गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में आगामी शैक्षणिक सत्र 2025-26 की समुचित योजना, अकादमिक गुणवत्ता में वृद्धि तथा अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल के अंतर्गत कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से संबद्ध निदेशकों, समन्वयकों एवं संकाय सदस्यों के साथ संवाद सत्रों का आयोजन किया गया। उक्त संवाद सत्रों में कृषि एवं प्राकृतिक विज्ञान संस्थान, इंजीनियरिंग संस्थान, फार्मेसी संस्थान, व्यवसाय प्रबंधन विभाग, विधि विभाग तथा वाणिज्य विभाग (बैंकिंग एवं इंश्योरेंस) के प्रतिनिधियों द्वारा सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की गई। इस अवसर पर विभागीय विकास, पाठ्यक्रम उन्नयन, प्रवेश प्रक्रिया, शोध एवं अधोसंरचना विषयों पर गहन विमर्श संपन्न हुआ। प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, छात्र-केंद्रित एवं तकनीक-सक्षम बनाने हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग, प्रचार-प्रसार में वृद्धि एवं छात्र सहायता तंत्र के सशक्तीकरण पर विस्तार से चर्चा की गई। समस्त पाठ्यक्रमों को नवीनतम औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप अद्यतन करते हुए इंटर्नशिप, परियोजनाओं, केस स्टडी एवं औद्योगिक सहभागिता को अनिवार्य बनाने की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। इंजीनियरिंग एवं फार्मेसी संस्थानों में अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित प्रयोगशालाओं की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया, जिससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त हो सके। डिप्लोमा धारकों एवं अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों से जुड़े छात्रों को उच्चतर वर्षों में प्रवेश प्रदान करने हेतु पार्श्व प्रवेश नीति लागू करने पर सहमति व्यक्त की गई। कृषि एवं प्राकृतिक विज्ञान संस्थान को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से मान्यता प्राप्त कराने की दिशा में ठोस कार्ययोजना पर विमर्श किया गया, जिससे पाठ्यक्रम की गुणवत्ता सुनिश्चित हो एवं छात्रों को राष्ट्रीय स्तर के अवसर प्राप्त हो सकें। विधि एवं इंजीनियरिंग विभागों के लिए नवीन भवनों के निर्माण, विधि पुस्तकालय के नवीनीकरण तथा परिसरों में मरम्मत एवं अनुरक्षण कार्यों की प्राथमिकता तय की गई। कुलपति प्रो. पूनम टंडन द्वारा समस्त शिक्षकों से शोध, नवाचार-आधारित शिक्षण, पाठ्यक्रम विकास एवं छात्र मार्गदर्शन में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने अपने वक्तव्य में कहा, “इन संवाद सत्रों के माध्यम से हमें विभागीय आवश्यकताओं की सम्यक जानकारी प्राप्त हुई है। हमारा उद्देश्य एक ऐसा शैक्षणिक वातावरण निर्मित करना है, जो गुणवत्तापूर्ण, नवाचार-सक्षम एवं उद्योग-संरेखित हो। सभी प्राप्त सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए उन्हें क्रियान्वित किया जाएगा तथा आवश्यक प्रशासनिक समर्थन भी सुनिश्चित किया जाएगा।” सभी विभागों को विस्तृत प्रस्ताव एवं क्रियान्वयन की समय-सीमा सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रत्येक प्रस्ताव की समयबद्ध समीक्षा की जाएगी एवं यह सुनिश्चित किया जाएगा कि समस्त योजनाएँ प्रभावी ढंग से लागू हों।
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