Saturday, April 4, 2026
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IPL 2026: श्रेयस अय्यर पर 24 लाख का जुर्माना, स्लो ओवर रेट पर BCCI का बड़ा एक्शन

IPL 2026 में पंजाब किंग्स के कप्तान श्रेयस अय्यर पर BCCI ने बड़ा जुर्माना लगाया है। स्लो ओवर रेट के चलते अय्यर पर 24 लाख रुपये का फाइन लगाया गया है।

लगातार दूसरी बार हुई गलती

चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मैच में पंजाब किंग्स निर्धारित समय में अपने ओवर पूरे नहीं कर पाई। यह इस सीजन में टीम की दूसरी गलती थी। इससे पहले गुजरात टाइटंस के खिलाफ मैच में भी अय्यर पर 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

पूरी टीम पर भी लगा जुर्माना

आईपीएल के नियमों के अनुसार:

  • कप्तान श्रेयस अय्यर पर 24 लाख रुपये का जुर्माना
  • प्लेइंग इलेवन और इम्पैक्ट प्लेयर पर 6 लाख रुपये या मैच फीस का 25% (जो कम हो) जुर्माना

तीसरी गलती पर और सख्त सजा

अगर पंजाब किंग्स तीसरी बार स्लो ओवर रेट की गलती करती है:

  • कप्तान पर 30 लाख रुपये का जुर्माना
  • बाकी खिलाड़ियों पर 12 लाख रुपये या मैच फीस का 50% जुर्माना

हालांकि, अब कप्तान पर मैच बैन का प्रावधान हटा दिया गया है।

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मैच में पंजाब ने दर्ज की जीत

हालांकि जुर्माने के बावजूद पंजाब किंग्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स को 5 विकेट से हराया।

  • श्रेयस अय्यर ने 29 गेंदों में 50 रन बनाए
  • प्रभसिमरन सिंह ने 43 रन की पारी खेली
  • प्रियांश आर्य ने 11 गेंद में 39 रन ठोके

टीम ने 18.4 ओवर में 210 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया।

CSK की लगातार दूसरी हार

चेन्नई सुपर किंग्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 209 रन बनाए थे, लेकिन गेंदबाज इसे बचा नहीं सके। यह CSK की लगातार दूसरी हार है।

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Ballia News: तेज हवा और गेहूं कटाई के बीच दिन में बिजली कटौती, सुबह 10 से शाम 5 बजे तक सप्लाई बाधित

सिकंदरपुर/बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। क्षेत्र में गेहूं की कटाई और तेज हवाओं को देखते हुए विद्युत विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से शाम 05:00 बजे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।

फसल सुरक्षा के लिए लिया गया निर्णय

विद्युत विभाग के अनुसार यह निर्णय अस्थायी रूप से लागू किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों की फसल को आगजनी जैसी घटनाओं से बचाना है। कटाई के दौरान मशीनों के उपयोग और तेज हवा के कारण बिजली के तारों से चिंगारी निकलने का खतरा बना रहता है।

एसडीओ ने की सहयोग की अपील

एसडीओ अजय कुमार सरोज ने बताया कि यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे विभाग का सहयोग करें और असुविधा के लिए क्षमा करें।

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स्थिति सामान्य होने पर बहाल होगी सप्लाई

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे ही गेहूं की कटाई पूरी हो जाएगी और हालात सामान्य होंगे, बिजली आपूर्ति को फिर से पूर्ववत कर दिया जाएगा।

समस्या होने पर करें संपर्क

विद्युत विभाग ने उपभोक्ताओं को किसी भी जानकारी या समस्या के लिए मोबाइल नंबर 8009285617 पर संपर्क करने की सलाह दी है।

ग्रामीणों ने फैसले को सराहा

इस निर्णय को ग्रामीणों द्वारा सकारात्मक रूप से लिया जा रहा है, क्योंकि इससे उनकी फसल और मेहनत की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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Nashik Accident: दिंडोरी में कुएं में गिरी कार, दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की मौत

नासिक (राष्ट्र की परम्परा)। महाराष्ट्र के नासिक जिले के दिंडोरी क्षेत्र से एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां पानी से भरे कुएं में कार गिरने से 9 लोगों की मौत हो गई।

