Wednesday, April 8, 2026
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डीडीयू में तैयार हो रहे आधुनिक दीक्षा भवन और संवाद भवन, अगले माह से शुरू होंगे कार्यक्रम

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में नवनिर्मित दीक्षा भवन एवं संवाद भवन ऑडिटोरियम अपने अंतिम निर्माण चरण में पहुंच गए हैं। दोनों भवनों में शेष कार्य तीव्र गति से पूर्ण किया जा रहा है और संभावना है कि आगामी माह से इनमें शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक कार्यक्रमों का आयोजन प्रारंभ हो जाएगा।
इन अत्याधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण से विश्वविद्यालय परिसर में अकादमिक गतिविधियों को नई ऊर्जा मिलेगी तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों के आयोजन के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
दीक्षा भवन एक पूर्णतः वातानुकूलित अत्याधुनिक सभागार है, जिसमें 576 व्यक्तियों के बैठने की क्षमता है। लगभग 7000 वर्गफुट क्षेत्रफल में निर्मित इस भवन में उच्च गुणवत्ता का फ्लोर कार्पेट और आधुनिक ऑडियो-विजुअल सिस्टम स्थापित किया गया है। पूरे भवन में 68 टन क्षमता का VRV एयर कंडीशनिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे संतुलित तापमान और आरामदायक वातावरण सुनिश्चित होता है।
भवन में पुरुष एवं महिला के लिए पृथक ग्रीन रूम (एयर कंडीशनर सहित), सुसज्जित वीआईपी प्रतीक्षालय (स्प्लिट एसी सहित) तथा 100 से अधिक व्यक्तियों की क्षमता वाला एंट्रेंस हॉल (5 स्प्लिट एसी सहित) भी बनाया गया है। बाहरी परिसर का भी विकास किया गया है, जहां 80 स्ट्रीट लाइट पोल और 100 पत्थर की बेंचें स्थापित की गई हैं, जिससे आगंतुकों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
पीएम ऊषा योजना के अंतर्गत दीक्षा भवन के निर्माण पर लगभग 953.46 लाख रुपये तथा संवाद भवन पर लगभग 406.00 लाख रुपये की लागत व्यय की गई है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि दीक्षा भवन एवं संवाद भवन विश्वविद्यालय के अधोसंरचनात्मक विकास में मील का पत्थर साबित होंगे। इन सुविधाओं से शिक्षण और शोध गतिविधियों को नई गति मिलेगी और विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
इन भवनों के क्रियाशील होने से विश्वविद्यालय में शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा और संस्थान की राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और अधिक सुदृढ़ होगी।

“6 साल बाद इंसाफ: सातानकुलम केस में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा”

सातानकुलम कस्टोडियल डेथ केस: मदुरै कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, मानवाधिकारों की रक्षा में न्याय की निर्णायक जीत


गोंदिया वैश्विक स्तर पर वर्ष 2020 में जब दुनिया कोविड-19 महामारी के अभूतपूर्व संकट से जूझ रही थी, तब भारत में लागू लॉकडाउन ने जहां एक ओर जनजीवन को थाम दिया, वहीं दूसरी ओर सत्ता के दुरुपयोग और मानवाधिकारों के उल्लंघन के कुछ गंभीर मामले भी सामने आए। इन्हीं में से एक था तमिलनाडु के सातानकुलम का चर्चित कस्टोडियल डेथ केस, जिसने पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया था।
19 जून 2020 को सातानकुलम में एक सामान्य घटना ने भयावह रूप ले लिया। मोबाइल दुकान चलाने वाले पी. जयराज (59) और उनके बेटे जे. बेनिक्स (31) पर लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया, लेकिन यह कार्रवाई कानून के दायरे से बाहर जाकर अमानवीय अत्याचार में बदल गई। परिजनों के अनुसार, दोनों को पूरी रात बेरहमी से पीटा गया, जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई। न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद 22 जून को बेनिक्स और 23 जून को जयराज की मौत हो गई।शुरुआत में पुलिस ने मौत का कारण स्वास्थ्य समस्याएं बताया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सच्चाई उजागर कर दी। शरीर पर गंभीर चोटों के निशान इस बात का प्रमाण थे कि यह महज हिरासत नहीं, बल्कि क्रूरता की पराकाष्ठा थी। एक महिला कांस्टेबल के बयान ने भी इस घटना की भयावहता को उजागर किया, जिसके बाद पूरे देश में आक्रोश फैल गया।

लेखक-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया


यह मामला छह वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया से गुजरा। सबूतों की सुरक्षा, गवाहों की रक्षा और कानूनी जटिलताओं के बीच लंबी लड़ाई के बाद 6 अप्रैल 2026 को मदुरै की फर्स्ट एडिशनल सेशंस कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। अदालत ने इस मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मानते हुए 9 पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि यह केवल हत्या नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग और मानवीय गरिमा का घोर उल्लंघन है।
भारतीय न्याय प्रणाली में “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” सिद्धांत, जिसकी नींव बचन सिंह बनाम पंजाब राज्य जैसे ऐतिहासिक फैसले में रखी गई थी, केवल अत्यंत क्रूर और असाधारण मामलों में लागू होता है। इस केस में अदालत ने माना कि कानून के रक्षक ही अपराधी बन गए, जिससे समाज में भय और अन्याय की स्थिति उत्पन्न हुई।
अदालत ने दोषियों को सजा देने के साथ-साथ पीड़ित परिवार को 1 करोड़ 40 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह निर्णय न्याय के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें दंड और राहत दोनों शामिल हैं।
फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने संतोष और पीड़ा दोनों भावनाएं व्यक्त कीं। उनका कहना था कि न्याय मिला, लेकिन अपनों की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने इसे उन सभी पीड़ितों के लिए न्याय बताया, जो पुलिस अत्याचार का शिकार हुए हैं।
यह मामला न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना। मानवाधिकार संगठनों ने इसे पुलिस सुधार की आवश्यकता का स्पष्ट संकेत माना। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना के बाद पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशीलता को और मजबूत करना अनिवार्य हो गया है।
सातानकुलम केस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब सत्ता का दुरुपयोग होता है, तो उसके परिणाम कितने भयावह हो सकते हैं। यह फैसला लोकतंत्र में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्ति का प्रतीक है, जो यह संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं।
अंततः यह कहना उचित होगा कि न्याय में देरी भले हो, लेकिन जब न्याय मिलता है, तो वह समाज के लिए एक मिसाल बनता है। सातानकुलम केस इसी सच्चाई का जीवंत उदाहरण है—जहां छह वर्षों की लंबी प्रतीक्षा के बाद “सत्यमेव जयते” की विजय हुई।

-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

डीडीयू का छात्रहित में बड़ा फैसला, SWAYAM से वंचित विद्यार्थियों को मिला अंतिम अवसर

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रहित में बड़ा निर्णय लेते हुए स्वयं (SWAYAM) पाठ्यक्रमों में पंजीकरण से वंचित विद्यार्थियों को एक बार का विशेष अवसर प्रदान किया है। ऐसे विद्यार्थियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित पाठ्यक्रमों की अध्ययन सामग्री SWAYAM प्लेटफॉर्म से पढ़ें और विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एंड सेमेस्टर परीक्षा में सम्मिलित हों। परीक्षा फॉर्म भरते समय संबंधित कोर्स का चयन करना अनिवार्य होगा।

विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार जनवरी सेमेस्टर में अब तक 1,08,683 से अधिक नामांकन दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 98,017 से अधिक यूनिक यूजर्स सक्रिय रूप से जुड़े हैं। इसके साथ ही 1,14,740 से अधिक असाइनमेंट सबमिशन विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को दर्शाते हैं, जो डिजिटल शिक्षा की दिशा में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

स्नातक स्तर पर सेमेस्टर-II में कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम (SEC) 3 क्रेडिट तथा सेमेस्टर-IV में क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम (AEC) 2 क्रेडिट के रूप में संचालित हैं। वहीं स्नातकोत्तर स्तर पर इंटर-डिपार्टमेंटल ओपन इलेक्टिव पाठ्यक्रम 4 क्रेडिट के अनुसार निर्धारित हैं। जिन विभागों में क्रेडिट निर्धारित मानक से कम हैं, वहां अतिरिक्त घटक जोड़कर क्रेडिट की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

