संगम तट पर आस्था का महासंगम: माघ मेला शुरू, पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा)। संगम की पावन रेती पर बसे तंबुओं के नगर में माघ मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया है। पहले मुख्य स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के अवसर पर लाखों श्रद्धालु संगम तट पर एकत्र होकर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। स्नान का क्रम लगातार जारी है और पूरा मेला क्षेत्र भक्तिरस में सराबोर नजर आ रहा है।

44 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक माघ मेले के दौरान 12 से 15 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की संभावना है। वहीं, करीब 20 लाख कल्पवासी तीन जनवरी से एक फरवरी तक संगम तट पर कल्पवास करेंगे।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चाक-चौबंद इंतजाम

मेला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। 10 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ ही एंटी टेररिस्ट स्क्वायड (ATS) की टीमें भी सुरक्षा मोर्चे पर डटी हैं। मेला क्षेत्र में 17 अस्थायी थाने और 42 पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं।

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सात सेक्टरों में बंटा माघ मेला, टेंट सिटी मॉडल पर विकास

माघ मेला क्षेत्र को सात सेक्टरों में विभाजित किया गया है। महाकुंभ मॉडल पर आधारित टेंट सिटी की तर्ज पर मेले का विकास किया गया है। लगभग 800 हेक्टेयर में फैले मेला क्षेत्र में 126 किलोमीटर लंबे मार्ग चेकर्ड प्लेट से तैयार किए गए हैं।

नावों पर एलईडी लाइट से सजी रंगीन छतरियां, संगम जल में सात रंगों की रोशनी वाले फव्वारे और घाटों पर कलर-कोडेड चेंजिंग रूम रात में अलौकिक दृश्य प्रस्तुत कर रहे हैं।

पौष पूर्णिमा से कल्पवास का आरंभ

पौष पूर्णिमा के साथ ही कल्पवासियों का व्रत प्रारंभ हो गया है। आचार्य चौक, दंडीवाड़ा, खाक चौक, तीर्थ पुरोहितों और प्रमुख आध्यात्मिक संस्थाओं के शिविर पूरी तरह तैयार हैं। पहले पुण्य स्नान के साथ संगम तट पर आस्था, परंपरा और संस्कृति का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है।

शहर से मेला क्षेत्र तक रंगीन संकेतक और सुगम यातायात

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर से मेला क्षेत्र तक अलग-अलग रंगों के संकेतक बोर्ड और हेल्प डेस्क लगाए गए हैं। परिवहन व्यवस्था के तहत 3800 रोडवेज बसें, 75 ई-बसें और 500 से अधिक ई-रिक्शा तैनात किए गए हैं।

अग्नि सुरक्षा के लिए 17 फायर स्टेशन, जबकि स्वच्छता व्यवस्था के लिए 3300 सफाईकर्मी मेला क्षेत्र में तैनात हैं।

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महाकुंभ अनुभवों पर आधारित व्यवस्थाएं

महाकुंभ के अनुभवों के आधार पर इस बार माघ मेले की व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं। संगम क्षेत्र को जोड़ने के लिए सात पांटून पुल, जबकि फाफामऊ क्षेत्र में दो अतिरिक्त पांटून पुल बनाए गए हैं। सभी पुलों को दिशा-विशेष के अनुसार आरक्षित किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारू बनी रहे।

Karan Pandey

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