Tuesday, April 14, 2026
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सड़क बनी श्मशान: हाईवा-बाइक भिड़ंत में दो युवकों की जिंदगी खत्म

NH-80 पर मौत की रफ्तार: नई बाइक सवार दो युवकों की दर्दनाक मौत ग्रामीणों ने सड़क किया जाम

लखीसराय (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) जिले के सूर्यगढ़ा थाना क्षेत्र में सोमवार देर शाम राष्ट्रीय राजमार्ग-80 (NH-80) पर रतनपुर गांव के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। तेज रफ्तार गिट्टी लदे हाईवा ट्रक और बाइक की आमने-सामने हुई जोरदार टक्कर में बाइक सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद जहां परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिट्टी लोड हाईवा ट्रक लखीसराय से मुंगेर की ओर जा रहा था, जबकि बाइक सवार युवक मुंगेर से लखीसराय की तरफ लौट रहे थे। रतनपुर गांव के समीप दोनों वाहनों के बीच आमने-सामने की टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और दोनों युवकों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। टक्कर की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोनों शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गए, जिससे घटनास्थल पर मौजूद लोग भी सिहर उठे।

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बताया जा रहा है कि दोनों युवक एक नई बाइक पर सवार थे, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर BR 46 T 1484 (जमुई) है। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने बाइक और मृतकों के पास से मिले मोबाइल व अन्य सामान के आधार पर उनकी पहचान करने की कोशिश शुरू की। जांच के बाद मृतकों की पहचान जमुई जिले के मंझवे गांव निवासी दीपक कुमार और दिलीप कुमार के रूप में हुई।
घटना की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए। हादसे से आक्रोशित लोगों ने लखीसराय–सूर्यगढ़ा NH-80 को जाम कर दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए दोषी ट्रक चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। कुछ लोगों ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और इस मार्ग पर लगातार हो रहे हादसों को लेकर चिंता व्यक्त की।

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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सूर्यगढ़ा थाना अध्यक्ष रोहित कुमार सिंह के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने स्थानीय लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया और जाम हटवाने का प्रयास किया। काफी मशक्कत के बाद यातायात को बहाल किया जा सका। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। ट्रक चालक मौके से फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। मृतकों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है और गांव में सन्नाटा छाया हुआ है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि सड़कों पर बढ़ती लापरवाही और तेज रफ्तार किस तरह मासूम जिंदगियों को लील रही है। जरूरत है कि प्रशासन के साथ-साथ आम लोग भी यातायात नियमों का सख्ती से पालन करें, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
खबर के लिए उपयुक्त फोटो (विवरण):
NH-80 पर दुर्घटनाग्रस्त बाइक और हाईवा ट्रक, आसपास जुटी भीड़, पुलिस जांच करती हुई, सड़क पर लगा जाम — हाई इम्पैक्ट ब्रेकिंग न्यूज़ विजुअल।

मेष संक्रांति: नव ऊर्जा, नव आरंभ का पर्व

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✍️ नवनीत मिश्र

भारतीय संस्कृति में समय-चक्र को अत्यंत सूक्ष्मता और वैज्ञानिक दृष्टि से समझा गया है। इसी परंपरा में मेष संक्रांति एक महत्वपूर्ण खगोलीय और सांस्कृतिक पर्व है, जो सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाता है। यह केवल एक ज्योतिषीय घटना नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि और मानवीय जीवन के नवोदय का प्रतीक भी है।

सौर नववर्ष की शुरुआत

सतुआन यानी मेष संक्रांति को भारतीय सौर नववर्ष का आरंभ माना जाता है। इस दिन से सूर्य की ऊर्जा अधिक प्रखर हो जाती है और दिन लंबे होने लगते हैं। यह समय नए संकल्प, नई शुरुआत और उत्साह का प्रतीक है।

देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व विभिन्न नामों से मनाया जाता है:

• बैसाखी (पंजाब)
• पुथंडु (तमिलनाडु)
• पोइला बोइशाख (पश्चिम बंगाल)
• विशु (केरल)

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प्रकृति और कृषि से गहरा संबंध

