Thursday, February 19, 2026
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योग एवं व्यवसाय दोनों में सहकारिता होनी चाहिए: प्रो. हरेन्द्र कुमार सिंह

व्यवसाय का लक्ष्य है उचित लाभ अर्जन तथा सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन: प्रो. हरेन्द्र कुमार सिंह

गोरक्षनाथ शोधपीठ में योग कार्यशाला का तीसरा दिन

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर स्थित महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ द्वारा कुलपति प्रो. पूनम टण्डन के संरक्षण में चल रहे सप्तदिवसीय ग्रीष्मकालीन योग कार्यशाला ’योग एवं आजीविका’ मे शनिवार को योग प्रशिक्षण के तीसरे दिन भी प्रतिभागियों की काफी संख्या रही।
योग प्रशिक्षण डा. विनय कुमार मल्ल के द्वारा स्नातक, परास्नातक आदि के लगभग 70 विद्यार्थीयों एवं अन्य लोगों को योग कराया गया।
दोपहर मे आनलाइन माध्यम से योग एवं व्यवसाय विषय पर आयोजित कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य अतिथि के स्वागत के साथ शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशलनाथ मिश्र के द्वारा हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. हरेन्द्र कुमार सिंह, अधिष्ठाता, वाणिज्य संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी रहे।
उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि व्यवसाय का लक्ष्य है उचित लाभ अर्जित करना तथा सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन करना। योग एवं व्यवसाय दोनों में सहकारिता होनी चाहिए। योग के व्यवसायीकरण में स्वामी रामदेव का महत्त्वपूर्ण योगदान है।
प्रो. सिंह ने महात्मा गांधी की चर्चा करते हुए कहा कि साध्य और साधन दोनों में सुचिता होनी चाहिए।
आनलाइन व्याख्यान में कार्यक्रम का संचालन शोधपीठ के रिसर्च एसोसिएट डॉ. सुनील कुमार द्वारा किया गया। शोधपीठ के सहायक निदेशक डॉ. सोनल सिंह द्वारा मुख्य वक्ता एवं समस्त श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। शोधपीठ के सहायक ग्रन्थालयी डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, शोध अध्येता हर्षवर्धन सिंह, डॉ. कुंवर रणंजय सिंह, प्रिया सिंह, चिन्मयानन्द मल्ल आदि उपस्थित रहे। विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के साथ ही विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के आचार्य सहित डॉ. देवेन्द्र पाल, डॉ. श्रीनिवास मिश्र आदि जुड़े रहे।

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