कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के तमकुहीराज क्षेत्र में ग्रीनलैंड पब्लिक स्कूल के पास सूखा कूड़ा जलाने से उठे धुएं के कारण कुछ बच्चों को सांस लेने में तकलीफ की शिकायत हुई। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया।
प्रभावित बच्चों को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया, जिसके बाद सभी बच्चों की हालत सामान्य बताई जा रही है। जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), विद्यालय एवं संबंधित अस्पताल का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बताया कि मौके पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शांति व्यवस्था बनी हुई है। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं।
कूड़ा जलाने से उठे धुएं से बच्चों की तबीयत बिगड़ी, स्थिति नियंत्रण में
विदाई समारोह में छात्रों को दी गई उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं
बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l नगरपालिका स्थित बाबा राघव दास भगवानदास महिला महाविद्यालय आश्रम में छात्रों के विदाई समारोह का आयोजन बड़े ही उत्साह और गरिमामय वातावरण में किया गया। कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह मुख्य रूप से विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में अर्जुन सिंह ने छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक सोच बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों को समाज और देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. सिराज अंसारी ने भी छात्रों को संबोधित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर डॉ. प्रतिभा पाण्डेय, सत्यप्रकाश तिवारी, रजनीश दीक्षित, सोली शुक्ला और विद्यार्थी त्रिपाठी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कमलेश सिंह ने की। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रस्तुति दी गई, जिसने माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया।
अंत में सभी छात्रों को भावभीनी विदाई दी गई और उनके सफल भविष्य की कामना की गई।
“नैतिकता से कानून तक: माता-पिता की सेवा न करने पर सैलरी कटौती का नया सामाजिक संदेश”
पिता की देखभाल न करने पर वेतन से 15 प्रतिशत त्वरित कटौती: सामाजिक न्याय,नैतिक जिम्मेदारी और कानून के बीच संतुलन काबिल-ए-तारीफ़

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर आज का समाज अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है।तकनीकी उन्नति, वैश्वीकरण और आर्थिक प्रतिस्पर्धा ने जहां जीवन को सुविधाजनक बनाया है,वहीं पारिवारिक संरचनाओं और संबंधों के स्वरूप को भी गहराई से प्रभावित किया है।कभी संयुक्त परिवारों में पनपने वाली भावनात्मक सुरक्षा और सामूहिक जिम्मेदारी अब तेजी से एकल परिवारों में सिमटती जा रही है। इस परिवर्तन के बीच सबसे अधिक प्रभावित वर्ग है,बुजुर्ग माता-पिता। जीवन के उस चरण में,जब उन्हें सबसे अधिक सहारे,सम्मान और देखभाल की आवश्यकता होती है, वे अक्सर उपेक्षा,अकेलेपन और आर्थिक असुरक्षा का सामना करते हैं।ऐसे समय में तेलंगाना राज्य द्वारा पारित कर्मचारी जवाबदेही एवं माता- पिता सहायता निगरानी विधेयक 2026 न केवल एक कानूनी कदम है, बल्कि यह सामाजिक चेतना को झकझोरने वाला ऐतिहासिक हस्तक्षेप भी है।इस विधेयक का मूल संदेश स्पष्ट और कठोर है यदि कोई संतान अपने माता-पिता की देखभाल से मुंह मोड़ती है, तो राज्य उसके निजी दायित्व को लागू करने के लिए सटीक रूप से हस्तक्षेप करेगा।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं ने गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि यह विचार अपने आप में क्रांतिकारी है,क्योंकिपारिवारिक संबंधों को अब तक निजी और नैतिक क्षेत्र माना जाता रहा है, जहां कानून की भूमिका सीमित थी। परंतु जब नैतिकता विफल हो जाती है, तब कानून का हस्तक्षेप अनिवार्य हो जाता है। यह विधेयक इसी सिद्धांत पर आधारित है कि बुजुर्गों की उपेक्षा केवल व्यक्तिगत असफलता नहीं, बल्कि एक सामाजिक अपराध है, जिसका समाधान केवल सामाजिक उपदेशों से नहीं, बल्कि कठोर कानूनी प्रावधानों से ही संभव है। एक अधिवक्ता व लेखक के रूप में मैं यह सुझाव देना चाहूंगा के कि इस विधेयक को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, वेतन कटौती की सीमा को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत और अधिकतम राशि को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया जा सकता है,ताकि यह अधिक प्रभावी और निवारक बन सके।
