Saturday, July 18, 2026
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गैस-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों पर सपा का विरोध, जनता की समस्याओं को लेकर उठी आवाज

भाजपा सरकार की नीतियों पर सपा लोहिया वाहिनी का हमला, महंगाई-बेरोजगारी को लेकर उठाए सवाल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। समाजवादी लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष दिव्यांश श्रीवास्तव ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि चुनाव समाप्त होते ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। बढ़ती बेरोजगारी के कारण शिक्षित युवा निराश हैं और रोजगार के अभाव में मानसिक दबाव झेल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है और अधिकारी-कर्मचारी बेलगाम हो चुके हैं। किसानों और व्यापारियों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से खेती-किसानी की लागत बढ़ रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
सपा नेता ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता को न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में गरीब, किसान और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दिव्यांश श्रीवास्तव ने कहा कि उत्तर प्रदेश शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता भाजपा सरकार को सत्ता से बाहर करने का निर्णय लेगी।

80 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों को ललकारने वाले वीर कुंवर सिंह को बलिया में भावभीनी श्रद्धांजलि


बलिया (राष्ट्र की परंपरा) प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू कुंवर सिंह के बलिदान दिवस पर जनपद भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में स्थानीय पंडित दीनदयाल चबूतरा पर एक भव्य सभा का आयोजन हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर वीर सपूत को नमन किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा नेता व समाजसेवी अनूप सिंह ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबू कुंवर सिंह भारतीय स्वाभिमान, साहस और वीरता के अद्वितीय प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में जिस अदम्य साहस के साथ उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि देशभक्ति के लिए उम्र नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और मजबूत इरादों की आवश्यकता होती है।
सभा में वक्ताओं ने उनके संघर्षों को याद करते हुए बताया कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कुंवर सिंह ने न केवल ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिगुल फूंका, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी रणनीति और नेतृत्व क्षमता से कई मोर्चों पर अंग्रेजों को पराजित किया। उनका साहस और नेतृत्व भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।
इस अवसर पर संजय राय, सोनू सिंह, संजय चौबे, अमित सिंह, अभिषेक यादव, अंकित ठाकुर सहित दर्जनों गणमान्य नागरिक, युवा और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्रहित में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने वीर कुंवर सिंह के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।

एनएचआई से वार्ता के बाद कपरवार सेतु पर दोपहिया वाहनों का आवागमन शुरू

कपरवार/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
राप्ती नदी पर स्थित कपरवार सेतु पर सुरक्षा कारणों से वाहनों के आवागमन पर रोक लगाए जाने से गोरखपुर और देवरिया के बीच आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस बीच कपरवार रामजानकी मार्ग स्थित चौकी पर कांग्रेस प्रवक्ता रवि प्रताप सिंह और समाजवादी पार्टी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह ने एनएचआई के अधिकारियों से फोन पर वार्ता कर आमजन की समस्याओं से अवगत कराया।
वार्ता के बाद एनएचआई अधिकारियों ने दोपहिया वाहनों के आवागमन की अनुमति दे दी। हालांकि सुरक्षा के मद्देनजर चारपहिया, भारी वाहनों समेत अन्य सभी वाहनों के संचालन पर रोक जारी रहेगी।
एनएचआई अधिकारियों ने बताया कि कपरवार सेतु के निर्माण कार्य के लिए तीन कंपनियों को बुलाया गया है। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
रवि प्रताप सिंह और अर्जुन सिंह ने कहा कि यदि अगले 100 घंटे के भीतर सेतु निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो क्षेत्रीय जनता आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि सेतु बंद होने से प्रतिदिन हजारों यात्रियों, छात्रों, व्यापारियों और मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था न होने से लोगों को अतिरिक्त समय और धन खर्च करना पड़ रहा है।
इस दौरान दिवाकर चौरसिया, सुमीत तिवारी, राहुल, विवेक, हरिश्चंद्र, कमलेश, विजली, अखिलेश, पंकज, नीरज वर्मा, अभिषेक सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

अनियमित यात्रा की रोकथाम के लिए सघन टिकट अभियान

वाराणसी(राष्ट्र की परम्परा)
मंडल रेल प्रबंधक आशीष जैन के निर्देशन एवं वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक प्रशस्ति श्रीवास्तव के नेतृत्व में पूर्वोत्तर रेलवे, वाराणसी मंडल के विभिन्न रेलखंडों पर बिना टिकट एवं अनियमित यात्रा की रोकथाम के लिए सघन टिकट जांच अभियान निरंतर चलाया जा रहा है।
इसी क्रम में 17 जुलाई 2026 को मऊ–इन्दारा रेलखंड पर गाड़ी संख्या 65107 भटनी–वाराणसी सिटी, 15104 बनारस–गोरखपुर एक्सप्रेस, 14006 आनंद विहार–सीतामढ़ी एक्सप्रेस सहित अन्य मेल एवं सवारी गाड़ियों में विशेष टिकट जांच अभियान चलाया गया। इसके अतिरिक्त इन्दारा–दोहरीघाट रेलखंड पर किमी 7/2 के समीप गाड़ी संख्या 65121 दोहरीघाट-वाराणसी सिटी सवारी गाड़ी में भी विशेष जांच की गई।
मुख्य वाणिज्य निरीक्षक, मऊ अखिलेश सिंह एवं मुख्य टिकट निरीक्षक राम प्रभाव यादव के नेतृत्व में आयोजित इस संयुक्त अभियान में रेलवे सुरक्षा बल के उप निरीक्षक राम प्रवेश यादव सहित रेलवे सुरक्षा बल एवं राजकीय रेलवे पुलिस के कुल 11 सुरक्षा कर्मियों तथा वाराणसी रेड टीम एवं आईसीपी, मऊ के 11 टिकट जांच कर्मचारियों ने भाग लिया।
टिकट जांच अभियान के दौरान 83 बिना टिकट यात्रियों को पकड़ा गया, जिनसे ₹48,035 अड़तालीस हजार पैंतीस रुपये रेल राजस्व के रूप में वसूल किए गए।
जांच अभियान के दौरान संबंधित स्टेशनों के टिकट काउंटरों पर यात्रा टिकट लेने के लिए यात्रियों की लंबी कतारें भी देखने को मिलीं, जो यात्रियों में वैध टिकट लेकर यात्रा करने के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाता है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक प्रशस्ति श्रीवास्तव ने यात्रियों से अपील की कि वे सदैव वैध यात्रा टिकट लेकर ही यात्रा करें, रेलवे नियमों का पालन करें तथा ट्रेनों एवं रेलवे परिसरों में स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग प्रदान करें।

