भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है। दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।
बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है। सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।
अग्निकांडों से सीख: यह केवल एक व्यक्ति या संस्था की नहीं बल्कि पूरे तंत्र की विफलता जवाबदेही, संस्थागत विफलताएँ, भ्रष्टाचार और भविष्य की सुरक्षा का वैश्विक परिप्रेक्ष्य
अग्निकांड केवल एक दुर्घटना नहीं होते, बल्कि वे उस प्रशासनिक, नियामक और सामाजिक व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा होते हैं जिसे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है। जब किसी होटल, अस्पताल, मॉल, विद्यालय, औद्योगिक इकाई या व्यावसायिक भवन में आग लगने से बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु होती है, तो यह केवल आग की लपटों का परिणाम नहीं होता, बल्कि वर्षों से जमा होती आ रही लापरवाही, नियमों की अनदेखी, कमजोर निगरानी और संस्थागत विफलताओं का दुष्परिणाम भी होता है। 3 जून 2026 को दिल्ली के मालवीय नगर क्षेत्र में स्थित एक होटल और उससे जुड़े प्रतिष्ठान में लगी भीषण आग ने एक बार फिर देश की शहरी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए। प्रारंभिक रिपोर्टों में सामने आए तथ्यों ने यह संकेत दिया कि भवन संचालन और सुरक्षा मानकों के बीच गंभीर विसंगतियाँ मौजूद थीं। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी आपदा को केवल दुर्घटना मानकर आगे बढ़ जाना पर्याप्त नहीं है; उसके पीछे मौजूद व्यवस्थागत कमियों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। अग्निकांड: दुर्घटना नहीं, प्रणालीगत विफलता का संकेत विश्वभर के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश बड़े अग्निकांडों में मौतें आग से कम और सुरक्षा तंत्र की विफलताओं से अधिक होती हैं। इनमें प्रमुख रूप से आपातकालीन निकास की कमी, अग्निशमन उपकरणों का निष्क्रिय होना, सुरक्षा मानकों की अनदेखी, निरीक्षण में लापरवाही तथा आपदा प्रतिक्रिया में देरी शामिल हैं। किसी भी अग्निकांड की जांच केवल यह पता लगाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए कि आग कैसे लगी, बल्कि यह भी समझना आवश्यक है कि ऐसी स्थिति बनने ही क्यों दी गई। भारत के प्रमुख अग्निकांड और समान पैटर्न भारत में हुई अनेक बड़ी त्रासदियों का अध्ययन करने पर एक समान पैटर्न सामने आता है। उपहार सिनेमा अग्निकांड (1997) कुम्बकोणम स्कूल अग्निकांड (2004) अमरी अस्पताल अग्निकांड अनाज मंडी अग्निकांड (2019) मुंडका अग्निकांड इन सभी घटनाओं में नियमों के उल्लंघन, अपर्याप्त निरीक्षण, अवैध निर्माण, कमजोर निकासी व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही जैसी समान समस्याएँ सामने आईं। फायर विभाग की भूमिका और जिम्मेदारी अग्निशमन विभाग किसी भी आपदा में अंतिम रक्षा पंक्ति होता है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण उसका निवारक दायित्व है। नियमित निरीक्षण, वैध अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र, स्प्रिंकलर सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर और आपातकालीन निकास की कार्यशीलता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि किसी भवन में समय के साथ अवैध विस्तार होता है और उसे वर्षों तक नहीं रोका जाता, तो यह केवल भवन मालिक की नहीं बल्कि निरीक्षण व्यवस्था की भी विफलता मानी जाएगी। पुलिस और प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता पुलिस की भूमिका केवल दुर्घटना के बाद जांच तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जोखिम वाले भवनों की पहचान, अवैध गतिविधियों की निगरानी और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वित कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक है। विकसित देशों में पुलिस, फायर विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच डेटा साझाकरण की प्रभावी व्यवस्था होती है, जिससे संभावित खतरों की पहचान पहले ही कर ली जाती है। भारत में इस दिशा में अभी काफी सुधार की आवश्यकता है। आपदा प्रबंधन की वास्तविक जिम्मेदारी आपदा प्रबंधन का अर्थ केवल राहत और बचाव कार्य नहीं है। इसका मूल उद्देश्य जोखिम को कम करना है। नियमित मॉक ड्रिल, कर्मचारियों का प्रशिक्षण, जन-जागरूकता अभियान और निकासी योजनाओं का परीक्षण ऐसे उपाय हैं जो बड़ी त्रासदियों को रोक सकते हैं। दुर्भाग्यवश अनेक स्थानों पर ये गतिविधियाँ केवल कागजी औपचारिकता बनकर रह जाती हैं। नगर निकायों की जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण भवन निर्माण अनुमति, व्यापार लाइसेंस, उपयोग परिवर्तन और सुरक्षा अनुपालन की प्राथमिक जिम्मेदारी नगर निकायों की होती है। यदि रिकॉर्ड में दर्ज भवन की स्थिति और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर हो, तो यह स्पष्ट रूप से निगरानी एवं प्रवर्तन तंत्र की विफलता का संकेत है। अवैध मंजिलें, बंद निकास मार्ग, खराब विद्युत व्यवस्था और निष्क्रिय सुरक्षा उपकरण ऐसी ही विफलताओं के उदाहरण हैं। भ्रष्टाचार: सार्वजनिक सुरक्षा का सबसे बड़ा शत्रु जब सुरक्षा प्रमाणपत्र प्रभाव, दबाव या भ्रष्टाचार के आधार पर जारी किए जाने लगते हैं, तब भविष्य की त्रासदियों की नींव रखी जाती है। भ्रष्टाचार केवल आर्थिक अपराध नहीं है। यह सीधे-सीधे मानव जीवन को जोखिम में डालने वाला अपराध है। निरीक्षण की औपचारिकता, अवैध निर्माणों की अनदेखी और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई न होना इसी समस्या की जड़ है। शहरीकरण और बढ़ता सुरक्षा संकट तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने नई चुनौतियाँ पैदा की हैं। सीमित भूमि और बढ़ती व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के कारण भवनों का अधिकतम उपयोग करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। अतिरिक्त कमरे, अवैध मंजिलें और सुरक्षा मानकों की अनदेखी धीरे-धीरे बड़े जोखिमों को जन्म देती हैं। इसलिए शहरी विकास और अग्नि सुरक्षा को एकीकृत दृष्टिकोण से देखने की आवश्यकता है। तकनीक बन सकती है बड़ा समाधान