अब क्या ऐसा कानून सभी राज्यों में लागू किया जाना चाहिए? इसको समझने की करें तो इस प्रश्न का उत्तर सीधा सख़्ती से हां में है, क्योंकि इसके कई सामाजिक, आर्थिक और कानूनी पहलू हैं। एक ओर यह कानून वृद्ध माता-पिता के अधिकारों की रक्षा करने का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। यह उन संतान को जिम्मेदारी का एहसास कराएगा जो आर्थिक रूप से सक्षम होते हुए भी अपने माता-पिता की उपेक्षा करते हैं। इससे समाज में एक सकारात्मक संदेश जाएगा कि माता-पिता की सेवा केवल एक विकल्प नहीं बल्कि एक अनिवार्य कर्तव्य है इसके अलावा, इस कानून को पूरे देश में लागू करने के लिए केंद्र सरकार को पहल करनी चाहिए। यदि सभी राज्य इस मॉडल को अपनाते हैं, तो यह बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत राष्ट्रीय ढांचा तैयार कर सकता है।हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अभी तक भारत के किसी भी राज्य या केंद्र सरकार द्वारा ऐसा कोई व्यापक कानून लागू नहीं किया गया है,जिसमें सीधे वेतन से 15प्रतिशत कटौती का प्रावधान अनिवार्य रूप से लागू हो। कुछ मामलों में न्यायालयों ने व्यक्तिगत परिस्थितियों के आधार पर वेतन से भरण- पोषण राशि काटने के आदेश दिए हैं, लेकिन यह एक सामान्य कानून नहीं बल्कि केस-टू-केस आधार पर लिया गया निर्णय होता है।
अगर हम बुजुर्गों के व्यथा को समझने की करें तो बुढ़ापा जीवन का एकअपरिहार्य सत्य है। यह वह अवस्था है, जहां शारीरिक और मानसिक क्षमताएं धीरे-धीरे क्षीण होने लगती हैं। बीमारियां बढ़ती हैं,आय के स्रोत समाप्त हो जाते हैं और व्यक्ति पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर हो जाता है।भारतीय संदर्भ में यह निर्भरता मुख्यतः संतान पर होती है,क्योंकि अधिकांश लोगअपनी जीवन भर की कमाई अपने बच्चों की शिक्षा, विवाह और भविष्य निर्माण में खर्च कर देते हैं। सरकारी कर्मचारियों को पेंशन का सहारा मिल सकता है, लेकिन निजी क्षेत्र के बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे में यदि संतान भी उनका साथ छोड़ दे, तो यह स्थिति उनके लिए अत्यंत कष्टदायक और अमानवीय बन जाती है।
हम तेलंगाना विधानसभा द्वारा 29 मार्च 2026 क़ो पारित विधेयक को समझने की करें तो यह विधेयक इसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है। इसके तहत यदि कोई कर्मचारी चाहे वह सरकारी हो या निजी अपने माता-पिता की देखभाल में लापरवाही करता है, तो उसके वेतन से 15 प्रतिशत या अधिकतम 10,000 रुपये प्रति माह की कटौती की जाएगी और यह राशि सीधे माता-पिता के बैंक खाते में जमा कराई जाएगी। यह प्रावधान न केवल आर्थिक सहायता सुनिश्चित करता है,बल्कि यह एक सशक्त संदेश भी देता है कि संतान अपने दायित्व से बच नहीं सकती।यह कानून जनप्रतिनिधियों जैसे विधायक, सरपंच पर भी लागू होता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जवाबदेही सभी के लिए समान है।इस विधेयक की एक विशेषता इसकी स्पष्ट और समयबद्ध प्रक्रिया है। यदि माता-पिता को लगता है कि उनके साथ उपेक्षा हो रही है, तो वे जिला कलेक्टर के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। कलेक्टर को 60 दिनों के भीतर मामले की जांच कर निर्णय देना अनिवार्य है। यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो वेतन कटौती का आदेश जारी किया जाता है। यदि आवेदन खारिज हो जाता है, तो वरिष्ठ नागरिक आयोग के पास अपील का प्रावधान है। यह प्रक्रिया पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करती है,जो अक्सर अन्य कानूनों में देखने को नहीं मिलती।
अगर हम विधेयक में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान को समझने की करें तो वह है, वरिष्ठ नागरिक आयोग की स्थापना। यह आयोग एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश की अध्यक्षता में कार्य करेगा और अपीलीय निकाय के रूप में कार्य करेगा। इसके पास गवाहों को बुलाने, जांच करने और निर्णय देने कीशक्तियां होंगी। यह व्यवस्था न केवल शिकायतों के त्वरित निपटान को सुनिश्चित करती है, बल्कि यह बुजुर्गों को न्याय प्राप्त करने का एक सशक्त मंच भी प्रदान करती है। यह कानून केवल दंडात्मक नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सामाजिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करना भी है। भारतीय संस्कृति में माता-पिता को देवतुल्य माना गया है “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव” का आदर्श हमारे संस्कारों में गहराई से निहित है। श्रवण कुमार की कथा इसका प्रतीक है, जहां पुत्र अपने माता-पिता की सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर देता है। परंतु आधुनिक जीवन की आपाधापी में ये मूल्य कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं। ऐसे में यह कानून एक चेतावनी भी है और एक मार्गदर्शन भी कि यदि समाज अपने मूल्यों को भूल जाएगा, तो राज्य को हस्तक्षेप करना पड़ेगा।
भारत में पहले से ही माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण- पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 लागू है इसको समझने की करें तो। इसकी सबसे बड़ी कमजोरी इसका धीमा क्रियान्वयन है।कई बार शिकायतों के निपटान में इतनी देरी हो जाती है कि बुजुर्गों को न्याय मिलने से पहले ही उनकी स्थिति और खराब हो जाती है। तेलंगाना का यह नया विधेयक इस कमी को दूर करता है, क्योंकि इसमें समयबद्ध प्रक्रिया और सख्त प्रावधान शामिल हैं। यह न केवल पुराने कानून को मजबूत करता है, बल्कि उससे आगे जाकर एक प्रभावी मॉडल प्रस्तुत करता है।यह भी महत्वपूर्ण है कि इस कानून को केवल दंडात्मक उपाय के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे एक सामाजिक सुधार के उपकरण के रूप में समझा जाए। सरकार को इसके साथ-साथ जागरूकता अभियान भी चलाने चाहिए,ताकि लोग अपनेकर्तव्यों को समझें और स्वेच्छा से उनका पालन करें। शिक्षा प्रणाली में भी ऐसे मूल्यों को शामिल किया जाना चाहिए, जो बच्चों को अपने माता-पिता के प्रति जिम्मेदार बनाएं।
साथियों बात अगर हम इस संपूर्ण प्रावधानों बातों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखें तो कई देशों में बुजुर्गों की देखभाल के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। चीन में फिलियल रिस्पॉन्सिबिलिटी लॉ है, जो बच्चों को अपने माता-पिता से मिलने और उनकी देखभाल करने के लिए बाध्य करता है। सिंगापुर में मेंटेनेंस ऑफ पेरेंट्स एक्ट है, जिसके तहत माता- पिता अपने बच्चों से आर्थिक सहायता की मांग कर सकते हैं। अमेरिका और यूरोप के कई देशों में भी ऐसे कानून हैं, हालांकि उनका स्वरूप और कठोरता अलग-अलग है। इस दृष्टि से तेलंगाना का यह विधेयक वैश्विक प्रवृत्ति के अनुरूप है, लेकिन इसकी कठोरता और स्पष्टता इसे विशेष बनाती है।
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि यह कहना गलत नहीं होगा कि तेलंगाना का यह विधेयक एक नए सामाजिक अनुबंध की शुरुआत है, जहां राज्य, समाज और व्यक्ति के बीच जिम्मेदारियों का पुनर्संतुलन किया जा रहा है। यह कानून हमें यह याद दिलाता है किविकास केवल आर्थिक प्रगति का नाम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों के संरक्षण से भी जुड़ा है। यदि हम अपने बुजुर्गों की उपेक्षा करते हैं, तो हम न केवल अपने अतीत से मुंह मोड़ते हैं, बल्कि अपने भविष्य को भी असुरक्षित बनाते हैं। इसलिए, समय की मांग है कि हम इस पहल को गंभीरता से लें और इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दें। प्रत्येक राज्य, प्रत्येक नागरिक और प्रत्येक परिवार को यह समझना होगा कि बुजुर्गों की देखभाल केवल एक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी है। यदि समाज इस जिम्मेदारी को निभाने में विफल रहता है, तो कानून का डंडा चलना ही चाहिए क्योंकि अंततः एक सभ्य समाज की पहचान इसी से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर और निर्भर सदस्यों के साथ कैसा व्यवहार करता है।
-संकलनकर्ता लेखक – क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र
एसपी ने थानों से लेकर सोनौली बॉर्डर तक किया सख्त निरीक्षण
महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं चुस्त-दुरुस्त बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने शुक्रवार को थाना कोल्हुई, सोनौली एवं नौतनवां का आकस्मिक निरीक्षण कर पुलिस महकमे में हलचल मचा दी। अचानक हुए इस निरीक्षण से थानों पर तैनात पुलिस कर्मियों में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
निरीक्षण के दौरान एसपी ने थाना कार्यालय, सीसीटीएनएस कक्ष, अभिलेखों का रख- रखाव, अपराध पंजिका, मालखाना, हवालात, महिला हेल्प डेस्क और साफ-सफाई व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने अभिलेखों को सुव्यवस्थित और अद्यतन रखने के निर्देश देते हुए लंबित मामलों के त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वांछित अपराधियों और वारंटियों की गिरफ्तारी में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही उन्होंने आम जनता की शिकायतों पर त्वरित, पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बीट पुलिसिंग को और मजबूत बनाने, क्षेत्र में लगातार गश्त बढ़ाने और अपराध नियंत्रण के लिए सक्रिय सूचना तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया गया कि वे आमजन के साथ संवेदनशील, विनम्र और भरोसेमंद व्यवहार करें, ताकि पुलिस के प्रति जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।
निरीक्षण के क्रम में एसपी ने भारत-नेपाल अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित सोनौली बॉर्डर का सशस्त्र सीमा बल के अधिकारियों के साथ संयुक्त निरीक्षण भी किया। इस दौरान सीमा सुरक्षा व्यवस्था, आवागमन नियंत्रण, इमीग्रेशन चेकिंग और संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की गहन तलाशी का जायजा लिया गया।
एसपी ने निर्देश दिए कि सीमा की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और एसएसबी के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखा जाए और तस्करी, मानव तस्करी सहित हर तरह की अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाय।
उन्होंने दो टूक कहा कि जनपद में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी पुलिसकर्मियों को पारदर्शिता, जवाबदेही और पेशेवर दक्षता के साथ कार्य करने की हिदायत दी।उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि महराजगंज की जनता को सुरक्षित, भयमुक्त और न्यायपूर्ण वातावरण देने के लिए पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।
महिला नेतृत्व सशक्त बनाने को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न
बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। नगर विकास विभाग, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में जनाग्रह के सहयोग से नगरीय प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान, लखनऊ द्वारा महिला अध्यक्षों हेतु “नगरीय जनप्रतिनिधि क्षमता संवर्धन कार्यशाला” का 1 एवं 2 अप्रैल 2026 को आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य नगरीय निकायों की महिला जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व कौशल, प्रशासनिक दक्षता, वित्तीय प्रबंधन एवं सुशासन से संबंधित ज्ञान को सुदृढ़ करना रहा।
दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न मंडलों से आई महिला अध्यक्षों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए नगरीय प्रशासन की जटिलताओं, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, नागरिक सुविधाओं के बेहतर प्रबंधन एवं पारदर्शिता जैसे विषयों पर जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा व्यवहारिक एवं सैद्धांतिक दोनों प्रकार की जानकारी दी गई।
अपर निदेशक रितु सुहास ने अपने संबोधन में महिला जनप्रतिनिधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें जनसेवा के प्रति समर्पण, संवेदनशीलता एवं पारदर्शिता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिला नेतृत्व नगरों के समग्र विकास में नई दिशा देने की क्षमता रखता है।
इसके पश्चात सहायक निदेशक सविता शुक्ला ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए। कार्यशाला में श्वेता जायसवाल (अध्यक्ष, बरहज), अलका सिंह (अध्यक्ष, देवरिया), डॉ पुष्पलता (अध्यक्ष, महाराजगंज), शाहिना शेख (अध्यक्ष, मदनपुर) सहित विभिन्न नगर निकायों की महिला अध्यक्षों ने सहभागिता की।
समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने इसे उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उन्हें अपने नगर क्षेत्रों में अधिक प्रभावी, उत्तरदायी एवं जन-केंद्रित कार्य करने के लिए सक्षम बनाते हैं। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर मंजरी उपाध्याय, डॉ सौरव गुप्ता, प्रशंसा सहित सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
पुलिस कर्मियों की बैठक में निर्देशों के पालन पर जोर
मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के थाना कोपागंज परिसर में प्रभारी निरीक्षक द्वारा थाना स्थानीय पर तैनात सभी अधिकारी एवं कर्मचारीगण की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान पुलिस अधीक्षक द्वारा पूर्व में आयोजित बैठक में दिए गए आदेशों एवं निर्देशों की विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रभारी निरीक्षक रविंद्रनाथ राय ने सभी पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया कि उच्चाधिकारियों द्वारा जारी किए गए आदेशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी जनता के साथ बेहतर संवाद स्थापित करें, उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनें और उनका त्वरित निस्तारण करें। साथ ही अपने कर्तव्यों का ईमानदारी, निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ निर्वहन करें।
बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने-अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी गई।
हाई टेंशन तार से निकली चिंगारी, एक बीघा गेहूं की फसल जलकर राख
मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के कोपागंज ब्लाक के ग्राम चेलारामपूरा में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब हाई टेंशन विद्युत तार से निकली चिंगारी से गेहूं की खड़ी फसल में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और करीब एक बीघा फसल जलकर राख हो गई।
बताया जाता है कि खेत के ऊपर से गुजर रहे हाई टेंशन तार से अचानक चिंगारी निकली, जो सूखी फसल पर गिरते ही आग में बदल गई। तेज हवा के कारण आग तेजी से फैलने लगी, जिससे आसपास के किसानों में हड़कंप मच गया। आग की चपेट में आकर किसान राजनाथ, रामप्रेश, हरिकेश व राजकुमार यादव पुत्र श्यामलाल यादव की करीब एक बीघा गेहूं की फसल जलकर नष्ट हो गई।
सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने एकजुट होकर पानी और अन्य संसाधनों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। ग्रामीणों की तत्परता से आग को आगे फैलने से रोक लिया गया, जिससे बड़ी घटना टल गई।
घटना में किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने तथा जर्जर विद्युत तारों की मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
भाजपा जिला कोषाध्यक्ष बनाए जाने पर पदाधिकारियों ने किया स्वागत
बस्ती (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की संस्तुति पर जिलाध्यक्ष विवेकानंद मिश्रा द्वारा गुरुवार रात्रि को भाजपा बस्ती के जिला पदाधिकारियों एवं जिला कार्यसमिति सदस्यों की घोषणा की गई। इसमें वैश्व समाज के वरिष्ठ भाजपा नेता राधेश्याम कमलापुरी को जनपद बस्ती का जिला कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।
शुक्रवार को भाजपा मंडल गौर के बभनान बाजार में जिला कार्यसमिति सदस्य संतोष शुक्ला के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने मिठाई खिलाकर, माला व अंगवस्त्र पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया और हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष गौर राजेश कमलापुरी, मंडल अध्यक्ष परसा मनोज पाठक, दुर्गा प्रसाद दूबे, राजेश कसौधन ‘गुरुजी’, नामित सभासद रविन्द्र कसौधन, सभासद मंशाराम, राम प्रगट सिंह, डॉ. अरविन्द कमलापुरी, प्रेम मोदनवाल, दीपक जायसवाल सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई, तीन सील
मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के मधुबन तहसील क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान तीन अस्पतालों को सील करते हुए संबंधित लोगों पर कार्रवाई की गई।
तहसील क्षेत्र में लंबे समय से बिना पंजीकरण या समाप्त लाइसेंस के कई अस्पताल और नर्सिंग होम संचालित होने की शिकायतें मिल रही थीं। प्रशासन ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त टीम के साथ कार्रवाई की।
एसडीएम सत्यप्रकाश के नेतृत्व में सीओ अंजनी कुमार पाण्डेय, एसीएमओ डॉ. आर. एन. सिंह और डॉ. एच. एन. मौर्य की टीम ने मर्यादपुर क्षेत्र में छापेमारी की। इस दौरान लखनौर रोड स्थित पुष्पा अस्पताल, मर्यादपुर का आरूषि नर्सिंग होम तथा कटघराशंकर स्थित श्रीकृष्णा अस्पताल को अवैध रूप से संचालित पाए जाने पर सील कर दिया गया।
छापेमारी के दौरान अस्पतालों में ऑपरेशन कक्ष, बेड, मेडिकल स्टोर सहित अन्य उपकरण भी पाए गए। साथ ही पुष्पा अस्पताल से दो महिलाओं और श्रीकृष्णा अस्पताल से एक महिला नर्स को पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में लिया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति संचालित अस्पतालों और क्लिनिक के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध अस्पताल संचालकों में हड़कंप की स्थिति देखी गई।
Mau News: निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों का प्रदर्शन, DM को सौंपा 7 सूत्रीय ज्ञापन
मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ अभिभावकों का गुस्सा खुलकर सामने आया। वरिष्ठ अधिवक्ता उदय प्रताप राय के नेतृत्व में दर्जनों अभिभावकों और समाजसेवियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।
गूंजे नारे, प्रशासन को चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान “जिला प्रशासन होश में आओ” और “अभिभावक एकता जिंदाबाद” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। अभिभावकों ने मुख्यमंत्री को संबोधित सात सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
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7 सूत्रीय ज्ञापन में उठाई गई प्रमुख मांगें
ज्ञापन में अभिभावकों ने निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कई मांगें रखीं:
- अधिनियम का उल्लंघन: ‘उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2018’ का पालन सुनिश्चित किया जाए।
- DIOS की निष्क्रियता: दोषी स्कूल प्रबंधन पर कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई गई।
- महंगी किताबों का बोझ: अभिभावकों को चिन्हित दुकानों से महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर न किया जाए।
- स्कूल बैग का वजन: CBSE और NCERT के मानकों को सख्ती से लागू किया जाए।
- पारदर्शिता: सभी स्कूल अपनी वेबसाइट पर पुस्तकों की सूची अनिवार्य रूप से अपलोड करें।
- सुरक्षा मानक: विद्यालयों में ‘विशाखा गाइडलाइन’ का पालन सुनिश्चित किया जाए।
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आंदोलन की दी चेतावनी
अधिवक्ता उदय प्रताप राय ने कहा कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो अभिभावक मंच बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होगा।
प्रदर्शन में रहे ये लोग शामिल
