Friday, February 20, 2026
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भारत तिब्बत समन्वय संघ ने देवभूमि से भरी हुंकार

  • कैलाश मनसरोवर की मुक्ति और तिब्बत की स्वतंत्रता के लिए

हरिद्वार/उत्तराखंड (राष्ट्र की परम्परा)। भारत तिब्बत समन्वय संघ एवं शिवालय संरक्षण समिति की संयुक्त राष्ट्रीय बैठक देवभूमि हरिद्वार स्थित श्री तुलसी मानस मंदिर में संपन्न हुई। दो दिवसीय चिंतन-मंथन में कैलाश मनसरोवर की मुक्ति के लिए पूरे देश के जुझारू पुरोधा एकत्र हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हुकम चंद सांवला ने एक सच्चे हिन्दू की परिभाषा बताते हुए कहा कि “भारत की आस्था का केंद्र दो ही बातों पर टिका हुआ है एक है मंदिर, दूसरा है गाय। जब तक हम मंदिर और गाय की रक्षा-सुरक्षा नहीं करेंगे तब तक हम भारत की रक्षा नहीं कर सकते, अपने अस्तित्व की रक्षा नहीं कर सकते। देश में बढ़ती आत्महत्याओं का कारण जर्सी गाय भी है। क्योंकि हर जानवर के शरीर का तापमान अलग-अलग होता है और देशी गाय के मुकाबले जर्सी गाय के शरीर का तापमान हमारे अनुकूल नहीं।
कार्यक्रम को अखिल भरतीय शिवालय संरक्षण समिति के राष्ट्रीय संरक्षक उदय सिंह राजे होलकर, शिवालय संरक्षण समिति के बाबा परमहंस, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सूर्यांश, नवीन अग्रवाल, उद्योगपति पाहवा, वंदना स्वामी ने भी उद्घाटन सत्र में अपने विचार व्यक्त किए।
उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता राम कुमार सिंह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व संचालन राष्ट्रीय महिला मंत्री राजो मालवीय और आभार ज्ञापन बैठक की सूत्रधार आशु गोयल ने किया।
मां गंगा की गोद में बसे हरिद्वार की पावन धरा पर भारत तिब्बत समन्वय संघ के केंद्रीय संयोजक हेमेंद्र प्रताप सिंह तोमर, राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफ़ेसर प्रयाग दत्त जुयाल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम कुमार सिंह, प्रोफेसर विवेक गुरु, उत्तर क्षेत्रीय संयोजिका प्रकाशन प्रभाग गुरप्रीत कौर सैनी ने सहित राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अलावा, उत्तर क्षेत्रीय, राज्य स्तरीय एवं ज़िला स्तरीय कार्यकर्ता शामिल हुए।
इसके पूर्व संघ के लोगों ने प्रातः काल देवनगरी में प्रभात फेरी निकाली। जिसमें भगवान भोलेनाथ, मां गंगा एवं प्रभात फेरी में आने वाले सभी मंदिरों के समक्ष कैलाश मानसरोवर की मुक्ति की प्रार्थना करते हुए मां गंगा के चरणों में घाट पर जाकर सभी कार्यकर्ताओं ने भगवान भोलेनाथ एवं मां गंगा को शपथ दिलाई कि वे स्वयं ही दुष्ट चीन के चंगुल से कैलाश मानसरोवर को मुक्त कराएं और चाइनीज समानों के बहिष्कार का नारा बुलंद किया।

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