परिवार के साथ लौटते समय हुआ हादसा

बताया जा रहा है कि सभी लोग एक निजी क्लास के स्नेह सम्मेलन कार्यक्रम से घर लौट रहे थे। इसी दौरान चालक का वाहन से नियंत्रण हट गया और कार सीधे कुएं में जा गिरी।

मृतकों में महिलाएं और बच्चे शामिल

इस हादसे में सुनील दरगुडे के परिवार सहित कुल 9 लोगों की जान चली गई। मृतकों में तीन बच्चे और दो महिलाएं भी शामिल हैं, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर है।

क्रेन की मदद से निकाली गई कार

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया गया। देर रात क्रेन की मदद से कार को कुएं से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक सभी की मौत हो चुकी थी।

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अर्टिगा कार में सवार थे सभी लोग

दुर्घटनाग्रस्त वाहन मारुति सुजुकी अर्टिगा (MH15-JS-1053) बताई जा रही है। हादसा दिंडोरी के शिवाजी नगर स्थित एक कुएं में हुआ।

पुलिस जांच में जुटी

घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

राहत-बचाव में आई कठिनाइयां

रात के अंधेरे और कुएं में पानी भरे होने के कारण राहत-बचाव कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। एनडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर बचाव अभियान चलाया।

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Green Sanvi LPG Tanker: होर्मुज पार कर भारत की ओर बढ़ा टैंकर, जाने कब तक मुंबई पहुंचने की उम्मीद

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। एलपीजी आपूर्ति को लेकर भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय झंडे वाला एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन सान्वी’ (Green Sanvi) सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ रहा है।

6 अप्रैल तक मुंबई पहुंचने की संभावना

जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह टैंकर 6 अप्रैल तक मुंबई पहुंच सकता है। इस जहाज में लगभग 44,000 मीट्रिक टन एलपीजी लदी हुई है, जो देश की खपत के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मार्च में सातवां भारतीय जहाज

ग्रीन सान्वी, मार्च महीने में होर्मुज पार करने वाला सातवां भारतीय जहाज बन गया है। हालांकि, अभी भी कई भारतीय तेल और गैस टैंकर होर्मुज क्षेत्र में फंसे हुए हैं और ईरानी क्लीयरेंस का इंतजार कर रहे हैं।

सप्लाई पर युद्ध का असर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण एलपीजी सप्लाई प्रभावित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टैंकर के पहुंचने से देश में गैस आपूर्ति की स्थिति में कुछ सुधार हो सकता है।

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जल्द आ सकते हैं अन्य टैंकर

जानकारी के मुताबिक, जल्द ही ‘ग्रीन आशा’ और ‘जग विक्रम’ नाम के दो अन्य एलपीजी टैंकर भी होर्मुज पार कर भारत पहुंच सकते हैं।

भारत को मिली विशेष अनुमति

ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के बावजूद भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे मित्र देशों के जहाजों को विशेष अनुमति दी गई है। भारतीय जहाजों को इंडियन नेवी की निगरानी में सुरक्षित रास्ता दिया जा रहा है।

रणनीतिक रूप से अहम है होर्मुज स्ट्रेट

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

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वेद माता गायत्री: सामाजिक परिवर्तन और आध्यात्मिक चेतना का आधार

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आधुनिक युग में जहां भौतिक प्रगति तेजी से हो रही है, वहीं मानसिक तनाव, नैतिक गिरावट और सामाजिक असंतुलन जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। ऐसे समय में वेद माता गायत्री केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सकारात्मक परिवर्तन का एक मजबूत आधार बनकर उभरती है।

गायत्री मंत्र: ज्ञान और प्रकाश का स्रोत

भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में गायत्री मंत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इसे “वेद माता” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें ज्ञान, विवेक और प्रकाश का सार समाहित है। वर्तमान समय में जब व्यक्ति भ्रम और अस्थिरता का सामना कर रहा है, तब गायत्री साधना मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति प्रदान करती है।

सकारात्मक सोच और व्यवहार में बदलाव

धर्माचार्यों के अनुसार, नियमित रूप से गायत्री मंत्र का जप व्यक्ति के भीतर सकारात्मक सोच विकसित करता है। इससे उसके व्यवहार और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होता है। यही सकारात्मक ऊर्जा परिवार और समाज तक पहुंचकर सामूहिक वातावरण को बेहतर बनाती है।