यह समय ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है। शीत ऋतु के समाप्त होते ही धरती पर हरियाली छा जाती है और फसल कटाई का दौर शुरू होता है। किसानों के लिए यह विशेष महत्व रखता है, क्योंकि उनकी मेहनत का फल इसी समय मिलता है।

इसलिए मेष संक्रांति को समृद्धि, कृतज्ञता और प्रकृति के प्रति आभार का पर्व भी कहा जाता है।

धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और सूर्य देव की आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फलदायी होता है।
आध्यात्मिक रूप से यह पर्व हमें सिखाता है:

• जीवन में परिवर्तन अनिवार्य है
• हर बदलाव नई संभावनाएं लेकर आता है
• सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास से आगे बढ़ना चाहिए

नए जीवन की प्रेरणा

सूर्य का मेष राशि में प्रवेश साहस, नेतृत्व और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम पुराने नकारात्मक विचारों को छोड़कर नए लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ें।
मेष संक्रांति केवल एक तिथि नहीं, बल्कि नवजीवन, नवसृजन और सकारात्मकता का उत्सव है। यह हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाने, परिश्रम का सम्मान करने और नए उत्साह के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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विश्लेषण: शिक्षित युवाओं में बढ़ती बेरोज़गारी – एक गंभीर चुनौती

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भारत में युवाओं की बड़ी आबादी को लंबे समय से “डेमोग्राफिक डिविडेंड” के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन मौजूदा हालात इस उम्मीद पर सवाल खड़े कर रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्नातक युवाओं में बेरोज़गारी दर 40% तक पहुंच गई है, जो देश के रोजगार ढांचे की कमजोरियों को उजागर करती है।

आंकड़े जो चिंता बढ़ाते हैं

• 15–29 वर्ष के युवाओं की संख्या: 36.7 करोड़
• संभावित कार्यबल: 26.3 करोड़
• स्नातक या उससे अधिक शिक्षित: 6.3 करोड़
• बेरोज़गार स्नातक: 1.1 करोड़

यह साफ दर्शाता है कि देश में शिक्षा और रोजगार के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।

कृषि की ओर लौटता रोजगार – विकास की उलटी दिशा

आर्थिक विकास में सामान्यतः लोग कृषि से उद्योग और सेवा क्षेत्र की ओर जाते हैं, लेकिन भारत में उल्टा रुझान दिख रहा है।

2021-24 के बीच बने 8.2 करोड़ नए रोजगारों में से करीब 4 करोड़ कृषि क्षेत्र में जुड़े। यह दर्शाता है कि लोग मजबूरी में कम आय वाले क्षेत्रों की ओर लौट रहे हैं।

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महिलाओं की भागीदारी – मजबूरी या सशक्तिकरण?

कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन यह सशक्तिकरण नहीं बल्कि मजबूरी का संकेत है।

अधिकतर महिलाएं बिना वेतन के पारिवारिक कार्यों में जुड़ी हैं या छोटे स्तर पर स्वरोज़गार कर रही हैं।

शिक्षा पर घटता भरोसा

• पिछले वर्षों में शिक्षा में दाखिला बढ़ा, लेकिन अब गिरावट देखने को मिल रही है

• 72% युवाओं ने पढ़ाई छोड़ने का कारण आर्थिक दबाव बताया

यह दिखाता है कि युवा अब शिक्षा को रोजगार की गारंटी नहीं मान रहे।

डिमांड-सप्लाई का असंतुलन

समस्या की जड़ है:

• नौकरी की कमी
• शिक्षित युवाओं की अधिकता

इस कारण:

• ग्रेजुएट युवाओं को कम स्किल वाली नौकरी करनी पड़ रही है
• सैलरी कम हो रही है
• स्किल का मूल्य घट रहा है

डेमोग्राफिक डिविडेंड बन सकता है संकट

भारत की युवा आबादी उसकी सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन यदि उन्हें रोजगार नहीं मिला तो यही ताकत संकट में बदल सकती है।

सरकार और नीति निर्माताओं के लिए यह समय है कि वे:

• रोजगार सृजन पर ध्यान दें
• स्किल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दें
• उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करें

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देवरिया: डॉ. आंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ का भव्य आयोजन

