Thursday, April 23, 2026
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देवरिया में खेत की आग से दर्दनाक हादसा, झोपड़ी जली, दिव्यांग महिला की मौत

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के बरहज थाना क्षेत्र के कोटवा देवरा गांव में बुधवार दोपहर एक दर्दनाक हादसा हो गया। खेत में लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पास में बनी झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में झोपड़ी में मौजूद एक दिव्यांग महिला की झुलसकर मौत हो गई।

कैसे हुआ हादसा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पैना निवासी श्रीकिशुन ने दियारा क्षेत्र में फसलों और पशुओं की देखरेख के लिए एक झोपड़ी बना रखी थी। बुधवार दोपहर अज्ञात कारणों से खेत में गेहूं के डंठलों में आग लग गई। तेज पछुआ हवा के कारण आग तेजी से फैलती हुई झोपड़ी तक पहुंच गई।

महिला की दर्दनाक मौत

उस समय झोपड़ी में श्रीकिशुन की 40 वर्षीय दिव्यांग पत्नी बच्ची देवी अकेली मौजूद थीं।
आग की लपटें तेज होने के कारण उन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।

ग्रामीणों ने बचाने का प्रयास किया, लेकिन झोपड़ी पूरी तरह जल चुकी थी और महिला गंभीर रूप से झुलस गई थीं। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

मौके पर पहुंचे अधिकारी

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया।

उपजिलाधिकारी हरिशंकर लाल, तहसीलदार अरुण कुमार और थाना अध्यक्ष विशाल उपाध्याय मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली।

आग पीड़ितों को कैसे मिलता है मुआवजा?

ऐसे मामलों में सरकार द्वारा सहायता दी जाती है:

• आपदा राहत कोष से आर्थिक मदद
• झोपड़ी/घर के नुकसान पर मुआवजा
• राशन और जरूरी सामग्री
• अस्थायी रहने की व्यवस्था

पीड़ित परिवार तहसील/लेखपाल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

आग से बचाव के जरूरी उपाय

• खेतों में आग लगने पर तुरंत सूचना दें
• तेज हवा में आग जलाने से बचें
• आसपास पानी या मिट्टी रखें
• झोपड़ी/घर को खेत से सुरक्षित दूरी पर रखें

देवरिया में निःशुल्क बीज मिनीकिट व अनुदानित बीज की ऑनलाइन बुकिंग शुरू

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में किसानों के लिए खरीफ-2026 सीजन हेतु निःशुल्क बीज मिनीकिट एवं अनुदानित बीज उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी उदय शंकर सिंह ने जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि कृषि निदेशालय उत्तर प्रदेश द्वारा बीज वितरण व्यवस्था में बदलाव किया गया है, जिससे किसानों के बीच पारदर्शी और समान वितरण सुनिश्चित किया जा सके।

नई व्यवस्था के तहत किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार बीज की अग्रिम ऑनलाइन बुकिंग करेंगे। यदि बुकिंग निर्धारित लक्ष्य से अधिक होती है, तो लाभार्थियों का चयन ई-लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा।

चयनित किसान अपने विकास खंड के राजकीय कृषि बीज भंडार से पॉस मशीन पर अंगूठा लगाकर निःशुल्क मिनीकिट प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, अनुदानित बीज लेने के लिए किसानों को निर्धारित कृषक अंश जमा करना होगा।

जनपद में निःशुल्क वितरण के लिए अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, तिल एवं श्रीअन्न के मिनीकिट उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा सामान्य वितरण के तहत ढैंचा, धान, अरहर, मूंग, उड़द और संकर बीज (मक्का व धान) अनुदान पर दिए जाएंगे।

बीजों की ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया 22 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुकी है। इच्छुक किसान कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल https://agriculture.up.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं।

दिल्ली में मोमोज खाने से 12 लोग बीमार, बच्चे की हालत गंभीर

दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी दिल्ली के पटपड़गंज इलाके से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां सड़क किनारे बिक रहे मोमोज खाने के बाद एक दर्जन से अधिक लोग बीमार पड़ गए। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों के अनुसार, सभी बीमार लोगों ने एक ही ठेले से मोमोज खाए थे।

खाने के कुछ ही समय बाद लोगों को:

• उल्टी
• दस्त
• पेट दर्द
जैसी समस्याएं होने लगीं।

तबीयत बिगड़ने पर सभी को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

बच्चे की हालत गंभीर

इस घटना में एक छोटे बच्चे की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों की टीम उसकी लगातार निगरानी कर रही है।

जांच में जुटा प्रशासन

घटना की सूचना मिलते ही:

• पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची
• मोमोज के सैंपल जांच के लिए भेजे गए
• ठेला संचालक से पूछताछ जारी है

प्रारंभिक जांच में मामला फूड प्वाइजनिंग का माना जा रहा है।

बाहर का खाना खाने से कैसे बचें?

