Thursday, February 19, 2026
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विद्यालय परिसर में छात्र को कुत्ता काटने की खबर को अभिभावक ने बताया झूठा व भ्रामक

रायसेन/मध्य प्रदेश (राष्ट्र की परम्परा)।रायसेन जिले के दीवानगंज के शासकीय प्राथमिक शाला अम्बाड़ी के कक्षा दूसरी के छात्र तनिष्क प्रजापति पर आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। यह घटना विद्यालय परिसर से करीब 400 मीटर दूर शिव मंदिर के पास घटित हुई। कुछ लोगों द्वारा इस घटना को विद्यालय परिसर में होने की झूठी कहानी रची गयी। जबकि अभिभावक द्वारा शिव मंदिर के पास घटना होने की जानकारी दी गई है। अभिभावक ने परिसर के भीतर हुई घटना को झूठा व भ्रामक बताया है।

आपको बता दें कि प्राथमिक शाला अम्बाड़ी के कक्षा दूसरी का छात्र तनिष्क प्रजापति कक्षा सातवीं में पढ़ने वाले अपने भाई विक्रम के साथ विद्यालय आ रहा था। विद्यालय से लगभग 400 मीटर दूर शिवमंदिर के पास एक आवारा कुत्ते ने अचानक तनिष्क पर हमला बोल दिया जिस पर बड़े भाई ने बहादुरी दिखाते हुए उसे ईंट-पत्थर व डंडे से मारकर भगाया। घटना की जानकारी होते ही परिवार के लोग छात्र को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सांची पहुंचे। मंदिर के पास शोर शराबा सुनकर व भीड़ देखकर शिक्षक भी मौके पर पहुंचे। छात्र के साथ हुई घटना की जानकारी होने पर शिक्षक तत्काल अस्पताल पहुंचे जहां उन्होंने छात्र को रेबीज का इंजेक्शन लगवाया। इसके बाद छात्र को लेकर विदिशा मेडिकल कॉलेज पहुंचे। विदिशा में इलाज के बाद शिक्षक व अभिभावक छात्र को लेकर घर पहुंचे। फिलहाल छात्र पूरी तरह स्वस्थ है।

स्कूल गेट पर ग्रामीणों द्वारा फेंका जाता है कूड़ा व अपशिष्ट

पड़ताल मे पता चला कि ग्रामीणों द्वारा विद्यालय परिसर में ही पहले कूड़ा व अपशिष्ट पदार्थ फेंका जाता था। विभाग द्वारा विद्यालय में फेंसिंग और गेट लगवा दिया गया। विद्यालय में गेट व फेंसिंग हो जाने के बाद ग्रामीणों द्वारा अब कूड़ा व अपशिष्ट विद्यालय के गेट पर फेंका जाने लगा। कई बार स्वच्छता अभियान चलाया गया। ग्रामीणों को स्वच्छता व स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी दी गई। बावजूद इसके अब भी विद्यालय के गेट के बाहर ही ग्रामीणों द्वारा अपशिष्ट पदार्थ व कूड़ा फेंका जाता है। अपशिष्ट पदार्थ व सड़ी गली चीज़ों के चलते आवारा पशुओं का जमावड़ा विद्यालय के आस पास लगा रहता है। इसके चलते आसपास क्षेत्र में दर्जनों आवारा पशु घूमते रहते हैं। कूड़े व अपशिष्ट को यदि नहीं हटाया गया तो ऐसी घटनाएं भविष्य में भी हो सकती हैं। इसमें ग्रामीणों के सहयोग की जरूरत है।

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