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सामाजिक सौहार्द में महत्वपूर्ण भूमिका

आज के समय में बढ़ती असहिष्णुता और तनाव के बीच गायत्री मंत्र सामाजिक समरसता और सौहार्द को बढ़ावा देने में सहायक हो सकता है। यह लोगों को एकजुट करने और आपसी समझ बढ़ाने का माध्यम बन सकता है।

युवाओं के लिए मार्गदर्शक

युवा पीढ़ी, जो अपने भविष्य और पहचान को लेकर कई चुनौतियों का सामना कर रही है, उनके लिए गायत्री मंत्र एक मार्गदर्शक के रूप में कार्य कर सकता है। यह आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और संस्कारों को मजबूत करता है।

साधना में समझ और नियमितता जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मंत्र का उच्चारण पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके अर्थ को समझकर श्रद्धा और नियमितता के साथ साधना करना आवश्यक है। जब व्यक्ति अपने भीतर की चेतना से जुड़ता है, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।

परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से

वर्तमान समय में बढ़ती नकारात्मकता के बीच गायत्री मंत्र एक सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है। यह व्यक्तिगत उन्नति के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और नैतिक पुनर्निर्माण का आधार बन सकता है।
अंततः, वेद माता गायत्री का संदेश स्पष्ट है—परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति के भीतर से होती है, और यही बदलाव समाज में व्यापक परिवर्तन ला सकता है।

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CSK vs PBKS: बिना धोनी CSK की लगातार दूसरी हार, 209 रन भी नहीं बचा पाए गेंदबाज

चेन्नई (राष्ट्र की परम्परा)। चेपॉक स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में पंजाब किंग्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को 5 विकेट से हरा दिया। CSK द्वारा दिए गए 209 रनों के बड़े लक्ष्य को पंजाब ने 19वें ओवर में हासिल कर लिया।

CSK की दमदार बल्लेबाजी, लेकिन गेंदबाजी रही कमजोर

टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए चेन्नई सुपर किंग्स ने 209 रन बनाए।

  • आयुष म्हात्रे ने 73 रनों की शानदार पारी खेली
  • शिवम दुबे 45 रन बनाकर नाबाद रहे
  • सरफराज खान ने 32 रनों की तेज पारी खेली

इतने बड़े स्कोर के बावजूद CSK के गेंदबाज लक्ष्य को बचाने में नाकाम रहे।

पंजाब की तूफानी शुरुआत

पंजाब किंग्स की शुरुआत बेहद आक्रामक रही।

  • प्रियांश आर्य ने 11 गेंद में 39 रन ठोके
  • प्रभसिमरन सिंह ने 43 रन बनाए

दोनों ने मिलकर सिर्फ 4.2 ओवर में 61 रन जोड़ दिए।

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श्रेयस अय्यर बने जीत के हीरो

मिडिल ऑर्डर में कप्तान श्रेयस अय्यर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए मैच का रुख बदल दिया।
उन्होंने 29 गेंदों में 50 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई, जिसमें 4 चौके और 3 छक्के शामिल रहे।

लगातार दूसरी जीत पंजाब की

पंजाब किंग्स ने इस जीत के साथ लगातार दूसरी जीत दर्ज की और शानदार फॉर्म में नजर आ रही है।

धोनी की गैरमौजूदगी में CSK कमजोर

एमएस धोनी चोट के कारण लगातार दूसरे मैच में नहीं खेले। उनके बिना CSK की यह लगातार दूसरी हार है।
इससे पहले राजस्थान रॉयल्स ने 8 विकेट से हराया था और अब पंजाब ने 5 विकेट से मात दी।

पॉइंट्स टेबल में CSK सबसे नीचे

लगातार हार के चलते चेन्नई सुपर किंग्स पॉइंट्स टेबल में निचले पायदान पर पहुंच गई है, जिससे टीम की स्थिति चिंताजनक हो गई है।

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शोध पात्रता परीक्षा (रेट 2025) का परिणाम जारी

उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का साक्षात्कार अप्रैल के तीसरे सप्ताह से

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की शोध पात्रता परीक्षा (रेट 2025) की लिखित परीक्षा के परिणाम आज घोषित कर दिए गए। लगभग 57 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने पूर्वघोषित अर्हता नियमों के अनुसार साक्षात्कार प्रक्रिया के लिए अर्हता हासिल की है।

