महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के शिकारपुर चौराहे के समीप नारायणी शाखा नहर पर बना पुल इन दिनों गंभीर बदहाली का शिकार है। पुल की सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी है और बीच में बने गहरे गड्ढे राहगीरों एवं वाहन चालकों के लिए खतरे का कारण बन गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
सिंदुरिया-शिकारपुर मार्ग पर स्थित यह पुल घुघली क्षेत्र सहित दर्जनों गांवों को राष्ट्रीय राजमार्ग-730 से जोड़ता है। यही वजह है कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में दोपहिया और चारपहिया वाहन, स्कूली छात्र-छात्राएं, किसान, व्यापारी और नौकरीपेशा लोग इस मार्ग से आवागमन करते हैं।
पुल के मध्य भाग में बने गहरे गड्ढों के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर रात के समय और बारिश के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। बरसात में गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई बाइक और साइकिल सवार गड्ढों में फंसकर गिर चुके हैं। हालांकि अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है, लेकिन हालात लगातार चिंताजनक बने हुए हैं।
जानकारी के अनुसार नारायणी (गंडक) नदी से निकली त्रिवेणी नहर प्रणाली का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1904 से 1909 के बीच कराया गया था। यह नहर पूर्वांचल के कई जिलों की सिंचाई व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। समय के साथ नहरों का विस्तार और आधुनिकीकरण हुआ, लेकिन उनसे जुड़े कई पुलों की स्थिति जर्जर होती चली गई।
शिकारपुर का यह पुल भी लंबे समय से मरम्मत और रखरखाव के अभाव का सामना कर रहा है। क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि कई बार सिंचाई विभाग और स्थानीय प्रशासन को इसकी खराब स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यह मार्ग बाजार, स्कूल, अस्पताल और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता है। पुल की जर्जर स्थिति न केवल लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी है, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों पर भी असर डाल रही है।
मानसून की शुरुआत के साथ पुल की समस्या और गंभीर हो गई है। गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों को रास्ते का सही अनुमान नहीं लग पाता। वहीं भारी वाहनों के गुजरने से पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है, जिससे सड़क और अधिक टूटती जा रही है।
स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि जल्द मरम्मत नहीं कराई गई तो पुल की संरचना को भी नुकसान पहुंच सकता है।
क्षेत्रीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से पुल की तकनीकी जांच कराने, क्षतिग्रस्त हिस्सों की तत्काल मरम्मत कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर पुल के सुदृढ़ीकरण का कार्य शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल एक पुल की समस्या नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा और सुविधा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
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