Friday, July 24, 2026
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गैस-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सपा का विरोध, जनता की समस्याओं को लेकर उठी आवाज

भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।

80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

टीसीएस के साथ डीडीयू का करार, 2400 विद्यार्थियों को मिलेगा रोजगारपरक प्रशिक्षण

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने उद्योग और शिक्षा के बीच समन्वय को मजबूत करते हुए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों के लगभग 2400 विद्यार्थियों को कौशल विकास, रोजगारपरक प्रशिक्षण और प्लेसमेंट सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। यह कार्यक्रम टीसीएस के यूथ एम्प्लॉयमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत संचालित होगा।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ उद्योग की मांग के अनुरूप कौशल उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि टीसीएस जैसी वैश्विक कंपनी के साथ यह साझेदारी विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी और डिजिटल दक्षताओं से लैस करेगी तथा उनके लिए राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में रोजगार के नए अवसर खोलेगी।
टीसीएस के यूथ एम्प्लॉयमेंट प्रोग्राम के प्रमुख चंद्रशेखर नटराजन ने कहा कि यह साझेदारी विद्यार्थियों को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने और उन्हें बेहतर करियर अवसर उपलब्ध कराने में सहायक होगी।
प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि विद्यार्थियों को 104 घंटे का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें संचार कौशल, तार्किक चिंतन, गणनात्मक क्षमता, कंप्यूटर अनुप्रयोग, डिजिटल दक्षता, व्यक्तित्व विकास और कॉर्पोरेट कार्यसंस्कृति जैसे विषय शामिल होंगे। प्रशिक्षण पूरा करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र, करियर मार्गदर्शन और प्लेसमेंट सहायता भी दी जाएगी।
टीसीएस के इंडिया हेड (सीएसआर) सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि युवाओं को रोजगार योग्य बनाना कंपनी की सामाजिक उत्तरदायित्व पहल का प्रमुख उद्देश्य है। रीजनल हेड (सीएसआर) सौम्या सुकुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि रीजनल मैनेजर (उत्तर प्रदेश) डॉ. लव त्रिपाठी ने इसे प्रदेश के युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
एमओयू हस्ताक्षर समारोह में विश्वविद्यालय और टीसीएस के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह पहल विद्यार्थियों को उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार कर बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

31 जुलाई को नुक्कड़ नाटक के जरिए स्वच्छता का संदेश देंगे डीडीयू के रोवर्स-रेंजर्स

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की जिला संस्था भारत स्काउट एवं गाइड, उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश स्काउट केयर अभियान के अंतर्गत 31 जुलाई को विश्वविद्यालय स्तर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान रोवर्स-रेंजर्स विभिन्न महाविद्यालयों की टीमों के साथ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से स्वच्छता का संदेश देंगे।
प्रतियोगिताओं की तैयारियों को लेकर रोवर्स एवं रेंजर्स कार्यालय में जिला संयोजक एवं जिला आयुक्त (रोवर्स) प्रो. शरद कुमार मिश्र की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई। बैठक में बताया गया कि प्रादेशिक मुख्यालय के निर्देशन में संचालित स्काउट केयर अभियान का उद्देश्य जिम्मेदार नागरिकता, सेवा भावना, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, सड़क सुरक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता, सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण और राष्ट्रप्रेम की भावना को समाज तक पहुंचाना है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि 31 जुलाई को विश्वविद्यालय के रोवर्स एवं रेंजर्स कार्यालय में आयोजित प्रतियोगिताओं में विभिन्न महाविद्यालयों और विश्वविद्यालय की टीमें स्वच्छता आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत करेंगी। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली टीम का चयन कर उसका नाम राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए भेजा जाएगा।
प्रो. शरद कुमार मिश्र ने सभी प्रशिक्षकों को प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सहायक प्रादेशिक संगठन आयुक्त गोरखपुर मंडल मोहित कुमार ने कहा कि प्रदेश मुख्यालय की ओर से आयोजित प्रतियोगिताओं का समयबद्ध संचालन विश्वविद्यालय स्तर पर सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक रोवर्स एवं रेंजर्स को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सके।
बैठक में आगामी गतिविधियों की रूपरेखा भी तैयार की गई। इस अवसर पर इशरत सिद्दीकी, किरन देवी, ओम प्रकाश उपाध्याय, राजू मौर्य, विशाल यादव, सिद्धार्थ कुमार, आदित्य प्रजापति, विशाल शर्मा, सेजल साहनी, नंदिनी सैनी, पल्लवी शर्मा, मनोज तथा अन्य प्रशिक्षक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

