दर्जनभर भूमिहीन परिवार आज भी खुले आसमान तले
सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)सलेमपुर नगर में विकास और गरीब कल्याण को लेकर किए जा रहे दावों की पोल वार्ड नंबर छह की जमीनी हकीकत खोलती नजर आ रही है। रेलवे माल गोदाम के आसपास वर्षों से दर्जनभर से अधिक भूमिहीन परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। न इनके पास अपनी जमीन है और न ही रहने के लिए कोई पक्का आशियाना। प्लास्टिक की चादरों, तिरपाल और बांस-बल्ली से बनी झोपड़ियों में ये परिवार बरसात, ठंड और भीषण गर्मी झेल रहे हैं।करीब पचास लोगों की आबादी वाली इस बस्ती में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं। दिहाड़ी मजदूरी ही इन परिवारों की आजीविका का एकमात्र सहारा है। काम मिला तो चूल्हा जलता है, नहीं मिला तो भूखे पेट रात गुजारनी पड़ती है। बीमारी की स्थिति में इलाज कराना इनके लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। कुछ परिवारों के पास ही आयुष्मान कार्ड है, जबकि अधिकांश लोग सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं।खुले आसमान के नीचे पल रहे बच्चों का भविष्य भी चिंता का विषय बना हुआ है।
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संसाधनों की कमी और आर्थिक तंगी के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई बच्चों को स्कूल जाने की बजाय मजदूरी करनी पड़ती है। अभिभावकों का कहना है कि जब दो वक्त की रोटी जुटाना ही मुश्किल हो, तो बच्चों की शिक्षा पर ध्यान देना बेहद कठिन हो जाता है।बस्ती में रहने वाले शिव सागर जयसवाल का आरोप है कि क्षेत्र के स्थायी मतदाता होने के बावजूद उन्हें आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना, राशन कार्ड, वृद्धावस्था व विधवा पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ नहीं मिला। कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिले। काला देव तिवारी का कहना है कि चुनाव के समय ये परिवार केवल वोट बैंक बनकर रह जाते हैं।वहीं विजयंती देवी और दुर्विजय तिवारी ने प्रशासन से मांग की है कि सर्वे कराकर सभी भूमिहीन परिवारों को आवासीय पट्टा दिया जाए और पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए। इस संबंध में एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने बताया कि लेखपाल को मौके पर भेजकर कंबल व अन्य आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं तथा पात्र परिवारों को योजनाओं से जोड़ने की कार्रवाई की जा रही है।