इस दौरान राबिया खातून, अमरेश सिंह, सुभाष यादव, योगेंद्र कुमार प्रजापति, सुजीत सिंह, नरेंद्र सिंह, ऋषिकेश पांडे, वसीम अख्तर, अश्वनी पांडे, राजेश शर्मा, रमाकांत सिंह, विनोद सिंह, अतुल सिंह, संतोष यादव, पंकज गुप्ता, राहुल यादव, बृजेश चौधरी, गोपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।
Mau SP Review Meeting: एसपी कमलेश बहादुर ने कानून व्यवस्था की समीक्षा कर दिए सख्त निर्देश
मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। नवागत पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने पुलिस लाइन सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक कर जनपद की कानून व्यवस्था की समीक्षा की।
बेहतर पुलिसिंग पर दिया जोर
बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक, क्षेत्राधिकारी, प्रभारी निरीक्षक, थानाध्यक्ष एवं शाखा प्रभारी उपस्थित रहे। एसपी ने जनविश्वास बनाए रखने और गुणवत्ता पूर्ण पुलिसिंग पर विशेष जोर दिया।
जनशिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देश
एसपी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनशिकायतों और IGRS प्रार्थना पत्रों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने को कहा।
छोटी घटनाओं पर भी रखें नजर
उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी घटनाओं को भी गंभीरता से लिया जाए और आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाए। किसी भी गंभीर घटना पर तत्काल मौके का निरीक्षण कर उच्चाधिकारियों को सूचित किया जाए।
सोशल मीडिया पर सतर्कता जरूरी
एसपी ने सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रखने और अफवाहों का तत्काल खंडन करने के निर्देश दिए।
महिला सुरक्षा और यातायात पर फोकस
बैठक में महिला सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और पुलिस-जन संवाद को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
ईमानदारी से कर्तव्य निभाने की अपील
एसपी कमलेश बहादुर ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ईमानदारी और तत्परता से करने के निर्देश दिए।
Maharajganj Fraud Case: नकली सोना बेचकर ठगी करने वाला अभियुक्त गिरफ्तार, नकद व आभूषण बरामद
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत नौतनवां पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने नकली सोना बेचकर लोगों को ठगने वाले एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया है।
आभूषण दुकान पर की थी ठगी
जानकारी के अनुसार, 31 मार्च 2026 को एक ज्वेलरी दुकान पर एक पुरुष और महिला ने आभूषण को असली सोना बताकर करीब ₹40,000 में बेच दिया। बाद में जांच में वह नकली निकला।
कई दुकानों को बना चुका था शिकार
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी ने अन्य दुकानों पर भी इसी तरह की ठगी की वारदात को अंजाम दिया था।
पुलिस ने दबोचा आरोपी
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर गौसिया इंटर कॉलेज के पास से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
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नकद और नकली आभूषण बरामद
तलाशी के दौरान आरोपी के पास से ₹9,850 नकद और पीली धातु के नकली आभूषण बरामद किए गए।
आरोपी की पहचान
गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान राकेश गौड़ (45), निवासी रामूघाट थाना पीपीगंज, जनपद गोरखपुर के रूप में हुई है।
मुकदमा दर्ज, कार्रवाई जारी
इस मामले में थाना नौतनवां पर मु.अ.सं. 68/2026 के तहत धारा 318(4) और 317(2) बीएनएस में मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस टीम को मिली सफलता
गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक विकास गौड़, कांस्टेबल अभिमन्यु खरवार और कांस्टेबल प्रभार गौड़ शामिल रहे।
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Gorakhpur AI Workshop 2026: “AI for All” कार्यशाला के लिए पंजीकरण शुरू, विद्यार्थियों को मौका
गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। युवाओं को आधुनिक तकनीकी कौशल से सशक्त बनाने के उद्देश्य से “AI for All” कार्यशाला का आयोजन 15 अप्रैल 2026 से किया जाएगा। इस कार्यशाला के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 2 अप्रैल से शुरू हो चुकी है।
इन संस्थानों के सहयोग से आयोजन
यह कार्यशाला महाराणा प्रताप इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय, गोरखपुर के संयुक्त सहयोग से आयोजित की जा रही है।
विद्यार्थियों को दिए गए निर्देश
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध सभी कॉलेजों के विद्यार्थियों को अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने के निर्देश दिए गए हैं।
9 अप्रैल तक कर सकेंगे रजिस्ट्रेशन
इच्छुक विद्यार्थी 9 अप्रैल 2026 दोपहर 12 बजे तक पंजीकरण कर सकते हैं। प्रशिक्षण 15 अप्रैल से शुरू होगा और यह 21 घंटे का कार्यक्रम 60 दिनों में पूरा किया जाएगा।
पूरी तरह निःशुल्क प्रशिक्षण
इस कार्यशाला की खास बात यह है कि यह पूरी तरह निःशुल्क है, जिससे ज्यादा से ज्यादा छात्र इसका लाभ उठा सकें।
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क्या-क्या सिखाया जाएगा?
कार्यशाला में:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बेसिक जानकारी
- मशीन लर्निंग के सिद्धांत
- डेटा प्रोसेसिंग
- साइबर सुरक्षा के पहलू
विशेषज्ञों द्वारा थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कुलपति ने की अपील
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि AI और साइबर सुरक्षा आज के समय की अहम तकनीकें हैं और ऐसे कार्यक्रम छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करते हैं।
वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी
नोडल अधिकारी प्रो. अजय कुमार शुक्ला ने बताया कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, समय-सारिणी और अन्य जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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Afghanistan-Pakistan Tension: अफगान सेना की सर्जिकल स्ट्राइक, पाक सेना के ठिकाने तबाह, 3 सैनिकों की मौत
इस्लामाबाद/काबुल (राष्ट्र की परम्परा)। पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव के बीच अफगानिस्तान की सेना ने बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तानी ठिकानों पर हमला किया है।
सर्जिकल स्ट्राइक में सैन्य अड्डे निशाने पर
जानकारी के अनुसार, अफगान सेना ने खोस्त-खुर्रम बॉर्डर के पास पाकिस्तानी सैन्य अड्डों और वाहनों को निशाना बनाते हुए आग के हवाले कर दिया। इस हमले को सर्जिकल स्ट्राइक के तौर पर देखा जा रहा है।
आर्टिलरी और टैंकों से हमला
सूत्रों के मुताबिक, अफगान सेना ने आर्टिलरी और टैंकों का इस्तेमाल करते हुए लगातार गोलाबारी की। देर रात तक सीमा पर फायरिंग जारी रही, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बन गया।
3 सैनिकों की मौत, कई घायल
इस हमले में पाकिस्तान के 3 सैनिकों की मौत की खबर है, जबकि करीब 12 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। हालांकि आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
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पहले भी लगे थे गंभीर आरोप
इससे पहले अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर कुनार प्रांत में नागरिक इलाकों पर गोलीबारी का आरोप लगाया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत और कई लोग घायल हुए थे।
तनाव की बड़ी वजह क्या है?
दोनों देशों के बीच तनाव की मुख्य वजह पाकिस्तान का यह आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार, टीटीपी जैसे उग्रवादी संगठनों को पनाह दे रही है। वहीं अफगानिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
लगातार बिगड़ते रिश्ते
हाल के समय में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में तेजी से गिरावट आई है और सीमा पर हिंसक झड़पों की घटनाएं बढ़ी हैं।
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