Saturday, August 1, 2026
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गैस-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सपा का विरोध, जनता की समस्याओं को लेकर उठी आवाज

भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।

80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

हाथ पर जली आग, पानी में उठीं लपटें… विज्ञान के रोमांचक प्रयोगों ने छात्रों को किया मंत्रमुग्ध

दो दिवसीय ‘द साइंस शो’ का समापन, 700 से अधिक विद्यार्थियों ने देखा विज्ञान का अद्भुत प्रदर्शन

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जागृति उद्यम केंद्र-पूर्वांचल के बरपार स्थित बरगद सभागार में आयोजित दो दिवसीय ‘द साइंस शो’ का शनिवार को उत्साहपूर्ण माहौल में समापन हुआ। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विद्यालयों के 700 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लेकर विज्ञान के रोमांचक प्रयोगों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। आईआईटी-बीएचयू के शोधार्थी एवं युवा नव प्रवर्तक मनोहर कुमार ने आकर्षक प्रयोगों के माध्यम से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने का संदेश दिया।कार्यक्रम के दौरान मनोहर कुमार ने पानी में आग जलाने, विभिन्न गैसों की सहायता से कृत्रिम बादल बनाने, आग को संगीत की धुन पर नाचते हुए प्रदर्शित करने तथा रंग बदलने वाले रासायनिक प्रयोगों का प्रदर्शन किया। हीलियम और सल्फर हेक्साफ्लोराइड गैस के प्रयोग से आवाज में होने वाले बदलाव को देखकर छात्र-छात्राएं आश्चर्यचकित रह गए। प्रत्येक प्रयोग के बाद उन्होंने उसके पीछे छिपे वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल भाषा में समझाया।उन्होंने जलते हुए कपूर को मुंह में रखने और हाथ पर आग जलाने जैसे प्रयोगों का प्रदर्शन करते हुए बताया कि जिन्हें लोग अक्सर चमत्कार या जादू मान लेते हैं, उनके पीछे भी विज्ञान के स्पष्ट सिद्धांत कार्य करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने, हर बात पर सवाल करने और प्रयोगों के माध्यम से सीखने की प्रेरणा दी।मनोहर कुमार ने बताया कि वह पिछले दस वर्षों में देशभर में 200 से अधिक साइंस शो कर चुके हैं। ‘यूरिन से मोबाइल चार्जिंग’ और ‘मिस्ड कॉल से सिंचाई’ जैसे नवाचारों के लिए उन्हें पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में वह आईआईटी-बीएचयू में शोध कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के विकास की आधारशिला विज्ञान और तकनीक है तथा नवाचार को बढ़ावा देकर ही देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।कार्यक्रम में सनबीम स्कूल, गुरुकुल मिशन स्कूल और स्कॉलर्स स्कूल के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर शिक्षक आदित्य पांडेय, अनामिका पांडेय, ममता ठाकुर, कृष्णकुमार तिवारी, पूनम सिंह, सपना, रेनू त्रिपाठी तथा जागृति उद्यम केंद्र-पूर्वांचल के अनुराग तिवारी, अभिनव त्रिपाठी और अंबिकेश चौबे सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कपिलवस्तु को मिली नई पहचान, लाइट एंड साउंड शो का हुआ शुभारंभ

सिद्धार्थनगर (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को सिद्धार्थनगर जनपद के कपिलवस्तु स्तूप पहुंचकर नव विकसित लाइट एंड साउंड शो तथा विपश्यना पार्क का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने पर्यटन सुविधा केंद्र पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई एवं बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार भी कराया।कार्यक्रम में सांसद जगदंबिका पाल, विधायक श्यामधनी राही, भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह तथा मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। केंद्रीय मंत्री ने कपिलवस्तु स्तूप पर गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी ली, विधिवत पूजा-अर्चना कर शिलापट्ट का अनावरण किया तथा बौद्ध भिक्षुओं से संवाद करने के बाद स्तूप की परिक्रमा भी की।इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने विपश्यना पार्क का उद्घाटन किया और पर्यटन सुविधा केंद्र पर विभिन्न विभागों की विकास योजनाओं एवं उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी का निरीक्षण किया। कार्यक्रम के दौरान आंगनबाड़ी विभाग की ओर से गोदभराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।मुख्य विकास अधिकारी बलराम सिंह ने अतिथियों का बुके देकर स्वागत किया। पूर्व माध्यमिक विद्यालय बर्डपुर की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जबकि शिवपति इंटर कॉलेज की छात्राओं ने कपिलवस्तु गीत की मनमोहक प्रस्तुति दी। इस अवसर पर काला नमक चावल तथा भगवान गौतम बुद्ध पर आधारित लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया।अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि वर्ष 2017 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जनकल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता देते हुए व्यापक विकास कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से भी विकास परियोजनाओं को गति मिली है। उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं से करोड़ों लोगों को सीधा लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में अग्रणी राज्यों में शामिल है।सांसद जगदंबिका पाल ने केंद्रीय मंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में देश में ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि कपिलवस्तु भगवान गौतम बुद्ध की तपोभूमि है और यहां पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने जनपद की विभिन्न विकास परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने का भी आग्रह किया।विधायक श्यामधनी राही ने कहा कि कपिलवस्तु स्तूप पर लाइट एंड साउंड शो तथा विपश्यना पार्क का निर्माण जनपद के पर्यटन विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।भाजपा जिलाध्यक्ष दीपक मौर्य ने कहा कि यह परियोजना सिद्धार्थनगर के विकास में मील का पत्थर साबित होगी तथा बौद्ध पर्यटन को नई गति प्रदान करेगी।कार्यक्रम के अंत में पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ए.के. सिंह ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर नगर पालिका परिषद सिद्धार्थनगर के अध्यक्ष गोविंद माधव, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष विक्रम सिंह, सांसद प्रतिनिधि एस.पी. अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष साधना चौधरी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

शिक्षक स्थानांतरण में आ रही विसंगतियों के समाधान की मांग

परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ ने शिक्षा विभाग को सौंपा ज्ञापन

पटना (राष्ट्र की परम्परा)। बिहार में चल रही शिक्षक समानुपातीकरण एवं स्थानांतरण प्रक्रिया में सामने आ रही विसंगतियों के समाधान की मांग को लेकर परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ ने शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपा। महासंघ ने स्थानांतरण प्रक्रिया में प्रभावित शिक्षकों की समस्याओं का मानवीय आधार पर निराकरण करने की अपील की है।महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष नवनीत कुमार एवं प्रदेश संगठन महामंत्री शिशिर कुमार पांडेय ने कहा कि वर्तमान स्थानांतरण प्रक्रिया में कई शिक्षक लंबे समय से अपने गृह जिले से दूरस्थ विद्यालयों में कार्यरत हैं। वहीं, कई शिक्षकों को रिक्त पद उपलब्ध नहीं होने के कारण स्थानांतरण का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें मानसिक एवं पारिवारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि गंभीर बीमारी से पीड़ित, दिव्यांग, पति-पत्नी एक ही स्थान पर पदस्थापन के पात्र तथा विशेष पारिवारिक परिस्थितियों वाले शिक्षकों के मामलों में संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। इससे शिक्षकों को राहत मिलेगी और वे बेहतर वातावरण में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकेंगे।प्रदेश मीडिया प्रभारी मृत्युंजय ठाकुर ने कहा कि शिक्षक समाज की समस्याओं का समाधान पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ किया जाना चाहिए। स्थानांतरण प्रक्रिया में किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय न हो, इसके लिए महासंघ लगातार अपनी आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने कहा कि विभाग यदि शिक्षकों की जायज मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेता है तो इससे शिक्षकों का विश्वास बढ़ेगा और शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।महासंघ ने शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि स्थानांतरण प्रक्रिया में उत्पन्न सभी विसंगतियों का शीघ्र समाधान करते हुए पात्र शिक्षकों को न्यायसंगत अवसर उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने शैक्षिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें।

घसा कल्याणपुर में पोषाहार वितरण की दोबारा जांच, लाभार्थियों के दर्ज किए गए बयान

15 लाभार्थियों ने नियमित राशन नहीं मिलने की कही बात, जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई

शाहजहांपुर (राष्ट्र की परम्परा)। विकासखंड जैतीपुर के ग्राम घसा कल्याणपुर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर पोषाहार वितरण में कथित अनियमितता की शिकायत के बाद शुक्रवार को अधिकारियों ने मामले की दोबारा जांच की। सीडीपीओ निगोही स्नेहलता द्विवेदी एवं सीडीपीओ किंचित (शाहजहांपुर) ने मौके पर पहुंचकर लाभार्थियों के बयान दर्ज किए और संबंधित अभिलेखों की जांच की।यह कार्रवाई शिकायतकर्ता आशीष मिश्रा की ओर से की गई शिकायत के बाद की गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आंगनबाड़ी कार्यकत्री अनीता मिश्रा द्वारा पात्र लाभार्थियों को नियमित रूप से पोषाहार वितरित नहीं किया जा रहा है। पूर्व में हुई जांच से असंतोष जताए जाने के बाद अधिकारियों ने मामले की पुनः जांच की।जांच के दौरान कुल 30 लाभार्थियों को मौके पर बुलाया गया। इनमें 15 लाभार्थियों को पोषाहार वितरित किया गया, जबकि शेष 15 लाभार्थियों ने अधिकारियों के समक्ष बयान दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उन्हें नियमित रूप से राशन नहीं मिल रहा है। अधिकारियों ने उपस्थित लाभार्थियों से अलग-अलग बातचीत कर उनके लिखित बयान भी दर्ज किए।शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिन लाभार्थियों को पूर्व में पोषाहार नहीं मिलने की शिकायत थी, उन्हें जांच के दिन ही राशन उपलब्ध कराया गया। हालांकि, आंगनबाड़ी कार्यकत्री अनीता मिश्रा ने लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया।जांच के दौरान लिए गए लिखित बयानों में कुछ ग्रामीणों ने वर्ष 2025-26 के दौरान पात्र बच्चों को पोषाहार नहीं मिलने की बात कही, जबकि कुछ लाभार्थियों ने वर्तमान में नियमित रूप से राशन मिलने की जानकारी दी। जांच से संबंधित दस्तावेज पर ग्रामीणों, आंगनबाड़ी कार्यकत्री और ग्राम प्रधान के हस्ताक्षर भी कराए गए।अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में पोषाहार वितरण में पारदर्शिता और नियमितता सुनिश्चित करने के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) के माध्यम से वितरण व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाएगा।सीडीपीओ स्नेहलता द्विवेदी ने बताया कि जांच के दौरान प्राप्त तथ्यों, लाभार्थियों के लिखित बयानों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों एवं शासन को भेजी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

देवरिया जीआरपी की बड़ी कार्रवाई: अवैध अंग्रेजी शराब के साथ तस्कर गिरफ्तार

रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 2/3 से बिहार ले जाई जा रही 17.280 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब बरामद,

