Wednesday, April 22, 2026
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केदारनाथ से बद्रीनाथ तक आस्था का सफर, नए नियमों ने बदली यात्रा की तस्वीर

चारधाम यात्रा 2026: सख्त नियमों के बीच शुरू हुई आस्था की महायात्रा, सुरक्षा और अनुशासन पर खास जोर


देहरादून (राष्ट्र की परम्परा धर्म डेस्क)उत्तराखंड की पवित्र वादियों में एक बार फिर श्रद्धा और भक्ति की गूंज सुनाई देने लगी है। चारधाम यात्रा 2026 विधिवत शुरू हो चुकी है और राज्य के पहाड़ी क्षेत्र तीर्थयात्रियों की आवाजाही से पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। इस वर्ष यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित प्रबंधन और सख्त नियमों के साथ एक अनुशासित आध्यात्मिक अभियान के रूप में सामने आई है।
19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा का शुभारंभ हुआ, जबकि 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलने जा रहे हैं। लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और पवित्रता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया है।
चारधाम यात्रा का मार्ग इस बार भी रोमांच और श्रद्धा का संगम बना हुआ है। केदारनाथ धाम तक पहुंचना सबसे कठिन माना जाता है, क्योंकि यहां सीधे सड़क मार्ग उपलब्ध नहीं है। श्रद्धालुओं को गौरीकुंड से लगभग 16 से 18 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी होती है। जो यात्री पैदल चलने में असमर्थ हैं, उनके लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध है, जिसकी बुकिंग केवल आईआरसीटीसी के अधिकृत पोर्टल से ही की जा सकती है।

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इसके विपरीत बद्रीनाथ और गंगोत्री धाम सड़क मार्ग से जुड़े होने के कारण बुजुर्गों और कमजोर यात्रियों के लिए अपेक्षाकृत आसान हैं। वहीं यमुनोत्री धाम के लिए जानकी चट्टी से करीब 5 से 6 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी होती है। आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होने वाली यह यात्रा 10 से 12 दिनों में पूरी की जाती है।
इस वर्ष मंदिर परिसरों में अनुशासन बनाए रखने के लिए कई सख्त नियम लागू किए गए हैं। केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन और कैमरे के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। श्रद्धालुओं के लिए क्लॉकरूम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है ताकि वे अपने उपकरण सुरक्षित रख सकें। मंदिर के भीतर मूर्तियों, धार्मिक ग्रंथों या घंटियों को छूने की अनुमति नहीं है। प्रशासन का उद्देश्य है कि हर श्रद्धालु को शांत और व्यवस्थित वातावरण में दर्शन का अवसर मिल सके।
यात्रा के लिए इस बार पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। बिना पंजीकरण के किसी भी श्रद्धालु को यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। यात्री उत्तराखंड पर्यटन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप के माध्यम से अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। आधार कार्ड के जरिए पहचान सत्यापन किया जा रहा है और प्रत्येक यात्री को क्यूआर कोड आधारित ई-पास जारी किया जा रहा है, जिसकी जांच विभिन्न पड़ावों पर की जाएगी।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी इस बार विशेष तैयारी की गई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाली दिक्कतों को देखते हुए पूरे मार्ग पर 177 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। एम्स ऋषिकेश द्वारा हेली-एम्बुलेंस सेवा भी शुरू की गई है, जिससे आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके। 55 वर्ष से अधिक आयु के यात्रियों या पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने और फिटनेस प्रमाणपत्र साथ रखने की सलाह दी गई है।

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यात्रा के दौरान सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहन संचालन पर भी नियंत्रण लगाया गया है। पहाड़ी मार्गों पर रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक यात्रा पर प्रतिबंध रहेगा। सभी वाहनों का तकनीकी परीक्षण अनिवार्य किया गया है और संकरी सड़कों पर बड़े वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। यातायात दबाव को कम करने के लिए जरूरत पड़ने पर रूट डायवर्जन भी लागू किया जा सकता है।
चारधाम यात्रा का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यमुनोत्री धाम देवी यमुना का उद्गम स्थल माना जाता है, जबकि गंगोत्री धाम मां गंगा को समर्पित है। केदारनाथ धाम भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक प्रमुख तीर्थ है, वहीं बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु की तपस्थली के रूप में प्रसिद्ध है। यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि हिमालय की गोद में आत्मिक शांति और आत्मचिंतन का भी अवसर प्रदान करती है।
सरकार और प्रशासन की नई व्यवस्थाओं का उद्देश्य यही है कि हर श्रद्धालु सुरक्षित, व्यवस्थित और दिव्य अनुभव के साथ अपनी यात्रा पूरी कर सके। चारधाम यात्रा 2026 इस बार आस्था के साथ-साथ अनुशासन और आधुनिक प्रबंधन का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आ रही है।

छोटे शहर से बड़ी उड़ान: जी एम एकेडमी के छात्रों ने किया कमाल

जेईई-मेन में जी एम एकेडमी का जलवा: आयुष 97.5 परसेंटाइल, दीक्षा एडवांस के करीब


सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। शिक्षा के क्षेत्र में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही जी एम एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। विद्यालय के मेधावी छात्र आयुष कुशवाहा और दीक्षा शर्मा ने जेईई-मेन परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर न केवल विद्यालय बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
सत्र 2024-25 के संस्थागत छात्र आयुष कुशवाहा, जो सलेमपुर निवासी अनूप कुमार के पुत्र हैं, ने जेईई-मेन में 97.5 परसेंटाइल अंक प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की। खास बात यह रही कि उन्होंने निर्धारित कटऑफ से 16.62 परसेंटाइल अधिक अंक प्राप्त कर एक नई मिसाल कायम की। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
वहीं, विद्यालय की प्रतिभाशाली छात्रा दीक्षा शर्मा, जो श्यामसुंदर शर्मा की पुत्री हैं, ने 83.21 परसेंटाइल अंक प्राप्त कर जेईई-एडवांस के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। उनकी सफलता भी क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। दोनों छात्रों की इस सफलता से सलेमपुर में खुशी का माहौल है।

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इस उपलब्धि के साथ ही जी एम एकेडमी ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि यहां की शिक्षा प्रणाली, अनुशासन और मार्गदर्शन छात्रों को उच्च स्तर तक पहुंचाने में सक्षम है। विद्यालय के इन दोनों होनहार विद्यार्थियों ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और गुरुओं को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने दोनों छात्रों को माला पहनाकर और मिष्ठान खिलाकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि आयुष और दीक्षा शुरू से ही अनुशासित, परिश्रमी और विनम्र छात्र रहे हैं। उनकी सफलता विद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों छात्र जेईई-एडवांस में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश की सेवा में अपना योगदान देंगे। साथ ही उन्होंने अन्य विद्यार्थियों को भी इनसे प्रेरणा लेने की सलाह दी।
जी एम एकेडमी ग्रुप के चेयरमैन डॉ. श्री प्रकाश मिश्र ने भी छात्रों की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल छात्रों की मेहनत का परिणाम है बल्कि विद्यालय की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था का भी प्रमाण है। उन्होंने विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकों और अभिभावकों को इस सफलता के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे परिणाम संस्था की प्रतिष्ठा को और ऊंचा उठाते हैं।

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इस अवसर पर विद्यालय परिवार के कई सदस्य मौजूद रहे, जिनमें दिलीप कुमार सिंह, सीमा पांडेय, राकेश मिश्र, आदित्य, अमुल्य सहित अन्य लोग शामिल थे। सभी ने छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
आयुष और दीक्षा की सफलता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छोटे शहरों के विद्यार्थी भी बड़े सपने देख सकते हैं और उन्हें पूरा कर सकते हैं। उनकी यह उपलब्धि आने वाले समय में अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

मानदेय बकाया से नाराज रोजगार सेवक सड़क पर, विकास कार्यों पर पड़ा असर

आठ माह से मानदेय बकाया, ग्राम रोजगार सेवकों का फूटा गुस्सा—हड़ताल से ठप पड़े विकास कार्य, उग्र आंदोलन की चेतावनी