कुलपति पूनम टंडन ने कहा कि SWAYAM जैसे राष्ट्रीय मंच से विद्यार्थियों को देश के शीर्ष संस्थानों के पाठ्यक्रमों से जोड़ना विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड स्तर पर हुआ पंजीकरण नई शिक्षा नीति के अनुरूप डिजिटल शिक्षण के प्रति विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि को दर्शाता है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अवसर केवल एक बार के लिए दिया जा रहा है और भविष्य में किसी प्रकार की छूट नहीं मिलेगी।

स्वयं के नोडल अधिकारी अजय कुमार शुक्ल ने विद्यार्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए परीक्षा में सम्मिलित हों।

पुरानी रंजिश में युवक की मौत के मामले में आरोपी को सजा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के धनघटा थाना क्षेत्र के सोनाड़ी गांव में वर्ष 2018 में हुई युवक की मौत के मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विशाल श्रीवास्तव के अनुसार, घटना 31 जनवरी 2018 की है जब जगदम्वा प्रसाद चौरसिया का पुत्र अभय कुमार घर के सामने सब्जी लेने गया था। उसी दौरान बृजेश मोटरसाइकिल से वहां पहुंचा और दोनों बातचीत करने लगे।
इसी बीच पड़ोसी सुधाकर साहनी पुरानी रंजिश के चलते स्कॉर्पियो वाहन से वहां आया और अभय व बृजेश की मोटरसाइकिल पर गाड़ी चढ़ा दी। हादसे में अभय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बृजेश गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय लोगों ने दोनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने अभय को मृत घोषित कर दिया।
मामले में थाना धनघटा में मुकदमा दर्ज कर विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से 10 गवाह पेश किए गए, जिन्होंने घटना का समर्थन किया।
सत्र न्यायाधीश ने आरोपी सुधाकर साहनी को दोषी मानते हुए 3 वर्ष के कारावास और ₹10,000 के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर 6 माह के अतिरिक्त कारावास का आदेश भी दिया गया।

स्थाई लोक अदालत का फैसला: पीड़ित परिवार को मिला 15.70 लाख का मुआवजा, त्वरित न्याय से बढ़ा भरोसा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। स्थाई लोक अदालत, महराजगंज द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में मंगलवार को पीड़ित परिवार को एवार्ड राशि का चेक प्रदान किया गया। न्यायालय के इस निर्णय से पीड़ितों को न केवल आर्थिक राहत मिली, बल्कि त्वरित न्याय व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास भी और मजबूत हुआ।
जानकारी के अनुसार वाद संख्या 01/2024 खुशी व अन्य बनाम प्रबंधक गो-डिजिट जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में 9 जनवरी 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में बीमा कंपनी द्वारा एवार्ड की धनराशि जमा कराई गई थी। इसके उपरांत मंगलवार को विधिवत प्रक्रिया पूरी करते हुए चेक वितरित किया गया।
स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष राकेश मालवीय ने अपने न्यायालय कक्ष में आयोजित एक सादे कार्यक्रम के दौरान कुल 15 लाख 70 हजार रुपये की एवार्ड राशि का चेक याची खुशी पत्नी स्वर्गीय सचिन मणि, सरोज पत्नी रघुवंश मणि तथा रघुवंश मणि पुत्र स्वर्गीय बुद्धेश मणि को प्रदान किया।
अध्यक्ष राकेश मालवीय ने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा कि स्थाई लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य सुलह-समझौते के आधार पर त्वरित एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है, ताकि आमजन को लंबी और जटिल न्यायिक प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मामलों का शीघ्र निस्तारण कर पीड़ितों को समय पर राहत दिलाई जा रही है।
इस अवसर पर स्थाई लोक अदालत की सदस्य गुंजा राय एवं प्रियंका तिवारी भी मौजूद रहीं। वहीं याचियों की ओर से विद्वान अधिवक्ता राम भवन यादव ने न्यायालय की कार्यप्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे निर्णय आम जनता के लिए बेहद लाभकारी हैं।
कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। उपस्थित लोगों ने स्थाई लोक अदालत की त्वरित और प्रभावी न्याय व्यवस्था की सराहना की तथा इसे आमजन के लिए एक सशक्त विकल्प बताया।

स्वास्थ्य के प्रति सजगता ही सशक्त समाज की नींव: कुलपति प्रो. पूनम टंडन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन केंद्र द्वारा एम्स गोरखपुर एवं जिला स्वास्थ्य समिति के संयुक्त तत्वावधान में विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य परीक्षण शिविर एवं स्वास्थ्य कार्ड अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा तथा कुलपति प्रो. पूनम टंडन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस वर्ष की थीम “टुगेदर फॉर हेल्थ: स्टैंड विथ साइंस” रही।
विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की व्यापक सहभागिता रही। यह आयोजन निवारक स्वास्थ्य और जन-जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रतिवर्ष 7 अप्रैल को मनाया जाने वाला विश्व स्वास्थ्य दिवस स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक वैश्विक अभियान है, जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रोकथाम और समावेशी स्वास्थ्य सेवाओं पर बल देता है।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति सजगता और नियमित जांच को अपनाकर ही सशक्त एवं स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने विज्ञान आधारित स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया।
जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। उन्होंने जनस्वास्थ्य कार्यक्रमों और रोगों की रोकथाम पर बल देते हुए विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की।
एम्स गोरखपुर एवं जिला स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा शिविर में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं। डॉ. प्रियंका शिशोदिया के नेतृत्व में टीम ने मधुमेह, उच्च रक्तचाप, एनीमिया, स्त्री रोग संबंधी जांच और नेत्र परीक्षण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराईं। साथ ही छात्राओं को मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हुए सैनिटरी पैड वितरित किए गए।
राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम (RBSK) की नोडल अधिकारी डॉ. अर्चना सिंह की भी सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम के समन्वय में श्रद्धा सिकरिया का योगदान महत्वपूर्ण रहा, जबकि व्यवस्थापन में नेहा गुप्ता, विपिन कुमार यादव, ओंकार निषाद, ए. हजारी लाल और डॉ. एस.पी. कुमार ने सहयोग किया।
कार्यक्रम के दौरान गृह विज्ञान विभाग की प्रो. दिव्या रानी सिंह और उनकी शोधार्थी काजोल आर्यन द्वारा एनीमिया जागरूकता से संबंधित पोषण कैलेंडर, पोषण पुस्तिका और जागरूकता फोल्डर का अनावरण किया गया। इन सामग्रियों का उद्देश्य सही खान-पान और पोषण के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
शिविर में तीन सौ से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया और सभी प्रतिभागियों को स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किए गए। संयोजक प्रो. दिव्या रानी सिंह ने बताया कि महिला अध्ययन केंद्र द्वारा ऐसे कार्यक्रम आगे भी निरंतर आयोजित किए जाएंगे।
कार्यक्रम में प्रो. अनुभूति दुबे, डॉ. विस्मिता पालीवाल, डॉ. प्रीति गुप्ता, डॉ. अनुपमा कौशिक, डॉ. नीता सिंह, डॉ. गार्गी पांडे, डॉ. गरिमा यादव सहित विभाग के शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम अंत में आभार ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ।

स्कूली वाहनों की सघन जांच शुरू, सुरक्षा मानकों पर सख्ती

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रियंवदा सिंह के निर्देशन में स्कूली बच्चों का सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मॉनिटरिंग पोर्टल (UPISVMP) तैयार किया गया है, जिस पर सभी स्कूलों को ऑनबोर्ड कर उनके वाहनों का निरीक्षण किया जा रहा है।
इसी क्रम में नगरीय क्षेत्र स्थित राज ग्लोबल एवं ब्लूमिंग बर्ड स्कूल का निरीक्षण किया गया, जहां स्कूली वाहनों में सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान सीसीटीवी, जीपीएस, अग्निशमन यंत्र, स्पीड गवर्नर, फर्स्ट एड बॉक्स, आपातकालीन निकास द्वार, स्कूल का नाम, परिवहन विभाग का हेल्पलाइन नंबर और रेट्रो रिफ्लेक्टिव टेप जैसे आवश्यक सुरक्षा मानकों की जांच की गई।
जिन वाहनों में कमियां पाई गईं, उनके सुधार के लिए संबंधित स्कूल प्रबंधन को निर्देशित किया गया। साथ ही वाहन चालकों से संवाद कर उन्हें सतर्कता से वाहन संचालन करने और बच्चों को सुरक्षित घर से स्कूल व वापस पहुंचाने के प्रति जागरूक किया गया।
अधिकारी ने सभी स्कूली वाहन संचालकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों को पोर्टल पर शीघ्र ऑनबोर्ड कराएं और सुरक्षा मानकों की सभी कमियों को समय रहते पूरा कर लें, ताकि निरीक्षण के दौरान किसी प्रकार की समस्या न हो। इस दौरान हिमांशु मणि त्रिपाठी, कनिष्ठ सहायक भी उपस्थित रहे।

विदाई केवल अंत नहीं, एक नए जीवन की शुरुआत: प्रो. ओम प्रकाश सिंह

सपनों की उड़ान के साथ नई शुरुआत का संदेश देता विदाई समारोह

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दिग्विजय नाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखपुर के शिक्षाशास्त्र विभाग द्वारा परास्नातक विद्यार्थियों के सम्मान में आयोजित विदाई समारोह भावनात्मक और प्रेरणादायक माहौल में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि विदाई केवल अंत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की रीढ़ होती है और समय के साथ इसका स्वरूप बदलता रहता है। प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति को समता मूलक बताते हुए उन्होंने कहा कि उसमें समानता, नैतिकता और सार्वभौमिक ज्ञान को विशेष महत्व दिया जाता था, जबकि वर्तमान शिक्षा प्रणाली अधिकतर रोजगार उन्मुख हो गई है, जहाँ ज्ञान को व्यावसायिक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि वे अर्जुन की तरह अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहें और उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करें। साथ ही यह भी कहा कि विद्यार्थी राष्ट्र के भावी निर्माता हैं और उन्हें अपनी शिक्षा का उपयोग समाज के व्यापक हित में करना चाहिए।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रकोष्ठ की समन्वयक प्रोफेसर अर्चना सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता उन्हीं को मिलती है जो अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन की चुनौतियाँ हमें मजबूत बनाती हैं और आगे बढ़ने की दिशा दिखाती हैं।
विभाग की प्रभारी डॉ. निधि राय ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
इस अवसर पर शिक्षाशास्त्र विभाग के डॉ. श्याम सिंह, डॉ. त्रिभुवन मिश्रा, डॉ. अखंड प्रताप सिंह, डॉ. जागृति विश्वकर्मा, डॉ. सुजीत शर्मा सहित अन्य विभागों के मुख्य नियंता डॉ. आर. पी. यादव, डॉ. जितेंद्र पांडेय, डॉ. विभा सिंह, डॉ. अनुपमा मिश्रा, डॉ. अदिति दुबे, डॉ. शाश्वत चंदेल, डॉ. विवेकानंद शुक्ला, डॉ. सुनील सिंह, डॉ. अंशुमान सिंह समेत महाविद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित रहे।

नई किताबों संग खिले नन्हे चेहरे मौना गढ़वा विद्यालय में ज्ञान का उत्सव

भागलपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
उच्च प्राथमिक विद्यालय मौना गढ़वा में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत पुस्तक वितरण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर शिक्षा समिति के अध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान डॉ. जनार्दन कुशवाहा, विद्यालय के प्रधानाचार्य रुदल प्रसाद तथा सहायक अध्यापक प्रदीप कुमार तिवारी, अवधेश प्रसाद, सच्चितानंद शुक्ला, अनवर अली, सुधा विश्वकर्मा सहित अभिभावकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को नई पाठ्य पुस्तकें वितरित की गईं। किताबें हाथ में मिलते ही बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ झलकने लगी। विद्यार्थियों ने नई किताबें पाकर उत्साह व्यक्त किया और नियमित रूप से पढ़ाई करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर ग्राम प्रधान डॉ. जनार्दन कुशवाहा ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक शिक्षा ही आगे चलकर उच्च शिक्षा की मजबूत नींव बनती है और यही जीवन में सफलता की कुंजी है।
वहीं प्रधानाचार्य रुदल प्रसाद एवं अन्य शिक्षकों ने भी छात्रों को उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर मेहनत और अनुशासन का संदेश दिया।
इस पहल के तहत सभी विद्यार्थियों को समय पर पुस्तकें उपलब्ध कराई गईं, जिससे उनकी पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा न आए। विद्यालय परिवार के सहयोग से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

बेटी विवाह शगुन योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थी का स्थलीय सत्यापन पूर्ण

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
एफआरसीटी (FRCT) द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रम में “बेटी विवाह शगुन योजना” के तहत पात्र लाभार्थी का भौतिक सत्यापन किया गया।
देवरिया जनपद के ग्राम बादीपुर, ठाकुर देवरिया (भलुअनी )निवासी रीता देवी की सुपुत्री रंजना भारती का विवाह, आगामी 23 अप्रैल 2026 को सौरभ कुमार के साथ निर्धारित है।
योजना के अंतर्गत सहायता प्रदान किए जाने से पूर्व प्रदेश व जिला/ब्लाक टीम द्वारा लाभार्थी के निवास पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई।
सत्यापन के दौरान प्रदेश मीडिया प्रभारी ओमप्रकाश कुशवाहा,भलुअनी ब्लाक अध्यक्ष जितेन्द्र कुशवाहा, ब्लाक महामंत्री लक्ष्मण प्रजापति,ब्लाक उपाध्यक्ष महेश प्रजापति,ब्लाक आईटी सेल प्रभारी शैलेन्द्र कुशवाहा, परिवार के सदस्य व गांव के सभी सदस्य जगतनारायण, रविशंकर व अन्य ग्रामवासी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर प्रदेश मीडिया प्रभारी ओमप्रकाश कुशवाहा ने योजना के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि संस्था के माध्यम से मार्च 2025 से मार्च 2026 तक बेटी विवाह शगुन योजना में 72 बेटियों की शादी में लगभग एक करोड़ रुपये व आकस्मिक निधन योजना अन्तर्गत 6 परिवारों को लगभग 75 लाख रूपये कुल एक करोड़ 75 लाख रूपए का सहयोग सदस्यों द्वारा मात्र 50/रुपये माह सीधे लाभार्थी के खाते में भेजा गया।
इस माह बेटी विवाह शगुन योजना के अंतर्गत प्रति लाभार्थी 2 लाख रूपये से अधिक धनराशि के सहयोग का अनुमान है।

एमजीयूजी: पोस्टरों के जरिए गूंजा स्वस्थ जीवन का संदे

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में मंगलवार को ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ के अवसर पर पोस्टर प्रस्तुति का आयोजन किया गया। नर्सिंग एवं एलाइड हेल्थ केयर संकाय के इमरजेंसी एंड ट्रामा केयर के विद्यार्थियों ने “स्वास्थ्य के लिए एक साथ-विज्ञान के साथ खड़े हों” विषय पर आकर्षक और जागरूकता आधारित प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छ जीवनशैली और रोगों की रोकथाम के प्रति जागरूक करना रहा। विद्यार्थियों ने अपने पोस्टरों के माध्यम से बताया कि सभी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए तथा संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों के प्रति जागरूक रहना आवश्यक है। साथ ही स्वच्छता, संतुलित पोषण, नियमित व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को भी सरल भाषा में समझाया गया।
प्रस्तुति के दौरान विद्यार्थियों ने बताया कि स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद जरूरी है। साफ-सफाई बनाए रखना, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना तथा नशे से दूर रहना भी आवश्यक है। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान ही महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में इमरजेंसी एंड ट्रामा केयर की छात्राएं सुप्रिया, रागिनी, नेहा यादव, नेहा गुप्ता और श्रेया सिंह ने सक्रिय सहभागिता निभाई। आयोजन नर्सिंग एवं पैरामेडिकल सभागार में संपन्न हुआ, जिसमें नर्सिंग एवं पैरामेडिकल की अधिष्ठाता डॉ. डी.एस. अजीथा, प्राचार्य रोहित कुमार श्रीवास्तव, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

शराब के नशे ने ली युवक की जान, परिवार में मचा कोहराम

सिकंदरपुर/बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

शराब की लत एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। नशे की हालत में घर लौटे एक युवक की दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। इस घटना से पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है, वहीं गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के निवासी 25 वर्षीय गोलू शनिवार की रात नशे की हालत में घर पहुंचे थे। इसी दौरान असंतुलित होकर वह घर में रखे हंसिए (धारदार कृषि उपकरण) पर गिर पड़े, जिससे उनकी गर्दन में गंभीर चोट लग गई। परिजनों ने आनन-फानन में उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बघूड़ पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत नाजुक देखते हुए जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
परिजन युवक को जिला अस्पताल ले जाने के बजाय मऊ के एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां उसका इलाज चल रहा था। कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद सोमवार की रात उसने दम तोड़ दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।मृतक की पत्नी, जो सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के उमेदा गांव की रहने वाली है, एक साल के मासूम बच्चे के साथ अपने मायके में रह रही थी। पति की मौत की सूचना मिलते ही वह अपने बच्चे के साथ ससुराल पहुंची। पत्नी और मां मीना देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।मृतक की मां मीना देवी ने बिलखते हुए बताया कि वह और बहू रोज गोलू को शराब की लत छोड़ने के लिए समझाते थे, लेकिन उसने उनकी बात नहीं मानी। उन्होंने कहा कि पहले ही उनके पति का निधन हो चुका था और अब बड़ा बेटा भी चला गया। गोलू ही उनका आखिरी सहारा था, जो अब उनसे छिन गया। परिवार के सामने अब जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है।ग्रामीणों के सहयोग से युवक का अंतिम संस्कार मुक्तिधाम हल्दीरामपुर में किया जाएगा। इस दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।

युवा वर्ग इस घटना से सिख ले

यह घटना समाज, विशेषकर नई पीढ़ी के लिए एक गंभीर चेतावनी है। मादक पदार्थों और शराब का सेवन न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए घातक है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों को भी बर्बाद कर सकता है। नशा इंसान की सोचने-समझने की क्षमता को खत्म कर देता है और कई बार ऐसे हादसों को जन्म देता है, जिनका परिणाम जानलेवा होता है। इसलिए युवाओं को चाहिए कि वे नशे से दूर रहें, अपने जीवन और परिवार की जिम्मेदारियों को समझें तथा एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण में योगदान दें।

नपा के वरिष्ठ लिपिक की असामयिक निधन से परिजनों मे शोक की लहर

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
नगरपालिका गौरा बरहज के वरिष्ठ लिपिक जोखन प्रसाद की मंगलवार को असामयिक निधन से समस्त नपा परिवार एवं उनके परिजनों मे शोक की लहर व्याप्त है। इस दुःख की घड़ी मे नगरपालिका कार्यालय परिसर मे सभी अधिकारीयों, कर्मचारियों एवं वार्ड सदस्यों की उपस्थिति मे उनकी पुण्य स्मृति मे 2मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। इस दौरान सभी लोगो ने दिवंगत आत्मा की शन्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
इस अधिशासी अधिकारी निरुपमा प्रताप एवं सभासद रतन सोनकर, वरिष्ठ लिपिक मनोज गुप्ता, सहित अन्य गणमान्य लोगो ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि जोखन प्रसाद एक कर्मठ, ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी थे, उनके अ असामयिक निधन से नगरपालिका बरहज को अपूरणीय हानि हुई है।
नपा अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने इस दुःख कि घड़ी मे शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि जोखन प्रसाद एक सरल स्वभाव धनी व्यक्तित्व थे, उनकी कार्य कुशलता सदैव हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे तथा परिजनों को इस कठिन घड़ी मे धर्य एवं संबल प्रदान करे।

बेटी विवाह शगुन योजना के तहत लाभार्थी का हुआ भौतिक सत्यापन, 21 अप्रैल को होगा विवाह

सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा):
एफआरसीटी (FRCT) द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत “बेटी विवाह शगुन योजना” के तहत पात्र लाभार्थी का स्थलीय (भौतिक) सत्यापन किया गया।
देवरिया जनपद के ग्राम भीमपुर, पोस्ट डुमवलिया निवासी संधू चौहान की सुपुत्री खुशबू का विवाह आगामी 21 अप्रैल 2026 को विनय के साथ निर्धारित है। योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने से पूर्व जिला टीम द्वारा लाभार्थी के घर पहुंचकर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई।
सत्यापन के दौरान जिलाध्यक्ष शुभम शर्मा, जिला कोषाध्यक्ष भालचंद्र मिश्रा, महामंत्री दुर्गावती गुप्ता, जिला उपाध्यक्ष विजयलक्ष्मी यादव, सलेमपुर ब्लाक अध्यक्ष पवन गुप्ता, सलेमपुर के प्रधानाचार्य एवं FRCT के सक्रिय कार्यकर्ता मोहन द्विवेदी सहित परिवार के सदस्य व ग्रामवासी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष शुभम शर्मा ने योजना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्था पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि मार्च 2025 से मार्च 2026 तक “बेटी विवाह शगुन योजना” के माध्यम से 72 बेटियों के विवाह में लगभग एक करोड़ रुपये का सहयोग दिया गया, जो सदस्यों द्वारा मात्र 50 रुपये की सहभागिता से सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजा गया।

जबरन विवाह के प्रयास से युवती सहमी, पुलिस से सुरक्षा की गुहार

सुखपुरा /बलिया (राष्ट्र की परम्परा)

जनपद के सुखपुरा थाना क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक युवती ने गांव के ही एक युवक पर जबरन विवाह का दबाव बनाने और उत्पीड़न करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद से पीड़िता और उसका परिवार भय के साए में जीने को मजबूर है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुखपुरा क्षेत्र की रहने वाली एक युवती ने आरोप लगाया है कि गांव शेरखा भला निवासी पंकज भारती नामक युवक पिछले कुछ समय से उस पर प्रेम संबंध बनाने का दबाव डाल रहा था। युवती के अनुसार, उसने कई बार इस प्रस्ताव को ठुकराया, लेकिन युवक अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। पीड़िता का कहना है कि 5 अप्रैल की रात लगभग 1 बजे आरोपी युवक उसके घर में घुस आया और उसे जबरदस्ती पकड़कर विवाह करने का प्रयास करने लगा। इस दौरान युवती ने किसी तरह स्वयं को बचाया और शोर मचाया, जिससे परिवार के अन्य सदस्य जाग गए। परिवार के लोगों के पहुंचने पर आरोपी मौके से फरार हो गया।युवती ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी लगातार उसे धमकी दे रहा है कि यदि उसने उसकी बात नहीं मानी तो वह उसे और उसके परिवार को बदनाम कर देगा तथा जबरन विवाह करेगा। इन धमकियों के कारण पीड़िता और उसका परिवार मानसिक तनाव में है।घटना के तुरंत बाद परिजनों ने डायल 112 पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। हालांकि, अब तक इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई न होने से परिजन असंतुष्ट हैं।पीड़िता ने थाना सुखपुरा में लिखित प्रार्थना पत्र देकर आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।इस संबंध में थाना पुलिस का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है और जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।गांव में इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल है और लोग इस प्रकार की घटनाओं पर चिंता जता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।फिलहाल पीड़िता न्याय की उम्मीद में प्रशासन की ओर देख रही वही जब उसकी सुनवाई नही हुई तो युवती टावर पर चढ़ कर जान देने की मन बना लिया और गाव पर स्थित टावर पर चढ़ गयी समाचार लिखे जाने तक वह टावर पर थी