
नगर पालिका परिषद मऊ नाथ भंजन मऊ द्वारा कराया जा रहा बाल श्रम
मऊ ( राष्ट्र की परम्परा )
जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल निषाद ने मऊ नगर पालिका पर आरोप लगाया है कि नगर क्षेत्र में नगर पालिका परिषद द्वारा नाबालिक बच्चों से कूड़ा उठवाया जा रहा है और छोटे बच्चों से झाड़ू लगवाया जा रहा है । अधिशासी अधिकारी ( ईओ ) दिनेश कुमार सहित नगर पालिका के सफाई इंस्पेक्टर द्वारा नगर क्षेत्र में सफाई और कचरा प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए छोटे मासूम बच्चों से बाल श्रम कराया जा रहा है ।
नगर पालिका के ईओ दिनेश कुमार सहित नगर क्षेत्र के सफाई इंस्पेक्टर की लापरवाही की वजह से नगर के आजमगढ़ मोड़ स्थित कूड़ा डंपिंग यार्ड पर बच्चों द्वारा कूड़ा उठवाने के साथ छोटे बच्चों से सड़कों पर झाड़ू लगाया जा रहा है । आखिर किसके अनुमति से यह बच्चे कूड़ा उठा रहे हैं और ये बच्चे कैसे सड़कों पर झाड़ू लगा रहे हैं । जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल निषाद ने आगे कहा है कि यह बेहद शर्मनाक है इस संबंध में नगर पालिका के सीईओ और सहित ईस्पेक्टर के ऊपर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए । हम इस संबंध में वे दीवानी न्यायालय में एक जनहित याचिका प्रेषित करेंगे ।
अधिवक्ता गोपाल निषाद ने इस पूरे मामले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह मऊ जैसे जिले के लिए कलंक समान है । उन्होंने कहा कि यह केवल ईओ की लापरवाही नहीं बल्कि मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। गोपाल निषाद ने जिलाधिकारी प्रवीण मिश्र से इस विषय पर संज्ञान लेने और सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
गोपाल निषाद कहते हैं कि ऐसे बच्चों के परिवार संभवतः आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं, और उनकी यही मजबूरी बच्चों को मजदूरी के लिए भेजने पर विवश कर रही है। लेकिन सरकार और प्रशासन का यह दायित्व है कि ऐसे परिवारों को सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं प्रदान करे ताकि बच्चों को स्कूल की जगह कूड़ा बीनने के लिए मजबूर न होना पड़े ।
वहीं बताया जा रहा है कि सफाई के ठेके में लगे कुछ ठेकेदार बच्चों से काम कराने में संलिप्त हैं। प्लास्टिक कचरा जैसे पदार्थों को इकट्ठा कर महंगे दामों में बेचा जा रहा है, जिससे ठेकेदारों को अच्छा मुनाफा हो रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या नगर पालिका इस प्रक्रिया से अनजान है या जानबूझकर आंखें मूंदे बैठी है?
EO दिनेश कुमार के विरुद्ध जांच कराई जाए।
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल निषाद ने दोषी ठेकेदारों पर बाल श्रम अधिनियम के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की मांग की है नगर पालिका को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं कि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो । यह मामला मऊ जैसे प्रमुख जिले के लिए अत्यंत शर्मनाक और चेतावनी भरा है। यदि इस पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह प्रशासन की संवेदनहीनता और विफलता का जीता-जागता उदाहरण बन जाएगा ।