देवरिया/बरहज (राष्ट्र की परम्परा)। भारत के संविधान निर्माता B. R. Ambedkar की 135वीं जयंती की पूर्व संध्या पर नगर पालिका परिषद गौरा बरहज के वार्ड उजरा मोहाँव में “नारी शक्ति वंदन सम्मेलन” का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी देखने को मिली।

मुख्य अतिथि ने दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि गीता विश्वकर्मा (सदस्य, राज्य महिला आयोग, उत्तर प्रदेश) ने डॉ. आंबेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने दलित, शोषित और पिछड़े वर्गों को संविधान के माध्यम से न्याय और अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया।

महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर

इस अवसर पर नगर पालिका परिषद गौरा बरहज की अध्यक्ष श्वेता जायसवाल और अधिशासी अधिकारी निरुपमा प्रताप की विशेष उपस्थिति रही। दोनों ने नगर क्षेत्र में चल रहे महिला सशक्तिकरण और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला।

नगरपालिका अध्यक्ष श्वेता जायसवाल ने Narendra Modi और Yogi Adityanath के नेतृत्व में चल रहे “नारी शक्ति वंदन” जैसे अभियानों की सराहना करते हुए कहा कि इन पहलों से महिलाओं के सर्वांगीण विकास को नई दिशा मिल रही है।

श्रद्धांजलि और जनसहभागिता

कार्यक्रम में उपस्थित सभासदों, नगर पालिका कर्मचारियों और सैकड़ों नागरिकों ने डॉ. आंबेडकर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजन के अंत में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच United States ने ईरान के समुद्री इलाकों और बंदरगाहों के आसपास सख्त नाकेबंदी लागू कर दी है। अमेरिकी सेना ने इस अभियान के तहत 15 से ज्यादा जंगी जहाज तैनात किए हैं, जिससे क्षेत्र में हालात और गंभीर हो गए हैं।

USS Tripoli और फाइटर जेट्स की तैनाती

USS Tripoli (LHA-7) को अरब सागर में तैनात किया गया है। इस आधुनिक युद्धपोत पर अत्याधुनिक F-35B Lightning II फाइटर जेट्स और MV-22 Osprey एयरक्राफ्ट तैनात हैं, जो लगातार समुद्री क्षेत्र में निगरानी और गश्त कर रहे हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमान CENTCOM के अनुसार, यह नाकेबंदी भारतीय समयानुसार शाम 7:30 बजे से लागू की गई।

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समुद्री गतिविधियों पर कड़ी नजर

CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों, अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी के समुद्री मार्गों पर लागू होगी। हालांकि, गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।

अमेरिकी सेना का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी संभावित खतरे को रोकना है।

बढ़ता तनाव, युद्ध जैसे हालात

USS Tripoli को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पारंपरिक वेल डेक के बिना अधिक संख्या में फाइटर जेट्स तैनात कर सके। युद्ध जैसी स्थिति में यह 20 से ज्यादा F-35B जेट्स को संचालित करने में सक्षम है।
इस तैनाती के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है और वैश्विक स्तर पर इसके असर की आशंका जताई जा रही है, खासकर तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर।

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कुशीनगर में विद्युत व्यवस्था सुधार पर जोर, अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में विद्युत आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, सुचारु एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से विकास भवन सभागार में जिला विद्युत समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सांसद विजय कुमार दुबे ने की, जिसमें विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली, आपूर्ति की स्थिति और उपभोक्ताओं से जुड़ी समस्याओं की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि कुशीनगर लोकसभा क्षेत्र ग्रामीण अंचल में विकास के कई मानकों पर अग्रणी है और यहां कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना सहित कई बड़े विकास कार्य तेजी से प्रगति पर हैं। ऐसे में विद्युत व्यवस्था को मजबूत बनाना विकास की गति को और तेज करेगा।
समीक्षा के दौरान विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता, लाइन लॉस, ट्रांसफार्मरों की कार्यशीलता, बिलिंग व्यवस्था और उपभोक्ता शिकायतों के निस्तारण की स्थिति का आकलन किया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि खराब ट्रांसफार्मरों को शीघ्र बदला जाए तथा मरम्मत कार्यों में तेजी लाई जाए, ताकि आमजन को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सके।
इसके साथ ही विद्युत बिलिंग व्यवस्था को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने, विद्युत चोरी और अवैध कनेक्शनों पर सख्त कार्रवाई करने तथा लाइन लॉस को कम करने के लिए तकनीकी सुधार लागू करने के निर्देश दिए गए। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने और उपकेंद्रों व लाइनों के नियमित रखरखाव पर भी विशेष बल दिया गया।
बैठक में यह भी कहा गया कि विकास तभी संभव है जब आधारभूत सुविधाएं मजबूत हों। कुशीनगर में मेडिकल कॉलेज, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और सड़क विकास जैसे बड़े प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। लगभग 1000 करोड़ रुपये की लागत से सड़कों का निर्माण और चौड़ीकरण किया जा रहा है, जिससे बिहार, नेपाल और अन्य क्षेत्रों से बेहतर संपर्क स्थापित हो रहा है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए तथा जनहित से जुड़े कार्य समयबद्ध रूप से पूरे किए जाएं। लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

