Sunday, April 12, 2026
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आरा–बलिया रेल लाइन: 55 साल का इंतजार खत्म होने की ओर, सात नए स्टेशन बनेंगे

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए बहुप्रतीक्षित आरा–बलिया रेल लाइन परियोजना अब साकार होती नजर आ रही है। करीब 62 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन का फाइनल सर्वे अंतिम चरण में है और जल्द ही इसकी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी। इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर निर्माण प्रक्रिया को गति दी जाएगी।यह रेल लाइन बिहार के रघुनाथपुर से शुरू होकर बसुधरपार, बादिलपुर और नैनिजोर होते हुए बलिया तक पहुंचेगी। परियोजना के तहत कुल सात नए रेलवे स्टेशन बनाए जाने की योजना है। गंगा किनारे बसे दियारा क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए यह रेल लाइन जीवनरेखा साबित होगी, क्योंकि बाढ़ और बरसात के दौरान यहां आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है।इस परियोजना का प्रस्ताव लगभग 55 वर्ष पहले तत्कालीन रेल मंत्री राम सुभग सिंह द्वारा रखा गया था, लेकिन विभिन्न कारणों से यह योजना लंबे समय तक अटकी रही। बाद में पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के प्रयासों से केंद्र सरकार ने सर्वे के लिए 78 करोड़ रुपये स्वीकृत किए, जिससे परियोजना को नई गति मिली।रेलवे द्वारा पहले बकुलहा–महुली मार्ग से सर्वे कराया गया था, लेकिन दलदली जमीन मिलने के कारण उस रूट को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद रघुनाथपुर–नैनिजोर मार्ग को अंतिम रूप दिया गया, जिस पर अब काम आगे बढ़ रहा है। इस दौरान जमीनी और जीपीएस सर्वे एक वर्ष से अधिक समय तक चला है।पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर के पीआरओ सुमित कुमार के अनुसार, सर्वे रिपोर्ट जल्द ही रेलवे बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर परियोजना की व्यवहार्यता तय होगी और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।यह रेल लाइन न केवल यात्री आवागमन को सुगम बनाएगी, बल्कि मालगाड़ियों के संचालन को भी बढ़ावा देगी। इसके माध्यम से नैनीजोर, धमवल और जगजीवन हॉल्ट जैसे क्षेत्रों को बड़े रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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