Monday, February 16, 2026
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देवरिया में समाजसेवी पर जानलेवा हमला, फर्जी डिग्री वाले अस्पतालों की शिकायत के बाद बवाल

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में कथित रूप से फर्जी डिग्री के सहारे संचालित निजी अस्पतालों के खिलाफ आवाज उठाने वाले एक समाजसेवी पर जानलेवा हमले का मामला सामने आया है। पीड़ित ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।

शिकायत के बाद हमला

थाना भलुअनी क्षेत्र के तेनुआ चौबे निवासी समाजसेवी दिग्विजय चौबे का आरोप है कि उन्होंने जिले के कुछ निजी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों की डिग्रियों को लेकर शासन और सीएमओ कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी।
उन्होंने जिन अस्पतालों का नाम लिया है, उनमें गौरव हॉस्पिटल, गायत्री हॉस्पिटल और जलपा हॉस्पिटल शामिल हैं। आरोप है कि शिकायत के चलते रंजिशन 15 फरवरी 2026 को उन पर हमला किया गया।

रास्ता रोककर मारपीट का आरोप

पीड़ित के अनुसार, वह परिवार के साथ सोमनाथ मंदिर से दर्शन कर लौट रहे थे। सिविल लाइन क्षेत्र स्थित एक मिष्ठान भंडार के पास उन्हें कथित तौर पर धमकी दी गई।
आरोप है कि सरौरा चौराहे के पास 15–20 लोगों ने उनकी कार (UP 32 LN 5165) को रोक लिया, वाहन से खींचकर मारपीट की, नगदी छीन ली और कार को क्षतिग्रस्त कर दिया। उनकी पत्नी के साथ अभद्रता का भी आरोप लगाया गया है।

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पुलिस पर भी सवाल

घटना के बाद परिवार रुद्रपुर कोतवाली पहुंचा। दिग्विजय चौबे का आरोप है कि वहां भी उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला और उलटे उन्हें ही एक अन्य मामले में फंसाने की धमकी दी गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

बताया जा रहा है कि 22 जनवरी को सीएमओ कार्यालय ने संबंधित शिकायत पर संज्ञान लेने की बात कही थी। ऐसे में अब जांच की प्रगति और शिकायतकर्ता की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

शासन से सुरक्षा की मांग

समाजसेवी ने उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजकर सुरक्षा की मांग की है और आरोपितों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि उनके या उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित लोगों की होगी।

समाचार लिखे जाने तक पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका था। प्रशासन का कहना है कि यदि तहरीर दी गई है तो मामले की जांच कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।

अब आगे क्या?

पूरा मामला गंभीर आरोपों से जुड़ा है—एक ओर फर्जी डिग्री के सहारे अस्पताल संचालन का दावा, दूसरी ओर शिकायतकर्ता पर हमले का आरोप। अब नजर जिला प्रशासन और पुलिस की आगामी कार्रवाई पर टिकी है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और आरोपों की सच्चाई क्या सामने आती है।

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