सिस्टम की बेरुखी के बीच किसान ने बनाई मिसाल: सरकारी उदासीनता से परेशान होकर अपने खर्च पर बनवा रहे पुलिया

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सदर ब्लॉक के ग्राम पंचायत बागापार, टोला बलरामपुर में सरकारी तंत्र की लापरवाही के बीच एक किसान ने अदम्य जज्बे और आत्मनिर्भरता की अनोखी मिसाल पेश की है। 65 वर्षीय किसान औरंगजेब ने वर्षों से लंबित पुलिया निर्माण की मांग पूरी न होने पर अपने ही खर्च पर डेढ़ लाख रुपये की लागत से पुलिया बनवाना शुरू कर दिया है।

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, सिंचाई नहर पर पुलिया की मांग लंबे समय से की जा रही थी। कई बार ग्राम पंचायत व ब्लॉक स्तर पर प्रस्ताव भेजने की बातें हुईं, लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और विभागीय तालमेल के अभाव में योजना फाइलों तक ही सीमित रह गई।

औरंगजेब ने अपने खेत के पास आवास बनाया था ताकि खेती देखभाल करना आसान हो सके, लेकिन बरसात में नहर पार करने में कीचड़, फिसलन और उफनाते पानी ने परिवार के लिए पहुंचना बेहद कठिन कर दिया। राशन, उपकरण और दैनिक जरूरी सामान ले जाना भी जोखिम भरा होता था।

जब लंबे समय तक किसी अधिकारी ने स्थल निरीक्षण तक नहीं किया, तब किसान ने सरकारी भरोसे बैठने के बजाय खुद समाधान की राह चुनी। उन्होंने जेसीबी, ईंट, सीमेंट, सरिया, गिट्टी और मजदूरों की पूरी लागत खुद वहन करते हुए पुलिया निर्माण की शुरुआत करा दी।

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ग्रामीण अब श्रमदान कर इस कार्य में सहयोग दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि पुलिया बनने के बाद न केवल औरंगजेब बल्कि विजयपुर रोड से जुड़े आसपास के दर्जनों किसानों को भी आवागमन, ढुलाई और सिंचाई में भारी राहत मिलेगी।

औरंगजेब ने भावुक होते हुए कहा—
“मैंने बार-बार कहा कि हमें सिर्फ एक छोटी सी पुलिया चाहिए, पर किसी ने नहीं सुना। इसलिए मैंने तय किया कि अब किसी के भरोसे नहीं बैठूंगा। अपने रास्ते का पुल खुद बनाऊंगा।”

यह घटना सदर ब्लॉक की विकास व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है—
क्या ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जनता को अपनी जेब से खर्च करना पड़ेगा?
क्या योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी?

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Karan Pandey

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