लिखित परीक्षा के परिणाम विश्वविद्यालय के प्रवेश पोर्टल dduguadmission.in
पर देखे जा सकते है। अभ्यर्थी अपने  रोल नंबर और जन्मतिथि की मदद से अपना रिजल्ट देख सकते हैं। प्रवेश पोर्टल पर सभी परीक्षाओं की उत्तर कुंजी भी जारी कर दी गई है।

यह जानकारी देते हुए प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो हर्ष कुमार सिन्हा ने बताया कि विगत 27 और 28 मार्च को संपन्न इस परीक्षा में 46 विषयों के कुल 2343 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। इनमें से 1339 अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए अर्ह घोषित हुए हैं।

पूर्णकालिक शोध कार्यक्रम के अभ्यर्थियों के साक्षात्कार अप्रैल के तीसरे सप्ताह से शुरू होंगे ।अंशकालिक अभ्यर्थियों एवं प्रवेश परीक्षा से छूट प्राप्त करने वाले शिक्षक अभ्यर्थियों की प्रवेश प्रक्रिया भी उसी समय शुरू होगी। इस संबंध में शोध एवं विकास प्रकोष्ठ द्वारा इन सभी तीन श्रेणियों के अभ्यर्थियों के लिए साक्षात्कार कार्यक्रम एवं आवश्यक निर्देश शीघ्र ही जारी किए जाएंगे।

“सत्र 2025 की रेट परीक्षा में 57 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। गत वर्ष की तुलना में इस बार सफल अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ी है। प्रयास है कि इसी माह अंतिम परिणाम घोषित कर दिए जाएं।”

प्रो पूनम टंडन
कुलपति

पुलिस ने स्मैक के साथ दो को किया गिरफ्तार

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के थाना कोतवाली खलीलाबाद पुलिस ने मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सतीश कुमार मीना के निर्देशन में की गई।
पुलिस टीम ने अलग-अलग स्थानों पर दबिश देकर समसुद्दीन पुत्र स्वर्गीय अनवर जायसवाल निवासी बरदहिया बाजार तथा रफीक चौहान पुत्र हीरा लाल चौहान निवासी घघिया को गिरफ्तार किया। तलाशी के दौरान दोनों के पास से कुल लगभग 1800 मिलीग्राम अवैध स्मैक बरामद हुई।
गिरफ्तारी व बरामदगी के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। कार्रवाई में उ0नि0 अनिल कुमार, उ0नि0 सुभाष यादव, उ0नि0 लाल बिहारी निषाद, हे0का0 छोटेलाल सिंह, का0 सर्वेश कुमार यादव एवं का0 मीठू अली शामिल रहे।

भीषण आग से गेहूं की तैयार फसल जली, किसानों को भारी नुकसान

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के विकासखंड सांथा के सुकरौली और खजुरी गांवों में दोपहर के समय अचानक लगी आग ने किसानों की तैयार गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैलती चली गई और देखते ही देखते कई खेत इसकी चपेट में आ गए।
स्थानीय लोगों के अनुसार आग खेतों के बीच से शुरू हुई और हवा के रुख के साथ आसपास के इलाकों में फैल गई। आग की लपटें और धुएं का गुबार दूर से ही नजर आ रहा था। सूचना मिलने पर ग्रामीण अपने स्तर पर पंपिंग सेट और अन्य साधनों से आग बुझाने में जुटे, लेकिन आग की तीव्रता अधिक होने के कारण उसे नियंत्रित करने में समय लगा।
घटना के बाद प्रभावित किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि उनकी कटाई के लिए तैयार फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कराकर शीघ्र मुआवजा दिलाने की मांग की है।
साथ ही लोगों से अपील की गई है कि गर्मी के मौसम में खेतों के आसपास आग से जुड़ी लापरवाही न करें। बीड़ी-सिगरेट का उपयोग खेतों में न करें और बिजली से संबंधित किसी भी खराबी की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

कूड़ा जलाने से उठे धुएं से बच्चों की तबीयत बिगड़ी, स्थिति नियंत्रण में

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के तमकुहीराज क्षेत्र में ग्रीनलैंड पब्लिक स्कूल के पास सूखा कूड़ा जलाने से उठे धुएं के कारण कुछ बच्चों को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत हुई। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया।
प्रभावित बच्चों को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया, जिसके बाद सभी बच्चों की हालत सामान्य बताई जा रही है। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), विद्यालय एवं संबंधित अस्पताल का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि मौके पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शांति व्यवस्था बनी हुई है। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं।