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में ग्राम रोजगार सेवकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहे इन कर्मियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है। पिछले आठ महीनों से मानदेय और ईपीएफ भुगतान लंबित होने के कारण उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। नाराज रोजगार सेवकों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
मंगलवार को उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष ब्रह्मानंद के नेतृत्व में जिले के सभी 12 ब्लॉकों के रोजगार सेवक एकजुट होकर उपायुक्त श्रम रोजगार गौरवेंद्र सिंह से मिले। इस दौरान उन्होंने अपनी समस्याओं को विस्तार से रखते हुए तत्काल समाधान की मांग की। कर्मियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।
ग्राम रोजगार सेवकों ने बताया कि आठ महीने से मानदेय न मिलने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करना उनके लिए चुनौती बन चुका है। इसके बावजूद उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनमें गहरी नाराजगी है।
ईपीएफ कटौती को लेकर भी कर्मियों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उनके वेतन से नियमित रूप से ईपीएफ की कटौती की जाती है, लेकिन यह राशि उनके खातों में जमा नहीं हो रही है। इससे उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। रोजगार सेवकों ने इसे कर्मचारियों के साथ अन्याय बताते हुए तत्काल जांच और भुगतान की मांग की है।
वहीं, जिला प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए डीसी मनरेगा ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार प्राथमिकता के आधार पर पहले मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान कराया जा रहा है। इसके बाद ग्राम रोजगार सेवकों के मानदेय का भुगतान किया जाएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि ईपीएफ से जुड़े मामलों की जांच के लिए शासन स्तर पर तीन उपायुक्त श्रम की एक लीगल कमेटी गठित की गई है, जिसकी रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच रोजगार सेवकों ने मुख्य विकास अधिकारी को सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपने का प्रयास किया, लेकिन उनके अनुपस्थित रहने के कारण ज्ञापन कार्यालय में ही जमा कर दिया गया। ज्ञापन में मानदेय भुगतान, ईपीएफ जमा, सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण सहित कई महत्वपूर्ण मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है।
हड़ताल का असर अब मनरेगा से जुड़े कार्यों पर साफ दिखाई देने लगा है। कई विकास योजनाओं की प्रगति प्रभावित हो रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका असर महसूस किया जा रहा है। इसके बावजूद रोजगार सेवकों का कहना है कि अब वे अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं और किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं करेंगे।
कर्मियों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे जिला मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन और घेराव करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।
इस मौके पर जिला महासचिव इन्द्र मणि विश्वकर्मा, इन्द्र विजय यादव, सर्वेश, अमित पटेल, राम आशीष, रमेश, प्रवीण मणि, बंधु मद्धेशिया, वीरेंद्र गुप्ता, ए.के. चन्द्रा, राजेश, धर्मेन्द्र, मक्खन, सत्य नारायण प्रजापति सहित बड़ी संख्या में ग्राम रोजगार सेवक मौजूद रहे।

समरसता से सशक्त समाज की ओर: विविधता में एकता ही भारत की असली पहचान


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। बदलते समय के इस दौर में जहां समाज तेजी से आधुनिकता और तकनीकी विकास की ओर बढ़ रहा है, वहीं सामाजिक समरसता का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। आर्थिक उन्नति और प्रगति के इस मार्ग पर यदि कोई तत्व सबसे आवश्यक है, तो वह है आपसी विश्वास, सम्मान और सहयोग की भावना। यही समरसता समाज को बिखरने से बचाती है और उसे एक मजबूत आधार प्रदान करती है।
भारत विविधताओं का देश है—यहां भाषा, धर्म, संस्कृति और जीवन-शैली में व्यापक अंतर देखने को मिलता है। लेकिन इन विविधताओं के बावजूद “एकता में अनेकता” ही हमारी सबसे बड़ी पहचान है। जब यह विविधता आपसी सहयोग और सम्मान के साथ जुड़ती है, तो यह शक्ति बन जाती है। वहीं, यदि इसमें भेदभाव और असहिष्णुता जुड़ जाए, तो यही विविधता समाज के लिए चुनौती बन जाती है।

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वर्तमान समय में समाज के भीतर बढ़ती असहिष्णुता और छोटे-छोटे मुद्दों पर बढ़ते विवाद चिंता का विषय हैं। जातिगत भेदभाव, धार्मिक कटुता और क्षेत्रीय असमानताएं सामाजिक संतुलन को कमजोर करती हैं। इसका प्रभाव न केवल वर्तमान पीढ़ी पर पड़ता है, बल्कि युवाओं के भविष्य और सोच को भी प्रभावित करता है। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो यह राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए खतरा बन सकती हैं।
समरसता का अर्थ केवल साथ रहना नहीं, बल्कि एक-दूसरे की भावनाओं और अधिकारों का सम्मान करना है। जब समाज का हर व्यक्ति खुद को सुरक्षित, सम्मानित और समान अवसरों का अधिकारी महसूस करता है, तभी सच्ची समरसता स्थापित होती है। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने व्यवहार में बदलाव लाएं—दूसरों की बातों को समझें, मतभेदों को संवाद के माध्यम से सुलझाएं और सहयोग की भावना को अपनाएं।

