कोलकाता/मालदा (राष्ट्र की परम्परा)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मालदा में जजों के घेराव मामले में National Investigation Agency (NIA) ने बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने इस मामले में 12 एफआईआर दर्ज कर गहन जांच शुरू कर दी है।
यह कार्रवाई Supreme Court of India के निर्देश के बाद की गई है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस घटना को प्रशासनिक विफलता और संभावित राजनीतिक हस्तक्षेप का संकेत मानते हुए जांच एनआईए को सौंप दी थी।
एनआईए ने अपने बयान में बताया कि मालदा जिले के मोथाबाड़ी थाने से जुड़े 7 और कालियाचक थाने से जुड़े 5 मामलों को पुनः दर्ज किया गया है।
ये सभी मामले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्य में लगे न्यायाधीशों की सुरक्षा से संबंधित हैं। जांच टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि इस घटना में सात न्यायाधीश—जिनमें तीन महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल था—करीब 9 घंटे तक भीड़ के कब्जे में रहे। इस दौरान उन्हें भोजन और पानी तक नहीं दिया गया। घटना को सुनियोजित हमला बताया जा रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें Surya Kant, Joymalya Bagchi और Vipul Pancholi शामिल थे, ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत 12 मामलों को एनआईए को ट्रांसफर किया।
कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से माफी मांगने का निर्देश दिया। साथ ही पुलिस को आदेश दिया गया कि गिरफ्तार 26 आरोपियों को एनआईए के हवाले किया जाए।
मामले में प्रमुख आरोपी मोफाकरुल इस्लाम और मौलाना मोहम्मद शाहजहां अली कादरी पहले से ही गिरफ्तार हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह घटना न्यायपालिका को डराने की साजिश का हिस्सा हो सकती है।
चुनाव से पहले इस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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