नशा मुक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण: प्रो. पूनम टंडन

एनसीसी शिविर में 500 कैडेट्स ने ली नशा मुक्ति की शपथ

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित एनसीसी वार्षिक प्रशिक्षण शिविर के दौरान गुरुवार को नशा मुक्ति अभियान का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने लगभग 500 एनसीसी कैडेट्स और अधिकारियों को नशे से दूर रहने तथा समाज को नशा मुक्त बनाने की शपथ दिलाई।
कुलपति प्रो. टंडन ने कहा कि युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होती है। यदि युवा नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग करें, तो विकसित और सशक्त भारत के निर्माण का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति की प्रतिभा, स्वास्थ्य और भविष्य को प्रभावित करने के साथ परिवार और समाज की प्रगति में भी बाधा बनता है। इसलिए प्रत्येक युवा का दायित्व है कि वह स्वयं नशे से दूर रहे और दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करे।
उन्होंने एनसीसी कैडेट्स के अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की सराहना करते हुए उन्हें नशा मुक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का स्वागत एवं संचालन कैंप कमांडेंट कर्नल ए.पी. सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि एनसीसी युवाओं में अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना विकसित करने के साथ-साथ सामाजिक अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।
मेजर प्रो. विनीता पाठक ने नशे के कारणों, दुष्प्रभावों और बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी देते हुए स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा नशा मुक्त समाज के निर्माण में सहभागिता का आह्वान किया।
कार्यक्रम में अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अनुभूति दुबे, कैंप उप कमांडेंट मेजर आकांक्षा पांडेय, कैप्टन निधि लाल, सीनियर जीसीआई सीमा राय एवं नीता यादव, सेकंड ऑफिसर पुष्पा एवं रेणुका, एनसीसी के वरिष्ठ अधिकारी, पीआई स्टाफ तथा अन्य कर्मचारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में कैडेट्स ने नशा मुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लिया।

गुरु पूर्णिमा पखवाड़े में विद्यार्थियों को मिला करियर मार्गदर्शन, विशेषज्ञों ने बताए सफलता के सूत्र

चितरंगी (राष्ट्र की परम्परा)। शासकीय सांदीपनि मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चितरंगी में गुरु पूर्णिमा पखवाड़े के आठवें दिन करियर मार्गदर्शन एवं प्रेरक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध करियर विकल्पों, उच्च शिक्षा और रोजगार की संभावनाओं की जानकारी दी गई।
विद्यालय के प्राचार्य अशोक सिंह ने कहा कि गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा विद्यार्थियों के ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम है। उन्होंने छात्रों से अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप विषयों का चयन कर स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान किया, ताकि वे अपने भविष्य को सही दिशा दे सकें।
कार्यक्रम समन्वयक एवं उप-प्राचार्य पद्माकर मिश्र ने विज्ञान, तकनीक, कृषि, कंप्यूटर, सूचना प्रौद्योगिकी, पशुपालन, कला, संगीत और खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध करियर विकल्पों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में अनेक पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं और सरकारी व निजी संस्थानों में रोजगार के बेहतर अवसर मौजूद हैं।
कार्यक्रम का संचालन सत्यकाम तिवारी ने किया। उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा पखवाड़े के अंतर्गत श्लोक वंदना, गीत-भजन, योग, ज्ञानवर्धक एवं जागरूकता प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 29 जुलाई को समापन समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी ने विद्यालय में आयोजित गतिविधियों की सराहना करते हुए सभी कार्यक्रमों के सुव्यवस्थित और प्रभावी संचालन के निर्देश दिए।
मुख्य अतिथि अरुण तिवारी ने कहा कि वर्तमान समय में करियर के अवसर पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं। विद्यार्थी अपनी रुचि, योग्यता और क्षमता के अनुसार नए क्षेत्रों में भी उज्ज्वल भविष्य बना सकते हैं। विशिष्ट अतिथि विक्रम सिंह चौहान ने विज्ञान, तकनीक, कंप्यूटर, कृषि, कला और खेल जैसे क्षेत्रों में बढ़ते अवसरों की जानकारी देते हुए नियमित अध्ययन और मेहनत को सफलता की कुंजी बताया। वरिष्ठ शिक्षक अखिलेश कुमार ने समय पर सही जानकारी और उचित निर्णय को करियर निर्माण का आधार बताया, जबकि प्रेमलाल सिंह ने विद्यार्थियों से अपनी प्रतिभा पहचानकर सही मार्गदर्शन के साथ लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

एसडीएम के आश्वासन पर सपा नेता विजय रावत ने समाप्त की भूख हड़त

भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर, कथनी और करनी में बड़ा अंतर – व्यास यादव
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बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
समाजवादी पार्टी द्वारा बरहज विधानसभा क्षेत्र में जनहित के विभिन्न मुद्दों को लेकर 21 जुलाई से मोहाव काली माता मंदिर के पास चल रही क्रमिक भूख हड़ताल गुरुवार को उपजिलाधिकारी बरहज के आश्वासन के बाद समाप्त हो गई।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष व्यास यादव ने कहा कि भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार चरम पर है। प्रदेश सरकार को विकास कार्यों से कोई सरोकार नहीं है। बरहज-सोनू घाट मार्ग वर्षों से बदहाल पड़ा है, जिससे आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। सरकार जो वादे करती है, उन्हें धरातल पर लागू करने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।
भूख हड़ताल पर बैठे समाजवादी पार्टी के नेता विजय रावत ने कहा कि बरहज-सोनू घाट मार्ग के गड्ढों की मरम्मत, मोहन सेतु के निर्माण हेतु धन आवंटित कर कार्य प्रारंभ कराने, नगर पालिका बरहज के वार्ड संख्या-24 स्थित लंगड़ा पोल की स्ट्रीट लाइट ठीक कराने तथा परसिया विशुनपुर देवार में हो रहे कटान को रोकने की मांग को लेकर वे 21 जुलाई से भूख हड़ताल पर बैठे थे।
उन्होंने बताया कि पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा सड़क के गड्ढों की मरम्मत के लिए गिट्टी गिरा दी गई है तथा लंगड़ा पोल की स्ट्रीट लाइट 24 घंटे के भीतर ठीक कराने का आश्वासन दिया गया है। साथ ही अन्य मांगों को शासन को भेजकर शीघ्र पूरा कराने का भरोसा एसडीएम बरहज द्वारा दिया गया है। इसी आश्वासन के आधार पर उन्होंने जूस पिलाकर भूख हड़ताल समाप्त कराया ।
विजय रावत ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में जनहित की मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो समाजवादी पार्टी बरहज विधानसभा क्षेत्र में व्यापक जन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
इस अवसर पर बाबूलाल यादव, रामबचन सिंह यादव, गुड्डू यादव, विकास यादव, दिनेश कुमार, अमित प्रधान, राजन मिश्रा, अमरेंद्र यादव, फरेन्द्र यादव, अनरुद्ध यादव, अभिषेक यादव, छेदी कुशवाहा, अरविंद कुशवाहा, दुर्गेश गौड़, भोला गौड़ सहित बड़ी संख्या में समाजवादी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

देवरिया जीआरपी की बड़ी सफलता: 8 घंटे में शातिर चोर गिरफ्तार, चोरी के आभूषण व ₹6,900 नकद बरामद

रेलवे स्टेशन देवरिया सदर पर कार्रवाई, बलिया, मऊ और देवरिया के दर्ज मामलों से जुड़ा मिला आरोपी

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)। राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) थाना देवरिया ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज 8 घंटे के भीतर रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में चोरी की घटनाओं को अंजाम देने वाले एक शातिर चोर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से चोरी का एक पीली धातु का लॉकेट और ₹6,900 नकद बरामद किया है। बरामद सामान की कुल अनुमानित कीमत ₹41,900 बताई गई है।
जीआरपी गोरखपुर के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक रेलवे प्रकाश डी, पुलिस महानिरीक्षक रेलवे रामकृष्ण भारद्वाज तथा पुलिस अधीक्षक रेलवे लक्ष्मी निवास मिश्र के निर्देशन एवं पुलिस उपाधीक्षक रेलवे बलिया सवि रत्न गौतम के निकट पर्यवेक्षण में चलाए जा रहे अपराध नियंत्रण अभियान के तहत की गई।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान पंकज मिश्रा (36 वर्ष) निवासी बौरडीह, थाना रुद्रपुर, जनपद देवरिया के रूप में हुई है। उसे रेलवे स्टेशन देवरिया सदर के प्लेटफॉर्म संख्या-2 से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार बरामद ₹2,000 जीआरपी थाना बलिया में दर्ज एक मुकदमे से, ₹4,900 जीआरपी थाना मऊ में दर्ज मुकदमे से तथा बरामद पीली धातु का लॉकेट जीआरपी थाना देवरिया में दर्ज चोरी के मामले से संबंधित है।
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह ट्रेनों और रेलवे प्लेटफॉर्म पर सो रहे यात्रियों को निशाना बनाकर चोरी करता था। चोरी किए गए आभूषण और अन्य सामान को राह चलते लोगों को बेचकर प्राप्त धन से अपने शौक पूरे करता था। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी से रेलवे क्षेत्र में चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है तथा उसके अन्य आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है।

मुख्य बरामदगी:
एक पीली धातु का लॉकेट
₹6,900 नकद
कुल अनुमानित कीमत: ₹41,900

भूजल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर जोर, जागरूकता कार्यशाला में दिए गए जल बचाने के संदेश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। भूजल सप्ताह के समापन अवसर पर जनपद मुख्यालय में आयोजित कार्यशाला में जल संरक्षण, स्वच्छ पेयजल और जल के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर व्यापक जनजागरूकता का संदेश दिया गया। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने जल संकट से निपटने के उपायों पर चर्चा करते हुए लोगों से जल बचाने, जल स्रोतों को प्रदूषित होने से रोकने और वर्षा जल संचयन को अपनाने का आह्वान किया।
जिलाधिकारी के निर्देश पर परियोजना निदेशक डीआरडीए विजयंत सिंह की अध्यक्षता में 16 से 22 जुलाई तक मनाए गए भूजल सप्ताह का समापन जनपद मुख्यालय पर पेयजल एवं स्वच्छता संबंधी कार्यशाला के साथ हुआ। कार्यक्रम में जल जीवन मिशन के तहत जल संरक्षण, स्वच्छ पेयजल और जलजनित बीमारियों की रोकथाम पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम की शुरुआत अधिशासी अभियंता जल निगम ने जल के आवश्यकता अनुसार उपयोग, हर घर जल योजना के तहत उपलब्ध पेयजल का मुख्य रूप से पीने के लिए उपयोग करने तथा जल को प्रदूषित होने से बचाने के संदेश के साथ की। एफटीके किट के माध्यम से उपस्थित लोगों को जल परीक्षण और सुरक्षित पेयजल की जानकारी भी दी गई।
सहायक अभियंता लघु सिंचाई ने दैनिक जीवन में जल बचाने के सरल उपाय बताते हुए वाहन धोने में पाइप के बजाय बाल्टी और मग का प्रयोग करने, वर्षा जल संचयन प्रणाली (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग) अपनाने तथा जल संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की। जिला उद्यान अधिकारी ने ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई योजना, भूमि संरक्षण अधिकारी ने खेत तालाब योजना तथा वन विभाग के अधिकारियों ने अधिकाधिक वृक्षारोपण के महत्व पर जानकारी दी।
परियोजना निदेशक विजयंत सिंह ने एफटीके दीदियों को गांव-गांव में जल संरक्षण और सुरक्षित पेयजल के प्रति जनजागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने प्रत्येक घर में सोकपिट निर्माण, नालियों के अंतिम छोर पर फिल्टर चैंबर बनवाकर पानी को तालाबों या बड़े गड्ढों तक पहुंचाने तथा जल के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि “जल है तो कल है”, इसलिए जल संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
कार्यशाला में जल निगम, लघु सिंचाई, वन विभाग, डीपीएमयू टीम, प्रयोगशाला कर्मियों, एफटीके महिलाओं, कार्यदायी संस्थाओं मेघा इंजीनियरिंग और जैक्शन के प्रतिनिधियों तथा जनपद के ग्राम प्रधानों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को जल संरक्षण की शपथ दिलाकर भूजल सप्ताह का समापन किया गया।

रेलवे कॉलोनियों में पीएनजी आपूर्ति हेतु एमओयू किया गया

वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा)l वाराणसी स्थित रेलवे कॉलोनियों में घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस(पीएनजी) की आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी मंडल एवं गेल इंडिया लिमिटेड के मध्य बुधवार को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। पूर्वोत्तर रेलवे में पहली बार वाराणसी मंडल द्वारा इस प्रकार का समझौता किया गया है, जो कर्मचारियों के कल्याण एवं आधुनिक आवासीय सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है।
वाराणसी मंडल के भारतेंदु सभागार कक्ष में 22 जुलाई,2026 को आयोजित एक कार्यक्रम में मंडल रेल प्रबंधक,वाराणसी आशीष जैन की गरिमामयी उपस्थिति में वरिष्ठ मंडल इंजीनियर(समन्वय) विकास कुमार सिंह तथा गेल इंडिया लिमिटेड, वाराणसी के महाप्रबंधक सुशील कुमार ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया।
इस अवसर पर पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से अपर मंडल रेल प्रबंधक अजय कुमार सिंह, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (समन्वय) विकास कुमार सिंह,वरिष्ठ मंडल इंजीनियर-2 विनीत कुमार,वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी अभिनव कुमार सिंह,वरिष्ठ मंडल सामग्री प्रबंधक नितेश अग्रवाल,वरिष्ठ मंडल सिगनल एवं दूरसंचार इंजीनियर यशवीर सिंह,वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर(कैरेज एण्ड वैगन) अभिषेक राय,सहायक मंडल इंजीनियर(नगर) ए.के.पाण्डेय जबकि गेल इंडिया लिमिटेड की ओर से चंद्रकांत टंडन, देबाशीष साहू एवं जे. आकाश सहित मंडल के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन ने पीएनजी के उपयोग के अपने सकारात्मक अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह एक सुरक्षित, विश्वसनीय, किफायती एवं पर्यावरण-अनुकूल ईंधन है। रेलवे कॉलोनियों में पीएनजी आपूर्ति प्रारंभ होने से कर्मचारियों एवं अधिकारियों को सुरक्षित, निर्बाध, पर्यावरण-अनुकूल एवं सुविधाजनक गैस उपलब्ध होगी। इससे एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता कम होगी, पारदर्शी मीटर आधारित बिलिंग सुनिश्चित होगी तथा कर्मचारियों के जीवन स्तर एवं आवासीय सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा।
इस अवसर पर गेल इंडिया लिमिटेड, वाराणसी के महाप्रबंधक सुशील कुमार ने बताया कि पीएनजी से एलपीजी सिलेंडर के भंडारण, बुकिंग एवं समय-समय पर सिलेंडर बदलने जैसी असुविधाओं से मुक्ति मिलेगी तथा गैस की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित होगी। उन्होंने अधिकारियों एवं रेलवे कॉलोनियों के निवासियों से पीएनजी अपनाने का आह्वान करते हुए इसके लाभों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर बल दिया।
इस समझौते के तहत वाराणसी की रेलवे कॉलोनियों के रेलवे आवासों एवं रेलवे संस्थानों को चरणबद्ध रूप से पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे रेलवे कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को सुरक्षित, सुविधाजनक, विश्वसनीय तथा स्वच्छ ईंधन की सुविधा प्राप्त होगी, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के उपरांत रेलवे कॉलोनियों में पीएनजी पाइपलाइन बिछाने का कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जाएगा।
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महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने सुनीं शिकायतें, 15 दिन में निस्तारण के दिए निर्देश

  • महिला उत्पीड़न व घरेलू हिंसा के मामलों की समीक्षा कर अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
  • निरीक्षण भवन में पीड़ित महिलाओं की जनसुनवाई, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक
  • जिला अस्पताल में कन्या जन्मोत्सव, गोद भराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम में शामिल होकर नवजात कन्याओं को किया सम्मानित
  • संयुक्त जिला चिकित्सालय का निरीक्षण कर मरीजों की सुविधाओं, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं का लिया जायजा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने जनपद भ्रमण के दौरान महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए महिला जनसुनवाई की। उन्होंने अधिकारियों को सभी प्राप्त शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
भ्रमण के दौरान उन्होंने सबसे पहले तामेश्वर स्थित शिव मंदिर में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद संयुक्त जिला चिकित्सालय के महिला विंग में आयोजित कन्या जन्मोत्सव, गोद भराई और अन्नप्राशन कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस दौरान 20 नवजात कन्याओं का जन्मोत्सव केक काटकर मनाया गया। माताओं को मिठाई, फल, बेबी किट और वस्त्र वितरित किए गए, साथ ही ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधे भी भेंट किए गए।
अस्पताल निरीक्षण के दौरान उन्होंने साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, चिकित्सकों की उपस्थिति और मरीजों को मिल रही सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने सभी स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की शिकायत सामने नहीं आई।
इसके बाद खलीलाबाद स्थित निरीक्षण भवन में आयोजित जनसुनवाई, समीक्षा बैठक और प्रेस वार्ता में उन्होंने भाग लिया। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड-19) के अंतर्गत दो बच्चों को लैपटॉप भी वितरित किए गए।
जनसुनवाई में समाज कल्याण, राजस्व, महिला कल्याण और पुलिस विभाग से संबंधित कुल 10 प्रकरण प्राप्त हुए। अध्यक्ष ने सभी मामलों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने तथा सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक पात्र लोगों को लाभ दिलाने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर उप जिलाधिकारी खलीलाबाद हृदय राम तिवारी, पुलिस क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पांडेय, जिला प्रोबेशन अधिकारी सतीश चंद्र, जिला समाज कल्याण अधिकारी बृजेश कुमार, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी रवीश चंद्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी सत्येंद्र सिंह सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

बीबीएयू में छात्रावास आवेदन शुरू, 26 जुलाई तक करें ऑनलाइन आवेदन

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के प्रथम सेमेस्टर में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए छात्रावास आवंटन की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पात्र विद्यार्थियों से 26 जुलाई को शाम 6 बजे तक अनिवार्य रूप से ऑनलाइन आवेदन करने को कहा है।
विश्वविद्यालय की ओर से छात्रावास आवेदन का गूगल फॉर्म लिंक नवप्रवेशित विद्यार्थियों के पंजीकृत ई-मेल पते पर भेज दिया गया है। यदि किसी विद्यार्थी को ई-मेल इनबॉक्स में आवेदन लिंक दिखाई नहीं देता है तो वह अपने स्पैम (Spam) फ़ोल्डर की भी जांच कर सकता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह आवेदन लिंक केवल बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ के विभिन्न पाठ्यक्रमों में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराया गया है। सभी पात्र विद्यार्थियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया गया है, ताकि छात्रावास आवंटन की आगे की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सके।

तहसील घेराव करने जा रहे कांग्रेस नेता को किया हाउस अरेस्ट

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l बुधवार को कांग्रेस नेता कार्यकर्ताओ संग बरहज तहसील का घेराव करने जा रहे थे कि पुलिस ने किया हाउस अरेस्ट।
बताते चले मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी जो छात्र छात्राओं द्वारा दिल्ली के जंतर
मंनतर पर अपनी मांगो को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र छात्राओं को पुलिस ने लाठी से पीटा उसी के विरोध को लेकर सड़क पर उतरे राहुल गाँधी पी एम आवास के सामने धरने पर बैठ गए। दिल्ली पुलिस ने राहुल गाँधी एवं अखिलेश यादव सहित भारी संख्या मे कार्यकर्ताओ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जिसके खिलाफ बुधवार को कांग्रेस नेता रविप्रताप सिंह कार्यकर्ताओ संग, अपने घर दलपत बरडीहा से निकलने वाले थे कि, लार पुलिस को इसकी सूचना मील गयी,। सूचना प्राप्त होते ही पुलिस उनके घर पहुँच कर उन्हें और उनके कार्यकर्ताओ को हाउस अरेस्ट कर लिया।

ऑनलाइन ठगी के शिकार युवक को साइबर पुलिस ने दिलाई 1.28 लाख की राहत

शाहजहाँपुर(राष्ट्र की परम्परा)l ऑनलाइन ठगी के शिकार एक युवक को साइबर क्राइम थाना पुलिस ने बड़ी राहत दिलाते हुए उसके खाते में 1.28 लाख रुपये वापस कराए हैं। साइबर पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते ठगी में प्रयुक्त बैंक खातों को समय रहते होल्ड कराया गया, जिससे पीड़ित की आंशिक धनराशि वापस मिल सकी।
साइबर थाना में दर्ज मुकदमा संख्या 09/2026 के अनुसार खुदागंज थाना क्षेत्र निवासी शदिवाकर विक्रम सिंह से जूडियो ट्रेंड की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर 5.23 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी कर ली गई थी। शिकायत मिलते ही साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू की और गोल्डन आवर के दौरान तत्काल कार्रवाई करते हुए ठगी में प्रयुक्त दो बैंक खातों को होल्ड करा दिया। इसके बाद एक बैंक खाते से 1.28 लाख रुपये पीड़ित के खाते में वापस करा दिए गए।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक सौरव दीक्षित के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक नगर देवेन्द्र कुमार तथा क्षेत्राधिकारी साइबर क्राइम शुभम वर्मा के पर्यवेक्षण में साइबर थाना प्रभारी रजनीश कुमार एवं उनकी टीम द्वारा की गई। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और शेष धनराशि वापस कराने के लिए संबंधित बैंकों एवं एजेंसियों से समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
साइबर थाना प्रभारी रजनीश कुमार ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी होने पर घबराने के बजाय तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से सूचना दें। समय पर शिकायत दर्ज होने से धनराशि फ्रीज कराकर वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

डीएम के निर्देश पर कल्कि बायोटेक पर छापा दो दवाओं के नमूने जांच को भेजे

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की संयुक्त टीम ने बुधवार को बडहरा चौराहा स्थित कल्कि बायोटेक पर छापेमारी कर निरीक्षण किया। कार्रवाई के दौरान फर्म के अभिलेखों एवं दवाओं की गहन जांच की गई। जांच के दौरान दो संदिग्ध दवाओं के नमूने लेकर उन्हें राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला भेज दिया गया।
औषधि निरीक्षक राघवेंद्र सिंह एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रेमचंद के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के दौरान फर्म के स्वामी की उपस्थिति में निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में मिली कमियों की रिपोर्ट सहायक आयुक्त (औषधि), गोरखपुर मंडल को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।
औषधि निरीक्षक राघवेंद्र सिंह ने बताया कि प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित फर्म के विरुद्ध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने कहा कि जनपद में दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। आमजन के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में औषधि प्रतिष्ठानों की नियमित जांच और निगरानी आगे भी लगातार जारी रहेगी।

सड़क दुर्घटना में 70 वर्षीय वृद्ध गंभीर रूप से घायल, मेडिकल कॉलेज रेफर

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l बरहज थाना क्षेत्र के मौना चौराहे के पास बुधवार को सड़क दुर्घटना में 70 वर्षीय एक वृद्ध गंभीर रूप से घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार, समशेर (70 वर्ष) पुत्र छबरू सैनी, निवासी कपरवार, अपने रिश्तेदारी में पनिका मे पूछार करने जा रहे थे। इसी दौरान मौना चौराहे के पास एक दोपहिया वाहन की टक्कर से वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची एम्बुलेंस ने उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बरहज पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी हालत नाजुक देखते हुए उन्हें मेडिकल कॉलेज, देवरिया रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों के अनुसार वृद्ध की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।

वंदे मातरम विधेयक 2026: राष्ट्रीय सम्मान या अनिवार्य देशभक्ति? संसद में घमासान, संविधान पर छिड़ी बड़ी बहस

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में जुलाई 2026 का मानसून सत्र केवल राजनीतिक टकराव के लिए ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों की संवैधानिक स्थिति को लेकर शुरू हुई एक नई बहस के कारण भी लंबे समय तक याद किया जा सकता है।20 जुलाई 2026 को जब यह विधेयक संसद में प्रस्तुत किया गया,उसी समय विपक्ष ने इसके विरोध में तीखी आपत्ति दर्ज कराई।विभिन्न विपक्षी दलों ने इसे असंवैधानिक बताते हुए अन्य तात्कालिक मुद्दों पर चर्चा की मांग की।सदन में लगातार हंगामा होता रहा और विधेयक पर विस्तृत चर्चा प्रारंभ नहीं हो सकी।21 जुलाई 2026 तक की संसदीय स्थिति के अनुसार यह विधेयक प्रस्तुत तो हो चुका था, किंतु उस पर विचार- विमर्श और आगे की विधायी प्रक्रिया गतिरोध के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। अर्थात विधेयक अभी कानून नहीं बना है और उसे संसद के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करना शेष है।केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में प्रस्तुत राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 ने संसद से लेकर न्यायपालिका,संविधान विशेषज्ञों,राजनीतिक दलों, शिक्षाविदों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक व्यापक चर्चा को जन्म दिया। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि प्रस्तावित संशोधन का मूल उद्देश्य राष्ट्रगीत वंदे मातरम को वही वैधानिक संरक्षण प्रदान करना है जो अब तक राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान जन गण मन को प्राप्त है।यदि यह विधेयक वर्तमान स्वरूप में कानून बनता है तो किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर वंदे मातरम का अपमान करना, उसके गायन में बाधा डालना अथवा सार्वजनिक कार्यक्रम में उसका अनादर करना तीन वर्ष तक के कारावास जुर्माने या दोनों से दंडनीय अपराध बन सकता है। यहीं से वह संवैधानिक प्रश्न प्रारंभ होता है जिसने पूरे देश में चर्चा को जन्म दिया है,क्या यह राष्ट्रीय सम्मान को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है?,या फिर यह देशभक्ति को कानून के माध्यम से अनिवार्य बनाने का प्रयास माना जाएगा? 

