ईरान में खामेनेई विरोधी प्रदर्शन तेज, सात लोगों की मौत; जानिए बवाल की असली वजह

तेहरान (राष्ट्र की परम्परा)। ईरान में रविवार से शुरू हुए खामेनेई विरोधी प्रदर्शन लगातार उग्र होते जा रहे हैं। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में अब तक सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। ये विरोध प्रदर्शन पहले राजधानी तेहरान में शुरू हुए और फिर देश के अन्य हिस्सों में फैल गए। मंगलवार को कम से कम 10 विश्वविद्यालयों के छात्रों के इसमें शामिल होने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

क्यों भड़क रहे हैं ईरान में प्रदर्शन?

ईरान में यह ताजा विरोध प्रदर्शन आर्थिक मंदी, रिकॉर्ड महंगाई और मुद्रा संकट के कारण भड़के हैं। दिसंबर में देश की महंगाई दर 42.5 फीसदी तक पहुंच गई। रविवार को सबसे पहले व्यापारी और दुकानदार सड़कों पर उतरे, जिन्होंने मुद्रा रियाल में तेज गिरावट और बढ़ती कीमतों के खिलाफ सरकार को घेरा।

व्यापारियों और छात्रों ने प्रमुख बाजार बंद कर प्रदर्शन किया। हालात को देखते हुए सरकार ने बुधवार को सर्दियों की छुट्टी घोषित कर दी, जिससे देश का बड़ा हिस्सा बंद रहा।

हिंसा, गिरफ्तारी और सरकारी कार्रवाई

ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और सरकारी व निजी इमारतों को नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अमेरिकी और पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव में है, जो मुख्य रूप से परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हैं। जून में इस्राइल के साथ 12 दिन के संघर्ष ने आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया।

आर्थिक दबाव से उपजा जनआक्रोश

लोरेस्तान प्रांत के उप-राज्यपाल सईद पौराली ने कहा कि ये प्रदर्शन मुख्य रूप से महंगाई, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और आजीविका की चिंता से जुड़े हैं। हालांकि, कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने ईरान की शासन प्रणाली और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के खिलाफ भी नारे लगाए।

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‘तियानमेन’ से तुलना वाला वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक व्यक्ति तेहरान की सड़क के बीच बैठा दिखता है और सामने पुलिस की मोटरसाइकिल खड़ी है। इस दृश्य की तुलना 1989 के चीन के तियानमेन स्क्वायर आंदोलन से की जा रही है। वीडियो में आंसू गैस के धुएं के बीच व्यक्ति शांत मुद्रा में बैठा नजर आता है।

2022 के प्रदर्शनों से कैसे अलग है यह आंदोलन?

हालिया विरोध प्रदर्शन 2022 के महसा अमीनी आंदोलन की तुलना में छोटे माने जा रहे हैं। 2022 में हिरासत में महसा अमीनी की मौत के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान गई थी।

सरकार की प्रतिक्रिया

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदर्शनकारियों से संवाद की इच्छा जताई है। उन्होंने कहा,
“अगर हम लोगों की आजीविका की समस्या हल नहीं कर पाए, तो इस्लामी दृष्टिकोण से हम नर्क के हकदार होंगे।”
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उनके विकल्प सीमित हैं, क्योंकि रियाल की कीमत ऐतिहासिक रूप से गिर चुकी है और एक डॉलर लगभग 14 लाख रियाल के बराबर हो गया है।

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Karan Pandey

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