एसडीएम ज्ञान प्रताप सिंह का सख्त संदेश—लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त

पहले ही दिन फरियादियों की सुनी समस्याएं, त्वरित निस्तारण के दिए निर्देश

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
सदर तहसील में नवागत उप जिलाधिकारी (एसडीएम) ज्ञान प्रताप सिंह ने शुक्रवार को अपने पद का कार्यभार ग्रहण कर लिया। कार्यभार संभालते ही उन्होंने अपने कार्यशैली का स्पष्ट संदेश देते हुए जनसुनवाई को प्राथमिकता दी और कार्यालय पहुंचे फरियादियों की समस्याओं को बारी-बारी से गंभीरता पूर्वक सुना। पहले ही दिन उनकी सक्रियता और संवेदनशीलता से फरियादियों में उम्मीद जगी।
एसडीएम ज्ञान प्रताप सिंह ने कहा कि उनकी प्राथमिकता हर फरियादी की समस्या का समयबद्ध और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी व्यक्ति को एक ही समस्या के लिए बार-बार कार्यालय का चक्कर न लगाना पड़े। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अब व्यवस्था में सुधार लाया जाएगा और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी।
कार्यभार ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों—नायब तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल तथा पटल प्रभारियों के साथ बैठक कर सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कोई भी फाइल एक दिन से अधिक लंबित नहीं रखी जाएगी और सभी मामलों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। विशेष रूप से किसानों और आम जनता से जुड़े मामलों को तत्काल हल करने पर जोर दिया गया।
एसडीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले क्या होता था, इससे उन्हें कोई सरोकार नहीं है। अब उनका पूरा ध्यान वर्तमान व्यवस्था को सुधारने और जनता को बेहतर सेवा देने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी फरियादी को बेवजह तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और हर समस्या का समाधान पारदर्शी तरीके से किया जाएगा।
उन्होंने सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने पटल पर नियमित रूप से बैठकर जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करें और सौंपे गए दायित्वों का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वहन करें। लापरवाही या अनावश्यक देरी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एसडीएम ज्ञान प्रताप सिंह की इस पहल से तहसील में कार्यसंस्कृति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। फरियादियों ने भी उनकी सक्रियता और संवेदनशील रवैये की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि अब उनकी समस्याओं का शीघ्र और प्रभावी समाधान संभव हो सकेगा। प्रशासन की इस नई पहल से सदर तहसील में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की संभावना है।

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने एनएसएस स्वयंसेवक कृष्णानन्द जायसवाल को किया सम्मानित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के सक्रिय स्वयंसेवक कृष्णानन्द जायसवाल को भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत संचालित ‘माई भारत’ के प्रतिष्ठित ‘नेशन फर्स्ट चैलेंज’ में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित यूथ कन्वेंशन के दौरान सम्मानित किया।
देशभर से आयोजित इस प्रतियोगिता में केवल पांच शीर्ष विजेताओं का चयन किया गया, जिनमें कृष्णानन्द जायसवाल ने स्थान बनाया। विशेष बात यह रही कि वह पूरे उत्तर भारत से चयनित एकमात्र युवा प्रतिनिधि रहे। यह उपलब्धि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए भी गर्व का विषय है।
18 मई से 30 जून 2026 तक आयोजित ‘नेशन फर्स्ट चैलेंज’ का उद्देश्य युवाओं को विकसित भारत-2047 के संकल्प से जोड़ते हुए सामाजिक सेवा, जनजागरूकता, स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन, पर्यटन विकास, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक उत्तरदायित्व जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना था। प्रतिभागियों का चयन उनके नवाचार, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक प्रभाव और राष्ट्रहित में किए गए कार्यों के आधार पर किया गया।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन, राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक प्रो. सत्यपाल सिंह, डॉ. आलोक कुमार सहित कार्यक्रम अधिकारियों और शिक्षकों ने कृष्णानन्द जायसवाल को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने विश्वास जताया कि वह आगे भी समाज और राष्ट्रहित में उल्लेखनीय कार्य कर विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएंगे।

18 जुलाई को प्रकाशित होगी अंतिम मतदेय स्थल सूची, राजनीतिक दलों के सुझावों पर हुई चर्चा

डीएम बोले- आयोग के निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी ढंग से पूरी की जा रही प्रक्रिया, शेष आपत्तियां तत्काल दर्ज कराने की अपील

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)।विधानसभा निर्वाचन की तैयारियों के तहत जनपद के मतदेय स्थलों की सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव सिंह सोंगरवाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में मतदेय स्थलों के संभावित परिवर्तन, विभाजन और प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
जिलाधिकारी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार प्रस्तावित सभी मतदेय स्थलों का संबंधित उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों से भौतिक सत्यापन कराया गया है। सत्यापन के दौरान प्राप्त शिकायतों और सुझावों का नियमानुसार परीक्षण एवं निस्तारण किया जा चुका है। इसके बाद 18 जुलाई 2026 को जनपद के मतदेय स्थलों की अंतिम सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि मतदेय स्थलों के निर्धारण की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और निर्वाचन आयोग की गाईडलाइन के अनुरूप संचालित की जा रही है, ताकि प्रत्येक मतदाता को अपने मतदान केंद्र पर आसानी से पहुंचने की सुविधा मिल सके।
बैठक में जिलाधिकारी ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से कहा कि यदि किसी मतदेय स्थल को लेकर अब भी कोई आपत्ति या सुझाव शेष है तो उसे तत्काल संबंधित सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एआरओ) के समक्ष प्रस्तुत करें, जिससे समय रहते उसका निस्तारण किया जा सके।
उन्होंने निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए कि मतदेय स्थलों से संबंधित सभी औपचारिकताएं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करते हुए भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में जनपद के सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, संबंधित प्रशासनिक अधिकारी तथा विभिन्न मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहें।

