रकार की कार्रवाई को प्राथमिकता देने की करें तो, इस संदर्भ में सभी राज्यों के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे इस मामले से सबक लें और अपने-अपने क्षेत्रों में इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई करें। सबसे पहला कदम डिजिटल सत्यापन की दिशा में होना चाहिए। राहत राशि और अन्य सरकारी योजनाओं के वितरण में आधार-लिंक्ड बैंक खातों का उपयोगअनिवार्य किया जाना चाहिए और लाभार्थियों की सूची को सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी।दूसरा महत्वपूर्ण उपाय स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा थर्ड पार्टी ऑडिट है। जब तक जांच पूरी तरह निष्पक्ष और बाहरी एजेंसी द्वारा नहीं की जाएगी, तब तक आंतरिक मिलीभगत के कारण सच्चाई सामने आना कठिन रहेगा। श्योपुर मामले में भी जब ऑडिट हुआ, तभी यह घोटाला उजागर हो पाया।तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है कठोर जवाबदेही। केवल निलंबन या स्थानांतरण से भ्रष्टाचार नहीं रुकता, बल्कि इसके लिए सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। श्योपुर में जिस प्रकार से अभियोजन की मंजूरी दी गई और गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हुई, वह एक आदर्श उदाहरण है। इससे यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार करने वालों को केवल प्रशासनिक दंड ही नहीं, बल्कि कानूनी परिणाम भी भुगतने होंगे। इसके अतिरिक्त ग्राम सभाओं के माध्यम से लाभार्थियों की सूची का सत्यापन भी एक प्रभावी उपाय हो सकता है। स्थानीय स्तर पर लोगों को शामिल करने सेपारदर्शिता बढ़ती है और गलत लाभार्थियों की पहचान आसानी से हो सकती है। यह लोकतंत्र के विकेंद्रीकरण की भावना के अनुरूप भी है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि श्योपुर बाढ़ राहत घोटाला और उस पर हुई कार्रवाई भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह केवल एक जिले की घटना नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी और एक अवसर दोनों है। चेतावनी इसलिए कि यदि भ्रष्टाचार को समय रहते नहीं रोका गया, तो यह व्यवस्था को पूरी तरह खोखला कर देगा, और अवसर इसलिए कि यदि इसी प्रकार की सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई देशभर में की जाए,तो एक स्वच्छ और पारदर्शी प्रशासन की स्थापना संभव है।आज आवश्यकता इस बात की है कि हर राज्य, हर जिला और हर तहसील इस घटना से प्रेरणा ले और अपने स्तर पर सुधार की प्रक्रिया शुरू करे। यदि ऐसा होता है, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत वास्तव में एक भ्रष्टाचार-मुक्त राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने उदाहरण प्रस्तुत करेगा।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

भागवत कथा में शुकदेव-परीक्षित संवाद और भक्ति का महत्व बताया गया

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। नगर के रुद्रपुर स्टैंड पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को कथा व्यास आचार्य राघवेंद्र ने शुकदेव द्वारा परीक्षित को दिए गए उपदेशों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने आसन, श्वास, संग और इन्द्रियों पर नियंत्रण रखते हुए बुद्धि के माध्यम से मन को भगवान के स्थूल रूप में लगाने की महत्ता बताई।

कथा के दौरान सृष्टि क्रम का वर्णन करते हुए ब्रह्मा की संकल्प सृष्टि, चार ऋषियों की उत्पत्ति, दस ऋषियों का प्राकट्य, छाया से कर्दम, वाणी से सरस्वती, वाम भाग से सतरूपा और दक्षिण भाग से मनु की उत्पत्ति का प्रसंग सुनाया गया। मनु की संतानों में देवहूति, आकूति, प्रसूति, उतानपाद और प्रियव्रत का उल्लेख करते हुए उनके जीवन प्रसंगों को विस्तार से बताया गया।

देवहूति और कर्दम के विवाह तथा कपिल भगवान के जन्म, सांख्य दर्शन के उपदेश, आकूति और रुचि प्रजापति, प्रसूति और दक्ष प्रजापति के विवाह, सती और शिव विवाह तथा दक्ष यज्ञ विध्वंस जैसे प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। इसके साथ ही ध्रुव चरित्र, अंग, वेन, पृथु, प्राचीनबरही, प्रियव्रत, ऋषभ और जड़भरत की कथाओं के माध्यम से जीवन मूल्यों पर प्रकाश डाला गया।

कथा में अजामिल, वृत्रासुर और प्रह्लाद के प्रसंगों का वर्णन करते हुए बताया गया कि हर परिस्थिति में भक्ति और समभाव बनाए रखना चाहिए। भगवान के दरबार में जाति-पाति या पद का कोई भेदभाव नहीं होता, सभी समान हैं।

