बहराइच (राष्ट्र की परम्परा)। मटेरा थाना क्षेत्र के शंकर पुर चौराहा नवाबगंज गंज रोड़ पर मछली आढ़त से प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली धड़ल्ले से बेची जा रही है। जो शंकर पुर चौराहा से नवाबगंज को भी प्रतिबंधित मछली बिकने के लिये भेजी जाती है। जिस को लेकर नवाबगंज के समाजसेवी भुवन प्रसाद, यदुन्नदन मिश्रा, नीरज सिंह,ने जिला के मत्स्य विभाग के अधिकारी से काई बार शिकायत भी किया है । लेकिन मत्स्य विभाग के अधिकारी के तरफ़ से कोई कार्रवाई नहीं कि कि जानकारी नहीं मिली है। जिला मत्स्य अधिकारी से नवाबगंज क्षेत्र में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली की बिक्री पर अविलम्ब रोक लगाने की समाजसेवी यो ने मांग भी की है। प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली मटेरा के शंकर पुर चौराहा आढ़त से आ रही है और इसपर रोक लगना चाहिए। पशु चिकित्सक डा अशोक कुमार के अनुसार थाई मांगुर मछली खाने से चर्म रोग से लेकर कई तरह की बिमारियां होने की बात कही जाती है। और डाक्टर का कहना है कि थाई मांगुर मछली को अगर किसी तालाब या नदी में डाल दिया जाय तो नदी की सारी छोटी -बड़ी मछली को खाकर अपनी जनसंख्या फैलाने का काम करती है। डाक्टर अरविन्द कुमार ने कहा कि जहां नवाबगंज क्षेत्र के एक किलो मीटर के दायरे में प्रतिबंधित मछली थाई मांगूर बेची जा रही है। इसपर तो प्रतिबंध लगना ही चाहिए अधिकारियों को। वहीं कुछ जानकारों का कहना है कि लगभग एक उंगली साइज की यह मछली तीन महीने में ही आधा किलो तक वजन की विकसित हो जाती है। जबकि सामान्य मछली को इतना विकसित होने में छह से आठ महीने का समय लगता है। काफी कम समय में इस मछली के तेजी से बढ़ने की वजह से इसकी क्षेत्र में खूब डिमांड है। इन दिनों थाई मांगूर मछली मटेरा से छोटे ट्रकों में भरकर नवाबगंज में बेचने के लिए आती है, लेकिन जब इस सम्बन्ध में मत्स्य विभाग अधिकारी डॉ जितेन्द्र कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि दिखवाते है अगर प्रतिबंधित मछली बिक रही हैं तो उचित कार्रवाई की जायेगी।
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