अनाथ और निराश्रितों के पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन सख्त, हर मंगलवार चलेगा विशेष रेस्क्यू अभियान

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। सड़क पर रहने वाले अनाथ, परित्यक्त और असहाय व्यक्तियों के चिन्हांकन तथा पुनर्वास को लेकर जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) चन्द्रेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय चिन्हांकन समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें न्यायालय एवं शासन के निर्देशों के अनुपालन पर विस्तृत चर्चा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में निर्देश दिया गया कि 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के निराश्रित व्यक्तियों को संबंधित कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के आधार पर आश्रय गृह, चिकित्सा परिचर्या गृह अथवा अन्य उपयुक्त संस्थानों में भेजा जाएगा। वहीं 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के मिलने पर उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अपर जिलाधिकारी ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को समाज कल्याण विभाग की कल्याण साथी हेल्पलाइन-14568, महिला हेल्पलाइन 181 तथा चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए, ताकि आमजन सड़क पर मिले निराश्रित, महिलाओं और बच्चों की सूचना तत्काल प्रशासन तक पहुंचा सकें।
बैठक में मानसिक रूप से अस्वस्थ एवं दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 और मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम-2017 के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। साथ ही शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक मंगलवार को विशेष रेस्क्यू अभियान चलाकर ऐसे व्यक्तियों को सुरक्षित आश्रय और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया।
बैठक में जिला समाज कल्याण अधिकारी बृजेश कुमार, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी, जिला प्रोबेशन अधिकारी, डॉ. अमर सिंह गौतम, अरुण कुमार ओझा, अधिवक्ता नरेन्द्र चौधरी, राम शब्द, एस.बी. सागर, मोनिका शुक्ला, प्रिंस कुमार झा सहित विभिन्न विभागों एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

चार माह बाद बाइक चोरी का खुलासा: गोरखपुर का युवक गिरफ्तार, चोरी की बाइक बरामद

बृजमनगंज पुलिस की कार्रवाई, फरार साथी की तलाश जारी

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। बृजमनगंज थाना पुलिस ने करीब चार माह पहले हुई बाइक चोरी की घटना का सफल खुलासा करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी की गई मोटरसाईकिल बरामद कर ली है। पुलिस पूछ-ताछ में आरोपी ने अपने एक साथी के साथ मिलकर बाइक चोरी करने की बात स्वीकार की है। फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के मार्गदर्शन तथा क्षेत्राधिकारी फरेंदा दीपशिखा वर्मा के पर्यवेक्षण में अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत यह सफलता मिली।
थानाध्यक्ष मदन मोहन मिश्र के नेतृत्व में गठित टीम ने मुखबिर की सूचना के आधार पर गोरखपुर निवासी कमलेश पुत्र रामप्रीत पासवान (23) को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से चोरी की गई मोटरसाइकिल U P 56 A B 7784 बरामद की गई।
जानकारी के अनुसार 28 मार्च 2026 को सिकड़ा कोइलाडांड़ निवासी सुखदेव यादव ने अपनी मोटरसाईकिल चोरी होने की तहरीर दी थी। इस मामले में थाना बृजमनगंज में मुकदमा संख्या 84/2026, धारा 303(2) बीएनएस के तहत अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी तक पहुंचकर चोरी की बाइक बरामद कर ली।
पूछ-ताछ में कमलेश ने बताया कि उसने अपने साथी उदय, निवासी मोहनापुर पासी टोला, पादरी बाजार (गोरखपुर) के साथ मिलकर सिकड़ा गांव से बाइक चोरी की थी। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी को महराजगंज न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है, जबकि फरार आरोपी की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में उप-निरीक्षक अमित कुमार सिंह, उपनिरीक्षक अरविंद कुमार यादव, कांस्टेबल धीरेन्द्र सिंह यादव एवं आरक्षी अतुल मिश्रा शामिल रहें।

ऑनलाइन बेटिंग, कैसीनो और डिजिटल गेमिंग पर एक समान कानून की बढ़ती आवश्यकता

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।ऐसे समय में देश के सामने केवल आर्थिक विकास की चुनौती नहीं है,बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व, कानून का प्रभावी शासन, युवाओं का भविष्य और डिजिटल युग में बदलती जीवनशैली के अनुरूप आधुनिक कानून बनाने की आवश्यकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। जुआ, कैसीनो और ऑनलाइन सट्टेबाजी इन्हीं विषयों में से एक है, जिसपर लंबे समय से देश में स्पष्ट, समग्र और आधुनिक नीति का अभाव दिखाई देता है। भारत में जुआ और कैसीनो के लिए कोई एक समान केंद्रीय (राष्ट्रीय) कानून नहीं है।अधिकांश मामलों में अभी भी पब्लिक गेबलिंग एक्ट,1867 (जहाँ लागू है) तथा राज्यों के अपने- अपने कानून लागू होते हैं। गोवा,सिक्किम और कुछ हद तक दमन-दीव में लाइसेंस प्राप्त कैसीनो की अनुमति है, जबकि कई राज्यों में जुआ पूर्ण या आंशिक रूप से प्रतिबंधित है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समान मॉडल कानून की आवश्यकता की चर्चा समय-समय पर होती रही है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र अधिवक्ता होने के नाते बताना चाहूंगा क़ि, वर्तमान डिजिटल प्रौद्योगिकी के दौर में सोशल मीडिया,ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन कसीनो,बेटिंग ऐप्स,फैंटेसी स्पोर्ट्स प्लेटफ़ॉर्म शॉर्ट वीडियो ऐप्स, लाइव स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म,एआई आधारित चैट प्लेटफ़ॉर्म, वीडियो शेयरिंग साइट्स तथा अन्य डिजिटल माध्यमों का प्रभाव तेजी से बढ़ा है।इनका सकारात्मक उपयोग शिक्षा, नवाचार और संचार के लिए उपयोगी है,लेकिन अनियंत्रित और कम उम्र में उपयोग बच्चों एवं युवाओं में नशे जैसी डिजिटल लत,मानसिक तनाव,पढ़ाई में गिरावट, आर्थिक नुकसान और सामाजिक समस्याओं का कारण भी बन रहा है।इसी चिंता को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया ने बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर कड़े प्रतिबंधों की दिशा में कदम उठाए हैं,जबकि ब्रिटेन सहित कई देशों ने आयु सत्यापन ऑनलाइन सुरक्षा और बाल संरक्षण संबंधी नियमों को सख्त बनाया है।भारत में भी डिजिटल सुरक्षा,ऑनलाइन गेमिंग और बच्चों की सुरक्षा को लेकर नीतिगत स्तरपर लगातार विचार-विमर्श और नियामकीय सटीकता से प्रयास जारी हैं। 

