Thursday, April 9, 2026
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योगी सरकार का एक्शन, पुलिस विभाग में व्यापक फेरबदल


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया है। शासन द्वारा जारी आदेश के तहत आईपीएस और पीपीएस अधिकारियों समेत कई अपर पुलिस अधीक्षकों और सहायक पुलिस आयुक्तों के तबादले किए गए हैं। इस व्यापक प्रशासनिक बदलाव में कई महत्वपूर्ण जिलों और कमिश्नरेट्स में नई नियुक्तियां की गई हैं, जिससे पुलिस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है।


तबादलों की इस सूची में वर्ष 2019, 2020 और 2022 बैच के आईपीएस अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। सागर जैन को सहारनपुर से प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट में पुलिस उपायुक्त बनाया गया है, जबकि मनोज कुमार रावत को गोण्डा से सम्भल भेजा गया है। इसी तरह आयुष विक्रम सिंह को मेरठ से बहराइच स्थानांतरित किया गया है।
नई नियुक्तियों में युवा अधिकारियों को अहम जिम्मेदारी दी गई है। विनायक गोपाल भोसलें को सीतापुर से मेरठ, अंतरिक्ष जैन को मेरठ से बुलन्दशहर तथा ट्विंकल जैन को गौतमबुद्धनगर से लखनऊ कमिश्नरेट भेजा गया है। लिपि नागयाच को गाजियाबाद से वाराणसी और राजकुमार मीणा को प्रयागराज से मीरजापुर में नक्सल क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


लखनऊ, गाजियाबाद, वाराणसी जैसे बड़े कमिश्नरेट्स में भी बदलाव देखने को मिला है, जिससे स्पष्ट है कि शासन शहरी क्षेत्रों में कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर है। वहीं सोनभद्र और मीरजापुर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी नए अधिकारियों की तैनाती की गई है, जो सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
पीपीएस अधिकारियों के स्तर पर भी व्यापक बदलाव किया गया है। मेरठ, सीतापुर, आजमगढ़, बरेली, बदायूं, आगरा, चित्रकूट, कानपुर देहात, फतेहगढ़, मैनपुरी, फतेहपुर, भदोही, उन्नाव, कन्नौज, रायबरेली और जौनपुर सहित कई जिलों में अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कुछ अधिकारियों को पीएसी, एसएसएफ, एसडीआरएफ और पुलिस मुख्यालय में भी तैनात किया गया है।

इस फेरबदल में राघवेन्द्र कुमार मिश्र को मेरठ से गोरखपुर एसएसएफ भेजा गया है, जबकि राजेश कुमार श्रीवास्तव को सीतापुर से मेरठ और विवेक त्रिपाठी को आजमगढ़ से सीतापुर स्थानांतरित किया गया है। अभिषेक कुमार सिंह को एटीएस लखनऊ से बदायूं, जबकि पियूष कान्त राय को आगरा से चित्रकूट भेजा गया है।
इसके अलावा, कई अधिकारियों को विशेष शाखाओं और मुख्यालयों में तैनाती दी गई है, जिनमें अभिसूचना, तकनीकी सेवाएं, सीआईडी और डीजीपी मुख्यालय शामिल हैं। यह संकेत देता है कि सरकार न केवल फील्ड पोस्टिंग बल्कि रणनीतिक और खुफिया स्तर पर भी मजबूती लाना चाहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े पैमाने पर किए गए तबादले पुलिस प्रशासन में नई ऊर्जा और जवाबदेही लाते हैं। नए जिलों में तैनाती से अधिकारी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्य करते हैं, जिससे अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था बेहतर होती है।
सरकार की इस पहल को प्रशासनिक सुधार और बेहतर पुलिसिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन नियुक्तियों का असर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर साफ दिखाई देगा।

“रेवती की बहादुरी और महिला आरक्षण: बदलते भारत की नई तस्वीर”

नारी शक्ति का उभार: हेड कांस्टेबल रेवती की बहादुरी और महिला आरक्षण की ऐतिहासिक पहल से बदलता भारत