तहसील परिसर की दुकानों की नीलामी 20 अप्रैल को, बोली में भाग लेने का अवसर

घोसी (राष्ट्र की परम्परा)l तहसील परिसर घोसी में स्थित दो दुकानों को किराये पर देने के लिए नीलामी की प्रक्रिया 20 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी। यह नीलामी पूर्वान्ह 11 बजे से तहसील मुख्यालय घोसी के मीटिंग हॉल में संपन्न होगी। प्रशासन ने इच्छुक व्यक्तियों को निर्धारित तिथि और समय पर उपस्थित होकर बोली में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है।
उप जिलाधिकारी घोसी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह नीलामी 31 मार्च 2027 तक के लिए वैध रहेगी। चयनित बोलीदाता को निर्धारित शर्तों के अनुसार दुकानों का किराया आवंटित किया जाएगा। नीलामी की सभी शर्तें तहसील घोसी के नजारत अनुभाग में कार्यालय दिवस के दौरान देखी जा सकती हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नीलामी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई जाएगी, जिससे अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित हो सके और सरकारी संपत्तियों का उचित उपयोग हो।

विकास भवन में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन सम्पन्न, 15 महिलाओं को किया गया सम्मानित

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। नारी शक्ति वंदन सम्मेलन—पंचायत से पार्लियामेंट तक, निर्माण में नारी नवभारत की तैयारी विषयक भव्य सम्मेलन का आयोजन विकास भवन सभागार में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता रही,जिससे सभागार खचा-खच भरा नजर आया।
सम्मेलन के दौरान उपस्थित महिलाओं को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी दिखाया गया, जिसे सभी ने उत्साहपूर्वक देखा। इस अवसर पर उपाध्यक्ष चारू चौधरी ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दौर परिवर्तन का युग है और महिलाएं इस बदलाव की साक्षी बन रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार लगातार कार्य कर रही है। समूह आधारित योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को शून्य ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि वे अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ डटकर मुकाबला करें, क्योंकि आज की बेटियां हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।
उपाध्यक्ष ने महिलाओं के लिए संचालित योजनाओं और उनके लाभों की भी विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 15 महिलाओं को मंच से प्रशस्ति पत्र एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया, जिससे कार्यक्रम में उत्साह का माहौल रहा।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह, जिला विकास अधिकारी बी.एन. कन्नौजिया, डीपीआरओ श्रेया मिश्रा, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तन्मय, क्षेत्राधिकारी पुलिस सदर, महिला थाना प्रभारी, स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक एवं महिला चिकित्सक, महिला कल्याण विभाग के काउंसलर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहें। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों से आई बड़ी संख्या में महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।

आईजीआरएस व राजस्व वसूली पर सख्ती, समयबद्ध निस्तारण के निर्देश

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आईजीआरएस पोर्टल एवं कर-करेत्तर की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्यमंत्री, आयुक्त, जिलाधिकारी संदर्भ, तहसील दिवस प्रकरणों समेत लंबित शिकायतों व ऑफलाइन मामलों के निस्तारण की स्थिति की समीक्षा की गई। इस दौरान अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) जयप्रकाश तथा अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) चंद्रेश कुमार सिंह मौजूद रहे।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त सभी संदर्भों का निर्धारित समय सीमा में निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि कोई भी प्रकरण डिफाल्टर श्रेणी में न जाए। उन्होंने विभागवार फीडबैक की समीक्षा करते हुए कहा कि शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए, जिससे आवेदकों की संतुष्टि का प्रतिशत बढ़े। साथ ही निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से प्राप्त फीडबैक पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसामान्य की शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी विभागीय अधिकारियों को योजनाओं में लक्ष्य के सापेक्ष प्रगति बनाए रखने और सीएम डैशबोर्ड पर जनपद की रैंकिंग बेहतर करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में कर-करेत्तर की समीक्षा के दौरान आबकारी, परिवहन, स्टांप शुल्क, व्यापार कर, खनन, मंडी परिषद, नगर निकाय, बांट माप एवं खाद्य सुरक्षा सहित विभिन्न विभागों द्वारा राजस्व वसूली की स्थिति का आकलन किया गया। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को समय सीमा के भीतर शत-प्रतिशत राजस्व संग्रह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी प्रेम प्रकाश त्रिपाठी, अपर उप जिलाधिकारी सुधीर कुमार, उप जिलाधिकारी अरुण कुमार, उप जिलाधिकारी डॉ. सुनील कुमार, उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक हरिश्चंद्र नाथ, एआरटीओ प्रियंवदा सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज कुमार, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका अवधेश भारती, जिला बांट माप अधिकारी वी.पी. वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

महिला आरक्षण कानून: सशक्तिकरण या पर्दे के पीछे की राजनीति?

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023: क्या बढ़ेगा वास्तविक नेतृत्व या सिर्फ़ संख्या? प्रॉक्सी राजनीति पर सख़्त कानून की ज़रूरत

गोंदिया। भारत में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सशक्त बनाने के उद्देश्य से पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (106वां संविधान संशोधन) को लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। यह अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर नीति-निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करता है। हालांकि, इस ऐतिहासिक पहल के साथ कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं—क्या यह कानून वास्तविक महिला नेतृत्व को बढ़ावा देगा या फिर केवल प्रॉक्सी नेतृत्व और वंशवाद को मजबूत करेगा?
आलोचकों का मानना है कि इस कानून के लागू होने के बाद कई स्थानों पर महिलाएं केवल औपचारिक प्रतिनिधि बनकर रह जाएंगी, जबकि वास्तविक निर्णय उनके पति, पिता या अन्य पुरुष रिश्तेदार लेंगे। यह प्रवृत्ति पहले से ही स्थानीय निकायों में “सरपंच पति” संस्कृति के रूप में देखी जा चुकी है, जहां चुनी हुई महिला प्रतिनिधि के स्थान पर उनके परिजन प्रशासनिक निर्णय लेते हैं।


लेखक एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी का मानना है कि यदि इस अधिनियम में प्रॉक्सी नेतृत्व को रोकने के लिए ठोस कानूनी प्रावधान नहीं जोड़े गए, तो यह कानून अपने मूल उद्देश्य से भटक सकता है। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर जिस तरह सरकार ने “प्रॉक्सी सरपंच” के खिलाफ अभियान चलाया है, उसी प्रकार संसद और विधानसभाओं में भी सख़्त नियम लागू करने की आवश्यकता है।
इस संदर्भ में पांच महत्वपूर्ण सुधार रणनीतियां सामने आती हैं। पहली, प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर इसे दंडनीय अपराध घोषित किया जाए। यदि यह साबित होता है कि महिला प्रतिनिधि के अधिकारों का उपयोग कोई अन्य व्यक्ति कर रहा है, तो संबंधित व्यक्ति और प्रतिनिधि दोनों के खिलाफ अयोग्यता, जुर्माना और कारावास जैसी सख़्त कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए।
दूसरी रणनीति क्षमता निर्माण की है। केवल आरक्षण देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि महिला प्रतिनिधियों को प्रशासनिक, विधायी और वित्तीय प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण देना अनिवार्य होना चाहिए, ताकि वे आत्मविश्वास के साथ निर्णय ले सकें।
तीसरी रणनीति डिजिटल पारदर्शिता और निगरानी तंत्र को मजबूत करना है। सभी बैठकों और निर्णयों को ऑनलाइन रिकॉर्ड किया जाए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वास्तविक निर्णय लेने वाला कौन है।
चौथी रणनीति राजनीतिक दलों की जवाबदेही तय करना है। उम्मीदवार चयन में पारिवारिक संबंधों के बजाय योग्यता और सामाजिक योगदान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि वंशवाद को रोका जा सके।
पांचवीं और सबसे महत्वपूर्ण रणनीति सामाजिक मानसिकता में परिवर्तन की है। जब तक समाज महिलाओं को स्वतंत्र और सक्षम नेता के रूप में स्वीकार नहीं करेगा, तब तक किसी भी कानून का प्रभाव सीमित रहेगा।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि यह आरक्षण तत्काल लागू नहीं होगा। इसके लिए पहले जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होनी आवश्यक है, जो संभवतः 2029 के आम चुनावों तक पूरी होगी। तब जाकर यह अधिनियम पूरी तरह प्रभावी हो पाएगा।
आगामी संसद के विशेष सत्र (16 से 18 अप्रैल 2026) इस दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। यह केवल आरक्षण लागू करने का अवसर नहीं, बल्कि इसे प्रभावी और सार्थक बनाने का भी ऐतिहासिक मौका है। यदि इस अधिनियम में आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो यह केवल संख्यात्मक प्रतिनिधित्व तक सीमित रह सकता है।
अंततः यह प्रश्न देश के सामने खड़ा है—क्या हम केवल महिलाओं की संख्या बढ़ाना चाहते हैं या उन्हें वास्तविक सत्ता और नेतृत्व भी देना चाहते हैं? यही इस अधिनियम की असली परीक्षा है।


संकलनकर्ता: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया, महाराष्ट्र

स्वास्थ्य इकाइयों में सुझाव पेटिका लगाने के निर्देश, सीएमओ ने योजनाओं की समीक्षा की

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में सोमवार को धन्वंतरि सभागार में जिला कार्यकारी समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य योजनाओं और विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधार पर जोर दिया गया।
सीएमओ ने सभी स्वास्थ्य सूचकांकों की रिपोर्ट को समय पर और सही ढंग से अद्यतन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्रों पर मिलने वाली सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मियों को चिन्हित कर शो-कॉज नोटिस जारी किया जाए।
उन्होंने निर्देश दिया कि सभी सीएचसी, पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर सहित सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर प्राथमिकता के आधार पर सुझाव पेटिका लगाई जाए, ताकि मरीजों और आम लोगों से फीडबैक प्राप्त किया जा सके। इसके साथ ही शत-प्रतिशत एनसीडी स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
सीएमओ ने प्रभारी चिकित्साधिकारियों को संस्थागत प्रसव बढ़ाने के निर्देश दिए और पुरुष व महिला नसबंदी के लक्ष्यों के सापेक्ष कम उपलब्धि पर नाराजगी जताई। संचारी रोग नियंत्रण अभियान और दस्तक अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने तथा घर-घर जाकर बुखार के मरीजों की पहचान करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में 100 दिवसीय टीबी अभियान के तहत संभावित लक्षण वाले मरीजों की स्क्रीनिंग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। साथ ही 20 अप्रैल से शुरू होने वाले स्कूल आधारित डीपीटी/टीडी टीकाकरण अभियान को लेकर माइक्रोप्लान तैयार कर शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों की समय पर जांच, टीकाकरण तथा गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण कर पोर्टल पर फीडिंग सुनिश्चित करने को कहा गया। हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाली महिलाओं की निगरानी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में डीटीओ, डिप्टी सीएमओ, डीएमओ, डीपीएम, डीसीपीएम सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

विभाजन से विद्रोह तक: ऋत्विक घटक के सिनेमा पर गहन चर्चा

ऋत्विक घटक पर मंथन, दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन—मीरा रोड में सिनेमा और समाज पर गूंजती बहस