विदाई समारोह में छात्रों को दी गई उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l नगरपालिका स्थित बाबा राघव दास भगवानदास महिला महाविद्यालय आश्रम में छात्रों के विदाई समारोह का आयोजन बड़े ही उत्साह और गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह मुख्य रूप से विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में अर्जुन सिंह ने छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों को समाज और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सिराज अंसारी ने भी छात्रों को संबोधित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर डॉ. प्रतिभा पाण्डेय, सत्यप्रकाश तिवारी, रजनीश दीक्षित, सोली शुक्ला और विद्यार्थी त्रिपाठी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कमलेश सिंह ने की। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुति दी गई, जिसने माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया।
अंत में सभी छात्रों को भावभीनी विदाई दी गई और उनके सफल भविष्य की कामना की गई।

“नैतिकता से कानून तक: माता-पिता की सेवा न करने पर सैलरी कटौती का नया सामाजिक संदेश”

पिता की देखभाल न करने पर वेतन से 15 प्रतिशत त्वरित कटौती: सामाजिक न्याय,नैतिक जिम्मेदारी और कानून के बीच संतुलन काबिल-ए-तारीफ़ 

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर आज का समाज अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।तकनीकी उन्नति, वैश्वीकरण और आर्थिक प्रतिस्पर्धा ने जहां जीवन को सुविधाजनक बनाया है,वहीं पारिवारिक संरचनाओं और संबंधों के स्वरूप को भी गहराई से प्रभावित किया है।कभी संयुक्त परिवारों में पनपने वाली भावनात्मक सुरक्षा और सामूहिक जिम्मेदारी अब तेजी से एकल परिवारों में सिमटती जा रही है। इस परिवर्तन के बीच सबसे अधिक प्रभावित वर्ग है,बुजुर्ग माता-पिता। जीवन के उस चरण में,जब उन्हें सबसे अधिक सहारे,सम्मान और देखभाल की आवश्यकता होती है, वे अक्सर उपेक्षा,अकेलेपन और आर्थिक असुरक्षा का सामना करते हैं।ऐसे समय में तेलंगाना राज्य द्वारा पारित कर्मचारी जवाबदेही एवं माता- पिता सहायता निगरानी विधेयक  2026 न केवल एक कानूनी कदम है, बल्कि यह सामाजिक चेतना को झकझोरने वाला ऐतिहासिक हस्तक्षेप भी है।इस विधेयक का मूल संदेश स्पष्ट और कठोर है यदि कोई संतान अपने माता-पिता की देखभाल से मुंह मोड़ती है, तो राज्य उसके निजी दायित्व को लागू करने के लिए सटीक रूप से हस्तक्षेप करेगा।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं ने गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यह विचार अपने आप में क्रांतिकारी है,क्योंकिपारिवारिक संबंधों को अब तक निजी और नैतिक क्षेत्र माना जाता रहा है, जहां कानून की भूमिका सीमित थी। परंतु जब नैतिकता विफल हो जाती है, तब कानून का हस्तक्षेप अनिवार्य हो जाता है। यह विधेयक इसी सिद्धांत पर आधारित है कि बुजुर्गों की उपेक्षा केवल व्यक्तिगत असफलता नहीं, बल्कि एक सामाजिक अपराध है, जिसका समाधान केवल सामाजिक उपदेशों से नहीं, बल्कि कठोर कानूनी प्रावधानों से ही संभव है। एक अधिवक्ता व लेखक के रूप में मैं यह सुझाव देना चाहूंगा के कि इस विधेयक को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, वेतन कटौती की सीमा को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत और अधिकतम राशि को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया जा सकता है,ताकि यह अधिक प्रभावी और निवारक बन सके। 

अब क्या ऐसा कानून सभी राज्यों में लागू किया जाना चाहिए? इसको समझने की करें तो  इस प्रश्न का उत्तर सीधा सख़्ती से हां में है, क्योंकि इसके कई सामाजिक, आर्थिक और कानूनी पहलू हैं। एक ओर यह कानून वृद्ध माता-पिता के अधिकारों की रक्षा करने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। यह उन संतान को जिम्मेदारी का एहसास कराएगा जो आर्थिक रूप से सक्षम होते हुए भी अपने माता-पिता की उपेक्षा करते हैं। इससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाएगा कि माता-पिता की सेवा केवल एक विकल्प नहीं बल्कि एक अनिवार्य कर्तव्य है इसके अलावा, इस कानून को पूरे देश में लागू करने के लिए केंद्र सरकार को पहल करनी चाहिए। यदि सभी राज्य इस मॉडल को अपनाते हैं, तो यह बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय ढांचा तैयार कर सकता है।हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी तक भारत के किसी भी राज्य या केंद्र सरकार द्वारा ऐसा कोई व्यापक कानून लागू नहीं किया गया है,जिसमें सीधे वेतन से 15प्रतिशत कटौती का प्रावधान अनिवार्य रूप से लागू हो। कुछ मामलों में न्यायालयों ने व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर वेतन से भरण- पोषण राशि काटने के आदेश दिए हैं, लेकिन यह एक सामान्य कानून नहीं बल्कि केस-टू-केस आधार पर लिया गया निर्णय होता है। 

अगर हम बुजुर्गों के व्यथा को समझने की करें तो बुढ़ापा जीवन का एकअपरिहार्य सत्य है। यह वह अवस्था है, जहां शारीरिक और मानसिक क्षमताएं धीरे-धीरे क्षीण होने लगती हैं। बीमारियां बढ़ती हैं,आय के स्रोत समाप्त हो जाते हैं और व्यक्ति पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हो जाता है।भारतीय संदर्भ में यह निर्भरता मुख्यतः संतान पर होती है,क्योंकि अधिकांश लोगअपनी जीवन भर की कमाई अपने बच्चों की शिक्षा, विवाह और भविष्य निर्माण में खर्च कर देते हैं। सरकारी कर्मचारियों को पेंशन का सहारा मिल सकता है, लेकिन निजी क्षेत्र के बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे में यदि संतान भी उनका साथ छोड़ दे, तो यह स्थिति उनके लिए अत्यंत कष्टदायक और अमानवीय बन जाती है। 

हम  तेलंगाना विधानसभा द्वारा 29 मार्च 2026 क़ो पारित विधेयक को समझने की करें तो यह विधेयक इसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है। इसके तहत यदि कोई कर्मचारी चाहे वह सरकारी हो या निजी अपने माता-पिता की देखभाल में लापरवाही करता है, तो उसके वेतन से 15 प्रतिशत या अधिकतम 10,000 रुपये प्रति माह की कटौती की जाएगी और यह राशि सीधे माता-पिता के बैंक खाते में जमा कराई जाएगी। यह प्रावधान न केवल आर्थिक सहायता सुनिश्चित करता है,बल्कि यह एक सशक्त संदेश भी देता है कि संतान अपने दायित्व से बच नहीं सकती।यह कानून जनप्रतिनिधियों जैसे विधायक, सरपंच पर भी लागू होता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जवाबदेही सभी के लिए समान है।इस विधेयक की एक विशेषता इसकी स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया है। यदि माता-पिता को लगता है कि उनके साथ उपेक्षा हो रही है, तो वे जिला कलेक्टर के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। कलेक्टर को 60 दिनों के भीतर मामले की जांच कर निर्णय देना अनिवार्य है। यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो वेतन कटौती का आदेश जारी किया जाता है। यदि आवेदन खारिज हो जाता है, तो वरिष्ठ नागरिक आयोग के पास अपील का प्रावधान है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करती है,जो अक्सर अन्य कानूनों में देखने को नहीं मिलती। 

अगर हम विधेयक में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान को समझने की करें तो वह है, वरिष्ठ नागरिक आयोग की स्थापना। यह आयोग एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश की अध्यक्षता में कार्य करेगा और अपीलीय निकाय के रूप में कार्य करेगा। इसके पास गवाहों को बुलाने, जांच करने और निर्णय देने कीशक्तियां होंगी। यह व्यवस्था न केवल शिकायतों के त्वरित निपटान को सुनिश्चित करती है, बल्कि यह बुजुर्गों को न्याय प्राप्त करने का एक सशक्त मंच भी प्रदान करती है। यह कानून केवल दंडात्मक नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सामाजिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करना भी है। भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव” का आदर्श हमारे संस्कारों में गहराई से निहित है। श्रवण कुमार की कथा इसका प्रतीक है, जहां पुत्र अपने माता-पिता की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर देता है। परंतु आधुनिक जीवन की आपाधापी में ये मूल्य कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं। ऐसे में यह कानून एक चेतावनी भी है और एक मार्गदर्शन भी कि यदि समाज अपने मूल्यों को भूल जाएगा, तो राज्य को हस्तक्षेप करना पड़ेगा। 