बदलते भारत में नारी शक्ति अब केवल एक भावनात्मक विचार नहीं, बल्कि एक सशक्त और निर्णायक वास्तविकता बनकर उभर रही है। समाज, न्याय व्यवस्था और राजनीति—हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी उपस्थिति मजबूती से दर्ज करा रही हैं। हाल के घटनाक्रम इस परिवर्तन की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं, जहां एक ओर तमिलनाडु के सातानकुलम केस में महिला हेड कांस्टेबल रेवती की बहादुरी ने न्याय व्यवस्था को झकझोर दिया, वहीं दूसरी ओर संसद में महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए 16 से 18 अप्रैल 2026 तक विशेष सत्र बुलाया गया है। यह दोनों घटनाएं भारत में नारी शक्ति के उभार की दिशा में ऐतिहासिक संकेत हैं।
तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के सातानकुलम में वर्ष 2020 में हुई हिरासत में पिता-पुत्र की मौत ने पूरे देश को हिला दिया था। यह मामला केवल पुलिस अत्याचार का नहीं, बल्कि मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का प्रतीक बन गया था। वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 6 अप्रैल 2026 को मदुरै कोर्ट ने इस मामले में नौ पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे जिस साहस ने सबसे अहम भूमिका निभाई, वह था महिला हेड कांस्टेबल रेवती का अडिग संकल्प।
एक जूनियर अधिकारी होने के बावजूद रेवती ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ गवाही देने का जोखिम उठाया। यह केवल एक पेशेवर निर्णय नहीं था, बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन, परिवार और सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा था। न्यायिक जांच के दौरान उन्होंने सच सामने रखने का जो साहस दिखाया, वह आज भी प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने न केवल घटनाओं का विस्तार से विवरण दिया, बल्कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी गवाही ने केस को निर्णायक मोड़ दिया और यह साबित किया कि सच्चाई और साहस के सामने कोई भी तंत्र टिक नहीं सकता।
रेवती की यह कहानी नारी शक्ति की वास्तविकता को उजागर करती है। यह बताती है कि महिलाएं अब केवल सहायक भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे न्याय और बदलाव की अग्रदूत बन चुकी हैं। उनकी बहादुरी ने यह संदेश दिया कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो कोई भी व्यक्ति व्यवस्था के खिलाफ खड़ा होकर न्याय दिला सकता है।
इसी के समानांतर, देश की राजनीति में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। केंद्र सरकार ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने के लिए 16, 17 और 18 अप्रैल 2026 को संसद का विशेष सत्र बुलाया है। यह अधिनियम 2023 में संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पारित हुआ था, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करता है।
इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए परिसीमन और सीटों के पुनर्गठन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर इस विशेष सत्र में चर्चा की जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 किया जा सकता है, जिसमें लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह कदम केवल संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में प्रतिनिधित्व के स्वरूप को बदलने का प्रयास है।
राज्यों में भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 80 से बढ़कर 120 और महाराष्ट्र में 48 से बढ़कर 72 हो सकती है। इन सीटों में एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित होने से महिला नेतृत्व को नई ऊंचाई मिलेगी और राजनीति में उनका प्रभाव और अधिक मजबूत होगा।
हालांकि इस विधेयक को लागू करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसके चलते सरकार विभिन्न राजनीतिक दलों से संवाद कर रही है। विपक्ष ने इसके समय और मंशा पर सवाल उठाए हैं, लेकिन यह भी सच है कि महिला आरक्षण का मुद्दा दशकों से लंबित रहा है और अब इसे लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
महिला आरक्षण का इतिहास भी लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है। 1931 में पहली बार इसका विचार सामने आया था। इसके बाद 1993 में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर उनकी भागीदारी बढ़ी। 1996 में इसे लोकसभा में पेश किया गया, लेकिन राजनीतिक सहमति के अभाव में यह लंबे समय तक अटका रहा। अंततः 2023 में इसे पारित किया गया, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
सरकार ने इस पहल को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से भी जोड़ा है। स्पष्ट है कि बिना महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के किसी भी राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है। शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और शासन—हर क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका अब निर्णायक बनती जा रही है।
निष्कर्षतः, सातानकुलम केस में रेवती की बहादुरी और महिला आरक्षण कानून को लागू करने की दिशा में उठाए जा रहे कदम यह दर्शाते हैं कि भारत में नारी शक्ति एक नए युग की शुरुआत कर रही है। यह केवल व्यक्तिगत साहस की कहानी नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन का संकेत है, जहां महिलाएं न केवल अन्याय के खिलाफ खड़ी हो रही हैं, बल्कि देश के भविष्य को भी दिशा दे रही हैं। अब यह स्पष्ट है कि नारी शक्ति केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारत की वास्तविक शक्ति बन चुकी है।

एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)

पांच दिन से लापता व्यक्ति की हत्या, सिर और धड़ अलग-अलग जगह मिले

बगहा में दिल दहला देने वाली वारदात, अधेड़ की हत्या कर शव के दो टुकड़े कर अलग-अलग जगहों पर दफनाया


पश्चिमी चंपारण (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार के बगहा पुलिस जिले के नौरंगिया थाना क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। हरदियाचाती गांव में एक अधेड़ व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर उसके शव के दो टुकड़े कर अलग-अलग स्थानों पर दफनाने का मामला उजागर हुआ है। जैसे ही यह घटना सामने आई, पूरे क्षेत्र में दहशत और भय का माहौल फैल गया।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतक का सिर और धड़ दो अलग-अलग जगहों से बरामद किया है। शव की हालत देखकर यह साफ अंदाजा लगाया जा रहा है कि हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई है। पुलिस ने दोनों हिस्सों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

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मृतक की पहचान 48 वर्षीय मुरारी यादव के रूप में हुई है, जो जरलहिया गांव का निवासी था। परिजनों के अनुसार, मुरारी यादव पिछले पांच दिनों से लापता था। उन्होंने बताया कि आखिरी बार उसे गांव के कुछ लोगों के साथ देखा गया था। परिजनों को पहले ही किसी अनहोनी की आशंका थी, जिसके चलते दो दिन पहले नौरंगिया थाना में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी और हत्या की आशंका जताई गई थी।
घटना की सूचना मिलते ही नौरंगिया थाना पुलिस सक्रिय हो गई और मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी। थानाध्यक्ष राज रोशन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत वरीय अधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद प्रभारी एसपी निर्मला कुमारी, एसडीपीओ बगहा कुमार देवेंद्र सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे मामले की बारीकी से जांच की।