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शिक्षा इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही समानता, सहिष्णुता और भाईचारे के मूल्यों की शिक्षा दी जाए, तो आने वाली पीढ़ी एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकती है। इसके साथ ही मीडिया और सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वे सकारात्मक संदेशों का प्रसार करें और समाज को जोड़ने का कार्य करें।
स्थानीय स्तर पर भी कई जागरूक नागरिक और संगठन समरसता को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं। सामूहिक कार्यक्रम, संवाद और जागरूकता अभियान लोगों को एक मंच पर लाकर आपसी समझ को मजबूत कर रहे हैं। यह प्रयास यह साबित करते हैं कि यदि इच्छा शक्ति हो, तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है।
सरकारी योजनाओं और नीतियों का उद्देश्य भी तभी सफल होता है, जब उनका लाभ समाज के हर वर्ग तक समान रूप से पहुंचे। यदि किसी भी स्तर पर भेदभाव रह जाता है, तो समरसता की भावना कमजोर हो जाती है। इसलिए प्रशासनिक पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

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सोशल मीडिया का प्रभाव भी आज समाज पर तेजी से बढ़ रहा है। जहां यह जागरूकता फैलाने का माध्यम है, वहीं गलत सूचनाओं और अफवाहों के जरिए समाज में विभाजन भी पैदा कर सकता है। ऐसे में हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह सतर्क रहे और किसी भी नकारात्मक या भ्रामक जानकारी को फैलाने से बचे।
अंततः, समरसता कोई एक दिन का प्रयास नहीं, बल्कि एक निरंतर प्रक्रिया है। इसे जीवन का हिस्सा बनाकर ही हम एक सशक्त और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं। जब हर व्यक्ति भेदभाव से ऊपर उठकर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना विकसित करेगा, तभी सच्ची एकता स्थापित होगी।
समरस समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव होता है। जब यह नींव मजबूत होगी, तभी विकास की इमारत स्थायी और समृद्ध बन पाएगी।

स्किल्ड वर्कफोर्स के दम पर भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़त

भारत की उभरती वैश्विक ताकत: लोकतंत्र, युवा जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स का अनोखा संगम


गोंदिया (महाराष्ट्र)। भारत आज वैश्विक मंच पर केवल एक देश नहीं, बल्कि स्थिरता, अवसर और विकास का केंद्र बनकर उभर रहा है। 21वीं सदी में भारत की बढ़ती ताकत को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि उसके मजबूत लोकतंत्र, युवा जनसंख्या और कुशल कार्यबल के समन्वय के रूप में देखा जा रहा है।
एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी के अनुसार, भारत की यही तीन प्रमुख शक्तियाँ—लोकतंत्र, जनसांख्यिकी और स्किल्ड वर्कफोर्स—उसे विश्व के लिए “विन-विन साझेदार” बनाती हैं।
भारत का लोकतंत्र इसकी सबसे बड़ी ताकत है। 1950 में संविधान लागू होने के बाद से देश ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती से अपनाया है। नियमित चुनाव, स्वतंत्र न्यायपालिका और पारदर्शी शासन व्यवस्था ने देश को राजनीतिक स्थिरता प्रदान की है। विविधताओं से भरे इस देश में एकता और लोकतांत्रिक सहभागिता का मॉडल विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। यही कारण है कि वैश्विक कंपनियाँ भारत को निवेश के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद बाजार मानती हैं।
दूसरी महत्वपूर्ण शक्ति भारत की जनसांख्यिकी है। लगभग 1.43 अरब की आबादी में 65 प्रतिशत से अधिक युवा वर्ग शामिल है। यह युवा शक्ति नवाचार, तकनीकी अपनाने और उद्यमिता में अग्रणी है। भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में तेजी से उभर रहा है, जिससे रोजगार और आर्थिक विकास को नई दिशा मिल रही है।
तीसरी और निर्णायक शक्ति है भारत का स्किल्ड वर्कफोर्स। आईटी, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में भारतीय पेशेवरों ने वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर वैश्विक तकनीकी केंद्र बन चुके हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका ने विश्व स्तर पर उनकी दक्षता को साबित किया।

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जब वैश्विक कंपनियाँ भारत में निवेश करती हैं, तो उन्हें एक साथ तीन प्रमुख लाभ मिलते हैं—स्थिर राजनीतिक माहौल, विशाल उपभोक्ता बाजार और प्रतिभाशाली मानव संसाधन। यही कारण है कि बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत को भविष्य का प्रमुख निवेश केंद्र मान रही हैं।
हालांकि, चुनौतियाँ भी मौजूद हैं। शिक्षा और कौशल में असमानता, आधारभूत संरचना की कमी और बेरोजगारी जैसी समस्याएँ अभी भी सामने हैं। लेकिन सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों के माध्यम से इन चुनौतियों को अवसरों में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।
निष्कर्षतः, भारत का विकास मॉडल केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए अवसरों का द्वार खोलता है। लोकतंत्र, युवा ऊर्जा और कुशल कार्यबल का यह संगम आने वाले समय में भारत को एक मजबूत वैश्विक शक्ति और भरोसेमंद साझेदार के रूप में स्थापित करेगा।