  भारत में पहले से ही माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण- पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 लागू है इसको समझने की करें तो। इसकी सबसे बड़ी कमजोरी इसका धीमा क्रियान्वयन है।कई बार शिकायतों के निपटान में इतनी देरी हो जाती है कि बुजुर्गों को न्याय मिलने से पहले ही उनकी स्थिति और खराब हो जाती है। तेलंगाना का यह नया विधेयक इस कमी को दूर करता है, क्योंकि इसमें समयबद्ध प्रक्रिया और सख्त प्रावधान शामिल हैं। यह न केवल पुराने कानून को मजबूत करता है, बल्कि उससे आगे जाकर एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत करता है।यह भी महत्वपूर्ण है कि इस कानून को केवल दंडात्मक उपाय के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे एक सामाजिक सुधार के उपकरण के रूप में समझा जाए। सरकार को इसके साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाने चाहिए,ताकि लोग अपनेकर्तव्यों को समझें और स्वेच्छा से उनका पालन करें। शिक्षा प्रणाली में भी ऐसे मूल्यों को शामिल किया जाना चाहिए, जो बच्चों को अपने माता-पिता के प्रति जिम्मेदार बनाएं। 

साथियों बात अगर हम इस संपूर्ण प्रावधानों बातों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो कई देशों में बुजुर्गों की देखभाल के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। चीन में फिलियल रिस्पॉन्सिबिलिटी लॉ है, जो बच्चों को अपने माता-पिता से मिलने और उनकी देखभाल करने के लिए बाध्य करता है। सिंगापुर में मेंटेनेंस ऑफ पेरेंट्स एक्ट है, जिसके तहत माता- पिता अपने बच्चों से आर्थिक सहायता की मांग कर सकते हैं। अमेरिका और यूरोप के कई देशों में भी ऐसे कानून हैं, हालांकि उनका स्वरूप और कठोरता अलग-अलग है। इस दृष्टि से तेलंगाना का यह विधेयक वैश्विक प्रवृत्ति के अनुरूप है, लेकिन इसकी कठोरता और स्पष्टता इसे विशेष बनाती है। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि यह कहना गलत नहीं होगा कि तेलंगाना का यह विधेयक एक नए सामाजिक अनुबंध की शुरुआत है, जहां राज्य, समाज और व्यक्ति के बीच जिम्मेदारियों का पुनर्संतुलन किया जा रहा है। यह कानून हमें यह याद दिलाता है किविकास केवल आर्थिक प्रगति का नाम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों के संरक्षण से भी जुड़ा है। यदि हम अपने बुजुर्गों की उपेक्षा करते हैं, तो हम न केवल अपने अतीत से मुंह मोड़ते हैं, बल्कि अपने भविष्य को भी असुरक्षित बनाते हैं। इसलिए, समय की मांग है कि हम इस पहल को गंभीरता से लें और इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दें। प्रत्येक राज्य, प्रत्येक नागरिक और प्रत्येक परिवार को यह समझना होगा कि बुजुर्गों की देखभाल केवल एक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी है। यदि समाज इस जिम्मेदारी को निभाने में विफल रहता है, तो कानून का डंडा चलना ही चाहिए क्योंकि अंततः एक सभ्य समाज की पहचान इसी से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर और निर्भर सदस्यों के साथ कैसा व्यवहार करता है।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