स्मार्ट सेंसर, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जोखिम विश्लेषण, डिजिटल भवन रजिस्टर और स्वचालित अलार्म प्रणाली भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि तकनीक तभी प्रभावी होगी जब उसके साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाए। नागरिकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण सुरक्षा केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। नागरिकों को भी सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक होना होगा। यदि लोग असुरक्षित भवनों, होटलों और प्रतिष्ठानों के विरुद्ध शिकायत करने और सुरक्षा संबंधी जानकारी मांगने की संस्कृति विकसित करें, तो व्यवस्था पर सुधार का दबाव स्वतः बनेगा। वैश्विक अनुभव और भारत के लिए सबक दुनिया के अनेक देशों ने बड़ी त्रासदियों के बाद कठोर सुधार लागू किए हैं। डिजिटल निरीक्षण प्रणाली, सार्वजनिक सुरक्षा रेटिंग, ऑनलाइन रिकॉर्ड, जीपीएस आधारित निरीक्षण और गंभीर उल्लंघन पर तत्काल सीलिंग जैसी व्यवस्थाओं ने जोखिम कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत भी ऐसी प्रणालियों को व्यापक स्तर पर लागू करके सार्वजनिक सुरक्षा को अधिक मजबूत बना सकता है। निष्कर्ष: जवाबदेही तय किए बिना नहीं रुकेगी त्रासदियाँ किसी भी अग्निकांड को केवल एक दुर्घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यदि भवन में क्षमता से अधिक लोग मौजूद थे, सुरक्षा उपकरण निष्क्रिय थे, निरीक्षण प्रभावी नहीं थे, भ्रष्टाचार ने नियमों को कमजोर किया, बचाव कार्य में देरी हुई और जवाबदेही तय नहीं हुई, तो यह केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की नहीं बल्कि पूरे तंत्र की विफलता है। दुनिया के किसी भी शहर में सुरक्षा का मूल सिद्धांत एक ही है—आपदा के बाद राहत से अधिक महत्वपूर्ण है आपदा से पहले रोकथाम। जब तक पारदर्शिता, नियमित निरीक्षण, शून्य-सहिष्णुता वाली भ्रष्टाचार विरोधी नीति, तकनीकी आधुनिकीकरण, संस्थागत समन्वय और कठोर जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक ऐसी त्रासदियाँ बार-बार मानव जीवन की भारी कीमत वसूलती रहेंगी। इसीलिए हर अग्निकांड को एक चेतावनी मानकर व्यापक और स्थायी सुधार करना ही उन लोगों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने ऐसी दुर्घटनाओं में अपने प्राण गंवाए हैं। ✍️ कलम से : एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)
अमृत 2.0 योजना के तहत 35 एमएलडी क्षमता के जल शोधन संयंत्र समेत कई परियोजनाओं को मिली गति
बलिया(राष्ट्र क़ी परम्परा )
जिले में शुद्ध पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बुधवार को तहसील सदर क्षेत्र के ग्राम जमुआ में प्रस्तावित जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। यह परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्य नगर क्षेत्र के नागरिकों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को भूमि हस्तांतरण सहित सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना के निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। जिलाधिकारी ने बताया कि नगर पालिका परिषद बलिया के लिए तैयार की गई जिलापूर्ति योजना को ट्रांच-1 के अंतर्गत स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 35 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता का आधुनिक जल शोधन संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा 53 एमएलडी क्षमता का एक इंटेक वेल, लगभग 1000 किलोलीटर क्षमता का ओवरहेड टैंक (ओएचटी), करीब 115 किलोमीटर लंबा वितरण नेटवर्क तथा लगभग 21 किलोमीटर लंबी राइजिंग मेन का निर्माण भी प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि योजना के पूर्ण होने के बाद नगर पालिका परिषद बलिया क्षेत्र के लगभग 20,603 घरों को शुद्ध एवं नियमित पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे न केवल जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि नागरिकों को जलजनित बीमारियों से भी राहत मिलेगी। लंबे समय से बेहतर पेयजल व्यवस्था की प्रतीक्षा कर रहे शहरवासियों के लिए यह योजना काफी लाभकारी सिद्ध होगी। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जल शोधन संयंत्र, इंटेक वेल तथा शिरोपरी जलाशय निर्माण के लिए आवश्यक भूमि से संबंधित प्रस्तावों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के अधिशासी अभियंता को परियोजना का विस्तृत प्राक्कलन एवं तकनीकी डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने का आदेश दिया, ताकि निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में प्रारंभ किया जा सके। इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे), तहसीलदार सदर, उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के अधिकारी, राजस्व विभाग की टीम तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को परियोजना की प्रगति एवं प्रस्तावित कार्यों की विस्तृत जानकारी भी दी।
संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के विकास खंड हैसर बाजार स्थित ग्राम पंचायत सिरसी में युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल विभाग द्वारा निर्मित ग्रामीण मिनी स्टेडियम का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से बने इस स्टेडियम का निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा कराया गया है। जिला युवा कल्याण अधिकारी रामप्रताप सिंह ने बताया कि स्टेडियम का निर्माण गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराया गया है। निर्माण अवधि के दौरान मुख्य विकास अधिकारी और जिलाधिकारी द्वारा नियमित निरीक्षण भी किया गया। तीन एकड़ क्षेत्र में विकसित यह स्टेडियम सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है, जिससे आसपास के सैकड़ों गांवों के खिलाड़ियों और युवाओं को लाभ मिलेगा। स्टेडियम में इनडोर और आउटडोर दोनों प्रकार के खेलों की सुविधाएं उपलब्ध हैं। मल्टीपरपज हॉल में बैडमिंटन, कुश्ती, कबड्डी सहित विभिन्न खेलों का आयोजन किया जा सकेगा। वहीं भवन के ऊपरी तल पर टेबल टेनिस के लिए अलग कक्ष बनाया गया है। खिलाड़ियों की सुविधा के लिए बालक और बालिकाओं हेतु अलग-अलग शौचालय तथा चेंजिंग रूम भी बनाए गए हैं। बाउंड्री वॉल से सुरक्षित परिसर में फुटबॉल, वॉलीबॉल, क्रिकेट, रनिंग इवेंट समेत अन्य आउटडोर खेलों के आयोजन की भी व्यवस्था की गई है। स्टेडियम का संचालन युवा कल्याण विभाग द्वारा किया जाएगा तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष में खेल प्रशिक्षक की नियुक्ति भी की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था के तहत यहां 24 घंटे के लिए छह पीआरडी जवान तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि जनपद के विकास खंड बघौली की ग्राम पंचायत चन्दनी में भी एक अन्य ग्रामीण स्टेडियम का निर्माण कार्य चल रहा है, जो अगले वर्ष तक पूर्ण होने की संभावना है।
ढोल-नगाड़ों के बीच जुटे प्रधान व जनप्रतिनिधि, बोले विकास कार्यों की गति नहीं होगी प्रभावित
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के उपरांत उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किए जाने के निर्णय का घुघली विकास खंड में जोरदार स्वागत किया गया। बुधवार को आयोजित भव्य सम्मान समारोह में प्रशासक बनाए गए प्रधानों ने पनियरा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह, सदर विधायक जय मंगल कन्नौजिया तथा भाजपा जिलाध्यक्ष अशोक पांडेय उर्फ संजय पांडेय का माल्यार्पण कर स्वागत किया। कार्यक्रम स्थल पर ढोल-नगाड़ों की गूंज और उत्साहपूर्ण माहौल के बीच बड़ी संख्या में प्रधान, प्रशासक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानों ने प्रदेश सरकार के इस निर्णय को ग्रामीण विकास की निरंतरता बनाए रखने वाला ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में संचालित विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यों के प्रभावित होने की आशंका समाप्त हो गई है। सरकार के इस फैसले से गांवों में विकास कार्यों की रफ्तार बनी रहेगी और आम जनता को योजनाओं का लाभ लगातार मिलता रहेगा। पनियरा विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार गांव, गरीब और किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद विकास कार्यों के बाधित होने की संभावना थी, लेकिन सरकार ने दूरदर्शी निर्णय लेते हुए प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी सौंप दी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं का संचालन निर्बाध रूप से जारी रहेगा। सदर विधायक जय मंगल कन्नौजिया ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों का समग्र विकास है। सड़क, नाली, पेयजल, आवास, शौचालय समेत विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने सभी प्रशासकों से ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती कि विकास कार्यों की गति किसी भी स्तर पर प्रभावित हो, इसलिए यह निर्णय ग्रामीण विकास को नई दिशा और मजबूती प्रदान करेगा। भाजपा जिलाध्यक्ष संजय पांडेय ने कहा कि सरकार का यह निर्णय पूरी तरह जनहित में लिया गया है। इससे ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार बनी रहेगी और जनता को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम में प्रमुख प्रतिनिधि ओम प्रकाश जायसवाल, पूर्व चेयरमैन वीरेंद्र सिंह, प्रधान संघ अध्यक्ष राजाराम गुप्ता, चतुर्भुज सिंह, सिद्धू सिंह तथा भाजपा जिला मंत्री दिनेश जायसवाल ने भी अपने विचार व्यक्त किए और सरकार के निर्णय का स्वागत किया। इस अवसर पर मनोज जायसवाल, शैलेश पटेल, रवि पांडेय, सागर कन्नौजिया, रणधीर सिंह, मान सिंह, अब्दुल कलाम, बैजनाथ गुप्ता, श्रीकांत कन्नौजिया, प्रीतम जायसवाल, विनोद साहनी, नाथू चौधरी, सुभाष प्रजापति, स्वामीनाथ गुप्ता, रामशंकर चौधरी, रामाज्ञा पटेल, ज्वाला चौधरी, रमेश चंद्र कन्नौजिया, राममूरत सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रशासक, प्रधान एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
नौकरी दिलाने और बड़े अधिकारियों से करीबी का झांसा देकर करता था ठगी, पुलिस ने मोबाइल व दस्तावेज किए बरामद
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सरकारी नौकरी दिलाने तथा उच्च अधिकारियों से करीबी संबंध होने का झूठा दावा कर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक शातिर आरोपी को ठूठीबारी पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। आरोपी के विरुद्ध करीब 63 लाख रुपये की धोखा-धड़ी करने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने उसके कब्जे से कई पहचान संबंधी दस्तावेज और मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन में जनपद में वांछित एवं फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी निचलौल के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष ठूठीबारी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की चेकिंग के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आरोपी स्वयं को विभिन्न विभागों का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को अपने प्रभाव में लेता था। वह सरकारी नौकरी दिलाने, बड़े अधिकारियों से सीधा संपर्क होने तथा विभिन्न सरकारी कार्यों को कराने का भरोसा देकर लोगों से मोटी रकम ऐंठता था। जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपी ने कई लोगों को झांसे में लेकर उनसे धनराशि प्राप्त की और करीब 63 लाख रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। मुकदमा संख्या 77/2026, धारा 419, 420 एवं 467 भादवि के तहत दर्ज मामले में आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। इसी बीच मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने उसे ठूठीबारी क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से तीन आधार कार्ड, एक ड्राइविंग लाइसेंस तथा दो वन प्लस मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस का कहना है कि इन दस्तावेजों और मोबाइल फोन का उपयोग वह लोगों को भ्रमित करने तथा अपने प्रभाव का झूठा प्रदर्शन करने के लिए करता था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान विनीत कुमार सिंह पुत्र चंद्रिका सिंह निवासी बासपार कोठी, थाना श्यामदेंउरवा, जनपद महराजगंज के रूप में हुई है। उसकी आयु लगभग 30 वर्ष बताई जा रही है तथा वह एम.कॉम तक शिक्षित है। पुलिस ने आरोपी से आवश्यक पूछ-ताछ के बाद उसे महराजगंज न्यायालय में पेश कर दिया है। साथ ही मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ठगी के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे।
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के एम.ए. तृतीय सेमेस्टर के छात्र एवं अंतरराष्ट्रीय किकबॉक्सर सनी सिंह ने अपनी प्रतिभा और उपलब्धियों के बल पर विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। किकबॉक्सिंग जैसे चुनौतीपूर्ण खेल में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सनी सिंह पूर्वांचल के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं। सनी सिंह की सफलता के पीछे उनकी कठिन मेहनत के साथ-साथ विश्वविद्यालय प्रशासन का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष 2023 में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने विश्वविद्यालय की कमान संभालने के बाद खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में विशेष प्रयास किए। इसी क्रम में सनी सिंह को भी निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन मिला, जिसका परिणाम आज उनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के रूप में सामने है। सनी सिंह वर्ष 2023 से 2026 तक चार बार राज्य स्तरीय किकबॉक्सिंग पदक विजेता बन चुके हैं। इसके अलावा वह तीन बार राष्ट्रीय किकबॉक्सिंग पदक जीत चुके हैं तथा वर्ष 2024 में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी खिलाड़ी के रूप में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। उन्होंने वर्ष 2025 और 2026 में आयोजित इंटरनेशनल वाको इंडिया किकबॉक्सिंग कप में दो बार रजत पदक हासिल किया। युवा एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय किकबॉक्सिंग प्रशिक्षण शिविर में भी दो बार प्रतिभाग कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनी सिंह ने वर्ष 2025 में अबू धाबी में आयोजित विश्व किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप में शीर्ष-20 खिलाड़ियों में नौवां स्थान प्राप्त किया। वहीं वर्ष 2024 में उज्बेकिस्तान में आयोजित किकबॉक्सिंग विश्व कप में शीर्ष-10 खिलाड़ियों में पांचवां स्थान हासिल कर देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया। उनका चयन आगामी सीनियर नेशनल किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप-2026 के लिए भी हो चुका है, जिसका आयोजन अगस्त में गुजरात में होगा। खेल क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें पूर्वांचल खेल भूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। खेल उपलब्धियों के साथ-साथ सनी सिंह सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वर्ष 2022 से 2025 के बीच उन्होंने विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में छह हजार से अधिक छात्राओं को निःशुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण प्रदान किया है। इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में ईको-ब्रिक्स परियोजना और ‘नील गगन’ अभियान से जुड़कर युवाओं को जागरूक करने का कार्य भी कर रहे हैं। इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने सनी सिंह को बधाई देते हुए कहा कि वह केवल विश्वविद्यालय ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के गौरव हैं। उन्होंने कहा कि सनी ने यह सिद्ध किया है कि खेल, शिक्षा और सामाजिक दायित्वों के बीच उत्कृष्ट संतुलन स्थापित किया जा सकता है। कुलपति ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनके हर प्रयास में साथ खड़ा रहेगा।
भारत में शिक्षा को सदियों से ज्ञान, संस्कार और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम माना गया है। शिक्षक को समाज में विशेष सम्मान प्राप्त रहा है क्योंकि वह केवल विषय ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण भी करता है। किंतु पिछले कुछ दशकों में शिक्षा के क्षेत्र में जो परिवर्तन हुए हैं, उन्होंने इस आदर्शवादी अवधारणा को काफी हद तक प्रभावित किया है। विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की बढ़ती संख्या, सरकारी नौकरियों के प्रति आकर्षण और बेहतर करियर की दौड़ ने कोचिंग उद्योग को एक विशाल आर्थिक क्षेत्र में बदल दिया है। आज देश के अनेक शहरों में कोचिंग संस्थान शिक्षा व्यवस्था के समानांतर एक ऐसी व्यवस्था खड़ी कर चुके हैं, जिसका प्रभाव विद्यालयों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और यहां तक कि नीतिनिर्माताओं तक पर दिखाई देता है। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के विस्तार ने इस प्रवृत्ति को और अधिक तीव्र बना दिया है। अनेक शिक्षक और कोचिंग संचालक यूट्यूब, इंस्टाग्राम तथा अन्य माध्यमों के जरिए लाखों विद्यार्थियों तक पहुँच रहे हैं। यह अपने आप में बुरा नहीं है। तकनीक ने शिक्षा को अधिक सुलभ बनाया है और दूरदराज़ के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण सामग्री उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब शिक्षा का उद्देश्य ज्ञानार्जन से हटकर व्यक्तिगत ब्रांड निर्माण, प्रचार और व्यावसायिक विस्तार तक सीमित हो जाता है। हाल ही में एक चर्चित टीवी बहस में वरिष्ठ पत्रकार अंजना ओम कश्यप द्वारा एक यूट्यूबर शिक्षक पर किया गया तंज सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना। इस घटना को लेकर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है। कुछ लोग इसे पत्रकारिता की तीखी टिप्पणी मानते हैं तो कुछ इसे शिक्षकों के प्रति अनादर के रूप में देखते हैं। किंतु इस विवाद ने एक महत्वपूर्ण प्रश्न अवश्य खड़ा किया है—क्या शिक्षा का क्षेत्र अब अत्यधिक प्रचार और व्यवसायीकरण की ओर बढ़ चुका है? क्या विद्यार्थियों और अभिभावकों को प्रभावित करने के लिए एक ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जिसमें कोचिंग को सफलता की अनिवार्य शर्त के रूप में प्रस्तुत किया जाता है? वास्तविकता यह है कि आज अनेक अभिभावक यह मानने लगे हैं कि बिना कोचिंग के उनका बच्चा किसी प्रतियोगी परीक्षा में सफल नहीं हो सकता। यह धारणा धीरे-धीरे इतनी गहरी हो गई है कि विद्यालयी शिक्षा की उपयोगिता पर भी प्रश्नचिह्न लगने लगा है। कई परिवार अपनी आर्थिक स्थिति पर भारी बोझ डालकर बच्चों को महंगी कोचिंग में भेजते हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों विद्यार्थी कोचिंग हब माने जाने वाले शहरों की ओर पलायन करते हैं। इस प्रक्रिया में परिवार की बचत, बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन सभी प्रभावित होते हैं। यह स्थिति केवल विद्यार्थियों की मानसिकता का परिणाम नहीं है। इसके पीछे शिक्षा व्यवस्था की कुछ वास्तविक चुनौतियाँ भी हैं। विद्यालयों में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं की आवश्यकताओं के बीच अक्सर अंतर दिखाई देता है। कई प्रतियोगी परीक्षाएँ ऐसी हैं जिनमें विद्यालयी पाठ्यक्रम से बाहर के विषय, विशेष प्रकार की तार्किक क्षमता या परीक्षा-विशिष्ट रणनीतियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। परिणामस्वरूप विद्यार्थियों और अभिभावकों को लगता है कि केवल स्कूल की पढ़ाई पर्याप्त नहीं है। इस धारणा का लाभ कोचिंग उद्योग उठाता है और स्वयं को सफलता की कुंजी के रूप में प्रस्तुत करता है। हालाँकि यह भी स्वीकार करना होगा कि सभी कोचिंग संस्थानों को एक ही दृष्टि से नहीं देखा जा सकता। अनेक संस्थान और शिक्षक ईमानदारी से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे विद्यार्थियों को अवसर दिए हैं जिन्हें अन्यथा बेहतर संसाधन उपलब्ध नहीं हो पाते। ऑनलाइन शिक्षा ने लाखों युवाओं तक कम लागत में अध्ययन सामग्री पहुँचाई है। इसलिए पूरे कोचिंग क्षेत्र को नकारात्मक रूप में चित्रित करना उचित नहीं होगा। समस्या उन प्रवृत्तियों से है जहाँ शिक्षा की जगह प्रचार, व्यक्तिपूजा और अवास्तविक दावे केंद्र में आ जाते हैं। सोशल मीडिया के दौर में कुछ शिक्षकों ने स्वयं को ब्रांड के रूप में स्थापित कर लिया है। उनके वीडियो, पोस्ट और विज्ञापन लगातार विद्यार्थियों के सामने आते रहते हैं। सफलता की कहानियों को प्रमुखता से दिखाया जाता है, जबकि असफल विद्यार्थियों की संख्या पर चर्चा कम होती है। कई बार यह आभास दिया जाता है कि किसी विशेष शिक्षक या कोचिंग से जुड़ना ही सफलता की गारंटी है। जबकि वास्तविकता यह है कि किसी भी परीक्षा में सफलता अनेक कारकों पर निर्भर करती है—विद्यार्थी की मेहनत, पारिवारिक सहयोग, मानसिक स्थिति, अध्ययन संसाधन और समय प्रबंधन उनमें प्रमुख हैं। एक अन्य चिंताजनक पहलू शिक्षा के क्षेत्र में व्यक्तिकेंद्रित संस्कृति का बढ़ना है। कुछ शिक्षक अपने विषय या संस्थान से अधिक स्वयं के प्रचार पर ध्यान देते दिखाई देते हैं। विशाल होर्डिंग, लगातार विज्ञापन, सोशल मीडिया अभियानों और व्यक्तिगत छवि निर्माण पर खर्च होने वाले संसाधन यह प्रश्न उठाते हैं कि शिक्षा का केंद्र विद्यार्थी है या शिक्षक का ब्रांड? शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान का प्रसार होना चाहिए, न कि व्यक्तित्व का अंधानुकरण। हिंदी माध्यम और अंग्रेज़ी माध्यम की कोचिंग संस्कृति की तुलना भी चर्चा का विषय बनती रही है। यह धारणा अक्सर व्यक्त की जाती है कि हिंदी माध्यम में कुछ शिक्षक अत्यधिक प्रचार पर निर्भर रहते हैं, जबकि अंग्रेज़ी माध्यम में संस्थान अपेक्षाकृत संस्थागत पहचान को महत्व देते हैं। यद्यपि यह विभाजन पूर्णतः सही नहीं कहा जा सकता, फिर भी यह स्पष्ट है कि सोशल मीडिया के माध्यम से व्यक्तिगत ब्रांडिंग की प्रवृत्ति कुछ क्षेत्रों में अधिक दिखाई देती है। इसका प्रभाव विद्यार्थियों पर भी पड़ता है, जो विषयवस्तु की गुणवत्ता से अधिक लोकप्रियता और फॉलोअर्स की संख्या से प्रभावित होने लगते हैं। इस पूरे परिदृश्य में सरकार और शिक्षा नियामकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। यदि विद्यालयी शिक्षा इतनी मजबूत हो कि प्रतियोगी परीक्षाओं की बुनियादी तैयारी वहीं से संभव हो सके, तो कोचिंग पर अत्यधिक निर्भरता स्वतः कम हो सकती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने विद्यालयी शिक्षा को अधिक कौशल आधारित और व्यावहारिक बनाने की दिशा में प्रयास किए हैं, किंतु इन सुधारों का प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई देने में समय लगेगा। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की संरचना, पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रणाली में भी ऐसी पारदर्शिता और संतुलन होना चाहिए कि विद्यालयी अध्ययन और परीक्षा की अपेक्षाओं के बीच अनावश्यक अंतर न रहे। अभिभावकों की भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। उन्हें यह समझना होगा कि कोचिंग सफलता का एक साधन हो सकती है, लेकिन सफलता की एकमात्र शर्त नहीं। किसी भी संस्थान या शिक्षक के दावों को बिना जांचे-परखे स्वीकार करना उचित नहीं है। विज्ञापन और वास्तविक परिणामों के बीच अंतर को समझना आवश्यक है। बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय उनकी रुचि, क्षमता और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को भी यह समझने की आवश्यकता है कि कोई भी शिक्षक, चाहे वह कितना ही लोकप्रिय क्यों न हो, उनकी मेहनत का विकल्प नहीं बन सकता। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ज्ञान प्राप्ति के उत्कृष्ट साधन हैं, लेकिन उनका उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए। लोकप्रियता और गुणवत्ता हमेशा एक ही चीज़ नहीं होतीं। किसी शिक्षक या संस्थान का चयन उसके प्रचार के आधार पर नहीं, बल्कि उसकी शैक्षणिक उपयोगिता, विषय विशेषज्ञता और विद्यार्थियों को मिलने वाले वास्तविक लाभ के आधार पर होना चाहिए। अंततः प्रश्न किसी एक पत्रकार, एक यूट्यूबर शिक्षक या किसी विशेष संस्थान का नहीं है। वास्तविक मुद्दा शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण और उस मानसिकता का है जिसमें सफलता को एक उत्पाद की तरह बेचा जाने लगा है। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को सोचने, समझने और समाज के प्रति उत्तरदायी बनाने का है। यदि यह उद्देश्य प्रचार, ब्रांडिंग और व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा की भीड़ में खो जाता है, तो इसका नुकसान केवल विद्यार्थियों को नहीं बल्कि पूरे समाज को उठाना पड़ेगा। समय की आवश्यकता है कि शिक्षा को पुनः उसके मूल उद्देश्य से जोड़ा जाए। विद्यालयों को मजबूत बनाया जाए, प्रतियोगी परीक्षाओं और पाठ्यक्रम के बीच संतुलन स्थापित किया जाए, कोचिंग संस्थानों के लिए पारदर्शी मानक बनाए जाएँ और विद्यार्थियों को यह विश्वास दिलाया जाए कि सफलता का सबसे बड़ा आधार उनकी अपनी मेहनत, अनुशासन और सीखने की क्षमता है। तभी शिक्षा वास्तव में राष्ट्र निर्माण का माध्यम बन सकेगी, न कि केवल एक लाभकारी व्यापार।
गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)l मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में आयोजित मण्डलीय खरीफ उत्पादन गोष्ठी में पहुंचकर विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य एवं सहकारिता विभाग के स्टालों पर प्रदर्शित योजनाओं, नवीन तकनीकों और किसानों को दी जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने स्टालों पर मौजूद अधिकारियों से योजनाओं के क्रियान्वयन, किसानों को मिलने वाले लाभ तथा उत्पादन बढ़ाने के उपायों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, सिंचाई व्यवस्था और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर देते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही भी मौजूद रहे। उनके साथ जनप्रतिनिधि, मंडलायुक्त, जिलाधिकारी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। गोष्ठी में तीनों मंडलों—गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़—के कृषि अधिकारियों एवं किसानों की भागीदारी रही, जहां खरीफ फसलों की तैयारी और उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। गोष्ठी स्थल पर लगाए गए स्टालों में किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ कृषि से जुड़े नवीन उपकरणों और तकनीकों का प्रदर्शन किया गया, जिससे किसानों को आधुनिक खेती के प्रति जागरूक किया जा सके।
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन से विश्वविद्यालय से संबद्ध स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रबंधकों ने शिष्टाचार भेंट कर बी.एड. पाठ्यक्रम की स्थायी संबद्धता के संबंध में लिए गए निर्णय का स्वागत किया। प्रबंधकों ने इस निर्णय को छात्रहित एवं संस्थानों के दीर्घकालिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कुलपति के प्रति आभार व्यक्त किया। बताया गया कि विश्वविद्यालय से संबद्ध 37 स्ववित्तपोषित बी.एड. महाविद्यालय पिछले लगभग नौ वर्षों से स्थायी संबद्धता की प्रतीक्षा कर रहे थे। हाल ही में कुलपति प्रो. पूनम टंडन द्वारा इस संबंध में आवश्यक पहल करते हुए संबद्धता विभाग को दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिससे संबंधित महाविद्यालयों को बड़ी राहत मिली है। बैठक के दौरान प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल प्रदेश के राजकीय एवं अनुदानित महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को लेकर निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों को भी इसी भावना के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित करना चाहिए। महाविद्यालय प्रबंधकों ने अपने संस्थानों के संचालन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं एवं व्यावहारिक चुनौतियों से कुलपति को अवगत कराया। कुलपति ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए यथासंभव समाधान का आश्वासन दिया। प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए महाविद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं तथा नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों को अपनाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के मूल्यांकन की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में महाविद्यालयों को रोजगारपरक एवं कौशल-आधारित पाठ्यक्रमों के संचालन पर विशेष बल देना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता में वृद्धि हो और वे बदलती वैश्विक आवश्यकताओं एवं रोजगार बाजार की मांगों के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।
संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। पुलिस ने जीएसटी कर चोरी और फर्जी बिलिंग के बड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए दिल्ली से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने फर्जी फर्मों के माध्यम से करीब 18 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी कर सरकार को भारी राजस्व क्षति पहुंचाई। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह एवं क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद पीयूष राजेश्वर पाण्डेय के पर्यवेक्षण में थाना कोतवाली खलीलाबाद और थाना मेहदावल पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। पुलिस ने मुकदमा संख्या 577/2025 के तहत दिल्ली निवासी सौरभ अग्रवाल उर्फ सन्नी तथा अजीत कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अस्तित्वहीन फर्मों का पंजीकरण कराते थे। इसके बाद फर्जी बिल, ई-वे बिल और इनवॉइस तैयार कर विभिन्न कंपनियों को उपलब्ध कराए जाते थे, जिससे जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत लाभ लिया जाता था। पुलिस के मुताबिक गिरोह द्वारा करीब 18 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी आईटीसी दिखाकर टैक्स चोरी की गई। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से डेटा साझा करते थे और बीजी सॉफ्टवेयर का उपयोग कर फर्जी फर्मों के जरिए इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार करते थे। फर्जी खरीद-बिक्री दिखाकर वास्तविक कंपनियों को भी टैक्स चोरी में मदद पहुंचाई जाती थी। पुलिस के अनुसार मामले में पहले भी दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस पूरे प्रकरण में बीएनएस की विभिन्न धाराओं तथा जीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। गिरफ्तारी करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार सिंह, निरीक्षक होलेन्द्र कुमार समेत कई पुलिसकर्मी शामिल रहे।
सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। कांग्रेस पार्टी ने संगठन को मजबूत करने तथा श्रमिकों और मजदूरों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से सलेमपुर नगर निवासी कांग्रेस नेता विजय कुशवाहा को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी श्रम प्रकोष्ठ का प्रदेश संगठन मंत्री मनोनीत किया है। यह नियुक्ति श्रम प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र दत्त त्रिपाठी द्वारा जारी मनोनयन पत्र के माध्यम से की गई।
जारी पत्र में कहा गया है कि कांग्रेस संगठन के प्रति विजय कुशवाहा की निष्ठा, सेवा भावना तथा श्रमिकों एवं मजदूरों की समस्याओं के समाधान के लिए किए जा रहे उनके निरंतर प्रयासों को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी नेतृत्व ने विश्वास व्यक्त किया है कि वह अपने नए दायित्व का सफलतापूर्वक निर्वहन करते हुए प्रदेश भर के संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और मजदूरों को कांग्रेस की विचारधारा से जोड़ने का कार्य करेंगे।
मनोनयन पत्र में यह भी अपेक्षा व्यक्त की गई है कि विजय कुशवाहा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के नेतृत्व में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
प्रदेश संगठन मंत्री बनाए जाने पर विजय कुशवाहा ने कांग्रेस नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी द्वारा उन पर जताए गए विश्वास पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि श्रमिकों, मजदूरों और कमजोर वर्गों की समस्याओं को संगठन के माध्यम से मजबूती से उठाया जाएगा तथा कांग्रेस की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया जाएगा।
उनकी नियुक्ति पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए शुभकामनाएं दी हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि विजय कुशवाहा लंबे समय से सामाजिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं, जिससे संगठन को निश्चित रूप से मजबूती मिलेगी और श्रमिकों की आवाज को अधिक प्रभावी मंच प्राप्त होगा।
सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। आदर्श नगर पंचायत सिकंदरपुर द्वारा नगर क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त बनाने और प्रतिबंधित पॉलिथीन के उपयोग पर रोक लगाने के उद्देश्य से 4 जून को विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान सुबह 11 बजे से शुरू होगा, जिसके तहत अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ प्रतिबंधित पॉलिथीन के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी मनोज कुमार पाण्डेय ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी सिकंदरपुर को पत्र भेजकर आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। प्रशासन का मानना है कि अभियान के दौरान कुछ स्थानों पर विरोध या शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो सकती है, इसलिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
अधिशासी अधिकारी द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अभियान को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस बल की आवश्यकता है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है।
नगर पंचायत प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नगर को स्वच्छ, व्यवस्थित और अतिक्रमण मुक्त बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से प्रतिबंधित पॉलिथीन के उपयोग पर सख्ती बरती जाएगी। अभियान के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में पत्र की प्रतिलिपि क्षेत्राधिकारी, थानाध्यक्ष तथा चौकी प्रभारी सिकंदरपुर को भी भेजी गई है, ताकि अभियान के दौरान आवश्यक सहयोग और कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।
भाजपा संगठन के भरोसेमंद रणनीतिकार बने नागेंद्र नाथ त्रिपाठी, जिले में हर्ष
✍️ नवनीत मिश्र
भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक विस्तार और कार्यकर्ता समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए वरिष्ठ संगठनकर्ता नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क की अहम जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी नेतृत्व का यह निर्णय वर्षों से संगठन के लिए निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के साथ कार्य कर रहे एक अनुभवी कार्यकर्ता के योगदान का सम्मान माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जनपद के बेलौली गांव निवासी नागेंद्र नाथ त्रिपाठी का जीवन साधारण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय संगठन तक पहुंचने की प्रेरक यात्रा है। उनका जन्म एक कृषक परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम गिरिजा पति त्रिपाठी तथा माता का नाम गणेशा देवी है। पारिवारिक संस्कारों, सादगी और मेहनत ने उनके व्यक्तित्व को प्रारंभ से ही अनुशासित और कर्मशील बनाया।
स्कूली शिक्षा के दौरान ही उनका जुड़ाव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हो गया था। युवावस्था में ही उन्होंने संगठन और राष्ट्रसेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। संघ में प्रचारक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने वर्षों तक वैचारिक जागरण, संगठन विस्तार और कार्यकर्ता निर्माण का कार्य किया। शांत स्वभाव, सादगीपूर्ण जीवनशैली और निरंतर सक्रियता के कारण वे कार्यकर्ताओं के बीच विशेष पहचान रखते हैं।
नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को संगठन में एक ऐसे कार्यकर्ता के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने बिना किसी व्यक्तिगत प्रचार के लगातार संगठन को मजबूत करने का कार्य किया। उनकी सबसे बड़ी विशेषता कार्यकर्ताओं से आत्मीय संबंध स्थापित करना और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय बनाए रखना माना जाता है। संगठनात्मक रणनीति, चुनावी प्रबंधन और कार्यकर्ता समन्वय में उनकी भूमिका को भाजपा के भीतर हमेशा महत्वपूर्ण माना गया है।
भाजपा संगठन में उनका अनुभव लंबा और प्रभावशाली रहा है। छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से सक्रिय भूमिका निभाने के बाद उन्होंने संगठनात्मक जिम्मेदारियों को लगातार सफलतापूर्वक निभाया। वर्ष 2003 में उत्तर प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री के रूप में उन्होंने संगठन विस्तार और बूथ संरचना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके बाद बिहार भाजपा में संगठन महामंत्री तथा बाद में बिहार-झारखंड के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री के रूप में उन्होंने संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया।
राजनीतिक और संगठनात्मक क्षेत्रों में उनकी पहचान एक कुशल रणनीतिकार के रूप में भी रही है। वे सदैव कार्यकर्ता आधारित राजनीति को प्राथमिकता देते हैं और छोटे से छोटे कार्यकर्ता को भी संगठन की ताकत मानते हैं। यही कारण है कि वे लंबे समय से भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दोनों के भरोसेमंद संगठनकर्ताओं में गिने जाते रहे हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनकी नई नियुक्ति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे संगठन के लिए सकारात्मक और दूरगामी निर्णय बताया है। उनका मानना है कि नागेंद्र नाथ त्रिपाठी के अनुभव, कार्यशैली और संगठनात्मक दृष्टि का लाभ अब राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को मिलेगा। नई जिम्मेदारी के साथ उनका केंद्र दिल्ली है, जहां वे राष्ट्रीय स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय, संवाद और संगठनात्मक मजबूती का कार्य करेंगे। उनकी नियुक्ति से संतकबीरनगर सहित पूर्वांचल क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
श्री त्रिपाठी को नव दायित्व मिलने पर गृह जनपद में हर्ष व्याप्त है। इसी क्रम में भारत-तिब्बत समन्वय संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम कुमार सिंह, विधानपरिषद सदस्य संतोष कुमार सिंह, राष्ट्रीय महामन्त्री (महिला) डॉ. सोनी सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर जितेन्द्र कुमार पांडेय, एमएलसी प्रतिनिधि ई. सुधांशु सिंह, बीटीएसएस जिलाध्यक्ष उमाशंकर पांडेय, मनोनीत सभासद गौरव निषाद व अरुण गुप्ता, पुनीत मिश्र सहित अनेक जनपदवासियों ने विभिन्न माध्यमों से बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
श्री त्रिपाठी का जीवन इस बात का उदाहरण है कि संगठन में निरंतर कार्य, अनुशासन, वैचारिक प्रतिबद्धता और समर्पण व्यक्ति को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा सकता है। उनकी नई जिम्मेदारी को भाजपा संगठन में अनुभव और जमीनी नेतृत्व के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
कोपागंज/मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। आचार्य चाणक्य जयंती के अवसर पर विश्व ब्राह्मण दिवस का आयोजन कोपागंज स्थित गौरीशंकर मंदिर परिसर में श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ किया गया। बीएसएस परशुराम सेना के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और समाज के गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, भगवान परशुराम के प्रतीक फरसा पूजन तथा आचार्य चाणक्य और भगवान परशुराम के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।
इसके बाद मंदिर परिसर में 1100 हनुमान चालीसा पाठ का सामूहिक आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने एक स्वर में हनुमान चालीसा का पाठ कर समाज में सुख, शांति, समृद्धि और राष्ट्र के कल्याण की कामना की।
हनुमान चालीसा पाठ के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक उत्साह का विशेष माहौल बना रहा।
इस अवसर पर बीएसएस परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष अजीत कुमार पाण्डेय ने कहा कि आचार्य चाणक्य भारतीय संस्कृति, ज्ञान, नीति और राष्ट्र निर्माण के महान प्रेरणास्रोत रहे हैं। उनके जन्मदिवस पर विश्व ब्राह्मण दिवस मनाना समाज के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक मूल्यों और भारतीय परंपराओं को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
उन्होंने समाज के लोगों से महापुरुषों के आदर्शों को अपनाने और आने वाली पीढ़ियों तक उनकी शिक्षाओं को पहुंचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष मुनेंद्र मिश्रा, जिला मीडिया प्रभारी पवन उपाध्याय, ममता पांडे, मनीषा, रीना, मनोज पांडे, अरुण पांडेय, अरविंद पांडेय, वाचस्पति उपाध्याय, आलोक तिवारी, वायुनंदन मिश्र, दीनानाथ दुबे, धनंजय दुबे, दुर्गा पांडे, राज पांडे, विनोद पांडे, सत्य प्रकाश दुबे, राम विजय पांडे, शशांकमणि त्रिपाठी समेत सैकड़ों श्रद्धालु एवं ब्राह्मण समाज के लोग उपस्थित रहे।
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जिले के लबकनी ईश्वर ग्राम सभा में शिव प्रतिमा स्थापना के उपलक्ष्य में मंगलवार को भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।
कलश यात्रा का शुभारंभ गांव से हुआ, जिसके बाद श्रद्धालु कपरवार स्थित सरयू तट पहुंचे। वहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलशों में पवित्र जल भरा गया। जल भरने के पश्चात श्रद्धालु हाथी, घोड़ा, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक बाजों के साथ जयकारे लगाते हुए गांव लौटे।
यात्रा के दौरान “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो गया। श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बन रहा था।
कार्यक्रम में कथा वाचक आचार्य पंडित सूर्य नारायण शुक्ल ने धार्मिक कथा एवं प्रवचन के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह तथा शाश्वत सिंह सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आयोजन को सफल बनाने में सुधीर यादव, ज्ञानेंद्र यादव, सूरज यादव, सूरज गोंड, अभिषेक गोंड, सुदामा पासवान, खिलाड़ी यादव, जोगिंदर यादव और कन्हैया यादव ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
श्रद्धालुओं की भारी भागीदारी और धार्मिक उत्साह के बीच संपन्न हुई इस कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया।