महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। नौतनवां तहसील क्षेत्र में त्रिनेत्र योजना के तहत सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से सभी ग्राम पंचायतों में मौजूद सार्वजनिक भीड़-भाड़ और संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। इस योजना का उद्देश्य अपराधों पर नजर रखना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा करना था। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह योजना अब फेल होती दिख रही है। बताते चलें कि गांवों में लगाए गये कैमरे अधिकांश जगहों पर खराब पड़े हैं। किसी का कनेक्शन कट चुका है, तो कुछ कैमरे तकनीकी खराबी के कारण काम नहीं कर रहे हैं। कई स्थानों पर तो कैमरे मात्र दिखावे के लिए ही लगे हैं, जिनसे कोई निगरानी नहीं हो रही। ऐसे में सुरक्षा का जो ढांचा तैयार किया गया था, वह पूरी तरह से चरमराने लगा है।सबसे गंभीर मुद्दा यह है कि इन कैमरों के मेंटेनेंस के नाम पर हर महीने सरकारी फंड निकाला जा रहा है जबकि हकीकत यह है कि कैमरे महीनों से बंद पड़े हैं। ग्राम पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी और संबंधित ठेकेदार कागजों में फर्जी मेंटेनेंस दिखाकर सरकारी धन का बंदरबांट कर रहे हैं। जिसको लेकर लोगों मे नाराजगी व्यप्त है। कैमरे नहीं चलने से
गांवों में अपराध बढ़ रहे हैं, चोरी और अवैध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाए गए ये कैमरे अब किसी काम के नहीं रहे। ऐसे में स्थानीय लोग प्रशासन से इस भ्रष्टाचार की जांच कराने और दोषियों पर कार्यवाही करने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीण राजेन्द्र, हरिश्चन्द्र, मकबूल, अरमान,फ़ैज़ ,गुलाब चन्द, राजाराम, विजय, शत्रुघ्न ,महेश ,फूलदेव आदि का कहना है कि लगे कमरों की नियमित जांच और मरम्मत सुनिश्चित की जाए। धोखा-धड़ी में शामिल अधिकारियों और जिम्मेदारों पर सख्त कार्यवाही होने के साथ स्थानीय निगरानी समिति बनाई जाए, जो कैमरों की स्थिति की रिपोर्ट दे तथा कैमरों को डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जाए ताकि जिला प्रशासन सीधे निगरानी कर सके।अगर प्रशासन समय रहते इस ओर ध्यान नहीं देता, है तो न केवल सरकार की योजना विफल होगी, बल्कि क्षेत्र में लूट खसोट, अपराध,चोरी आदि की घटनाएं दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जायेगी।
सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए कैमरे हुए बेमतलब
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