एक मुकदमा ऐसा भी जिसमें लेन देन कर फतेहपुर काण्ड की मुख्य अभियुक्त की मां के नाम राजस्व परिषद के निर्देश को अनदेखी कर चढ़ावा दिया खतौनी में छुट्टियों में नाम, पुनः अपने ही आदेश को करना पड़ा निरस्त
देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया जिले की रुद्रपुर तहसील में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। तहसील के न्यायालयों एवं कार्यालयों में लंबित राजस्व वादों के निस्तारण, आदेशों के अमल-दरामद, खतौनी में त्रुटियों के सुधार और कथित अवैध वसूली को लेकर अधिवक्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं। इस संबंध में तहसीलदार रुद्रपुर के कार्यव्यवहार तथा कुछ राजस्व कर्मचारियों पेशकारो, कार्यालयी बाबुओं और कंप्यूटर ऑपरेटरों की भूमिका की जांच कराने की मांग मंडलायुक्त गोरखपुर से की गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि तहसीलदार के अधीन कार्यरत राजस्व कर्मियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के माध्यम से कथित तौर पर अवैध धन उगाही की जा रही है। शिकायत में आरके/एआरके राम आशीष, सत्तार अली तथा कंप्यूटर ऑपरेटर विवेक मद्धेशिया और अजय कुमार का नाम लेते हुए उनकी कार्यप्रणाली की जांच कराने की मांग की गई है।
लंबित मुकदमों और खतौनी संशोधन को लेकर उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि तहसील के विभिन्न न्यायालयों में कई राजस्व वाद लंबे समय से लंबित हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में सामान्य प्रक्रिया से होने वाले कार्यों में भी अनावश्यक देरी की जाती है, जबकि कथित तौर पर प्रभाव या लेन-देन के आधार पर कुछ पत्रावलियों में तेजी दिखाई जाती है। इससे आम वादकारियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि न्यायालयों से पारित आदेशों के बावजूद कई मामलों में परवाना जारी करने और कंप्यूटर खतौनी में आदेशों का अमल-दरामद कराने में देरी हो रही है। खतौनी में दर्ज त्रुटियों के सुधार के लिए आने वाले लोगों को भी कथित तौर पर बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
कुछ कर्मचारी 3 बर्ष पूर्व हुए फतेहपुर काण्ड की जैसे घटना की पुनरावृत्ति कराने में लगे हुए हैं
बादकारियों पीड़ितों का यह भी कहना है तहसील रुद्रपुर के तहसीलदार के कुछ कर्मचारी पेशकार, मोहर्रिर आदि तो फतेहपुर जैसे घटना की पुनरावृत्ति कराने का ठेका ले रखा है , इस मुकदमे का संज्ञान लिया जाए
टी 202605200312778 में तहसीलदार न्यायालय से लम्बित मुकदमा में धनराशि के लेन देन में एक फैसला सुना दिया गया जबकि पीड़ित का कथन है की मेरे द्वारा खेत को रजिस्टर्ड रेहननामा कराने के लिए ले जाकर बैनामा करा लिया गया जिसका बाद सिविल कोर्ट देवरिया में चल रहा है इस बावत जानकारी तसीलदार न्यालय को साक्ष्य के रूप में सवाल जबाव दाखिल है। यही नहीं उक्त नम्बर पर बैंक से लोन भी है जिसमें राजस्व परिषद के निर्देश का खुला उल्लंघन किया गया फैसला भी 3बर्ष पूर्व हुए फतेहपुर कांड के मुख्य अभियुक्त की मां के पक्ष में हुआ। जब जानकारी पीड़ित पक्ष को हुई तो x हैंडल के माध्यम से प्रकरण की जानकारी मुख्यमंत्री जिलाधिकारी आदि संबंधित को कराया, तो आनन फानन में आदेश को निरस्त कर दूसरा आदेश जारी किया गया पर कंप्यूटर बाबू के मिली भगत से अमलदरामद करते उक्त नम्बर पर नाम भी छुट्टियों में चढ़ा दिया गया । शासकीय अधिवक्ता के द्वारा पारित आदेश को कैंसिल कराया गया तो उस आदेश का चढ़ाने के लिय 10 दिवस पीड़ित को चक्कर लगवाया गया तब पीड़ित को उपजिलाधिकारी से आवेदन पत्र दे कर गुहार लगानी पड़ी तो आदेश के 10 दिवस बाद आदेश का अनुपालन किया गया। जांच यदि निष्पक्ष हो तहसील के कर्मचारी ही बड़े अधिकारियों को अर्दब में ले फतेहपुर जैसे घटनाओ जन्म देने की साजिश रच रहे हैं।
अधिवक्ताओं के आंदोलन का भी किया गया उल्लेख
मंडलायुक्त को दिए गए प्रार्थना पत्र में विभिन्न बार एसोसिएशनों द्वारा अनियमितताओं के विरोध में किए जा रहे आंदोलन का हवाला दिया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, तहसील के न्यायालयों और कार्यालयों में कामकाज की कथित खामियों के कारण अधिवक्ताओं और आम नागरिकों में असंतोष बढ़ा है।
संलग्न दस्तावेजों में 15 जून 2026 को जारी पत्र तथा 3 अक्टूबर, 12 अक्टूबर और 28 अक्टूबर 2026 को दिए गए शिकायत पत्रों का उल्लेख है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पहले भी संबंधित अधिकारियों को समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
जांच और दंडात्मक कार्रवाई की मांग
शिकायत में राजस्व वादों के निस्तारण में देरी, न्यायालयों के आदेशों के अनुपालन, खतौनी संशोधन और कर्मचारियों की कथित भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही, यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि पूर्व में दिए गए प्रार्थना पत्रों पर समयबद्ध कार्रवाई हुई होती, तो अधिवक्ताओं और आम नागरिकों को बार-बार शिकायत करने की जरूरत नहीं पड़ती।
अब इस पूरे मामले में मंडलायुक्त गोरखपुर और जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। शिकायत पर जांच के आदेश दिए जाते हैं या संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया जाता है, इस पर लोगों की नजर रहेगी। फिलहाल, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और प्रशासनिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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