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पुलिस ने जांच के लिए डॉग स्क्वाड की भी मदद ली है और आसपास के क्षेत्रों में गहन छानबीन की जा रही है। पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है, जिसमें आपसी रंजिश, जमीन विवाद या अन्य कारणों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट रूप से हत्या का मामला प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।
इस जघन्य हत्या के बाद इलाके में भय और आक्रोश दोनों का माहौल है। ग्रामीणों में दहशत है, वहीं मृतक के परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं। परिजनों ने दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग करते हुए सख्त कार्रवाई की अपील की है। प्रभारी एसपी निर्मला कुमारी ने आश्वासन दिया है कि पुलिस जल्द ही इस मामले का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार करेगी।
यह घटना न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज में बढ़ती आपराधिक घटनाओं को भी उजागर करती है। पुलिस की जांच और कार्रवाई पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं, ताकि इस जघन्य अपराध के पीछे के कारणों का जल्द खुलासा हो सके और दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।

फीस मनमानी पर सख्ती: अब 5 साल का हिसाब देना होगा, अभिभावकों को मिलेगी राहत

विद्यालयों में फीस पारदर्शिता को लेकर सख्त निर्देश, त्रिसदस्यीय समिति करेगी जांच

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में विद्यालयों में पारदर्शिता, शिक्षा की गुणवत्ता और अभिभावकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में निजी विद्यालय प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में फीस नियमन को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनपद के सभी वित्तविहीन प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2018 एवं संशोधित अधिनियम 2020 का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने पांच वर्षों के शुल्क विवरण, ड्रेस और पुस्तकों की जांच के लिए त्रिसदस्यीय समिति गठित करने के निर्देश दिए। इस समिति में नायब तहसीलदार, खंड शिक्षा अधिकारी तथा राजकीय विद्यालयों के प्रधानाचार्य शामिल होंगे, जो जांच रिपोर्ट सीधे जिलाधिकारी को सौंपेंगे।बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि सभी विद्यालय अपनी वेबसाइट और सूचना पट्ट पर पिछले पांच वर्षों का फीस विवरण, ड्रेस और पुस्तकों की जानकारी अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि यदि किसी विद्यालय ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक + 5 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, तो जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण लिया जाएगा और अतिरिक्त शुल्क को समायोजित कराया जाएगा।
जिलाधिकारी ने गणवेश के संबंध में भी सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि किसी भी विद्यालय में पांच लगातार शैक्षणिक वर्षों के भीतर यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं किया जाएगा। साथ ही विद्यालयों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे किसी एक दुकान से किताब, कॉपी, स्टेशनरी या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य न करें और न ही स्वयं इन वस्तुओं का विक्रय करें।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल मान्यता प्राप्त पुस्तकों का ही संचालन किया जाए और जिन सुविधाओं का विद्यालय में संचालन नहीं हो रहा है, उनके नाम पर किसी भी प्रकार का शुल्क अभिभावकों से न वसूला जाए। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों का विश्वास मजबूत हो।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक पी.के. शर्मा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ऋद्धि पांडेय, एआरटीओ मनोज सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहें।

नवमनोनीत सभासदों ने ली शपथ, विकास का लिया संकल्प

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के नगर पंचायत मगहर में गुरुवार दोपहर शासन स्तर पर मनोनीत तीन सभासदों का शपथ ग्रहण समारोह गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सदर विधायक अंकुर राज तिवारी एवं उपजिलाधिकारी अरुण कुमार उपस्थित रहे। दोनों अधिकारियों ने नवमनोनीत सदस्यों ई. अरुण कुमार गुप्ता, गौरव निषाद और सुनीता यादव को सदस्य पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद तीनों सभासदों ने नगर के विकास और जनहित में कार्य करने का संकल्प लिया।
नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि नूरुजमा अंसारी ने नवमनोनीत सभासदों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये सदस्य सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए सदस्य क्षेत्र के विकास में आ रही बाधाओं को दूर करते हुए जनसमस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक अंकुर राज तिवारी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी अपने कार्यकर्ताओं का हर स्तर पर सम्मान करती है और उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के अवसर देती है। उन्होंने कहा कि पार्टी की कार्यशैली ऐसी है कि एक कार्यकर्ता अपने समर्पण और मेहनत के बल पर क्रमशः उच्च पदों तक पहुंच सकता है—आज सभासद, कल जिला अध्यक्ष और भविष्य में और बड़ी जिम्मेदारियां भी निभा सकता है। उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के मूल मंत्र को दोहराते हुए कहा कि यही सिद्धांत सरकार की नीतियों और योजनाओं का आधार है।
विधायक ने नवमनोनीत सभासदों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे सरकार की आंख, कान और नाक बनकर कार्य करें तथा जनता और प्रशासन के बीच मजबूत सेतु की भूमिका निभाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि तीनों सदस्य नगर पंचायत के समुचित विकास में सक्रिय योगदान देंगे।
कार्यक्रम में जिला उपाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र मिश्रा, अध्यक्षा अनवरीेबेगम, चेयरमैन प्रतिनिधि नुरुज्जमा अंसारी, अधिशासी अधिकारी वैभव सिंह सहित अन्य पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। अंत में सभी ने नवमनोनीत सभासदों को बधाई दी और उनके सफल कार्यकाल की कामना की।

तीन राज्यों में मतदान का जोश, असम-पुडुचेरी में 80% से ज्यादा वोटिंग

केरल, असम और पुडुचेरी में रिकॉर्ड मतदान, लोकतंत्र के पर्व में दिखा जबरदस्त उत्साह


नईदिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)देश के तीन महत्वपूर्ण राज्यों—केरल, असम और पुडुचेरी—की सभी विधानसभा सीटों पर गुरुवार (9 अप्रैल) को एक ही चरण में मतदान संपन्न हुआ। सुबह 7 बजे शुरू हुई वोटिंग में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और शाम तक शानदार मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया।
शाम 5 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार असम में 84.42%, केरल में 75.01% और पुडुचेरी में 86.92% मतदान हुआ, जो लोकतंत्र के प्रति जनता के मजबूत विश्वास को दर्शाता है। तीनों राज्यों की कुल 296 सीटों—असम की 126, केरल की 140 और पुडुचेरी की 30 सीटों—पर एक साथ मतदान हुआ। चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

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मतदान के दौरान कई प्रमुख नेताओं और हस्तियों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने जालुकबारी विधानसभा क्षेत्र के एक मतदान केंद्र पर वोट डाला और लोगों से अधिक से अधिक मतदान करने की अपील की। केरल में शशि थरूर, बिनॉय विश्वम और फिल्म अभिनेता कुंचाको बोबन ने भी मतदान कर लोकतंत्र में भागीदारी निभाई।
सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। शुरुआती घंटों में ही मतदाताओं का उत्साह साफ झलकने लगा था। सुबह 9 बजे तक असम में 17.87%, केरल में 16.23% और पुडुचेरी में 17.41% मतदान दर्ज किया गया। वहीं 11 बजे तक यह आंकड़ा तेजी से बढ़ते हुए असम में 38.92%, केरल में 33.28% और पुडुचेरी में 37.06% तक पहुंच गया।
केरल के त्रिशूर जिले में मतदान के दौरान एक दुखद घटना भी सामने आई। वानियामपारा क्षेत्र में 62 वर्षीय विनोदन नामक व्यक्ति ने वोट डालने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने पर दम तोड़ दिया। बताया गया कि मतदान केंद्र से बाहर निकलते ही वह बेहोश होकर गिर पड़े, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना से क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई।

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राजनीतिक दृष्टि से भी यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा है। केरल के पुतुप्पल्ली विधानसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार चांडी ओमन ने विरोध जताने के लिए काले कपड़े पहनकर मतदान किया। वह अपने पारंपरिक गढ़ को बचाने के लिए मैदान में हैं, जहां उनका मुकाबला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से है।
इसी बीच हेमंत सोरेन ने भी असम की जनता से मतदान करने की अपील की। उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) इस बार असम में 16 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं से लोकतंत्र के इस पर्व में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का आग्रह किया।
तीनों राज्यों में शांतिपूर्ण मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रशासन और चुनाव आयोग की सतर्कता के चलते अधिकांश जगहों पर मतदान प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हुई।
यह चुनाव न केवल स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को तय करेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। अब सभी की निगाहें 4 मई को आने वाले चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जो इन राज्यों की सत्ता का भविष्य तय करेंगे।

मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना को गति देने की तैयारी, पहला रूट तय

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। ग्रामीण क्षेत्रों को सुगम परिवहन सेवा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत जिलास्तरीय समिति की बैठक जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में वाहनों के अनुबंध की प्रक्रिया को तेज करने पर चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में संचालक का चयन किया गया तथा विभिन्न प्रस्तावित रूटों पर विचार-विमर्श के बाद प्राथमिकता तय की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि ऐसे मार्गों का चयन किया जाए, जहां वर्तमान में कोई परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को आवागमन में अधिक सुविधा मिल सके।
बैठक में एआरएम महराजगंज ने जानकारी देते हुए बताया कि जनपद में योजना के तहत पहला प्रस्तावित रूट खैंरटवा– बरगदवां –ठूठीबारी–महराजगंज निर्धारित किया गया है। इस मार्ग पर वर्तमान में कोई सरकारी बस सेवा संचालित नहीं हो रही है, जिससे क्षेत्रीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जिलाधिकारी ने प्रस्तावित रूट को अनुमोदित करते हुए कहा कि योजना का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को परिवहन सेवाओं से जोड़ना है। इसके माध्यम से ग्रामीण जनता को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय तक सीधी, सुलभ एवं सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि योजना के अंतर्गत निजी बस संचालकों को ग्रामीण मार्गों पर संचालन का अवसर दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए अन्य महत्वपूर्ण ग्रामीण मार्गों पर भी बस सेवा शुरू कराई जाए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक सर्वजीत वर्मा, एआरटीओ मनोज सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहें।

फसल बीमा दावों के त्वरित निस्तारण के निर्देश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) जय प्रकाश की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत जनपद स्तरीय मॉनिटरिंग समिति की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई। बैठक में फसल बीमा दावों की प्रगति और निस्तारण की स्थिति की समीक्षा की गई।
उप कृषि निदेशक ने जानकारी दी कि जनपद में फसल बीमा का कार्य यूनिवर्सल सोम्पो एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी द्वारा किया जा रहा है। रबी फसल के नुकसान की क्षतिपूर्ति हेतु अब तक 121 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है, जिनमें से 86 आवेदन स्वीकृत हो चुके हैं, जबकि 8 आवेदन अभी लंबित हैं।
अपर जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि शेष आवेदनों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को समय पर लाभ मिल सके। बैठक में अग्रणी जिला प्रबंधक ने बताया कि सभी बैंकों में बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर अंकित कर दिए गए हैं। किसानों को सलाह दी गई कि फसल नुकसान की स्थिति में 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना देकर दावा प्रस्तुत करें।
उप कृषि निदेशक ने बताया कि योजना के तहत प्राकृतिक एवं जलवायु जनित आपदाओं से होने वाली फसल क्षति पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाती है। रबी फसलों गेहूं, सरसों और मसूर के लिए खलिहान में 14 दिन की अवधि के भीतर प्रतिकूल मौसम से हुए नुकसान की सूचना 72 घंटे के अंदर देना अनिवार्य है, जिससे बीमा कंपनी द्वारा क्षतिपूर्ति भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
बैठक में उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी डॉ. सर्वेश यादव, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, अपर सांख्यिकी अधिकारी, भूलेख अधिकारी, अग्रणी जिला प्रबंधक पवन कुमार सिन्हा, सचिव जिला सहकारी बैंक सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