लेखक: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया (महाराष्ट्र)

सड़क हादसे में महिला की मौत, गांव में शोक की लहर

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के घुघली थाना क्षेत्र में मंगलवार को हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। ग्राम मठिया, पोस्ट बसन्तपुर निवासी 28 वर्षीय पुनीता प्रजापति की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई, जिससे परिवार में कोहराम मच गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पुनीता अपने पति चंदेश्वर प्रजापति के साथ मोटरसाइकिल से घर लौट रही थीं। दोपहर करीब 12:30 बजे मंगलपुर पटखौली रेलवे क्रॉसिंग के पास अचानक बाइक का संतुलन बिगड़ गया और वह सड़क पर गिर पड़ीं। इसी दौरान पीछे से आ रहे तेज रफ्तार चारपहिया वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह गंभीर रूप से घायल हो गईं।

घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुघली पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल महराजगंज रेफर कर दिया गया। लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे के बाद गांव में शोक की लहर फैल गई है।

थानाध्यक्ष घुघली कुंवर गौरव सिंह ने बताया कि मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

नवागंतुक जिलाधिकारी ने संभाला कार्यभार, पारदर्शिता और जनसुनवाई पर दिया जोर

औरैया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में नवागंतुक जिलाधिकारी बृजेश कुमार ने मंगलवार को कोषागार स्थित डबल लाकर रूम में विधिवत चार्ज ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न चार्ज पत्रावलियों पर हस्ताक्षर कर कार्यभार संभाला और वरिष्ठ कोषाधिकारी से कोषागार के विभिन्न पटलों तथा डबल लाकर रूम में सुरक्षित अभिलेखों की विस्तृत जानकारी ली।

कार्यभार ग्रहण करने के बाद जिलाधिकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों एवं पटल सहायकों से परिचय प्राप्त किया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी अपने-अपने कार्यालयों में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक अनिवार्य रूप से उपस्थित रहकर आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और उनका समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बल देते हुए कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो, जिससे सामाजिक समानता और आर्थिक उन्नयन को बढ़ावा मिल सके।

इसके साथ ही उन्होंने विभागीय कार्यों में नवाचार को बढ़ावा देने की बात कही और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए ठोस कार्ययोजना बनाकर उसे लागू करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने जनसुनवाई, फार्मर रजिस्ट्री और गौआश्रय स्थलों जैसी योजनाओं पर विशेष ध्यान देने के लिए भी कहा।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी संत कुमार, अपर जिलाधिकारी अविनाश चन्द्र मौर्य, वरिष्ठ कोषाधिकारी प्रदीप कुमार, जिला विकास अधिकारी, उप जिलाधिकारी सदर अजय आनंद वर्मा, उप जिलाधिकारी बिधूना गरिमा सोनकिया सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

दिव्यांग सशक्तिकरण में उत्कृष्ट कार्य करने वालों के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार हेतु आवेदन आमंत्रित

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)l विश्व दिव्यांग दिवस 03 दिसम्बर 2026 के अवसर पर दिव्यांग जनों के हित में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित करने के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। जिला दिव्यांग सशक्तिकरण अधिकारी ज्ञान देवी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह पहल समाज में दिव्यांग जनों के सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और इस क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की जा रही है।
उन्होंने बताया कि पुरस्कार के लिए विभिन्न श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। इनमें दक्ष दिव्यांग कर्मचारी और स्वनियोजित दिव्यांग जन, दिव्यांग जनों के लिए सर्वश्रेष्ठ नियोक्ता, सर्वश्रेष्ठ प्लेसमेंट अधिकारी या एजेंसी, दिव्यांग हित में कार्यरत सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति एवं संस्था, प्रेरणा स्रोत, नवाचार एवं उत्पाद विकास, बाधामुक्त वातावरण निर्माण, पुनर्वास सेवाएं प्रदान करने वाला सर्वश्रेष्ठ जिला, सृजनशील दिव्यांग वयस्क एवं बालक/बालिका, सर्वश्रेष्ठ ब्रेल प्रेस, अनुकूल वेबसाइट तथा उत्कृष्ट दिव्यांग खिलाड़ी सहित सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हैं।
आवेदन प्रक्रिया के संबंध में बताया गया कि इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं विस्तृत जानकारी और आवेदन पत्र का प्रारूप भारत सरकार की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं। सभी आवेदन 30 मई 2026 तक पूर्ण कर जिला दिव्यांग जन सशक्तिकरण अधिकारी कार्यालय, विकास भवन संजय पैलेस, आगरा में जमा करने होंगे। प्राप्त आवेदनों को जिलाधिकारी की संस्तुति के बाद निदेशक, दिव्यांग जन सशक्तिकरण विभाग, उत्तर प्रदेश, लखनऊ को भेजा जाएगा।
इस पहल से अपेक्षा है कि समाज में दिव्यांग जनों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी।