एसपी ने थानों से लेकर सोनौली बॉर्डर तक किया सख्त निरीक्षण

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं चुस्त-दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने शुक्रवार को थाना कोल्हुई, सोनौली एवं नौतनवां का आकस्मिक निरीक्षण कर पुलिस महकमे में हलचल मचा दी। अचानक हुए इस निरीक्षण से थानों पर तैनात पुलिस कर्मियों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
निरीक्षण के दौरान एसपी ने थाना कार्यालय, सीसीटीएनएस कक्ष, अभिलेखों का रख- रखाव, अपराध पंजिका, मालखाना, हवालात, महिला हेल्प डेस्क और साफ-सफाई व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने अभिलेखों को सुव्यवस्थित और अद्यतन रखने के निर्देश देते हुए लंबित मामलों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वांछित अपराधियों और वारंटियों की गिरफ्तारी में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही उन्होंने आम जनता की शिकायतों पर त्वरित, पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बीट पुलिसिंग को और मजबूत बनाने, क्षेत्र में लगातार गश्त बढ़ाने और अपराध नियंत्रण के लिए सक्रिय सूचना तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया गया कि वे आमजन के साथ संवेदनशील, विनम्र और भरोसेमंद व्यवहार करें, ताकि पुलिस के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।
निरीक्षण के क्रम में एसपी ने भारत-नेपाल अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित सोनौली बॉर्डर का सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण भी किया। इस दौरान सीमा सुरक्षा व्यवस्था, आवागमन नियंत्रण, इमीग्रेशन चेकिंग और संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की गहन तलाशी का जायजा लिया गया।
एसपी ने निर्देश दिए कि सीमा की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और एसएसबी के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखा जाए और तस्करी, मानव तस्करी सहित हर तरह की अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाय।
उन्होंने दो टूक कहा कि जनपद में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर दक्षता के साथ कार्य करने की हिदायत दी।उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि महराजगंज की जनता को सुरक्षित, भयमुक्त और न्यायपूर्ण वातावरण देने के लिए पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।

महिला नेतृत्व सशक्त बनाने को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। नगर विकास विभाग, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में जनाग्रह के सहयोग से नगरीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान, लखनऊ द्वारा महिला अध्यक्षों हेतु “नगरीय जनप्रतिनिधि क्षमता संवर्धन कार्यशाला” का 1 एवं 2 अप्रैल 2026 को आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य नगरीय निकायों की महिला जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व कौशल, प्रशासनिक दक्षता, वित्तीय प्रबंधन एवं सुशासन से संबंधित ज्ञान को सुदृढ़ करना रहा।

दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न मंडलों से आई महिला अध्यक्षों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए नगरीय प्रशासन की जटिलताओं, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, नागरिक सुविधाओं के बेहतर प्रबंधन एवं पारदर्शिता जैसे विषयों पर जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा व्यवहारिक एवं सैद्धांतिक दोनों प्रकार की जानकारी दी गई।

अपर निदेशक रितु सुहास ने अपने संबोधन में महिला जनप्रतिनिधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें जनसेवा के प्रति समर्पण, संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व नगरों के समग्र विकास में नई दिशा देने की क्षमता रखता है।

इसके पश्चात सहायक निदेशक सविता शुक्ला ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। कार्यशाला में श्वेता जायसवाल (अध्यक्ष, बरहज), अलका सिंह (अध्यक्ष, देवरिया), डॉ पुष्पलता (अध्यक्ष, महाराजगंज), शाहिना शेख (अध्यक्ष, मदनपुर) सहित विभिन्न नगर निकायों की महिला अध्यक्षों ने सहभागिता की।

समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने इसे उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उन्हें अपने नगर क्षेत्रों में अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं जन-केंद्रित कार्य करने के लिए सक्षम बनाते हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर मंजरी उपाध्याय, डॉ सौरव गुप्ता, प्रशंसा सहित सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

पुलिस कर्मियों की बैठक में निर्देशों के पालन पर जोर

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के थाना कोपागंज परिसर में प्रभारी निरीक्षक द्वारा थाना स्थानीय पर तैनात सभी अधिकारी एवं कर्मचारीगण की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक द्वारा पूर्व में आयोजित बैठक में दिए गए आदेशों एवं निर्देशों की विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रभारी निरीक्षक रविंद्रनाथ राय ने सभी पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया कि उच्चाधिकारियों द्वारा जारी किए गए आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी जनता के साथ बेहतर संवाद स्थापित करें, उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनें और उनका त्वरित निस्तारण करें। साथ ही अपने कर्तव्यों का ईमानदारी, निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करें।

बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने-अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी गई।