स्कूली वाहनों का ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य, परिवहन विभाग सख्त

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के सभी विद्यालय संचालकों को निर्देश जारी करते हुए सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रियंवदा सिंह ने बताया कि स्कूली वाहनों की सुरक्षा, निगरानी और वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा UP-ISVMP पोर्टल विकसित किया गया है। यह पोर्टल 01 अप्रैल 2026 से सक्रिय हो चुका है, जिस पर विद्यालयों द्वारा संचालित सभी वाहनों का पंजीकरण किया जा रहा है।
इसी क्रम में उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र) अयोध्या राजकुमार सिंह ने नवल्स नेशनल एकेडमी खलीलाबाद एवं सूर्या इंटरनेशनल एकेडमी खलीलाबाद में स्कूली वाहनों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय प्रबंधन को निर्देशित किया गया कि सभी वाहनों का ऑनलाइन पंजीकरण शीघ्र सुनिश्चित किया जाए, ताकि बच्चों की सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।
निरीक्षण के समय सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) बस्ती सुरेश कुमार, सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी प्रियंवदा सिंह सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।

मिशन शक्ति 5.0: बालिकाओं ने कहानियों के जरिए उकेरी बदलाव की प्रेरक तस्वीर

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। मिशन शक्ति 5.0 के द्वितीय चरण के अंतर्गत “समाज में बदलाव हेतु प्रयासरत महिलाओं का प्रेरक व्यक्तित्व एवं कृतित्व” विषयक कहानी लेखन प्रतियोगिता का आयोजन राजकीय बौद्ध संग्रहालय के प्रदर्शनी हाल में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्वाह्न 10:30 बजे से 11:30 बजे तक कहानी लेखन प्रतियोगिता के साथ हुआ, जिसके उपरांत दोपहर 12:00 बजे पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सुप्रसिद्ध पर्वतारोही दिव्या सिंह उपस्थित रहीं। उन्होंने मार्च 2026 में नेपाल में 5364 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप तक साइकिल से यात्रा पूरी कर भारत की प्रथम महिला बनने का कीर्तिमान स्थापित किया है। उनके साथ कोच पर्वतारोही उमा सिंह तथा वरिष्ठ चित्रकार भारत भूषण विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्वलन एवं मुख्य अतिथि के सम्मान के साथ हुआ। इसके पश्चात राजकीय बौद्ध संग्रहालय के उपनिदेशक डा. यशवंत सिंह राठौर ने कार्यक्रम की रूपरेखा एवं उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत किया।

मुख्य अतिथि दिव्या सिंह ने अपने प्रेरक संबोधन में एवरेस्ट बेस कैंप तक की साइकिल यात्रा, प्रशिक्षण एवं संघर्षपूर्ण अनुभव साझा करते हुए छात्राओं को लक्ष्य प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्प और निरंतर परिश्रम का संदेश दिया। वहीं उमा सिंह ने आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के महत्व पर बल देते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
प्रतियोगिता में कक्षा 9 से 12 तक की बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और समाज में बदलाव के लिए कार्यरत महिलाओं से प्रेरित अपने विचारों को कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता का मूल्यांकन इन्दिरा गांधी गर्ल्स डिग्री कॉलेज, तारामंडल गोरखपुर की डॉ. जया श्रीवास्तव एवं डॉ. अनुप्रिया मिश्रा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अंत में पुरस्कार वितरण किया गया, जिसमें प्रथम स्थान पर दिव्यान्सी, द्वितीय स्थान पर भक्ती सिंह एवं दीक्षा जायसवाल तथा तृतीय स्थान पर अनुष्का यादव रहीं। इसके अतिरिक्त श्रेया पाण्डेय, अन्नू साहनी एवं सोनी यादव को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
यह आयोजन मिशन शक्ति 5.0 के उद्देश्यों के अनुरूप महिलाओं के सशक्तिकरण और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक प्रभावी पहल साबित हुआ।

