Saturday, April 4, 2026
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हीट बेव से पशुओं को बचाने का उपाय करें पशुपालक- मुख्य पशु चिकित्साधिकारी

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
जनपद में हीटवेव से सम्बन्धित बीमारियों के प्रबन्धन हेतु बैठक, विकास भवन कार्यालय पर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ अरविन्द कुमार वैश्य द्वारा आहूत की गयीं। बैठक में हीटवेट के दुष्प्रभाव एवं रोकथाम के सम्बन्ध में जानकारी दी गयी। बैठक में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ अरविन्द कुमार वैश्य ने कहा आने वाले दिनों में हीट वेव और बढ़ेगी, तापमान बढ़ने से पशुओं के बीमार होने और उनकी उत्पादन क्षमता प्रभावित होने का डर है, लू के कारण पशुओं को डिहाईड्रेशन, बुखार, गर्भपात हो सकता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए पशुपालकों को लू और गर्मी से बचने के उपाय करना चाहिए।
पशुओं को हीटवेव से बचाने के लिए कुछ घरेलू उपाय किए जा सकते हैं, जैसे – पशुओं को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त छांव और हवा हो। उनके विचरण करने के लिए पर्याप्त जगह हो। भैसवंशीय पशुओं को शाम के समय नहलाएं और पशुओं के बाड़ों पर लगी टाट पर पानी का छिड़काव करते रहें ताकि ठंडक बनी रहे। पशुओं के बाड़े में शुद्ध पेयजल, सूखे चारे के साथ साथ हरा चारा रखें। भार ढोने वाले पशुओं को दोपहर के समय काम में नहीं जोतें। उन्हें छायादार स्थान पर बांधें रखें। ये कुछ सावधानियां हैं जिन्हें अपनाकर आप पशुओं को लू से बचा सकते हैं।
लू लगने पर क्या करें-
अगर पशुओं को लू लग गयी है तो उसे फौरन छायादार स्थान पर ले जाएं। उसके शरीर और सिर पर पानी डालें औरदव फिर भीगा कपड़ा बार बार रखें,इससे पशु को राहत मिलेगी। यदि पशु चारा खाना बंद कर दे, सुस्त या बीमार दिखाई दे तो ऐसी स्थिति में फौरन उसे नजदीक के वेटेनरी डॉक्टर के पास ले जाएं। उसकी सलाह से फौरन इलाज शुरू करवाएं।
हीटवेव अथवा लू में पशुओं का श्वसन दर बढ़ जाता है तथा उनके शरीर का तापमान लगभग 106 डिग्री से 108 डिग्री फारेनहाइट तक बढ़ जाता है। इसके उपचार हेतु पशुओं को एंटीबायोटिके दवाऐं व फ्लूड थेरेपी की जाती है तथा पशुओं को नहलाया जाता है, जिससे तत्काल रूप से तापमान घट जाय। हीटवेव के समय ज्वार/बाजरा आदि में नमी की कमी के कारण पशुओं को सायनाइड विषाक्तता हो जाती है। इससे पशुओं द्वारा चारा खाने के बाद मुंह से झाग निकलने लगता है तथा पशु गिरकर तड़पने लगता है। इसके उपचार हेतु सोडियम थायोसल्फेट के साथ फ्लूड थेरेपी की जाती है। पशुओं को अस्वस्थता की स्थिति में तत्काल सम्बन्धित क्षेत्र के पशु चिकित्सालय पर सम्बन्ध स्थापित करते हुए समुचित उपचार करायें। पशु चिकित्सालयों में पर्याप्त मात्रा में थोडियम थायोसल्फेट एवं एट्रोपिन सल्फेट उपलब्ध है। पशुपालन विभाग, देवरिया द्वारा डॉ रामधारी राम, उपमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, राजकीय पशु चिकित्सालय-रूद्रपुर को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। बैठक में सभी उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं पशु चिकित्साधिकारी उपस्थित रहे।

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