लेखक: संजय भिसे / हृदयेश मयंक

मुंबई, (राष्ट्र की परम्परा) जनवादी लेखक संघ एवं स्वर संगम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में मीरा रोड स्थित विरूंगला केन्द्र (इंदिरा गांधी हॉस्पिटल परिसर) में आयोजित एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कार्यक्रम में बांग्ला सिनेमा के महान फिल्मकार ऋत्विक घटक के सिनेमा, उनके विचार और सामाजिक सरोकारों पर गहन चर्चा की गई। इस अवसर पर दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी हुआ, जिसने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
कार्यक्रम में जाहिद खान एवं जयनारायण प्रसाद द्वारा संपादित पुस्तक ‘ऋत्विक घटक: नव यथार्थवाद सिनेमा का कलात्मक सर्जक’ तथा जाहिद खान द्वारा अनुवादित कृष्ण चंदर के उर्दू नाटक ‘दरवाजा खोल दो’ (हिंदी अनुवाद) का लोकार्पण किया गया। दोनों ही कृतियां साहित्य और सिनेमा के गंभीर पाठकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने ऋत्विक घटक के सिनेमा को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक संघर्ष, इतिहास और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त दस्तावेज बताया। उनके सिनेमा में विभाजन की त्रासदी, विस्थापन, शरणार्थियों का दर्द और सामाजिक विघटन अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उभरकर सामने आता है। घटक की फिल्मों में यथार्थवाद, मिथकीय प्रतीकों, ब्रेख्तियन शैली और ध्वनि प्रयोग का अद्वितीय समावेश देखा जाता है।
प्रमुख वक्ता पुलक चक्रवर्ती ने बताया कि ऋत्विक घटक मार्क्सवादी विचारधारा से गहराई से प्रभावित थे और भारतीय जन नाट्य संघ (IPTA) के माध्यम से उन्होंने अपनी सांस्कृतिक यात्रा शुरू की। उन्होंने कला को जनता की पीड़ा और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम माना। उनकी फिल्मों में वर्ग संघर्ष, पूंजीवाद की आलोचना और सामाजिक न्याय की स्पष्ट झलक मिलती है।

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फिल्म निर्देशक अविनाश दास ने कहा कि ऋत्विक घटक का सिनेमा अत्यंत मौलिक है और उन्होंने सिनेमा की भाषा को नए सिरे से गढ़ा। उन्होंने फिल्म निर्माण की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि अपनी शर्तों पर सिनेमा बनाना ही सबसे बड़ी उपलब्धि है, जो घटक ने हासिल की।
डॉ. हूबनाथ पांडे ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि भाषा की बाधा के बावजूद विजुअल माध्यम से घटक के सिनेमा को समझा जा सकता है। उन्होंने फिल्म सोसाइटी की स्थापना की आवश्यकता पर जोर देते हुए मीरा रोड में इसकी शुरुआत का प्रस्ताव रखा।
जाहिद खान ने कहा कि हिंदी पट्टी में ऋत्विक घटक को सीमित रूप से जाना गया है, जबकि वे मृणाल सेन और सत्यजीत राय के समकक्ष एक बड़े फिल्मकार थे। उन्होंने घटक को मूल रूप से नाटककार बताते हुए कहा कि सिनेमा के माध्यम से उन्होंने व्यापक दर्शकों तक अपनी बात पहुंचाई।

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संजय भिसे ने अपने वक्तव्य में कहा कि घटक ने सिनेमा को समाज और इतिहास से जोड़ा और उसे एक वैचारिक माध्यम बनाया। वहीं जयनारायण प्रसाद ने सत्यजीत राय, मृणाल सेन और ऋत्विक घटक के संबंधों पर प्रकाश डालते हुए उनकी फिल्म मेघे ढाका तारा का विशेष उल्लेख किया।
कार्यक्रम में अजय रोहिल्ला, हरि मृदुल, फरीद खान सहित कई वक्ताओं ने घटक के सिनेमा की दृश्यात्मकता, कथात्मक शक्ति और यथार्थवादी दृष्टिकोण की सराहना की। हृदयेश मयंक ने बताया कि फिल्म सोसाइटी के गठन को लेकर जल्द ही बैठक आयोजित की जाएगी।
कार्यक्रम का संचालन रमन मिश्र ने किया, जबकि हरिप्रसाद राय ने सभी का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल सिनेमा प्रेमियों के लिए ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि मीरा रोड क्षेत्र में सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

श्रीअष्टजाम महायज्ञ एवं प्राण प्रतिष्ठा के लिए निकली भव्य कलश यात्रा

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
तहसील क्षेत्र के बिजलापार मे दुर्गा मंदिर पर सोमवार से श्रीअष्टजाम महायज्ञ एवं प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन शुरू हुआ। इस दिव्य कार्यक्रम के लिए मुख्य यजमान एवं ग्रामीणों ने अखिलेश्वर दास त्यागी के सानिध्य मे एवं भव्य कलश यात्रा निकाली गयी, यह कलश यात्रा बिजलापर से होते हुए बरहज नगर की मुख्य सड़क से गाजे बाजे ढ़ोल नगाढ़े व जयकारे के साथ सरयू नदी के तट पर पहुंचा, जहाँ पर वैदिक मंत्रोचार के द्वारा कलश मे जल भरा गया। ततपश्चात् उच्च ध्वनि से जयकारा करते हुए भक्तगण बिजलापर स्थित माँ दुर्गा के परिसर मे किये जा रहे श्रीअष्टमजाम महायज्ञ एवं प्राण प्रतिष्ठा के लिए कलश को वैदिक पूजन अर्चन के बाद मंडप मे स्थापित किया गया। महायज्ञ का समापन 15 अप्रैल की शाम को विशाल भंडारे यें महा प्रसाद वितरण के साथ होगा। इस अवसर पर चन्द्रगुप्त यादव, चंद्रजीत यादव, रामा यादव, विजय यादव, केदार यादव, राजेश यादव, नंदू यादव, मुकेश यादव, दिलीप राजभर सहित सैकड़ो भक्तगण उपस्थित रहे।

SDM श्रुति शर्मा को उपार्जित अवकाश, सीमा पांडेय को मिला अतिरिक्त प्रभार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं उप जिलाधिकारी (सदर) श्रुति शर्मा को शासन द्वारा 14 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक उपार्जित अवकाश स्वीकृत किया गया है। उनके अवकाश अवधि के दौरान प्रशासनिक कार्यों के सुचारु संचालन के लिए नई व्यवस्था की गई है।
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अपर उप जिलाधिकारी (एएसडीएम) सीमा पांडेय को उप जिलाधिकारी (सदर) के समस्त दायित्वों का अतिरिक्त प्रभार कार्यपालक के रूप में सौंपा गया है। वे अपने वर्तमान दायित्वों के साथ-साथ अतिरिक्त जिम्मेदारी का भी निर्वहन करेंगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में सभी राजस्व एवं प्रशासनिक कार्य निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेंगे और किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

जनहित मुद्दों को लेकर सभासदों ने उठाई आवाज

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के नगर पंचायत मगहर की जनता की समस्याओं को लेकर मनोनीत सभासद गण भाजपा नेता गौरव निषाद और ई. अरुण गुप्ता ने अधिशासी अधिकारी को पत्र सौंपकर विभिन्न बिंदुओं पर तत्काल सुधार की मांग उठाई है।
पत्र में सभासदों ने नगर पंचायत कार्यालय में सिटीजन चार्टर लगाए जाने की मांग की, जिससे प्रत्येक कार्य की समय-सीमा स्पष्ट हो सके। साथ ही नगर पंचायत की बैठकों में प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने और संभव होने पर बैठकों का सोशल मीडिया के माध्यम से लाइव प्रसारण कराने की भी बात कही।
उन्होंने सुझाव दिया कि जिस वार्ड में कार्य हो रहा हो, वहां सूचना बोर्ड लगाकर योजना, लागत और कार्य से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाए। गर्मियों में मच्छरों के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए प्रत्येक वार्ड में साप्ताहिक फॉगिंग कराने की मांग भी उठाई गई।
इसके अलावा बोर्ड बैठकों की तिथि पूर्व निर्धारित कर उसकी सूचना मीडिया को देने, कबीर चौरा क्षेत्र में बने शौचालय को आम जनता के लिए खोलने तथा नगर की खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों को तत्काल ठीक कराने की मांग की गई है।