निःस्वार्थ सेवा ही रोटरी की पहचान: समाजहित में कार्यों को और विस्तार देने पर जोर

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। रोटरी इंटरनेशनल मानवता और समाज सेवा के लिए समर्पित संगठन है, जिसने भारत में पोलियो उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण अभियान में उल्लेखनीय योगदान दिया है। स्थानीय सोनी होटल में आयोजित कार्यक्रम में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रो. डॉ. आशुतोष अग्रवाल ने रोटरी क्लब संत कबीर नगर के सदस्यों, रोट्रैक्ट एवं इन्ट्रैक्ट के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि रोटेरियंस को निःस्वार्थ भाव से वंचितों, गरीबों और वृद्धजनों की सेवा करते हुए समाज में अनुकरणीय भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने क्लब में सदस्यता बढ़ाने पर विशेष बल देते हुए अधिक से अधिक लोगों को रोटरी से जोड़ने और सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने उपस्थित रोटेरियंस की एकता और सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि सेवा के क्षेत्र में उनकी भागीदारी प्रेरणादायी है।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने कहा कि रक्तदान शिविर, मेडिकल कैंप, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान तथा वृद्धाश्रमों में वरिष्ठ नागरिकों की सेवा जैसे कार्य समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिन्हें क्लब द्वारा कुशलतापूर्वक संपन्न किया जा रहा है। उन्होंने रोटरी फाउंडेशन में अधिकाधिक योगदान देने की भी अपील की, ताकि सेवा कार्यों का दायरा और व्यापक हो सके।
कार्यक्रम का शुभारंभ रोटरी चार्टर के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान सभी रोटेरियंस ने पुष्प प्रदान कर अतिथियों का स्वागत किया। क्लब अध्यक्ष रो. महेश कुमार रूंगटा ने बुके भेंट कर डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का स्वागत किया तथा सत्र 2025-26 में क्लब द्वारा किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस अवधि में ब्लड डोनेशन कैंप, छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण, निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर सहित अनेक जनकल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए गए।
डिस्ट्रिक्ट गवर्नर तथा अन्य अतिथियों का स्वागत एवं आभार पीएचएफ रो. राम कुमार सिंह द्वारा व्यक्त किया गया, जबकि कार्यक्रम का संचालन रो. डॉक्टर दिग्विजय नाथ पाण्डेय ने किया।
इस अवसर पर सत्र 2026-27 के अध्यक्ष रो. प्रीत पाल सिंह, रो. अखिलेन्द्र सिंह, रो. डॉ. आलोक कुमार सिन्हा, रो. अनिल श्रीवास्तव, रो. विपिन जायसवाल, रो. जसवीर सिंह, रो. सुशील कुमार छापड़िया, रो. सतीश जायसवाल, रो. परविन्दर सिंह, रो. विजय कुमार राय, रो. डॉ. सोनी सिंह, रो. वन्दना गुप्ता, रो. विकास गुप्ता, रो. डॉ. सन्तोष कुमार त्रिपाठी सहित अनेक रोटेरियंस उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त रोट्रैक्ट एवं इन्ट्रैक्ट से राजिया अंसारी, निधि तिवारी तथा उनकी टीम की सक्रिय सहभागिता रही।
कार्यक्रम के माध्यम से डिस्ट्रिक्ट गवर्नर के उद्बोधन से उपस्थित सदस्यों को मार्गदर्शन प्राप्त हुआ तथा भविष्य में सेवा कार्यों को और सशक्त बनाने की प्रेरणा मिली।

संस्था निर्माता से जीवन मार्गदर्शक तक-डॉ. विजय गर्ग की यात्रा

भारत में शिक्षा की दुनिया आज आंकड़ों, प्रतिशतों और रैंकिंग की चकाचौंध में उलझती जा रही है। स्कूलों और कॉलेजों की गुणवत्ता का मूल्यांकन अब इस आधार पर किया जाता है कि कितने विद्यार्थियों ने परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त किया, कितनों को प्रतिष्ठित नौकरियाँ मिलीं और कितनों ने प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में सफलता हासिल की। लेकिन इस पूरे परिदृश्य के बीच एक बुनियादी प्रश्न अक्सर अनसुना रह जाता है—क्या शिक्षा केवल परिणाम देने का माध्यम है, या यह मनुष्य गढ़ने की प्रक्रिया भी है? इसी प्रश्न का जीवंत उत्तर हैं डॉ. विजय गर्ग, जिनका जीवन और कार्य हमें शिक्षा के वास्तविक अर्थ से परिचित कराते हैं।

डॉ. विजय गर्ग का नाम केवल एक प्रशासनिक अधिकारी या प्रिंसिपल के रूप में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने लगभग चार दशकों तक शैक्षणिक संस्थानों का नेतृत्व किया, लेकिन उनका योगदान किसी पद या दायित्व की सीमाओं में नहीं बंधा। वे उन विरले शिक्षकों में से थे जिनके लिए शिक्षा एक पेशा नहीं, बल्कि एक नैतिक दायित्व था। उनके व्यक्तित्व में एक शिक्षक की सरलता, एक चिंतक की गहराई और एक मार्गदर्शक की संवेदनशीलता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक सच्चा शिक्षक केवल जानकारी का स्रोत नहीं होता, बल्कि वह छात्रों के भीतर विचारों की आग जलाने वाला होता है। उनका मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य उत्तर देना नहीं, बल्कि प्रश्न पूछने की क्षमता विकसित करना है। यही कारण था कि उनके संपर्क में आने वाले विद्यार्थी केवल परीक्षाओं में सफल नहीं होते थे, बल्कि जीवन के जटिल प्रश्नों का सामना करने के लिए भी तैयार होते थे।

डॉ. गर्ग का प्रारंभिक जीवन साधारण परिस्थितियों में बीता, लेकिन उनकी सोच असाधारण थी। ऐसे परिवेश में उनका पालन-पोषण हुआ जहाँ शिक्षा को सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाता था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी लगन और समर्पण के साथ प्राप्त की और अंततः डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। लेकिन इस उपलब्धि को उन्होंने कभी अपने व्यक्तित्व का केंद्र नहीं बनाया। उनके लिए यह केवल एक पड़ाव था, न कि अंतिम लक्ष्य।

उनकी यही विनम्रता और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति उन्हें दूसरों से अलग बनाती है। वे मानते थे कि ज्ञान कभी पूर्ण नहीं होता और एक शिक्षक को जीवन भर विद्यार्थी बने रहना चाहिए। जब उन्होंने प्रिंसिपल का पद संभाला, तब वे इस विचार को अपने साथ लेकर आए कि किसी भी संस्था का प्रमुख सबसे पहले एक समर्पित शिक्षार्थी होना चाहिए। यह सोच उनके पूरे प्रशासनिक कार्यकाल में स्पष्ट रूप से दिखाई देती रही।