कार्यक्रम में यजमान विवेकानंद तिवारी, उषा तिवारी, डॉ अजय मिश्र, डॉ प्रदीप मिश्र, रामेश्वर यादव, सोनकर, बलभद्र तिवारी, राजेन्द्र सिंह, हृदयेश तिवारी, श्रीराम वर्मा, शिवशंकर जायसवाल, अशोक सोनकर, विजयकांत मिश्र, रमेश तिवारी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजक अभयानंद तिवारी ने सभी कथा प्रेमियों का आभार व्यक्त किया।

अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट का आरोपी गिरफ्तार

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के थाना कोतवाली हाटा पुलिस ने अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामले में वांछित एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 6 अप्रैल 2026 को की गई।
पुलिस के अनुसार मुकदमा संख्या 132/2026 के तहत धारा 137(2), 352, 87, 64(1) बीएनएस एवं 3/4 पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान दीपक कुमार पुत्र राजाराम बांसफोर निवासी वार्ड नंबर 05 कस्बा सुकरौली, सरदार पटेल नगर, थाना कोतवाली हाटा, जनपद कुशीनगर के रूप में हुई है।
आरोपी की गिरफ्तारी थाना कोतवाली हाटा पुलिस टीम द्वारा की गई। टीम में प्रभारी निरीक्षक संजय दूबे, उपनिरीक्षक चंद्रभूषण पाण्डेय, कांस्टेबल सतीश सिंह और कांस्टेबल अमरजीत कुमार शामिल रहे। पुलिस ने आरोपी को आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद न्यायालय भेज दिया है।

10 अप्रैल से तीन पालियों में होंगी सम सेमेस्टर परीक्षाएं

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में सत्र 2025-26 के अंतर्गत सेमेस्टर प्रणाली के तहत स्नातक एवं स्नातकोत्तर सम सेमेस्टर (द्वितीय सेमेस्टर को छोड़कर) के संस्थागत एवं बैक पेपर के अर्ह विद्यार्थियों की परीक्षाएं 10 अप्रैल 2026 से प्रारम्भ होंगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार परीक्षा की विस्तृत समय सारणी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। सभी छात्र-छात्राओं को निर्देशित किया गया है कि वे समय सारणी का अवलोकन कर अपनी तैयारियां सुनिश्चित करें।
परीक्षाएं प्रतिदिन तीन पालियों में आयोजित की जाएंगी। प्रथम पाली प्रातः 08:00 बजे से 09:30 बजे तक, द्वितीय पाली 11:30 बजे से 01:00 बजे तक तथा तृतीय पाली अपराह्न 02:00 बजे से 03:30 बजे तक संचालित की जाएगी। स्नातक (चतुर्थ एवं षष्ठम सेमेस्टर) तथा स्नातकोत्तर कक्षाओं की परीक्षाएं निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सम्पन्न कराई जाएंगी।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने सभी परीक्षार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विद्यार्थी आत्मविश्वास एवं अनुशासन के साथ परीक्षा में सम्मिलित हों। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सभी छात्र-छात्राएं उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाएंगे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी सम्बद्ध महाविद्यालयों एवं परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे परीक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें, जिससे परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्ष एवं सुचारु रूप से सम्पन्न हो सके।

भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस पर सेवा, समर्पण और राष्ट्र प्रथम का संकल्प दोहराया

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय जनता पार्टी के 47वें स्थापना दिवस के अवसर पर जिला कार्यालय पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें पार्टी के प्रेरणास्रोत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम जिलाध्यक्ष नीतू सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने पार्टी की 47 वर्षों की सेवा, संघर्ष और राष्ट्र निर्माण की यात्रा को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी विश्व के सबसे बड़े सेवा संगठन के रूप में निरंतर समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए कार्य कर रही है।
इस अवसर पर कार्यकर्ताओं को स्थापना दिवस की बधाई देते हुए ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प को और अधिक सशक्त करने का आह्वान किया गया। साथ ही सेवा और समर्पण की भावना के साथ निरंतर कार्य करते रहने की प्रेरणा दी गई।
इस अवसर पर खलीलाबाद के विधायक अंकुर राज तिवारी, धनघटा के विधायक गणेश चौहान, मेहदावल के विधायक अनिल त्रिपाठी, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि नित्यानंद जी, नामित सभासद गौरव निषाद, सतविंदर पाल सिंह जज्जी, अमर राय, डॉक्टर सत्यपाल पाल, रुद्रनाथ मिश्र, गणेश पाण्डेय, मुकेश गौड़ सहित जिला पदाधिकारीगण एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

बलिया जनपद में किसानों के हित में चलाए जा रहे फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)

