आगरा (राष्ट्र की परम्परा)l उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग, लखनऊ की दोहरी बेंच द्वारा आगरा में मानवाधिकार मामलों की व्यापक और गंभीर समीक्षा की गई। आयुक्त आगरा मंडल के सभागार में आयोजित इस विशेष सुनवाई में कुल 170 मामलों पर विस्तार से विचार किया गया। इस सुनवाई की अध्यक्षता आयोग के माननीय सदस्य न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा एवं माननीय सदस्य बृज भूषण ने की।
सुनवाई के दौरान आयोग ने मानवाधिकार से जुड़े विभिन्न प्रकरणों को गंभीरता से सुना और कई मामलों का मौके पर निस्तारण किया गया। जिन मामलों में अब तक संबंधित विभागों द्वारा जांच आख्या प्रस्तुत नहीं की गई थी, उन पर आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश दिए।
मानवाधिकार उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस
उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया कि मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयोग का मानना है कि समयबद्ध जांच और निष्पक्ष रिपोर्ट ही पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में सबसे अहम कदम है। इसी उद्देश्य से आयोग द्वारा अधिकारियों को चेतावनी स्वरूप निर्देश दिए गए कि भविष्य में रिपोर्ट में देरी होने पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासनिक सहयोग और समन्वय
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में प्रशासनिक स्तर पर भी व्यापक सहभागिता देखने को मिली।
उक्त अवसर पर—
अपर जिलाधिकारी नगर यमुनाधर चौहान
अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे जुबेर बेग
अपर जिलाधिकारी (न्यायिक/नाजिर) अजय नारायण सिंह
पूनम सिरोही
सहित पुलिस विभाग की ओर से अपर पुलिस उपायुक्त एवं नोडल अधिकारी मानवाधिकार कमिश्नरेट आगरा उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारी कार्यालय आगरा से भूपाल सिंह, विनोद द्विवेदी, संजीत श्रीवास्तव, मदन पाल और सुरेश चतुर्वेदी ने प्रशासनिक सहयोग प्रदान किया। आयोग की ओर से सहायक सचिव श्री आलोक यादव की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही।
पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन कार्यालय सहायक श्री राजेन्द्र प्रसाद दीक्षित द्वारा किया गया।
06 फरवरी को होगी विशेष मानवाधिकार संगोष्ठी
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा 06 फरवरी 2026 को आगरा में एक महत्वपूर्ण मानवाधिकार संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस संगोष्ठी में—
आगरा के समस्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी
विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारी
सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधि
को आमंत्रित किया गया है।
इस संगोष्ठी का उद्देश्य मानवाधिकारों के संरक्षण, जागरूकता और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर खुला संवाद और ठोस रणनीति तैयार करना है। आयोग का मानना है कि प्रशासन, पुलिस और समाज के बीच बेहतर समन्वय से ही मानवाधिकारों की वास्तविक सुरक्षा संभव है।
जनता के लिए संदेश
आयोग ने यह संदेश भी दिया कि आम नागरिक मानवाधिकार से जुड़े मामलों में निडर होकर आयोग से संपर्क करें। आयोग पीड़ितों की आवाज बनकर उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
निष्कर्ष
आगरा में आयोजित यह सुनवाई और आगामी संगोष्ठी उत्तर प्रदेश में मानवाधिकार संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। आयोग की सक्रियता से न केवल लंबित मामलों में तेजी आएगी, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