साथियों, मीडिया में आई जानकारी के अनुसार सरकार का पक्ष अत्यंत स्पष्ट है। केंद्र का कहना है कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध संघर्ष के दौरान लाखों स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी गीत को प्रेरणा का स्रोत बनाया। अनेक क्रांतिकारी फांसी के फंदे पर चढ़ते समय वंदे मातरम का उद्घोष करते थे। संविधान सभा के अंतिम चरण में 24 जनवरी 1950 को तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया था कि जन गण मन राष्ट्रगान होगा जबकि वंदे मातरम को समान सम्मान प्राप्त रहेगा। सरकार का तर्क है कि स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी ऐतिहासिक भूमिका को देखते हुए अब समय आ गया है कि इसे भी वैधानिक सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति जानबूझकर इसका अपमान न कर सके। सरकार यह भी कह रही है कि यह संशोधन किसी व्यक्ति की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि सटीकता से राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए लाया गया है।

साथियों, यह विधेयक वास्तव में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रस्ताव है। वर्तमान अधिनियम मुख्य रूप से राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान को दंडनीय बनाता है। प्रस्तावित संशोधन के बाद पहली बार राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को भी इसी श्रेणी में शामिल किया जाएगा। इसके अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत का अपमान करता है, उसके गायन में व्यवधान उत्पन्न करता है, किसी सार्वजनिक समारोह में उसे रोकने का प्रयास करता है या उसके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधि करता है, तो उसके विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार का कहना है कि यह संशोधन केवल जानबूझकर किए गए अपमान पर लागू होगा, यह सटीकता से  सामान्य परिस्थितियों अथवा व्यक्तिगत विवेक पर नहीं। 

साथियों, लेकिन यही वह बिंदु है जहां से संवैधानिक विवाद प्रारंभ होता है। विपक्ष का कहना है कि संविधान सभा ने जानबूझकर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के बीच कानूनी अंतर बनाए रखा था। यदि संविधान निर्माताओं की मंशा दोनों को समान कानूनी दर्जा देने की होती तो संविधान में उसी समय इसका स्पष्ट उल्लेख किया जाता। विपक्षी दलों, विशेषकर सीपीआई (एम), का आरोप है कि सरकार संविधान सभा की मूल भावना को बदलने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार देशभक्ति एक भावनात्मक और नैतिक मूल्य है, जिसे कानून के माध्यम से लागू नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि किसी नागरिक के व्यक्तिगत या धार्मिक विश्वास के कारण वह राष्ट्रगीत नहीं गाना चाहता, तो उसे अपराधी नहीं बनाया जा सकता। 

साथियों, सीपीआई (एम) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस विधेयक को वापस लेने की मांग की। पत्र में कहा गया कि संविधान सभा ने बहुत सोच-समझकर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की अलग- अलग संवैधानिक स्थिति निर्धारित की थी। पत्र में यह भी कहा गया कि भारत का संविधान नागरिकों को अंतरात्मा की स्वतंत्रता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान करता है। ऐसे में किसी गीत को कानून के माध्यम से अनिवार्य सम्मान दिलाने का प्रयास भविष्य में संवैधानिक विवादों को जन्म दे सकता है। विपक्ष का तर्क है कि राष्ट्रीय सम्मान और राष्ट्रीय अनिवार्यता के बीच सटीकता से  संतुलन बनाए रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है। 

साथियों, इस पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पक्ष धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ है। वंदे मातरम मूलतः बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा है। गीत के प्रारंभिक दो अंतरे व्यापक रूप से स्वीकार किए जाते हैं, जबकि बाद के अंशों में मां दुर्गा सहित कुछ धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख मिलता है। इतिहास में कई मुस्लिम संगठनों तथा अन्य अल्पसंख्यक समुदायों ने इन्हीं धार्मिक संदर्भों के आधार पर इसके पूर्ण गायन पर आपत्ति व्यक्त की थी। संविधान सभा ने भी इन ऐतिहासिक संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए केवल प्रारंभिक अंशों को सार्वजनिक उपयोग के लिए स्वीकार किया था। आलोचकों का कहना है कि यदि इस विधेयक के बाद किसी नागरिक की धार्मिक मान्यता और कानून के बीच टकराव उत्पन्न होता है, तो न्यायपालिका को अत्यंत जटिल संवैधानिक प्रश्नों का सटीकता से सामना करना पड़ सकता है। 