फूड प्वाइजनिंग से बचने के लिए ये सावधानियां अपनाएं:

• हमेशा साफ-सुथरी जगह का खाना ही खाएं
• सड़क किनारे खुले में रखे खाने से बचें
• ताजा और गर्म खाना ही लें
• हाथ धोकर ही भोजन करें
• दूषित पानी से बने खाने से बचें

फूड प्वाइजनिंग के लक्षण

• उल्टी और दस्त
• पेट में दर्द
• बुखार
• कमजोरी

ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

लोगों में डर और आक्रोश

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है। लोगों ने सड़क किनारे बिकने वाले खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।

देवरिया में संचारी रोग नियंत्रण अभियान तेज, गांव-गांव जागरूकता

भलुअनी/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में संचारी रोगों से बचाव के लिए एक अप्रैल से 30 अप्रैल तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत रोगी हितकारी मंच (पीएसपी) के सदस्य गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं और साफ-सफाई के प्रति प्रेरित कर रहे हैं।

तीन ब्लॉकों में सक्रिय पीएसपी टीम

जिले के पथरदेवा, भटनी और भलुअनी ब्लॉक के 13 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर गठित पीएसपी (Patient Stakeholder Platform) के सदस्य लगातार स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
इस अभियान में सीएचओ, ग्राम प्रधान, एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य लोग मिलकर सहयोग कर रहे हैं।

साफ-सफाई पर दिया जा रहा जोर

अभियान के तहत:

• गांवों में साफ-सफाई कराई जा रही है
• नालियों में एंटी-लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है
• कूलर का पानी नियमित बदलने की सलाह दी जा रही है

लोगों को स्वच्छता अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

किन बीमारियों से बचाव पर फोकस?

पीएसपी सदस्य लोगों को इन बीमारियों से बचाव के लिए जागरूक कर रहे हैं:

• मलेरिया
• डेंगू
• चिकनगुनिया
• फाइलेरिया
• कालाजार
• बुखार और खांसी

संचारी रोगों से बचने के आसान उपाय

अपनी सुरक्षा के लिए ये जरूरी कदम अपनाएं:

• घर के आसपास पानी जमा न होने दें
• मच्छरदानी का उपयोग करें
• खिड़की-दरवाजों में जाली लगवाएं
• साफ और शुद्ध पानी पिएं
• खाने से पहले हाथ साबुन से धोएं
• खुले में शौच न करें

लोगों से अपील

स्वास्थ्य विभाग और पीएसपी टीम ने लोगों से अपील की है कि वे साफ-सफाई रखें और स्वास्थ्य नियमों का पालन करें, ताकि संचारी रोगों को फैलने से रोका जा सके।

संतकबीरनगर में सड़क सुरक्षा सख्त: ब्लैक स्पॉट पर रम्बल स्ट्रिप अनिवार्य

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में सड़क हादसों पर नियंत्रण के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी Alok Kumar ने जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में निर्देश दिए कि सभी ब्लैक स्पॉट पर टेबल टॉप रम्बल स्ट्रिप अनिवार्य रूप से बनाई जाएं।

कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

ब्लैक स्पॉट पर विशेष ध्यान

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि दुर्घटना संभावित स्थानों (ब्लैक स्पॉट) पर:

• रम्बल स्ट्रिप बनाई जाए
• संकेतक (साइन बोर्ड) लगाए जाएं
• सड़क किनारे की झाड़ियों की सफाई हो
इससे हादसों में कमी लाने का लक्ष्य रखा गया है।

ट्रैफिक नियमों का कड़ाई से पालन

परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को निर्देश दिए गए कि:

• गलत दिशा में चलने वालों पर कार्रवाई हो
• नो-पार्किंग में खड़े वाहनों का चालान किया जाए
• हेलमेट और सीट बेल्ट का सख्ती से पालन कराया जाए

वाहनों के लिए जरूरी निर्देश

• ट्रैक्टर-ट्रॉली व मालवाहक वाहनों पर रिफ्लेक्टर पट्टी अनिवार्य
• अनफिट और पुराने वाहनों पर कार्रवाई
• 15 साल से अधिक पुराने वाहनों का चिन्हीकरण

आपातकालीन सुविधा पर जोर

दुर्घटना की स्थिति में:

• एंबुलेंस और क्रेन की उपलब्धता सुनिश्चित करने
• एनएचएआई सड़कों की मरम्मत और अवैध कट्स बंद करने के निर्देश दिए गए

स्कूली वाहनों की जांच

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि:

• सभी स्कूली वाहनों का सत्यापन किया जाए
• फिटनेस और परमिट की नियमित जांच हो
• अनफिट वाहनों को तुरंत बंद किया जाए

सड़क हादसों से बचने के उपाय

अपनी सुरक्षा के लिए ये नियम अपनाएं:

• हमेशा हेलमेट और सीट बेल्ट पहनें
• ओवरस्पीडिंग से बचें
• ट्रैफिक सिग्नल का पालन करें
• गलत दिशा में वाहन न चलाएं

महिलाओं के अधिकार में देरी क्यों? कांग्रेस ने सरकार से मांगा जवाब

सलेमपुर, देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। सलेमपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित कार्यकर्ताओं की बैठक में महिला आरक्षण बिल को लेकर जोरदार चर्चा हुई और इसे तत्काल लागू करने की मांग उठाई गई। बैठक में सलेमपुर और भाटपाररानी विधानसभा क्षेत्रों के संगठन की गहन समीक्षा भी की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष विजयशेखर मल्ल रोशन ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल को जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तों से जोड़ना महिलाओं के अधिकारों को टालने जैसा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार को बिना किसी देरी के इस बिल को लागू करना चाहिए, ताकि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिल सके।

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उन्होंने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी दिलाने की लड़ाई कांग्रेस ने वर्षों पहले शुरू की थी। वर्ष 2010 में यूपीए सरकार के दौरान महिला आरक्षण बिल राज्यसभा से पारित भी हुआ था, लेकिन लोकसभा में आवश्यक समर्थन न मिलने के कारण यह कानून का रूप नहीं ले सका। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय विपक्ष के विरोध के चलते यह ऐतिहासिक अवसर छिन गया। रोशन ने कहा कि यदि सभी दल उस समय साथ आते, तो आज देश की महिलाओं को 14 वर्ष पहले ही उनका अधिकार मिल चुका होता।
उन्होंने वर्तमान सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा महिला आरक्षण बिल को लागू करने में जानबूझकर देरी की जा रही है। जनगणना और परिसीमन की अनिवार्यता जोड़कर इसे वर्ष 2029 तक टालने की रणनीति अपनाई गई है, जो महिलाओं के साथ न्याय नहीं है।
संगठन की समीक्षा के दौरान जिलाध्यक्ष ने ब्लॉक अध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे जल्द से जल्द बूथ स्तर पर कमेटियों का गठन पूरा करें। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन ही चुनावी सफलता की कुंजी है और इसके लिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता जरूरी है।
जिला उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेन्द्र पांडेय ने अपने संबोधन में भाजपा पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को जो भी अधिकार आज तक मिले हैं, उनमें कांग्रेस की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता के बीच जाकर सच्चाई को सामने रखें।

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जिला उपाध्यक्ष अब्दुल जब्बार ने कहा कि वर्तमान शासन से जनता में निराशा बढ़ रही है और लोग बदलाव चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जनता को अब यह एहसास हो गया है कि देश के विकास और सामाजिक न्याय के लिए कांग्रेस का मजबूत होना आवश्यक है।
बैठक में जिला महासचिव मार्कण्डेय मिश्र, जगरनाथ यादव, वशिष्ठ मोदनवाल, दीनदयाल प्रसाद, सत्यम पांडेय, रजनीश प्रसाद, धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय, मनीष रजक, बृजेश यादव, डॉ. रमेश कुशवाहा, वजीर अहमद, ध्रुवप्रसाद आर्य, परमानन्द प्रसाद, सत्यवान पाण्डेय, शमशुल आजम, मोजाहिद लारी, रोहित यादव, राहुल मिश्र, डॉ. याहिया अंजुम, रामविलास शर्मा, परवेज लारी, गौरव नारायण यादव, सैयद फिरोज अहमद और डॉ. नरेन्द्र यादव समेत कई अन्य नेताओं ने भी अपने विचार रखे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और आगामी राजनीतिक रणनीति तैयार करना रहा। कार्यकर्ताओं में जोश और उत्साह देखने को मिला तथा सभी ने एकजुट होकर पार्टी को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

दुल्हन की विदाई के बाद लौट रही कार की ट्रक से भिड़ंत, दूल्हे के जीजा की मौत, तीन घायल

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के महुली थाना क्षेत्र के भगता गांव के पास बुधवार को कार और ट्रक की आमने-सामने की टक्कर में दूल्हे के जीजा संतोष सोनी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूल्हा-दुल्हन समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों का जिला संयुक्त चिकित्सालय में इलाज चल रहा है।
हादसे में घायल दूल्हा अजय वर्मा (26), दुल्हन बबीता सोनी (22) और नैना सोनी (20) को पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया। टक्कर इतनी तेज थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।

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पुलिस के अनुसार कार में कुल चार लोग सवार थे और इसे संतोष सोनी चला रहे थे, जो पैकवलिया, थाना गौर (बस्ती) के निवासी थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।


बताया गया कि अजय सोनी निवासी हैंसर (धनघटा) की शादी दानोंकुइया (दुधारा) निवासी बबीता सोनी के साथ हुई थी। 21 अप्रैल को बारात बस्ती के एक मैरिज हॉल में गई थी और विवाह के बाद 22 अप्रैल को विदाई के बाद सभी लोग कार से घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया।
थानाध्यक्ष दुर्गेश पांडेय ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।