साथियों, इसी क्रम में गोवा सरकार ने 16 जुलाई 2026 को अधिसूचित गोवा कसीनो (संशोधन) कानून के तहत कसीनो में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष निर्धारित कर दी। इसका उद्देश्य युवाओं को जुए की लत और उसके सामाजिक- आर्थिक दुष्प्रभावों से बचाना हैवर्तमान में अधिकांश भारतीय राज्यों में कसीनो या ऑनलाइन जुए के संबंध में अलग-अलग कानून हैं, लेकिन गोवा की तरह 21 वर्ष की स्पष्ट आयु-सीमा का मॉडल सभी राज्यों में समान रूप से लागू नहीं है। कई राज्यों ने जुए पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध लगाया है, जबकि कुछ राज्यों ने ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी पर अलग-अलग नियम बनाए हैं।आज आवश्यकता इस बात की है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर बच्चों और युवाओं की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया,ऑनलाइन गेमिंग, ऑनलाइन कसीनो और अन्य व्यसनी डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर प्रभावी आयु सत्यापन, समय- सीमा, अभिभावकीय नियंत्रण तथा कठोर नियामकीय व्यवस्था लागू करें। यदि गोवा का 21 वर्ष आयु-सीमा मॉडल अन्य राज्यों में भी अपनाया जाता है,तो यह युवा पीढ़ी को डिजिटल और जुए की लत से बचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकता है। 

साथियो 16 जुलाई 2026 से गोवा सरकार द्वारा उठाए गए दो महत्वपूर्ण कदम, 21 वर्ष से कम आयु के युवाओं के कैसीनो में प्रवेश पर प्रतिबंध तथा कैसीनो उद्योग पर कर एवं नियामक व्यवस्था को अधिक सुदृढ़ बनाने की पहल ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नई बहस को जन्म दिया है। यह बहस केवल गोवा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रश्न पूरे भारत के सामने खड़ा करती है कि यदि किसी राज्य में कैसीनो या जुए की अनुमति है,तो क्या उसे सख्त कानून पारदर्शी कर व्यवस्था और सामाजिकउत्तरदायित्व के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए?और यदि किसी राज्य में इसकी अनुमति नहीं है,तो क्या अवैध जुआ और ऑनलाइन सट्टेबाजी पर नियंत्रण के लिए सटीकता से  आधुनिक कानून नहीं बनने चाहिए? 

साथियों, गोवा भारत का प्रमुख पर्यटन राज्य है,जहाँ वर्षों से लाइसेंस प्राप्त कैसीनो संचालित हो रहे हैं। देश और विदेश से आने वाले पर्यटक राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।कैसीनो उद्योग से सरकार को राजस्व प्राप्त होता है,हजारों लोगों को रोजगार मिलता है और पर्यटन क्षेत्र को गति मिलती है। किंतु दूसरी ओर जुए की लत,आर्थिक बर्बादी, पारिवारिक विवाद,मानसिक तनाव,अपराध और युवाओं पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव जैसी चिंताएँ भी सामने आती रही हैं। इसलिए गोवा सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि आर्थिक गतिविधि तभी स्वीकार्य है,जब वह सामाजिक उत्तरदायित्व और सख्त कानूनी निगरानी के साथ संचालित हो।21 वर्ष से कम आयु के युवाओं के कैसीनो में प्रवेश पर प्रतिबंध एक अत्यंत दूरदर्शी कदम माना जा सकता है। विश्वभर के मनोवैज्ञानिक और न्यूरोसाइंस विशेषज्ञ मानते हैं कि किशोरावस्था और प्रारंभिक युवावस्था में निर्णय लेने की क्षमता पूरी तरह परिपक्व नहीं होती। इस आयु में जोखिम उठाने की प्रवृत्ति अधिक होती है और तत्काल लाभ का आकर्षण व्यक्ति को गलत निर्णयों की ओर ले जा सकता है। यदि इस अवस्था में जुए की लत लग जाए तो उसका प्रभाव केवल आर्थिक नहीं बल्कि मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। इसलिए गोवा का यह निर्णय केवल प्रवेश रोकने का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी की सुरक्षा का निर्णय है। 

साथियों गोवा सरकार का दूसरा महत्वपूर्ण कदम कैसीनो उद्योग को अधिक उत्तरदायी कर व्यवस्था और नियामक ढाँचे के अंतर्गत लाने का है। किसी भी आर्थिक गतिविधि का उद्देश्य केवल लाभ कमाना नहीं होना चाहिए। यदि सरकार कर के माध्यम से प्राप्त राजस्व का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य,खेल, नशामुक्ति, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों पर करती है,तो यह व्यवस्था समाज और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है। कराधान का अर्थ केवल सरकारी आय बढ़ाना नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों में सटिका से  पारदर्शिता,जवाबदेही और वैधता स्थापित करना भी होता है। 

साथियों,भारत में वर्तमान स्थिति काफी असमान है।गोवा सिक्किम और दमन जैसे कुछ क्षेत्रों में सीमित रूप से कैसीनो की अनुमति है, जबकि अधिकांश राज्यों में सार्वजनिक जुआ प्रतिबंधित है।इसके बावजूदऑनलाइन जुआ विदेशी बेटिंग प्लेटफॉर्म और डिजिटल सट्टेबाजी का तेजी से विस्तार हो रहा है। लाखों भारतीय मोबाइल फोन के माध्यम से ऐसे प्लेटफॉर्म तक पहुँच रहे हैं, जिन पर राज्य सरकारों का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं है। इससे कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर अपराध और युवाओं में जुए की लत जैसी समस्याएँ बढ़ने की आशंका बनी रहती है। यह स्थिति स्पष्ट संकेत देती है कि केवल पुराने कानूनों के सहारे आधुनिक डिजिटल चुनौतियों का सटीकता से समाधान संभव नहीं है। 

साथियों, भारत में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जुआ और सट्टेबाजी से जुड़े अनेक कानून औपनिवेशिक काल के हैं,जबकि आज की दुनियाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता,डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन गेमिंग के युग में प्रवेश कर चुकी है। आज कोई व्यक्ति कुछ ही मिनटों में मोबाइल फोन से अंतरराष्ट्रीय बेटिंग वेबसाइट पर पैसा लगा सकता है।यदि सरकार केवल प्रतिबंध की नीति अपनाती है, तो अवैध गतिविधियाँ भूमिगत हो जाती हैं। यदि पूर्ण स्वतंत्रता देती है, तो सामाजिक नुकसान बढ़ सकता है।इसलिए आवश्यकता एक संतुलित नीति की है,जहाँ सटीकता से  कानून भी हो,निगरानी भी हो और सामाजिक उत्तरदायित्व भी हो। 

साथियों, मेरे विचार से भारत को अब एक मॉडल जुआ एवं कैसीनो विनियमन कानून (मॉडल गंबलिंग एंड कैसीनो रेगुलेशन लॉ) तैयार करना चाहिए। यह कानून पूरे देश पर अनिवार्य रूप से लागू न होकर राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल हो सकता है।प्रत्येक राज्य अपनी सामाजिक सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार इसे अपनाने या संशोधित करने का अधिकार रखे।इससे देशभर में न्यूनतम कानूनी मानक (मिनिमम् लीगल स्टैण्डर्ड्स) स्थापित होंगे और कानूनी अस्पष्टता दूर होगी।इस मॉडल कानून का पहला सिद्धांत होना चाहिए, युवाओं की सुरक्षा सर्वोपरि। पूरे देश में 21 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति के कैसीनो या उच्च जोखिम वाले जुआ प्लेटफॉर्म तक पहुँचने पर प्रतिबंध होना चाहिए। आधार, पासपोर्ट या अन्य सरकारी पहचान-पत्र के माध्यम से डिजिटल आयु सत्यापन अनिवार्य बनाया जाए। नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर भारी जुर्माना, लाइसेंस रद्द करने और आपराधिक कार्रवाई का सटीकता से प्रावधान होना चाहिए। 

साथियों, दूसरा महत्वपूर्ण प्रावधान जिम्मेदार जुआ (रिस्पांसिबल गेबलिंग) होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को जुए की लत से बचाना चाहता है,तो उसे स्वैच्छिक प्रतिबंध का अधिकार मिलना चाहिए। परिवार के सदस्यों को भी विशेष परिस्थितियों में न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ऐसे व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगाने का अधिकार मिल सकता है।प्रत्येक कैसीनो में सटीकता से  मनोवैज्ञानिक परामर्श, हेल्पलाइन चेतावनी संदेश और नशामुक्ति सहायता केंद्र अनिवार्य किए जाने चाहिए। 

साथियों, तीसरा व चौथा महत्वपूर्ण पहलू पारदर्शी कर व्यवस्था है। कैसीनो उद्योग से प्राप्त राजस्व का निश्चित प्रतिशत शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, मानसिक स्वास्थ्य, नशामुक्ति अभियान और महिला सुरक्षा कार्यक्रमों पर खर्च करना कानून द्वारा अनिवार्य किया जा सकता है। इससे जनता को यह विश्वास मिलेगा कि सरकार केवल कर संग्रह नहीं कर रही, बल्कि सामाजिक कल्याण के लिए उसका उपयोग भी कर रही है।चौथा पक्ष डिजिटल और ऑनलाइन जुए का नियमन है। विदेशी बेटिंग प्लेटफॉर्म, अवैध ऐप और अनधिकृत वेबसाइटें भारतीय युवाओं को तेजी से आकर्षित कर रही हैं। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक, प्रवर्तन निदेशालय, साइबर पुलिस और राज्यों की एजेंसियों के बीच समन्वित व्यवस्था विकसित कर ऐसे प्लेटफॉर्मों पर प्रभावी नियंत्रण सटीकता से स्थापित किया जाना चाहिए। 

साथियों, कुछ लोग यह तर्क देते हैं कि जुआ सामाजिक बुराई है और इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर देना चाहिए। यह विचार अपनी जगह सम्माननीय है।वहीं दूसरा पक्ष कहता है कि जहाँ माँग मौजूद है, वहाँ पूर्ण प्रतिबंध से अवैध बाजार और संगठित अपराध बढ़ते हैं। विश्व के अनेक देशों का अनुभव बताता है कि कठोर नियमन, पारदर्शी कर व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा उपाय पूर्ण प्रतिबंध की तुलना में अधिक प्रभावी सिद्ध हुए हैंइसलिए प्रत्येक राज्य को अपनी परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए, किंतु किसी भी स्थिति में अवैध जुए और डिजिटल सट्टेबाजी को कानून से बाहर नहीं छोड़ा जा सकता। 