जनपद में किसानों के हित में चलाए जा रहे फॉर्मर रजिस्ट्री अभियान को तेज करने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने गंगा बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 6 अप्रैल से 15 अप्रैल तक सभी ग्राम पंचायतों में विशेष कैंप लगाकर इस अभियान को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। उनका लक्ष्य है कि अप्रैल माह के भीतर ही शत-प्रतिशत फॉर्मर रजिस्ट्री सुनिश्चित कर ली जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए जनपद, तहसील और ब्लॉक स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे। इन कंट्रोल रूम के माध्यम से हर दो घंटे में प्रगति रिपोर्ट ली जाएगी, ताकि कार्य की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सके और आवश्यकतानुसार तुरंत सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि कैंप की जानकारी पहले से ही ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधियों को दे दी जाए, जिससे अधिक से अधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।किसानों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए प्रशासन ने जमीनी स्तर पर भी विशेष रणनीति बनाई है। जिलाधिकारी ने सफाई कर्मियों, आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों और कोटेदारों की मदद लेने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को कैंप स्थल तक लाने में सहयोग मिल सके। इससे ग्रामीण स्तर पर जागरूकता भी बढ़ेगी और अधिक संख्या में किसान रजिस्ट्री प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।बैठक में जिलाधिकारी ने लेखपालों को विशेष रूप से सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के नाम खतौनी में गलत दर्ज हैं या जिनके अंश निर्धारण में त्रुटि है, उन्हें तुरंत ठीक किया जाए। यदि ये त्रुटियां समय रहते ठीक नहीं की गईं, तो फॉर्मर रजिस्ट्री में बाधा उत्पन्न हो सकती है और किसानों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए राजस्व विभाग को इस दिशा में तेजी और सटीकता के साथ कार्य करने को कहा गया है। इसके अलावा, जिलाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि जिन गांवों में अब तक फॉर्मर रजिस्ट्री की प्रगति धीमी है, वहां विशेष ध्यान दिया जाए और प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे पूरी जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता के साथ काम करते हुए 15 अप्रैल तक अधिकतम लक्ष्य हासिल करने का प्रयास करें।
इस समीक्षा बैठक में मुख्य राजस्व अधिकारी, समस्त एसडीएम, बीडीओ, लेखपाल, उप कृषि निदेशक सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन की इस मेगा योजना से उम्मीद है कि जिले के सभी किसानों को समय पर रजिस्ट्री का लाभ मिल सकेगा और उन्हें भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।

आंगनबाड़ी सहायिका चयन में पारदर्शिता बढ़ाने की पहल, 152 अभ्यर्थिनियां पात्

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

जिले में आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पदों पर चल रही चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से सोमवार को गंगा ऑडिटोरियम हॉल में विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विकास खंड बॉसडीह, बेरूआरवारी एवं बैरिया की सभी आवेदिकाओं को आमंत्रित किया गया।कार्यक्रम में जिला विकास अधिकारी, उपायुक्त श्रम रोजगार मनरेगा, जिला कार्यक्रम अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति रही। अधिकारियों ने शासनादेश दिनांक 17 सितंबर 2025 के तहत निर्धारित चयन मानदंडों की विस्तृत जानकारी आवेदिकाओं को दी।इसके बाद प्राप्त आवेदनों का लाइव प्रस्तुतीकरण किया गया तथा केंद्रवार चयनित अभ्यर्थिनियों की सूची सभी के सामने साझा की गई, जिससे प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा सके। बैठक के दौरान आवेदिकाओं द्वारा उठाई गई आपत्तियों का मौके पर ही निस्तारण किया गया।जांच के दौरान कुछ अनियमितताओं की आशंका के चलते विकास खंड बॉसडीह के 4 तथा बैरिया के 2 आंगनबाड़ी केंद्रों पर चयन प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है।
पूरी प्रक्रिया के बाद बॉसडीह में 50, बेरूआरवारी में 45 और बैरिया में 57 अभ्यर्थिनियां पात्र पाई गईं। इस प्रकार कुल 152 अभ्यर्थिनियों को चयन के लिए योग्य माना गया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया को निष्पक्ष और शिकायत-मुक्त बनाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न उत्पन्न

सीसी रोड निर्माण में लापरवाही, पांच दिनों से रास्ता बंद, राहगीर परेशान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के सेमरियावां ब्लॉक क्षेत्र के बूधा खुर्द चौराहे पर सीसी रोड निर्माण कार्य में लापरवाही सामने आई है। ठेकेदार द्वारा पिछले पांच दिनों से मार्ग को बाधित कर दिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण के बाद उसकी उचित देखरेख (तराई आदि) भी नहीं की गई है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। रास्ता बंद होने के कारण आसपास के गांवों के लोगों को लंबा चक्कर लगाकर आवागमन करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों में इसको लेकर आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मार्ग को सुचारु कराने और निर्माण कार्य की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।