नहर किनारे जली लाश से हड़कंप, पहचान छुपाने की साजिश का शक

नहर किनारे जली अवस्था में मिला महिला का शव, सनसनी—हत्या की आशंका से दहशत में ग्रामीण


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र अंतर्गत सेमरा चंद्रौली गांव में बुधवार की सुबह एक भयावह घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। गांव के पास बड़ी नहर के किनारे एक महिला का बुरी तरह जला हुआ शव मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल बन गया और मौके पर भारी भीड़ इकट्ठा हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह खेतों की ओर जा रहे कुछ ग्रामीणों ने नहर के पश्चिम दिशा में स्थित राजा राम सिंह के खेत के पास जली हुई अवस्था में एक शव देखा। शव की हालत इतनी गंभीर थी कि उसे पहचान पाना बेहद मुश्किल हो रहा था। यह दृश्य देखकर ग्रामीण सहम गए और तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी।
सूचना मिलते ही श्यामदेउरवा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल को घेरकर जांच शुरू कर दी। कुछ ही देर में क्षेत्राधिकारी अंकुर गौतम भी वहां पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए पुलिस टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ भी मौके पर पहुंचे और जांच को तेज करने के निर्देश दिए।
प्रारंभिक जांच में मृतका की उम्र लगभग 35 वर्ष के आसपास बताई जा रही है, हालांकि शव की स्थिति अत्यधिक जली होने के कारण पहचान करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। पुलिस ने आसपास के गांवों में महिला की पहचान के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं और लापता महिलाओं के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है।
घटना को संदिग्ध मानते हुए फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए और आसपास के क्षेत्र की गहन जांच की। विशेषज्ञों का मानना है कि शव को जलाकर पहचान छुपाने की कोशिश की गई हो सकती है, जिससे हत्या की आशंका और मजबूत हो रही है।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा। वहीं, पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और घटनास्थल के आसपास की गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की घटना ने इलाके की शांति को भंग कर दिया है और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कई लोगों ने रात के समय संदिग्ध गतिविधियों की भी चर्चा की, जिसकी पुलिस जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है—चाहे वह हत्या हो, आत्महत्या या फिर किसी साजिश का हिस्सा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जल्द ही घटना का खुलासा किया जाएगा और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस टीम पूरी सतर्कता के साथ जांच में जुटी हुई है और हर संभव साक्ष्य को खंगाल रही है ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।

भीषण आग की त्रासदी के बीच मानवता की मिसाल, समाजसेवियों ने संभाली बेटियों की शादी की जिम्मेदारी


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद के बेल्थरा रोड तहसील क्षेत्र के हल्दीहामपुर छपिया गांव में हाल ही में लगी भीषण आग ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी को गहरे संकट में डाल दिया। आग की इस विनाशकारी घटना में न केवल लोगों के घर जलकर खाक हो गए, बल्कि अनाज, कपड़े और वर्षों की मेहनत से जोड़ी गई जमा पूंजी भी राख में तब्दील हो गई। इस हादसे के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में पीड़ा और असहायता का माहौल व्याप्त है।
इस कठिन परिस्थिति में समाज के विभिन्न वर्गों से लोग आगे आकर पीड़ितों की सहायता कर रहे हैं, जो मानवता और सामाजिक एकता की एक प्रेरणादायक मिसाल बन रही है। इसी क्रम में समाजसेवी राकेश लाइट (मालदा) और उनके सहयोगियों ने एक सराहनीय पहल करते हुए उन परिवारों की मदद का बीड़ा उठाया है, जिनकी बेटियों की शादी इस त्रासदी के कारण संकट में पड़ गई थी।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवारों में बबलू की पुत्री वंदना की शादी 14 मई को तथा विक्रमा राजभर की पुत्री प्रियंका की शादी 25 जून को तय थी। आग लगने के कारण दोनों परिवारों के सामने शादी की तैयारियां पूरी करना एक बड़ी चुनौती बन गया था। ऐसे समय में जब परिवार पूरी तरह टूट चुके थे, तब समाजसेवियों ने आगे बढ़कर न केवल उनका हौसला बढ़ाया, बल्कि उनकी जिम्मेदारियों को भी साझा किया।
राकेश लाइट और उनकी टीम ने दोनों शादियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं जैसे जनरेटर, टेंट और जयमाल की व्यवस्था नि:शुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक सहायता देने का भी संकल्प लिया, ताकि दोनों परिवार बिना किसी बाधा के अपनी बेटियों का विवाह संपन्न कर सकें। यह सहयोग पीड़ित परिवारों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।

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बुधवार को राकेश लाइट अपने सहयोगियों के साथ हल्दीहामपुर गांव पहुंचे, जहां उन्होंने दोनों परिवारों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की। इस दौरान गांव का माहौल भावुक हो उठा। एक ओर जहां लोग अपने नुकसान से व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर समाजसेवियों की इस पहल से उनके चेहरे पर उम्मीद की झलक साफ दिखाई दी।
इस अवसर पर नमोद तिवारी, पुरुषोत्तम गुप्ता सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि इस संकट की घड़ी में समाज के हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए और पीड़ितों की मदद करनी चाहिए, ताकि वे जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें।
यह घटना न केवल एक त्रासदी की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब समाज एकजुट होकर खड़ा होता है, तो बड़े से बड़ा संकट भी छोटा पड़ जाता है। हल्दीहामपुर गांव में समाजसेवियों की यह पहल पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है और यह संदेश देती है कि कठिन समय में सहयोग और संवेदनशीलता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है।

केदारनाथ से बद्रीनाथ तक आस्था का सफर, नए नियमों ने बदली यात्रा की तस्वीर

चारधाम यात्रा 2026: सख्त नियमों के बीच शुरू हुई आस्था की महायात्रा, सुरक्षा और अनुशासन पर खास जोर


देहरादून (राष्ट्र की परम्परा धर्म डेस्क)उत्तराखंड की पवित्र वादियों में एक बार फिर श्रद्धा और भक्ति की गूंज सुनाई देने लगी है। चारधाम यात्रा 2026 विधिवत शुरू हो चुकी है और राज्य के पहाड़ी क्षेत्र तीर्थयात्रियों की आवाजाही से पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। इस वर्ष यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित प्रबंधन और सख्त नियमों के साथ एक अनुशासित आध्यात्मिक अभियान के रूप में सामने आई है।
19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ, जबकि 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलने जा रहे हैं। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और पवित्रता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया है।
चारधाम यात्रा का मार्ग इस बार भी रोमांच और श्रद्धा का संगम बना हुआ है। केदारनाथ धाम तक पहुंचना सबसे कठिन माना जाता है, क्योंकि यहां सीधे सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं है। श्रद्धालुओं को गौरीकुंड से लगभग 16 से 18 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी होती है। जो यात्री पैदल चलने में असमर्थ हैं, उनके लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है, जिसकी बुकिंग केवल आईआरसीटीसी के अधिकृत पोर्टल से ही की जा सकती है।

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इसके विपरीत बद्रीनाथ और गंगोत्री धाम सड़क मार्ग से जुड़े होने के कारण बुजुर्गों और कमजोर यात्रियों के लिए अपेक्षाकृत आसान हैं। वहीं यमुनोत्री धाम के लिए जानकी चट्टी से करीब 5 से 6 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है। आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होने वाली यह यात्रा 10 से 12 दिनों में पूरी की जाती है।
इस वर्ष मंदिर परिसरों में अनुशासन बनाए रखने के लिए कई सख्त नियम लागू किए गए हैं। केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन और कैमरे के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। श्रद्धालुओं के लिए क्लॉकरूम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है ताकि वे अपने उपकरण सुरक्षित रख सकें। मंदिर के भीतर मूर्तियों, धार्मिक ग्रंथों या घंटियों को छूने की अनुमति नहीं है। प्रशासन का उद्देश्य है कि हर श्रद्धालु को शांत और व्यवस्थित वातावरण में दर्शन का अवसर मिल सके।
यात्रा के लिए इस बार पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। बिना पंजीकरण के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। यात्री उत्तराखंड पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। आधार कार्ड के जरिए पहचान सत्यापन किया जा रहा है और प्रत्येक यात्री को क्यूआर कोड आधारित ई-पास जारी किया जा रहा है, जिसकी जांच विभिन्न पड़ावों पर की जाएगी।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी इस बार विशेष तैयारी की गई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाली दिक्कतों को देखते हुए पूरे मार्ग पर 177 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। एम्स ऋषिकेश द्वारा हेली-एम्बुलेंस सेवा भी शुरू की गई है, जिससे आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। 55 वर्ष से अधिक आयु के यात्रियों या पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने और फिटनेस प्रमाणपत्र साथ रखने की सलाह दी गई है।

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यात्रा के दौरान सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहन संचालन पर भी नियंत्रण लगाया गया है। पहाड़ी मार्गों पर रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक यात्रा पर प्रतिबंध रहेगा। सभी वाहनों का तकनीकी परीक्षण अनिवार्य किया गया है और संकरी सड़कों पर बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। यातायात दबाव को कम करने के लिए जरूरत पड़ने पर रूट डायवर्जन भी लागू किया जा सकता है।
चारधाम यात्रा का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यमुनोत्री धाम देवी यमुना का उद्गम स्थल माना जाता है, जबकि गंगोत्री धाम मां गंगा को समर्पित है। केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख तीर्थ है, वहीं बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु की तपस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि हिमालय की गोद में आत्मिक शांति और आत्मचिंतन का भी अवसर प्रदान करती है।
सरकार और प्रशासन की नई व्यवस्थाओं का उद्देश्य यही है कि हर श्रद्धालु सुरक्षित, व्यवस्थित और दिव्य अनुभव के साथ अपनी यात्रा पूरी कर सके। चारधाम यात्रा 2026 इस बार आस्था के साथ-साथ अनुशासन और आधुनिक प्रबंधन का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आ रही है।

छोटे शहर से बड़ी उड़ान: जी एम एकेडमी के छात्रों ने किया कमाल

जेईई-मेन में जी एम एकेडमी का जलवा: आयुष 97.5 परसेंटाइल, दीक्षा एडवांस के करीब


सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही जी एम एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। विद्यालय के मेधावी छात्र आयुष कुशवाहा और दीक्षा शर्मा ने जेईई-मेन परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर न केवल विद्यालय बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
सत्र 2024-25 के संस्थागत छात्र आयुष कुशवाहा, जो सलेमपुर निवासी अनूप कुमार के पुत्र हैं, ने जेईई-मेन में 97.5 परसेंटाइल अंक प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। खास बात यह रही कि उन्होंने निर्धारित कटऑफ से 16.62 परसेंटाइल अधिक अंक प्राप्त कर एक नई मिसाल कायम की। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
वहीं, विद्यालय की प्रतिभाशाली छात्रा दीक्षा शर्मा, जो श्यामसुंदर शर्मा की पुत्री हैं, ने 83.21 परसेंटाइल अंक प्राप्त कर जेईई-एडवांस के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। उनकी सफलता भी क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। दोनों छात्रों की इस सफलता से सलेमपुर में खुशी का माहौल है।

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इस उपलब्धि के साथ ही जी एम एकेडमी ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि यहां की शिक्षा प्रणाली, अनुशासन और मार्गदर्शन छात्रों को उच्च स्तर तक पहुंचाने में सक्षम है। विद्यालय के इन दोनों होनहार विद्यार्थियों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुओं को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने दोनों छात्रों को माला पहनाकर और मिष्ठान खिलाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि आयुष और दीक्षा शुरू से ही अनुशासित, परिश्रमी और विनम्र छात्र रहे हैं। उनकी सफलता विद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों छात्र जेईई-एडवांस में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश की सेवा में अपना योगदान देंगे। साथ ही उन्होंने अन्य विद्यार्थियों को भी इनसे प्रेरणा लेने की सलाह दी।
जी एम एकेडमी ग्रुप के चेयरमैन डॉ. श्री प्रकाश मिश्र ने भी छात्रों की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल छात्रों की मेहनत का परिणाम है बल्कि विद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था का भी प्रमाण है। उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकों और अभिभावकों को इस सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे परिणाम संस्था की प्रतिष्ठा को और ऊंचा उठाते हैं।

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इस अवसर पर विद्यालय परिवार के कई सदस्य मौजूद रहे, जिनमें दिलीप कुमार सिंह, सीमा पांडेय, राकेश मिश्र, आदित्य, अमुल्य सहित अन्य लोग शामिल थे। सभी ने छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
आयुष और दीक्षा की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छोटे शहरों के विद्यार्थी भी बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें पूरा कर सकते हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाले समय में अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

मानदेय बकाया से नाराज रोजगार सेवक सड़क पर, विकास कार्यों पर पड़ा असर

आठ माह से मानदेय बकाया, ग्राम रोजगार सेवकों का फूटा गुस्सा—हड़ताल से ठप पड़े विकास कार्य, उग्र आंदोलन की चेतावनी


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में ग्राम रोजगार सेवकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहे इन कर्मियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। पिछले आठ महीनों से मानदेय और ईपीएफ भुगतान लंबित होने के कारण उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। नाराज रोजगार सेवकों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
मंगलवार को उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष ब्रह्मानंद के नेतृत्व में जिले के सभी 12 ब्लॉकों के रोजगार सेवक एकजुट होकर उपायुक्त श्रम रोजगार गौरवेंद्र सिंह से मिले। इस दौरान उन्होंने अपनी समस्याओं को विस्तार से रखते हुए तत्काल समाधान की मांग की। कर्मियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।
ग्राम रोजगार सेवकों ने बताया कि आठ महीने से मानदेय न मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करना उनके लिए चुनौती बन चुका है। इसके बावजूद उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनमें गहरी नाराजगी है।
ईपीएफ कटौती को लेकर भी कर्मियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके वेतन से नियमित रूप से ईपीएफ की कटौती की जाती है, लेकिन यह राशि उनके खातों में जमा नहीं हो रही है। इससे उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। रोजगार सेवकों ने इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय बताते हुए तत्काल जांच और भुगतान की मांग की है।
वहीं, जिला प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए डीसी मनरेगा ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार प्राथमिकता के आधार पर पहले मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान कराया जा रहा है। इसके बाद ग्राम रोजगार सेवकों के मानदेय का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि ईपीएफ से जुड़े मामलों की जांच के लिए शासन स्तर पर तीन उपायुक्त श्रम की एक लीगल कमेटी गठित की गई है, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच रोजगार सेवकों ने मुख्य विकास अधिकारी को सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया, लेकिन उनके अनुपस्थित रहने के कारण ज्ञापन कार्यालय में ही जमा कर दिया गया। ज्ञापन में मानदेय भुगतान, ईपीएफ जमा, सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण सहित कई महत्वपूर्ण मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है।
हड़ताल का असर अब मनरेगा से जुड़े कार्यों पर साफ दिखाई देने लगा है। कई विकास योजनाओं की प्रगति प्रभावित हो रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका असर महसूस किया जा रहा है। इसके बावजूद रोजगार सेवकों का कहना है कि अब वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं और किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।
कर्मियों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन और घेराव करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
इस मौके पर जिला महासचिव इन्द्र मणि विश्वकर्मा, इन्द्र विजय यादव, सर्वेश, अमित पटेल, राम आशीष, रमेश, प्रवीण मणि, बंधु मद्धेशिया, वीरेंद्र गुप्ता, ए.के. चन्द्रा, राजेश, धर्मेन्द्र, मक्खन, सत्य नारायण प्रजापति सहित बड़ी संख्या में ग्राम रोजगार सेवक मौजूद रहे।

समरसता से सशक्त समाज की ओर: विविधता में एकता ही भारत की असली पहचान


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। बदलते समय के इस दौर में जहां समाज तेजी से आधुनिकता और तकनीकी विकास की ओर बढ़ रहा है, वहीं सामाजिक समरसता का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। आर्थिक उन्नति और प्रगति के इस मार्ग पर यदि कोई तत्व सबसे आवश्यक है, तो वह है आपसी विश्वास, सम्मान और सहयोग की भावना। यही समरसता समाज को बिखरने से बचाती है और उसे एक मजबूत आधार प्रदान करती है।
भारत विविधताओं का देश है—यहां भाषा, धर्म, संस्कृति और जीवन-शैली में व्यापक अंतर देखने को मिलता है। लेकिन इन विविधताओं के बावजूद “एकता में अनेकता” ही हमारी सबसे बड़ी पहचान है। जब यह विविधता आपसी सहयोग और सम्मान के साथ जुड़ती है, तो यह शक्ति बन जाती है। वहीं, यदि इसमें भेदभाव और असहिष्णुता जुड़ जाए, तो यही विविधता समाज के लिए चुनौती बन जाती है।

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वर्तमान समय में समाज के भीतर बढ़ती असहिष्णुता और छोटे-छोटे मुद्दों पर बढ़ते विवाद चिंता का विषय हैं। जातिगत भेदभाव, धार्मिक कटुता और क्षेत्रीय असमानताएं सामाजिक संतुलन को कमजोर करती हैं। इसका प्रभाव न केवल वर्तमान पीढ़ी पर पड़ता है, बल्कि युवाओं के भविष्य और सोच को भी प्रभावित करता है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए खतरा बन सकती हैं।
समरसता का अर्थ केवल साथ रहना नहीं, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं और अधिकारों का सम्मान करना है। जब समाज का हर व्यक्ति खुद को सुरक्षित, सम्मानित और समान अवसरों का अधिकारी महसूस करता है, तभी सच्ची समरसता स्थापित होती है। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने व्यवहार में बदलाव लाएं—दूसरों की बातों को समझें, मतभेदों को संवाद के माध्यम से सुलझाएं और सहयोग की भावना को अपनाएं।

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शिक्षा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही समानता, सहिष्णुता और भाईचारे के मूल्यों की शिक्षा दी जाए, तो आने वाली पीढ़ी एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकती है। इसके साथ ही मीडिया और सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वे सकारात्मक संदेशों का प्रसार करें और समाज को जोड़ने का कार्य करें।
स्थानीय स्तर पर भी कई जागरूक नागरिक और संगठन समरसता को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं। सामूहिक कार्यक्रम, संवाद और जागरूकता अभियान लोगों को एक मंच पर लाकर आपसी समझ को मजबूत कर रहे हैं। यह प्रयास यह साबित करते हैं कि यदि इच्छा शक्ति हो, तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।
सरकारी योजनाओं और नीतियों का उद्देश्य भी तभी सफल होता है, जब उनका लाभ समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचे। यदि किसी भी स्तर पर भेदभाव रह जाता है, तो समरसता की भावना कमजोर हो जाती है। इसलिए प्रशासनिक पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

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सोशल मीडिया का प्रभाव भी आज समाज पर तेजी से बढ़ रहा है। जहां यह जागरूकता फैलाने का माध्यम है, वहीं गलत सूचनाओं और अफवाहों के जरिए समाज में विभाजन भी पैदा कर सकता है। ऐसे में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह सतर्क रहे और किसी भी नकारात्मक या भ्रामक जानकारी को फैलाने से बचे।
अंततः, समरसता कोई एक दिन का प्रयास नहीं, बल्कि एक निरंतर प्रक्रिया है। इसे जीवन का हिस्सा बनाकर ही हम एक सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं। जब हर व्यक्ति भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना विकसित करेगा, तभी सच्ची एकता स्थापित होगी।
समरस समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव होता है। जब यह नींव मजबूत होगी, तभी विकास की इमारत स्थायी और समृद्ध बन पाएगी।

स्किल्ड वर्कफोर्स के दम पर भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़त

भारत की उभरती वैश्विक ताकत: लोकतंत्र, युवा जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स का अनोखा संगम


गोंदिया (महाराष्ट्र)। भारत आज वैश्विक मंच पर केवल एक देश नहीं, बल्कि स्थिरता, अवसर और विकास का केंद्र बनकर उभर रहा है। 21वीं सदी में भारत की बढ़ती ताकत को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि उसके मजबूत लोकतंत्र, युवा जनसंख्या और कुशल कार्यबल के समन्वय के रूप में देखा जा रहा है।
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी के अनुसार, भारत की यही तीन प्रमुख शक्तियाँ—लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स—उसे विश्व के लिए “विन-विन साझेदार” बनाती हैं।
भारत का लोकतंत्र इसकी सबसे बड़ी ताकत है। 1950 में संविधान लागू होने के बाद से देश ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती से अपनाया है। नियमित चुनाव, स्वतंत्र न्यायपालिका और पारदर्शी शासन व्यवस्था ने देश को राजनीतिक स्थिरता प्रदान की है। विविधताओं से भरे इस देश में एकता और लोकतांत्रिक सहभागिता का मॉडल विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। यही कारण है कि वैश्विक कंपनियाँ भारत को निवेश के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद बाजार मानती हैं।
दूसरी महत्वपूर्ण शक्ति भारत की जनसांख्यिकी है। लगभग 1.43 अरब की आबादी में 65 प्रतिशत से अधिक युवा वर्ग शामिल है। यह युवा शक्ति नवाचार, तकनीकी अपनाने और उद्यमिता में अग्रणी है। भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में तेजी से उभर रहा है, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास को नई दिशा मिल रही है।
तीसरी और निर्णायक शक्ति है भारत का स्किल्ड वर्कफोर्स। आईटी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर वैश्विक तकनीकी केंद्र बन चुके हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका ने विश्व स्तर पर उनकी दक्षता को साबित किया।

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जब वैश्विक कंपनियाँ भारत में निवेश करती हैं, तो उन्हें एक साथ तीन प्रमुख लाभ मिलते हैं—स्थिर राजनीतिक माहौल, विशाल उपभोक्ता बाजार और प्रतिभाशाली मानव संसाधन। यही कारण है कि बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत को भविष्य का प्रमुख निवेश केंद्र मान रही हैं।
हालांकि, चुनौतियाँ भी मौजूद हैं। शिक्षा और कौशल में असमानता, आधारभूत संरचना की कमी और बेरोजगारी जैसी समस्याएँ अभी भी सामने हैं। लेकिन सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों के माध्यम से इन चुनौतियों को अवसरों में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
निष्कर्षतः, भारत का विकास मॉडल केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए अवसरों का द्वार खोलता है। लोकतंत्र, युवा ऊर्जा और कुशल कार्यबल का यह संगम आने वाले समय में भारत को एक मजबूत वैश्विक शक्ति और भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करेगा।

लेखक: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)

सड़क हादसे में महिला की मौत, गांव में शोक की लहर

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के घुघली थाना क्षेत्र में मंगलवार को हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। ग्राम मठिया, पोस्ट बसन्तपुर निवासी 28 वर्षीय पुनीता प्रजापति की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई, जिससे परिवार में कोहराम मच गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पुनीता अपने पति चंदेश्वर प्रजापति के साथ मोटरसाइकिल से घर लौट रही थीं। दोपहर करीब 12:30 बजे मंगलपुर पटखौली रेलवे क्रॉसिंग के पास अचानक बाइक का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क पर गिर पड़ीं। इसी दौरान पीछे से आ रहे तेज रफ्तार चारपहिया वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह गंभीर रूप से घायल हो गईं।

घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुघली पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल महराजगंज रेफर कर दिया गया। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे के बाद गांव में शोक की लहर फैल गई है।

थानाध्यक्ष घुघली कुंवर गौरव सिंह ने बताया कि मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।