वे सुबह सबसे पहले स्कूल पहुँचते और देर तक वहीं रहते। उनके लिए यह केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि एक साधना थी। वे विद्यालय के हर कोने को समझते थे—कक्षाओं की गतिविधियाँ, शिक्षकों की समस्याएँ, और छात्रों की जरूरतें। वे समस्याओं को आदेश देकर नहीं, बल्कि समझकर और सुलझाकर आगे बढ़ते थे। उनकी प्रशासनिक शैली में कठोरता नहीं, बल्कि संवेदनशीलता थी; दूरी नहीं, बल्कि संवाद था।

उन्होंने शिक्षकों को कभी अधीनस्थ नहीं माना, बल्कि सहयोगी के रूप में देखा। छात्रों को उन्होंने कभी केवल रोल नंबर या परिणाम के रूप में नहीं आँका, बल्कि उन्हें एक संपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में विकसित करने का प्रयास किया। उनके लिए किसी भी संस्था की सफलता का मापदंड परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि वहाँ से निकलने वाले छात्रों का चरित्र और सोच थी।

डॉ. गर्ग के बारे में उनके सहकर्मी और विद्यार्थी अक्सर यह बताते हैं कि वे वर्षों बाद भी अपने छात्रों को नाम से पहचान लेते थे। यह केवल स्मरण शक्ति का प्रश्न नहीं था, बल्कि यह उस गहरे जुड़ाव का संकेत था जो उन्होंने अपने विद्यार्थियों के साथ बनाया। वे हर छात्र में एक संभावना देखते थे, और उस संभावना को साकार करने के लिए हर संभव प्रयास करते थे।

कई बार वे चुपचाप ऐसे छात्रों की मदद करते थे जो किसी कारणवश पीछे छूट रहे होते थे। कभी एक सलाह देकर, कभी एक अवसर देकर, उन्होंने अनेक जीवनों को दिशा दी। उनके लिए शिक्षा का अर्थ केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि हर उस हाथ को थामना था जो गिरने के कगार पर हो।

समय के साथ जब उनका औपचारिक कार्यकाल समाप्त हुआ, तो उन्होंने सेवानिवृत्ति को विश्राम का माध्यम नहीं बनाया। उनके लिए यह केवल कार्य करने के तरीके का परिवर्तन था। उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों से स्वयं को अलग किया, लेकिन विचारों और चिंतन की दुनिया से कभी दूरी नहीं बनाई।

आज वे लेखन के माध्यम से शिक्षा और समाज के मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं। उनके लेखों में अनुभव की गहराई और विचारों की स्पष्टता साफ झलकती है। वे शिक्षा नीति, युवाओं की चुनौतियों, और मूल्यों की गिरावट जैसे विषयों पर लिखते हैं, लेकिन उनका दृष्टिकोण हमेशा संतुलित और व्यावहारिक होता है। वे केवल समस्याओं की ओर संकेत नहीं करते, बल्कि उनके समाधान की दिशा भी सुझाते हैं।

उनका लेखन किसी उपदेश की तरह नहीं, बल्कि एक संवाद की तरह प्रतीत होता है। पाठकों को ऐसा लगता है जैसे वे किसी ऐसे व्यक्ति से बात कर रहे हों जिसने जीवन को करीब से देखा है, उसकी जटिलताओं को समझा है और फिर भी आशा को नहीं छोड़ा है।

डॉ. गर्ग का प्रभाव केवल उनके संस्थानों तक सीमित नहीं रहा। उनके विद्यार्थी आज विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं—कोई डॉक्टर है, कोई इंजीनियर, कोई शिक्षक, तो कोई प्रशासनिक अधिकारी। लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं है कि उनके छात्र सफल हुए, बल्कि यह है कि वे संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बने।

एक शिक्षक की असली विरासत यही होती है कि उसके छात्र उसके मूल्यों को आगे लेकर जाएँ। डॉ. गर्ग ने यही किया। उन्होंने केवल करियर नहीं बनाए, बल्कि चरित्र गढ़े।

उनका निजी जीवन भी उतना ही संतुलित और अनुशासित है जितना उनका पेशेवर जीवन रहा। वे एक नियमित पाठक हैं और इतिहास तथा दर्शन में विशेष रुचि रखते हैं। वे प्रतिदिन टहलते हैं, जो उनके लिए केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक चिंतन का समय होता है।

अपने परिवार के साथ उनका जुड़ाव गहरा है। विशेषकर अपने पोते-पोतियों के साथ उनका व्यवहार यह दर्शाता है कि उनके भीतर का शिक्षक आज भी जीवित है। उनमें वही धैर्य, वही स्नेह और वही जिज्ञासा दिखाई देती है जो उन्होंने अपने छात्रों के साथ साझा की थी।

आज के समय में, जब शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और मूल्यों की जगह प्रतिस्पर्धा ने ले ली है, तब डॉ. विजय गर्ग जैसे व्यक्तित्व हमें यह याद दिलाते हैं कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य क्या है। वे हमें यह सिखाते हैं कि एक शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला नहीं होता, बल्कि वह समाज का निर्माता होता है।

