अखिल भारतीय मध्यान्ह रसोईया महासंघ ने किया प्रदर्शन

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) अखिल भारतीय मध्याह्न भोजन संघटन रसोईया महासंघ ने विभिन्न मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर धरना दिया और प्रदर्शन किया और मुख्य मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को संबोधित मांग पत्र द्वारा जिलाधिकारी देवरिया को दिया जिसमे इन्होने अपनी मांगे रखी जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश के मध्याहन भोजन योजना में लगभग 4 लाख गरीब, असहाय, विधवा रसोईया कार्यरत हैं। परन्तु पिछली सरकार के गलत नितियों के वजह से रसोईयों पर आय-दिन शोषण, अत्याचार होता रहता है एवं रसोईयों को जीने लायक परिश्रमिक मानदेय न मिलने के कारण रसोईयों व उनका परिवार भूखमरी के कगार पर हैं। जबकि इस सम्बन्ध में उच्च न्यायालय हाईकोर्ट प्रयागराज के द्वारा सरकार को आदेशित किया गया है कि रसोईयों की दशा सुधारी जाय एवं उनकी नितियों पर पुनः विचार किया जाय। न्यायालय द्वारा यह भी आदेशित किया गया है कि रसोईयों को जो वर्तमान में मानदेय दिया जा रहा है, वह बधुआ मजदूरी है। जो संविधान के अनुछेद-23 में प्रतिबन्धित है। कोर्ट के द्वारा सरकार को निर्देश दिया गया है कि प्रदेश के सभी रसोईयों को न्यूनतम वेतन अधिनियम के तहत रसोईयों का न्यूनतम वेतन तय कर 2005 से लेकर अबतक का बकाया वेतन दिया जाय परन्तु इस विषय में अबतक कोई कार्यवाही न करने के वजह से रसोईयाँ बधुआ मजदूर की जिन्दगी जिने के लिए विवस है। इनकी मुख्य मांगे रखी जिसमे इन्होने सरकार को अवगत कराया की रसोईयों के बच्चों का पालन पोषण एवं शिक्षा वर्तमान में मिल रहे मानदेय से नही हो पा रहा है। इसलिए मा० उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये आदेश का पालन करते हुए रसोईयों का न्यूनतम वेतन तय कर 2005 से अबतक का बकाया वेतन दिया जाय।
रसोईयों की नितियों पर पुनः विचार करते हुए रसोईयों नियुक्ति शासनादेश से पाल्य/बच्चा अनिवार्यता समाप्त किया जाय एवं पाल्य / बच्चा न होने पर निकाली गयी रसोईयों को बहाल किया जाय क्योंकि इस योजना में अधिक उम्र की महिलाएं एवं विधवा काफी संख्या में कार्यरत हैं। इस स्थिति में वे पाल्य/बच्चा कहां से और कब तक लाने का कार्य करेगी।रसोईयों की नियुक्ति छात्र संख्या के आधार पर की जाती है। परन्तु जब विद्यालय पर छात्र संख्या कम होती है तो पूर्व से कार्यरत रसोईयों को विद्यालय से हटा दिया जाता है। जबकि छात्र संख्या कम होने में रसोईया की कोई गलती नही होती है। इसलिए छात्र संख्या अनिवार्यता को शासनादेश से समाप्त किया जाय। इस योजना में रसोईयाँ 11 माह कार्य करते हैं। परन्तु हमें मात्र 10 माह का मानदेय दिया जा रहा है। जो न्याय हित में नहीं है इसलिए हमें पूरे सत्र (12माह) का मानदेय दिया जाय।,सोईयों की नियुक्ति मध्याहन भोजन बनाने के लिए हुई है। परन्तु मिड-डे मिल के अलावा दूसरा कार्य भी लिया जाता है। जैसे सफाईकर्मी, चपरासी, माली व विद्यालय स्टाप की बेगारी इत्यादि इसलिए हमसे सिर्फ मध्याह्न भोजन सम्बन्धीत ही कार्य लिया जाय। रसोईया गैस या लकड़ी पर मिड-डे मिल बनाने का कार्य करते हैं जिससे हर वक्त दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती व कुछ जगहों पर दुर्घटना हो भी गयी है इसलिए हम रसोईयों को दस लाख रुपये का निःशुल्क दुर्घटना बीमा कराया जाय।इस दौरान संगीता यादव संगती यादव जिला अध्यक्ष, सुरेन्द्र नाथ गौतम संस्था अध्यक्ष संरक्षक,हरेन्द्र सदस्य,लल्लन पासवान सदस्य,सोनमती सदस्य,शशिप्रभा सदस्य,अनीता देवी,विजय राजभर,मीरा देवी,किरन यादव,
साजीदा साजिदा खातून जिलामंत्री,सदानन्द सदानन्द गोंड,फुफकार,फूलमती,आदि लोग उपस्थित रहे ।

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