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। यात्रियों की सुरक्षा एवं रेलवे मार्ग से हो रही अवैध शराब तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत जीआरपी थाना देवरिया ने एक शराब तस्कर को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से 96 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की है।
पुलिस महानिदेशक रेलवे प्रकाश डी, पुलिस महानिरीक्षक रेलवे लखनऊ रामकृष्ण भारद्वाज तथा पुलिस अधीक्षक रेलवे लक्ष्मी निवास मिश्र के निर्देशन एवं पुलिस उपाधीक्षक रेलवे बलिया सवि रत्न गौतम के निकट पर्यवेक्षण में शुक्रवार को जीआरपी थाना देवरिया की टीम ने रेलवे स्टेशन देवरिया सदर के प्लेटफॉर्म संख्या 2/3 के पूर्वी छोर से बिहार निवासी प्रिन्स कुमार (20 वर्ष) को गिरफ्तार किया।
तलाशी के दौरान अभियुक्त के पिट्ठू बैग से ऑफिसर च्वाइस ब्रांड की 96 बोतल (प्रत्येक 180 मिलीलीटर) अवैध अंग्रेजी शराब बरामद हुई। बरामद शराब की कुल मात्रा 17.280 लीटर तथा अनुमानित कीमत 12,480 रुपये बताई गई है।
पूछताछ में अभियुक्त ने स्वीकार किया कि वह उत्तर प्रदेश से ट्रेनों के माध्यम से शराब बिहार ले जाकर लगभग दोगुने दाम पर बेचता था और इसी से अपनी जीविका चलाता था। पुलिस ने उसके विरुद्ध जीआरपी थाना देवरिया में मु.अ.सं. 42/2026 के तहत धारा 60 आबकारी अधिनियम में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही उसके अन्य आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है।
इस कार्रवाई को रेलवे मार्ग से होने वाली अवैध शराब तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
इन 96 बोतल अवैध अंग्रेजी शराब (ऑफिसर च्वाइस, 180 मिलीलीटर)
कुल मात्रा 17.280 लीटर जिसकी अनुमानित कीमत ₹12,480 मानी जा रही है। आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
कार्रवाई करने वाली टीम मेंहेड कांस्टेबल श्रीनाथ शर्मा, जीआरपी देवरिया,
कांस्टेबल मिथुन कुमार, जीआरपी देवरिया
कांस्टेबल रामू चौहान, आरपीएफ पोस्ट देवरिया
कांस्टेबल अनुराग प्रताप सिंह, सीआईबी भटनी शामिल थे।

दीक्षोत्सव में रोमांचक खो-खो मुकाबला, यूनिवर्सिटी कैंपस टीम बनी चैंपियन

फिजिकल एजुकेशन टीम को 6 अंक और एक टर्म से हराकर जीता खिताब

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में दीक्षोत्सव के उपलक्ष्य में शुक्रवार को आयोजित खो-खो प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने शानदार खेल कौशल का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में यूनिवर्सिटी कैंपस टीम ने फिजिकल एजुकेशन टीम को 6 अंक और एक टर्म के बड़े अंतर से पराजित कर विजेता बनने का गौरव हासिल किया।
प्रतियोगिता की शुरुआत से ही यूनिवर्सिटी कैंपस टीम ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया और पूरे मुकाबले में बढ़त बनाए रखी। तेज गति, सटीक रणनीति और बेहतरीन तालमेल के दम पर टीम ने निर्णायक जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. अमोद कुमार राय ने की। आयोजन के संचालन में रक्षा अध्ययन विभाग के डॉ. विजय कुमार और संस्कृत विभाग की डॉ. रंजन लता की अहम भूमिका रही, जबकि प्रतियोगिता की स्कोरिंग का दायित्व डॉ. बृजेश ने निभाया।
खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करने के लिए अंग्रेजी विभाग की प्रो. शिखा सिंह, विधि विभाग की डॉ. वंदना सिंह और रक्षा अध्ययन विभाग की डॉ. आरती यादव सहित अनेक शिक्षक मैदान में मौजूद रहे। इसके अलावा डॉ. अपरा त्रिपाठी, डॉ. प्रतिमा जायसवाल, डॉ. ओ.पी. सिंह, डॉ. आशीष कुमार शुक्ल, डॉ. मनीष राय, डॉ. पंकज सिंह, क्रीड़ा परिषद के संयुक्त सचिव डॉ. बृजेश कुमार तथा क्रीड़ा परिषद की कार्यकारिणी के सदस्य भी उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाल ही में क्रीड़ा परिषद की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया है। उपाध्यक्ष (प्रशासन) प्रो. विजय चाहल, सचिव डॉ. राज वीर सिंह और संयुक्त सचिव डॉ. बृजेश कुमार के मार्गदर्शन में खेल गतिविधियों को नई गति मिल रही है। प्रतियोगिता की तैयारियों में क्रीड़ा समिति के पुनीत और कृष्णा सहित अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। सफल आयोजन को आगामी दीक्षांत समारोह की तैयारियों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

तीन साल बाद फिर गरमाया बागापार सहकारी समिति की जमीन का विवाद

ग्रामीणों ने डीएम से लगाई गुहार, बोले- पुलिस चौकी हटाकर समिति को लौटाई जाए भूमि। सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया ने भी सुनी किसानों की पीड़ा, समाधान का दिलाया भरोसा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सदर तहसील क्षेत्र के बागापार चौराहे पर स्थित साधन सहकारी समिति की भूमि का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों और किसानों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पुलिस चौकी के लिए उपयोग की जा रही समिति की भूमि वापस दिलाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि तत्कालीन जिलाधिकारी ने वर्ष 2023 में ही समिति की भूमि से पुलिस चौकी का नाम निरस्त कर दूसरी जगह भूमि आवंटित करने का आदेश दिया था, लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी आदेश का पालन नहीं हुआ।
शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे पूर्व प्रधान रामराज चौरसिया के नेतृत्व में ग्रामीण जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और अपनी मांगों से संबंधित प्रार्थना पत्र सौंपा। इस दौरान सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया भी डीएम कार्यालय में मौजूद रहे। विधायक ने ग्रामीणों की पूरी बात गंभीरता से सुनी और मामले के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम पंचायत बागापार की आराजी संख्या-1942, रकबा 0.089 हेक्टेयर पर करीब चार दशक से साधन सहकारी समिति संचालित है। इसी समिति के माध्यम से बागापार न्याय पंचायत के लगभग दस गांवों के किसानों को खाद, बीज सहित कृषि संबंधी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाती रही है। धान और गेहूं की सरकारी खरीद भी वर्षों से इसी केंद्र के माध्यम से होती रही है।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2023 में खाद गोदाम परिसर में पुलिस चौकी निर्माण का बोर्ड लगाए जाने के बाद उन्हें जानकारी मिली कि 06 दिसंबर 2020 को तत्कालीन ग्राम प्रधान की ओर से पुलिस चौकी निर्माण के पक्ष में प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसके आधार पर खतौनी में भी पुलिस चौकी का नाम दर्ज कर दिया गया। बाद में समिति की कुल भूमि में से 0.032 हेक्टेयर हिस्से पर पुलिस चौकी का निर्माण करा दिया गया।
पूर्व प्रधान रामराज चौरसिया ने कहा कि समिति परिसर में पुलिस चौकी स्थापित होने के बाद खाद- बीज वितरण और धान-गेहूं की सरकारी खरीद जैसी महत्वपूर्ण कृषि सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। इससे न्याय पंचायत बागापार के हजारों किसानों को कृषि कार्यों के दौरान अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने 19 अक्टूबर 2023 को तत्कालीन जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र दिया था। जांच के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी ने सदर एसडीएम को आदेश दिया था कि समिति की आराजी संख्या-1942 से पुलिस चौकी का नाम निरस्त कर पुनः साधन सहकारी समिति बागापार का नाम दर्ज किया जाए तथा ग्राम सभा की अन्य उपयुक्त भूमि पर पुलिस चौकी के लिए जमीन आवंटित कर निर्माण कराया जाए। इसके बावजूद आज तक आदेश का अनुपालन नहीं हो सका।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सहकारी समिति पुनः पूर्ण रूप से संचालित नहीं हुई तो क्षेत्र के किसानों को खाद, बीज और सरकारी खरीद जैसी सुविधाओं के लिए दूर-दराज के केंद्रों पर निर्भर होना पड़ेगा। उन्होंने जिलाधिकारी से तत्काल प्रभाव से पूर्व आदेश का अनुपालन कराते हुए समिति की भूमि को मुक्त कराने और अभिलेखों में साधन सहकारी समिति का नाम पुनः दर्ज कराने की मांग की है।

गोरखपुर जोन पुलिस फुटबॉल टीम बनी चैंपियन जीता गोल्ड मेडल

74वीं अंतरजोनल प्रतियोगिता 2026 में बेहतरीन प्रदर्शन डीजी जोन/एडीजी जोन मुथा अशोक जैन ने दी बधाई

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
गोरखपुर जोन पुलिस फुटबॉल टीम ने बरेली में आयोजित 74वीं वार्षिक अंतरजोनल फुटबॉल प्रतियोगिता 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। इस उपलब्धि पर डीजी जोन/एडीजी जोन गोरखपुर मुथा अशोक जैन ने टीम के खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
शुक्रवार को जोन कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुथा अशोक जैन ने खिलाड़ियों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि गोरखपुर जोन की टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्ट खेल भावना का परिचय दिया है। यह जीत न केवल टीम बल्कि पूरे जोन के लिए गर्व की बात है। उन्होंने खिलाड़ियों को भविष्य में भी इसी तरह बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
प्रतियोगिता के दौरान गोरखपुर जोन की टीम ने लीग मैच में बरेली जोन को 2-0 से हराकर शानदार शुरुआत की। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में लखनऊ जोन को 3-0 से पराजित किया। सेमीफाइनल में प्रयागराज जोन को 2-0 से हराते हुए टीम ने फाइनल में प्रवेश किया। फाइनल मुकाबले में मेरठ जोन को 3-0 से शिकस्त देकर गोरखपुर जोन ने चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
व्यक्तिगत प्रदर्शन में भी गोरखपुर जोन के खिलाड़ियों ने उत्कृष्टता दिखाई। टीम के मुख्य आरक्षी मिथिलेश यादव को ‘बेस्ट गोलकीपर’ का खिताब मिला, जबकि आरक्षी कामरान प्रतियोगिता के ‘बेस्ट स्कोरर’ घोषित किए गए।
कार्यक्रम में अधिकारियों ने पूरी टीम के सामूहिक प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।

कलेक्ट्रेट सभागार में नशा तस्करी व अपराध नियंत्रण पर मंथन

एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार की अध्यक्षता में कस्टम, नारकोटिक्स व अन्य विभागों को सख्त निर्देश

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
कलेक्ट्रेट सभागार में शुक्रवार को एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार की अध्यक्षता में मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध कारोबार और उससे जुड़े अपराधों की रोकथाम को लेकर विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कस्टम, नारकोटिक्स विभाग, पुलिस, आबकारी, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार ने कहा कि जनपद में नशे के कारोबार पर पूर्णतः अंकुश लगाना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी विभागों को संयुक्त रूप से अभियान चलाते हुए ठोस कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने कस्टम व नारकोटिक्स विभाग को निर्देशित किया कि अंतरराज्यीय और अंतरजनपदीय स्तर पर होने वाली तस्करी पर विशेष निगरानी रखी जाए तथा खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज किया जाए, ताकि तस्करी के नेटवर्क को जड़ से ध्वस्त किया जा सके।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, प्रमुख चौराहों, होटल-लॉज और संवेदनशील इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। पुलिस व आबकारी विभाग को निर्देश दिए गए कि अवैध शराब, गांजा, स्मैक व अन्य मादक पदार्थों की बिक्री व परिवहन के खिलाफ नियमित छापेमारी की जाए। संदिग्ध व्यक्तियों और गतिविधियों पर कड़ी नजर रखते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
एडीएम सिटी ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए शिक्षा विभाग व स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं। नशे के दुष्परिणामों के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी दी जाए और उन्हें इससे दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही, नशा मुक्ति केंद्रों को और सक्रिय बनाते हुए उपचार व काउंसलिंग की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में ऑनलाइन माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए हो रही अवैध गतिविधियों पर भी नजर रखने की बात कही गई। संबंधित विभागों को साइबर निगरानी बढ़ाने और संदिग्ध लेन-देन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
एडीएम सिटी ने स्पष्ट कहा कि सभी विभाग अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ करें। किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने नियमित समीक्षा बैठक आयोजित कर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए।
बैठक में सभी विभागों के अधिकारियों ने समन्वय के साथ काम करते हुए नशे के खिलाफ सख्त अभियान चलाने का भरोसा दिलाया और जनपद को नशामुक्त बनाने के संकल्प को दोहराया।