साथियों, मेरे मत में भारत सरकार को विधि आयोग, नीति आयोग, गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा सभी राज्यों के प्रतिनिधियों की एक उच्चस्तरीय समिति गठित करनी चाहिए। यह समिति विश्व के सफल मॉडलों का अध्ययन कर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप एक व्यापक मॉडल कानून तैयार करे। इस कानून में 21 वर्ष की न्यूनतम आयु, डिजिटल पहचान सत्यापन, लाइसेंस प्रणाली, सीसीटीवी निगरानी, मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी नियम, जिम्मेदार जुआ कार्यक्रम, स्वैच्छिक प्रतिबंध व्यवस्था, कर पारदर्शिता, नियमित ऑडिट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का पंजीकरण, भ्रामक विज्ञापनों पर रोक तथा कठोर दंड जैसी व्यवस्थाएँ शामिल होनी चाहिए। 

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र

नशामुक्त युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत: महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में ‘विकसित भारत यूथ कनेक्ट’ कार्यक्रम

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा) । महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के सहयोग से “विकसित भारत यूथ कनेक्ट कार्यक्रम” का आयोजन “नशा मुक्त युवा-विकसित भारत” विषय पर किया गया। कार्यक्रम में युवाओं को नशामुक्त जीवनशैली अपनाने, सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने और विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया। इसमें शिक्षक, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया। मेघा शर्मिष्ठा और अनुष्का गोयल ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद मुख्य एवं विशिष्ट अतिथियों का अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया गया।
स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय के नशामुक्ति नोडल अधिकारी डॉ. दिलीप मिश्रा ने कहा कि नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास को भी प्रभावित करता है। उन्होंने युवाओं से अपनी ऊर्जा, ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने तथा समाज में नशामुक्ति के प्रति व्यापक जनजागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
मुख्य वक्ता एवं यूथ आइकन प्रियांशु भारद्वाज ने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का युवा नशामुक्त, स्वस्थ, शिक्षित और जागरूक होगा। उन्होंने युवाओं से स्वयं नशे से दूर रहने के साथ-साथ परिवार, मित्रों और समाज को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया। उन्होंने डिजिटल साक्षरता, सामाजिक सेवा और नवाचार के क्षेत्र में युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर भी बल दिया।
डॉ. अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि योग और ध्यान युवाओं को मानसिक रूप से सशक्त बनाते हैं तथा तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं पर नियंत्रण में मदद करते हैं। वहीं इंजीनियर उदयभान यादव ने कहा कि योग, प्राणायाम और मेडिटेशन युवाओं को मानसिक संतुलन और सकारात्मक सोच प्रदान करते हैं, जिससे वे नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. धनंजय पांडेय ने राष्ट्रीय सेवा योजना की गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह युवाओं में सेवा, अनुशासन, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करती है। उन्होंने स्वयंसेवकों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन अनुमेशा मिश्रा और राघवेंद्र शुक्ला ने संयुक्त रूप से किया। समापन पर मेघा शर्मिष्ठा और अनुष्का गोयल ने वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगान की प्रस्तुति दी। अंत में सभी छात्र-छात्राओं और स्वयंसेवकों ने नशामुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने, स्वयं नशे से दूर रहने और समाज में जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लिया।
इस अवसर पर डॉ. अमित उपाध्याय, अनिल कुमार पटेल, डॉ. रवि निषाद, साध्वी नंदन पांडे, विकास कुमार सिंह सहित विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

बीबीएयू में वृक्षारोपण अभियान, हरित परिसर के निर्माण का लिया संकल्प

रोटरी क्लब के सहयोग से छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों ने किया पौधरोपण, कुलपति ने पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में शुक्रवार को रोटरी क्लब ऑफ लखनऊ ट्रांस गोमती के संयुक्त तत्वावधान में सावित्रीबाई फुले महिला छात्रावास परिसर में वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल के नेतृत्व में शिक्षकों, छात्राओं, गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और रोटरी क्लब के पदाधिकारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण तथा हरित परिसर के निर्माण का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। कार्यक्रम में संयोजक प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा, रोटरी क्लब के अध्यक्ष पूर्वी मित्तल, सचिव विनोद सिंह और कोषाध्यक्ष इला गंभीर मौजूद रहीं। अभियान में एनसीसी की 20 यूपी गर्ल्स बटालियन और 67 यूपी बटालियन ने भी सक्रिय सहयोग दिया।
कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि वृक्षारोपण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि प्रकृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए प्रत्येक नागरिक को कम से कम एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। इससे हरित और स्वच्छ भारत के निर्माण का लक्ष्य साकार किया जा सकता है।
उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार और समाज के सभी वर्गों से अधिक से अधिक पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बीबीएयू सतत विकास, हरित परिसर और पर्यावरणीय जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम संयोजक प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वृक्ष प्राकृतिक संतुलन, जैव विविधता और स्वच्छ वातावरण के आधार हैं, इसलिए पौधरोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी सभी को निभानी चाहिए।
अभियान में प्रभारी वनस्पति उद्यान डॉ. रवि शंकर वर्मा, रोटरी क्लब के सदस्य सुमित मित्तल, आलोक शुक्ला, रीता अहूजा, अतुल कपूरिया, विश्वविद्यालय के शिक्षक, छात्रावासों की वार्डन, गैर-शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी तथा छात्राओं ने सहभागिता की।

225 किलो महुआ लहन नष्ट, छह लीटर कच्ची शराब बरामद, आबकारी विभाग का विशेष अभियान जारी

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में अवैध शराब के निर्माण एवं बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। अभियान के दौरान 225 किलोग्राम महुआ लहन नष्ट किया गया तथा छह लीटर कच्ची शराब बरामद कर आबकारी अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया।
जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार के नेतृत्व में आबकारी निरीक्षक क्षेत्र-1 खलीलाबाद एवं क्षेत्र-2 मेंहदावल ने अपनी टीम के साथ ग्राम अशरफपुर, ग्राम अमाहवा तथा आसपास के क्षेत्रों में सघन छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान अवैध शराब निर्माण में प्रयुक्त लगभग 225 किलोग्राम महुआ लहन को मौके पर ही नष्ट कराया गया।
छापेमारी के दौरान छह लीटर कच्ची शराब भी बरामद की गई। बरामदगी के आधार पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम के तहत अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्रवाई की गई।
जिला आबकारी अधिकारी ने बताया कि जनपद में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन एवं बिक्री के विरुद्ध विशेष प्रवर्तन अभियान निरंतर जारी रहेगा। दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उपजाऊ जमीन पर सड़क बनाने का आरोप, डीएम के आदेश पर जांच शुरू

मेंहदावल के लहरौली ठाकुराई गांव में सड़क निर्माण पर विवाद, किसान ने पीडब्ल्यूडी व ठेकेदार पर लगाए गंभीर आरोप

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के मेंहदावल तहसील के लहरौली ठाकुराई गांव में सड़क निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। गांव के एक किसान ने अपनी निजी कृषि भूमि पर जबरन सड़क निर्माण कराए जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से शिकायत की है। मामला जिलाधिकारी आलोक कुमार तक पहुंचने पर उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित उपजिलाधिकारी को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
गांव निवासी हीरालाल का आरोप है कि उनकी निजी भूमि, गाटा संख्या-117 पर बिना सहमति के जेसीबी से खुदाई कर सड़क निर्माण कराया जा रहा है। उनका कहना है कि उन्हें न तो पूर्व सूचना दी गई और न ही भूमि अधिग्रहण अथवा अन्य वैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई। विरोध दर्ज कराने के बावजूद निर्माण कार्य जारी रखा गया।
किसानो का दावा है कि राजस्व अभिलेखों और सरकारी नक्शे में सड़क का निर्धारित मार्ग उनकी भूमि से अलग है। उनके अनुसार प्रस्तावित मार्ग पर पहले से खड़ंजा सड़क मौजूद है, इसके बावजूद उनकी उपजाऊ कृषि भूमि का उपयोग सड़क निर्माण के लिए किया जा रहा है। इससे फसल और जमीन दोनों को नुकसान पहुंचने की बात उन्होंने शिकायत में कही है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य सरकारी अभिलेखों के अनुरूप कराया जाए। साथ ही उनकी भूमि को हुए नुकसान का नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए तथा जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार पक्षों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
मामले की शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित एसडीएम को निष्पक्ष जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल सड़क निर्माण को लेकर गांव में चर्चा का माहौल है। एक ओर किसान अपनी कृषि भूमि को बचाने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन जांच के माध्यम से पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की बात कह रहा है। अब सभी की निगाहें एसडीएम की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि सड़क निर्माण निर्धारित योजना के अनुरूप हो रहा है या शिकायत में लगाए गए आरोपों में तथ्य हैं।

हल्दी में 14 घंटे से अधिक बिजली गुल, उमस भरी गर्मी में 200 गांवों के लोग बेहाल

बलिया (राष्ट्र क़ी परम्परा )

विद्युत उपकेंद्र सोनवानी की बिजली आपूर्ति व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। गुरुवार शाम हुई बारिश के बाद क्षेत्र में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। शुक्रवार शाम तक भी हल्दी, भरसौंता, सुल्तानपुर और नंदपुर समेत कई गांवों में बिजली बहाल नहीं हो सकी, जिससे उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी देखने को मिली। जानकारी के अनुसार, बारिश के दौरान विद्युत लाइन में फाल्ट आने और एक पोल टूट जाने के कारण आपूर्ति बाधित हो गई। विभागीय कर्मचारियों ने बताया कि पोल क्षतिग्रस्त होने से मरम्मत कार्य में समय लग रहा है। वहीं उपकेंद्र से जुड़े अन्य क्षेत्रों में शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई, लेकिन हल्दी फीडर से जुड़े गांव देर शाम तक अंधेरे में डूबे रहे। लगभग 14 घंटे से अधिक समय तक बिजली नहीं रहने से उपकेंद्र से जुड़े करीब 200 गांवों के लोगों को उमस भरी गर्मी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक दिक्कत बुजुर्गों, बीमारों, महिलाओं और छोटे बच्चों को हुई। लंबे समय तक बिजली गुल रहने से इनवर्टर भी जवाब दे गए, जिससे पेयजल संकट गहरा गया। कई घरों में पानी भरने, भोजन बनाने और अन्य दैनिक कार्य प्रभावित रहे। ग्राम सभा भरसौंता के प्रधान प्रतिनिधि मनीष सिंह, सुल्तानपुर के प्रधान प्रतिनिधि डॉ. संपूर्णानंद, नंदपुर के प्रधान ओमप्रकाश पांडेय सहित संतोष सिंह और कुणाल सिंह ने आरोप लगाया कि विद्युत उपकेंद्र सोनवानी से आए दिन घंटों बिजली कटौती की जाती है, लेकिन उपभोक्ताओं को इसकी पूर्व सूचना तक नहीं दी जाती। इससे आम लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने विद्युत विभाग से मांग की है कि आपूर्ति व्यवस्था में स्थायी सुधार किया जाए, लंबी और बार-बार होने वाली कटौती पर रोक लगे तथा किसी तकनीकी खराबी की स्थिति में उपभोक्ताओं को समय रहते सूचना उपलब्ध कराई जाए। इस संबंध में अवर अभियंता (जेई) प्रदुम्न यादव ने बताया कि रात में हल्दी फीडर में फाल्ट हो गया था, जिसके कारण बिजली आपूर्ति बाधित हुई। अन्य क्षेत्रों में सप्लाई बहाल कर दी गई है, जबकि हल्दी क्षेत्र में मरम्मत कार्य जारी है और जल्द ही बिजली आपूर्ति सामान्य कर दी जाएगी।

भारतीय दृष्टि से लिखा जाए इतिहास, औपनिवेशिक सोच से बाहर निकलने का समय: डॉ. बालमुकुंद पांडे

