Saturday, February 21, 2026
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आख़िर कब तक सरकार,सामान्य वर्ग के बच्चों के साथ करती रहेगी भेदभाव-संतोष शुक्ला

बड़हलगंज(राष्ट्र की परम्परा)
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा रा.गोरखपुर के जिला प्रभारी व सपा के कद्दावर नेता चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र के नेतवार पट्टी गांव निवासी संतोष शुक्ला ने, सोशल मीडिया के माध्यम से प्रेस विज्ञप्ति द्वारा कहां हैं, की उत्तर प्रदेश में पुलिस की भर्ती होने जा रही है,जिसमें सामान्य वर्ग के प्रति जो भेदभावपूर्ण नीति अपनाई जा रही है, उससे मैं आहत हूँ..और उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले का अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा रा.घोर निंदा करता हैं!जब कोविड में हर किसी के तीन साल बर्बाद हुए हैं,तो सामान्य वर्ग को आयु सीमा में छूट क्यों नहीं दी जा रही ? सामान्य वर्ग के पुरुषों के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में आयु सीमा 18 से 22 वर्ष के बीच निर्धारित की गयी है,जबकि ओबीसी,एससी,एसटी पुरुषों के लिए आयु सीमा 18 से 28 वर्ष कर ,आयु में छूट दी गई है, सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए यह 18 से 25 वर्ष के बीच है,जबकि ओबीसी,एससी,एसटी महिलाओं के लिए 6 वर्ष की छूट देकर यह 18 से 31 वर्ष की गई है!अरे कॉन्स्टेबल भर्ती में तो सामान्य,निर्धन घर के ही बच्चे जा रहे हैं, हैं भले ही वो ब्राह्मण ठाकुर कायस्थ क्यों न हों उनसे इतना भेदभाव क्यों ? शुक्ला ने कहां की सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली डबल ईंजन की सरकार को कम से कम महिलाओं से तो भेदभाव नहीं करना चाहिए था! उन्हें तो एक तराजू में तौलना चाहिए! एक तरफ सरकार बेटियों को बेटों के समान कदम से कदम मिलाकर चलने की बात कह रही हैं,वही दूसरी तरफ खुद योजनाओं में भेदभाव वाली नीति अपना कर इन स्लोगन को ठेंगा बताने वाला काम कर रही हैं! आखिर सरकार के पास ऐसा कौन-सा चश्मा हैं, जिसमें दलित और ओबीसी के लड़के 28 साल तक जवान दिखते हैं और सामान्य वर्ग के लड़के 22 साल में ही बूढे़ हो जाते हैं,शुक्ला ने राज्यपाल से मांग किया हैं,की उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में आयु सीमा में संशोधन कर के सभी बच्चों को एक समान दर्जा दीया जायें!

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