सेवानिवृत्ति समारोह में अनिरुद्ध प्रसाद की ईमानदार सेवाओं की हुई सराहना


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। सूचना विभाग, देवरिया के कर्मचारी अनिरुद्ध प्रसाद के सेवानिवृत्त होने पर आयोजित सम्मान समारोह में पत्रकारों, विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों तथा शुभचिंतकों ने उनके लंबे, निष्पक्ष और समर्पित सेवाकाल को भावपूर्ण शब्दों में याद किया। वक्ताओं ने कहा कि अनिरुद्ध प्रसाद ने अपने पूरे कार्यकाल में कर्तव्यनिष्ठा, समयबद्धता और सरल व्यवहार से विभाग की गरिमा को नई पहचान दिलाई। उनके योगदान को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने कहा किअनिरुद्ध प्रसाद ने सूचना विभाग और पत्रकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका सहयोगात्मक और सकारात्मक व्यवहार हमेशा प्रेरणादायी रहा। सभी ने उनके स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घायु जीवन की कामना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पौहारी शरण राय, कैप्टन वीरेंद्र सिंह, राजेंद्र तिवारी, वीरेश्वर मिश्र, लेखाधिकारी ओमकार पांडेय, प्रिंस मिश्र, सोनू सहित विभागीय कर्मचारियों, पत्रकारों और परिवार के सदस्यों ने श्री प्रसाद के व्यक्तित्व एवं कार्यशैली पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने सदैव जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया। उपस्थित सभी लोगों ने उन्हें सम्मानित कर भावभीनी विदाई दी तथा उनके जीवन के नए अध्याय के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
सेवानिवृत्ति समारोह सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। उपस्थित लोगों ने विश्वास व्यक्त किया किअनिरुद्ध प्रसाद का अनुभव और मार्गदर्शन आगे भी समाज एवं पत्रकारिता जगत के लिए उपयोगी रहेगा।

8 साल पुराने हत्या मामले में आया बड़ा फैसला, मुख्य आरोपी को उम्रकैद

देवरिया में हत्या के मामले में बड़ा फैसला: मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास, चार अन्य दोषियों को 5-5 वर्ष की सजा


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में गंभीर अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के तहत देवरिया पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। थाना गौरीबाजार क्षेत्र के वर्ष 2018 के हत्या एवं मारपीट के चर्चित मामले में प्रभावी विवेचना और सशक्त पैरवी के आधार पर न्यायालय ने मुख्य आरोपी को आजीवन कारावास तथा चार अन्य दोषियों को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, देवरिया की अदालत ने थाना गौरीबाजार में दर्ज मुकदमा संख्या 326/2018, धारा 147, 148, 149, 323, 504, 506 एवं 302 भारतीय दंड संहिता के मामले में सुनवाई पूरी करते हुए यह निर्णय सुनाया।
न्यायालय ने राजा बाबू उर्फ सोनू को हत्या के अपराध में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास तथा 1,56,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। वहीं सह-अभियुक्त हरेराम यादव, छोटेलाल यादव, प्रेम सुन्दरी तथा संध्या देवी को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 76,000 रुपये प्रत्येक के अर्थदंड की सजा सुनाई।
देवरिया पुलिस के अनुसार, इस मामले में प्रभावी न्यायिक पैरवी के चलते दोषियों को सजा दिलाने में सफलता मिली। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) हरेन्द्र प्रसाद निषाद ने मजबूती से पक्ष रखा। इसके अलावा कोर्ट मोहर्रिर आरक्षी सौरभ त्रिपाठी, थाना गौरीबाजार के पैरवीकार आरक्षी रविन्द्र यादव तथा मॉनिटरिंग सेल प्रभारी दुर्गेश कुमार सिंह ने भी मुकदमे की प्रभावी मॉनिटरिंग एवं पैरवी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देवरिया पुलिस का कहना है कि ऑपरेशन कन्विक्शन का उद्देश्य गंभीर आपराधिक मामलों में समयबद्ध एवं प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाना है, ताकि अपराधियों में कानून का भय बना रहे और पीड़ितों को शीघ्र न्याय मिल सके।

डिजिटल संप्रभुता,लोकतंत्र और सोशल मीडिया जवाबदेही :मेटा विवाद, नीट आंदोलन और उभरती वैश्विक नीति चुनौती -28 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट की गंभीर टिप्पणियां -समग्र व्यापक विश्लेषण

भारतीय पीएम द्वारा जेन- ज़ेड, को संबोधित एक फेसबुक पोस्ट, वीडियो प्लेटफ़ॉर्म से हट जाने की घटना ने अनेक प्रश्न खड़े किए -मेटा ने तकनीकी त्रुटि बताते सामग्री पुनःबहाल क़ी 

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत में वर्ष 2026 का नीट पेपर लीक विवाद केवल एक परीक्षा की विश्वसनीयता का प्रश्न नहीं रहा,बल्कि यह युवाओं के विश्वास, लोकतांत्रिक अधिकारों, न्यायपालिका की भूमिका, सरकार की जवाबदेही तथा वैश्विक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों की शक्ति से जुड़ा बहुआयामी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषय बन गया।जंतर-मंतर पर हुआ व्यापक छात्र आंदोलन, उसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, न्यायपालिका की सक्रियता तथा भारतीय प्रधानमंत्री  की फेसबुक पोस्ट हटाए जाने को लेकर मेटा और भारत सरकार के बीच उत्पन्न विवाद,मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि इन सभी घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि इक्कीसवीं सदी का लोकतंत्र केवल संसद न्यायालय और चुनाव तक सीमित नहीं रह गया है।अब सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म भी लोकतांत्रिक विमर्श के निर्णायक मंच बन चुके हैं।जंतर-मंतर पर हजारों छात्रों और युवाओं द्वारा किया गया आंदोलन भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जा सकता है। इस आंदोलन का मूल उद्देश्य केवल नीट परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करना नहीं था, बल्कि यह संदेश देना भी था कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और समान अवसर लोकतांत्रिक शासन की आधारशिला हैं। इस आंदोलन ने भारत के भीतर व्यापक जनसमर्थन प्राप्त किया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया तथा वैश्विक शिक्षा जगत का भी ध्यान आकर्षित किया।इससे यह संदेश गया कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र अपने युवाओं की आवाज़ को गंभीरता से सुनने की क्षमता रखता है।आंदोलन के बाद उत्पन्न परिस्थितियों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को कई विश्लेषकों ने राजनीतिक जवाबदेही का उदाहरण माना। लोकतांत्रिक शासन में मंत्री केवल प्रशासनिक प्रमुख नहीं होते, बल्कि वे नैतिक उत्तरदायित्व का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।यद्यपि किसी भी इस्तीफे के पीछे अनेक राजनीतिक और प्रशासनिक कारण हो सकते हैं,फिर भी जनता के बीच यह धारणा बनी कि लोकतांत्रिक दबाव और जनआंदोलन शासन को उत्तरदायी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दावों,घटनाक्रमों और लोकतांत्रिक विमर्श के आधार पर विश्लेषण प्रस्तुत करता है।जिन मामलों का संबंध न्यायालय, सरकारी जांच अथवा आधिकारिक पुष्टि से है,उन्हें अंतिम तथ्य नहीं बल्कि उपलब्ध सूचनाओं के संदर्भ में सटीकता से देखा जाना चाहिए। 

साथियों, 28 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुईसुनवाई ने इस पूरे घटनाक्रम को नया आयाम दिया। विभिन्न समाचार रिपोर्टों के अनुसार न्यायालय ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार,कानून के समक्ष समानता तथा अनावश्यक कठोर कार्रवाई से बचने की आवश्यकता पर गंभीर टिप्पणियाँ कीं। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि अदालत ने 18 वर्ष से कम आयु के आंदोलनकारियों तथा ऐसे प्रदर्शनकारियों के संबंध में, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था,तत्काल मानवीय और विधिसम्मत दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। न्यायालय की कार्यवाही का व्यापक संदेश यही माना गया कि लोकतंत्र में असहमति को अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए और राज्य की शक्ति का प्रयोग संविधान की सीमाओं के भीतर होना चाहिए। अंतिम और बाध्यकारी स्थिति न्यायालय के आधिकारिक आदेश से ही निर्धारित होती है। 

साथियों, इस पूरे घटनाक्रम के समानांतर एक दूसरा विवाद सामने आया जिसने राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर डिजिटल शासन और तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही पर वैश्विक बहस छेड़ दी।भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा युवाओं,विशेषकर जेन- ज़ेड, को संबोधित एक फेसबुक पोस्ट और वीडियो प्लेटफ़ॉर्म से हट जाने की घटना ने अनेक प्रश्न खड़े कर दिए। बाद में मेटा ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए सामग्री पुनःबहाल कर दी,किंतु विवाद यहीं समाप्त नहीं हुआ।भारत सरकार ने इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना और विस्तृत जानकारी मांगी कि इतनी महत्वपूर्ण आधिकारिक सामग्री आखिर किस प्रक्रिया और किस कारण से हटाई गई।यहीं से यह विवाद केवल एक पोस्ट हटने का नहीं रहा, बल्कि डिजिटल संप्रभुता का विषय बन गया। किसी भी संप्रभु राष्ट्र का यह स्वाभाविक अधिकार है कि उसके निर्वाचित नेतृत्व और सरकारी संचार से संबंधित डिजिटल सामग्री के प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्पष्ट प्रक्रिया हो। यदि किसी वैश्विक प्लेटफ़ॉर्म पर करोड़ों नागरिक सूचना प्राप्त करते हैं, तो उस प्लेटफ़ॉर्म की नीतियाँ भी सार्वजनिक विश्वास की कसौटी पर सटीकता से  परखी जाएँगी। 

साथियों, मेटा,जो फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप जैसे विश्व के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म संचालित करती है,लंबे समय से विभिन्न देशों में सामग्री मॉडरेशन, गोपनीयता, डेटा सुरक्षा और स्थानीय कानूनों के अनुपालन को लेकर चर्चा और विवाद का विषय रही है। भारत में भी समय-समय पर उस पर भड़काऊ सामग्री हटाने में देरी, फर्जी समाचारों के प्रसार और नियामकीय अनुपालन जैसे मुद्दों पर प्रश्न उठते रहे हैं। इसलिए प्रधानमंत्री की पोस्ट हटने की घटना ने इन पुराने विवादों को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया।सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार का दृष्टिकोण यह है कि तकनीकी गलती जैसे सामान्य स्पष्टीकरण से इतने महत्वपूर्ण मामले का समाधान नहीं हो सकता।यदि किसी एल्गोरिद्म, स्वचालित प्रणाली या आंतरिक मॉडरेशन प्रक्रिया के कारण ऐसी घटना हुई, तो उसकी पूरी पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यही कारण है कि संबंधित अधिकारियों से विस्तृत स्पष्टीकरण और जवाबदेही की अपेक्षा की गई। 