महिला आरक्षण को लेकर सपा का हमला: “जनता को गुमराह कर रही भाजपा”

देवरिया। (राष्ट्र की परम्परा) को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक सुभाषचंद्र श्रीवास्तव ने शहर के राघव नगर स्थित गगन रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेसवार्ता में भारतीय जनता पार्टी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है कि लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक गिर गया है, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकसभा में जिस विधेयक पर मत विभाजन हुआ और जो पारित नहीं हो सका, वह 131वां संविधान संशोधन विधेयक था, जो परिसीमन से संबंधित था।


प्रेसवार्ता के दौरान श्रीवास्तव ने कहा कि देश भली-भांति जानता है कि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ था, जिसमें समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सहित कई दलों का समर्थन शामिल था। यह विधेयक अब कानून का रूप ले चुका है और महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी में सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने दोहराया कि समाजवादी पार्टी हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रही है, लेकिन महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन लागू करने के प्रयासों का विरोध करती है।
उन्होंने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू करना चाहती थी, जो संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। उनका आरोप था कि भाजपा की रणनीति पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व घटाकर उत्तर भारत के राज्यों की सीटें बढ़ाने की है, जिससे सत्ता में बने रहने का राजनीतिक लाभ लिया जा सके। श्रीवास्तव ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करार दिया।
उन्होंने आगे कहा कि इंडिया गठबंधन ने भाजपा के इस “षड्यंत्र” को विफल कर दिया है और लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक गिर जाना इस बात का संकेत है कि सरकार के पास अब नैतिक आधार नहीं बचा है। उन्होंने भाजपा सरकार से तत्काल इस्तीफा देने की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनमत का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।
प्रेसवार्ता में मौजूद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए श्रीवास्तव ने कहा कि विपक्ष हमेशा से महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में खड़ा रहा है और आगे भी रहेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा फैलाया जा रहा भ्रम जल्द ही जनता के सामने स्पष्ट हो जाएगा और सच्चाई सामने आएगी।
इस मौके पर स्थानीय पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने पार्टी की नीतियों और रुख का समर्थन किया। प्रेसवार्ता शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुई और अंत में श्रीवास्तव ने मीडिया का आभार व्यक्त किया।

रामजानकी मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, महिला की मौत; दो बच्चों समेत पांच घायल

संतकबीरनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के रामजानकी मार्ग पर हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में 35 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जबकि दो बच्चों सहित पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को अस्पताल भिजवाया।
मिली जानकारी के अनुसार धनघटा थाना क्षेत्र के दूल्हापार चौराहे के पास एक ऑटो रिक्शा धनघटा से पौली की ओर जा रहा था, जिसमें कुल छह लोग सवार थे। इसी दौरान सामने से आ रहे तेज रफ्तार अनियंत्रित ट्रक ने ऑटो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो पलट गया और उसमें सवार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
हादसे में जान गंवाने वाली महिला की पहचान परसहर गांव निवासी कमरुन्निशा, पत्नी मोहम्मद रईस के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह अपने मायके से घर लौट रही थीं। घायलों में दूल्हापार चकिया निवासी राजन, विश्वनाथपुर निवासी रागिनी, उसके दो छोटे बच्चे तथा महसो बस्ती निवासी सुशीला शामिल हैं।
सभी घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैंसर पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। घायलों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुराने तालाब से मिला संदिग्ध मोर्टार, इलाके में मचा हड़कंप

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

मनियर थाना क्षेत्र के गंगापुर गांव में मंगलवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब एक पुराने तालाब की खुदाई के दौरान संदिग्ध मोर्टार मिलने की सूचना सामने आई। ईंट भट्ठे के निर्माण के लिए चल रही खुदाई के बीच मिले इस विस्फोटक जैसी वस्तु ने पूरे इलाके में भय और कौतूहल का माहौल पैदा कर दिया है।जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार दोपहर लगभग 3 बजे की है। गंगापुर गांव में एक पुराने तालाब से पानी निकालकर उसे समतल किया जा रहा था, ताकि वहां निर्माण कार्य किया जा सके। इसी दौरान कुछ बच्चे मछली पकड़ने के उद्देश्य से तालाब में उतर गए। खेल-खेल में उन्हें एक भारी धातु का गोला जैसी वस्तु दिखाई दी, जिसे वे कबाड़ समझकर बाहर ले आए।बताया जा रहा है कि बच्चों ने उसे कबाड़ में बेचने के इरादे से ग्राइंडर मशीन से काटने की कोशिश भी की। हालांकि, मौके पर मौजूद कुछ बड़े लड़कों की नजर उस पर पड़ गई और उन्होंने तुरंत बच्चों को ऐसा करने से रोक दिया। यदि समय रहते उन्हें नहीं रोका जाता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।मोर्टार पर बने निशान और लिखावट ने मामले को और भी गंभीर बना दिया है। उस पर ‘ODR 11.06’, ‘204A’ तथा ‘51 MM M ILLG’ जैसे शब्द अंकित हैं। इसके अलावा उस पर चांद-सितारे जैसा प्रतीक भी देखा गया, जिसे ग्रामीण पाकिस्तान से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इस तरह के चिन्ह मिलने से लोगों में दहशत व्याप्त है।घटना की सूचना मिलते ही मनियर थाना प्रभारी अजय कुमार त्रिपाठी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और तुरंत उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। सुरक्षा के मद्देनजर मोर्टार को सुरक्षित स्थान पर रखवाया गया है और आसपास के क्षेत्र को सतर्क कर दिया गया है।पुलिस के अनुसार, फोरेंसिक टीम को जांच के लिए बुलाया गया है, जो इस मोर्टार की वास्तविकता और उसके स्रोत का पता लगाएगी। प्रारंभिक तौर पर यह आशंका जताई जा रही है कि यह कोई पुराना सैन्य अवशेष हो सकता है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी।
फिलहाल गांव में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर यह मोर्टार तालाब में कैसे पहुंचा। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी संदिग्ध वस्तु की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।

दिशा बैठक में योजनाओं की समीक्षा, जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक कार्यों की सराहना की

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में विकास कार्यों को गति देने और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर मंगलवार को जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता सांसद शशांक मणि ने की, जिसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर संतोष जताते हुए सराहना भी की।
बैठक में मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत, समग्र शिक्षा और डिजिटल इंडिया पब्लिक इंटरनेट एक्सेस प्रोग्राम (सीएससी) सहित कई महत्वपूर्ण योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही हाईवे और रेलवे परियोजनाओं की स्थिति की भी समीक्षा की गई।
सांसद ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं का लाभ समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
गर्मी के मौसम को देखते हुए बैठक में बिजली आपूर्ति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। विद्युत विभाग को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वहीं गेहूं खरीद की प्रगति पर चर्चा करते हुए बताया गया कि जनपद में 107 क्रय केंद्रों के माध्यम से अब तक लगभग 6 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। भंडारण के लिए पर्याप्त बोरा उपलब्ध कराते हुए कुल 25 हजार मीट्रिक टन गेहूं रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
गौ आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए पशुओं के लिए पेयजल, चारा, तिरपाल और पंखों की समुचित व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए, ताकि गर्मी में पशुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बैठक में सांसद सलेमपुर, कृषि मंत्री, विधायकगण, जिलाधिकारी दिव्या मित्तल, पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी सहित सभी संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। अंत में जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि बैठक में दिए गए निर्देशों का शीघ्र अनुपालन सुनिश्चित किया जाए और नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

जेईई मेन 2026 में मोमेंटम के छात्रों का दमदार प्रदर्शन, 93 हुए एडवांस के लिए क्वालिफाई

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। जेईई मेन 2026 के घोषित परिणामों में मोमेंटम छात्रसंघ के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर अपनी शैक्षणिक श्रेष्ठता का परिचय दिया है। इस वर्ष संस्थान के 93 छात्र जेईई एडवांस के लिए पात्र बने हैं।

इनमें शिवांश रंजन ने 99.77 परसेंटाइल प्राप्त कर संस्थान में सर्वोच्च स्थान हासिल किया। वहीं आदित्य विक्रम सिंह ने 99.71, आकाश पटेल ने 99.52, अक्षत पांडेय ने 99.36, आयुष कुमार यादव ने 99.14 तथा शिवम मणि त्रिपाठी ने 99.10 परसेंटाइल स्कोर कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

संस्थान के कुल 58 छात्रों ने 95 परसेंटाइल से अधिक अंक प्राप्त कर सफलता का परचम लहराया। बस्ती शाखा के दो छात्रों ने 99 परसेंटाइल से अधिक तथा तीन छात्रों ने 97 परसेंटाइल से अधिक अंक हासिल किए हैं। इसके अलावा 14 छात्र जेईई एडवांस के लिए क्वालिफाई हुए हैं। वहीं देवरिया शाखा के सात छात्र जेईई एडवांस के लिए सफल रहे।

संस्थान के निदेशक इं. संजीव कुमार ने कहा कि यह परिणाम केवल अंकों की उपलब्धि नहीं है, बल्कि छात्रों के अनुशासन, निरंतरता और सही दिशा में किए गए प्रयासों का प्रमाण है। निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि मोमेंटम का उद्देश्य केवल टॉपर बनाना नहीं, बल्कि ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है जो किसी भी स्तर की प्रतिस्पर्धा में आत्मविश्वास के साथ खड़े हो सकें। निदेशक संदीप कुमार ने बताया कि 93 छात्रों का जेईई एडवांस के लिए पात्र होना संस्थान के लिए गर्व की बात है और उन्हें विश्वास है कि विद्यार्थी आगामी परीक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे।

मईल पुलिस ने चोरी का किया खुलासा, बाल अपचारी गिरफ्तार, बाइक बरामद

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में अपराध नियंत्रण अभियान के तहत मईल थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस टीम ने चोरी की घटना का अनावरण करते हुए एक बाल अपचारी को गिरफ्तार किया है और उसके पास से चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की है। यह कार्रवाई मुखबिर की सूचना पर बरेजी पुल के पास की गई।
पुलिस के अनुसार, पकड़े गए बाल अपचारी के कब्जे से हीरो स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल (बिना नंबर प्लेट) बरामद हुई, जिसका वास्तविक नंबर UP 52BM 2179 है। यह वाहन पहले कोतवाली थाना क्षेत्र में दर्ज चोरी के मामले से संबंधित पाया गया। इस संबंध में मईल थाने में नया मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई की जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया कि इस मामले में पहले ही दो अन्य अभियुक्तों को 10 अप्रैल 2026 को चोरी के सामान के साथ गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस की लगातार कार्रवाई से चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने में मदद मिल रही है।
गिरफ्तार बाल अपचारी का आपराधिक इतिहास भी लंबा बताया जा रहा है। उसके खिलाफ मईल थाने में चोरी, लूट और अन्य आपराधिक धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं। इससे स्पष्ट होता है कि वह पहले से आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहा है।
इस पूरी कार्रवाई को पुलिस अधीक्षक के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी के पर्यवेक्षण में अंजाम दिया गया। गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक महेंद्र मोहन मिश्रा, उपनिरीक्षक अरविंद कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।
पुलिस का कहना है कि जनपद में अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।

माटी कला उद्यमियों को 10 लाख तक ऋण, रोजगार बढ़ाने की पहल

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)l माटी कला से जुड़े उद्यमियों और परम्परागत कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री माटी कला रोजगार योजना के तहत 10 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। जिला ग्राम उद्योग अधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के अंतर्गत माटीकला बोर्ड का गठन किया गया है और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जनपदों को लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक उत्पादों पर बढ़ती रोक के बीच पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और मिट्टी से बने उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत कुम्हारी और माटीकला से जुड़े कारीगरों को आधुनिक प्रशिक्षण देकर उनके उद्योग को विकसित करने की योजना बनाई गई है, ताकि वे बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन कर सकें।
योजना के अंतर्गत 18 से 55 वर्ष आयु के ऐसे कारीगर और उद्यमी आवेदन कर सकते हैं, जो माटीकला कार्य में पहले से संलग्न हैं। समूहों और समितियों को भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा। ऋण में 95 प्रतिशत राशि बैंक द्वारा और 5 प्रतिशत अंशदान लाभार्थी द्वारा दिया जाएगा। साथ ही पूंजीगत ऋण पर 25 प्रतिशत तक मार्जिन मनी अनुदान का प्रावधान है।
अधिकारियों के अनुसार 5 लाख रुपये से अधिक ऋण लेने के लिए अभ्यर्थी का कम से कम आठवीं पास होना अनिवार्य है। आवेदन की अंतिम तिथि 15 मई 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी कार्यदिवस में जिला ग्रामोद्योग कार्यालय, संगीत पैलेश निजामुदीनपुरा मऊ में संपर्क कर सकते हैं या दिए गए मोबाइल नंबरों पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इस योजना के माध्यम से न केवल पारंपरिक कला को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।