भारत ने अनेक शिक्षाविद और प्रशासक देखे हैं, लेकिन ऐसे शिक्षक बहुत कम हुए हैं जिन्होंने शिक्षा की परिभाषा को ही बदल दिया। डॉ. विजय गर्ग उन्हीं विरले लोगों में से एक हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची शिक्षा वह है जो व्यक्ति को केवल सफल नहीं, बल्कि सार्थक बनाती है।

और शायद यही कारण है कि उनके द्वारा शुरू की गई वह “शांत क्रांति” आज भी जारी है—हर उस छात्र के माध्यम से, जिसने उनसे कुछ सीखा, और हर उस विचार के माध्यम से, जिसे उन्होंने जगाया।

डॉ. प्रियंका सौरभ
सामाजिक चिंतक एवं स्तंभकार

केंद्रीय सचिवालय में सहायक अनुभाग अधिकारी बनीं उपासना राय, क्षेत्र में खुशी की लहर

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)

जनपद के सिकंदरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम किशोर चेतन की प्रतिभाशाली बेटी उपासना राय ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर एक बड़ी सफलता हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वरिष्ठ पत्रकार रणजीत राय एवं शांति राय की सुपुत्री उपासना राय का चयन केंद्रीय सचिवालय में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (सहायक अनुभाग अधिकारी) के पद पर हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे गांव व क्षेत्र में हर्ष और गर्व का माहौल है।
उपासना राय की प्रारंभिक शिक्षा सिकंदरपुर स्थित सन राइज पब्लिक स्कूल से हुई, जहां से उन्होंने अपनी शैक्षिक यात्रा की मजबूत नींव रखी। इसके बाद उन्होंने ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल, बलिया से कक्षा आठ तक की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने वाराणसी के प्रतिष्ठित सेंट्रल हिंदू गर्ल्स स्कूल (कमच्छा) में प्रवेश लिया और वहीं से इंटरमीडिएट (पीसीएम वर्ग) उत्तीर्ण किया। छात्र जीवन से ही उपासना पढ़ाई के प्रति अत्यंत गंभीर, अनुशासित और मेधावी रही हैं।उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने काशी विद्यापीठ से बीएससी (पीसीएम) की डिग्री प्राप्त की। इसके साथ ही उन्होंने एनसीसी में ‘सी’ सर्टिफिकेट भी हासिल किया, जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाता है। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने आत्मविश्वास और निरंतर परिश्रम के बल पर प्रतियोगी परीक्षाओं की कठिन राह को पार किया और यह मुकाम हासिल किया।उपासना राय की इस सफलता का श्रेय उनके कठिन परिश्रम, मजबूत इरादों और परिवार के निरंतर सहयोग को जाता है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी कि वे भी अपने लक्ष्य को स्पष्ट रखें और पूरी निष्ठा के साथ उसे प्राप्त करने का प्रयास करें।
उनकी सफलता पर परिवारजनों, रिश्तेदारों और क्षेत्रवासियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं। दादा-दादी, बड़े पापा प्रेम शंकर राय, त्रिलोकी नाथ राय, राणा प्रताप राय, चाचा बिपिन बिहारी राय सहित समस्त परिजनों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।निस्संदेह, उपासना राय की यह उपलब्धि आने वाले समय में और भी बड़ी सफलताओं का मार्ग प्रशस्त करेगी और क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

रणवीरपुर गांव में अज्ञात शव मिलने से सनसनी, जांच में जुटी पुलिस

मऊ(राष्ट्र की परम्परा)जिले के थाना सरायलखंसी क्षेत्र के रणवीरपुर गांव में गुरुवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब एक बुजुर्ग ने खेत की ओर जाते समय एक अज्ञात शव पड़ा देखा। सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और देखते ही देखते घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुट गई। इसके बाद स्थानीय लोगों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी।

सूचना मिलते ही थाना सरायलखंसी पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया, जिसने मौके से साक्ष्य जुटाकर जांच शुरू कर दी है।

ग्रामीणों के अनुसार, जब शव मिला उस समय उसके बदन पर कपड़े नहीं थे, जिससे घटना संदिग्ध प्रतीत हो रही है। फिलहाल शव की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस ने डेड बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और अग्रिम कार्रवाई की जा रही है।

तेज रफ्तार पिक-अप का कहर: बाइक सवार युवक की मौत, 10 वर्षीय किशोर गंभीर घाय

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। भिटौली थाना क्षेत्र में बुधवार की रात एक दर्दनाक सड़क हादसे ने इलाके को झकझोर कर रख दिया। तेज रफ्तार और अनियंत्रित पिक-अप वाहन की जोरदार टक्कर में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक 10 वर्षीय किशोर गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार लक्ष्मीपुर शिवाला निवासी धर्मवीर (35) पुत्र कन्हैया लाल अपनी बाइक से एक महिला और 10 वर्षीय आकाश पुत्र नंदलाल को लेकर भिटौली दवा कराने जा रहे थे। तभी परतावल की ओर से आ रही तेज रफ्तार अज्ञात पिक-अप ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि धर्मवीर और आकाश गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंची तथा घायलों को एम्बुलेंस से जिला अस्पताल महराजगंज पहुंचाया गया। जहां चिकित्सकों ने धर्मवीर को मृत घोषित कर दिया, जबकि किशोर आकाश का इलाज जारी है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है। बाइक पर सवार महिला सुनीता को मामूली चोटें आई हैं।हादसे के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
भिटौली थाना प्रभारी मदन मोहन मिश्र ने बताया कि मामले में तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है और अज्ञात वाहन की तलाश की जा रही है। जल्द ही आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस हृदय विदारक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों ने एक बार फिर तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।