साथियों,दूसरी ओर, तकनीकी कंपनियों का पक्ष भी समझना आवश्यक है। मेटा का कहना रहा कि सामग्री गलती से हट गई थी और जैसे ही त्रुटि का पता चला, उसे तुरंत बहाल कर दिया गया। बड़े डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म प्रतिदिन अरबों पोस्ट, वीडियो और संदेशों का प्रबंधन करते हैं। ऐसे में स्वचालित एल्गोरिद्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियाँ कभी-कभी गलत निर्णय भी ले सकती हैं। किंतु प्रश्न केवल त्रुटि का नहीं, बल्कि उसके निवारण की पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और संस्थागत प्रक्रिया का है।यहीं से एल्गोरिद्मिक पारदर्शिता और डिजिटल जवाबदेही जैसे सिद्धांत अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाते हैं। यदि कोई एल्गोरिद्म यह तय करता है कि कौन-सी सामग्री दिखाई जाएगी, कौन-सी सीमित होगी और कौन-सी हटाई जाएगी, तो लोकतांत्रिक समाज यह जानना चाहेगा कि वह निर्णय किन मानकों पर आधारित था।आधुनिक लोकतंत्र में तकनीकी निर्णय भी सार्वजनिक उत्तरदायित्व से मुक्त नहीं हो सकते। 

साथियों, इस विवाद ने भारत में स्वदेशी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म विकसित करने की मांग को भी बल दिया। अनेक विशेषज्ञों का मत है कि जिस प्रकार भारत ने डिजिटल भुगतान, आधार, यूपीआई और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्र में वैश्विक मॉडल प्रस्तुत किया है,उसी प्रकार भविष्य में सुरक्षित, पारदर्शी और भारतीय कानूनों के अनुरूप सोशल मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में भी गंभीर प्रयास किए जा सकते हैं। हालांकि यह भी उतना ही आवश्यक है कि कोई भी नया प्लेटफ़ॉर्म अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, गोपनीयता और प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों का सम्मान करे।यह विवाद केवल भारत तक सीमित नहीं है। यूरोपीय संघ ने डिजिटल सर्विसेज़ एक्ट, डिजिटल मार्केट्स एक्ट और एआई एक्ट जैसे व्यापक कानूनों के माध्यम से बड़ी तकनीकी कंपनियों पर पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास किया है। अमेरिका में भी सामग्री मॉडरेशन, प्रतिस्पर्धा, डेटा सुरक्षा और प्लेटफ़ॉर्म की शक्ति को लेकर लगातार बहस जारी है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्राज़ील तथा अनेक अन्य लोकतांत्रिक देशों ने भी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों की भूमिका पर नए नियामकीय ढाँचे सटीकता से विकसित किए हैं। 

साथियों, भारत भी डिजिटल इंडिया, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन व्यवस्था,आईटी नियमों और साइबर सुरक्षा ढाँचों के माध्यम से संतुलित डिजिटल शासन स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। चुनौती यह है कि तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन भी मिले और नागरिक अधिकारों, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा भी सुनिश्चित हो।कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने इस पूरी बहस को और अधिक जटिल बना दिया है। अब केवल पोस्ट हटाने या दिखाने का प्रश्न नहीं है। एआई यह भी निर्धारित करता है कि कौन- सी सामग्री किस उपयोगकर्ता तक पहुँचेगी,कौन-सा वीडियो वायरल होगा और किस समाचार को प्राथमिकता मिलेगी। यदि इन प्रणालियों में पारदर्शिता नहीं होगी, तो लोकतांत्रिक विमर्श पर उनका प्रभाव अत्यधिक व्यापक हो सकता है। डेटा आज केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि रणनीतिक संपत्ति बन चुका है।नागरिकों का डिजिटल व्यवहार, सामाजिक संबंध, वित्तीय गतिविधियाँ और सूचना उपभोग इन सबका विशाल डेटा भविष्य की अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को प्रभावित करता है। इसलिए डिजिटल संप्रभुता केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि शासन, सुरक्षा और नागरिक अधिकारों का मूल प्रश्न बन चुकी है।भारत जैसे विशाल लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती संतुलन स्थापित करना है।एक ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का मूल अधिकार है, वहीं दूसरी ओर फर्जी समाचार,डीपफेक, साइबर अपराध औरडिजिटल दुष्प्रचार जैसी चुनौतियाँ भी वास्तविक हैं। यदि नियमन अत्यधिक कठोर होगा तो स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है,और यदि नियमन अत्यधिक शिथिल होगा तो डिजिटल अराजकता बढ़ सकती है। इसलिए पारदर्शी, न्यायसंगत और न्यायिक समीक्षा के अधीन नियामकीय व्यवस्था ही दीर्घकालिक समाधान हो सकती है। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि नीट आंदोलन, सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता, राजनीतिक जवाबदेही और मेटा विवाद, इन सभी घटनाओं ने एक साझा संदेश दिया है कि लोकतंत्र का भविष्य केवल संस्थागत शक्ति पर नहीं, बल्कि नागरिक विश्वास,पारदर्शिता और डिजिटल उत्तरदायित्व पर भी निर्भर करेगा।आज आवश्यकता सरकार और तकनीकी कंपनियों के बीच टकराव की नहीं,बल्कि नियम-आधारित सहयोग,स्पष्ट जवाबदेही और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान की है।यदि लोकतंत्र नागरिकों की आवाज़ है,तो डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म उस आवाज़ का आधुनिक माध्यम हैं। यदि संप्रभुता किसी राष्ट्र की आत्मा है, तो डिजिटल संप्रभुता उसकी डिजिटल पहचान, सुरक्षा और भविष्य की दिशा है। इसलिए मेटा से जुड़ा यह विवाद केवल एक पोस्ट या वीडियो हटने का मामला नहीं माना जा सकता;यह उस व्यापक वैश्विक प्रश्न का प्रतीक है कि डिजिटल युग में लोकतंत्र, तकनीक और कॉर्पोरेट शक्ति के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए। आने वाले वर्षों में यही प्रश्न अंतरराष्ट्रीय कानून, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

PWD निर्माण कार्यों में रॉयल्टी भुगतान व्यवस्था को लेकर प्रदेशभर के ठेकेदारों की बढ़ी चिंता

उत्तर प्रदेश के ठेकेदारों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार, उपखनिज रॉयल्टी भुगतान व्यवस्था पर तत्काल निर्णय की मांग


लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति ने लोक निर्माण विभाग (PWD) में निर्माण कार्यों के लिए प्रयुक्त उपखनिजों—स्टोन बैलास्ट, स्टोन डस्ट, रेत एवं अन्य निर्माण सामग्री—पर देय रॉयल्टी भुगतान व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। समिति का कहना है कि वर्ष 2022 से विभागीय स्तर पर लगातार पत्राचार और निर्देशों के बावजूद अब तक स्पष्ट निर्णय न होने से प्रदेशभर के ठेकेदारों और अधिकारियों को गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
समिति के अध्यक्ष शरद कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में बताया कि लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियन्ता (विकास एवं विभागाध्यक्ष) तथा प्रमुख सचिव द्वारा समय-समय पर भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग को इस समस्या के समाधान के लिए पत्र भेजे गए। इसके बावजूद दोनों विभागों के बीच आवश्यक समन्वय स्थापित नहीं हो सका, जिससे निर्माण कार्यों के दौरान रॉयल्टी भुगतान की प्रक्रिया को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत ठेकेदारों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसका प्रभाव विकास परियोजनाओं की प्रगति पर भी पड़ सकता है। समिति ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि पूर्व में भेजे गए विभागीय पत्रों पर शीघ्र निर्णय लेते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं, ताकि लंबे समय से लंबित इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
समिति का मानना है कि यदि रॉयल्टी भुगतान व्यवस्था को लेकर स्पष्ट एवं एकरूप नीति लागू की जाती है तो निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी, प्रशासनिक विवाद कम होंगे तथा विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

व्यथा धरा की

सुन कर मन की व्यथा धरा की ,
आकाश को रोना पड़ेगा
एक दिन ऐसा आएगा
जब क्षितिज को खोना पड़ेगा

सूर्य को मनोरोग हुआ है
उसका धूप से वियोग हुआ है
छल करके उजाले से
सदा उसका उपभोग हुआ है

झाड़ लालच के हटाकर
बीज संतोष का बोना पड़ेगा
एक दिन ऐसा आएगा
जब क्षितिज को खोना पड़ेगा

व्यर्थ में जल को बहाना
समतुल्य है रक्तपात के
उत्त्तर कैसे मिलेगें आखिर
इंसानो के कुठाराघात के

अश्रु में लिपटी सरिताओं को
श्रृंगार कर संजोना पड़ेगा
एक दिन ऐसा आएगा
जब क्षितिज को खोना पड़ेगा

रात और दिन की वेदना को
सांझ भी समझने लगी है
बिना चहकती चिड़ियों के
स्वंय से ही कटने लगी है

कलरव के बिखरे गीतों को
संगीत से भिगोना पड़ेगा
एक दिन ऐसा आएगा
जब क्षितिज को खोना पड़ेगा

प्रकृति के संबंधों से
मानव ने विच्छेद किया है
किरण और हवा के
ह्रदय तक में छेद किया है

हो चुकी मैली गंगा ,लेकिन
ये पाप तो धोना ही पड़ेगा
एक दिन ऐसा आएगा
जब क्षितिज को खोना पड़ेगा
विजय गुंजन

प्रतिरोध स्वयं  का 

✍️ सोनम सोनी

आज मन का सागर शांत
हो गया — क्यों ।
वो उथल-पुथल, हलचल हलचल,
उलझन सब शांत हो गया … क्यों
मन की लहरें जो बार-बार इच्छा के
बड़े पत्थरों से टकरा रही थी ।

वो लहरें अब टकराती नहीं, वापस चली गई हैं
दूर फलक तक … क्यों ।
सवाल किसी से पूछा नहीं
चाहती मैं — क्यों ।

जवाब चाहे भी नहीं दे पाती । इन
दोनों के बीच कैसा सामंजस्य बैठ गया है
जो मुझे अच्छा नहीं लग रहा …
क्यों ।

पर मैं ऐसी तो न थी …। सब मुझसे
बात क्यों करना चाहते हैं । सब मुझ मुझे
क्यों सुन रहे हैं । आज मैं तो शांत
हूँ …. वो शिकायतें, दर्द, दुख सब
सहन कर लिया मैंने — क्यों ।

वो लोग अपने झूठ और
कुछ भर के आंसुओं से मेरी
स्थिरता को भिगो रहे हैं … क्यों
मन के सागर में मेरे जो
शांति है, उसे मिटाना चाहते
हैं अपने शब्दों के शोर
से ….. क्यों !

छोड़ दे मुझे आज, मेरा साथ
उनके लिए क्या मैं अभी भी हूं
….. क्यों
पर मैं तो जा चुकी सबको
आज़ाद कर दिया अपने से ….
दुख, दर्द, पीड़ा, साथ, साया
जो मेरा था मेरे लिए …

इनके लिए नहीं
तो फिर भी आज भी मुझे
छोड़ेंगे नहीं । क्या आज भी
कुछ गलत किया है मैंने ।

अगर नहीं तो रोका है मुझे … क्यों
मैं बस जाना चाहती हूं उस छोर तक…
जो परे है उन सबसे….
पर ये गलियां, ये घर, ये परिवार,

ये लोग मुझे जाने नहीं देते… क्यों
आखिर में सबके आंखों को वो सरोवर
सूख गया। उनका मन मेरे
जाने से भर गया। और छोड़
दिया मुझे कुछ दिनों का मेहमान बना के,


मुझे भुला दिया गया… क्यों
शायद अब मैं उनको याद नहीं
आना चाहती थी।
बहुत दूर आ चुकी थी
मैं। पर फिर भी मैं तोड़ न पाई बंधन,

वो अहसास, अपनों से वो
मेल… क्यों।
और विदा हो गई मैं इसतरह
मुझे जल की धारा में बह दिया गया

… और मैं दूर हो गई
मैं उनके पास दोबारा नहीं आना चाहती
न जाने… क्यों…

-Sonam Soni , B.Sc (Hons.) Semester (7th) Student at Maharishi University Lucknow