साथियों, इस संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय का 1986 का ऐतिहासिक निर्णय बिजोए इमैनुएल बनाम केरल राज्य बार-बार चर्चा में आ रहा है। इस मामले में यहोवा विटनेस समुदाय के तीन छात्रों ने धार्मिक विश्वास के कारण राष्ट्रगान नहीं गाया था, हालांकि वे सम्मानपूर्वक खड़े रहे। विद्यालय ने उन्हें निष्कासित कर दिया,लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि किसी नागरिक को उसकी अंतरात्मा के विरुद्ध राष्ट्रगान गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यदि वह सम्मानपूर्वक खड़ा है और राष्ट्रगान का अपमान नहीं कर रहा, तो केवल गीत न गाने के आधार पर उसे दंडित नहीं किया जा सकता। यह निर्णय भारतीय संवैधानिक कानून में अंतरात्मा की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। यही कारण है कि कई संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नया संशोधन कानून बनता है तो उसकी न्यायिक समीक्षा लगभग निश्चित है। मार्च 2026 में भी इस विषय पर न्यायिक चर्चा हुई थी। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यदि किसी सरकारी कार्यक्रम में वंदे मातरम बजाया जाता है तो केवल उसके बजने मात्र से प्रत्येक नागरिक पर उसे गाना अनिवार्य नहीं हो जाता। सम्मान प्रदर्शित करना और अनिवार्य रूप से गाना दो अलग-अलग बातें हैं। यह दृष्टिकोण भी इस बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है क्योंकि नया संशोधन और न्यायालय की पूर्व व्याख्याएं भविष्य में एक-दूसरे के साथ किस प्रकार संतुलित होंगी, यह अभी सटीकता से  स्पष्ट नहीं है।

साथियों,संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त है, जबकि अनुच्छेद 25 अंतरात्मा तथा धर्म की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है। दूसरी ओर अनुच्छेद 51ए (क) प्रत्येक नागरिक का मूल कर्तव्य बताता है कि वह संविधान,राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करे। उल्लेखनीय है कि इस अनुच्छेद में वंदे मातरम’ का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। यही कारण है कि कई विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संसद राष्ट्रगीत को वैधानिक संरक्षण देना चाहती है तो उसे यह भी स्पष्ट करना होगा कि यह संरक्षण मौलिक अधिकारों के साथ किस प्रकार संतुलित रहेगा।समर्थकों का तर्क है कि विश्व के अनेक देशों में राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान पर कठोर दंड का प्रावधान है। उनका कहना है कि यदि राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान की कानूनी सुरक्षा उचित मानी जाती है तो स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रेरणादायक गीत को भी समान सुरक्षा मिलनी चाहिए। उनके अनुसार राष्ट्रीय एकता केवल अधिकारों से नहीं, बल्कि नागरिक कर्तव्यों से भी मजबूत होती है। दूसरी ओर आलोचक कहते हैं कि भारत का लोकतांत्रिक मॉडल विविधता, सहमति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर आधारित है, इसलिए राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करते समय संवैधानिक स्वतंत्रताओं का भी समान महत्व होना चाहिए। 

साथियों, इस पूरे घटनाक्रम ने एक और महत्वपूर्ण प्रश्न सामने रखा है क्या देशभक्ति कानून से उत्पन्न होती है या सामाजिक चेतना से? भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास बताता है कि वंदे मातरम  और जन गण मन दोनों ने अलग-अलग समय में राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया। किंतु संविधान निर्माताओं ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को भी समान महत्व दिया। इसलिए भविष्य की किसी भी कानूनी व्यवस्था को इन दोनों मूल्यों के बीच सटिकता से  संतुलन स्थापित करना होगा। 

साथियों, अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से भी यह बहस महत्वपूर्ण है। विश्व के अनेक लोकतांत्रिक देशों में राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन लगातार न्यायालयों के सामने चुनौती बना रहता है। भारत का यह प्रस्तावित संशोधन भी संभवतः इसी व्यापक वैश्विक विमर्श का हिस्सा बनेगा कि राष्ट्रीय पहचान की रक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच सर्वोत्तम संतुलन किस प्रकार स्थापित किया जाए। 

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि यह कहा जा सकता है कि राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 केवल एक दंडात्मक कानून का प्रस्ताव नहीं है,बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र के तीन महत्वपूर्ण स्तंभों राष्ट्रीय सम्मान,संवैधानिक स्वतंत्रता और नागरिक कर्तव्य के बीच संतुलन स्थापित करने की परीक्षा भी है। यदि विधेयक कानून बनता है तो उसके प्रावधानों की न्यायिक समीक्षा लगभग निश्चित मानी जा रही है। वहीं यदि संसद में व्यापक सहमति बनती है तो यह राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा सकता है। परंतु यदि सहमति नहीं बनती, तो यह बहस आने वाले वर्षों तक संविधान,न्यायपालिका संसद और समाज के बीच चलने वाले सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक विमर्शों में से एक बनी रह सकती है। भारत जैसे बहुलतावादी लोकतंत्र में यही चुनौती है कि राष्ट्रीय गौरव की रक्षा भी हो, संविधान की आत्मा भी सुरक्षित रहे और नागरिक की अंतरात्मा की स्वतंत्रता भी अक्षुण्ण बनी रहे।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र