Thursday, March 5, 2026
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संवाद और सहनशीलता से बचेंगे परिवारिक रिश्ते: डॉ. अनीता अग्रवाल

  • मिशन शक्ति के अन्तर्गत समाजशास्त्र विभाग में आयोजित हुआ व्याख्यान

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा मिशन शक्ति फेज-5 के अंतर्गत ‘रिजॉल्विंग फैमिली डिस्प्यूट: ए प्रैगमेटिक अप्रोच’ विषयक विशिष्ट व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि स्थायी लोक अदालत की सेवानिवृत न्यायाधीश एवं फ़ैमिली काउंसलर डॉ. अनीता अग्रवाल रहीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. अनीता अग्रवाल ने कहा कि संवाद और सहनशीलता से परिवारिक रिश्ते को बचाया जा सकता है। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि पारिवारिक मामलों में स्थिति विवाद तक न पहुंचे। पारिवारिक रिश्तों में गांठ न पड़े। पारिवारिक संबंधों में सबसे आवश्यक प्रभावी संवाद का होना है। संवाद करते समय शालीनता और गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। संवादहीनता से समस्या को बढ़ावा मिलता है।
अपनी बात को आगे बढ़ते हुए उन्होंने कहा की समस्या की मूल बात को समझने से समाधान के रास्ते खुलते हैं। नजदीकी संबंधों में काउंसलर की राय लेना उचित होता है। काउंसलर पक्षपात रहित होता है। काउंसलिंग से अच्छे परिणाम सामने आते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. संगीता पाण्डेय ने करते हुए कहा कि समाज में परिवार और विवाह जैसी महत्वपूर्ण संस्थाएँ संकट में हैं। जिसे बचाने के सार्थक प्रयास करने होंगे। महिला का सशक्त होना बहुत ज़रूरी है, लेकिन ज़िम्मेदारी भी बड़ी है। परिवार और विवाह को बचाने में महिलाओं की ज़िम्मेदारी और भूमिका महत्वपूर्ण है। इसे महिलाओं को समझना होगा।
विभागाध्यक्ष प्रो. अनुराग द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि समाज में महिलाओं को लेकर सकारात्मक बदलाव आ रहा है। युवा विद्यार्थियों विशेषकर समाजशास्त्र के अध्येताओं को पढ़ाई के साथ पारिवारिक समस्याओं के निदान को लेकर भी सलाहकार की भूमिका निभानी चाहिए।
मिशन शक्ति फेस 5 की नोडल ऑफिसर प्रो. विनीता पाठक ने मिशन शक्ति कार्यक्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और सरकार की भूमिका में सहयोग करना है।
कार्यक्रम का संचालन दीपेंद्र मोहन सिंह ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पवन कुमार ने किया। इस अवसर पर अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो.अनुभूति दुबे, रुसा समन्वयक प्रो शिवाकांत सिंह, प्रो. अंजू, डॉ. मनीष पांडेय, श्रीप्रकाश प्रियदर्शी एवं अंग्रेजी विभाग के डॉ. आमोद राय सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं परास्नातक के विद्यार्थीगण मौजूद रहे।

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