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। भारतीय इतिहास को विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों और औपनिवेशिक इतिहासकारों के नजरिए तक सीमित रखना देश के गौरवशाली अतीत के साथ अन्याय है। समय की मांग है कि इतिहास का पुनर्पाठ भारतीय दृष्टिकोण, भारतीय स्रोतों और सांस्कृतिक परंपराओं के आधार पर किया जाए। यह विचार अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने व्यक्त किए।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग, सतीश चंद्र मित्तल शोध संस्थान तथा भारतीय इतिहास संकलन समिति, गोरक्ष प्रांत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “भारतीय इतिहास लेखन में नए बदलाव एवं चुनौतियाँ” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी में इतिहास लेखन के बदलते प्रतिमानों, औपनिवेशिक इतिहास दृष्टि की समीक्षा तथा भारतीय परिप्रेक्ष्य से इतिहास के पुनर्लेखन पर गंभीर मंथन हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि के साथ हुआ। इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार तिवारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इतिहास केवल घटनाओं का संकलन नहीं, बल्कि राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और आत्मबोध का आधार है। इसलिए भारतीय दृष्टि से इतिहास का अध्ययन और लेखन आज पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कला संकायाध्यक्ष एवं प्राचीन इतिहास विभाग के प्रो. राजवंत राव ने कहा कि राजनीतिक स्वतंत्रता के दशकों बाद भी भारतीय शिक्षा व्यवस्था औपनिवेशिक मानसिकता के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक ज्ञान-पद्धति ने योजनाबद्ध तरीके से भारतीय ज्ञान परंपरा, भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को हाशिये पर धकेलने का प्रयास किया। भारतीय इतिहास और संस्कृति की सही समझ के लिए इस मानसिकता से बाहर निकलना आवश्यक है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. एस.एन. चौबे ने कहा कि इतिहास लेखन तथ्यों और प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने चौरी-चौरा के उदाहरण का उल्लेख करते हुए बताया कि लंबे समय तक इसे “चौरी-चौरा कांड” कहा गया, जबकि बाद के शोधों ने इसे “चौरी-चौरा घटना” के रूप में स्थापित किया। यह परिवर्तन केवल शब्दों का नहीं, बल्कि इतिहास को देखने की दृष्टि का परिवर्तन है।
इतिहास विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. निधि चतुर्वेदी ने कहा कि भारतीय इतिहास के अनेक महत्वपूर्ण अध्याय वर्षों तक उपेक्षित रहे। भारतीय इतिहास संकलन योजना ने लोक परंपराओं, पुरातात्विक साक्ष्यों, अभिलेखों और भारतीय स्रोतों को सामने लाकर इतिहास की अनेक रिक्तियों को भरने का कार्य किया है।
मुख्य वक्ता डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि नवस्थापित सतीश चंद्र मित्तल शोध संस्थान भारतीय दृष्टि से इतिहास अध्ययन और शोध का प्रमुख केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने भारत के गौरवशाली अतीत को विकृत कर अंग्रेज़ी दृष्टिकोण को इतिहास लेखन पर आरोपित किया। परिणामस्वरूप भारतीय सभ्यता, संस्कृति, विज्ञान, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां इतिहास के मुख्य विमर्श से बाहर हो गईं। उन्होंने शोधार्थियों से भारतीय स्रोतों, भारतीय ज्ञान परंपरा और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना को आधार बनाकर शोध करने का आह्वान किया।
संगोष्ठी के प्रश्नोत्तर सत्र में शोधार्थियों ने इतिहास लेखन, स्रोतों की प्रामाणिकता और भारतीय इतिहास के पुनर्पाठ से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. सुनीता ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. आशीष कुमार सिंह, प्रो. श्वेता सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

PMEGP Scheme Kushinagar: मजदूर से उद्योगपति बने अशोक विश्वकर्मा, 30 लोगों को मिला रोजगार

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) ने जनपद कुशीनगर के गंगा छपरा, कुरहवा-अहिरौली बाजार निवासी अशोक विश्वकर्मा की जिंदगी बदल दी। कभी फर्नीचर की दुकान पर मजदूरी करने वाले अशोक आज ‘महालक्ष्मी फर्नीचर’ के सफल संचालक हैं और अपने उद्योग के माध्यम से 25 से 30 लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।

अशोक विश्वकर्मा ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण पढ़ाई पूरी करने के बाद भी उन्हें नौकरी नहीं मिली। परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्होंने फर्नीचर की दुकान पर मजदूरी की और बाद में दिल्ली जाकर फर्नीचर निर्माण का प्रशिक्षण व अनुभव प्राप्त किया।

गृह जनपद लौटने के बाद उन्होंने अपना उद्योग शुरू करने का सपना देखा, लेकिन पूंजी की कमी सबसे बड़ी बाधा थी। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) की जानकारी मिली। उन्होंने ग्राम उद्योग कार्यालय के माध्यम से आवेदन किया, जिसके बाद उनकी परियोजना स्वीकृत हुई और बैंक से 15 लाख रुपये का ऋण मिला।

ऋण मिलने के बाद अशोक ने ‘महालक्ष्मी फर्नीचर’ की स्थापना की। गुणवत्तापूर्ण कार्य और मेहनत के बल पर उनका कारोबार लगातार बढ़ता गया। वर्तमान में उनके प्रतिष्ठान में नियमित रूप से 12 से 13 लोग कार्यरत हैं, जबकि सीजन के दौरान 25 से 30 लोगों को रोजगार मिलता है। उनकी मासिक आय अब 60 हजार से 70 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है।

अशोक का कहना है कि पहले आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी, लेकिन अब परिवार आत्मनिर्भर और खुशहाल जीवन जी रहा है। उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

अशोक विश्वकर्मा की सफलता की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर सीमित संसाधनों वाले लोग भी अपना उद्योग स्थापित कर सकते हैं और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। PMEGP योजना आज आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।