Wednesday, March 18, 2026
HomeNewsbeatपिछड़ा वर्ग से मनोनीत सभासद नहीं बनाए जाने पर पिछड़ों में रोष

पिछड़ा वर्ग से मनोनीत सभासद नहीं बनाए जाने पर पिछड़ों में रोष

बरहज नगर पालिका में एक भी ओबीसी वर्ग के कार्यकर्ता का नहीं हुआ मनोनयन

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l जनपद की दोनों नगर पालिकाओं – देवरिया तथा गौरा बरहज में सभासदों के मनोनयन की सूची जारी हुई । सूची पढ़कर क्षेत्र के लोग थोड़ी देर के लिए चश्मा साफ करते रहे । शायद कहीं पढ़ने में गलती हो गई हो। लेकिन नहीं, सच यही था कि पूरी सूची में एक भी पिछड़ा वर्ग का सभासद नामित नहीं हुआ। अब क्षेत्र के लोगों को समझ नहीं आ रहा कि इसे क्या कहा जाय। राजनीतिक गणित, प्रशासनिक भूल या फिर “अदृश्य पिछड़ा वर्ग सशक्तिकरण योजना”! दिलचस्प बात यह है कि भाषणों में पिछड़ा वर्ग के उत्थान की बात इतनी जोर-शोर से होती है कि लगता है जैसे देश में सबसे ज़्यादा प्रेम अगर किसी से है तो वह पिछड़ा वर्ग ही है। मंच से लेकर माइक तक, हर जगह पिछड़ा वर्ग का नाम बड़े आदर से लिया जाता है। लेकिन जैसे ही कुर्सियाँ बांटने की बारी आती है, प्रेम अचानक इतना विनम्र हो जाता है कि सामने दिखना ही बंद हो जाता है।
बरहज के राजनीतिक गलियारों में अब मज़ाक चल रहा है कि शायद पिछड़ा वर्ग के नेताओं को “मानसिक रूप से नामित” कर दिया गया होगा । कागज़ पर भले न दिखें, लेकिन भावना में तो मौजूद ही होंगे। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नई राजनीतिक तकनीक है “प्रतिनिधित्व का आध्यात्मिक मॉडल”। इसमें समाज के हर वर्ग को सम्मान दिया जाता है, बस सूची में नाम लिखना जरूरी नहीं समझा जाता। वहीं क्षेत्र के जागरूक नागरिक पूछ रहे हैं कि जब मंच से पिछड़ा वर्ग की भागीदारी की बात की जाती है, तो नगर निकायों में नामांकन के समय यह भागीदारी रास्ता क्यों भूल जाती है। फिलहाल बरहज की जनता इंतज़ार कर रही है कि शायद अगली सूची में “पिछड़ा वर्ग प्रेम” भाषणों से निकलकर नामांकन की सूची तक भी पहुंच जाय, तब तक के लिए यह सवाल हवा में तैरता रहेगा । क्या यही है वह बहुचर्चित पिछड़ा वर्ग प्रेम है ?

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments